मैथिलीक विखंडित करबाक आरोप आ मैथिली-भोजपुरी अकादमीक उपाध्यक्ष पाठकक स्पष्टीकरण

९ जुलाई २०२० । मैथिली जिन्दाबाद!!

मैथिली भोजपुरी अकादमी द्वारा मैथिली केर विभिन्न बोली केँ भाषाई दर्जा दैत फेसबुक पेज द्वारा लाइव प्रस्तुति दिएबाक सूचना मे पूर्वाञ्चल व बिहारक जनपदक बोली आदिक संज्ञा देबाक विन्दु पर काल्हि सामाजिक संजालक संग कोर्ट मे याचिका दायर करबाक स्थिति तक बनैत देखि अकादमीक उपाध्यक्ष अपन फेसबुक पेज सँ एकटा स्पष्टीकरण जारी करैत केवल मैथिली आ भोजपुरी भाषा लेल कार्य केँ निरन्तरता देबाक प्रतिबद्धता प्रकट कयलनि अछि। विवादक सम्बन्ध मे काल्हि मैथिली जिन्दाबाद पर लगातार समाचारक सम्प्रेषण सेहो कयल गेल छल। अखिल भारतीय मिथिला संघक अध्यक्ष विजय चन्द्र झाक बयान संग कानूनी संघर्षक इशारा व उपाध्यक्ष पाठक जीक आश्वासन सम्बन्धी समाचार सेहो मैथिली जिन्दाबाद मे काल्हिये प्रकाशित भेल रहय। एवम् प्रकारेन काल्हि ८ जुलाई संध्याकाल करीब ५ बजे श्री पाठक द्वारा ई स्पष्टीकरण देल गेल अछि।

नीरज पाठक, उपाध्यक्ष, मैथिली भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा जारी स्पष्टीकरण केर उतार निम्न अछिः

मैथिली भोजपुरी भाषी लोकनि,

नमस्कार। स्पष्ट क’ दी जे मैथिली भोजपुरी अकादमी दिल्ली सरकार द्वारा वैधानिक रुपे गठित आधिकारिक संस्था अछि जकर उद्देश्य मैथिली आ भोजपुरी भाषा आ संस्कृतिक विकास पर काज करब रहल छैक। जहिया सँ हम एकर उपाध्यक्ष भेलहुँ तहिये सँ दुनू भाषा आ संस्कृति के विकास लेल अनेक काज कएल गेल अछि। प्रयत्न ई रहल अछि जे सब दुनू भाषा आ दुनू भाषा के अनेक भौगोलिक आ सांस्कृतिक क्षेत्र, विभिन्न समुदाय वर्ग आ लिंगक उचित प्रतिनिधित्व सब कार्यक्रम मे होइक। अनेक परियोजना पर काज भेल आ ओकर रिपोर्ट पोथीक रूप मे आबि रहल अछि। महिला सबकेँ सेहो उचित प्रतिनिधित्व देल गेल छनि। नाटक, नृत्य, गीत, कविता, कथा, बालकथा, मिथिला चित्रकला, मैथिली लिपि आ कैथी लिपिक प्रचार, ओकर शोध, फॉण्टक वैज्ञानिक सोच आदि , छठि पाबनि मे घाट प्रबंधन एवं सांस्कृतिक कार्यक संचालन हेतु मैथिली भोजपुरी अकादमी दिल्लीक योगदान अधिकांश लोक जनैत छी।

एकाएक कोरोनावायरस के कारण सब किछु ठप्प पड़ल छैक। अहिना स्थिति मे ई विचार आएल जे हमहुँ सब मैथिली भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के विभिन्न वर्ग, भूगोल आ समुदाय के उचित प्रतिनिधित्व दैत कविता, कथा, गीत, संस्कृति चर्चा, समीक्षा आदिक फेसबुक पेज पर लाइव करब जाहि सँ मैथिली भोजपुरी भाषा भाषी अपना के अकादमी आ संस्कृति सँ जुड़ल पाबथि।

अहि मादे दुनू भाषा आ संस्कृति के अनेक क्षेत्र आ समुदाय सँ लोक सब लाइव आबि रहल छथि। बहुत सार्थक विमर्श भेल अछि। आगा सेहो ई क्रिया कलाप चलैत रहत।

अहि बीच अकादमी के किछु सदस्य के अनुभव भेलनि जे मैथिली मे अंग क्षेत्रक प्रतिनिधित्व एखन धरि नहि भ सकल अछि। एकरा ध्यान मे रखैत किछु साहित्यकार के आमंत्रित कएल गेलनि। अंगिका के अलग अस्तित्व भाषा के रूप में देबाक काज या त भारत सरकार के छैक अथवा ओहि प्रदेशक जतय ई सब मूल निवासी के रूप मे रहि रहल छथि। अकादमी अहि मे किछु नहि क सकैत अछि। हालांकि इहो बात सबके बुझल अछि जे बिहार आ झारखंड सरकार अंगिका के द्वितीय राजभाषा के अधिकार देने छैक। ख़ैर ई ओहि प्रदेश आ ओतय के लोकक अधिकार क्षेत्रक बात छैक। हम स्पष्ट करैत चली जे किछु अंगिका क्षेत्रक लोक अपन रचना प्रस्तुत कएलनि से मैथिली भोजपुरी छ्त्रक निचा। अहि मे ककरो कोनो संसय नहि होबाक चाही।

तथापि किनको अगर कोनो संसय भेल त ओहि लेल हम क्षमाप्रार्थी छी। अकादमी भविष्य मे मैथिली आ भोजपुरी भाषा के विभिन्न भूगोल आ सांस्कृतिक क्षेत्रक उचित प्रतिनिधित्व दैत मैथिली आ भोजपुरी भाषा के छत्र छाया मे सदैव उन्नत काज करबा लेल कृतसंकल्प अछि। अपने सब निश्चिन्त रही।

जय मैथिली
जय भोजपुरी

(स्पष्टीकरण: बिहार सरकार अंगिका अकादमीक गठन केने अछि आ झारखंड सरकार अंगिका के द्वितीय राजभाषा के दर्जा देने छैक।)

अहींक,

नीरज पाठक
उपाध्यक्ष, मैथिली भोजपुरी अकादमी
दिल्ली सरकार।

लिंकः https://www.facebook.com/nirrajpathak/posts/3212501442146251

एहि स्पष्टीकरण आ मैथिली व भोजपुरीक विखंडनक संशय केँ दूर करैत देल गेल प्रतिबद्धता सँ पुनः सब कियो पाठकजीक सक्रिय आ सकारात्मक प्रयासक सराहना कय रहल छथि। लेकिन विमर्श केर दौड़ थम्हबाक नाम नहि लय रहल अछि। एहि विषय पर एखनहुँ मारिते रास पक्ष-विपक्षक चर्चा फेसबुक जेहेन सामाजिक संजाल पर निरन्तरता मे अछि।

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