लघुकथा – दामिनी केर जीवन

– ई. राघव मिश्र

हम राघव मिश्रा आइ लाकडाउन मे मातृभाषा मैथिली मे एगो प्रस्तुति राखि रहल छी। अहाँ सभक आशीर्वाद के आकांक्षी छी।

दामिनी नामक एगो लड़की कंकड़बाग, पटना मे कोचिंग करैत छल। एकदिन किछु मनचला द्वारा ओकरा अपहृत कय लेल गेलैक। दामिनी के मुंह एतेक जोर स बान्हल गेल रहय कि ओ चिचिया तक नहि पाबि रहल छल। ओकरा मारुति वैन मै बंद कय के एगो जंगल में बनल घरक एक कोठरी मे बंद क देल गेलैक। बहुत दिन तक जखन दामिनी ओकर सभक विरोध केलाक बाद ओकरा ओहि कोठरी में बंद कय क ओकर चेहरा पर तेजाब छींटिकय ओतहि मरय खातिर छोड़ि अपहरण करयवला गुंडा सब भागि गेल। असहाय, असगर, एसीडक तीक्ष्ण जलन केँ सहैत दामिनी जीवन सँ संघर्ष करैत रहल। किछु दिन बाद एकेगो कोठरी में बंद रहबाक कारण दामिनीक व्यवहार एगो मानसिक बीमारी स ग्रसित रोगी जेकाँ सेहो भ गेलैक। कनैत खीझैत ओकर रुह काँपि गेलैक लेकिन समाधान सिवाये अपन आत्मबल बचबाक उपाय तक नहि। अन्त में स्वयं केर दृढ़ आत्मशक्ति सँ हिम्मत जुटा ओहि स्थान सँ मुक्ति पाबि जाइत अछि। तमाम बाधा के पार पाईब जाइत छय।

जेना एसिड अटैक के बाद भले ओकर चेहरा बदसूरत भ जाय छय लेकिन ओकर अंदर के स्वावलंबी मनुष्य नय जवाब दय छय, अपन जीवन केँ ओ हिम्मत आ संघर्ष सँ एतेक सफल बना लैत अछि जे आय ओकर दामिनी वेलफेयर नामक संस्था अछि जाहिके तहत १००० बच्चा प्रतिवर्ष मुफ्त शिक्षा पबय य। किछु समय पहिले राष्ट्रपति द्वारा उत्कृष्ट साहस आ उत्कृष्ट कार्य लेल एगो बहुत निक सम्मान स ओकरा सम्मानित कयल गेलैक। धन्यवाद🙏💕✍✍✍✍राघव मिश्रा!

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