सन् २०५० ई धरि कइएक महत्वपूर्ण वैश्विक महानगर समुद्र मे समा जायत

चिन्तन

– प्रवीण नारायण चौधरी

विश्वक कइएक देश रहत समुद्रक अन्दर
 
सन् २०५० धरि विश्व केर नक्शा मे बहुत पैघ परिवर्तन आबि जायत। समुद्रक तलहटीक स्तर जाहि गति सँ बढि रहल अछि ताहि कारणे समुद्र किनारक कतेको महत्वपूर्ण महानगर-नगर आ आबादीक्षेत्र २०५० धरि पानिक (समुद्रक) भीतर समा जेबाक खतरा अछि। एहनो नहि छैक जे पूर्व मे एहि तरहक घटना नहि घटल होइक, स्वयं कृष्णक राजधानी द्वारकापुरी आइ समुद्रक तलहटी मे अवस्थित कहल जाइछ। द न्युयोर्क टाइम्स मे प्रकाशित एक समाचार सँ अवगत भेलहुँ अछि जे भारतक मुम्बई सहित इराक केर बसरा व अन्य नगर, वियतनाम केर हो-चि-मिन्ह, चीनक शंघाई, एलेक्जेन्ड्रिया, बैंकक आदि अनेकों प्रमुख औद्योगिक-पर्यटकीय केन्द्र समुद्रक पेट मे रहत। आबयवला समय मे एहि चुनौती सँ निपटबाक लेल कतेको तरहक संघर्ष करबाक चेतावनी वैज्ञानिक एखनहि सँ जारी कय रहल अछि। लगभग २० करोड़ आबादीक बसय योग्य भूमि आ खेती-पथार सब समुद्र मे डूबि जायत त स्वाभाविके एकर असर वर्तमान आ निकट भविष्यक मानव मानस पर पड़त, कहल गेल अछि जे आतंकवाद आ सशस्त्र संघर्ष काफी तेजी सँ बढत, कारण अपन अस्तित्वक रक्षा लेल सब कियो चिन्तित रहैत अछि।
 
प्रकृति अपन कार्य निरन्तर करैत रहैत अछि। ओहि तंत्र मे सब किछु स्वसंचालित अछि। मानव-निर्मित तंत्र मे खराबी आबि जाय त तंत्र काज करब वा परिणाम देब बन्द कय दैछ। तहिना प्रकृति केर तंत्र मे सेहो जखन कोनो तरहक उत्पात होइत अछि तँ मानव व जीवमंडलीय तंत्र पर काफी असर पड़ैत अछि। कय गोट प्राकृतिक आपदा एहि तरहक त्रासदीपूर्ण अवस्था इतिहास आ वर्तमान धरि अपन तांडव देखा चुकल अछि। एहेन अवस्था मे भविष्यक उपरोक्त वर्णित परिवर्तन सेहो ओतबे भयावह होयत, ई कहय मे कोनो अतिश्योक्ति नहि हेतैक। रहल बात जे एहि सँ बचबाक उपाय की? चीन कहाँ दिना समुद्रक किनारे-किनारे देवाल ठाढ कय रहल अछि, बड़का-बड़का बाँध निर्माण कय रहल अछि… ताहिपर वैज्ञानिक सभक राय छैक जे बाँध सँ भले भितरी भाग मे रहल आबादी केँ रक्षा संभव होयत, मुदा समुद्रक तटपर बसल मीलों-मील धरिक नगर-महानगर-आबादी केँ नहि बचायल जा सकैत अछि। प्रकृति मे भऽ रहल परिवर्तन संग मानव कोना रीति सकैत अछि, केना खेपि सकैत अछि, यैह सर्वथा उचित चिन्तन बुझा रहल अछि। ओना त कहले गेल छैक जे ई अस्तित्व मे कतेको बेर पहिनहुँ कय गोट युग बीति सूचना दय चुकल अछि जे हम एहिना बदलैत रहब, तथापि जीवनपद्धति सनातन रहत। वेद सेहो एहि बातक प्रमाण दैछ।
 
हरिः हरः!!
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