सावन मासक महत्व आ मधुश्रावणीक अर्थ

सम‍सामयिक चर्चा

– प्रवीण नारायण चौधरी

साओन मासक महत्ता कि सब छैक
 
चूँकि मधुश्रावणी हालहि बीतल अछि, एहि सन्दर्भक कतेको चर्चा एखन बड जोर पर अछि… खास कय केँ ‘टेमी-प्रथा’। कतेको भारी-भरकम विद्वान् लोकनि काफी तर्क-वितर्क आ कुतर्को करैत देखाइत छथि, कतेको लोक टेमी प्रथा स्त्री अधिकार पर घात देखैत छथि, किछु लोक एकरा अत्याचार मानि बन्द कय देबाक वकालत करैत छथि, किछु औचित्य स्थापित करबाक लेल कारण तकैत देखाइत छथि, सहज आ स्वभाव सँ परम्परा प्रति समर्थन रखनिहार लोक शीतल टेमी – यानि कि जरैत टेमीक बदला मे नवविवाहिता पबनैतिनक ठेहुन पर चन्दन लगेबाक वकालत कय रहला अछि… आदि-आदि अनेकों बात हरेक साल ‘मधुश्रावणी’ केर अवसर पर सामाजिक संजाल मे किछु बेसिये चर्चा मे देखैत आबि रहल छी। से लगभग १० वर्ष सँ देखैत आबि रहल छी। एहनो कियो क्रान्तिवीर जन्म लीतय जे कोनो एकटा नीति केँ सर्वमान्य बना सकितय, परम्परा केँ बदलि सकितय, से चमत्कार त एखन धरि देखय लेल नहि भेटल। लेकिन चर्चा जोर-शोर सँ होइत छैक, प्रभावित त जरूर हम सब कियो भऽ जाइत छी। कोनो ऐतिहासिकता वा प्रासंगिकता आदि केँ वर्णन करयवला लिखित सामग्रीक सन्दर्भ जँ भेटितय तँ निश्चित एतेक विवाद नहि होइतय, एकर अभाव मे अन्दाजी पंचे डेढ सय वला दावी बेसी लोक करैत छथि, जिनका जे मोन मे आयल से लाठी भँजैत छथि।
 
एक सामान्य समझ अनुसार मधुश्रावणी पाबनि
 
– एक नवविवाहिता अहिबाती द्वारा अपन सोहाग-भाग लेल मनायल जायवला पाबनि छी।
 
– एहि पाबनि मे नाग देवताक विशेष पूजा-अर्चना कयल जाइत छन्हि। बिसहरा देवी महादेवक बेटी मानल गेल छथिन आर किंवदन्ति यैह छैक जे सावन मास मे हिनकर आराधना सँ अहिबाती लोकनिक सोहाग-भाग बढैत छन्हि।
 
– बिसहराक संग-संग गौरीक पूजा सेहो विशेष ध्यान सँ कयल जाइत छन्हि। साठि माता केँ प्रसाद अर्पण करैत साढि देवीक विशेष पूजा सेहो एहि पाबनि मे कयल जाइत छन्हि।
 
– एहि पाबनि मे जे कथा कहल जाइत छैक ताहि मुताबिक महादेवक बेटी छलखिन ‘लिली’, जिनकर विवाह सगर राजाक बेटा बरिसी संग भेल छलन्हि। बरिसी आ चनाय भाय छलाह। एहि मे ईहो प्रसंग छैक जे बरिसीक एक विवाह पहिने एक राजकुमारी दइ संग भेल छलन्हि। एहि दुइ पत्नीक बीच हुनका लोकनिक अपन कर्मगति अनुसार सोहाग आ भाग केर बँटवाराक प्रेरणादायी कथा-गाथा सब पबनैतिन केँ सुनायल जाइत छन्हि। ‘बिनी’ नामक जे संकल्प पबनैतिन एहि पाबनि मे विशेष रूप सँ लैत छथिन ताहि मे सेहो मोटामोटी सोहाग आ भाग केर प्राप्ति लेल एक विशेष प्रकारक प्रार्थनाक भाव रहैत छैक। आर, एकर दायित्व बिसहरा देवी पर रहैत छन्हि। समग्र मे महादेव आ हुनकर समस्त परिवारक कथा-भूमिका एहि पाबनि मे जुड़ल अछि। अनेकों तरहक लोककथा-गाथा सहित पबनैतिन केँ विवाहित गृहस्थ आश्रमक जीवन केना नीक सँ बितायब, एकरा लेल एक तरहक प्रशिक्षण देल जाइत अछि।
 
– एम्हर पबनैतिन द्वारा १३ दिन या १४ दिन केर पाबनि अबधि सफलतापूर्वक पूरा कयलाक बाद अन्तिम दिन मे पबनैतिनक सोहाग आ भाग (भाग्य) केर प्रत्यक्ष परीक्षा करैत स्त्रीगण समाज द्वारा पबनैतिन केँ टेमी सँ ठेहुन पर पकायल जाइत छन्हि आर ई देखल जाइत छैक जे हिनका कतेक फोका भेलनि, कहल जाइत छैक जे जिनका जतेक फोका भेल ओ ओतेक सोहाग-भाग वाली हेती। ओहि पबनैतिनक फोकाक अवस्था गुणे स्त्रीगण समाज हुनकर ओतबे प्रशंसा-सराहना करैत छथि।
 
– एकटा विशेष अवस्था ईहो होइत छैक जे यथासंभव ई पाबनि पतिक संग-संग पबनैतिन पूजैत छथि। पति जँ उपस्थित छथि तँ बेसी नीक, जँ नहि छथि तैयो कोनो बात नहि।
 
एम्हर दोसर दिश साओन मासक महत्व आ महादेव केर विशेष पूजा-अर्चनाक स्थिति सर्वविदिते अछि। एहि मास मे सब कियो देवाधिदेव महादेव केँ अपन-अपन तरह सँ प्रसन्न करबाक प्रयास करैत छथि।
 
अनिरुद्ध जोशी शतायू जीक एक आलेख सँ सावन मासक महत्व केँ निम्न तरहें बुझला सँ हमहुँ सब काफी लाभान्वित होइत छी –
 
१. सत्संग केर महत्व : श्रावण शब्द श्रवण सँ बनल अछि जेकर अर्थ छैक सुननाय। अर्थात् सुनिकर धर्म केँ बुझनाय। एहि माह मे सत्संग केर महत्व छैक। एहि माह मे पतझड़ सँ मुरझायल प्रकृति पुनर्जन्म लैत अछि।
 
२. व्रत केर प्रारंभ : श्रावण माह सँ व्रत और साधना केर चारि माह अर्थात् चातुर्मास प्रारंभ होइत छैक। ई ४ माह थिक – श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक। पौराणिक कथा केर अनुसार देवी सती द्वारा अपन दोसर जन्म मे शिव केँ प्राप्त करबाक लेल युवावस्था मे श्रावण महीना मे निराहार रहिकय कठोर व्रत कयल गेल छल आर हुनका प्रसन्न कय केँ विवाह भेल छलन्हि। ताहि लेल सेहो एहि मासक विशेष महत्व छैक।
 
३. संपूर्ण मास व्रत रखैत अछि : श्रावण मास मे सिर्फ सावन सोमवारिये टा नहि अपितु संपूर्ण मासे व्रत राखल जाइत अछि। जाहि तरहें गुड फ्राइडे केँ पहिने ईसाइ लोकनि ४० दिनक उपवास चलैत छल आर जेना इस्लाम मे रमजानक महीना मे रोजा (उपवास) राखल जाइत अछि तहिना हिन्दू धर्म मे श्रावण मास केँ पवित्र और व्रत राखयवला महीना मानल गेल अछि। पूरा श्रावण मास मे निराहारी या फलाहारी रहबाक हिदायत देल गेल अछि। एहि मास मे शास्त्र अनुसार टा व्रत केर पालन करबाक चाही। मन सँ या मनमाना व्रत सभ सँ दूर रहबाक चाही। संपूर्ण मास नहि राखि सकैत छी तँ सोम दिन सहित किछु खास दिनक व्रत जरूर पाल करू।
 
४. व्रत केर नियम : श्रावण मास मे दूध, शक्कर, दही, तेल, बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, नमकीन या मसालेदार भोजन, मिठाई, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन नहि कयल जाइछ। एहि दौरान केस आर नह नहि कटेबाक चाही। श्रावण मास मे यात्रा, सहवास, वार्ता, भोजन आदि त्यागिकय नियमपूर्वक व्रत रखबाक चाही तखनहि एकर फल भेटैत अछि। दिन मे फलाहार लेनाय और राति केँ सिर्फ पानि पीबाक चाही।
 
जिनकर शारीरिक स्थिति ठीक नहि हो ओ लोकनि व्रत करय सँ उत्तेजना बढ़त और व्रत रखला पर व्रत भंग होयबाक संभावना रहत से सोचि-बुझि व्रत नहि करथि। रजस्वला स्त्री, जरूरी यात्रा या युद्ध केर हालात मे सेहो व्रत नहि रखबाक चाही। एहि व्रत केँ रखबाक तीन कारण छैक, पहिल दैहिक, दोसर मानसिक और तेसर आत्मिक रूप सँ शुद्ध भऽ कय पुर्नजीवन प्राप्त करब एवं आध्यात्मिक रूप सँ मजबूत होयब। एहि सँ काया निरोगी भऽ जाइत छैक।
 
५. उपाकर्म करब : श्रावण मास मे श्रावणी उपाकर्म करबाक महत्व सेहो छैक। ई कर्म कोनो आश्रम, जंगल या नदीक किनार पर कोनो संन्यासी जेकाँ रहिकय संपूर्ण कयल जाइत छैक। श्रावणी उपाकर्म केर ३ पक्ष छैक – प्रायश्चित संकल्प, संस्कार और स्वाध्याय। पूरे मास कोनो नदी केर किनार कोनो गुरु केर सान्निध्य मे रहिकय श्रावणी उपाकर्म करबाक चाही।
 
६. एहि मास केर व्रत-त्योहार : एहि मास मे सोमवार, गणेश चतुर्थी, मंगला गौरी व्रत, मौना पंचमी, कामिका एकादशी, ऋषि पंचमी, १२वीं केँ हिंडोला व्रत, हरियाली अमावस्या, विनायक चतुर्थी, नाग पंचमी, पुत्रदा एकादशी, त्रयोदशी, वरा लक्ष्मी व्रत, नराली पूर्णिमा, श्रावणी पूर्णिमा, शिव चतुर्दशी और रक्षा बंधन आदि पवित्र दिन अबैत छैक।
 
७. तीन तरह केर व्रत : पुराण और शास्त्र सभक अनुसार सोमवारी केर व्रत ३ तरहक होइत छैक – सावन सोमवारी, सोलह सोमवारी और सोम प्रदोष। हालांकि महिला लोकनि लेल सावन सोमवारी केर व्रत विधि का उल्लेख भेटैत अछि। हुनका लोकनि केँ एहि विधि मुताबिक व्रत रखबाक छूट छन्हि।
 
शिवपुराण केर अनुसार जाहि कामना सँ कियो एहि मासक सोमवारीक व्रत करैत अछि, ओकर ओ कामना अवश्य एवं अतिशीघ्र पूरा भऽ जाइत छैक। जेकरा १६ सोमवारी व्रत करबाक छैक, ओहो सावनक पहिल सोमवारी सँ व्रत करबाक शुरुआत कय सकैत अछि। एहि मास मे भगवान शिव केर बेलपत्र सँ पूजा करनाय श्रेष्ठ एवं शुभ फलदायक छैक।
 
८. यदि संपूर्ण माह व्रत रखबाक हो तँ कि करबाक चाही?
 
पूर्ण श्रावण कय रहल छी तऽ एहि दौरान फर्श पर सुतबाक और सूर्योदय सँ पहिनहि उठनाय बहुत शुभ मानल जाइत छैक। उठलाक बाद नीक सँ स्नान करब आर अधिकतर समय मौन रहबाक प्रयास करब। दिन मे फलाहार लेब, राति केँ सिर्फ पानि पियब। एहि व्रत मे दूध, शकर, दही, तेल, बैंगन, पत्ता वला सब्जी, नमकीन या मसालेदार भोजन, मिठाई, सुपारी, मांस और मदिरा केर सेवन नहि कयल जाइछ। श्रावण मे पत्ता वला सब्जी यथा पालक, साग इत्यादि त्याग कय देल जाइछ। एहि दौरान दाढ़ी नहि बनेबाक चाही, केस और नहो नहि कटबाक चाही। इष्टदेव केर मंत्र केर मौन जप करबाक चाही, हुनक ध्यान करबाक चाही, हुनकर कथा सब सुनबाक चाही और हुनकर पूजा करबाक चाही।
 
९. एहि तरहक व्रत रखनाय वर्जित अछि : अधिकतर लोक दुइ समय खूब फरियाली खा कय उपवास करैत अछि। किछु लोक एक समय टा भोजन करैत अछि। किछु लोक तऽ अपनहि मन सँ नियम बना लैत अछि और फेर उपवास करैत अछि। ईहो देखल गेलैक अछि जे किछु लोक चप्पल पहिरनाय छोड़ि दैत अछि लेकिन गारि पढनाय नहि! जखन कि व्रत मे यात्रा, सहवास, वार्ता, भोजन आदि त्यागिकय नियमपूर्वक व्रत रखबाक चाही तखनहि ओकर फल भेटैत छैक। हालांकि उपवास मे कतेको लोक साबूदाना केर खीर, फलाहार या राजगिराक रोटी और भिंडीक सब्जी खूब ठूसिकय खा लैत अछि। एहि तरहक उपवास सँ कोन लाभ भेटत? उपवास या व्रत केर शास्त्र मे उल्लेखित नियमक पालन करब तखनहि त लाभ भेटत।
 
१०. शिव केँ जलाभिषेक केर फल : श्रावण मास केँ मासोत्तम मास कहल जाइत छैक। श्रवण नक्षत्र तथा सोमवार सँ भगवान शिव शंकर केर गहींर संबंध छन्हि। एहि मास मे भगवान शिव और प्रकृति अनेक लीला रचैत छथिन। कहैत छैक जे जखन समुद्र मंथन सँ निकलल हलाहल विष केँ भगवान शंकर पीबिकय ओकरा कंठ मे अवरुद्ध कय देलखिन तखन ओहि सँ उत्पन्न ताप-तपन केँ शांत करबाक लेल देवता लोकनि हुनकर जलाभिषेक एहि मास मे कएने रहथि। ताहि लेल ई मास मे शिवलिंग या ज्योतिर्लिंग सभक दर्शन एवं जलाभिषेक कयला सँ अश्वमेघ यज्ञ केर समान फल प्राप्त करैत अछि आर शिवलोक केर गति प्राप्त करैत अछि।
 
हरिः हरः!!
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One Response to सावन मासक महत्व आ मधुश्रावणीक अर्थ

  1. किशोर कुमार झा

    बहुत सुंदर पोस्ट!

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