सफल महिलाक जीवन मे पतिक महत्व ‍- स्नेहा प्रकाश ठाकुरक लेख ‘हमर जीवनसाथी’

लेख

– स्नेहा प्रकाश ठाकुर

हमर जीवनसाथी

मैथिली में एक टा फकरा छैक जे हाथी चढ़ि क गौरी पूजलौं जे एहेन वर भेटल, सैह हम अपन दिया बुझइ छी।

आइ हम बात करब अपन जीवनसाथी प्रकाश कुमार ( B.E electrical) के । हमर बियाह भेल 24 फरवरी 2012 केँ । हम ओहि समय एमए द्वितीय वर्ष में छलहुँ ।

हमर दू टा ईच्छा रहे जे हमर बियाह बिना दहेज के हुए और हमर पढाई नय रुकय । जहन हमर ससूर कहलखिन जे हम कोनो भी तरह के दहेज के खिलाफ छी और कोनो रूप मे स्वीकार नहि करब तहन स हमर दिल में हुनका लेल श्रद्धा और बढ़ि गेल । और हमर पढ़ाई के त ओ परम समर्थक आइयो धरि छथि ।

बियाह भेल संग हमर एमए सेहो सम्पन्न भेल । हम आगाँ phd करय चाहैत छलहुँ तइ ल’ क’ पतिक प्रोत्साहन पर नेट के प्रेपरेशन शुरू केलहुँ । ओ हर तरह स मदद केलथि । फेर हमर पुत्र केर जन्म भेल और पढाई कनि डिस्टर्ब भ गेल । जहन ओ दू साल के भेला त हम पढ़ाई वापस शुरू केलहुँ, लेकिन coaching और guidance केर अभाव महसूस होइत रहल । ताबेतक हमर पुत्री केर जन्म भ गेल और हम सोचलहुँ जे आब हम नहि कय पायब, कियाक त हम अकेले रहैत छी आ ऊपर सँ हमरा पर दू टा बच्चा के जिम्मेदारी अछि । हमर बेटी जखन तीन महीना के रहे, हमर पति एक दिन कहला जे आब पढ़ाई शुरू करू, कतेक दिन एहि में लागल रहब । हम आश्चर्यचकित भ पुछलियनि जे पढाई केना करब ? हम त मुश्किल स दुनू के एक्के संगे पालन-पोषण कय रहल छी, संग मे कनी-मनी लिखि लैत छी, लेकिन पढाई पार नहि लागत । और ऊपर स कोनो guidance नहि य । ओ कहलथि जे हम पढायब, फ़र्स्ट पेपर और material सेहो हम आनिकय देब । और रहल बात घर और बच्चा के, त अकेले किया, हम छी न, हमहुँ सम्हारब । एतेक प्रोत्साहन आ सहयोगक शब्द हमरा लेल बहुत छल । मनहि-मन हुनकर कहल बात पर मनन करय लगलहुँ ।

ओ internet स किताब खोजनाय शुरू केला और मंगेनाय सेहो । हम पढ़य लगलहुँ, जेना खिस्सा मे होइछ – एक हाथ स बेटी के झुला झुलाबी और दोसर हाथ स नोट्स बनाबी । ओ आफिस shift में जाइत छलथि, तखने जतबे समय भेटैत रहनि ओहि में हमरा पढ़बथि और जे मदद भ सकनि से करथि।

हम आठ महीनाक बेटी केँ ल’ क’ परीक्षा देलहुँ और पास सेहो भ गेलहुँ । फेर जॉब केर खोज शुरू भेल । हम दोसर शहर नहि जाय चाहैत छलहुँ कियाक त बच्चा सब छोट रहय । हमर ससूर हमेशा फोन पर कहय छथि, स्नेहा केर जे मोन हेतनि से पढ़य देबनि, जतय जॉब करय के होइन्ह से करय देबनि । बहुत बेसी खुशी भेटैत अछि हमरा ।

तहन हम ऑनलाइन क्लास् चलेबाक लेल सोचलहुँ, तहू मे technical सपोर्ट हुनकहि भेटैत अछि । लोगो डिज़ाइन, registration, material design, सब किछु । हमर student के पेपर 1 पढेनाइ सेहो । बहुत भाग्यशाली छी हम जे हमरा हर कदम साथे टा नहि ई दैत छथि बल्कि रास्ता सेहो सुझबैत छथि । चाहे ओ बुक खोजनाइ होइ या अलग-अलग university के course । सब हुनकर काज छन्हि ।

हम किताब के समीक्षा करैत छी और एहि में बहुत समय लगैत छैक और आलेख लिखय मे सेहो । जहन हम काज करैत रहैत छी तहन तीनू मे स कियो डिस्टर्ब नहि करैत छथि, हमर class के टाइम में त बिल्कुले टा नहि । हम पढ़य लागय छी त हमरा समयक होश नहि रहैत य । हमर पाँच साल के बेटा जहन कहइ छथि अपन बहिन केँ, “जे चल, हम होमवर्क बनवा दैत छियौक, मम्मी पढाई करैत छथिन, परेशान नहि करहिन, त सच में दिल भरि जाइत अछि । जनम स हमरा किताब के बीच देखलक तेँ अगर हम कहियो छुट्टीक मोन बनबैत छी त दुनू वापस हमरा टेबल पर बैसा दैत अछि जे अहाँ पढ़ाई करू । बहुत गर्व होएत अछि हमरा अपन पति, संतान आ समस्त घर-संसार पर ।

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One Response to सफल महिलाक जीवन मे पतिक महत्व ‍- स्नेहा प्रकाश ठाकुरक लेख ‘हमर जीवनसाथी’

  1. Birendra kunmar singh

    Bahut bhagyamani chi aue agu ke jiban yehne sarthak aur bibekshil huye se kamna

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