प्रदेश २ सरकार द्वारा प्रदेशक भाषा व अन्य मौलिक सरोकार प्रति अवहेलनाक आरोप

जनकपुर, २२ जनवरी २०२० । मैथिली जिन्दाबाद!!

मैथिली साहित्यकार सभा जनकपुर द्वारा प्रदेश २ केर सरकार प्रति असन्तोष व्यक्त करैत मैथिली भाषा, साहित्य व अन्य मुख्य-मौलिक सरोकार प्रति अनदेखी करबाक आरोप लगायल गेल अछि। एक विज्ञप्तिक मार्फत सभाक सभापाल एहि तरहक असन्तोष जतबैत प्रदेश सरकार सँ कय तरहक सहयोगक अपेक्षा कयला उत्तर कोनो तरहक सदाशयता नहि भेटबाक बात ओ कहलनि अछि।

सभापाल प्रेम विदेह ललन कहलनि अछि जे दुइ वर्ष नंघलाक बादो प्रदेशक नामकरण, स्थायी राजधानी आ प्रदेशक कामकाजक भाषा निर्णय नहि क सकनाइ प्रदेश २ सरकारक असक्षमता आ लापरवाहीक लक्षण प्रकट करैत अछि। प्रदेशक बहुसंख्यक जनताक भाषा मैथिली आ भोजपुरी केँ कामकाजी भाषा बनएबाक संग-संग कला, साहित्य, संस्कृतिक संरक्षणक लेल बहुतो संघ-संस्था द्वारा बेर-बेर ज्ञापन-पत्र ओ प्रस्तावना पत्र देलाक बादो कोनो वास्ता नहि कएल गेल अछि। प्रदेश २ सरकारक नेपाली भाषाक गुलामी आ हिन्दी भाषाक दलालीक गतिविधि उजागर भ गेल अछि। तेँ मैथिली साहित्यकार सभा प्रदेश सरकारक एहन भाषिक गुलामी, दलाली, असक्षमता आ लापरवाहीक घोर भर्त्सना करैत प्रेस विज्ञप्ति जारी कयलक अछि। संगहि भेदभावक विरुद्ध लड़एबला प्रदेश २ सरकार स्वयं अपन प्रदेश अंतर्गतक भाषा, साहित्य, कला अभियानी आ ओहन संघ-संस्था संग भेदभाव करैत देखायल अछि। मुँह देखि क मुंगबा परसैत आयल अछि। अपन प्रशंसक, पार्टीक लोक, नजदीकी रहल आनो प्रदेशक साहित्यकार, पत्रकार, कार्यक्रम आयोजक केँ लाखक लाख अनुदान राशि दैत अछि। राजनीतिक व्यक्तिक आदेश-अनुरोध पर पहुँचबला संस्था सभ केँ पाँच सँ दस लाख तक बँटैत अछि। बिना पहुँचबला संस्थासभ भाषिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक पैघो कार्यक्रम करओ त खुसामदो कएलापर एको टका प्राप्त नइँ होइत छैक। प्रदेश सरकारक एहन विभेदपूर्ण सहयोग वितरणक भर्त्सना सेहो साहित्यकार सभा द्वारा कएल गेल अछि।

विज्ञप्ति द्वारा कय टा उदाहरण दैत प्रदेश सरकार द्वारा कयल गेल विभेदक रहस्योद्घाटन करैत प्रदेशक नामकरण आ भाषानीति पर पर्यन्त नेपालक नव संविधानक देल स्पष्ट खाका अनुरूप कोनो तरहक निर्णय नहि कय सकबाक नीयतपूर्ण अवहेलनाक बात उठायल गेल अछि। विदित हो जे मधेश आन्दोलन व अन्य मुक्तिगामी आन्दोलन सँ ‘एकल भाषा नीति’ केर कारण ‘एकल पहिचान’ स्थापित करैत नेपालीभाषाभाषी वाहेक अन्य समस्त मातृभाषाभाषीक पहिचान केँ दोसर दर्जाक मानैत एहि सँ निजात दियेबाक संघर्ष कतेको वर्ष धरि भेल, सैकड़ों लोक अपन जानक बाजी लगबैत शहादति तक देलक, लेकिन ताहि संघर्षक बल सँ प्राप्त संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र मे प्रदेश २ सरकार एतेक निकम्मा आ निठल्ला होयत से कियो अपेक्षा नहि करैत छल। मैथिली साहित्यकार सभा विगत कइएक मास सँ एहि सब विन्दु पर प्रदेश २, प्रदेश १ आ संघीय सरकारक विभिन्न आयोग व सम्बन्धित नीतिकार निकाय सँ न्यायोचित मांग करैत आबि रहल अछि। प्रदेश २ सरकार केर अनदेखी आ अवहेलनाक भर्त्सना करैत शीघ्रातिशीघ्र उपयुक्त डेग उठबैत एहि दूरगामी विषय सभक समाधान लेल पुनः मांग सेहो कयल गेल अछि।

 

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One Response to प्रदेश २ सरकार द्वारा प्रदेशक भाषा व अन्य मौलिक सरोकार प्रति अवहेलनाक आरोप

  1. प्रेम विदेह

    बहुत बढ़िया विश्लेषण सहितक समाचार प्रकाशित भेल अछि।मैथिली साहित्यकार सभा दिस सँ आभार प्रकट करैत छी।
    – प्रेम विदेह

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