सौराठ सभाक बारे गलत भ्रान्ति आ भ्रम पसारब कतेक उचितः सवाल मैथिली साहित्यकार सँ

सौराठ सभा पर ई लेख पढू…. 

– प्रवीण नारायण चौधरी

लेख पढबाक लेल ई फोटो-शौट देखल जाउः

 
एहि लेख मे लेखक कुणाल सर सौराठ सभाक सिस्टम पर सवाल उठौलनि अछि। पंजी प्रथा द्वारा ब्राह्मण जाति केर अन्तर्विभाजनक बात कहलनि अछि। ताहि अन्तर्विभाजन सँ भाषाक विभाजन हेबाक तर्क सेहो देलनि अछि। आर, अपना तरहें ओकरा जातीय विभाजन व ताहि मे एक द्वारा दोसर प्रति अवहेलना आ निम्न बुझबाक-देखेबाक प्रवृत्ति आदिक बात सेहो कहलनि अछि। पुनः ओहि बात सँ राज्य स्तर पर भाषाक विभाजन यानि अंगिका-बज्जिकाक निर्माण केँ सेहो जोड़ि देलनि। सबटा दोष एक ‘सौराठ सभा’ सँ जोड़िकय राखि देलनि।
 
पुनः दोसर भाग मे एहि लेख द्वारा कहल गेल अछि जे ‘पंजी परम्परा’ केर वैज्ञानिक उपयोगिता केँ अपन कपोलकल्पित अवधारणा मे वैज्ञानिक खोज ‘एटम बम’ सँ तुलना करैत सवाल दागि देलनि जे एटम केर आरो उपयोगिता छैक, धरि ई पंजी प्रथाक कोन उपयोगिता छैक सिवाये जाति केँ ऊंच-नीच मे विभाजन करबाक अलावे..!
 
तदोपरान्त लेखक कुणाल सर अपन सुझाव दैत निज द्वारा प्रस्तुत लेख केर महत्ता केँ स्थापित करबाक क्रम मे कहलनि अछि जे ‘सौराठ सभा केँ विवाहक मेला वला छवि सँ फराक कय केँ व्यापक मिथिला कला केर हाट आ साहित्य संस्कृति विमर्श केन्द्र केर रूप मे पुनर्जीवन भऽ सकैत छैक।” आर फेर लेखक केँ अपन सीमाक भान होइत देरी कर्मशीलताक पक्ष पुनः वैह समाज जे सौराठ सभाक वर्तमान स्वरूप केँ बनौलक तेकरे पर छोड़ैत कहैत छथि “से सामाजिक इक्षाशक्ति पर आश्रित अछि…”।
 
पुनः लेखक केँ सन्तुष्टि नहि होइत छन्हि, ओ आगू बढि फेर ‘विस्मयादिबोधक चिह्न’ केर भरमार प्रयोग करैत लिखैत छथि ‘मिथिला के सामाजिक इक्षाशक्ति!!! कोन चिरई के नाम छी….?’
 
बात पकड़लियैक? लेखक भ्रमित छथि। लेकिन लेखनीक कार्य मे एकटा ऐतिहासिक परम्परा केँ पकड़िकय सुखायल थन मे सँ दूध दुहबाक कुचेष्टा कय रहला अछि। जे सौराठ सभा २०म शताब्दीक अन्तिम दशक सँ मृतप्राय अछि। तथा मिथिलाक ओ ब्राह्मण जाति लगभग वैह दशक सँ दर-दर भटकैत अपन नव-नव आशियाना भारत, नेपाल आ विश्व केर विभिन्न शहर-बाजार मे स्थापित करय लेल बाध्य छथि – आर आब कुटमैती तय करबाक लेल शहर-शहर मे सौराठ सभा जेकाँ वैवाहिक परिचय सभा लेल सेहो बाध्य छथि, नहि तऽ कतेको लोकक बेटी अन्तरजातीय विवाह केलक, कतेको लोकक उमेर बितला पर कतहु कय लेलक, कतेको केँ विवाह लेल बाकिये रहि गेल… अनेक दुरावस्था सँ ई समुदाय निकलि रहल छथि। से बात सब लिखबाक लेल लेखक केँ कलमक मसि केँ सुखा देलक।
 
कवि बड पैघ कल्पनाशक्ति सँ सौराठ सभा केँ साहित्य-संस्कृति विमर्श केन्द्र केर रूप मे विकसित होबय देखय चाहि रहला अछि। सौराठ सभागाछीक यथार्थ वस्तुस्थिति सँ ई एकदम अपरिचित छथि। कारण ई सभागाछी जे आइयो दरभंगा महाराजाक ट्रस्ट द्वारा निजी तौर पर कब्जा मे राखल गेल अछि, शेष ग्रामीण समाज आ शेड्युल कास्ट केर अतिक्रमण मे फँसल अछि, जतय महादेव मन्दिर पूर्ण जीर्ण अवस्था मे चलि गेला आ उत्तरबड़िया देवाल ढहि गेलाक बाद वैह ट्रस्ट द्वारा उपरे-ऊपर बनायल-रंगायल-ढोढायल गेल अछि… ताहि सब पर मिथिलाक साहित्यकार-आलोचक वा संचारकर्मी लोकनिक कलमक नींब केँ भोत्थर बनौने भेटत।
 
लेखक अपन आगाँक भाग मे सेहो किंवदन्ति सब पर प्रहार करैत ब्राह्मण जातिक ऐतिहासिक धरोहर केर विशिष्टता, आवश्यकता, महत्ता आदि केँ बिना एको पाँति जिकिर कएने – एकर समग्र हित व लाभ सँ कोना समस्त जाति, समुदाय, समाज आ इलाका लाभान्वित होइत छलय से सब बात बिना लिखने केवल ब्राह्मण जाति पर प्रहार टा कएने छथि।
 
लेखक कुणाल सँ इतर अहाँ १९८० ई. केर आसपास सँ लगभग २००० ई. धरिक रिपोर्ट उठाउ, बालीवूड सिनेमा देखू, सिर्फ नकारात्मकताक राजनीति भेटत एहि ‘सौराठ सभा’ पर। स्थानीय लोक सब कहैत छथि जे एतेक महत्वपूर्ण परम्परा केँ यैह प्रवृत्ति आखिरकार प्राणविहीन बना देलक। ताहि पर सँ नेतागिरी चमकेनिहार किछु खास पार्टीक लोक सब एतय एलाह ‘दहेज मुक्त’ अभियान लय केँ, ओ लोकनि बा-जबरदस्ती सभा मे आयल वर केँ गट्टा धय केकरो बेटी-बहिन सँ बियाह करा देथिन, लोक केँ असुरक्षाक भावना घर करय लागल, सभा परम्परा समाप्त भऽ गेल। नीक लोक, नीक कुल, नीक मूल, ओ सब आन-जान बन्द कय देलनि। एकर नुकसान कतेक भेल से समीक्षा चलि रहल अछि एखन। लेकिन २०१७ मे सुनौती बात पर ‘लघिया पोखरि’ आ ‘भालरिक गाछ मौलायब’ वला कहावत केँ मजाक उड़ेनाय २०१७ मे मैथिली साहित्यकार कुणाल समान लेखक लेल सहज बात अछि।
 
अन्त मे, हमर सादर अनुरोध हरेक लेखक सँ यैह रहत जे बिना समुचित शोध, खोज आ ओकर मौलिक महत्व केँ बुझने-गमने केवल नकारात्मक पक्ष केँ तेना भड़काऊ भाषा मे प्रस्तुत करब जे जेहो थोड़-बहुत लोक केर हृदय-परिवर्तन होइत एहि महत्वपूर्ण परम्परा प्रति सहानुभूति आबि रहल अछि सेहो बन्द भऽ जाय, ताहि सँ कनेक बची।
 
मैथिल ब्राह्मणक विवाहक पद्धति अपना आप मे अत्यन्त विलक्षण अछि। रक्त सम्बन्धक जाँच सँ लैत पैतृक-मातृक पक्षक ७ व ५ पीढी क्रमशः केँ खोजबीन केलाक बाद नव दम्पत्ति केँ वैवाहिक अधिकार देनाय आ तदोपरान्त सिद्धान्त लेखन – ई थिक पंजी परम्परा। एहि मे एटम बम केर न्युट्रान, प्रोटोन, इलेक्ट्रोन जेकाँ कइएक महत्वपूर्ण तत्त्व समाहित अछि। ओहिना संस्कार, शिक्षा, सामर्थ्य, सोच, एहि विशेष जातिक सर्वोच्च नहि छैक, एकर पाछाँ पुरुखा द्वारा निर्धारित ई विशेष नियम आ विध-व्यवहारक बड पैघ महत्व छैक। एकरा जे धारण करैत अछि से बुझि सकैत अछि। श्रोत्रिय, योग्य, भलमानुस, बिकाऊ, आदि अन्तर्विभाजन निश्चित कालान्तर मे विकसित प्रदर्शनकारी कमजोरी आयल, ताहि लेल निश्चित आत्मसमीक्षा करैत कमजोरी केँ दूर करबाक जरूरत पर काज कयल जाय। लेकिन सीधे कोनो चीज केँ नकारात्मक मानिकय नकारब, से हमर आदरणीय जेठ भ्राता तुल्य लेखक सँ करबद्ध निवेदन करबनि जे एहि पर दोबारा विचार करथि।
 

हरिः हरः!!

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