फोकब्रेन आ ब्रेनकोठी संग मैथिली-भोजपुरी अकादमी मे महत्वपूर्ण भूमिका कयनिहार डा. के. के. केर योगदान

सामाजिक संजाल मे कयल योगदानक एक छोट समीक्षा

– प्रवीण नारायण चौधरी

डा. के. के. मात्र कहला सँ बहुत लोक नहि चिन्हि सकबनि, लेकिन ‘कैलाश कुमार मिश्र’ केर नाम सँ बेसी लोक चिन्हैत होयब। एक चर्चित विद्वान् – एन्थ्रोपोलोजी केर अध्ययन सँ स्वयं केँ मानवीय पक्ष प्रति साकांक्ष कयनिहार डा. कैलाश कुमार मिश्र द्वारा मैथिली-मिथिला क्षेत्र मे सेहो काफी रास महत्वपूर्ण योगदान कयल जाइत रहल अछि। आइ हिनकर एक योगदान जे सामाजिक संजाल केर बेहतरीन उपयोग करैत एक सँ बढिकय एक स्रोत व्यक्ति – लोककलाकार केर संकलन आ प्रस्तुति केँ प्रसारण पर हम केन्द्रित रहय चाहब। संछेप मे डा. के. के. दिल्ली मे रहिकय विगत एक दशक सँ हमरा नजरि मे अनेकानेक शोधालेख जाहि मे मधुश्रावणी, रामलीला, आदि हमर फेवरेट रहल, संगहि मैथिली संचारकर्म केँ सेहो एकटा निश्चित गति देबाक लेल डा. किशन कारीगर संग सहकार्य करैत उल्लेखनीय प्रयास करनिहार संपादकक रूप मे सेहो ई सुपरिचित भेलाह, तदोपरान्त मैथिलीक कथावस्तु केँ हिन्दी एवं अंग्रेजी मे लिखिकय भारत एवं विश्वपटल पर प्रचारित-प्रसारित करबाक लेल अग्रसर देखेलाह, आर फेर कइएक बेर विवादित बात-विचार रखबाक कारण हिनका संग ढुइसबाजी करबाक अवसर सेहो प्राप्त भेल, आर एक सुच्चा प्रगतिशील व्यक्तिक रूप मे निरन्तर हिनकर सृजनक रथ केँ गतिमान देखल। आजुक समय मे डा. के. के. ब्रेनकोठी व फोकब्रेन नाम केर दुइ महत्वपूर्ण अभियान मे निरन्तर सक्रिय त छथिये, मैथिली भोजपुरी अकादमीक सलाहकार समिति मे सेहो एकर वर्तमान कर्त्ता-धर्त्ता नीरज पाठक केँ महत्वपूर्ण सलाह-मशविरा दैत दिल्ली संग पूरे भारतवर्ष मे मैथिलीक आवाज केँ बुलन्द कय रहला अछि। वाकपटुता आ गिद्धदृष्टि सँ सम्पन्नता कइएक विलक्षण गुण छन्हि आर हमरा सभक अग्रज एक मार्गदर्शक संग सहिष्णुता सँ भरल आलोचना वर्दाश्त करबाक अभूतपूर्व क्षमतावान सेहो छथि। चलू, व्यक्तिगत चरित्र-चित्रण सँ आगू आ देखी हुनक महत्वपूर्ण योगदानक किछु झलकी!

मात्र अगस्त मास मे फोकब्रेन केर पटल पर डा. के. के. द्वारा राखल गेल विमर्शक सूची पर नजरि देला सँ एतेक रास विषय पर काज करबाक अभूतपूर्व रेकर्ड भेटैत अछि – मगही लोकगीत श्रीमती शैल शर्माक संग – स्वामी सहजानन्द सरस्वतीक अध्यात्मवाद पर दंडी स्वामी अनंतानंद सरस्वतीक श्रीमुख सँ प्रवचन – भारतीय इतिहास मे पसरल भ्रान्ति ऊपर डा. अन्जनी कुमार झाक व्याख्यान – श्रीमती स्मिता चौधरी द्वारा कृष्ण अष्टमी केर गीत ‘परम्परागत साँझ’ – श्रीमती स्मिता चौधरीक आवाज मे परम्परागत पराती गीत – स्वतंत्रता दिवसक पूर्व सन्ध्या पर सामान्य महिलाक काव्यमय देशप्रेम मे श्रीमती अनिता मिश्र – भोजपुरी आ मैथिली लोकगीतक संग चन्दन तिवारी – मूर्तिकार एवं लोककला विशेषज्ञ शरद कुमार केर संग कला संवाद – भारतीय कला मे सोलह श्रृंगारः संजीव कुमार सिंह संग वार्ता – मीनाक्षी ठाकुर स्वीटी केर आवाज मे मैथिली कजरी – बुंदेलखंडी, अवधी, भोजपुरी लोकगीतः मंजू नारायण केर संग – रथवाक पिथोरा पेन्टिंगः ईश्वर संग सृजन-संवाद (परेश रथवा) – श्री हरिशंकर जीक स्वर मे भोजपुरी परंपरागत लोकगीत। ई सब चर्चा वीडियो फोरमैट मे, फेसबुक लाइव व युट्यूब पोस्ट केर रूप मे सुरक्षित अछि। तहिना बीच-बीच मे डा. के. के. फणिश्वरनाथ रेणूक पोथी, डा. हेतुकर झा केर पोथी व रचना पर लेख लिखबाक संग-संग अटलबिहारी वाजपेयी जेहेन महान नेताक जीवन पर अपन लेख-रचना व अनेकों विषय पर विचारक प्रवाह करैत छथि जाहि मे नव शिक्षा नीति २०१९ सेहो शामिल अछि। एकर अलावे मैथिली भोजपुरी अकादमी पर कोन कार्यक्रम राखल जाय, के स्रोत व्यक्ति औता, एहि सब पर हिनकर नजरि बनल रहैत अछि। एहि अकूत ऊर्जा सँ ओतप्रोत व्यक्तित्व डा. के. के. स्वयं एहि सब विषय पर पहिने अपन अध्ययन करैत छथि, फेर स्रोत व्यक्ति सँ विभिन्न राउन्ड मे ओहि विषय सब पर चर्चा होइत छैक आर तखन अन्तिम प्रस्तुति लेल यथासंभव उत्कृष्ट सामग्री आम पाठक-दर्शक लेल परसैत छथि। ई त भेल अगस्त मासक लेखा-जोखा। आइ निरन्तर कइएक वर्ष सँ एहि तरहक उच्च मूल्य कार्य करैत आबि रहल डा. के. के. केर लाइब्रेरी मे सामग्रीक भंडार केहेन होयत, कतेक होयत, ई बस कल्पना मात्र कयल जा सकैत अछि।

उपरोक्त अनुभव आ शोध सँ निज मातृभाषा मैथिलीक सर्वथा उत्थान हो, यैह उद्देश्य प्रमुख छन्हि। डा. के. के. केँ मैथिली जिन्दाबाद केर तरफ सँ हार्दिक शुभकामना, ईश्वर सदिखन एहिना सार्थक कार्य मे अपनेक समय खर्च कराबथि, मैथिलीक दिन सेहो सुदिन होइक, अहाँक दिन त सुदिन अछिये!

हरिः हरः!!

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