पुरस्कृत मैथिली लघुकथा – प्रमाणपत्र

लघुकथा – प्रमाणपत्र 

– ईशनाथ झा, नरुआर (झंझारपुर), मधुबनी

हम अत्यंत रूपवती छी। गोर-नारि, सुगठित देहयष्टि, कारी मुलायम केश, पैनगर पैघ आँखि, नमगर, सुरेबगर, मृदुभाषी — सबटा गुणे अछि हमरामे मुदा एकर कोनो अहंकार नहि अछि। दुनिया हमरा सन लोकसँ भरल छै।

दसे बरखक भेल रही तँ पहिने माय, आ तकर बरखियो नै भैल रहै तँ पिता स्वर्गवासी भ’ गेलाह। भैयाक दुरागमन भ’ गेल रहनि। भोज-भात खतम भेलाक बाद भौजीक पहिल आदेश पालन करैत हमर स्कूल जायब बंद भ’ गेल। भौजी कहलखिन, “बेटी-धी पढ़ियेकs की करत, अहिसँ बढ़िया जे घरक काज सीखौ जे बादमे काज आएत।” भैया सेहो मौन समर्थन केलनि आ हम गामे पर रहलहु। भौजी बच्चा जनमेने जाथि आ हम ओकर लालन-पालन करैत रहलहुँ। बच्चा सबहक मूतब-हगब-बोकड़ब, नेटा-पोटा, दुलार-मलार सब काजमे हम विशेषज्ञ भ’ गेलहु। रूप-लावण्यक चिन्ता करबाक समय नहि रहि गेल। आठ बरखक बाद भैया-भौजीक संग शहर आबि गेलहुँ। जतय कतौ बिआहक गप चलय तँ लड़काबलाकें ‘ब्यूटी विद ब्रेन’क बदलामे ‘ब्यूटी विद वेल्थ’क कामनामे रिजेक्ट होइत रहलहु, अनेको ठाम, अनेको बेर। बिना वेल्थक छुच्छे ब्यूटी कोनो कर्मक नहि अछि एहि संसारमे ! एहि तरहे हमर उमर एखन तैंतीस बरख भ’ गेल अछि।

सबटा बच्चा पैघ भ’ गेल अछि, स्कूल जाइए ! आब हमर हुनर काज देलक। तीन मास पहिने एकटा अमीर व्यवसायीक संतानक पाँच मासक बच्चाकें सम्हारबाक नोकरी भेट गेल, बढ़िया दरमाहा पर। आब भौजी बड़ प्रसन्न।

एक दिन तेज बोखार भेला सन्ता बचिया बपहारि तोड़िकs कनैत रहै। हमर प्रखर बुद्धि कहलक जे एकरा नीक चिकित्सकक आवश्यकता अछि। ई कहबाक लेल हम मैडम लग गेल रही हुनक ऑफिसमे। सुनिते देरी मैडम घर एलीह, आ बच्चाक कानब सूनि हमरा फज्झतिक तsर क’ देलनि। हमर कोरासँ बच्चा छिनैत कहलनि, “भाग एतय सँ अलच्छी, तूँ किजैन गेलही जे बच्चा केना पोसल जाइ छै ? ‘बाँझ की जनतै परसौतीक सुआद’, अपना तs ने छौ ने हेतौ ! पड़ा एतय सँ !”

गाम पर जा रहल छी आ सोचि रहल छी जे चारि टा बच्चाकें डेबने छी हम, पालन-पोषण, सेवा-तालता केलहुँ हम, परंतु प्रमाणपत्रक बिना अनुभवक कोनो मोल नहि !

लेखकक परिचयः

प्रो. ईशनाथ झा, गाम+पत्रालय : नरुआर, जिला : मधुबनी, बिहार । मो. 8709510817 । अंग्रेजी विभागाध्यक्ष, एसएनएम कॉलज, भैरवस्थान, मधुबनी। वरिष्ठ शोध अध्येता (कला एवं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) मैथिली, अंग्रेजी एवं संस्कृत साहित्यमे रुचि एवं लेखन।

सम्बन्धित जानकारीः

दहेज मुक्त मिथिला समूह पर लघुकथा प्रतियोगिता मे एहि कथा केँ प्रथम पुरस्कार प्राप्त भेल अछि। मैथिली जिन्दाबाद पर प्रकाशन लेल संचालिका वन्दना चौधरी द्वारा प्रेषित कयल गेल अछि।

पूर्वक लेख
बादक लेख

One Response to पुरस्कृत मैथिली लघुकथा – प्रमाणपत्र

  1. Krishna Kant Mishra

    नीक लघुकथा।
    सराहनीय।

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