मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०१९ – कड़ी १ः प्रवीणक किछु अनुभूति

विचार

– प्रवीण नारायण चौधरी

मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल – जानकी कृपाक अद्भुत दर्शन

मैथिली मे कोनो वृहत् स्तरक कार्यक्रम करबाक लेल त्याग, बलिदान, योगदान, आह्वान, सम्मान आदिक अद्भुत संगम चाही। सफलता तखनहि अपूर्व भेटैछ जखन निश्छल आ निश्चल मोन सँ आयोजन कयल जाय। कतहु सँ कोनो प्रकारक वापसीक अपेक्षा रखने बिना – सिर्फ आ सिर्फ तात्विक उपलब्धि लेल, सामूहिक कल्याण आ हित लेल, समस्त सृजनकर्मी आ भाषा-साहित्यक समान महत्वपूर्ण विषय लेल, अपन मैथिली आ मिथिलाक पहिचान केँ वैश्विक मंच पर आगू बढेबाक लेल – एहने कय गोट अनमोल उद्देश्य ओ लक्ष्य केँ पूरा करबाक वास्ते “मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल” विगत किछु साल सँ आयोजन भऽ रहल अछि।

२०१४ सँ ई आयोजन बिहारक राजधानी पटना सँ शुरू भेल आर बहुत जल्दी अपन निरपेक्ष स्वभाव आ प्रवृत्तिक कारण सब दिशि पसैर गेल। २०१४, २०१६, २०१८ आ २०१९ – ई चारि गोट आयोजन मूल परिकल्पक संस्था “मैथिली लेखक संघ” द्वारा क्रमशः पटना, पटना, दिल्ली, दिल्ली मे कयल जा सकल अछि। परञ्च एकरे दोसर, तेसर, चारिम, पाँचम कइएक वर्सन क्रमशः विराटनगर (अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली कवि सम्मेलन २०१५, अन्तर्राष्ट्रीय मैथिल सामाजिक अभियन्ता सम्मेलन २०१६), जनकपुर (मैथिली आर्ट एण्ड लिटरेचर फेस्टिवल २०७५, २०७६ एवं अन्तर्राष्ट्रीय नाटक महोत्सव) संग सहरसाक मिथिला आर्ट व लिटरेचर फेस्टिवल, चेतना समितिक अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली संस्था सम्मेलन (९-१० मार्च, २०१९) आदि आयोजित भेल अछि।

मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल जाहि प्रारूप केँ प्रचारित-प्रसारित केलक, वास्तव मे ओहि मे कय गोट महत्वपूर्ण विषय पर विमर्श होइछ। ताहि विमर्श मे एक सँ बढिकय एक विमर्शी लोकनि सहभागी बनि अपन प्रखर आ ओज सँ भरल विचार सब रखैत छथि। एहि तरहक विमर्शरूपी सूर्यक किरण ओ आभा सँ सौंसे मिथिला मे एकटा नवजागरण भऽ रहल अछि। अत्यन्त मरणासन्न स्थिति मे पर्यन्त मिथिला केँ अपन मौलिक विन्दु पर एकत्रित होइत देखल जा रहल अछि। हालांकि पोंगा पंडित आ अपनहि अहं मे आकंठ डूबल कतेको पोप साहेब सब एखनहुँ अपनहि मे हेरायल छथि, मुदा तेहेन लोक केँ असगरे हुनकहि दुनिया मे छोड़ि एकटा समग्र स्थिति आ से बहुत सकारात्मक रूप मे स्थापित करैत अछि ई सारगर्भित आयोजन।

सन्दर्भ – मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०१९ आ जानकी कृपा

मैथिली लेखक संघ – एकटा पंजीकृत संस्था, बहुत रास नियम-उपनियम, वैधानिक धारा-उपधारा आदि मे जकड़ल साहित्यकार-रचनाधर्मी लोकनिक समूह थिक। सरकारी पाय नहि लेब, राजनीतिक लोक केँ मंच पर नहि चढायब, विशुद्ध भाषा-साहित्य-सरोकार पर केन्द्रित रहब, मैथिली-मिथिलाक ब्रान्ड केँ विश्वपटल पर स्थापित करब…. महोत्सव मनायब… से सब करब, धरि समूहक भीतर जे निर्णय अछि ताहि सँ ऊपर नहि जायब। विचित्र अवस्था मे अछि ई संस्था। पटना मे दिग्गज लोकनिक अपन मर्यादा आ प्रतिष्ठा छन्हि ताहि बले निर्मित ई संस्थाक दृष्टि मे विश्वयात्रा पूरा करबाक लेल किछु लचीलापन आ खुल्लापन (पारदर्शिता) केर अभाव देखा रहल अछि। नहि त सदस्यताक विकल्प उपलब्ध, नहिये सांगठनिक सहभागिता केर… तखन पता नहि कोन बले एतेक पैघ सपना ई संस्था देखैत अछि! तथापि एतेक पैघ क्रान्तिकारी काज पूरा कय लैछ। यैह थिकैक जानकी कृपा। कतेको ठाम लोकप्रिय कहावत ‘राम भरोसे हिन्दू होटल’ कहल गेलैक लेकिन हम अपन आस्थाक कारण एतय भरोसे केर कोनो लेशोमात्र नहि देखि साक्षात् जानकी कृपा केर अनुभव पिछला दिल्ली आयोजन सँ कय रहल छी।

पैछला वर्ष सेहो ई होयत, ओ होयत, कि होयत, नहि होयत, के औता, नहि औता… आदि महत्वपूर्ण बात कार्यक्रम सँ १० दिन पहिने धरि केकरहु ज्ञात नहि भेल रहैक। बस मोटा-मोटी बात, किछु योजनाकार अपन निजी पहुँच सँ चारुकात डिगडिगिया बजाकय तय कय लेने छलथि आर हुनकहि लोकनिक वाणी-वचन पर लोक सब ४-४ मास पहिनहि सँ टिकट सेहो बूकिंग करा लेने छलाह। एहि वर्ष त आर नौटंकी भऽ गेल। गोटेक मास पूर्वहि तारीख तय कयल गेल, फेसबुक पर पोस्ट कयल गेल, आर विश्वास सँ भरल सहभागी लोकनि भटाभट टिकट बूकिंग करा लेलनि। फोन पर जानकारी लेबय लगलाह जे हमर टिकट बनि गेल, सहभागिता होयत कि नहि…। पुनः वैह गम्भीर योजनाकार आ परिकल्पक लोकनि सब बात अपना-अपना तरहें दिमागे-दिमाग जोड़ि लेलनि आर अन्त मे कार्यक्रम सँ ४ दिन पहिने किछु लोकक चिट्ठी बनल, पहुँचायल गेल, किछु केँ किछु नहि, मोन आशाबाटी मे तकिते रहि गेल…. जेकर भड़ास सेहो कतेको लोक फेसबुक आदि पर निकालि रहला अछि।

एहि उहापोहक स्थितिक मूल कारण रहल अछि “दिल्ली समान महानगर मे आयोजन आ फंडक अकाल”। पिछला वर्ष एहि कार्यक्रम मे जबरदस्ती ‘मैथिली भोजपुरी अकादमी’ घुसल रहय, बड़का-बड़का बात बनौने रहय, देरिये सही सब सहभागी केँ ५ हजार टको देने रहय, बड़-बड़ बात भेल रहय। कियो गोटे समूचे आगन्तुक केर ३ दूने ६ साँझुक भोजन आ नास्ता-चाहक इन्तजाम समूचा अपनहि दम पर कय देने छलाह। पानिक इन्तजाम अफरातफरी मे छूटि गेल रहैक, तखन कियो दाता ताहू लेल ठाढ भऽ पानि देने रहथिन। माने कि सब काज भेल मुदा अफरातफरी मे! मुदा एहि बेर त मैथिली भोजपुरी अकादमी भरि साल योजना सब बनबैत आखिरी पहर मे जुआ पटकि देलक। जुआ पटकबाक मुख्य कारण अनेक छैक। एहि पर अलग सँ लिखब। जुआ पटकि देलापर कार्यक्रम सँ मात्र चारि दिन पहिने दिल्लीक मुख्य व्यक्तित्व ओ नेतृत्व सब बैसलाह आ सब कियो एकमुष्ट रूप सँ कहलखिन जे ई कार्यक्रमक तारीख केँ बढायल जाय… मुदा आयोजक समितिक महासचिव श्री विनोद कुमार झा फेस्टिवल मे सहभागी लोकनिक टिकट कटेबाक आ भाग लेबाक स्थिति सँ सुजान रहबाक कारणे डेट बढेबाक बात केँ स्वीकार नहि कयलनि, कार्यक्रम त हेब्बे करतैक आ से जेना होइक ओ बजलाह। ताहि पर दिल्लीक युवा नेतृत्व मे एक गोट निरपेक्ष आ समर्पित चेहरा “श्री तपन झा” बजलाह जे जखन सरकार (विनोद बाबू) केर ई निर्णय छन्हि त बाकी काज हम सब करब आ कार्यक्रम अवश्य हेतैक। यैह भेल जानकी जीक परमकृपा – तपन बाबू आ समस्त सहयोगी समाज तैयार भेलाह आ मात्र ३ दिनक गैप मे सारा इन्तजाम कय लेल गेल। वाह! बेर-बेर यैह शब्द निकैल रहल अछि।

भव्यतम् रहल ई आयोजन

एहि बेरुक आयोजन मे कोनो तरहक घोंघाउज नहि, विवाद नहि, शान्तिपूर्वक ढंग सँ बहुत नव लोक आ सरोकारवला केँ समेटैत कार्यक्रम पूरा कयल गेल। विदुषी महिला लोकनिक मंचीय प्रस्तुति वास्तव मे प्रशंसाक पराकाष्ठा पर स्थापित भेल। मंच संचालन सँ लय विषय-विमर्श मे प्रस्तुति करबाक गार्गी-मैत्रेयी परम्परा मानू २०१९ मे मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल पूरा केलक। युवातुरक सर्जक केँ आगाँ बढि अपन प्रस्तुति देबाक मौका त देबे केलक, संगहि एक पुश्त सँ दोसर पुश्त मे जिम्मेदारी हस्तान्तरणक अपूर्व प्रयास भेल। वाहियात समावेशीकरण सँ इतर एमएलएफ सिर्फ क्वालिटी आ स्तरीयता केँ ऊपर रखिते अछि, विमर्शक विषय आ नव प्रयोग सेहो अत्यन्त सफल रहल। गोटेक बात एहि वर्ष नहि भऽ सकल। रजनी-सजनी यानि गीतनाद आ नाटक-फिल्म केर प्रदर्शन नहि भऽ सकल। पुस्तक प्रदर्शनी भेल। चित्रकला प्रदर्शनी नहि भऽ सकल। जे भेल से कम नहि भेल। अपूर्व भेल। बधाई!

आन्तरिक संयोजन मे लागल समस्त मित्र-बंधु लोकनि केँ हृदय सँ आभार। संजीव जी, किसलय जी, रामबाबू भाइ, मणिकान्त भाइ, मनोज श्रीपति भाइ, तपन भाइ, अखिलेश भाइ, विमलजी भाइ, दीपक भाइ, विष्णुकान्त पाठक जी, बहुतो लोक अपन सदाशयता सँ एहि महत्वपूर्ण यज्ञ केँ पूरा कयलनि। नाम धीरे-धीरे आरो गनायब। स्थिति पर हमर नजरि बनल अछि। किछु घरफोड़ा पर सेहो लेख केर माध्यम सँ जनतब देब। एखन फँसल माछ केँ जेना घिरणी वला बन्सी मे खेलाय लेल छोड़ि देल जाइछ, तहिना ओकरा सब केँ खेलाय दियौक। ई सब मैथिली प्रति जे विद्वेष-भावना देखेलक अछि तेकर चुनि-चुनिकय पोल-खोल होयत। एतबा नहि, ओकरा सब केँ माफी सेहो नहि भेटि सकैत छैक, से जानकी जी केँ लिखा देल अछि। अस्तु! एखन एतेक लम्बा पढि लेलहुँ, एकर ५ गोट श्रृंखला आर पढय पड़त से तैयार रहब। ई नहि जे विमर्शीक रूप मे भागो लेब, आ बाजब बिना पढनहि-लिखनहि…! खबरदार, भ्रष्टाचार सँ दूर रहू।

हरिः हरः!!

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