विजय चन्द्र झा ऊर्फ बाबाक जन्मदिन पर प्रवीण शुभकामना

‘बाबा’ केर जन्मदिन पर प्रवीण शुभकामना
 
भगवान् श्रीकृष्णक जन्माष्टमी राति मे भेल। मिथिलाक चहुँदिश आ सगरो नेपाल, हिन्दुस्तान आ विश्व केर विभिन्न कोण-कोण मे श्रीकृष्ण जन्माष्टमीक धूम देखल जा रहल अछि। आइ मेला सेहो लागल अछि कतेको ठाम। विराटनगर मे आइ लाखों लोक सहभागी होयवला ‘रथयात्रा’ सेहो छी। भगवान् श्रीकृष्ण विराटनगर केर नगर-परिक्रमा करयवला ई रथयात्रा एशिया महादेश मे प्रसिद्धि पेने अछि।
 
आजुक दोसर आह्लादित करयवला खबरि अछि जे मैथिली भाषाभाषी समाजक शान आ अत्यन्त सम्मानित व्यक्तित्व – ट्रू लीडर, ईमानदार आ प्रतिबद्ध छविक स्वामी श्री विजय चन्द्र झा केर जन्मदिन आइ थिकनि आर एखन धरि कय गोट महत्वपूर्ण शुभकामना सन्देश ‘बाबा’ केँ देल गेल से पढि चुकल छी।
 
बाबा अर्थात् पितामह श्रेणीक व्यक्तित्व – अपन नजरि आ संगत मे मैथिली-मिथिला केर आब किछुए लोक ‘बाबा’ छथि। आदरणीय विजय बाबू केँ ‘बाबा’ कहैत हमरा सम्मानित हेबाक अनुभव भेटैत अछि। आइ करीब १० वर्षक दिल्ली अभियान मे बाबा सँ परिचय आ हुनका संग मुंहलगुआ बच्चा ‘नाति-पोता’ जेकाँ मुंह लागब सेहो अपूर्व आनन्दक अनुभूति दैत रहल अछि।
 
हमरा बाबा द्वारा मुख्यमंत्री कि गृहमंत्री कि बड़का-बड़का नेता-अभिनेताक सोझाँ मंच सँ हाथक छड़ी घुमबैत सोझाँ दर्शक-दीर्घा मे रहल सब केँ अपन बच्चा सदृश डाँट लगायब आ समझेबाक तौर-तरीका बड नीक लगैत रहल अछि। बाबाक एक गोट आर बात बड खास छन्हि। मैथिली-मिथिलाक छोट कार्यक्रम करू या पैघ, बाबा केँ जानकारी रहतनि त ओ जरूर उपस्थित हेता।
 
महंथगिरी या अपन फेस देखेबाक कोनो लौल हुनका मे कहियो नहि रहलनि अछि, लेकिन अभिभावक बनिकय चुपचाप दर्शक दीर्घा मे बैसि सब किछु वाच करता आ बाद मे फेर छड़ी चमकेनाय शुरू करता जँ कनिकबो अल्टर-फल्टर बात देखता तँ…! हाहा! बाबा हो तो ऐसा!! हम हिनकर एहि अदाक बड पैघ दीवाना छी।
 
बाबा वला किछु गुण नाति-पोता मे सेहो अबैत छैक। बाबा हमरा सब दिन असीम दुलार देलनि। तमसेबो केला, बुझेबो केला, लेकिन सदिखन निरपेक्षताक भाव राखि ओ कोनो बात कहला। एक बेर मोन अछि, बाबा द्वारा मंच सँ लाठी चमकेबाक ओहि बात पर आलोचनात्मक लेख लिखने रही त फोन कय केँ कहने छलाह – ‘बड नीक लिखैत छी, लिखैत रहू।’ हमर मुंह अपन सनक भ’ गेल। हमरा त होइत छल जे बाबा तमसा जेता, लेकिन ओ त उल्टा दुलार-प्यार दैत कहलनि, बड नीक लिखैत छी… बस, वैह दिन हम बाबाक निरपेक्ष स्वरूप केँ महादेव समान बुझि ‘बाबा’ रूप मे देखय लगलहुँ। हमरा गर्व अछि बाबा पर।
 
मात्र नामहि केर बाबा प्रवीण सब नहि बनाओत… कारण ओकर जन्म बाबा लोकनिक कुल-परिवार मे भेल छैक। से कहि दी बात खुलस्त – आदरणीय विजय चन्द्र झा ऊर्फ ‘बाबा’ पूरे हिन्दुस्तान मे ‘मैथिली-मिथिला’ केर स्थान केँ भारतीय राजधानी क्षेत्र – एनसीआर आ विशेष कय केँ दिल्ली मे राष्ट्रीय झंडाक समीप फहरबैत छथि। अखिल भारतीय मिथिला संघ केर अध्यक्षक रूप मे जाहि तरहें दर्जनों राष्ट्रीय स्तरक आयोजन बाबा केर लीडरशीप मे होइत अछि से सिद्ध करैत अछि जे हमर मैथिली आ मिथिला समृद्ध अछि, सम्पन्न अछि आर स्वयं जानकीक अष्टसिद्धि आ नवनिधिक खजाना अछि। हालहि दिल्लीक तालकटोरा स्टेडियम मे स्वर्ण जयन्ती समारोह एकर जियैत-जागैत उदाहरण कहि सकैत छी। आर से कोनो पहिल बेर नहि थिकैक… दिल्लीक मावलंकर सभागार मे – फिक्की अडिटोरियम मे आ आरो कतेको ठाम… हम त दिल्ली सँ दूर रहनिहार सोशल मीडिया सँ समाचार संकलन करैत अपन मातृभाषा लेल मुफ्त संचारकर्म मे दिन-राति लागल लोक… पूरा व्योरा कतय सँ दय सकब… मुदा हमरा गर्व होइत अछि एहेन-एहेन कर्मठ सपूत पर। बाबा केँ हमर आत्मीय नमन आ जन्मदिन पर अशेष शुभकामना – ऋतेश पाठक जी द्वारा हिन्दी मे देल गेल शुभकामना सन्देश पर अपन आदतिक मुताबिक हम बाबा लेल दुइ शब्द अंग्रेजी मे लिखलहुँ, ई सर्वथा सर्वोच्च शुभकामना मोन मे उचरल बुझाइत अछिः
 
God bless such noble person to live a very long life and remain blessed for native language and land – at Shri Vijay Chandra Jha is of that height who keeps Maithili-Mithila glorified on national level. We owe him.
 
हमर बाबा पूरे मिथिलाक बाबा छथि, कारण एक अति कुलीन आ सम्पन्न बाबा जेकाँ मैथिली-मिथिला केँ एकटा सर्वशक्तिमान राष्ट्र भारत मे उच्चस्थ स्थान पर स्थापित केने छथि। पुनः प्रणाम आ बेर-बेर सुन्दर स्वास्थ्य, दीर्घ आयु आ हजारों-लाखों कीर्ति निर्माण मे सफलताक शुभकामना दैत एहि लेख केँ विराम दैत छी। कतेक लोक तामसे फुच्च भऽ जाइत छथि जे प्रवीण बड लम्बा लिखि दैत छैक… आहि तोरी भल्ला मे… यौ जी मेटेरियल लम्बा रहतैक, सोच लम्बा रहतैक, तथ्य, तत्त्व आदि सब किछु लम्बे रहतैक तऽ लेख कहुँ छोट भेलैक यौ जी… अहाँक समय छोट अछि, लेख केँ नहि छुबू! हर-हर!!
 
हरिः हरः!!
 
पुनश्चः ई जे फोटो थिक से एहि वर्षक अन्तर्राष्ट्रीय मिथिला महोत्सव केर जीएमडीसी परिसर मे सम्माननीय स्रष्टा डा. चन्द्रमणि जी केँ बीच मे राखि बाबा आ हम दुनू बगल गसियाकय भगवान केँ धेने फोटो खींचेने छी। आनन्द आओत दृश्य देखिकय! कि यौ? सही कहल न? 🙂
पूर्वक लेख
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