२०२० केर मौका कतेक सार्थक – मिथिलावाद सन्दर्भित प्रवीण संस्मरण

विचार-संस्मरण

– प्रवीण नारायण चौधरी

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 आ मिथिलावाद

प्रवीण संस्मरण
तारीख 10 दिसम्बर 2012 – स्थान जन्तर मन्तर, नई दिल्ली, भारत के राजधानी, प्रयोजन मिथिला राज्य पुनर्स्थापना हेतु भारतीय संघ सँ मांग आ 1 दिवसीय धरना, नेतृत्व डॉ धनाकर ठाकुर आ संग सहयोगी प्रो. कृपा नन्द झा, संस्थापक अखिल भारतीय मिथिला पार्टी आर एहि वर्ष बिहार राज्य गीत में मिथिला केर घोर उपेक्षा उपरान्त मिथिला अलग राज्य बनय एकर समर्थन केर हमर प्रथम वर्ष, एहि धरना में हमर युवा मित्र आ राजनीतिक अभियानी सभ सँ सहभागिता केर अपील संग नीक सहभागिता सँ राज्य आंदोलन में सङ्गोर केर दिन।
जन्तर मन्तर पर डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू केर अगुवाई में अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति केर अनशन जे पार्लियामेंट केर हरेक सेशन केर आरम्भ तिथि पर पिछला कतेको वर्ष सँ होइत आबि रहल अछि ताहि में सेहो व्यक्तिगत सहभागिता पूर्वहु में दैत आंदोलन केर मर्म बुझि रहल छलहुँ। वर्ष धरि 2012 छल। 2011 धरि अलग राज्य केर हम अर्थ साफ नहि बुझैत रही, आ न समर्थन करैत रही, लेकिन बाद में मर्म बुझलहुँ आ तदोपरान्त संग तक देबाक समर्थन देलहुँ।
2013 त मानू मिथिला राज्य लेल क्रांतिकारी गतिविधि सँ भरल वर्ष सिद्ध भेल। कवि एकान्त केर 4 दिवसीय अनशन, अनूप मैथिल व कौशल कुमार केर नेतृत्व में मिथिला राज्य निर्माण यात्रा करैत 10 जिला में 10 दिन जनजागरण अभियान, फेर 5 दिनक दोसर यात्रा, फेर तेसर यात्रा, दरभंगा विश्वविद्यालय, आकाशवाणी, बहेड़ा अनुमंडल पर धरना, रसियारी वेदान्त भूमि पर डॉ लखन बाबू के मूर्ति आगू पदाधिकारी शपथ ग्रहण, बिठौली जनसभा, ग्रामीण जागरण यात्रा, वृहत समन्वय हेतु संयुक्त मिथिला राज्य संघर्ष समिति गठबंधन पुनरुत्थान, जानकी सम्बल छलीह, 2013 जीवनक सर्वाधिक महत्वपूर्ण वर्ष छल मिथिला राज्य आंदोलन में।
2014, भारत मे राजनीतिक परिवर्तन केर एक अत्यधिक महत्वपूर्ण वर्ष, विश्वनेता नरेन्द्र मोदी जी केर राष्ट्रीय नेतृत्व निर्माण केर आरम्भविन्दु। राजनीतिक सूझबूझ आ रणनीति में एतय सँ भयानक मनभेद सोझाँ आयब शुरू भेल, हमर रुचि मिथिला राज्य आंदोलन सँ कटि गेल, कारण हम राजनीतिक स्वार्थ लेल नहि मिथिला केर ऐतिहासिकता आ मैथिल पहिचान लेल नेपालक वासिन्दा रहैत सिर्फ बाहरी सहयोग लेल छलहुँ, राजनीतिक महत्वाकांक्षी नहि अपितु एक सचेतक केर भूमिका में रही। हँ, विराटनगर मिथिला भीतर रहलाक कारण दिल्ली या मुम्बई सँ बेसी नजदीक रही। मोदीजी पीएम बनलाक बाद हम साईंधाम दिल्ली सँ 14 सितम्बर सँ मैथिली महायात्रा मार्फ़त भाषा-संस्कृति जनजागरण में प्रवेश कयल आर ई यात्रा क्रमशः भारत आ नेपालक कतेको स्थान पर सिर्फ पहिचान आ सृजनकर्म केँ बढ़ेबाक दृष्टि सँ कयलहुँ। ई आइ धरि जारी अछि।
तखन आयल 2015, संजय मिश्रा (महासचिव, अभामिपा) ओतय बहिनक विवाह सीतामढ़ी के गांव में आ दरभंगा मुख्यालय में राजेश झा (महासचिव, मिथिला राज्य निर्माण सेना) केर अनुज राकेश जीएस गुरुक विवाह, दुनू में सहभागी भेलहुँ। ताहि राति मिरानीसे केँ फेर सक्रिय करबाक सहमति बनल। एक बेर फेर रणनीति बनल। पटना में चिंतन शिविर लागल। सब समर्पित जुटलहुँ। राष्ट्रीय अधिवेशन नवम्बर में करबाक निर्णय भेल। एम्हर नोटबन्दी आ ओम्हर हमरा सभक अधिवेशन, भेल कोहुना। नेता चयन भेल लेकिन अदूरदर्शी आ हमर सोच विपरीत कतेको निर्णय किछु महत्वाकांक्षी सहयात्री लोकनिक जिद्द पर भेल। बुझले बात छल, ओ किछुए समय मे महत्वहीन भ गेल। 2016 करीब 8 मास केर अटूट विश्वास जिद्द में फिनिश्ड! भ गेल। हमर यात्रा ओतय समाप्त।
आब 2017 सँ 2020 आबि गेल अछि। 2016 केर फेल्योर 2020 केर टारगेट केँ नष्ट कय देलक। तखन महत्वाकांक्षी मित्र सब अपन अपन राग निरन्तर अलापि रहला अछि। मुदा हमरा तेहेन कोनो खास दमदार आ दूरगामी परिणाम आओत से नहि लागि रहल अछि। जानथि जानकी! 2016 में डॉ रंगनाथ ठाकुर केँ नेतृत्व देबाक आ जाहि नारा संग आगू बढ़बाक बात भेलैक, ताहि में कतेको लोक जानकी जीक नाम लैत काज गलत कयलखिन। हुनका सब केँ अपन नीयत अनुसार भोग भोगहे टा पड़तन्हि। निरपेक्षता छोड़िकय पक्षपात करबाक दुर्दशा मिथिला पर कतेक पड़त से त नहि कहब, लेकिन गिरगिटिया रंग अपनाकय जय मिथिला जय जानकी के नारा दैत पद पाबि पदक गरिमा धूमिल करयवला मिथिलावादी शापित रहता ई हम ठोकिकय कहि सकैत छी।
आइ एक मित्र जे हाल एक राजनीतिक समूह केर नेतृत्व में छथि से मेनिफेस्टो पठेलाह। पढ़ि रहल छी। लगभग डेढ़ वर्ष पहिने एक वरिष्ठ मिथिलावादी नेता फेसबुक पर काफी बहस कयने छलाह आ हमरे ऊपर कय मनगढ़ंत आरोप लगेने छलाह, हमर व्यक्तिगत जीवनशैली पर पर्यन्त रंग बिरंगक बात कयने छलाह, बदला में हम हुनका चुनौती देने रही जे एहि बुद्धि विवेक सँ अहाँ पार्टी चलायब आ मिथिला लेल एको डेग बढिकय देखायब से असम्भव अछि। हमरा नहि पता, गछल चुनौती अनुसार कम सँ एको जिलाक सब पंचायत धरि हुनक दल केर संगठन ठाढ़ भेल आ कि नहि, लेकिन हम फेर ठोकिकय कहि सकैत छी जे 2020 त छोड़ू, 2025, 2030 आ आगू कहियो ओहि बुद्धि ज्ञान सँ किछु करब सम्भव होयत। हँ, हम ओहि सब सहयोगी प्रति कर जोडिकय क्षमाप्रार्थना करैत छी जे एक बेर के अनुरोध में आजीवन सदस्यता लेलनि, जानकी जी अहाँक ओहि सहयोग के प्रतिफल नीक अवश्य देती। हम लेकिन लज्जित छी। हमर सोच हारि गेल। लेकिन नैतिक बल हमर 10 गुना बढ़ि गेल जे सियारपंथ कथमपि नहि चलि सकैत अछि। सत्य आ निरपेक्ष केर वगैर कियो एको डेग नहि घुसैक सकैत अछि।
अन्त में, 2020 परिणाम देबयवला वर्ष टार्गेटेड छल। अफसोस, से नहि भ सकल। मिथिलावाद छहोंछित अछि। सब अपनहि डफली अपन राग में अछि। 2013 या 2016 केर गठबंधन शक्ति क्षीण अछि। 2020 ताहि लेल असफल अछि। आब ऐगला पीढ़ी नीक करय से कोरा कल्पना मात्र सम्बल अछि। लेकिन हम किनको हतोत्साहित नहि करय चाहैत छी, बस आत्मनिरीक्षण करू। अलग गेलहुँ त कि केलहुँ, संग रहलहुँ त कि भेल, जीत लेल कि आवश्यक अछि आ से कहिया धरि होयत। शुभमस्तु!😊

हरि हर!!

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