अगबे घोषणा नहि, धरातल पर काज सम्पन्न करबाक मंत्र सेहो सीखू

घोषणा अनेक – काज कतेक
 
गौर करू त! डेली किछु न किछु नव घोषणा सोशल मीडिया पर देखैत छी अपने लोकनि। मैथिली भाषा, मिथिला संस्कृति, समाज या आर्थिक विकास सँ जुड़ल, मानव जीवन सँ जुड़ल कइएक सरोकार पर, संचार या फिल्म संग कला सम्बन्धित विषय सब पर सेहो, कतेको तरहक घोषणा ‘हम ई करब, हम ओ करब, एना हेतैक, ओना हेतैक, …..’ होइत रहैत अछि। उदाहरणक तौर पर आइये दिन भरि मे न्यूज फीड पर फेसबुक अथवा ट्विटर पर या व्हाट्सअप पर अहाँ ध्यान देबैक त निश्चित दर्जनों नव-नव घोषणा पढबाक-सुनबाक-देखबाक लेल भेटि जायत।
 
ई सिद्ध करैत अछि जे कर्मठताक प्रेरणा मिथिलाक अधिकांश सक्षम आ वीर सपूत मे कुटि-कुटिकय भरल रहैत छैक। सभक मोन मे पुरखा ‘जनक’ जेकाँ नव-नव बात केँ मानव हित लेल करबाक सोच सदिखन विकसित होइत रहबाक कारण एहि तरहक कीर्ति करबाक लेल लोक आगू अपने आप अबैत रहैत अछि। कहबियो छैक न! अपन पेट तँ कुकुरो भरैत अछि, सभक पेट कोना भरत ताहि लेल सोचनिहार असल परोपकारी थिक। समाजक हित लेल जे वीर बेटा आगू आबय ओकरे सँ त हम सब सम्मानित होइत छी। आर यैह कारण छैक जे नित्य नव-नव काजक जिम्मेदारी एहने कतेको वीर बेटा सब लैत रहैत अछि।
 
लेकिन कतेको बेर कयल घोषणा सँ लोक केँ पाछू हंटय पड़ि जाइत छैक। एहेन स्थिति-परिस्थिति बनि जाइत छैक जे ओ चाहियोकय घोषणा अनुरूप कार्यक्रमक क्रियान्वयन नहि कय पबैत अछि। हमर अपन अनुभव कहैत अछि जे निम्न कारण सँ कयल घोषणा पर ठाढ़ रहब कठिन होइत छैक –
 
क. स्थानीय सहयोगीक अभाव – कतेक बेर ई देखल अछि जे अहाँक कयल घोषणा अनेरौ कतेको लोक केर मोन केँ भीतर सँ प्रसन्नता देबाक बदला अहाँक लोकप्रियता भेटबाक बात सँ खौंझी छूटैत छन्हि। ओ अहाँक बारे कय रंगक आधारहीन कुतथ्य, व्यक्तिगत आदति या कोनो तरहक कमजोरी आदिक ढोल पीटिकय स्थानीय लोकक मोन मे अहाँक विरूद्ध जहर घोरि देता। आब जँ अहाँ अपन घोषणा अनुसार काज करय लेल पहुँचब, सीमित साधन आ समय केर सदुपयोग करय चाहब, त अहाँक विरूद्ध जे माहौल बनायल गेल अछि ओ एतबे बाधा ठाढ़ करत जे पहिने अहाँ ओकरे झेलू, काज बाद मे करब। एना मे कर्मठ आ वीर सपूत काफी हतोत्साहित होइत अछि। कतेको त लड़ियो-मरियोकय काज पूरा करैत अछि, मुदा अधिकांश लोक एहि तरहक उपद्रवी माहौल सँ अपना केँ तनावमुक्त रखबाक लेल दूर हंटि जाइत अछि। एकर कय गोट उदाहरण हम दय सकैत छी। समाजक कतेको नीक-नीक लोक अहाँक समर्पण केँ गारि पढैत देखा सकैत छथि।
 
ख. समय-साधनक सीमितता – कोनो कार्यक्रम लेल कुल ५ ‘क’ केर भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण छैक। १’क’ – कार्यक्रम योजना, २’क’ – केन्द्र, ३’क’ – कार्यकर्ता, ४’क’ – कोष, ५’क’ – क्रियान्वयन। एहि मे मैथिल समुदाय लगभग सब ‘क’ मे सम्पन्न छथि। मुदा एकटा ‘क’ सँ होइत छैक ‘कंजूस’। लोक व्यक्तिगत स्वार्थ मे एतेक बेसी लीन अछि जे ओकरा सार्वजनिक हित केर कार्य सँ अपन कोष चोरेबाक आदति पड़ि गेलैक अछि। यैह थिकैक कंजूसी। न समय देबय कियो चाहत, न कोष। बहुत कम समर्पित आ उदार लोक होइत अछि जे अपन किछु न किछु लगानी करैत सभक हित जाहि मे हेतैक ताहि मे बढि-चढिकय हिस्सा लेत। आइये ई कहि दियौक जे अहाँ १ टका लगाउ, परसू २ टका पाउ, फेर देखू भीड़! मुदा आमजनक मुद्दा-मामिला मे लोक अपन समय आ साधन खर्च करय सँ बहुत कतराइत अछि। काजक घोषणा करनिहार सेहो बहुत कम मे बेसी फायदा निकालबाक लेल योजना बनबैत अछि, धरि उपरोक्त कारण सँ सफलताक रेशियो (अनुपात) अत्यल्प छैक।
 
आरो छोट-छोट कारण छैक। लेकिन ओ सब ततेक बेसी घातक नहि। ऊपर लिखल २ महत्वपूर्ण कारण केर समाधान निकालि लिअ आ तेकर बाद कोनो काज मे भिड़ू। सफलता तय अछि।
 
सफलतापूर्वक काज संपन्न करबाक लेल एकटा विशेष कला सेहो होइत छैक। ई कला जेकरा मे आबि गेल ओ बुझू केहनो कठिन सँ कठिन काज केँ चुटकी बजाकय पूरा कय सकैत अछि। कारण एहि कला मे साम, दाम, दंड, भेद केर नीति पर बढैत अछि कर्त्ता। सोझाँ अपाटक आबि गेल त कचैर देत, मुदा काज फेल नहि होबय देत! रहत निठल्ला जेकाँ पड़ल, लेकिन ध्यान बगुला जेकाँ राखत चारूकात! कतय गदहगिरी के आ कियैक कय रहल अछि तथा ओकरा केना साइलेन्ट कयल जाय, एहि सब गुण सँ परिपूर्ण ओ कर्मठ सपूत काज पूरा होयबाक समय धरि अपन कार्य करय लेल दिन-राति एक कएने रहैत अछि। खाली जोर-जोर सँ साँस लैत हाँफैत देखेनाय ओकरा नीक नहि लगैत छैक। ओ साइड मे कतहु बैसलो रहत, लेकिन जगह पर काज अपन गति सँ चलैत रहतैक से बियौंत लगौने रहत! सफलता ओकर पैर केँ छूबिकय प्रणाम करैत हँसिकय ओकरा संग चियर्स करैत रहैत छैक।
 
एहि लेख मे हम ओहेन घोषणावीर केँ नहि गानि सकब जे अगबे घोषणा करैत रहैत अछि। ओकर नाम छीटखोपड़ी, अंग्रेजी मे fickle-minded – यानि क्षण-क्षण मे नीति, रीति, थीति बदलैत रहैत अछि… ओहेन लोकक घोषणा संभवतः होइते छैक रिक्त! विरले कहियो कोनो काज पूरा कएने भेटायत ओ। लेकिन, माहौल ओहो बनबैत अछि। ताहि लेल ओकरो धन्यवाद दियौक। कम सँ कम बजैत त अछि। ई त नहि जे चुपचुप खाली महकारीलाला जेकाँ फुस्टिक छोड़ि अहित बेसी करैत छी! हितचिन्तन करैत ओ बजिते अछि बेसी, ततबे टा फाल्ट छैक। हँ, तखन एहेन घोषणावीरक कारण किछु लोक आहत सेहो होइत छथि। ओ सब कटि जाइत छथि। से कटैत रहथु! धरि ई घोषणावीर सेहो चाही! कम सँ कम हिम्मत त करैत अछि न यौ जी! अस्तु! आब लेख केँ एतय विराम दी।
 
अन्त मे एतबे कहब – जमीन पर व्यवस्थापनक कला जाहि कोनो व्यक्ति मे रहैत छैक, ओकरा सब इमरजेन्सी केँ टैकल करय अबैत छैक। सफलता तखनहि भेटैत छैक।
 
हरिः हरः!!
बादक लेख

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