देवघरक यात्रा

संस्मरण

– भावना मिश्र

आस्थाक पवित्र नगरी बाबा धामक ( देवघर) कऽ पैदल यात्रा

#आस्था
आस्था मनुख के क्षमता क कतेक गुना बढ़ा देएत अछि, ई हम बड़ निक से अनुभव करलो। 2018 मे बाबाधाम पैदल गेल रही। सुल्तानगंजग( भागलपुर, बिहार ) से गंगाजल भरे के बाद, 5 km तक बड़ जोश मे हमसब चललो ( हमर जीजाजी , हमर घरवाला,हम आ हमर 6बरखक बेटा मनन्न ) लागल जे आये ही जल भोले बाबा के चढ़ा देबे। पर शीघ्र ही पैर मे छाला पड़ब शुरू भौ गेल ( खाली पैर चलबा से) । पहिल दिन 25 km चललो। ऐहेन स्थिति के बाद, पूरा 100 km के यात्रा नामुमकिन सा लागे लागल। रात मे ककरो होश नहि छल।समूचा देह मे दर्द छल आ बोखार भौ गेल,सब कियो दवाई खाय के सुति गेलो ,नीचा में। मुदा ई कि भोर मे उठे के संग ही पूरा स्फूर्ति आ शक्ति, लागल जेना कि कालि कुनू काजे नहि करने रही।दोसर दिन मनियां से यात्रा प्रारंभ करलो हम सभ। रास्ते मे पैघ -बूढ़ ,आ नेना जमीन पर सुति के प्रणाम करि जाएँत छल ( दंड प्रणामी करेत ) । काँवररिया के देख के मौन खुश भौ जाएँ आ होंसला भेटे।आस्थाक शक्ति से जोश भरेत गेल, आ हमसभ चलेत गेलो।आओ दिन 31km चललो आ सुइयां घुटिया (जगह) पर राति मे सुतलो।आय राति कालि से कनि कम मौन ख़राब छल।फेरि दवा खेलो। तेसर दिन भोर मे ओहिना ऊर्जा आ स्फूर्ति छल ।साँझ होएत- होएत, देवघर ( बाबाधाम ) के सीमा मे प्रवेश करि लेलो । हम सभ बड़ प्रसन्न छलौ। हमरा सभ के लगेत छल जेँ कि ना जानि कतेक दिन से यात्रा पर छी,ओ ऐही लेल लगैत रहे जेँ हमसभ एक-एक छण के जिलो,आ अनुभव करलो,बड़ अनुभव भेल। हमसभ ( जीजाजी,हमर घरवाला ,हमआ मनन्न) पहिल बेरि पैदल यात्रा करि देवघर पहुँचलो । भोले बाबा के गंगाजल चढ़ौलो आ पूजा केलो।बासुकीनाथ मे भी पूजा केलो । अचभा के गप्प ई जेँ भरि दिन चाय जूस आ पानि पर रहि आ केवल एक बेरि (रात्रि मे भोजन) के बाबजूद भी कहनो कमज़ोरी नहि अनुभव भेल।हमर बाया पैर मे पहिले दिन ही मोंच आबि गेल छल।हमरा प्रत्येक कदम पर दर्द होएत छल,मुदा भोला बाबा पार लगा देलखिन्ह। ई सच अछि कि आस्था मे बड़ शक्ति होएत अछि। 🙏🙏🙏 🙏 🙏 😊
सावन पर ई हमर संस्मरण अछि अहाँ सब के केहेन लागल जरूर कहब 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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