राधा मम प्राण – एक बांग्ला गीत जे श्रीआनन्दमयी माँ केँ बहुत प्रिय छलन्हि

स्वाध्याय

– प्रवीण नारायण चौधरी

अदौकाल सँ भगवद्भक्ति मे भावपूर्ण भजन केर गान हिन्दू धर्म-संप्रदायक लोक लेल जीवनक मुख्य आधार रहल कहि सकैत छी। हम मिथिलावासी सेहो तरह-तरह केर भक्तिगीत भोरे प्राती सँ लैत साँझ व अन्य-अन्य समय मे अपन ईष्ट केँ प्रसन्न रखबाक लेल गबैत छी। सामूहिक गान – महिला आ पुरुष दुनू केर अलग-अलग विधान सेहो भेटैत अछि। जतय पुरुष समाज सुर ओ ताल केर मिश्रण मे ढोल-झालि-मृदंग आदिक सहारा लैत झमैककय कीर्तन गान करैत ईष्ट केँ मनबैत भेटैत छथि, ओत्तहि महिला समाज अपन सामूहिक समान भास मे स्वर मिलाकय गान करैत देखल जाइत छथि। विभिन्न प्रकारक भजन गायनक परम्परा मिथिला मे भेटैत अछि।

एखन कल्याण केर एक विशेषांक ‘श्रीराधा-माधव अंक’ हमर हाथ मे अछि, टुकड़ा मे किछु विशिष्ट रचना सब पाठक लेल संकलन कय रहल छी, ताहि क्रम मे श्रीआनन्दमयी माताक एक प्रिय प्राचीन बांग्ला गीत हाथ लागल अछि। गौर करू, आर एहि तरहें अपन पारम्परिक गीति-रचना मैथिली मे सेहो संकलन करू। ई हमरा लोकनिक परम कर्तव्य होयत।

राधा मम प्राण!
 
माँ श्रीआनन्दमयीक प्रिय एक प्राचीन बांग्ला गीत
 
राधा मम प्राण, राधा मम ज्ञान।
राधा मम ध्यान, राधानाम सार।
प्रेममयी राधा राधा, अंगे आधा।
राधानाम साधा बाधा, नाहि तार।
आमि दिवस रजनी, राधानाम ध्वनि।
करि, मात्र जानि, राधा मूलाधार।
राधा आद्या शक्ति, राधा भक्ति-मुक्ति।
राधा अनुरक्ति, भक्त श्रीराधार।
श्रीराधिका यन्त्रे, दीक्षा राधा मन्त्रे।
करि बाँशी यन्त्रे, नय रन्ध्रे फूत्कार।
से तन्त्रे सा-रे-गा-मा पा-धा-नि सप्तमा।
आलाप संयमे, बाजे सहस्रार॥
 
हरिः हरः!!
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