सोमवारी व्रत कथा

श्रावण मासक दोसर सोमवारी – सोमवारी व्रत कथा
 
जय भोलेनाथ! जय गौरीशंकर!!
 
श्रावण पवित्र मासक सोमवारी तिथि – सोमवारी व्रतक विधान मिथिला मे सेहो ओतबे प्रामाणिक आ अधिकतर परिवार मे एहि व्रत उपासनाक परम्परा भेटैत अछि।
 
सोमवारी व्रत कथा सेहो ओतबे महत्वपूर्ण अछि –
 
एक गोट व्यापारी व्यापार आ अन्य समस्त विचार सँ सम्पन्न रहथि, मुदा सन्तान नहि छलन्हि।
 
सोमवारी व्रत आ उपासनाक पालक ओहि व्यापारी केँ माता पार्वतीक जिद्द पर आखिर भगवान् शिव द्वारा भाग्य मे पुत्रधन नहियो रहैत पुत्रधनक आशीर्वाद दैत छथिन। मुदा व्यापारी केँ स्वप्न मे पुत्रप्राप्तिक संग-संग ओकर अल्पायु मे निधनक बात सेहो कहि दैत छथिन। व्यापारी केँ ताहि कारण पुत्र प्राप्ति भेलाक बादो प्रसन्नता अन्दर सँ नहि भेलैक। ओ ई रहस्य आर केकरो सँ नहि कहैछ आर अपन व्रत-अनुष्ठान सँ सदिखन भगवान् शिवशंकर केँ प्रसन्न करैत रहैत अछि।
 
ओहि पुत्र केर नाम अमर राखल जाइत अछि। बाद मे अमर केँ पठन-पाठन लेल काशी पठायल जाइत अछि। बीच रस्ता मे एक राजाक पुत्रीक विवाह कोनो दोसर राजाक पुत्र जे कनाह रहैत अछि ताहि उपक्रम मे अमर केँ ओकर मामा दीपचन्द धनक लोभ मे वर बनाकय विवाह करा दैत छथि। मुदा अमर ई बात जाय सँ पहिने अपन पत्नी राजकुमारी चन्द्रिका सँ हुनक ओढनी पर लिखिकय जता देल जाइत छैक जे असल मे ओकर विवाह जाहि राजकुमार सँ भेलैक अछि से कनाह अछि, आर ओ एक छात्र थिक जे पढय लेल काशी जा रहल अछि।
 
राजकुमारी ई भेद बुझि अपन पिता सँ सबटा वृत्तान्त कहि सासूर जेबा सँ रोकि देल जाइछ। एम्हर अमर काशी पहुँचैत अछि मामा दीपचन्द केर संग। काशी मे पढाई करैत समय १६ वर्षक आयू पूरा भऽ गेलाक कारण ओ राति मे सुतले समय मृत्यु केँ प्राप्त होइछ। ऐगला दिन सोमवारी छलैक। काशी मे बड पैघ जुटान भेल छल व्रतधारी लोकनिक, उपासक सभक। स्वयं शिव आ पार्वती सेहो पहुँचि गेल छलाह। ओतय अमर केँ मृत पाबि मामा दीपचन्द हमोढकार भऽ कानि रहल छलाह। ई दृश्य देखि पार्वती केँ रहल नहि गेलनि, ओ शिवजी सँ फेरो जिद्द कय देलीह जे आइ एतेक उल्लासक दिन ई एना कानि रहल अछि से हुनका नीक नहि लगलनि, हे शिव एकर कष्ट केँ हरि लियौक…! शिवजी देखैत छथि ई बालक त ओही व्यापारीक बेटा छी जेकरा लेल पहिनहि सँ १६ वर्षक आयु निर्धारित रहैक..! मुदा पार्वती हुनकर कोनो तर्क नहि मानि पुनः ओहि व्यापारीक व्रत, नियम, निष्ठा आ समर्पण केर बात केँ ध्यान मे दैत शिवजी सँ ओकरा पुनर्जीवन देबाक याचना करैत छथि। आर ओ बालक फेर सँ जीबि उठैत अछि।
 
आब ओ ओतय सँ घुमैत विभिन्न गाम-ठाम मे यज्ञ आ ब्राह्मण भोजन, दानादि करबैत अपन गाम-क्षेत्र लेल लौटैत अछि। घुरती समय मे अपन सासूर मे सेहो यज्ञ केर आयोजन करैत अछि। राजा देखिते देरी चिन्ह जाइत छथिन। ओ अपन जमाय केँ लय घर पर किछु दिन ससम्मान रखैत छथिन। पुनः राजकुमारी चन्द्रिका संग विदाई करैत छथिन। एम्हर जखन अमर केँ जीबित लौटबाक खबरि व्यापारी सुनैत छथि तऽ प्रसन्न भऽ ओहि कोठरी जाहि मे सपत्नी प्राण त्याग करबा धरि व्रत राखि बैसल रहैत छथि ताहि मे सँ निकलिकय बेटा केँ सपत्नी स्वागत करैत छथि। सब कियो प्रसन्न भऽ शिव आराधना करैत अपन जीवनयापन आगु करैत रहैत छथि।
 
आजुक सोमवारी समस्त व्रतधारी लोकनि केँ प्रवीणक प्रणाम!!
 
हरिः हरः!!
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