पुरस्कृत मैथिली लघुकथा ‍‍- हुनर

मैथिली लघुकथा

– आशा चौधरी, दरभंगा

दहेज मुक्त मिथिला समूह पर आयोजित लघुकथा प्रतियोगिताक तेसर स्थानक पुरस्कृत कथा श्रीमती आशा चौधरी लिखलनि अछि। श्रीमती चौधरी कंशी (दरभंगा) सँ छथि, एक सामाजिक कार्यकर्ता तथा १९९५ सँ शिक्षा-साक्षरता पर काज करैत छथि। एखन महिला शिक्षा पर काज कय रहली अछि। हिनक कार्यक्षेत्र बहादुरपुर प्रखण्ड छन्हि – हिनकर पद केर नाम अछि केआरपी! सामाजिक संजाल पर काफी सक्रिय एवं विभिन्न विषय पर गहींर ज्ञान केर धनी छथि आशा जी! आउ, हिनकर लघुकथा ‘हुनर’ पढैत छी।

हुनर

बात बहुत पुराना जमाना के अछि। एकटा राजकुमार शिकार खेलय के लेल जंगल मे गेल। शिकार के ताकय मे बहुत दूर चलि गेल मगर एकोटा शिकार हाथ नहिं लगलैक। राजकुमार के बहुत जोर स प्यास लागि गेल। दूर दूर तक कतहु पानि नहिं भेटलै थाकि हारि कय राजकुमार बैसि गेल। थोड़े काल सुस्तेलाक बाद आगू बढ़ल त देखलक किछु महिला लोकनि एकटा इनार सँ पानि भरि रहल छल। राजकुमार महिला सब सँ पानि के माँग कयलनि महिला लोकनि थोड़ेक ठिठकि गेली। हुनका सबके भेलनि जे कोनों जासूस अछि

परंतु ओहि महिला के झुंड मे एकटा सियान बच्ची जकर नाम सुनयना छल ओ झट स पानि पिया देलक। आ कहलक जे ई जे कियो छथि मगर प्यासल के पानि अवश्य पियैबाक चाही। राजकुमार सुनयना के सुंदरता देखि कय मोहित भ गेला, एकटकी लगा कय देखला आ अपन घर वापिस आबि गेला। अयला बाद ओकरा कखनो मोन नै लागै हमेशा सुनयना के चेहरा सामने घुमै। राजकुमार खेनाइ पिनाइ त्यागि देलक। पेटकुनियां लाधि देलक। किछु दिनक बाद सुनयना के पास राजकुमार के एकटा दूत आयल आ राजकुमार सँ विवाहक प्रस्ताव देलक। सुनयना ई कहि कय अस्वीकार कय देलन्हि जे राजकुमार के कोनो हुनर आबै छैन? अगर हाँ तखने हम विवाह करब।

राजकुमार संवाद देलन्हि जे हम त राजकुमार छी हमरा कौनो कमी नहिं अछि हमरा हुनर स कून प्रयोजन। सुनयना संवाद देलक जे जाबत धरि कोनो हुनर नहिं सिखता हम विवाह नहि करब। हारि थाकि कय राजकुमार हुनर सिखला आ बहुत नीक स सिखला कालीन बनेनाइ। तखन दुनू के विवाह भ गेल आ सुख पुर्वक रहय लागल। किछु दिनुक बाद राजकुमार फेर जंगल मे शिकार खेलाय लेल गेल छल, जंगल मे एकटा गिरोह के लोक सब पकड़ि लेलक आ एकटा तहखाना मे बंद क देलक। तहखाना मे बहुत लोक बंद छल, जकरा कोनो हुनर आबै छलै तकरा सँ काज कराबै छल आ ओकर बनल समान बाजार मे बेचबाकय मुनाफा राखै छल। आ जकरा कोनो हुनर नहिं आबै छल तकरा मारि दैत छल। राजकुमार के ओ पुछलक जे तोरा किछु आबै छौ? त राजकुमार अपन हुनर के बारे कहलक, आब राजकुमार खूब मोन सँ कालीन बनाबऽ लागल। एम्हर सुनयना चिंता में छल जे राजकुमार कहाँ गेला।

बहुत खोजबीन करैलैन्ह परंतु कोनो पता नहिं चलल। राजकाज सुनयना खुद सम्हारि नेने छली। सुनयना दिन राति राजकुमार के चिंता में छलीह। राजकुमार एहन कालीन तैयार कैलैन्हि जेकर जोड़ नहि। राजकुमार कहलक जे एहि कालीन के सही दाम सब जगह नै भेटत एकरा लय जाउ आ फल्लां राज के रानी दय सकै छथि। वैह भेल कालीन लय क बेचय बला हाक लगौलक। त दरबान पुछलक दाम। त कहलक एकर दाम त अहांक महरानी द सकै छथि। हल्ला-गुल्ला सुनि कय सुनयना बाहर निकललीह त कालीन देखिते चिन्ह गेली जे ई त राजकुमार के हाथक कालीन अछि। मुंह मांगा दाम दय कालीन के खरीद लेलन्हि। घर मे जा कय खूब नीक स कालीन के निहारय लगली त देखली जे राजकुमार कालीन में एक नक्शा बनौने छथि आ बीच जंगल मे तहखाना अछि।

सुनयना के बुझैत देरी नहिं लागल। पूरा तैयारी कय केँ सैनिक के संग जंगल जा कय तहखाना के घेर लेलन्हि। गिरोह के लोक पकड़ि लेल गेल आ बंदी सबके छोड़ा कय राजकुमार के संग अपना घर गेलीह। राजकुमार कहलक जे मानि गेलौं! अहां हमरा हुनर पर जोर नहिं दितौं त आइ हम अहांक संग कोना रहितहुं, हमरा त मारि दितय।

तेँ कहल जाइत छैक – हर इंसान के हुनर रहनाइ बहुत जरूरी छैक।
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