टाकिंग बिग बट डूईंग नथिंग

खाली बात केनाय, काज नहि केनाय – बिग टाकर्स!

'You can't lose weight just by talking about it. You've got to keep your mouth shut.'

‘You can’t lose weight just by talking about it. You’ve got to keep your mouth shut.’

ओझा केँ खाली लंबा-लंबा बात छोड़य वला वाइन भऽ गेल छलनि। बेचारे हरदम देश आ समाजक चिन्ता मे अपना केँ डूबल रखैत छलाह। जखन देखू तखन लोक सब केँ एलबम देखेनाय शुरु करैत छलाह जे, “फल्लाँ समय फल्लाँ समय फल्लाँ महान काज लेल अति महान विचार हम प्रकट केने रही, ताहि घड़ी हम आ हमर पत्नी ओहि स्थान पर एना फोटु खिचेने रही से फोटो अहाँ देखि सकैत छी। धरि ओ काज सबहक संग-सहयोग नहि भेटलाक कारण अधरे मे लटैक गेल। आ…. हमरा तऽ विचार देबाक छल से देनहिये रही, सबका साथ सबका विकास केर नारा तऽ मोदी जी आइ देलनि आ देख लियौक जे प्रधानमंत्री बनि गेलाह भारतक…. धरि हमर ओहि विचार पर लोक नहि ध्यान देलनि, नहिये सरकार कोनो ध्यान देलक आ ताहि हेतु ओ कार्य अधर मे लटैक गेल…. मुदा ई फोटो अहाँ देखू जे ओ विचार जे रखने रही तेकर जिबैत प्रमाण यैह थीक।”

ओझा गाम जाइथ बा कि सासूर, हुनकर बात आ विचार मोटामोटी एहने रहैत छलन्हि। ओझाइनक सोझाँ ओझा एकदम दुरुस्त रहैत छलाह मुदा। एक दिन ओझाइने प्रश्न पूछि देलखिन जे, “ओझा! अहाँ जे एना दुनिया केँ एलबम देखौने घूरैत छी से अहाँक बाद ई एलबम के देखेतैक? धिया-पुता केँ तऽ अपना सब तेहेन विद्यालय मे पढेलियैन जे ओ एहि सब मे रुचि रखिते नहि छथि। घर मे पुतोहु भेली ओहो हमरा जेकाँ अहाँक अनुगामी समान नहि बुझाइत छथि। तखन ओझा! बिना किछु कृति ठाढ केने ई बातहि सँ महानता कहिया धरि झलकेबैक?” ओझा ई सुनिते बहुत चिन्तित होइत बजलाह, “प्रिये! आइ धरि अहाँ वा कोनो धिया-पुता लेल किछु कमी नहि रखलहुँ। एखनहु जे हम ई एलबम लोक सबकेँ देखबैत छियैक ओ झुनझुन्ना बजेबाक हमरा बच्चे सँ आदति जे रहय ताहिक कारणे! सच पूछू तऽ केकरा ई फुर्सत छैक जे बेकारक समाजसेवा मे लागय। ताहू पर हम ओझाजी खानदान मे जन्म लेने छी। हमरा अहाँ मूर्ख नहि बुझू प्रिय कादम्बरी!” ओझाइन चौंकि गेलीह, आ कनखी मारैत ओझा सँ कहली, “हमरा संदेह पहिने सँ छल! टाकिंग बिग बट डूईंग नथिंग!” दुनू प्राणी एक-दोसरकेँ देखि कनखिये-कनखी हँसैत छथि आ ओझा फेर सँ ‘बिग टाक’ लेल मन मे नवका प्लान आ एल्बमक पाना उनटाबय लगैत छथि। ….

प्रसंगवश, ई बुझब जरुरी अछि जे एहेन ओझा हजारों छथि, मुदा काज कएनिहार विरले छथि। देश स्तर पर गप मारब, काज बेर गामहु केँ बिसैर जायब…. मैथिल केर खास गुण मे अछि। व्यक्तिगत विकास लेल कियो पाछू नहि अछि, एकरो सकारात्मक मानल जा सकैत छैक। मुदा गप तत्त पैघ छाँटब आ ताहि तूलना मे करनी-धरनी किछु करबे नहि करब, एहि पर आधारित उपरोक्त व्यंग्य प्रसंग राखल गेल अछि।

 

 

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