हाकिम भाइक दू-नेतः बहिन आ बेटी मे फर्कक मार्मिक कथा

लघुकथा

– रूबी झा

बेटी-बहिन केँ बहुतो व्यक्ति बड आन कय केँ बुझति छथि। जुग बदललैया, बेटीक प्रति पिताक बहुत हद तक सोच बदललैन्हें, लेकिन बहिन के प्रति एखनो लगभग ओहने सोच हावी देखैत छी। एहि बात केर उदाहरण समाज में बहुतो जगह अपने लोकनि देखने हेबैय। देवचन्द्रबाबू सरकारी आला अधिकारी छलथि। बहिनक विवाह में खर्चा करैय लेल हुनका पचासो-पच्चीस हजार नहि निकललनि। समाज सोचलक जे बेटियो के प्रति एहने करताह। लेकिन बेटीक विवाह ओहि सँ किछुवे साल बाद केलाह ओहि में पचासो लाख खर्चा केलाह, कियैक तँ ओ हुनकर अपन बेटी छलन्हि। कहल गेल छैक ने, बाबा बेटी राय-छाय, भैया बेटी दाय। बहिनक विवाह एहेन घर में केलाह जे बहिन केँ भरि पेट अन्न तक नहि भेटनि। बाँकी चीजक कि बात कहू। विवाह दान केर कार्यक्रम बहिनक बेर में ओत्तहि सम्पन्न केलाह जतय अपने कार्यरत रहैथि, ताकि भरि जिन्दगीक जे नोत-हकार स्वयं पुरने रहथि तेकरा सभ सँ बहिनक बेर मे सब असूल भ जाय। विवाह में एक-सँ-एक अधिकारी महोदय सब आयल रहैथि, आ झोरा भरि-भरि क’ अनने सेहो रहैथि। लेकिन सबटा ओ अपनहि रखलाह आ एकटा फोल्डिंग आ पाँचटा सारी में बहिन केर विदाई रेलगाड़ी में बैसा सम्पन्न कय लेला। आ अपन कर्तव्य सँ स्वतंत्र भ’ गेला। खैर.. सासूर में बहिन केँ सभ किछु के कष्ट होइन, वर हुनक पढिते रहथिन्ह, एहि लालच में जे सार कतहु नौकरी लगबा देता, ओहो देवचन्द्र बाबू नहि केलाह। घरक आर्थिक स्थिति बहिनक बद् सँ बत्तर रहैन। पाय के कोनो आमदनी नहि घर में, ससूर बहुत पहिनहि गुजैर गेल रहथिन्ह आ सिर्फ बूढ सासु रहथिन्ह, जे ताना देथिन पुतोहु केँ। एक दिन बेचारी अपन जीवन सँ तंग भ’ क’ अपन जीवन लीला के अपनहि हाथ सँ खतम करय के सोचलीह। आ मटिया तेल ढारि सलाई मारि लेली आ अग्नि देवताक कोखि में समा गेलीह। सासूरक लोक सब उठा-पुठा कय अस्पताल (मधुबनी) लय गेलखिन्ह, तहन जे हुनक अधिकारी भैया के अधिकार जगलैन से कि कहू अपने लोकनि के, जो रे सहोदरा… थाना में रिपोर्ट दर्ज करा, पूरा थाना केँ अस्पताल भेजि, बहिन सँ बयान दियाबय चाहला जे कहि दैय केनाहुँ सासु-ननैद-पति के नाम आ फँसा दियैक सबकेँ। लेकिन ओ बेचारी मृत शैय्या पर परल किनको नाम नहि लेलीह आ कहली जे हम बच्चाक दूध गरम करैय जाइत छलहुँ ताहि समय स्टोव ब्रस्ट कय गेल । पाठक सब बतबै जाय-जाउ बहिन कि एते आन होय छैक, ओहो तँ ओहि घर केँ अपन घर बुझैत छैक। तहन फेर बहिन संगे ई दुर्व्यवहार कियैक?
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One Response to हाकिम भाइक दू-नेतः बहिन आ बेटी मे फर्कक मार्मिक कथा

  1. हेमन्त कुमार झा

    एतेक मार्मिक कथा। हमरा हिसाब सँ तऽ ओऽ भाई बनय जोगर छथिये नइ। भाय बहिन सँ पैघ कोनो सम्बन्ध एहि दुनियामे अछिये नइ।

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