खापरि मे जाइत भुजै छेलौं – वंदना चौधरी लिखित एक अत्यन्त मर्मस्पर्शी कथा

लघुकथा

– वंदना चौधरी

मनीषा काफी पढ़ल लिखल और देखै में सुंदर छेली। घर के काज राज में सेहो दक्ष। एकटा मध्यम वर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुनकर जन्म भेल छेलहनि। हुनकर पिता एक कट्टर ब्राह्मण छेलाहा। मनीषा के अपन सहपाठी मनोज स प्रेम भ गेलैन कॉलेज में जे की काफी धनीक भूमिहार के बेटा छेला और ओही शहर में रहै छेला। मनीषा अपन पिता के ई बात एक दिन कैह देलखिन, तकर बाद त हुनकर पिता बिना कोनो देरी केने तुरंत मनीषा के विवाह एकटा अत्यंत निम्न स्तर के ब्राह्मण घर में तय केनहे एला। मनीषा अपन पिता के मान रखैत और अपन प्रेम के बलि दैत विवाह कके अपन पति के घर चैल गेली जतय की खाइयो के उपाय नै छलैन। एक दिन मनीषा के हाल चाल लेबाक लेल हुनकर पिता हुनका सासुर एलखिन, मनीषा एक लोटा पैन और गुड़ लक हुनका आगू में देलखिन और कहलखिन बाबूजी हम अहाँक भोजन तैयार करै छी अहाँ आराम करु ताबे। जखन बहुत समय बीत गेल और भोजन के बुलाहट नै भेल त हुनकर पिता अपने स उइठ के देख गेला और पुछलखिन बेटी अहाँ तखन स खपैर में की भुजे छि हमरा त जेबा के बेर भ गेल और अहां तखन स हम देखै छि जे खापैर में किछ भुइज रहल छी। मनीषा के जवाब सुइन हुनकर पिता के कलेजा जेना फैट गेलैन, ओ कहलखिन बाबूजी घर मे किछ नै अइछ जे हम अहाँ के भोजन करेब से। अहाँक जाइत अपन जाइत बड्ड प्यारा छल त हम तखन स खपैर में जाइत भुजै छेलौ। अपन अपन सुझाव अवश्य दी से आग्रह।🙏🙏

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One Response to खापरि मे जाइत भुजै छेलौं – वंदना चौधरी लिखित एक अत्यन्त मर्मस्पर्शी कथा

  1. कंचन झा

    बहुत सुन्दर कथा अइछ।एहि द्वारा कतेको के आइख खुजतै।

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