फोटो फैशन – एक्जीविशनक पैशन

ओना तऽ फेसबुक सच मे अभिव्यक्तिक स्वतंत्रता आ विचार प्रवाह मे अपन बात सबकेँ निर्भीकताक संग रखबाक मौका दय एकटा नव क्रान्ति आनि देलक अछि, एहि सँ पूर्वो ओर्कुट, याहू, गुगल आदि अनेको सामाजिक संजाल इन्टरनेट केर माध्यम सँ वैचारिक प्रवाहक संग भावना आदान प्रदान करबाक लेल लोक मे एकटा नव प्रेरणाक संचरण कएने छल।

फोटो खिंचेबाक परंपरा ओना तऽ बहुते पुरान छैक, मुदा उपरोक्त स्वतंत्र विचरण मे फोटो सहित पोस्ट करबाक एकटा अलगे महत्त्व छैक। शहरी जीवन हो वा ग्रामीण, सब ठाम लोक अपन स्मृतिकेँ ठोस बनेबाक लेल फोटो सहित वैचारिक तथा भावुकता सँ परिपूर्ण अभिव्यक्ति अपन-अपन आइडी मार्फत दोसर तक पहुँचेबाक कार्य करैत अछि। एहि मे लाइक्स आ कमेन्ट्स केर मात्रा बेसी हो एकरा लेल होड़बाजी सेहो चलैत छैक। फेसबुक जगत् मे सेहो यथार्थ जगत् जेकाँ वर्ग-विभेद स्वाभाविके रूप मे देखय लेल भेटैत छैक। राष्ट्र प्रमुख प्रधानमंत्री सँ लैत नेतृत्ववर्गक एक सँ बढिकय एक व्यक्ति आ आम जनमानस तक केर लोक द्वारा अपन वैचारिक प्रस्तुति लेल सामाजिक संजालक महत्त्व अकाट्य छैक। एहि मे फेसबुक केर लोकप्रियता सबसँ बेसी देखल जाइत छैक, कारण एकरा चलेबाक लेल अनेको तरहक सुविधा (फीचर्स) आदि मौजूद छैक जे साधारण जनमानसक समझ मे सेहो आबि जाइत छैक। केकरो विचार पढला पर नीक लागि गेल तऽ शेयर कय सकैत छी, कोनो तरहक जानकारी अपन मित्रवर्ग वा बेसी सँ बेसी लोक धरि पठेबाक अछि तऽ नाम टैग कय सकैत छी, कोनो तरहक आयोजन आदि करबाक अछि तऽ इवेन्ट पेज बना सकैत छी, अपन कोनो मुहिम संग लोक केँ जोड़ि समाज सेवा वा राष्ट्र सेवा वा कोनो आन्दोलन आदिक संचालन करबाक अछि तऽ समूह मे चैटिंग वा सामूहिक ग्रुप केर निर्माण, पेज निर्माण आदि अनेको तरहक सुविधा फेसबुक पर उपलब्ध भेटैत छैक।

बहुत रास बात सार्थक छैक तऽ कतेको रास निरर्थक कमजोरी सेहो देखल जा रहलैक अछि। फेसबुक पर फोटो अपडेट करबाक लेल कतेको लोक मे फोटो फैशन आ एक्जीविशन पैशन एकटा रोग समान सेहो विकसित भऽ रहलैक अछि। जीविकोपार्जन लेल अत्यावश्यक कार्य सँ विमुखो रहैत लोक फेसबुक स्टेटस पर चमचिकली बनबाक लेल बेहाल देखल जाइछ। दिखाबाक प्रदर्शनी आ मूल्यहीन कटाउझ सेहो देखल जाइछ। कोनो सोशियल काउज केर गंभीरता केँ बिना बुझनहियो लोक ओकरा ततेक फज्झेत करैत छैक जे ओकर यथार्थता कम भऽ जाइत छैक। देखौंसक मात्रा एतेक बढि जाइत छैक जेकरा सीमा मे बान्हब तक संभव नहि भऽ पबैत छैक। खाली फोटो खिंचेबा तक मुद्दाक गंभीरता रहल, बाद बाकी सार्थक परिवर्तन वा क्रान्ति लेल कोनो तरहक वचनबद्धता नहि रहि जायब एहि फैशन आ पैशन रोग केर लक्षण सब समाजक विकास मे बाधक बनि रहलैक अछि। जेन्युनिटी बढेबाक कोनो नियंत्रक मापदण्ड ओतेक कारगर नहि छैक। हलाँकि फोटो रिपोर्ट करब, कोनो एब्युजर केँ ब्लाक करब, हेल्प टीम केँ शिकायत करब, आदि फीचर्स रहितो दुरुपयोग केँ रोकनाय संभव नहि भऽ पबैत छैक।

photo nashaतथापि, नकारात्मकता सँ बहुत ऊपर सकारात्मकताक रहब वर्तमान समय मे एहि संयंत्र केँ अत्यन्त लोकप्रिय बना रहलैक अछि। एहि सँ मानव संस्कार प्रत्यक्षत: प्रभावित सेहो भऽ रहलैक अछि। जोर हमेशा सार्थकता बढेबा दिशि हेबाक चाही, ई प्रेरणा सहजहि सबकेँ भेटैत छैक। आब संलग्न फोटो जे साभार रूपेश वत्स (भागलपुर) केर वाल सँ लेल गेल अछि, जाहि मे स्वयं रूपेश वत्स केर विचार आ जनमानस केर ध्यानाकर्षण व्यंग्यात्मक शैली मे कैल गेलैक अछि, ओ स्वत: प्रमाणम् परत: प्रमाणम् केँ चरितार्थ करैत छैक। शहर केर महापौर आ संग मे कतेको समर्थक वा कार्यक्रम आयोजक एकटा सामूहिक फोटो खिचा रहलैक अछि, विषय केन्द्र मे पर्यावरणक सुरक्षा प्रति साकांछ रहब छैक, एकटा छोट टा प्लास्टिक मग ६ गोटा मिलिकय पकड़ने छैक आ ताहि मे सँ चुरुक भैर जल गाछक जैड़ मे देल जा रहलैक अछि, पर्यावरणक सुरक्षा लेल ई एकटा वृक्षक रोपनाय शायद पर्यावरणकेँ कोनो तरहक मदति नहि पहुँचा सकैत छैक, मुदा संवाद देबाक लेल ई एकटा साधन बनि गेलैक जे आरो लोक सब एकर देखादेखी अपन-अपन क्षेत्र मे प्रदर्शनकारी स्वाभावो सँ कम सँ कम मानव मूल्य केँ बुझय आ ताहि तरहें आचरण करय।

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