अपन शारीरिक रोगक अपनहि परीक्षण आ अपनहि इलाज

लेख

– प्रवीण नारायण चौधरी

अपन इलाज अपने करू

जेना कि एखन देखि रहल होयब, कतेको रास चिकित्सक या चिकित्सालय सेहो कोरानाक त्रास वा आशंका मे एहतियातन बन्द अछि – एहेन समय अपन इलाज अपनहि करबाक एकटा नीक सुझाव हमरा सभक पास मौजूद अछि। बीमारीक लक्षण सँ इलाज करबाक स्थापित विधान अनुसार हम सब स्वयं लेल प्राकृतिक इलाज ताकि सकैत छी। हँ, तखन नीम हकीम खतरे जान… एकरा नहि बिसरब।

 
शरीरक भीतर कोनो समस्या भेल, कोनो तंत्र मे, पाचन तंत्र, रक्त संचार, स्वाँस-प्रस्वाँस, हृदय, फेफड़ा, लीवर, किडनी, माथ, मुंह, आँखि, नाक, कान, वा कोनो आन्तरिक भाग मे – तखन बहुत सतर्कता सँ काज करय पड़त। चिकित्सकीय परीक्षण – मेडिकल डायग्नौसिस संग शरीरक अन्दर केहेन तरहक वात, पित्त आ कफ आदिक संग रक्त केर अवस्था केहेन अछि – ई सब बहुत रास विन्दु पर विचार कयलाक बादे कोनो दबाइ लेबाक चाही।
 
रसायनिक क्रिया-प्रतिक्रिया सँ आन्तरिक बीमारी होइत छैक। मेडिकल साइंस ताहि लेल केमिकल टेस्ट रिपोर्ट्स (डायग्नौसिस) केर आधार पर मेडिसिन व परहेज आदि प्रीस्क्राइब (पूर्जा पर लिखल) करैत छैक। चिकित्सकक सलाह अनुसार दबाई खेनाय, परहेज केनाय, आर ओहि दबाई व परहेज सँ आवश्यक रासायनिक असन्तुलन पुनः सन्तुलित भऽ लोक स्वास्थ्यलाभ करैत अछि। तेँ, आन्तरिक समस्या (अस्वस्थ) भेला पर बेसीकाल अन्ठेनाय नीक बात नहि छैक। हँ, यदि सामान्य समस्या भेल आ ताहि लेल प्रचलित कोनो परहेज आदि उपलब्ध अछि तऽ ओकर पालन करू, २४ सँ ६० घन्टा धरि केहेन परिवर्तन आ स्वास्थ्य स्थिति बदैल रहल अछि ताहि पर एकदम चौकन्ना रहू।
 
तबियत बेसी खराब बुझि पड़य, यानि मोन घबराय, माथ दुखाय, चक्कर आबय, कमजोरी लागय, साँस आदि मे तकलीफ हुअय, कोनो एहेन लक्षण जे सामान्य सँ इतर हुअय तऽ तुरन्त इमरजेन्सी सेवा मे पहुँचि आवश्यक चिकित्सकीय जाँच, सलाह, सुझाव लैत अपन मोन केँ शान्त कय बीमारी सँ संघर्ष करबाक तैयारी करू। कोनो तरहक जोखिम आ अन्दाजी दबाई आदिक सेवन सँ बचू। प्राकृतिक घरैया इलाज सब सँ आराम भेल त नीक, नहि तऽ तुरन्त कोनो खतरनाक रासायनिक परिवर्तन सँ समस्या होयबाक स्थिति भाँपि शीघ्र चिकित्सालय पहुँचू।
 

बाह्य शारीरिक समस्या

 
शरीरक बाहरी भागक समस्या बेसी झोल वला नहि होइत छैक। कोनो तरहक चोट लगला सँ, खसला सँ, दुर्घटना मे पड़ला सँ – मात्र बाहरी भाग मे असर अछि तँ ओकरा प्राथमिक उपचारक अलावे सेकला-ससारला सँ सेहो आराम भेटि सकैत अछि। लेकिन ओकर असर जँ भीतर भाग मे पहुँचि गेल, जँ हड्डी टूटि गेल, जँ माँसल भाग मे कोनो तरहक भितरिया चोट सँ भितरी घाव आदि बनि गेल, तखन ईहो बात ओतबे सीरियस अछि। एकरो अन्ठेनाय खतरनाक भऽ सकैत अछि।
 

इन्टरनेट द्वारा सिमटम आ ट्रिटमेन्ट

 
आइ-काल्हि मेडिकल साइंस रिलेटेड काफी रास जानकारी आनलाइन भेटि सकैत अछि। जाहि तरहक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या हुअय, बस अपन समस्याक विवरण दैत गूगल करब तऽ संसार भरिक कइएक मेडिकल जर्नल या हेल्थ रिलेटेड अवेयरनेस (सचेतना) प्रसार करयवला वेब पोर्टल सोझाँ आबि जायत। अपन भोगल समस्या अनुसार अहाँ ओहि पोर्टल केर कन्टेन्ट्स सँ लक्षण मिलायब त लगभग ‘बीमारीक नाम’ (मेडिकल टर्म मे) स्पष्ट भऽ जायत। तदनुसार ट्रिटमेन्ट (इलाज) केर संग परहेज आदिक बात सेहो उपयुक्त ढंग सँ भेटि जायत। यदि फीजिशियन वा रिलेटेड अन्य स्पेशलिस्ट सँ सम्पर्क आवश्यक अछि तऽ ओहो सुझाव ओहि ठाम देल भेटत।
 
ध्यान राखब, दबाई केर नाम या कोन कम्बिनेशन केर एलोपैथिक दबाई एहि बीमारी लेल आवश्यक अछि सेहो लिखल भेटलो उपरान्त ओहि दबाई केर डोज आ अहाँक बीमारीक सही माप बीच एकटा सम्बन्ध केवल उचित चिकित्सक आ डायग्नौसिस केर आधार पर मेडिकल साइंस द्वारा निर्धारित मात्राक अनुपात मुताबिक मात्र दबाई खेबाक चाही। केमिकल रिएक्शन्स केर चान्सेज बहुत बेसी होयबाक कारण ‘अंग्रेजी दबाई’ माने एलोपैथिक मेडिसिन प्रयोग सँ बेसीकाल लोक केँ बचबाक चाही। मात्र जखन अपन मेटाबोलिक फंक्शन्स (शरीरक अन्दर भऽ रहल रासायनिक क्रिया-प्रतिक्रिया) द्वारा तबियत सही नहि बुझि पड़ि रहल अछि, तखनहि टा दबाई सेवन करबाक विधान अछि, सेहो चिकित्सकीय सलाह सँ।
 

बहुल्य बीमारी लेल प्राकृतिक इलाज

 
सच्चाई ईहो छैक जे हमरा लोकनि अपन शारीरिक गतिविधि, खान-पान आ व्यायाम आदि सँ अपना केँ निरोग राखि सकैत छी। अजर-गजर नहि खाउ जे पेट मे जाय केँ हरबिर्रो मचाबय। केहनो पानि नहि पीबू जेकर बैक्टीरिया शरीरक अन्दर केर सिस्टम केँ कोरप्ट कय दियए। गलत आ प्रदूषित हवा नहि घोंटू, कारण रक्त-शुद्धीकरण प्रक्रिया जे लंग्स आ हार्ट (फेफड़ा आ हृदय) केर बीचक सम्बन्ध आ सन्तुलन सँ होइत छैक तेकरा आक्सीजन के बदला अन्य गैस भेटला सँ समस्या उत्पन्न भऽ सकैत अछि। साँसहि सँ जीवनक आस कहल गेलैक अछि। तहिना आँखि, कान, व शरीरक सब ज्ञानेन्द्रिय आ कर्मेन्द्रियक सुरक्षाक जिम्मेदारी हम-अहाँ स्वयं करबैक तखनहि टा स्वस्थ रहि सकब।
 
आइ-काल्हि खान-पान मे तेल, मसाला, चीनीक मात्रा, निमक केर मात्रा, मिरचाय, खटाय संग रासायनिक उर्वरक आ कीटनाशकक प्रयोग कयल साग-सब्जी आ अनाजक उपभोग बढि गेलाक कारण बहुल्य आन्तरिक (शारीरिक) बीमारी सँ हम सब ग्रसित छी। लगभग ७०% लोक मे रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) केर बिगड़ब, ओतबे लोक मे मधुमेह (डायबिटीज) केर बीमारी लागब, गैस्ट्रिक आ पित्तक खराबी (फैट्टी लीवर व लीवरक अन्य रोग) संग पेशाव-पैखाना मे समस्या आ फेर तेकर कारण शरीर अस्वस्थ होयबाक कतेको रोग सँ बहुल्यजन परेशान अछि।
 
एकरा सब केँ हम सब खानपान मे परहेज सँ – सन्तुलित आ शुद्ध आहार लेला सँ सुधार कय सकैत छी। गरम पानि पियब त पानि सँ होयबला रोग सँ बचब। वाहियात वसा (तैलीय मात्रा, फैट्स) सँ अपना केँ बचेबाक लेल सेहो गरम पानिक निरन्तर सेवन काफी प्रभावकारी होइछ, कारण लीवर आ किडनी केँ एहि सँ काफी सहयोग भेटैत अछि। साँस प्रक्रिया केँ स्वस्थ रखबाक लेल वाकिंग आ खुल्ला क्षेत्र मे साँस लेनाय-छोड़नाय जरूरी होइछ। शरीरक उपयोग जतेक बेसी शारीरिक क्रिया करबाक लेल करब, ओतबे ई निरोग रहत। एकरा बेसी ललबबुआ बनायब त भोकना-बिलाड़ि बनिकय मोटापा सँ होइवला अनेकों रोग सँ ग्रसित रहब।
 

फीजियोथेरेपी केर टिप्स शारीरिक अंग केर दर्द वा चोट मे असरदार

 
ठेहुन, केहुनी, कंधा, एंड़ी, कलाई, – शरीर मे जतय-जतय जोड़ अछि ओतय-ओतय दर्दक अनुभव भेनाय सेहो आजुक युग मे बहुतो लोक लेल समस्या अछि। एहि सभ बात लेल फीजियोथेरेपी (शरीरक हल्का व्यायाम सँ इलाज) काफी प्रभावकारी अछि।
 
हम अपनहि संग घटल किछु उदाहरण देबय चाहब –
 
उठब-बैसब मे सतर्कता नहि रखबाक कारणे अथवा शरीरक वजन बेसी भारी भऽ गेलाक कारण, मोटरसाइकिल आदि सँ खसबाक या दुर्घटना मे पैर रोपबाक कारणे ठेहुन पर बल पड़ि जेबाक कारण, बामा वा दायाँ भागे खसला सँ पैर-हाथ या शरीरक कोनो भागक कोनो अंग पर दबाव पड़ि जेबाक कारण काफी समस्या होइत छैक। हम स्वयं एहि तरहक दुर्घटनाक शिकार भऽ डाँड़्ह मे दर्दक समस्या सँ परेशान रही। एतबे परेशानी बढि गेल त नोबेल अस्पताल मे जाय जाँच करबेलहुँ, चिकित्सक द्वारा एक्सरे वगैरह देखलाक बाद कहल गेल जे पोस्चरल प्राब्लम सँ एना भेल अछि। फीजियोथेरैपी सँ सलाह लिअ..!
 
फीजियोथेरेपिस्ट एकटा इलेक्ट्रीक पैड पर डाँड़्ह सेकिकय हल्का-फुल्का ३ टा व्यायाम बतेलक। पहिने स्वयं अपनहि चेम्बर मे करबेलक आ अनुभव पुछलक। सच कहैत छी, आधा सँ बेसी त हमरा तखनहि ठीक भऽ गेल। फेर बाद मे किछु दिन धरि घरहु मे स्वयं अभ्यास कयलहुँ त १००% ठीक भऽ गेलहुँ। बाद मे यैह इलम हम कतेको लोक केँ बतेलहुँ आ सब केँ आराम भेलैक।
 
किछु दिन पूर्व सेहो मोटरसाइकिल केर बल्ब फ्यूज भेलाक कारण सामने एकटा ड्राम सँ टक्कर खा बाम भागे खसि पड़ल छलहुँ दिसम्बर मे… ताहि समय अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन आयोजनक जोश मे दर्द-सर्द सबटा बिसरा गेल छल… लेकिन एखन करीब ३ माह सँ काफी परेशान रही। काल्हि एकर निदान लेल किछु आनलाइन हेल्प लेलहुँ। अमेरिकाक एकटा लोकप्रिय वेबसाइट जतय लाखों लोक जुड़ल अछि, एहि पर उपलब्ध रोग आ निदान केर बारे पढलहुँ। फीजियोथेरेपीक कुल ५ व्यायाम मे सँ मात्र २ टा व्यायाम करिते १२ आना समस्या सँ निजात भेटि गेल अछि।
 
फेर आइ ठेहुन दर्दक सेहो इलाज तकलहुँ एहि वेबसाइट पर तकलहुँ। जाहि तरहक समस्या हमरा होइत अछि तेकरा लेल सब सँ उपयुक्त डायग्नौसिस ‘मेनिस्कस टियर’ बुझि पड़ल। फीजियोथेरेपी लेल प्रचूर यूट्यूब चैनल्स आ व्यायाम सभक सूची भेटि गेल। एहि मे सँ सब सँ हल्का २ गोट व्यायाम केर अभ्यास करिते असह्य दर्द छू-मन्तर भऽ गेल। ताहि पर ई आर्टिकल आमजन केँ सेहो एहि तरहक ‘आप मरीज – आप डाक्टर’ वला भेटौक, तेँ ई आर्टिकल लिखल अछि। अस्तु! एहि वेबसाइट सँ अपने सब जरूर जुड़ि जाय, बीमारीक सही आकलन करी आ फेर उपयुक्त इलाज सेहो ताकी। प्रणाम!
 
वेबसाइट केर लिंकः
 

हरिः हरः!!

पूर्वक लेख
बादक लेख

One Response to अपन शारीरिक रोगक अपनहि परीक्षण आ अपनहि इलाज

  1. प्रेम विदेह

    बहुत सुंदर लेख! जन-स्वास्थ्य लेल साकारात्मक डेग।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1 + 3 =