दिल्ली मे दंगा – पूर्ण मीमांसा भाग २

विचार

– प्रवीण नारायण चौधरी

शाहीनबाग मोडेल केर राजनीति

भारत केर संसदीय पद्धति द्वारा पास कयल गेल ‘सीएए कानून’ केर विरोध मे विपक्ष केर हार भेला उपरान्त जानि-बुझिकय कानून केर सम्बन्ध मे अनेकों कपोलकल्पित कयास (अन्दाजी आकलन-व्यकलन) आधारित जोखिम सँ वर्ग विशेष केँ भ्रमित कयल गेल। परिणामस्वरूप एहि नव कानून केर विरोध मे जहाँ-तहाँ हिन्सक-उग्र आन्दोलनक खबरि आयब शुरू भेल। सरकार आ आम पब्लिक मे एहि तरहक विरोध केँ नियंत्रण मे अनबाक एक प्रकारक विस्मयकारी स्थिति शुरुआत मे बनल। संवैधानिक तौर पर कोनो सरकारी निर्णय अथवा संसद सँ पास कानून केर विरोध कयल जा सकैत अछि, लेकिन ओकर उग्रता जन-धन केर क्षति धरि पहुँचय त स्वाभाविक छैक जे एकर प्रभाव आमजन व सरकारी सुरक्षा निकाय सब पर पड़ैत छैक। उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा एहि उग्र आन्दोलन प्रति कड़ा कदम उठबैत उग्र हिन्सक भीड़ केँ नियंत्रण मे लेबाक निर्णय आ कार्रबाई ओहि ठामक स्थिति केँ सामान्य बनेबाक दिशा मे कारगर सिद्ध भेल। ओतहि दिल्ली, केरल, व देशक अन्य भाग मे सेहो शान्तिपूर्ण आन्दोलन – सीएए केर विरोध मे धरना, अनशन, आरम्भ भेल।

दिल्लीक एक ‘शाहीनबाग’ मे जमा बूढ सँ बच्चा धरिक महिला समुदाय एहि कानून केर विरोध मे शान्तिपूर्ण अनशन आरम्भ कयलक, एहि मे बहुल्य मुस्लिम समुदायक संग किछु आरो समुदायक भागीदारी रहल देखायल। ऐन समय मे दिल्ली विधानसभा चुनाव आबि जेबाक कारण व भारतीय टेलिविजन न्यूज चैनल पर दिन भरि ‘शाहीनबाग’ केन्द्रित समाचार प्रमुखता सँ प्रसारित होयबाक कारण एकर मनोवैज्ञानिक असर देश-विदेश सब दिशा मे होयब आरम्भ भऽ गेल। केन्द्र मे शासन चलेनिहार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन केर प्रमुख राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी अपन हिन्दूत्वक एजेन्डा पर सत्ता मे एबाक बात लेल पहिले सँ चर्चित रहल विदिते अछि, भाजपा या राजग केर पक्ष मे ई प्रदर्शनकारी समुदाय कहियो वोट बैंक नहि रहल आर पास कयल गेल कानून सेहो ईस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश सँ मुसलमान वाहेक अन्य ६ धर्मक लोक लेल भारतीय नागरिकता प्राप्त करबाक बाट खोलल जेबाक नीति पर अडिग रहबाक कारण शाहीनबाग मे सरकारक कोनो नुमाइन्दा कहियो कोनो तरहक वार्ता लेल नहि गेल, नहिये दिल्ली सरकार कहियो ई हिम्मत कय सकल जे ओ अपन कोनो प्रतिनिधि अनशनकारी केँ रिझेबाक लेल गेल।

एम्हर न्यूज चैनल पर दिन भरिक चर्चित खबरि केवल आ केवल शाहीनबाग होयबाक कारण बहुल्य हिन्दू धर्मावलम्बी केँ सीएए केर समर्थक बना देलक, जखन कि शंका-उपशंकाक भँवर मे फँसल बहुल्य ईस्लाम धर्मावलम्बी मे एहि कानून सँ अपन भविष्य पर खतरा एबाक स्पष्ट स्थिति पहुँचय लागल। शाहीनबाग मोडेल पर मुम्बई, लखनऊ, आदि विभिन्न स्थान पर महिला समुदायक समूह सब सड़क पर अनशन करबाक कार्य शुरू कय देलक आर ‘शाहीनबाग’ छूटल राजनीति केर एकटा नवका शिगूफा बनि गेल…! शाहीनबाग मे विपक्षी नेता सब जाय-जाय अनशनकारीक समर्थन मे आ सीएए कानून लाबि सत्तापक्ष द्वारा धर्मक नाम पर लोक केँ विभाजित करबाक आरोप आदि लगायल गेल, संविधानक मर्म बिपरीत धर्म आधारित नागरिकता उपलब्ध करेबाक आरोप सेहो लगायल गेल। भारतक धर्मनिरपेक्षता पर खतरा आ एतय तक कि मुसलमान समुदाय केँ सीएए, एनआरसी आदिक अनेकों उलझल बात कय भ्रमित कय विरोध केँ आरो तेज करबाक वातावरण बनायल गेल। तहिना सत्तापक्ष भाजपा-राजग दिल्ली मे चुनावी प्रचार-प्रसार मे शाहीनबाग मोडेल पर कड़ा प्रहार करैत विपक्ष द्वारा भ्रमित करबाक सफाई दैत, दिल्लीक सत्ता पर बैसल आम आदमी पार्टी पर सेहो षड्यन्त्र करैत मुस्लिम वोटबैंक राजनीति लेल शाहीनबाग केँ प्रायोजित करबाक आरोप लगायल गेल।

दिल्लीक चुनाव उपरान्तो जखन शाहीनबाग केर अनशन यथावत रहल, एतेक तक कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा वार्ताकार केँ पठेलो पर अनशनकारी द्वारा कोनो तरहक सहजताक जबाबदेहिता नहि देखेलापर शाहीनबाग विरुद्ध आ सीएए कानूनक समर्थन मे सेहो उग्र प्रदर्शनकारी ध्रुवीकरण होयब आरम्भ भेल। आर, जखनहि जनता मे विभाजन आओत त ई सुनिश्चित अछि जे ओतय दंगा भड़कबे टा करत। आर, दंगाक तैयारी कोन तरहें पहिने सँ शाहीनबाग-समर्थक सब कएने छल तेकर प्रमाण ड्रोन कैमरा द्वारा – लोकक मोबाईल सँ खींचल गेल फोटो आ वीडियो सँ, सीसीटीवी कैमरा मे कैद दंगाई गतिविधि आदि सँ स्पष्टे अछि। राजनीति केर ई विद्रुपता भारत सन देश मे स्वतंत्रताक वर्ष १९४७ सँ चलैत रहल अछि जेकरा रोकबाक लेल धर्मनिरपेक्षता टा हथियार छल, लेकिन जाहि तरहें एहि धर्मनिरपेक्षता केर छद्म स्वरूप पर सत्ता संचालन कय मुस्लिम तुष्टिकरण आ सत्तारोहण कयल जाइत रहल अछि, एकर दुष्परिणाम निर्दोष जनता केँ दंगा झेलिकय चुकबय पड़ैत अछि। एकर समाधान एक्के टा अछि जे जनता आपस मे धर्मनिरपेक्ष बनिकय भाईचारा कायम राखय, अपन-अपन धर्मक रक्षा लेल सब केँ अधिकार छैक, दोसरक धर्म प्रति सहिष्णुता, स्वीकार्यता व सम्मान करब सभक परम कर्तव्य छैक। मात्र एहि तरहक समन्वय स्थापित भेलापर भारत मे हिन्दू-मुस्लिम दंगा रुकि सकैत अछि, अन्यथा १९४७ केर ओ धर्मआधारित विभाजनक घाव मे कखनहुँ पीज भरि जायत आर एकर असह्य पीड़ा भारतक आम जनता झेलैत रहत। भारत मे जाहि तरहें विगत १००० वर्ष मे आक्रान्ता – ईस्लामिक शासक द्वारा चढाई आ मन्दिर तोड़बाक, जबरदस्ती धर्मान्तरण करेबाक आ भारतक मौलिक हिन्दू धर्म आ संस्कृति प्रति घाव देबाक दुरूह कार्य सब कयल गेल छैक, ओहि कारण ईस्लाम धर्म प्रति स्वाभाविक विरोध आ आशंका बहुल्य हिन्दू धर्मावलम्बी जनमानस सँ नहि जा सकैत अछि। एहि दिशा मे नीतिकार सब केँ समुचित ध्यान दैत, समन्वय केर स्थिति उत्पन्न कय शान्ति व सौहार्द्रता कायम राखब मात्र राजधर्म होयत।

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