दहेजक हिसाब – मिथिलाक कथा

मैथिली कथा

– प्रवीण नारायण चौधरी

दहेजक हिसाब

पिताम्बर बाबू जमीन्दार परिवार सँ रहथि। हुनकर एकमात्र पुत्र आ दुइ गोट पुत्री रहथिन। बेटा सब सँ पैघ रहथिन। बेटा केँ शहर पठा छात्रावास मे राखि उच्च अध्ययन करौलाह। बेटा सँ बहुत आशा पोसने रहथि। बेटी सब विवाह कय केँ आन घर चलि जायत से सोचि गामहि केर विद्यालय धरि पढौलखिन आ तदोपरान्त घरहि मे रहिकय घरैया लूरि सब सिखबाक वास्ते, सिलाई-कढाई सब केँ ट्रेनिंग गामहि केर एक चर्चित लुरिगर पुतोहु लग जाय सिखबाक व्यवस्था कय देलखिन। गामक संस्कृति ताहि समय मे एहने रहैक। घरक बेटा सब त दरभंगा, पटना, बनारस, कलकत्ता, दिल्ली धरि जा कय पढाई करय, मुदा बेटी सभक भाग्य मे उच्च शिक्षा नसीब नहि रहैक। हँ, गाम मे एकटा प्राइवेट कालेज खुजि गेल छलैक जे विश्वविद्यालय सँ सम्बद्ध आ मान्यता प्राप्त छलैक तेँ ओहि ठाम सेहो कतेको गामक बेटी सब नाम लिखाकय अपन उच्च अध्ययनक लौल पूरा करय। लौल एहि लेल जे पढाई कोनो खास नहि होइत छलैक, बस नाम लिखाउ आ अपने सँ पढिकय कोहुना परीक्षा दय उत्तीर्ण भऽ आइ.ए. पास कयलहुँ से नामहि टा लेल पढू। लेकिन ईहो सच छैक जे घटकैती मे अहु कालेज सँ पढल बेटी केर छवि सासुर परिवार मे नीक सँ गनाइक। तथापि ओ गिनती केँ के पूछैत अछि, दहेजक पाय कतेक गानब आ केहेन घर-वर करब से दहेजक घोर युग रहैक तहिया।

पिताम्बर बाबूक पास पुरखाक देल पुस्तैनी सम्पत्ति नहियो किछु त ५ बीघा हिस्सा मे रहनि। ओ निश्चिन्त छलाह। कोठाक खेत कनी दूर पड़ैत छलन्हि। धान रोपनी करबाबय लेल या धान कटबाबय लेल गेनाय सेहो आफद बुझाइत रहैत छलन्हि। ओ मोने-मन सोचि लेने छलाह जे दू बहिनक विवाह करब त कोठा वला खेत बेचि लेब। ओना हरेक सालक धान आ गहुँम बेचिकय ताहि युग मे सालाना ५ हजार टका बचत सेहो करैत छलाह। ग्रामीण बैंक केर खाता मे हुनका पास बैलेन्स सेहो रहनि लगभग ९० हजार टका। ३५ हजार टका मे तहिया इंजीनियर वर संग कुटमैती भऽ जायल करैक। लेकिन पिताम्बर बाबू अपन मैट्रिक पास बचिया सब लेल उच्च सपना देखैत छलाह। हुनका डाक्टर आ आफिसर सँ नीचाँ हाकिम नहि चाहैत छलन्हि। मास्टरी कयनिहार जमाय के रेट तहिया २५ हजार टका रहैक। सब सँ बुरबक किरानी केँ सेहो १५ हजार टका गानिकय लोक सब विवाह कयल करय। बाकी जेकरा भाग मे जतेक सम्पत्ति ताहि हिसाबे ५ हजार या १० हजार के खर्चा सँ विवाह भऽ गेल करय। पिताम्बर बाबूक पास सबटा लेखा-जोखा छलन्हि। बेटा केँ एम्हर खूब जोर-सोर सँ पढाई करय ले महीना मे ५०० टका देल करथिन्ह। मोने-मन सोचथि जे कहीं बेटा सेहो हाकिम बनि जायत त दुनू बहिन मे कयल खर्चा फेर सँ ऊपर कय लेब। माने बुझू जे पिताम्बर बाबू सब तरहें वेल-टु-डु लोक, बिन्दास रहल करथि। लोक सब पूछन्हि जे बचबा ग्रेजुएशन कय लेलक, आब विवाह त पहिने ओकरे करायब…? ओ कहथिन, हौ जी! पहिने बेटी सब लेल ताकह।

अन्ततः बेटी सभक कुटमैती अपनहि मनचाहा घर-वर मे टका गानिकय कयलनि। कथा ठीक करैत-करैत सस्ते मे पटि गेलनि। प्रोफेसर भेलखिन बड़का जमाय आ मात्र ६० हजार टका मे कुटमैती निबैट गेलनि। खेत नहि बेचय पड़लनि। छोटकी बेटी के सेहो कुटमैती ठिकिया लेलाह आ ऐगले साल ओकरो सलटा देलखिन। एहि बेर लड़का नाम के त डाक्टरे भेलखिन, मुदा एमबीबीएस नहि, बड़का जमीन्दार परिवारक बेटा आ अपन ब्यापार-व्यवसाय अफरात, हेल्थ एसिस्टैन्ट के ट्रेनिंग लेल व्यक्ति – अस्पताल आ डाक्टर सब केँ खटबय वला परिवार…. हुनका कथा पसीन पड़ि गेलनि। दहेजो कम लगलनि। मात्र २५ हजार आ बाकी लय-दय केँ एकरो करीब ७५ हजार टका खर्च कय केँ बड़की सँ बेसिये साँठ-समान सब दहेज मे दय विदाह कय देलाह। थोड़ बहुत पाय घटलनि त अपनहि भाइ केँ खेत भर्ना लगाकय काज निकालि लेलनि, बेचय नहि पड़लनि।

आब बेटा एमए पास कय गेल छलखिन्ह। पिताम्बर बाबू इन्तजार मे जे ई जरूर सबटा हिसाब बराबर करा देत। मुदा ई की? एमए पास केलाक बादो कतहु नौकरी नहि? आब कि करता? उमेर बीतल जा रहल छल। एम्हर बेटी सब सँ नाति-नातिन सब सेहो आबय लगलखिन। बेटा बूढ बरद जेकाँ भऽ गेल छलखिन्ह। पिताम्बर बाबू केँ लोक सब कनिकबो टोकि दैत छलन्हि जे बेटाक घटकैती कहिया करबैक… ओ खौंझाह हराठक बरद जेकाँ झपटा मारथिन। ‘हौ, बेटा हमर छी, परेशानी तोरा होइत छह?’ लोक सब चुप भऽ जाय। अन्त मे बेटा सब चीज छोड़ि-छाड़ि गाम आबि गेलाह। बाबू केँ कहलखिन जे नौकरी करय लेल घूस चाही २ लाख टका। फल्लाँ कालेज मे लेक्चरर के पद पर राखि देबाक बात भेल अछि। पिताम्बर बाबू केँ चकचोन्ही लागनि। २ लाख टका घूस दय केँ नौकरी दियेबैक, प्रोफेसर जमाय केलहुँ त ६० हजार टका खर्चा भेल… भेटबो ओतबी करत… फेर एतय त हमरा लाख सँ फाजिल खर्च भऽ गेल अछि। चिन्ता सँ ओ बीमार भऽ गेलाह। हुनका मोन पड़लनि अपन खेती-गृहस्थी आ मड़ौसी सम्पत्तिक आमदनी। ओ नौकरी सँ बेसी नीक अपनहि धंधा मे बेटा केँ लगेनाय बुझलनि। दहेजक पाय बिसरि गेलाह। बेटाक विवाह ठीक कयलनि। गृहस्थ परिवारक बेटी केँ पुतोहु बनेलनि। आइ हुनकर बेटा गामहि मे रहिकय अपन आमदनी केर पुरखा लोकनिक बाट अनुरूप डबल कय लेने छथि। पुतोहु केँ सेहो प्रखंड अन्तर्गत परियोजना सँ जुड़ल कोनो नौकरी लगा देने छथिन। अपन धियापुता सँ लैत सब मैनेजमेन्ट पहिने सँ उच्च रखने छथि। हिनको २ बालक २ बालिका छथिन। लेकिन ई पिता सँ इतर सब केँ अपन पैर पर ठाढ भेलाक बादे विवाह करेबाक सोच बनौने छथि। दहेज गानिकय नहि, बल्कि दहेज सँ पूर्व अपन सामर्थ्य विकसित कय केँ विवाहित जीवन जियय लेल सपना देखि रहल छथि।

हरिः हरः!!

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