लैंगिक समानता लेल दहेज मुक्त मिथिलाक प्रयास

समाजरूपी गाड़ीक दू पहिया थिकैक महिला आ पुरुष। अपन मिथिलाक कइएक विषय पर महिला लोकनिक सहभागिता सही मे बड कमजोर अवस्था मे रहैक। लेकिन अन्डर करेन्ट मे मिथिला महिला समाज केकरो सँ कम नहि छलीह, छथि वा रहती – ईहो सच छैक। तखन हुनका सब केँ आगाँ आनब केना?

बस एतबे टा सवाल केर जवाब ताकैत दहेज मुक्त मिथिला आइ १० वर्ष मे अपन यथासंभव कार्य आ योगदान समाज लेल देलक अछि। लैंगिक समानताक दिशा मे एकर परिकल्पना काफी मजबूत सिद्ध होइत रहल अछि।

उदाहरणार्थ – २०१६ मे राधा मंडल जीक व्यक्तित्व-कृतित्व पर आधारित एकटा परिचर्चा गोष्ठीक आयोजन भेल छल विराटनगर मे। तहिना समाज आ साहित्य बीच जाहि तरहक अन्योन्याश्रय सम्बन्ध छैक ताहि केँ दरसेबाक लेल कर्ण संजय जीक एकल कविता वाचन सेहो आयोजित कयल गेल छल।

महिला मे नेतृत्वक जबरदस्त क्षमता होइत छन्हि। चाणक्य जेहेन नीतिकारक विचार मे महिला पुरुष सँ दोब्बर-तेब्बर बेसी क्षमतावान सकारात्मक कइएक पक्ष मे होइत छथि। हालांकि चाणक्य महिला लोकनिक विश्वसनीयता केँ आरो कइएक कसौटी पर कमजोर आ पुरुषक तुलना मे बहुत कम सेहो आँकलनि अछि, लेकिन नेतृत्व, विचार, नीति-निर्माण आदि मे महिलाक शक्ति पुरुष सँ कतहु कम नहि अछि। स्वाभाविके बात छैक जे प्रकृति सेहो नारी जातिक निर्माण मे कोमलता अधिक प्रदान कएने अछि। लेकिन कठोर संकल्प शक्ति हुनकहु सब मे होइत अछि एकर बड पैघ उदाहरण ऐतिहासिक नारी मे सीता, द्रौपदी, सती, सावित्री, अनसुइया, अहिल्या, गार्गी, मैत्रेयी, भारती, भामती आदि देखौलीह अछि। आवश्यकता एतबे छैक जे हमरा लोकनि अपन समाजक दुनू पहिया प्रति बिना कोनो विभेद कएने समानरूप सँ सदुपयोग करैत आगू बढी!

इतिहास एहि सब आयोजनक महत्व शायद गानय! सिर्फ खरखाँही लूटय लेल काज कथमपि नहि होबक चाही, सार्थक परिवर्तन आ प्रगति लेल सब आगू आउ। ॐ तत्सत्!
हरिः हरः!!
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