मिथिलाक लोकसाहित्य मे डाक वचन अनुसार व्रत-उपवास लेल प्रसिद्ध उक्तिक व्याख्या

मैथिली लोकसाहित्य – डाक वचन 

– स्रोतः पंडित महेन्द्र ठाकुर – संकलनः प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिलाक गृहस्थ परिवार लेल विशेष पूजा-पाठ पर डाकक वचन

सुतब-उठब टांग मोरा
ताहि बीच मे जन्मल छौड़ा
राजा बेटा रामलाल
आठ-नौ मे डाक नेहाल
बतहाक चौदह बतहीक आठ
अन्न त्यागी सब जीवन काठ

ई थिक डाक वचन। पंडित महेन्द्र ठाकुर एहि वचन केँ स्मरण करैत कहैत छथि जे मिथिला मे आम जनजीवन केँ उपरोक्त कहिनी मुताबिक पाबैन-पूजा आ उपवास रखबाक एक विशेष परम्परा अदौकाल सँ देखल जाइछ।

एकर व्याख्य पंडित ठाकुर एहि तरहें करैत छथि –

सुतब-उठब केर मतलब भेल हरिशयनी एकादशी तथा देवउठाउन एकादशी, टांग मोरा केर मतलब भेल भादव मास मे पड़यवला शुक्ल एकादशी – जेकरा कर्मा-धर्मा एकादशी सेहो मानल जाइछ आर आजुक दिवस भगवान करोट फेरति छथि – यानि एकादशी केर व्रत जीवन लेल जरूरी अछि।

ताहि बीच मे जन्मल छौंड़ा – एकर तात्पर्य भेल भादव कृष्ण अष्टमी तिथि केँ भगवान् श्रीकृष्ण केर जन्मदिवस, अर्थात् जन्माष्टमीक व्रत-पूजा। विदिते अछि जे मिथिलाक लोकजीवन मे कृष्णाष्टमीक व्रत केर महत्ता आमजन लेल काफी लोकप्रिय अछि।

राजा बेटा रामलाल – एहि सँ डाकक कहब छन्हि दशरथ पुत्र मर्यादा पुरुषोत्तम रामचन्द्र जीक जन्म – यानि रामनवमी। चैत मासक शुक्ल पक्षक नवमी तिथि केँ ई विशेष दिन पड़ैत अछि। आजुक दिन सेहो व्रत आ विशेष पूजाक महत्व मिथिला मे काफी लोकप्रिय कहल गेल अछि।

आठ-नौ मे डाक नेहाल – ई भेल महादुर्गाक आराधनाक दुइ विशेष दिवस, अष्टमी एवं नवमी। नवरात्रिक ई दुइ दिवस सेहो बहुत पैघ महत्वक दिवस मानल जाइछ जाहि मे व्रत, खोंइछ भरनाय, छागदान, महामायाक दर्शन, स्मरण, पूजन, कीर्तन आदिक बहुत विशेष विधान जन-जन मे प्रिय अछि।

बतहाक चौदह बतहीक आठ – एहि मे डाक केर कहब छन्हि जे देवाधिदेव महादेव जिनका बहुत स्नेह सँ मिथिलावासी बतहा सेहो कहैत छथि तिनकर सुमिरन वास्ते अति विशिष्ट तिथि यानि चतुर्दशी आ बतहीक आठ यानि जगज्जननी पार्वती – शिवा – महादुर्गा तिनकर विशेष आराधनाक दिवस अष्टमी – चतुर्दशी सँ शिवरात्रि आर अष्टमी सँ महादुर्गा देवीक अष्टमी तिथिक आराधना पूर्ण श्रद्धा आ विश्वास संग करी।

डाक वचन अनुसार मिथिलाक गृहस्थ परिवार वास्ते एतबा विशेष दिनक महत्व अनुकरण योग्य मानल गेल अछि।

पंडित महेन्द्र ठाकुर प्रति आभारक शब्द राखि ई पोस्ट हुनकहि समर्पित करैत अपने सब सँ शेयर कयल।

हरिः हरः!!

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