मिथिला गान : किसलय कृष्ण

#मिथिला_गान

जय तिरहुत विदेह नैमिकानन मिथिला..
सुशोभित जगभाल पर चानन मिथिला..

जाहि धरतीक सिया धिया, से सीतामढ़ीक भोर छी हम..
हिमवनसँ बाबाधाम चलैत मैथिली बोलैत ठोर छी हम…
रेणु केर खिस्सा खिसनी, छी गीत महुआ घटवारिन केर..
कोस कोस पर रंगविरही भाषा हम जऽन बोनिहारिन केर.
दुलरा दयाल,बहुरा गोढ़िन ,छिकियै हम्मे सिमरिया धाम..
राजा सलहेस, दीनाभद्री,हे लोरिक वीर शत शत प्रणाम..

जय इतिहासक उन्नत आनन मिथिला..
जय तिरहुत विदेह नैमिकानन मिथिला..

विद्यापतिक पदावली आ मांगैन केर कण्ठक राग छी हम.
मण्डन केर वेद पढ़ैत सुग्गा,अयाचि बाड़ीक साग छी हम..
ज्योति कारिखक भगतै हम्मे,छियै कारू के लहठा बथान.
सिंघेश्वरनाथक तीर्थ हम्में, बाबा विशु राउतक डीह मचान.
अकास चूमैत जनकपुरमे, गौरव रामानन्दक द्वार छी हम.
सप्तरी ईनुरवा मोरंग धरि,भाषा केर कलकल धार छी हम.

जय याज्ञवल्क्यक यज्ञप्रांगण मिथिला..
जय तिरहुत विदेह नैमिकानन मिथिला…

डाकवचन आ न्याय,सांख्य सन दर्शन केर हम धरती छी..
सोना उगलब छातीसँ फेरो,से बाट जोहैत हम परती छी..
राज बनैलीक इतिहास हमर आ गौरव प्राचीर दरभंगामे…
सौरा,कोसी, गण्डकी, कमला मिलन करी पावन गंगामे..

जय भारती भामतिक आंगन मिथिला…
जय तिरहुत विदेह नैमिकानन मिथिला…

– किसलय कृष्ण
३१ मई २०२०
कृष्णप्रभालय, लक्ष्मीनाथनगर,
राजकमल पथ, सहरसा

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