दाम्पत्य जीवन: मैथिली पद्य

दाम्पत्य जीवन

– शान्तिलक्ष्मी चौधरी, महिषी, सहरसा

उठैत अछि अतड़ीसँ रंज
परंच सहि जाइत छी
सभटा कबकब गप्प
गुम्मेसूम संचमंच
रहि रहि कबदाबैत
कहैत छथि जखन ओ
डार्लिंग, माइ लाइफ
गारजियस वाइफ
स्वीटहर्ट, ब्यूट
क्यूट
आओर की की नै रहसल शब्द
जेना घौंदक घौंद ललकी लहरचुट्टी
आकि अप्रत्यक्ष अपशब्द
बिन्हैत हौऊ करेजक भीत
टाँग, पेट, पाँजर
आँचर, आँगी, सौंसे पीठ
छुछ्छ दुलार अलंकार भियाह
ठोर परहक पिरीत होइते छै कटाह
आइ ओ कहलनि
हे बुझलहुँ
अहाँ जे चलि गेलहुँ गाम
नहि लगैत छलय मोन
नहि भेटैत छलय चैन
बौआबैत अँगना दूआर
बाड़ी पछुआर
निहारैत छलय नैन
जेम्हरसँ अबैत अछि बाट
अहाँक घुरि अयबाक आस
आ खसि पड़लन्हि नोर
भीज गेलन्हि दूनू आँखि
पोरे पोर
पिरीतक शब्द किछु
साटल रहैत अछि ठोर पर
सिंगार मकरंद सन
खाल पर ओंसल कस्तूरी गंध सन
आ किछुक सीर
घुसियाओल रहैत अछि
हड्डी फोंफी मध्यक तेलमे
उष्मैत शोणित प्रवाहे धड़कैत छाती
नसे नस ओझड़ायल बेलमे
आकुत मोन सहजहि उधियाइत
बहराइत अछि
बनिकेँ
आँखिक उमरल नोर
निर्मल अत्मासँ बहरायल
निछछ सत सत बोल

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