मिथिलाक मूल्यवान् धरोहरः भैरवस्थान – भैरव बाबाक स्थापनाक कथा सहित

धरोहर-परिचय

– सोहन कुमार झा

मिथिला के धरोहर: भैरव बाबा (भैरव स्थान)

हमर गाम समया-महिनाथपुर (जिला मधुबनी) के नजदीक (लगभग 1 KM पस्चिम) म अवस्थित छैथ, वाया-झंझारपुर, जिला-मधुबनी, बिहार।

एहि स्थान क बारे में निम्न लिखित बात प्रचलित छै, पढ़ल जाऊ :

एक समय के बात अछि, विश्वामित्र जी जखन राम – लक्ष्मण क संग मिथिला भ्रमण के लेल जायत छलैथ, तखन विश्वामित्र जी दू दिन अपन बहिन कोशी के ओहिठाम रुकल छलैथ, ओही समय में महादेव के छः महाकाल रूप में से एक बाबा भैरव महादेव के स्थापना केलैन। ओही दिन सँ ई स्थान भैरव बाबा के नाम सँ पूरा मिथिला में प्रसिद्ध भ गेल।

ई क्षेत्र हिमालय पहाड़ के नजदिक रहय के कारण, बाढ़ि के नगरी कहल जायत अछि, लोग सब के माननाय अछि जे बेर – बेर बाढ़ि ऐला सं भैरव बाबा के लिंग मईटिक तर में समा गेला। वर्तमान में ई शिवलिंग धरती सँ 6-7 फीट नीचा म अवस्थित ऐछ।

भैरव बाबा के जागृत होय के कहानी : —

कै बरख बीत गेल, लिंग के नामो निशान मिट गेल, मुदा शिव भोले शंकर के भक्ति से नील गाय माँ के सहारे फेर से भैरव पुनः जागृत भेला, सब दिन संध्या आ भोर गो माता भैरव बाबा के लिंग के ऊपर आवि के अपन स्तन के दुग्ध समर्पित करैत छली। ई दृश्य अपन आईखी से गामक एक दुटा लोक देखलक, एक कान से दोसर कान सुनते पूरा इलाका में शोर भगेल ।

एतबा में गंहवाईर के राजा के सेहो पता चली गेलेन, ओ अपन सेना दल के संग आबी के, ओही घनघोर जंगल म स बाबा भैरब के लिंग के खोदअ लगला, जे अहि लिंग के लऽके हम अपना ओहिठाम स्थापना करव, खोदैत- खोदैत साँझ परि गेल, लेकिन लिंग ओही ठाम सँ निकलय के नाम नही लेत छल, सब आदमी सब वापस चैल गेला ई कहिके जे हम सब फेर प्रात भने आयब।

अगिला दिन जखन ओ राजा एलायथ त बता देलखिन, जे मंदिर निर्माण कार्य एतहि प्रारंभ कायल जाय, ओही दिन से ई क्षेत्र बाबा भैरव के नगरी कहाबई लागल , जकरा सब भैरव स्थान के नाम से जानैत अछि ।

ओही दिन से बाबा भैरव के प्रागण में १००० के संखया में दर्शन यात्री आबैत छैथि और अपन मनो कामना क पूर्ण करैत छैथि, जिनका दिन में समय नही मिलैत छैन ओ ब्यक्ति संध्या समय आरती के आबिके के अपन मनोरथ पूरा करैत छैथ।

सावन में और फागुन के शिवरात्रि के दिन दूर -दूर से जल लऽके बाबा भैरब के समर्पित करैत छैथ, और अपन जीवन के सार्थक बनाबैत छैथ।

एहि स्थानक चौहद्दी :

बाबा भैरव के मंदिर प्रसिद्ध बाबा विदेश्वर स्थान सँ 5 KM उत्तर, भगवती पुर सँ 10 KM दक्षिण-पूर्व, लोहट चीनी मिल से 12KM पूर्व, आर पवित्र कमला नदी से 3KM पस्चिम म स्थित ऐछ।

बाबा भैरव के नजदीक बसल गाम –

मेंहथ, समया, महिनाथपुर, पट्टी टोल, कोठिया, हैंठी-बाली, नरुवार, रैयाम, भराम, नारायणपुर, रूपाली, जमथैर, लोहना, कथना, मोहनपुर, विहनगर, इत्यादि।

बाजु भैरव बाबा की जय 🙏🙏

कथा हमर ग्रामीण सह अग्रज संजय बाबा के सौजन्य सँ लेल गेल ऐछ। किछु त्रुटी होय त क्षमा करब।

पहिल चित्र 2-4 बरख पहिलका छी, आब बाबा मन्दिर के जीर्णोद्धार भ गेल ऐछ, दाहिना कात अखुन्का चित्र ऐछ, संगहि पवित्र शिव-लिंग।

हर हर महादेव, जय माँ काली

पूर्वक लेख
बादक लेख

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