सुन्दर गाम: बनगाँव

सौजन्य: जय हो बन्गाम, बनगाँव, सहरसा। मई १८, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!!

“स्वर्ग केर प्राचीनतम गाम मे एक – बनगाँव केर संक्षिप्त विवरण”

मिथिलाक सहरसा जिला मे कहरा प्रखंडक बनगाँव गाम प्राचीनकालीन गाम अछि, जतय लक्ष्मीश्वरनाथ महादेव खुद बाबा लक्ष्मीनाथ विराजय छथिन। एकर अगल-बगल में वाणेश्वर, माँ दुर्गा मन्दिर सेहो बहुत प्रसिद्ध अछि। बनगाँव मिथिलाक प्राचीनतम गाम मे एक अछि जेकर प्रमाण एहि गामक पूर्वज-दिग्गज महापुरुष आदिक नामक संग पुरातत्त्विक खुदाइ आदि सँ प्राप्त प्रमाणादि सेहो अछि।  आर खुदाइ सँ बराबर भेटैत रहैत अछि। अनेको भग्नावशेष अखनो देखल जाय लेल बाकिये अछि।

749बनगाँव केर सुप्रसिद्ध – लक्ष्मीश्वरनाथ बाबा छैथ। हिनकर बारे में अनेकानेक जनश्रुति सब प्रसिद्ध अछि जाहि मे एकटा ई अछि: एतय गोसाईं जीक किछु छोट सनक जीवनी प्रस्तुत कए रहल छि।

संत शिरोमणि लक्ष्मीनाथ गोसाईं जी केँ शत-शत नमन! गोसाईं जी एक विश्वास थिका, एकटा आस्था थिकाह! आ कहल गेल यऽ जे आस्था आ विश्वासे भगवान् थिकाह ! गोसाईं जी एक संत आ एकटा अदभुत साधको छला ! जिनकर गुरु लम्बानाथ भेलखिंह ! गोसाईं जी केर जन्म सुपौल जिलाक परसरमा गाम मे सन – 1763 ई. मे भेल छलैन ! आ अपन शरीरक त्याग मधुबनी जिलाक फटकी कुटी पर 5 दिसम्बर 1872 मे कएलाह ! मुदा ओही दिन बनगाँव कुटी मे विराजमान देखल गेल्खिंह ! बनगाम कुटी हुनकर लीला स्थान छल ! हुनकर बहुतो तरहक लीला जे बनगामे कुटी पर भेल !

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कहल जाइछ जे बाबाजी अपन बिछाउन पर रात्रि आराम लेल नित्य आइयो अबैत छथि। बिछाउनक निचाँ बाबाजी केर खराम राखल अछि। बेर-बेर प्रणाम – महात्मा महापुरुष योगीश्वर संत गोसाईं केँ! मैथिली जिन्दाबाद!!

हुनकर रचना म बन्दीमोचन काव्य, विवेक पंचरत्न, विवेक रत्नावली, गीतावली सहित आर ढेरो रास रचना अछि ! मुदा एक – आध रचना तय छापल जा सकल, बाकी आर रचनाक कोनो खोज-खबर नै अछि ! गोसाईं जी केर 22 टा कुटी स्थल छैन ! जाहि मे बनगाम ( सहरसा ),
परसरमा (सुपौल), फटकी (मधुबनी ), लखनौर (मधुबनी), महिनाथ पुर, दिघिया, तारापुर, शकपुरा, जमशेदपुर, दिल्ली आ दू टा नेपाल मे बनल कुटी प्रमुख छैन ! गोसाईं जी केर सम्प्रदायक कतेको शिष्य छलाह ! हिनकर अनेको शिष्य छलाह, मुदा हिनकर मुख्य तीन शिष्य, तीन तरहक छलाह ! पैहलुक रघुवर गोसाईं जी, दोसर क्रिश्चयन जान आ तेसर मौ० गौस खां छलाह ! गोस्वामी जी संत तुलसीदास, भक्तिन मीराबाई, संत कबीर के सामान संत छलाह ! तुलसीदास जी कहल्खिंह जे “तुलसी मस्तक तब नबै, धनुष वाण लौ हाथ” आ मीराबाई कहलखिन जे “मेरो तो गिरिधर गोपाल, दुसरो ना कोई”, मुदा दुनु संत सँ आगाँ गोसाईंजी लिखैत छैथ ,

“राम रसायन सेविये, जासे व्याधि नसाय ! लछन , वैद्य का कर सके, जो आपहु मरि जाय !!”

गोसाईं जी मे संत भाव समर्पण एतबा देखल जाय अछि ! ई छथिन्ह मिथिला के संत सिरोमणि लक्ष्मीनाथ गोसाईं !! गोसाईं जी!!

 

756गाम केर बुजुर्ग सब कहय छथिन कि आई सँ कतेको वर्ष पूर्व धरि प्रत्येक वर्ष बैशाख महीना मे नागा साधू सबहक झुण्ड एतय आबैत छल आ एहि पोखरि मे स्नान कय अपन जीवन केँ धन्य मानैत छल। बैशाख मास मे यदि कोनो साल जल केर कमी रहैत छल त पोखरि के माटि सम्पूर्ण देह में लगा कय पूर्ण संतुष्ट भऽ जाइत छल। लक्ष्मीश्वरनाथ मंदिर केर ठीक सामने पश्चिम मे बाबा बैद्यनाथ केर मंदिर अछि। कहल जाइत अछि कि बाबा बैद्यनाथ सवा प्रहर एतहि निवास करैत छैथ। कहल जाइत अछि कि बनगाँव गाम केर एक निःसंतान रहथि। माँ दुर्गा हुनका स्वप्न मे एलखिन आ कहलखिन कि अहाँ एतय हमर प्रतिमा बैसाकय पूजा करू, आइयो ओहि ठाम गाम मे एकटा पोखरि आ मन्दिर अछि।

ई गाम मूलतः ब्राहमणक रहल अछि। ई महिषी गामक कुजिलवाड़ वंश केर ब्राह्मणक गाम थीक। मूलवासी मे एकर अतिरिक्त सब जातिक लोक रहैत अछि एतय। बाद मे अन्य जातिक लोक आबैत गेल आ बसैत गेल। आइयो बनगाँव ब्राह्मणबाहुल्य गाम अछि। एकर अतिरिक्त एतय कायस्थ, पासवान, धोबी, क्योट-धानुख, बड़ई, मोची, डोम, हजाम, मुस्लिम आदि जाति केर लोक मिलिजुलि कय निवास करैत अछि।

743एहि गाँव में उच्चपदस्थ लोक सब बहुतायत संख्या मे छथि। न्यायाधीश, अधिवक्ता, वन अधिकारी, प्रोफेसर, डाक्टर, इंजिनियर, वैद्य, बैंकर्स, अलग-अलग विभाग केर आफिसर आ विभिन्न भाषाक साहित्यकार सबहक एतय कमी नहि अछि। स्व. पण्डित श्री ताराकांत झा एहि गामक छलाह। डी जी पी राकेश मिश्राक जन्म एहि गाम मे भेलनि। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. गयादत्त झा आर नेपाल सरकार सँ गोरखा दक्षिणबाहु सम्मान सँ सम्मानित पं. महारुद्र झा एहि शिवनगर माटि केर पुत्र रहथि। वर्तमान मे ई गाम सहरसा प्रांतीय राजमार्ग केर बीच मे 8 किलोमीटर दूरी पर अछि। एतय सँ नजदीकी रेलवे स्टेशन सहरसा अछि। मुख्य व्यवसायिक बाजार बरीयाही अछि।

763बनगाँव गाम आइ विकास केर मार्ग पर अछि। हास्पीटल, विद्यालय, पुस्तकालय आदिल स्थापना भेल अछि। लक्ष्मीनारायण परिसर केर जीर्णोद्धारक काज प्रगति पर अछि। कृष्णा महोत्सव केर रूप मे पछिला कतेको साल सँ एतय धार्मिक आ सांस्कृतिक आयोजन होइत रहल अछि। एहि गामक विकासक लेल अगर कोनो एक व्यक्ति केर सतत प्रयास रहल त ओ रहथि स्वप्नदर्शी व्यक्तित्व स्व. श्री रमेश झा। एहि गामक किछु प्रमुख लोक छैथ : श्री अभिमन्यू खां, स्वर्गीय अरविंद कुमार झा, बहुते आरो छथि जेकर बखान हम नहि कय सकैत छी। जय मिथिला!!

 

alok ranjan saharasaआब गाम मे खुजत विशाल पुस्तकालय: विधायक आलोक रंजन सेहो सहयोग करता

हालहि एकटा प्रगतिशील कार्य करबाक लेल एहि गामक प्रमुख लोक-समाज एकटा विशाल बैसार कएने छलाह। एहि बैसार मे विधायक आलोक रंजन सेहो उपस्थित भेलाह। मैथिली, संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी व अन्य भाषाक साहित्य सहित सब तरहक ग्रंथ केर संग्रहक संग एकटा पुस्तकालय निर्माण करबाक निर्णय लेल गेल। एहि मे विधायक आलोक रंजन अपन भरपुर सहयोगक वचन देलनि।

मैथिली जिन्दाबाद केर विशिष्ट सहयोगी व्यक्तित्व

सुमन खाँ समाज समान प्रखर समाजसेवी तथा नन्दभाइ समान मैथिली एवं हिन्दी गायन क्षेत्रमे प्रसिद्ध कलासेवीक सतस सहयोग मैथिली जिन्दाबाद केँ भेटैत रहल अछि। बनगाँव समाज द्वारा सेहो २०१३ केर रथयात्राक भव्य स्वागत अविस्मरणीय रहत। संत खियाली खाँ मंच सँ ओ ऐतिहासिक उद्घोषणा सँ क्रान्ति आयब तय अछि। जहिना बाबाजी स्वयं समूचा मिथिला केँ जगजियार कय केँ रखलनि, किछु तहिना आइ बाबाजीक हमरा लोकनि संतान प्रतिबद्ध बनी। – मैथिली जिन्दाबाद!!

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