ब्रह्माण्डक बनावट आर सभक मालिक केर निवासस्थलक सहज वर्णन – रोचक आ पठनीय लेख

परमपिता परमेश्वरक धाम कोन ठाम अछि, मनुष्यक पहुँच ओतय धरि कियैक नहि

– मूल लेखकः अनिरुद्ध जोशी ‘शतायु’ (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)

एतय हम भगवानक नहि बल्कि ईश्वर केर, परमात्मा केर या ब्रह्म केर बात कय रहल छी। वर्तमान मे लोक ‘भगवान’ शब्द केँ ‘ईश्वर’ सँ जोड़ैते अछि ताहि सँ एहि लेख केर शीर्षक मे भगवान राखल। कोनो मनुष्य देवता या भगवान बनि सकैत अछि लेकिन ईश्वर या परमात्मा नहि। वेद कहैत अछि जे ईश्वर अजन्मा, अप्रकट और निराकार छथि। वैह छथि अनंत, जे अंतरिक्ष मे अरबों योजन दूर सत्यलोक मे रहियोकय सर्वत्र व्याप्त छथि, जेना सूर्य केर प्रकाश।

आउ एहि रहस्य केँ सरल भाषा मे बुझैत छी। एकरा बुझय लेल पहिने ५ गोट आधारभूत बात बुझय पड़त। तखन अहाँ केँ ईश्वर केर स्थिति (लोकेशन) केर ज्ञान होयत। एहि बुनियादी तथ्य केँ याद राखब तखन पता चलि जायत जे ईश्वर कतय विराजमान छथि।

१. गीता मे कहल गेल अछि जे ई सृष्टि उल्टा वृक्ष केर समान अछि। मतलब ई जे एहि ब्रह्मांड मे बीज (बिया) ऊपर छैक और ओकर फल नीचाँ लागल छैक। ई संपूर्ण तारा, ग्रह और नक्षत्र, पशु, पक्षी, मनुष्य आदि फल थिक। जाहि ठाम सँ बीज उत्पन्न भेल ओतहि ईश्वर मौजूद छथि। मतलब ई जे सृष्टिकेर २ छोर अछि – एक छोर पर बीज आर दोसर छोर पर फल। मतलब यैह कि एकर एक छोर पर ब्रह्मांड अछि आर दोसर छोर पर ब्रह्म (ईश्वर) छथि।

२. मनुष्यक शरीर सेहो एक उल्टा वृक्ष केर समान अछि। मस्तिष्क एक बीज केर खोल थिक। जाहि मे जतय माथ केर चोटी अछि ओतय बीज स्थित अछि यानि जेकरा सहस्रार चक्र कहल जाइछ। एहि मस्तिष्कक भीतर एकदम मध्यभाग (केन्द्र) मे आत्मा केर निवास होइत छैक। मतलब एहि शरीर केर दुइ छोर अछि – एक छोर पर सहस्रार और दोसर छोर पर मूलाधार चक्र। बीच मे अनाहत चक्र अछि।

३. एहि ब्रह्मांड मे विज्ञान केर अनुसार ग्रह-नक्षत्र और कतेको आकाश गंगा आदि (गैलेक्सी) अछि। लेकिन हिन्दू धर्म द्वारा एहि ब्रह्मांड केँ ३ भाग मे विभाजित कयल गेल छैक – १. कृतक त्रैलोक्य, २. महर्लोक और ३. अकृतक त्रैलोक्य। एकरे वेद मे पंच कोष वाली सृष्टि कहल गेलैक अछि – जड़, प्राण, मन, बुद्धि और आनंद।

* कृतक त्रैलोक्य – कृतक त्रैलोक्य केर ३ भाग छैक – भूलोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक। ई तीनू नश्वर छैक। एकर एक निश्चित ‍आयु छैक। जतेक दूर तक सूर्य, चंद्रमा आदि केर प्रकाश जाइत अछि, ओ भूलोक, भूलोक और सूर्य केर बीचक स्थान केँ भुवर्लोक कहैत छैक। एहि मे सब ग्रह-नक्षत्र केर मंडल अछि। तेकर बाद सूर्य और ध्रुव केर बीच जे १४ लाख योजन केर अंतर अछि, ओकरा स्वर्लोक या स्वर्गलोक कहैत छैक। एकरहि बीच मे सप्तर्षि केर मंडल अछि और ध्रुवलोक स्थित अछि।

*महर्लोक – कृतक त्रैलोक्य मे स्थित ध्रुवलोक सँ १ करोड़ योजन ऊपर महर्लोक अछि। कृतक और अकृतक लोक केर बीच स्थित अछि ‘महर्लोक’, जे कल्प केर अंतक प्रलय मे केवल जनशून्य भऽ जाइत छैक, लेकिन नष्ट नहि होइत छैक। ताहि लेल एकरा कृतकाकृतक सेहो लोक कहैत अछि।

*अकृतक त्रैलोक्य – कृतक और महर्लोक केर बाद जन, तप और सत्य लोक तीनू अकृतक लोक कहाइत अछि। अकृतक त्रैलोक्य अर्थात् जे नश्वर नहि अछि, अनश्वर अछि। महर्लोक सँ २० करोड़ योजन ऊपर जनलोक अछि। जनलोक सँ ८ करोड़ योजन ऊपर तपलोक अछि। तपलोक सँ १२ करोड़ योजन ऊपर सत्यलोक अछि।

४. हिन्दू धर्म मे सृष्टि उत्पत्ति केर क्रम एहि प्रकारक कहल गेल अछि। ओहि अनंत (ईश्वर) से महत् केर उत्पत्ति भेल। महत् सँ अंधकार जन्मल, अंधकार सँ आकाश, आकाश सँ वायु, वायु सँ अग्नि, अग्नि सँ जल, जल सँ पृथ्वी, पृथ्वी सँ औषधि, औ‍षधि सँ अन्न, अन्न सँ वीर्य, वीर्य सँ पुरुष अर्थात शरीर उत्पन्न भेल। पुरुष केर अर्थ एतय मनुष्य वा इंसान नहि, बल्कि जे कोनो शरीरधारी अछि से सब।

५. हिन्दू धर्म मे काल अर्थात् समय केर धारणा बहुते वैज्ञानिक अछि। एक तृसरेणु सँ लय केँ एक क्षण तक। एक क्षण सँ लय केँ दंड तक, दंड सँ लय केँ मुहूर्त और मुहूर्त सँ लय केँ प्रहर, प्रहर सँ लय केँ दिवस तक, दिवस सँ लय केँ पक्ष। दुइ पक्ष केर एक माह, दुइ माह केर एक ऋतु, छह माह केर एक अयन, दुइ अयन केर एक वर्ष। एक वर्ष केर देवताक एक दिन। देवताक १२,००० वर्ष केर एक महायुग। ७१ महायुग केर एक मन्वंतर, चौदह मन्वंतर केर एक कल्प। एक कल्प अर्थात् ब्रह्मा केर एक दिन। ततबहि के एक राति। मतलब दुइ कल्प केर हुनकर दिन और राति मिलाकय एक अहोरात्र पूर्ण होइत अछि। तहिना महाविष्णु और शिव केर समय केर कल्पना करब मुश्किल अछि।

आब बात करैत छी जे ईश्वर कतय रहैत छथि?

जँ अहाँ उपरोक्त लिखल नहि बुझलहुँ त कोनो बात नहि। ई कियैक लिखल, से अहाँ केँ आगू बुझय मे आओत। अहाँ भौतिक और गणित विज्ञान मे आयाम अर्थात् डायमेंशन केर बारे मे पढनहिये होयब। वैज्ञानिक कहैत छथि जे ब्रह्मांड मे १० आयाम भऽ सकैत अछि लेकिन मोटामोटी हमरा लोकनिक ब्रह्मांड त्रिआयामी अछि। पहिल आयाम छैक ऊपर आ नीचाँ, दोसर अछि दायाँ आ बायाँ, तेसर अछि आगू आ पाछू। एकरे थ्री-डी कहैत छैक। एक गोट चारिम आयाम सेहो छैक जेकरा समय कहल जाइत छैक। समय केँ आगू बढैत अनुभव कय सकैत छी। एहिमे हम सब पाछू नहि जा सकैत छी।

ई संपूर्ण ब्रह्मांड यैह चारि आयाम पर मात्र आधारित अचि, लेकिन हिन्दू धर्म केर अनुसार ई नियम सिर्फ कृतक त्रैलोक्य पर टा लागू होइत छैक, अन्य लोक पर नहि। वेद और पुराण मे अन्य ग्रह और अंतरिक्ष केर बारे मे विस्तार सँ लिखल गेल छैक। ऊपर हम पहिनहि तीनू लोक और ओकर उपलोक केर बारे मे बता चुकल छी।

हिन्दू शास्त्र केर अनुसार भूलोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक त्रिआयामी सृष्टि मे मात्र निवास करैत अछि। चारिम आयाम ओ समय थिक। पांचमा आयाम केँ ब्रह्मा आयाम कहल गेल अछि। एहि आयाम मे ब्रह्मा निवास करैत छथि। एहि आयाम सँ कतेको तरहक ब्रह्मांडक उत्पत्ति होइत छैक। एहि ठामक समय अलग छैक। जेना कि पहिने बता चुकल छी जे ब्रह्माक एक दिन एक कल्प केर बराबर होइत छैक। ई स्थान चारू आयाम सँ बाहर अछि।

तेकर बाद आगू अछि छठम् आयाम जतय महाविष्णु निवास करैत छथि। महाविष्णु केर सेहो ३ भाग छैक – कारणोंदकशायी विष्णु, गर्भोदकशायी विष्णु और क्षीरोदकशायी विष्णु।

एहि मे कारणोंदकशायी अर्थात महाविष्णु तत्वादि केर निर्माण करैत अछि जाहि सँ ई ५ आयाम केर निर्माण होइत अछि। एकरे महत् कहल जाइत अछि आर हिनक उदर मे समस्त ब्रह्मांड अछि तथा हिनक प्रत्येक श्वाँस चक्र केर संग ब्रह्मांड प्रकट तथा विनष्ट होइत रहैत अछि।

दोसर गर्भोदकशायी विष्णु सँ टा ब्रह्मा केर जन्म होइत छन्हि, जे प्रत्येक ब्रह्मांड मे प्रविष्ट कय केँ ओहि मे जीवन प्रदान करैत छथि तथा जिनकर नाभि कमल सँ ब्रह्मा उत्पन्न भेलाह। ओकरा बाद तेसर छथि क्षीरोदकशायी विष्णु, जे एहि सृष्टि केर हर तत्व और परमाणु मे विलीन छथि, जे परमात्मा रूप मे प्रत्येक जीव केर हृदय तथा सृष्टि केर प्रत्येक अणु मे उपस्थित रहिकय सृष्टि केर पालन करैत छथि।

जखन हम ध्यान करैत छी तऽ हम सब कसिरोधकस्य विष्णु केँ महसूस करैत छी। जखन हम सब एकर ज्ञान पाबि लैत छी तखन हम भौतिक माया सँ बाहर आबि जाइत छी। एहि सँ हम परमात्मा केँ महसूस करैत छी। जखन व्यक्ति ध्यान केर परम अवस्था मे होइत अछि तखन हिनका या एहि आयाम केँ महसूस कय सकैत अछि।

एकर बाद नंबर अबैत अछि सातम आयाम केर जे सत्य आयाम या ब्रह्म ज्योति कहाइत अछि। ब्रह्म ज्योति जेना सूर्य केर ज्योति होइछ तहिना सर्वव्यापी होइत अछि। एहि आयाम मे ओ तत्व ज्ञान समाहित अछि जेकर मदति सँ मनुष्य देवता लोकनिक श्रेणी मे चलि जाइछ।

तेकरा बाद अछि आठम आयाम जेकरा कैलाश कहल जाइत अछि। एहि आयाम मे भगवान शिव केर भौतिक रूप विराजमान अछि। हुनकर कार्य टा एहि सातो आयाम केर संतुलन बनाकय रखैत अछि। यैह कारण सिद्धयोगी भगवान शिव केर आराधना करैत छथि, कियैक तऽ हरेक योगी ओतहि जाय चाहैछ।

फेर अछि नौवम आयाम जेकरा पुराण मे वैकुंठ कहल गेल अछि। एहि आयाम मे नारायण निवास करैत छथि, जे हर आयाम केँ चलायमान रखैत छथि। मोक्ष केँ प्राप्त करबाक मतलब अछि एहि आयाम मे समा गेनाय। हर आयाम एहि सँ बनल अछि। यैह आयाम सभ आयाम केर निर्माण करैछ। मोक्ष केर प्राप्ति कय हरेक आत्मा शून्य मे लीन भऽ कय एहि आयाम मे लीन भऽ जाइत अछि।

तेकर बाद अबैत अछि दसम आयाम जेकरा अनंत कहल गेल छैक। हम अहाँ केँ ऊपर चारिम विन्दु मे बतेने रही जे अनंत सँ महत् आर महत् सँ अंधकार, अंधकार सँ आकाश केर उत्पत्ति भेल अछि। यैह अनंत टा परम सत्ता परमेश्वर अर्थात् परमात्मा, ईश्वर या ब्रह्म थिकाह। संपूर्ण जगत केर उत्पत्ति एहि ब्रह्म सँ भेल अछि आर संपूर्ण जगत ब्रह्मा, विष्णु, शिव सहित एहि ब्रह्म मे लीन भऽ जाइत अछि। यैह एक जगह प्रकाश रूप मे स्थिर रहिकय सर्वत्र व्याप्त छथि। यैह सनातन सत्य थिक जाहि मे वेद केर अनुसार ६४ प्रकारक आयाम समायल अछि।

कियैक नहि पहुँचि सकैछ मनुष्य ओतय? 

एहि ब्रह्मांड मे तपलोक सँ १२ करोड़ योजन ऊपर सत्यलोक अछि। ओकर पार अनंत ब्रह्म अछि। ओतय मनुष्य कोनो यान केर द्वारा नहि पहुंचि सकैछ, कियैक तँ ओ दसम आयाम थिक। मनुष्यक क्षमता केवल ४ आयाम धरि विचरण कय सकबाक होइत छैक। ओतय केवल योग केर शक्ति सँ मोक्ष प्राप्त कयलाक बाद टा गेल जा सकैत अछि। कियो शरीरधारी ओतय नहि जा सकैत अछि। दोसर ई जे वैह ब्रह्म सर्वत्र व्याप्त छथि, ठीक ओहिना जेना सूर्य केर प्रकाश सब दिशा मे व्याप्त अछि।

ओ दूरहु सँ बेसी दूर छथि और समीपहुँ सँ बेसी समीप (पास) मे छथि। वैह सभक आत्मा भऽ कय सेहो सभ सँ अलग परमात्मा थिकाह। हुनकहि बल सँ सभ मे बल अछि। हुनकहि शक्ति केर कारण सभ मे शक्ति अछि। हुनकहि ऊर्जाक कारण सभ मे ऊर्जा अछि।

हरिः हरः!!

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