योग्यता आ शुचिता पर प्रवीणक दृष्टि-विचार

दृष्टि-विचार – योग्यता आ शुचिता

– प्रवीण नारायण चौधरी

 
कर्मकांड मे कोनो निश्चित कर्म लेल के योग्य आ के अयोग्य होइछ तेकर कय तरहक सीमांकन-पृष्ठांकन आदिक बात जेठ-श्रेष्ठ-विद्वान् कर्मकांडी लोकनि केर मुंहे सुनैत छी। स्वयं सेहो कर्त्ता बनि पिताक मृत्योपरान्त श्राद्धकर्म सँ लैत एकोदिष्ट कर्म, पारवन कर्म, तर्पण, आदि करैत छी।
 
दरभंगा उर्दू बाजार मे जे इन्टरमीडियेटक पढाई करय समय शहरक रंग मे ढालय लेल हमरो दूध्धा टीक काटि देने छल नौआ – से एक्के बेर फेर विवाहक बादे पोसलहुँ। प्रकाण्ड विद्वान व्याकरणाचार्य ससूर महाराजक सान्निध्य पाबि ई संभव भेल छल। काशीक मणिकर्णिका घाटपर पिताक आत्माक तृप्ति वास्ते संध्या-तर्पण लेल लय गेल छलथि पूज्य ससूर महाराज।
 
ब्राह्मणक नित्यकर्म लेल सेहो पूज्य ससूर महाराज प्रेरित कयलनि। ओ कहलनि जे बड़ा मुश्किल सँ मनुष्य तन भेटैत अछि, आर ताहि मे ब्राह्मण कुल मे जन्म होयब आरो पैघ तपस्याक परिणाम थिक। लेकिन एकरा जँ एहिना दुरुपयोग कय लेब त एकर हानि स्वयं केँ भोगय पड़त। अवसर बेर-बेर नहि देल जाइछ, एक बेर सब केँ भेटैत छैक। सोचि लेलहुँ जे टीक रखबाक चाही। एखन भरि मुट्ठी टीक अछि।
 
लगमा महाविद्यालयक संस्थापक-संरक्षक ‘सरकार’ (महंथजी) केँ एक बेर सुनि लेने रहियनि केकरो कहैत, “टीक कटाकय जतेक डेग चलैत अछि ओकरा ओतबे गोबध केर पाप लगैत छैक”। ई लाइन बड़ा भयावह ढंग सँ हमर अन्तर्मन केँ हिला देने छल। ‘गोबध’ केर पाप हम नहि कय सकैत छी। ताहि लेल सेहो टीक रखबाक प्रति हमर आस्था सुदृढता पाबि लेलक।
 
बात गोबध केर आयल। स्वयं एक आस्थावान हिन्दू होयबाक कारण ‘गावो विश्वस्य मातरः’ – गाय विश्व केर माता थिकीह, एहि पंक्ति मे हमर दृढ विश्वास अछि। गाय प्रति आस्था केँ आरो सुदृढीकरण होइत अछि स्वाध्याय मे गायक शरीर मे ३३ कोटि देवताक निवासक कथा पढि-बुझिकय।
 
लेकिन एक बेर जीवन मे बड़ा विचित्र घटना घटल। १९९७ मे व्यापारिक मेला मे अपन नियोजक संग चीन गेल रही। चाइनीज व्यापारी डेविड झैंग आ माइकल लू संग बड़ा विशेष दोस्ती भेल छलय। चीन मे बियर पीनाय आ समुद्री लोब्सटर (इचना माछ) खेनाय, आनन्द दैत छल। एक दिन ओकरे सभक संगत मे अंजानहि मे एकटा खाना प्लेट मे गोमांस परैस देने छल।
 
धूनकी मे थोड़े न किछु बुझितियैक, लेकिन ईश्वरक विशेष कृपा, ओहि प्लेटक रंग-रूप आ परसल माँसक स्वरूप देखि पुछि देलियैक जे भाइ रे, हमरो लेल अपने खाना मंगा लेलें की.. कहलक हँ… फेर स्पष्टे पुछलियैक जे ई मीट जे एहि मे छौक से ‘बीफ’ छियौक की? ओ कहलक ‘हँ’। बाप रे! कोहुना बुझू धर्मक रक्षा भेल। हम ओ प्लेट सोझाँ सँ ओकरे सब दिश सरका अपना लेल सागक पत्ता आ गरम पानि मंगबेलहुँ, आर वैह सागक पत्ता पर निमक छींटि अपन भूख मेटेलहुँ।
 
ताहि दिन सँ अपन जीवनशैली बदलबाक लेल बाध्यता बनि गेल हमरा १५ दिनक प्रवासकाल मे। सावधानी सँ सब किछु देखि-बुझि भोजन लेल चयन कयल करी। चीनक हालत ओहि समय बड़ा बदतर छलैक। हिन्दुस्तान, पाकिस्तान आ नेपालक लोक केर इक्का-दुक्का जगह मात्र छलैक जतय अहाँक टेस्टक खाना भेट सकैत छल गुआंगझाउ मे।
 
एकटा दुर्घटना सँ बुद्धि एतेक सुधरि गेल जे आब सब किछु जाँचि-बुझिकय खाय लगलहुँ। साग आ भात मात्र शुद्ध शाकाहारी छल। एकटा बनाना लिफ रेस्टोरेन्ट मे ‘इन्डोनेशियन वेज फ्राइड राइस’ मंगबेलहुँ त ओकर ऊपरे मे अंडाक पोच राखि देने रहैक। संग मे मारवाड़ी नियोक्ता, ओ सब हँसिकय अंडा साइड केलथि आ बाकी राइस आराम सँ खेलथि।
 
चलू, निकैल अबैत छी पुरान दिनक एहि याद सब सँ सीधे वर्तमान पर। शुचिता बहुत पैघ आवश्यक अवयव होइत छैक। कतेको मामिला मे पानि तक छुएबाक जे किछु बात-कथा सब कहल जाइत छैक, वेद पढबाक अधिकार केकरा अछि या केकरा नहि अछि, ई सब जे कहल जाइत छैक… तेकर किछु आधार जरूर छैक से हमर अपनहि विभिन्न समयक अवस्था हमरा स्वयं सिखबैत रहल अछि।
 
कहियो पार्टी मे ड्रींक केला उत्तर हमरा सँ कियो संस्कृत श्लोक उच्चारण करय लेल कहि दैत अछि त हम नहि कय पबैत छी। शौच-आर्जन-मार्जन हमरा सभ लेल अनिवार्य अछि। वेदक ज्ञान सेहो सब नहि पाबि सकैत अछि। एहि लेल सेहो उचित योग्यता आ शुचिता निर्वाह करब ताहि सँ परमावश्यक छैक।
 
हरिः हरः!!
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