प्रवीण डायरी २०१३ – भाग १

३१ दिसम्बर २०१३

मैथिली सेवा समिति, विराटनगर – आमंत्रित करैत अछि!!

मैथिली भाषा कवि गोष्ठी – एवं रक्तदान कार्यक्रम मे

४ जनवरी, २०१४ – श्री राम जानकी मन्दिर, विराटनगर – समय १० बजे सँ ४ बजे धरि।

साहित्य सँ संस्कार आ रक्तदानसँ जीवनदान – अपने लोकनि बेसी सभ बेसी संख्यामे सहभागी बनैत एहि कार्यक्रमकेँ सफल बनाबी।

आजीवन सदस्यकेँ सदस्यता प्रमाणपत्र वितरण आ मैथिली पुस्तक केर पुस्तकालय संचालनक घोषणा सेहो कैल जायत।

आयोजक:
मैथिली सेवा समिति, विराटनगर।

हरि: हर:!!

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मैथिली-मिथिलाक एक अजूबा सपूत – अनुप चौधरी द्वारा देल गेल एक यादगार अपडेट सँ ई ज्ञात होइत अछि जे ताहि समय मैथिली-मिथिला आन्दोलन मे के-के सक्रिय रूप सँ एहि अभियन्ता केँ आगू बढौलनि।

“सालक अंतिम दिन हम आन्दोलनमे छायाके तरह साथ देनिहार भाइजि आ मित्र के हुनकर नेह लेल आभारि छि कहि नाम लेब चाहब….प्रविण नारायण चौधरी, राजेश झा, हेमंत झा, विजय झा, सागर मिश्रा, आशुतोष झा, निरज पाठक, श्याम मैथिल, अशोक मैथिल, झा चंदन, पंकज झा, गणेश मैथिल, मनोज झा, ठाकुर सूमन, संजय मिश्र, रामनरेश शर्मा, रोशन मैथिल, राजेश राय, अक्षय आन्नद सन्नी, आदित्य झा, कृपानन्द झा, कोशल जि, उदय शंकर मिश्र, बिजय झा, कमल किशोर झा, रामचन्द्र झा, अविनाश झा, हर्ष मैथिल, रोशन चौधरी, रोशन मिश्रा, अनिल झा, रतनेश्वर झा, राजिव झा, कमलेश मिश्र, पंकज झा, पंकज प्रसून, रवि झा, संजय कुमार, आरति झा, सोनु मिश्र, कृष्ण कुमार मैथिल, शंकर आन्नद झा, राघव झा, अखिलेश झा, जिवकान्त मिश्र, जनआनंद मिश्र, ओमकार चौधरी, अनित झा, विकाश झा, सागर झा, श्रिचंद कामत, अरविंद मिश्र, अकिंत राय, दिपक कुमार खाँ मैथिल, श्याम बिहारी राय “सरस”, विनय झा, आन्नद झा, जटा शंकर राय, सुभाष चन्द्र राय आदि के नेह 2014 मे बनल रहत त जित लेब जहान !!! फेसबुक पर निरंतर उत्साह बढेनिहार आदरणीय आ मित्रके सहियोग के कारण माँ मैथिली लेल किछ क पाइब रहल छी !!!”

विदित हो जे साल २०१३ ई. मिथिला आन्दोलन लेल २१वीं शताब्दी सर्वश्रेष्ठ वर्ष केर रूप मे जानल जायत, जे एहि वर्ष युवा लोकनिक जोश आ उत्साह सँ अपन भाषा, संस्कृति, राज्य आ आत्मसम्मान-स्वाभिमान केर रक्षार्थ कइएक महत्वपूर्ण डेग उठायल गेल छल।

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अप्रील १ – जेकरा अंग्रेजिया जीवन पद्धतिमे फूल डे मनाओल जाइछ, लेकिन २००७ ई. धर्म मार्गक स्थापनाकाल सँ सिद्धान्तसँ बान्हल एक महत्त्वपूर्ण स्वाध्याय – भेट गेल “जानकी नवमी”, सीताजीकेर सर्वश्रेष्ठ चरित्र, पतिव्रत धर्म, सुख-भोग सबहक त्याग, दुर्जनक आगू नहि झूकनाय, रामक प्रति अगाध प्रेम, सदाचरणसँ शीलवती नारीक रूपमे जीवन भरि दु:ख सहैत अपन अनुपम देबाक महान उदाहरण – हम तऽ बस माँ के शरण धेने रहय लेल आतूर छी। बस, माँ, देह सिहैर जाइत अछि। बेर-बेर प्रणाम करैत छी। हिनका पर लिखल किछु रास बात: सन्दर्भ जानकी नवमी! 🙂

 

“एहि बेर १९ मई केँ जानकी नवमी अछि आ मिथिलावासी प्रत्येक घरमें जानकी मैयाक पूजा-अर्चना मर्यादा पुरुषोत्तम रामक संग जरुर करैथ।

 

माँ सीता प्रति भक्ति-भाव:सीताक जीवन-चरित्र मानव समुदायकेँ जीवनमें समस्त सद्गुण संग त्याग आ विपत्तिक घडी सेहो धैर्यवान बनैत पूर्णतया अहिंसात्मक भावना एवं सहिष्णुताक व्यवहार करैत सर्वश्रेष्ठ मानव-आचरण अनुसरण करब अछि।

 

जे सीता बाललीला करैत खेल-खेलमें शिव-धनुष उठा लेने छलीह, जे शिव-धनुष कदापि श्रीराम (साक्षात्) नारायण छोडि दोसर कियो हिला तक नहि सकलाह…. ततेक शक्तिशाली देवी रहितो स्वयं सीता कहियो कोनो भी चरित्र लीलामें हिंसात्मक नहि बनलीह अछि आ यैह बात लेल विद्वान् आ शास्त्रमत-पारंगत हिनकर चरित्रगान करैत दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती, गौरी, सती, सावित्री, अनसूया, मन्दोदरी आदि अनेको विलक्षण गुण सम्पन्न देवीरूपमें सीताकेँ सर्वश्रेष्ठ घोषणा करैत छथि।

 

सीताक बाललीला गान करैत जगत्‌गुरु रामभद्राचार्यजी महाराज हालहि अपन सुन्दर काव्य “श्रीसीतारामकेलिकौमुदी” प्रकाशित कयलनि अछि जे अत्यन्त पठनीय आ रस-रमणीय अछि।

 

एहि बेर जानकी नवमीक अवसर पर भक्तजनलेल दू अति महत्त्वपूर्ण फलादेशक चर्चा करब:

 

१. जेना सीताक उपनाम ‘मैथिली’ छन्हि, से हिनक चरित्रगान करनिहार व मानव जीवनमें मैथिली-मिथिलाक अस्मिता-प्रति कर्तब्यनिष्ठ, सजग, सक्रिय सहयोगी बननिहार साक्षात् जनकनन्दिनी सीताजीकेँ प्रसन्न करैत छथि आ परमसुख के आनन्द प्राप्त करैत छथि।

 

२. जीवनक अनमोल प्राप्ति थिकैक माता-पिता-गुरुक चरण-सेवक बनब। सीता-चरित्रमें सेवा व समर्पणक अनुपम आ अत्यन्त सशक्त प्रस्तुति कैल गेल छैक। अनुगामी भक्त जीवन-भवसागर सहजता सँ पार करैत छथि।

 

एक रोचक प्रसंग:२५ नवम्बर, २००७ केँ जगत्‌गुरु रामभद्राचार्यजी चित्रकूट सँ मध्यप्रदेश के यात्रा पर छलाह। संगमें शिष्य सभसँ रसखान रचित कृष्णक बाल-चरित्र गान सुनि रहल छलाह आ रसमें भाव-विभोर छलाह, हुनका लेल किनको गान सीताराम-चरित्र समान होइत अछि आ ताहि क्रममें हुनकर दु-दु गो शिष्य कहलखिन जे कि श्रीसीतारामजी केर बाल-चरित्र किछु एहने रसगर भावसँ रचना संभव छैक… तऽ रामभद्राचार्यजी एहि भावनाकेँ स्वागत करैत बस एक महीना बादे मुंबईके अपन कोनो सभाक दौरान २३ दिसम्बर, २००७ केँ मंगलाचरणकेर रचना पूरा कयलाह… व्यस्तताक चलते अप्रील २००८ तक मात्र प्रथम भागक ६७ गो पद पूरा कय सकलाह… जखन कि सुन्दर संयोगवश सीताजीक अवतरण-भूमि मिथिलामें हुनकर १८ दिवसीय कार्यक्रम छलन्हि जे कमला नदीक तटपर छल ततय अबैत देरी केवल एहि छोट अवधिमें शेष २६० पदके रचना करैत अपन लक्ष्य पूर्ण कय लेलाह। प्रेमसहित कहियौ जगजननी सियाजीकी जय! ई मात्र माँ सीताक असीम आशीर्वाद आ मिथिलाक पुण्य भूमिक प्रताप सँ संभव भेल।

 

एहि बेर जानकी नवमी किछु अहु लेल विशेष अछि जे समस्त मैथिल संकल्प लेता जे मिथिलाक अस्मिता जोगेबाक लेल मिथिला राज्यक माँग भारत सरकार पूरा करैथ, जे कियो एहि क्षेत्रसँ चुनाव लडय लेल अबैथ पहिले अपन चुनावी घोषणापत्रमें मिथिला राज्यक माँग प्रति समर्थन या विरोध प्रकट करैथ तेकर बादे चुनावमें वोट मंगबाक लेल अबैथ। अत: एहि बेरुक पावन अवसरकेँ अपने समस्त मिथिलावासी मैथिल जरुर उपयोगमें लाबी आ जीवन धन्य बनाबी।”

 

अप्रील ५:

युवाकेँ बजेबाक लेल बहुत धारदार आ मूडियल लेख सब लिखय पडैत छैक:

 

I strongly believe in my native language Maithili, it is one of the best in world and I am proud of having learned several other languages to communicate quite boldly with entire world and sing of what a great culture of Mithila I am born at.

 

Vidyapati being my ideal and a real Hero on earth who gave a slogan that ‘native language is sweeter to all’ (देसिल वअना सब जन मिट्ठा) also became my favorite. I realized that true dedications among larger populations of our Mithila have been eloped. Maithili is dying by intentional hittings of the governments of Bihar, India and Nepal who ought to care and conserve such a great ancient culture which gifted the world with 4 significant sets of scriptures and the ordinances for eternalism of humanity on earth. The state sponsored poisoning would kill our native language and obviously then our culture eradication would also happen. Today our own people have given up using Maithili with shame and fear that others will know they come from Bihar and bad will come on their name and fame they have earned by their hard efforts and struggles after migrating to such a farther distanced round the world. Even those who are selling their labors speak ‘Tere-Ko’, ‘Mere-Ko’ and ‘Ha-Jee! Ha-Jee’ Hindi in places where they dwell for survival. Now, condition is so worse that they come down to Mithila once in several years and they start preaching to the native people for why they are living in Mithila and what is kept in Mithila, they must migrate or the upcoming generation would be left so much behind and backwardness would never last. What a pity!! The Mithila once educated the entire world sees such days because nobody (responsible governances) could win any confidences for Mithila or Maithili would last with similar brilliance as it ever was.

 

But I guarantee to all in my surrounding that Maithili has given me so many things and I am proud son of Mithila culture. I owe to it and so would pay to it till I live on earth. Whoever may think whatever about me but my dedication would do for my native land Mithila – I never find down while introducing to the world community who I am really. Although I am with thousands of brothers and sisters who may keep quarrelling with me, as it is our nature by birth to keep fighting like children and yet again greet each other with words of cheerfulness – we call it Dhuis-Dhuis or Chait-Chait as done in childhood. Perhaps this is our weakness that all others know and thus they rule over us since a very long time, can say when 53rd Janaka was killed by his own subjects. Indeed, Mithila remained a kingless kingdom and later there were several kings but nobody could keep it fit and tight as Mithila alone and that is what we still strive to get a dignity as United Mithila. Despite we are in two countries today, we frankly respect the border cutting our head portion into Nepal and the rest into India; but we cordially appeal to both the nations to grant us statehood respecting the true term of republicanism and protect our great culture which would further produce the similar better gifts to see humanity win always and let mankind remain under sweet shadow of the Supreme Lord.

 

Spirituality rules always!! Mithila is a very fertile land for this and we would flourish – world will flourish; sorry that we are losing hope and feel deprived as world is flourishing but Mithila is not.  

 

Come on youths!! Just come with fairness within self!!

 

अप्रील १०:

गाइर पर्यन्त पढनाय हम जरुरी मानैत छी, कारण गामक संस्कारमे पलल-बढल छी, सार-बान्चो मुँहे पर रहैत छैक लेकिन काज धरि सबटा सुचारू रूपमे चलैत रहैत छैक। कुटुम्बकेँ गाइर जतेक पढल जाइत छैक, सम्बन्ध ततबी मीठ रहैत छैक। अलबौका जेकाँ जँ गाइर पढय नहि आयल आ चैल गेलहुँ बहिनोइ सबहक गाम तँ लोक बीछ लेत…. एक बेर धिये-पुतामे पूछने छल जे कुटुम्ब अहाँक गाममे कतेक पोखैर सब अछि… कहलियैक तऽ… फेर कहलक जे कतेक लग्गी पाइन छैक ओहि पोखैर सबमे…. अटपटा लगैत रहल लेकिन कि जानय गेलियैक जे ई सब गाइर थिकैक…. यौ जी! मिथिलाक लोकक रग-रगमे ब्रह्मज्ञान छैक। जखन भिजबैक, शोध करबैक तखन नऽ बुझबैक… गंगाधर बाबु कहथिन… हे रौ फल्लम्मा – हे ओहि डार्हिके पाँग न रौ सार… ऊपर सऽ छडपनमा कहैन जे हे गाइर नहि पढू…. नहि तऽ एतहि सऽ कूरहैर फेकब जे ब्रह्माण्डे भाँगि देब… उहे बात नीक जेकाँ बजता से हिनका नहि होइत छन्हि… लेकिन आदति सऽ मजबूर कहू गाइर पढब छूटैत छैक। दुखमोचन बाबा मरैतो दमतक विद्यार्थीकेँ पढेबे केलखिन आ छौंकीसँ पोनठी फोरबे केलखिन। चाइल-प्रकृति आ बेमाय, ई तिनू संगहि जाय। लक्ष्य ई छैक जे “जागू भाइ सब, नहि तऽ खून भऽ जायब।” लेकिन एतय खून कोना बहत… ऊपर मुँहें भूर हैत वा निचाँ मुँहें, खून भुभुवैत निकलत आ कि रिसैते…. हौ बाबु! आब कहू जे एतेक पेंच लगेबैक तऽ सोझाँवाला कतेक धैर्य राखैत जबाब देत! 😉

 

सिलसिलामे कहियो एनाहू बाजल गेल छलैक:

 

अरे फेसबुकिया दोस्त! कम से कम दोस्ती के लेहाज राखू। मैथिली लिखयमें लाज कथी लेल होइत अछि? कि डर होइत अछि जे बगलवाला कहीं मिथिलाके बुझि घर-परौना आ माँरपीबा बुझि थूक फेक देत? आ कि किछु आर? यदि यैह बात छैक तखन हमरा समान मैथिलीके दिवाना सभ संग दोस्ती कथी लेल?  

 

जखन घरे के लोक मैथिलीके दुश्मन तऽ सरकार कोना मदद करत एहि विलक्षण भाषाके बचाबय लेल? पहिले लिपिक अन्त भऽ चुकल अछि आ आब क्रमश: मिथिलाक विशिष्ट पहचान सेहो समाप्त भेल जा रहल अछि, कृपया आबो सतर्क होउ।

 

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लेकिन अहाँ तपबल लेल स्वाध्याय नहि छोडि सकैत छी:

 

अपन निरंतर अभ्यास सँ एक बात स्पष्ट भेल जे आखिर मिथिला कोन बल पर एक सऽ एक ऋषि-मुनि-तपी-ज्ञानीजन के संग-संग अनावश्यक ममतारहित आ लोभ-क्रोध-मोह-रहित सन्तानकेँ उत्पत्ति करैत रहल अछि। आर एकर मात्रामें आइ किऐक घोर कमी आयल अछि ताहि बातक जनतब सेहो भेल अछि। गूढ रहस्यकेँ बस किछुवेक गीताक पाँतिमें एकरा एना समेटल जा सकैत छैक:

 

युञ्जन्नेवं सदात्मानं योगी विगतकल्मष:।सुखेन ब्रह्मसंस्पर्शमत्यन्तं सुखमश्नुते॥६-२८॥सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि।ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शन:॥६-२९॥यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति।तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति॥६-३०॥सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थित:।सर्वथा वर्तमानोऽपि स योगी मयि वर्तते॥६-३१॥

 

अपन आत्माकेँ सदैव योगमें लगेनाय, पाप मुक्त भेल योगी, सहजता संग ब्रह्म सँ स्पर्श पाबयके सुख भोगैत छथि। योग सँ युक्त आत्मा, अपनहि आत्माकेँ सभ जीवमें देखैत – सभ जीवकेँ अपन आत्मामें देखैत सदिखन एकसमान रहैत छथि। जे हमरे हर जगह देखैत छथि आ हर वस्तुके हमरेमें देखैत छथि, हुनका लेल हम कखनहु ओझल नहि होइत छी। समस्त भूतमें स्थित हमरहि जे अनन्य भावसँ स्थित होइत भजैत छथि ओ सभ किछु करितो हमरे में रहैत छथि।

 

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151426542583492&set=a.483139743491.262675.637903491&type=1&theater

 

अप्रील ११:

अनमोल जीवन

 

जीवन धन बड मूल्यकेँ, देलनि अछि भगवान्!सच्चरित्र शिष्टा-सुन्दर, बनियौ बस इनसान!!

 

हमर वृत्ति जे हमहि करी, देखबय लेल नहि धर्म!जीवन साफल बनल ओकर, कयलक जे निज कर्म!!

 

देखू न आवरण देह के, पाबू निज मति दाम!अपन-अपन स्वभावसँ, बनबू मिथिला गाम!!

 

रहल ई पावन देश सदा, अयला ऋषि-मुनि धाम!कियो न बाँचल यदा-कदा, कयने बिन निज काम!!

 

लोभ मोह मद तीन जे, कयलक सभटा नाश!नि:स्वार्थ बस जीव बनी, भजियौ सीताराम!!

 

चैती नवरात्रापर शुभकामनाक संग, सर्वकल्याणकारी सूत्रक शुभ उपहार समेत – प्रवीण किशोर!

 

अप्रील ५ सँ अप्रील १४:

 

हाँ, संगे इहो कहैत चली जे ओम्हर विचारक अनुसार फेर दिल्लीमे अप्रील ७ युवा समूह निर्माण कार्य लेल आपसी बैठक लेल विमर्श निरन्तरता मे रहल। अप्रील ७ एक बैसार राखल गेल, मुदा निष्कर्षविहीन! रस्साकस्सी चलि रहल छल, कविकेँ नेता मानैत आगू बढबाक लेल आ मिथिला राज्य लेल जनजागरण करबाक मुख्य माँग रहल छल, लेकिन ‘कवि एकान्त’ केँ विचारधारा मानि ओहि पाछू युवा सब जुडैथ आ आगू बढैथ सोचि रहल छलाह जे कम सऽ कम आजुक समयमे पैछला भूल सब देखैत केकरो मंजूर नहि हेतैक… खास कऽ के जखन “मिथिला राज्य लेल संघर्ष” छैक तखन हमरा सबमे एना संस्था प्रति मोह किऐक बनैत अछि – आ मुद्दा प्रति समर्थन मूल्य कोना बनतैत ततबी सोचैत आगू किऐक नहि करैत छी…. बरु पहिलेसँ निर्मित सबकेँ एक मंच पर अनबाक आ एकजुट संघर्ष करबाक चिर-परिचित जरुरतकेँ स्थापित करय लेल किऐक नहि सोचैत छी…. उलटे आरो नव-नव फंडा आबय लगैत अछि। खैर, कवि अलग मिटींग राखैत छलाह आ हमरा सब सेहो प्रयास करैत रही। होइत-होइत विश्व मैथिल संघ द्वारा १४ अप्रील राखल गेल एक संगोष्ठी द्वारा “मिथिला राज्य निर्माण सेना” जोशे-जोशमे बनि गेल, ओही गोष्ठीमे समिति सेहो बनि गेल, एक निश्चित लक्ष्य आ ओकर प्राप्ति टा विधान बनैत सब किछु आगू बढि गेल। एहि महत्त्वपूर्ण उपलब्धिपर निम्न लिंक सब बहुत महत्त्वपूर्ण अछि।

 

जीवन

 

खुश छी

एतबीमें

जतेक अछि

अपना हिसाबसँ!

पात खररब

भूज्जा फाँकब

नोन तेल रोटी

साग भात

जैह जुडत

सैह खायब!

बोइन पर

अधिकार अछि

काज करब

जिनगी जियब!

केकर रहलै

चौजुगी चमक?

के बचलसभ दिन?

त्याग छै

कीर्ति छै

विद्या छै

वैभव छै

दान छै

धर्म छै

मैथिली छै

मिथिला छै

हम छी

दैव छै

चलू

जीबि ली

जहान छै!

 

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151431150043492&set=a.483139743491.262675.637903491&type=1&theater

 

अध्ययन जरुरी:

https://www.facebook.com/notes/pravin-narayan-choudhary/%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%82%E0%A4%9D-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%B0/631894980157750

 

कार्यक्रम लेल तैयारी:

https://www.facebook.com/notes/pravin-narayan-choudhary/delhi-seminar-vishwa-maithil-sangh/633492619997986

 

विडियो देखबाक लेल:

http://www.youtube.com/user/LOVECHANDAN100/videos?sort=dd&shelf_id=1&view=0

 

अप्रील १५ सँ अप्रील ३० धरि – सपरिवार धार्मिक भ्रमण, वैष्णोदेवी दरबार, बाबा विश्वनाथ दरबार – आदि।

 

हरि: हर:!!

(ई नोट पब्लिश कएने रही – २०१३ केर एक समीक्षाक रूप मे)
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जीवन

खुश छी
एतबीमें
जतेक अछि
अपना हिसाबसँ!
पात खररब
भूज्जा फाँकब
नोन तेल रोटी
साग भात
जैह जुडत
सैह खायब!
बोइन पर
अधिकार अछि
काज करब
जिनगी जियब!
केकर रहलै
चौजुगी चमक?
के बचल
सभ दिन?
त्याग छै
कीर्ति छै
विद्या छै
वैभव छै
दान छै
धर्म छै
मैथिली छै
मिथिला छै
हम छी
दैव छै
चलू
जीबि ली
जहान छै!

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मार्च २: माघी कीर्तन कामर यात्रासँ वापसी

मार्च ३: दहेज मुक्त मिथिला केर सफलतम २ वर्षपर प्रतिवेदन प्रस्तुत

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151361419998492&set=a.483139743491.262675.637903491&type=1&theater

मार्च १३:

मार्च मिथिला लेल एक महत्त्वपूर्ण मास छल, कवि एकान्त एक युवा अभियानी अपन व्रतसँ मिथिला लेल आन्दोलन शुरु केने छलाह। हजारों मैथिल युवा एहि आह्वान संग जुइड गेलाह। सैकडो अपन सहभागिताक लेल गैछ लेलाह। पूर्णरूपमे युवा सब मिलिजुलि एहि अनशनकेँ सफल करैत प्रमाणित कय देलक जे मिथिलाक युवा केकरो सऽ कोनो मामिलामे कम नहि। जखनकि किछु चोपहा युवा अहूमे अपन कूतर्कसँ सहभागिता नहि देलनि, लेकिन जे वीर आ वचन केर पक्का छलाह ओ सब आबि गेलाह। किछु रास एहनो लोक जे ओहि समय फेसबुक पर कतेको तरहक लांछणा सेहो लगेलनि जे युवाकेँ दिशाभ्रमित कैल जा रहल अछि, दूबर काँतिक युवाकेँ मेडिकली ४ दिनका व्रत जानलेबा होयत, टिटकारी देनिहार सँ अनशनकर्ता बचैथ, फल्लाँ सब दिना दोसरेकेँ सनकेलक… अपने किऐक नऽ आमरण अनशन पर बैसैत अछि…. आदि! 🙂 चोपहा दि ग्रेटा कूकाँठ मैथिल सब दिन मिथिलाक सम्मानपर बट्टा लगबैत रहल अछि आ हमरा तऽ ओहेन-ओहेन सऽ ३६ के आँकडा वला हिसाब रहैत अछि। फूकास्टर सब केँ नकारैत मार्च अपन सिद्धि मिथिला राज्य आन्दोलनकेँ जरुर देलक लेकिन स्वयं अभियानी कविजी कतहु न कतहु ओहि फूकास्टरक फाँसमे उलैझ गेल छलाह। आ सोचल अनुसार नहिये ओ कहियो कोनो बात मनलाह आ नहिये हुनकामे तेहेन कोनो बात देखायल जे हमहीं सब हुनकर बात माइन आगू बढितहुँ। २५ मार्च अनशन समाप्त भेलाक बाद अनशनक हरेक दिनक समेटल विचारकेर आधारपर आब युवा समूह बनेबाक बात नियारल छल। लेकिन व्रतकेर असर आ कि भितरिया घाघपनी…. महादेव केँ ओ सब मंजूर न पहिले छलन्हि, न बाद मे रहलैन। शेष – अप्रील मे!

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151382575558492&set=a.483139743491.262675.637903491&type=1&theater

मदन ठाकुर, किशन कारीगर, राजनारायण झा, राघवजी – समूचा दहेज मुक्त मिथिला सहित पंकज भाइ मुंबई, गणेशजी गुवाहाटी, रोशनजी दरभंगा, विजय भाइ, हेमन्त भाइ, आदित्य, अनुप, दिलीप मिश्र, राजेशजी आ कतेको युवाक समूह सब कवि एकान्तक धरना लेल चारूकात सँ लोककेँ गोलियाबय लगलाह। कहय लेल तऽ कविजी अपनहि हाथमे सब बागडोर राखि लेने रहैथ आ कहाँ दैन भैर दिल्लीमे जनसम्पर्क सेहो केने रहैथ, लेकिन जन-सहभागितामे स्पष्टरूपेण बेसी लोक फेसबुक केर आह्वानपर एकठाम आयल छलाह।

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=539873219367378&set=a.197920610229309.44899.100000341158700&type=1&theater

मदनजी द्वारा कैम्पेनिंग कैल गेल एहि लिंकपर लगभग ४२५ कमेन्ट अछि जे स्वयं एहि बातक प्रमाण राखि रहल अछि कि हमरा लोकनि कोन तरहें अपने लोक सबसँ ऊबार पबैत छी। ‘चैत-चैत’ खेलक आविष्कार एतहि भेल छल। 🙂

मार्च १५:

एक विडियो, जन्तर-मन्तरपर राखल धरनाक प्रारूप जानकारी लेल। बैजुजी – भीख नहि अधिकार चाही, हमरा मिथिला राज्य चाही।

http://www.youtube.com/watch?v=lBOYFALct5A&list=UUP5wLND-XCtCDy_qr3SoYvA

मार्च १७:

मैथिलानीक गीत पर साक्षात्कार

http://www.youtube.com/watch?v=byyxVj6avXE&feature=share

मार्च १९ सँ २५ धरि कवि एकान्तक धरना लेल दिल्ली यात्रा, अनशनमे कौशल कुमार आ फेर मनोज बाबुक सहभागिता सँ आरो नीक संयोग बनैत अपूर्व सफलता संग समापन। अनुप केर योगदान, हर्ष मैथिल केर योगदान, विजय भाइ, राजेशजी, हेमन्त भाइ व हुनक संस्था, कृपानन्द सर, आ सब कियो। रत्नेश्वरजी, सुधीर बाबु, जन जागृति मंच (पालम), ठाकुर सुमन व हुनक जेठ भैयारी, हर तरफसँ लोकक विशाल समर्थन आ से सबटा स्वस्फूर्त, हम जोर दैत कहय चाहब जे एक पाइ ओ फूसियेक जनसम्पर्कक कतहु कोनो असर नहि। सब भगवतीक समर्थनसँ हाथोहाथ पूरा होइत रहल।

मार्च २६:

अनशन उपरान्त गोलबंदी अभियान:

कि अहाँ सहीमें अपन मातृभूमि प्रति समर्पणके भावना रखैत छी?

कि अहाँ सचमें अपन जीवनक किछु घडी मिथिला-मैथिलीक सेवामें लगाबय चाहैत छी?

कि अहाँ मिथिलाक खसैत सांस्कृति अस्मिताके कारण राजनैतिक उपेक्षा मानैत छी?

कि मैथिली समान सुन्दर मधुरतम भाषाक संरक्षण चाहैत छी?

कि मिथिलामें रहनिहार सभके मैथिल बुझि एकसमान सम्मान दैत छी?

कि मिथिलाक प्रथम संपत्ति शिक्षाक प्राप्ति जीवनक पहिल लक्ष्य मानैत छी?

कि अहाँ लैंगिक विभेद सऽ दूर समान भावनाके पोषक छी?

कि अहाँ अपन माटि-पानि सऽ जुडल रहयवाला लोक छी?

कि अहाँ भारत व नेपालमें अलग-अलग मिथिला राज्यक स्थापना हो तेकर पक्षधर छी?

कि अहाँ अपन कथनी आ करनी दुनूमें समानता हर परिस्थितिमें एक राखि सकैत छी?

कोनो आन्दोलन लेल गोलबंद भेनाय जरुरी छैक आ आन्दोलन “प्रवीण या फल्लाँ-चिल्लाँ नहि” – ताहि लेल एकमात्र नाम छैक “मिथिला”।

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151403920243492&set=a.483139743491.262675.637903491&type=1&theater

मार्च २६:

झा चन्दन एक प्रखर ओ शालीन युवा जे बादमे मिथिला आन्दोलनकेँ अपन तेज-तर्रार कार्टून द्वारा पोषण प्रदान केलैन, तिनकहि बनायल एक विडियो – अनशन पर अपन विचार रखबा घडीक…http://www.youtube.com/watch?v=S-HGpiEJs1I&feature=share

अफसोस, जे मार्चक अन्तिम सप्ताहसँ अप्रीलक दोसर सप्ताह धरि आन्तरिक गूटबाजीक किछु कमजोरीक प्रवेश देखलहुँ, तैयो, मिथिलाक समग्र हितकेँ ध्यानमे रखैत विशाल जनसहभागिताक लक्ष्य प्राप्ति लेल कार्य निरंतरतामे रहल आ सदा के भाँति जीत सदिखन सच्चाई के होइत छैक ताहि पर विश्वास बनल रहल।

हरि: हर:!!

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कि अहाँ सहीमें अपन मातृभूमि प्रति समर्पणके भावना रखैत छी?

कि अहाँ सचमें अपन जीवनक किछु घडी मिथिला-मैथिलीक सेवामें लगाबय चाहैत छी?

कि अहाँ मिथिलाक खसैत सांस्कृति अस्मिताके कारण राजनैतिक उपेक्षा मानैत छी?

कि मैथिली समान सुन्दर मधुरतम भाषाक संरक्षण चाहैत छी?

कि मिथिलामें रहनिहार सभके मैथिल बुझि एकसमान सम्मान दैत छी?

कि मिथिलाक प्रथम संपत्ति शिक्षाक प्राप्ति जीवनक पहिल लक्ष्य मानैत छी?

कि अहाँ लैंगिक विभेद सऽ दूर समान भावनाके पोषक छी?

कि अहाँ अपन माटि-पानि सऽ जुडल रहयवाला लोक छी?

कि अहाँ भारत व नेपालमें अलग-अलग मिथिला राज्यक स्थापना हो तेकर पक्षधर छी?

कि अहाँ अपन कथनी आ करनी दुनूमें समानता हर परिस्थितिमें एक राखि सकैत छी?

कोनो आन्दोलन लेल गोलबंद भेनाय जरुरी छैक आ आन्दोलन “प्रवीण या फल्लाँ-चिल्लाँ नहि” – ताहि लेल एकमात्र नाम छैक “मिथिला”।

हरि: हर:!!

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मार्च मिथिला लेल एक महत्त्वपूर्ण मास छल, कवि एकान्त एक युवा अभियानी अपन व्रतसँ मिथिला लेल आन्दोलन शुरु केने छलाह। हजारों मैथिल युवा एहि आह्वान संग जुइड गेलाह। सैकडो अपन सहभागिताक लेल गैछ लेलाह। पूर्णरूपमे युवा सब मिलिजुलि एहि अनशनकेँ सफल करैत प्रमाणित कय देलक जे मिथिलाक युवा केकरो सऽ कोनो मामिलामे कम नहि। जखनकि किछु चोपहा युवा अहूमे अपन कूतर्कसँ सहभागिता नहि देलनि, लेकिन जे वीर आ वचन केर पक्का छलाह ओ सब आबि गेलाह। किछु रास एहनो लोक जे ओहि समय फेसबुक पर कतेको तरहक लांछणा सेहो लगेलनि जे युवाकेँ दिशाभ्रमित कैल जा रहल अछि, दूबर काँतिक युवाकेँ मेडिकली ४ दिनका व्रत जानलेबा होयत, टिटकारी देनिहार सँ अनशनकर्ता बचैथ, फल्लाँ सब दिना दोसरेकेँ सनकेलक… अपने किऐक नऽ आमरण अनशन पर बैसैत अछि…. आदि!  चोपहा दि ग्रेटा कूकाँठ मैथिल सब दिन मिथिलाक सम्मानपर बट्टा लगबैत रहल अछि आ हमरा तऽ ओहेन-ओहेन सऽ ३६ के आँकडा वला हिसाब रहैत अछि। फूकास्टर सब केँ नकारैत मार्च अपन सिद्धि मिथिला राज्य आन्दोलनकेँ जरुर देलक लेकिन स्वयं अभियानी कविजी कतहु न कतहु ओहि फूकास्टरक फाँसमे उलैझ गेल छलाह। आ सोचल अनुसार नहिये ओ कहियो कोनो बात मनलाह आ नहिये हुनकामे तेहेन कोनो बात देखायल जे हमहीं सब हुनकर बात माइन आगू बढितहुँ। २५ मार्च अनशन समाप्त भेलाक बाद अनशनक हरेक दिनक समेटल विचारकेर आधारपर आब युवा समूह बनेबाक बात नियारल छल। लेकिन व्रतकेर असर आ कि भितरिया घाघपनी…. महादेव केँ ओ सब मंजूर न पहिले छलन्हि, न बाद मे रहलैन। शेष – अप्रील मे!

हरि: हर:!!

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विषय: दहेज मुक्त मिथिला पर जिज्ञासाक सम्बन्धमे

आदरणीय रामानन्द ठाकुर जी,

हम क्षमाप्रार्थी बनैत अपनेकेँ जानकारी देबय लेल चाहब जे हमरा लोकनि एहेन कोनो तरहक प्रत्यक्ष वा अप्रत्यक्ष योगदानसँ वैवाहिक सम्बन्ध निर्माण नहि करबैत छी, मात्र एहि परिकल्पनाक संग हर समाजमे प्रवेश करय चाहैत छी, विषय प्रवेश कराबय चाहैत छी…. बाकी लोक अपनहि संकल्प लैथ आ अपन मनमाफिक कुटुम्ब ताकैथ – स्वेच्छासँ खर्चा करैथ, हाकिम-हुकुम वर करैथ… ई सब बात लेल वर वा कन्या पक्ष स्वतंत्र छैक। हमरा लोकनि मात्र जे दहेज मुक्त विवाह कतहु करैत छथि, तिनकर यशगान करैत छी, कार्यक्रम द्वारा प्रचार-प्रसार करैत सार्वजनिक संकल्प-सभा, परिचय सभा, बेटीक शिक्षा लेल प्रयास, धरोहरकेर संरक्षण लेल जुटान, एहि तरहें जन-जागरणक प्रयास करैत छी। जरुर अपने एहि अभियानमे अही तरहे जुडब आ सहकार्य करैत आगू बढब तऽ कोनो न कोनो परिचय सभामे लक्षित वर आ कनियाक परिचय सब जरुर पायब आ तखन दहेज मुक्त विवाह, सामूहिक विवाह, ई सब आपसमे जोडैत आगू बढा सकब। पहिले तऽ सब ठाम संस्थाक कार्यालय हो आ ओहिठामक लोक सदस्यता ग्रहण करैत एहि अभियानकेँ प्रवेश दैथ अपन समाजमे, स्वाभाविके रूपे अलग-अलग जगह सँ जे-जेना परिचय संकलित हेतैक ताहिकेँ शेयर करैत लोक सब आपसमे चर्चा कय सकैत छथि। एखन धरि हमरा लोकनि जे जतेक जुडल छी ओ बस एक मंच निर्माण आ हाल धरि दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बोकारो, पटना, दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, अररिया, समस्तीपुर, बरौनी, गुवाहाटी, राँची लगायत किछुएक रास जगह पर सेहो पूर्ण संगठित नहि, बस इक्के-दुक्के अपने सब समान जागरुक आ बुझनुक लोक सब तक एहि मुहिमकेँ पहुँचा सकल छी। एहिमे जरुरत छैक जे पहिले हम सब आपसमे जुडी आ तखन आरो विशाल स्तर पर नीक सुविधापूर्ण माहौल बनबैत समाजकेँ कोना लाभ पहुँचा सकब, ताहि सब पर चर्चा करब आ काज शुरु करब।

हरि: हर:!!

प्रवीण ना. चौधरी,
विराटनगर-नेपाल
००९७७-९८५२०२२९८१.

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युवा पीढी मे मैथिली पढाई प्रति नैराश्यता साफ देखल जा सकैत अछि – तथापि प्रयास ई जरूर रहय जे जैह १-२ गोटा केँ मैथिली मे लिखैत रहबाक लेल प्रेरणा दय सकी – एक एहने युवा छलाह सीतामढी जिलाक निवासी उमाशंकर मिश्र ‘स्वप्निल’ – पढू हुनका द्वारा लिखल एक लेख जाहि मे बहुचर्चित घटना ‘दामिनी’ सँ जुड़ल विचार ओ मैथिली मे लिखलनि अछिः

“महिलाक गरिमा के सम्मान होबाक चाही
दिसम्बर 2012 में दामिनिक संग दिल्ली में भेल सामूहिक दुष्कर्मक घटना पूरा देश के झकझोरने छला तथा एही घटनाक बाद बनल जे.एस.वर्माक कमेटी के रिपोर्टक आधार पर संसद कानून बनैने छला जेकरा कारन ई उम्मीद कैल गेल छल की अब यौन अपराध पर अंकुश लग जायेत पर अफ़सोस की इतना सशक्त कानून बनैला के बावजूद आये दिन छोट स लेक बड़ सबै टा शहर स रोंवा खरा कर वाला दुष्कर्मक खबर लगातार आएब रहल अईच्छ।
हालाँकि नया कानून बनला से एक नया बदलाव अवश्य आयेल अईच्छ की समाज अब महिला सुरक्षा के मामले में पहले से अधिक जागरूक भेल अईच्छ किन्तु वास्तविक न्याय अभी भी वैह मामला के भेट रहल अईच्छ जेकरा मीडिया और जनताक समर्थन प्राप्त अईच्छ।जबकि जादातर मामला पुलिस और अदालत के रहमोकरम पर छोर देल जाइत अईच्छ।
सही मायने में दुष्कर्मक मामला पर रोक लगाबे खातिर किछ बदलाव जरुरी लाग रहल अईच्छ।सबसे पहिने त महिला और पुरुषक मध्य समानता स्थापित केनाइ जरुरी छै। दोसर नवका पीढ़ी के नैतिक मूल्य से संवर्धित और सुशोभित अपन भारतीय संस्कृति और ओहू में विशेश कके अपन मैथिल संस्कृति और पाश्चात्य सांस्कृतिक मध्य के भेद समझनाई जरुरी अईच्छ।यहाँ हमर उद्देश्य पाश्चात्य संस्कृति के निचा देखेनाए नै अईच्छ किया स कोई संस्कृति नीच या उच्च नै होएत अईच्छ वरण इ त हमरा सबक ऊपर अईच्छ की केकर वाजिब इस्तेमाल हमरा सबक इष्टतम विकाश दे सकैत अईच्छ।माता-पिता आ गुरुजनों के अपना स्तर पर और सरकार के शिक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार द्वारा बच्चा सबक नैतिक स्तर उठाबक प्रयास जरुरी छै जेकरा तहत शिक्षा में भारतीय संस्कृति आ संस्कारक समावेश जरूरी अईच्छ।
हमरा सबक नइ भूलक चाही की जादातर यौन हमलावर अपन पड़ोस आ गली मोहल्ले के ही होएत छैक जेकरा कारण बदनामी आ डर के कारण हम सब जादातर बात के दबाव के कोशिश करै छि जेकरा कारण अपराधी के मनोबल में वृद्धि ही होएत छैक। जहाँ तक पुलिसक सवाल अइच्छ त इ उनकर नैतिक कर्तव्य छैन उ बिना कोनो दबाव मुस्तैदी से आरोपिक खिलाफ कारवाई करथ। बेहतर त इ होएत की आमजन के सहयोगक प्राप्ति हेतु पुलिस के स्तर पर सिटीजन वार्डन और सिविल पेट्रोलिंग कैल जाए और अंत में न्यायालय के इ दाइत्व अईच्छ की फास्ट ट्रैक कोर्ट के मदद से जल्द से जल्द फैसला दे ताकी समाज में एक सकारात्मक संदेश जाए।
कुल मिलाकर अगर सम्पूर्ण आलेख पर संक्षिप्त टिप्पणी कैल जाये त येह छैक महिलाक स्थिति में सुधार खातिर पारिवारिक,सामाजिक,आर्थिक,शैक्षणिक और कार्यस्थल मे आवश्यक सुधार वांछित अईच्छ।
अहाँ सबक अन्मोलक सुझाव के भी स्वागत अईच्छ।”

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२०१३ केर शुरुआतहि सँ कवि एकान्त – एक युवा अभियानी द्वारा अनशनक घोषणा कतेको बूढ मुदा सम्माननीय लेकिन अपन कीर्तक अम्बारक मिथ्या-दर्शन करैत स्वयंभु ब्रह्म सब संग खूब लस्समकूट्टा भेल छल। एहि क्रममे कतेको समय एहेन आयल जे सीमा लाँघि कय धोतीमे घुरघुरा सेहो दौडाबय पडि गेल छल… दाकियानूस-झाडफानूस संग लडाई मे बहुत तरहक नंगटइ करय पडल, लेकिन चुनौती जे पैछला वर्ष दिसम्बरमे देने रही ताहि अनुरूपे युवाक प्रवेश तीव्रता पौलक जे मिथिला राज्यक अभियान लेल एक नया स्वरूप निखारलक। ओना तऽ एहेन कोनो दिने नहि रहल जहिया व्यंगवाणी जेकरा हम बड प्रेमसँ मैथिलीक नवका फेसबुकिया खेला “चैत-चैत” आ “बाँस-बाँस” नाम धेने छी से नहि भेल हो, भैर फेसबुकपर अपनो नाम बदनाम भऽ गेल… गैरखोर, भंगेरी, गँजेरी, एजेन्ट, नेपलिया, जासूस… कि नहि सुनय पडल… लेकिन कसम मिथिला माटि ओ पानि संग सुसंस्कृतिक जे हाइर नहि होवय देली स्वयं जगज्जननी सिया, पाहुन राम आ जे हम सदिखन जपैत आबि रहल छी “हरि ओ हर”। कृपा महादेव केर सदिखन बरसैत रहल। मिथिला – मिथिला – मिथिला चारूकात हरबिर्रो मचैत रहल। 🙂 खूब धरिया-धसान खेला सब भेल, लेकिनन मिथिला जितैत रहल।

किछु महत्त्वपूर्ण लिंक, तारीख सहित! ओना १५ फरवरी गवाही राखिकय ओ प्रमाणित कय देलियैन झाडफानूस-दाकियानूसकेँ जे गपथोथी सँ नहि, कर्मकोटिसँ धरि जरुर होइत छैक। जय मिथिला!! जय फरवरी!!

फरवरी ८:

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151319331598492&set=a.483139743491.262675.637903491&type=1&theater

फरबरी ८ तारीख ई बच्चा धरि फोन पर गरमाइत कहने छलनि – खबरदार!! बाप-दादा फेल तऽ फेल… हम नहि छोडब। 😉

“बुझाय यऽ जे पर-दादा, दादा, बाप सभ सऽ मिथिला राज नहि बनि सकल, लेकिन हम जरुर बनायब। सावधान, मनमोहन सिंह! सावधान नितिश कुमार! आ सावधान नेपालके प्रधानमंत्री! हमर बात फोने पर मानि जाउ! नहि तऽ कयामत आयत, मिथिला राज बनबे टा करत। हम मैथिली नहि बिसैर सकैत छी।”

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151319793543492&set=a.483139743491.262675.637903491&type=1&theater

फरवरी १:

बहुभाषिक कवि गोष्ठी समान महत्त्वपूर्ण जिम्मेवारी सहित कार्यक्रम समापन।

https://www.facebook.com/media/set/?set=a.10151306137948492.477414.637903491&type=1

फरवरी २:

समारोहक आनन्दसँ सरावोर स्मृति-संदेश प्रसारण:

सुनु-सुनु मिथिलावासी! संस्कृत न कहियो बासी!भले कतहु अहाँ छी भासी!

आइ सुदिन अहाँके हाथ पडल, नहि छोडियौ मैथिली भाषी!सुनु-सुनु मिथिलावासी!

देखू न शान्ति संगीत पडल – हर शब्द बनल अविनाशीई शुभ अवसर मनमीत बनल डूबल सभ घटके बासी

जे नहि आयल से पछतायलमन पीडा ओकर छै भारी!सुनु-सुनु मिथिलावासी…

ई हर मैथिल के ड्युटी हो जे गान करय एहि दिन केस्मृति करय ओहि पुरुख के ध्यान धरय मूलहि के

जे पथ भटकल बेइमान जन ओ गाबय झूठक मन से!सुनु-सुनु मिथिलावासी….

फरवरी ५:

राम नरेश शर्मा जी द्वारा ‘मैथिलीक दुश्मन नं. ४: जातिवाद’ पर चर्चाक दरम्यान डा. धनाकर बाबु द्वारा किछु बात जाइ-बुझि गलत तरहें रखबाक मनसायकेर पूरजोर विरोध आ वरिष्ठ अभियानी ओ साहित्यकार आदि सँ जानकारी संकलन करैत मिथिला राज्यक अभियानक असलियत सोझाँ रखैत – समस्त बातक गवाह ई लिंक:

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=165374950277875&set=a.132321956916508.29613.100004161130589&type=1&theater

समस्या एतबी जे सब पहिने स्वयंभु माइन खूर पूजय आ जेना हम कही बस तहिना टा चलय…. यैह सबसँ पैघ हताशाक कारण आइ धरि देखलहुँ अछि।

फरवरी ६:

जातिवादिताक बात कयनिहार लेल एक संदेश:

https://www.facebook.com/notes/pravin-narayan-choudhary/inaction-in-action/600850466595535

फरवरी ७:

मिथिलाक सांसदक सूची:

https://www.facebook.com/notes/pravin-narayan-choudhary/list-of-members-of-parliament-from-mithila/601226956557886

फरवरी ८:

किछु मित्रके हमर चान आ टीका खटैक रहल छन्हि, तऽ हुनका सभके बता दी जे ई भेल हमर घोर ब्राह्मणवादिता जे हमर धर्मके हम परित्याग नहि कय सकैत छी। अहाँ एहिमें ढकोसला देखी, ढोंग देखी या फेर सत्य देखी, सम्मान देखी…. जे देखी। धर्म निर्वहन नितान्त व्यक्तिगत कर्तब्य थिकैक, कोनो श्रृंगार नहि जे दोसर के रुचि सऽ करबाक छैक। शायद स्पष्ट भेल होयत। नहि भेल तेकरो जिम्मेवार हम नहि!  

परमात्मा शरणं एकम्!  

डा. शेखर चन्द्र मिश्रकेर आशीर्वचन संदेश:

पूर्ण ब्रह्मत्वक अपने निर्वहन कय रहल छी एहि युग मे जतय आधुनिकताक आवरण ओढ़ि ब्राह्मण लोकनि अपनाके दर्शाबय नञि चाहैत छथि ।आखिर जँ हम अपन संस्कार आ संस्कृतिके अक्षुण्ण नञि राखब तँ आइस्टीनक ओ कहब गान्धीक प्रति ‘भारत की एक पीढ़ी शायद….. ‘हमरो अहाक पीढ़ी पर लागू होयत आ प्रायः ब्राह्मण शब्दक विलोपन नञि भय जाय ।अपने जाहि ब्रह्म मार्ग के अपनेने छी ओकरा जारी रहल देल जाय ।हम सराहना करैत छी आ कामना करैत छी जे अपने एकरा और सबलता देब।

फरवरी १३:

मातृद्रोह पापपर विचार:

मैथिली लिखब-पढब-बाजब हरेक मैथिल (मिथिलावासी) लेल मायक दूधक कर्ज उतारब समान होइत अछि।

एकर कारण यैह जे लोक भाषाक पहिल ज्ञान भूख जोर सऽ लागि गेलापर कानैत मायके सुमिरन करैत अछि जेकर तुरन्त बाद दयाके सागर माय सभ कार्य छोड़ि बस बच्चा लग पहुँचि जाइत छथि। तदोपरान्त बच्चा माय के स्तनपान करैत हिंचुकैतो बच्चा मायक मुँहसँ लोरी-गीत सभ सुनैत छैक, माय के दुलार पबैत छैक आ तहिये सऽ भावनाक संचार लेल बोलीक ज्ञान प्रवेश करैत छैक जेकरा भाषाक पहिल ज्ञान सेहो मानल जाइत छैक।

यदि आइ हम सभ अपन मायकेर ओहि अकाट्य प्रेम प्रति आभार प्रकट करैत छी आ अपन मातृभाषाक संरक्षण लेल कम से कम अपने व अपन संतानकेँ एहि भाषाक ज्ञान दैत छी तऽ जरुर मातृऋण सँ ऊऋण होयबाक अभ्यास करैत छी।

जाहि भाषाक भूमिपर मातृद्रोही बेसी उत्पन्न होयत ताहि ठाम दरिद्रता आ कूसंस्कार के प्रवेश के भला के रोकि सकैत अछि? हर मिथिलावासी सँ अपील जे अपन मायके भाषा मैथिलीके प्रतिकार कदापि नहि करी आ मातृद्रोह पापसँ स्वयं के roki.

फरवरी १३:

डा. धनाकर बाबु सँ मतभिन्नताक विवरण, जेकर ओहो जबाब देने छथि आ यैह अराइर कतहु न कतहु हमरा सबकेँ एक-दोसरासँ दूर केलक।

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151328337238492&set=a.483139743491.262675.637903491&type=1&theater

फरवरी १७:

परिस्थिति एहनो अबैत छैक….. 🙂

मिथिला-मैथिली प्रति समर्पण बनल रहत, लेकिन ढकोसला सँ दूर आ काफी दूर! हलाँकि बहुत लोक के दु:ख छन्हि जे एना नहि हेबाक चाहैत छल। चलू! जाने-अन्जाने अपने लोकनि दु:खी भेलहुँ ताहि लेल माफी चाहब। सम्हारू मिथिला आ मैथिली के!

जय मैथिली! जय मिथिला!

आ फेर कनेकालक बाद:

आजुक एहि तारीख के समस्त परिचित-अपरिचित याद राखब। १५ फरबरी, २०१३ – गवाह: Krishnanand Choudhary Ratneshwar Jha Roshan Kumar Jha aa of course Dhanakar Thakur!!  

बाकी बात बाद में!  

फरवरी १८:

ज्ञान (मुहम्मद पैगम्बर साहबक वाणीसँ)

जे अपन जिन्दगी ज्ञानोपार्जनमें लगा दैत छैक, ओकर मृत्यु नहि होइत छैक।

जे ज्ञान के आदर करैत अछि, ओ हमर आदर करैत अछि।

ज्ञान प्राप्त करबाक लेल चीन सेहो जाओ, यानी दुनियाके कोनो छोर तक जाउ।

पालन (धियापुताक झूला) सँ कब्र तक ज्ञान के खोज करू।

अत्यधिक ज्ञान अत्यधिक इबादत (ईश्वर प्रति समर्पित कार्य) सऽ नीक छैक, दीनक आधार संयम होइछ। राइतमें एक घंटा ज्ञानदान करब भैर राइत इबादत करबा सँ बेसी नीक होइछ।

जे कियो ज्ञानक खोज करैत ओ पबैत अछि, ओकरा दू तरहक इनाम भेटैत छैक – एक ज्ञानक कामनाके लेल आ दोसर ओकरा पाबय के लेल, ताहि कारण यदि ज्ञानप्राप्ति नहियो हेतैक तैयो एक इनाम तऽ भेटबे करतैक।

जे अपनाकेँ जनैत अछि वैह अल्लाह (ईश्वर)के जनैत अछि।

फरवरी २१:

स्वाध्याय: स्थितप्रज्ञ

https://www.facebook.com/notes/pravin-narayan-choudhary/%E0%A4%94%E0%A4%9D%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%AF/608414759172439

फरवरी २१:

जन्तर-मन्तरपर मिथिला राज्य लेल धरनामे नवयुवा अनुप चौधरीक प्रवेश, मिथिला राज्य आन्दोलनक एक नया अध्यायकेर जुडाव जे आइ ‘काज करबाक जुनूनसँ नया उर्जा उत्पन्न कयने छथि’। अनुप चौधरी – हम तऽ मैदानमे आबि गेल छी, अहाँ कहिया आयब? – ग्रेट स्पिरिट!

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=372323742875593&set=gm.565787983431937&type=1&theater

फरवरी २२ –

मैथिल यूथमे सन्देह विद्यमान आ अपने सँ अपन अस्मिताक विरुद्ध बयानबाजीक एक उद्धरण प्रस्तुत:

https://www.facebook.com/notes/pravin-narayan-choudhary/diverted-maithil-youths-a-case-study/608964142450834

फरवरी २४:

मिथिलामे एक सऽ एक भोजभात आपसी एकजुटतासँ सहजे निमहबाक एक परंपरा, ताहिपर ई पाँति आ एक फोटो – साभार कोनो मित्रक वाल।

चाहे हो कोनो काज प्रयोजन, लेकिन मिलि-जुलि सलटय छैरहलै मिथिला एकताबल पर, आइयो मिलिते चमकय छै!

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151347480888492&set=a.483139743491.262675.637903491&type=1&theater

फोटो: साभार आदर्श झा, मिथिला

फरवरी २५:

माघी कामर कीर्तन यात्रा शुरु। २६, २७, २८ आ मार्च १ केँ बाबाक पूजा।

हरि: हर:!!

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एक परिकल्पना – मिथिला राज्य स्थापित हो दुनू ठाम, भारत मे आ नेपाल मे; ताहि लेल लिखल गेल छल ई एक प्रहसन बच्चा द्वारा टेलिफोन पर सन्देश देबाकः

फरबरी ८ तारीख ई बच्चा धरि फोन पर गरमाइत कहने छलनि – खबरदार!! बाप-दादा फेल तऽ फेल… हम नहि छोडब। 

“बुझाय यऽ जे पर-दादा, दादा, बाप सभ सऽ मिथिला राज नहि बनि सकल, लेकिन हम जरुर बनायब। सावधान, मनमोहन सिंह! सावधान नितिश कुमार! आ सावधान नेपालके प्रधानमंत्री! हमर बात फोने पर मानि जाउ! नहि तऽ कयामत आयत, मिथिला राज बनबे टा करत। हम मैथिली नहि बिसैर सकैत छी।”

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151319793543492&set=a.483139743491.262675.637903491&type=1&theater

हरि: हर:!

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२०१३ केर शुरुआतहि सँ कवि एकान्त – एक युवा अभियानी द्वारा अनशनक घोषणा कतेको बूढ मुदा सम्माननीय लेकिन अपन कीर्तक अम्बारक मिथ्या-दर्शन करैत स्वयंभु ब्रह्म सब संग खूब लस्समकूट्टा भेल छल। एहि क्रममे कतेको समय एहेन आयल जे सीमा लाँघि कय धोतीमे घुरघुरा सेहो दौडाबय पडि गेल छल… दाकियानूस-झाडफानूस संग लडाई मे बहुत तरहक नंगटइ करय पडल, लेकिन चुनौती जे पैछला वर्ष दिसम्बरमे देने रही ताहि अनुरूपे युवाक प्रवेश तीव्रता पौलक जे मिथिला राज्यक अभियान लेल एक नया स्वरूप निखारलक। ओना तऽ एहेन कोनो दिने नहि रहल जहिया व्यंगवाणी जेकरा हम बड प्रेमसँ मैथिलीक नवका फेसबुकिया खेला “चैत-चैत” आ “बाँस-बाँस” नाम धेने छी से नहि भेल हो, भैर फेसबुकपर अपनो नाम बदनाम भऽ गेल… गैरखोर, भंगेरी, गँजेरी, एजेन्ट, नेपलिया, जासूस… कि नहि सुनय पडल… लेकिन कसम मिथिला माटि ओ पानि संग सुसंस्कृतिक जे हाइर नहि होवय देली स्वयं जगज्जननी सिया, पाहुन राम आ जे हम सदिखन जपैत आबि रहल छी “हरि ओ हर”। कृपा महादेव केर सदिखन बरसैत रहल। मिथिला – मिथिला – मिथिला चारूकात हरबिर्रो मचैत रहल।  खूब धरिया-धसान खेला सब भेल, लेकिनन मिथिला जितैत रहल।

किछु महत्त्वपूर्ण लिंक, तारीख सहित! ओना १५ फरवरी गवाही राखिकय ओ प्रमाणित कय देलियैन झाडफानूस-दाकियानूसकेँ जे गपथोथी सँ नहि, कर्मकोटिसँ धरि जरुर होइत छैक। जय मिथिला!! जय फरवरी!!

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हरि: हर:!!

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२०१३ – बहुत सुन्दर साल! धन्यवाद करबा लेल भैर वर्षक ओ स्मृति जे आइयो आ सब दिन नव उर्जासँ भरैत रहत:

जनवरी १: नव वर्षक पहिल दिन, एहि रचनासँ शुरुआत –

कियो मनाबय नया वर्ष, कियो जूझय जान-जहान सँकेकरो मुँहमें मुंगबा लड्डू, कियो लिलोह दिनमान सँ

काल्हि-आइ में फरक कते छै देखियौ भैया ध्यान सँएक बनय छै भूत तऽ दोसर कहै नया वर्तमान सँ

भोर हँसी आ साँझक कननी एम्हर-ओम्हर शान सँ जेना दिन आ रातिक रूप छै जीवक दर्शन ग्यान सँ

पेट न खर सींग तेल चोपारि गीत फूइस के गान सँयैह थीक कलियुग जन-मन जीवन सभक जान सँ

सत्य कहै छै बिसर मूढपन नेह एक भगवान सँकथमपि द्वंद्व धार नहि बहे बने सत्य इन्सान सँ

जनवरी १:ओही दिनक ई अशुभ समाचार आ आक्रोशक संग दिल्लीक आन्दोलनमे बढि-चढि हिस्सा लेनिहार मैथिल लेल मिथिला व एकर सरोकार लेल जगबाक आह्वान:

दरभंगाकी दामिनीके दामनसे खिलवाड करनेवालोंके लिये सजा क्या?

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जनवरी ६:मुंबईमे शहीद स्मारक पर कैल गेल किछु मुसलमान युवा द्वारा असहिष्णुता आ देशक अस्मितापर कुठाराघात सँ आहत एक संदेश –

राजनीतिक छूद्रता देखू जे तुष्टीकरण करैत वोटर के केना धर्मक नामपर, जाति-संप्रदायके नामपर, ताहू सऽ नहि भेल तऽ आरक्छणके नामपर, बस कोहुनाके बाँटिके राखू आ वोट लूटू राज करू वाला हाल बनेने छैक। एहि प्रजातंत्रमें किछु बात आब जरुर सोचनीय अवस्थामें छैक जे आखिर कोन जादू सऽ काँग्रेस एकछत्र राज चलबैत छैक? आ प्रजातंत्रके गन्तव्य कि?

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जनवरी ८:कनाट प्लेस (पिपलेश्वरी काली मन्दिर)मे कन्नारोहट कार्यक्रम – समस्त मित्रगण मैथिल अभियानी सभसँ भेंटघाँट – कवि एकान्त द्वारा ४ दिनक अनशन करबाक संकल्पक घोषणा – सर्वदलीय समर्थन लेल वचनबद्धता।

जनवरी १७:विद्यापति चालीसा केर फेसबुकपर प्रकाशन

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दहेज मुक्त मिथिला लेल जनसहभागिता बढेबाक उद्देश्यसँ लक्ष्य-प्रसारण

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जनवरी २१:जातीय विभेदक झूठ आरोप लगेनिहारकेँ करारा जबाब – कर्म करू, महान बनू!

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मंचपर २५ मे सँ २० गैर-ब्राह्मण विद्वान् आ विचारक मिथिलाकेँ नेतृत्व देबाक लेल तैयार।

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जनवरी २३ – रचना संख्या ६२ केर प्रकाशन

माय, हम तऽ हिन्दी बजबौ!माय, तोरा हम बहुत खौंझेबौ!माय, हम तऽ फिलिम बनेबौ!कि राखल छौ मिथिला मेंजे कहै छेँ हमरा रुकय लेलदेखही ओकर चमकी सुन्नरमोंन हमर बड़ लुभा गेल माय, तोरा हम बहुत सतेबौ!माय, तोरा हम बहुत तड़पेबौ!माय, हम तऽ हिन्दी बजबौ!माय, तोरा हम बहुत खौंझेबौ!माय, हम तऽ फिलिम बनेबौ! ताहि दिनक एक ताजा रचना, वर्तमान सरकारी प्रणालीपर चिन्तन:

ई दृश्य हदय-विदारक अछिई बात दिमाग उड़ाबक अछि

बड़-बड़ दाबी सरकारक छैकगपमें योजना भरमारक छैक

तैयो भूखल प्राणी सभ ठामबस एक सहारा मात्रे राम

अन्नक भंडार सड़य-गन्हायकतौ चुल्हा जड़य न मिझाय

जाबत छै गाम-समाज मरलई दुनिया असमानता सऽ भरल!

बस मानवता के पाठ सिखूसम्पन्न संसारक भाग लिखू!

ओही दिन फेर तेसर पूर्व प्रकाशनकेर पुन: प्रसारण:

भारत केर स्वतंत्रता दिवस पर मैथिल भाइ प्रति समर्पित एक गीत: (पूर्व-कीर्ति) – दोसर प्रकाशन!

हम तऽ विश्व फीरि के मिथिले वापस आयल छीगीत मैथिली गाबय छी ना!सौंसे मारि हथौड़िया खाली हाथ बड़ थाकल छी गीत मैथिली गाबय छी ना! हम तऽ विश्व…..

गेलौं गाम त्यागि परदेश, सोचि के लायब नया सनेश-२कार्तिक बनल घूमल सभ देश, बिसरल बुद्धि जेना गणेश-२छोड़ि के माय-बाप त्रिलोकी जेना औनायल छीगीत मैथिली गाबय छी ना!हम तऽ विश्व फीरि…

लूटलक एक-एक श्रृंगार, रखलक सदिखन बीच मझधार-२सिखलक कला छीनि सौगात, लिखलक पेटपोसा कपार-२बरु आब भूखहि पेट माटि अपन ओंघरायल छीगीत मैथिली गाबय छी ना!हम तऽ विश्व फीरि….

एकटा बात देखल सभ धाम, सभ जे ओगरै छै निज गाम-२अपन देशके बनबय शान, गाबय सदिखन अपन बखान-२कहू फेर मिथिलावासी हम कतय बौड़ायल छीगीत मैथिली गाबय छी ना!हम तऽ विश्व फीरि….

जगियौ-जगियौ मैथिल भाइ, सिखियौ दुनिया गति कि आइ-२करियौ कर्म जनक सम भाइ, तखनहि औती सीता दाइ-२ कहू कि अनकर देक्सी करैत किऐ अन्हरायल छीगीत मैथिली गाबय छी ना!हम तऽ विश्व फीरि…

जनवरी २३ साहित्यिक सेवाक दृष्टिकोणसँ महत्त्वपूर्ण रहल छल: भास्कर वत्स द्वारा पोस्ट कैल एक दलानक दृश्य देखि रचना केने रही:

मिथिला दलान

ई थीक मिथिला के दलान, ऋषि-मुनि के मचानदेखियौ एहि माटिके शान, हे यौ मैथिल महान!

कानि रहल आइ गामक गाम, देखि परदेश अपन संतान,जानि नजरि कोना लागि गेलै, खखरी उपजय जरय धान,

कहियो रहलै जतय गान, आइ छै बनल सुनसानदेखियौ एहि माटिके शान, हे यौ मैथिल महान!ई थीक मिथिला के दलान…..

पानि जतय सत् पावन प्राण, रक्षक सदा बनैथ हिमवान,वन-उपवन फल जान-जहान, तंत्रक भूमि करै छथि त्राण,

बिगडल विधक विधान, कानय ‘प्रवीण’ ध्यान,देखियौ एहि माटिके शान, हे यौ मैथिल महान!ई थीक मिथिला के दलान…..

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151269171028492&set=a.483139743491.262675.637903491&type=1&theater

जनवरी २४:साझा प्रकाशन द्वारा आयोजित पुस्तक प्रदर्शनीमे मैथिली पोथीक इन्तजाम, मैथिली कवि गोष्ठी आ बहुभाषिक कवि गोष्ठीक संयोजन लेल विचार आ निर्णय। संगमे: श्री एस. सी. सुमन।

जनवरी २६:फेसबुकपर गंभीर विषयमे कम ध्यान आ न्युडिटीक प्रसार विरुद्ध एक रचना:गंभीर सवाल!

कतेक दिन सँ एक बात सोचि रहल छी,आइ अहुँ सभ सँ वैह बात पूछि रहल छी!

एतेक सालमें हमर अठासी टा फोलोवर!हमर प्रेसी मुन्नीके तीन हजार फोलोवर!

हम लिखलहुँ दस हजार कथा आ बात,मुश्किल सऽ भेटल सौ गो मितवाक साथ!

मुन्नी लिखलक मुश्किल सऽ दू शब्द ‘हाइ’,लागि गेल छौंडा सभक धरोहिया यौ भाइ!

हम टँगलहुँ मिथिला-मैथिलीके फोटो जते,बस दु-चारि-दस देखलक शेयरो कतौ कते!

मुन्नी डार्लिंग टँगलक मिनी स्कर्टवला मुस्की,कतेको भेल लाइक आ लेलक शेयरक चुस्की!

हे यौ! मंगनू बाबु! मैथिली में ई सभ नहि,मिथिला के गान छैक, शान छैक, प्राण छैक!कि तही लऽ के मैथिल हिन्दिये में डूबल,अंग्रेजिनी, भोजपुरनी, नेपालियेमें त्राण छैक?

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151273653813492&set=a.483139743491.262675.637903491&type=1&theater

जनवरी २७:मैथिलानीमे जागरुकतासँ उत्साहित विस्तृत सहभागिता लेल संदेश प्रसारण।

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जनवरी २९:मिथिलाक नक्शा व अन्य झंझैटपर विवादित चर्चा लेल अपन विचार

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151279042708492&set=a.483139743491.262675.637903491&type=1&theater

जनवरी ३०:हरेक नव घोषणा संग विवाद बढेबाक किछु लोकक छूपल मानसिकता आ कूतर्क पर विचार:

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151280656983492&set=a.483139743491.262675.637903491&type=1&theater

ई भेल जनवरी २०१३ केर महत्त्वपूर्ण उपलब्धि व स्मृति!!

हरि: हर:!!

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There are 134200 (38.6%) families in Delhi which do not have water pipe connection.

17.3% unauthorized & non regularized colonies.These are not covered under the 666 litres free scheme by Jal board as they do not have authorized water meters.

Total population covered is around 48.6% and that too only in urban,middle,upper middle class,posh localities,government quarters,political bungalows who are already well off & do not need this subsidy.And they get 666 litres free water.

At present Delhi JAL Board profit is Rs.532 cr p.a. out of which 406 cr will now be spent on the subsidy(FOR RICH), then Jal board will not have any financial resources to repair 30 %leaking pipes & for laying pipe connection to 38.6% of population.

Hence AAM AADMI will not get any free water & they have to depend on water Mafia. Effectively only 48.6% i.e 5764000 people of Delhi who are RICH will get free water.

~ Sumeet Srivastava

Comments
  • Pravin Narayan Choudhary दिस इज रियली गुड जब टु रिविल दि रियलिटी, वन मोर फैक्ट दैट इन्टरनेट अर मोबाइल यूजर्स टू पास अन मेल – एस एम एस टु आप टाइप थियोलाजिस्ट क्लेमिंग टु हैव गिवन दि एल्टरनेटिव टु आम आदमी आर लार्जेस्ट – होक्स कैन्नट डिसाइड द फ्युचर! हरि: हर:!!
  • Sagar Mishra यु आर वेरी राइड प्रवीन जी..काँग्रेस हैज गिवन अस फुड सिक्योरिटी एन्ड नाँव वी गेट वाटर सिक्योरिटी इन देल्ही…
  • Pravin Narayan Choudhary अल नौटंकी विल बी रिविल्ड सून, डोन्ट वरी। प्ले दि रोल अफ स्ट्राँग अपोजिशन आ प्रोटेक्ट पिपल’स राइट एज यू हैव रेज्ड एबव। हरि: हर:!!
  • Sagar Mishra द प्रोब्लम इज मिडिया प्रोजेक्टिँग केजरिवाल लार्जर देन लाईफ इमेज टु काउन्टर मोदी…व्हेन काँग्रेस गिवन फ्रि फुड, वाज क्रिटिसाइज्ड.. वहेन अखिलेश इन युपी गिवन फ्रि लैपटाँप वाज क्रिटिसाइज्ड बट व्हेन खुजली गिवन फ्रि वाटर वाज अपलाउडेड..डु यु स्मेल काँस्पिरेसी ??
  • Pravin Narayan Choudhary इट इज अल्सो गुड दैट हिडन एजेन्डा विल गेट नैकेड बिफोर दि पिपल, फर व्हाट कैन हेप्पेन विद ए लार्जेस्ट वोटेड पार्टी इफ दि फक्स-माइन्ड्स कम क्लोजर। बट प्लीज रिक्वेस्ट भाजपा गाइज नट टु स्पीक हेलीश-बूलीश अफ न्यु एनर्जी तथाकथित आप! ट्रूथ स्पीक्स इटसेल्फ। लेट देम रिजल्व दि कन्डिशनल अर अनकन्डिशनल प्रेम-अफेयर एट दियर अन डार्लिंग-डार्लिंग खेला-बेला। हरि: हर:!!
  • Pravin Narayan Choudhary इट इज अल्सो गुड दैट हिडन एजेन्डा विल गेट नैकेड बिफोर दि पिपल, फर व्हाट कैन हेप्पेन विद ए लार्जेस्ट वोटेड पार्टी इफ दि फक्स-माइन्ड्स कम क्लोजर। बट प्लीज रिक्वेस्ट भाजपा गाइज नट टु स्पीक हेलीश-बूलीश अफ न्यु एनर्जी तथाकथित आप! ट्रूथ स्पीक्स इटसेल्फ। लेट देम रिजल्व दि कन्डिशनल अर अनकन्डिशनल प्रेम-अफेयर एट दियर अन डार्लिंग-डार्लिंग खेला-बेला। हरि: हर:!!
  • Sagar Mishra हरि: हर: !
  • Pravin Narayan Choudhary मिडिया प्रोजेक्शन फर केकरा लेल? आम आदमी आ कि हमरा-अहाँ लेल? हू केयर व्हाट दे डू। रेस्ट एस्योर्ड एण्ड टेक केयर अफ पिपल्स डिमान्ड। योर पार्टी इज च्वाइश अफ लार्जेस्ट पोपुलेशन अफ दिल्ली, दे आर आम आदमी टू। मीट देम एण्ड एस्योर देम व्हाट यू विल डू इन सच ए हिडन गेम बिंग प्लेड टु कीप कन्ट्री प्ले अगेन्स्ट ट्रू राष्ट्रवादी विचारधारा। मिडिया गो टू तेलक हाँडी! हिहिहि!! 😉 हरि: हर:!!
  • Pravin Narayan Choudhary इन प्रजातंत्र एवरी वोटेड एक्टीविस्ट हैज दि राइट टु फाइट फर दियर एजेन्डा, योर पार्टी रिस्पान्सिबिलिटीज डोन्ट फाल एज दे गोट दि वोट्स अफ आम आदमी अफ कोर्स… इट इज नट ट्रू दैट आम आदमी पार्टी’ज वोटर्स ओनली बिलांग टु आम आदमी…. आइ वोटेड फर बीजेपी, राष्ट्रवाSee more
  • Sagar Mishra आई टोटली एग्री विथ यु…इट्स चैलेँज विफोर अस टु प्रुभ दैट वी कैन गर्वन स्टेट और काँन्ट्री बेटर देन देम..
  • Pravin Narayan Choudhary येस, दैट्स वेरी ट्रू, दोसरा जे डन इन ६० वर्ष से भाजपा डन इन ६० महीना! हाउ बिग डिफरेन्स… लेकिन इन रिसेन्ट टाइम दि मिडिया हक्स एण्ड फेलासी फियर अन योर फेस (भाजपा’ज एक्टिविस्ट्स) फेस गेव मी वेरी बैड फिलींग। वि शुड नट बी डेस्परेट। हरि: एव हर:!!
  • Pravin Narayan Choudhary येस, दैट्स वेरी ट्रू, दोसरा जे डन इन ६० वर्ष से भाजपा डन इन ६० महीना! हाउ बिग डिफरेन्स… लेकिन इन रिसेन्ट टाइम दि मिडिया हक्स एण्ड फेलासी फियर अन योर फेस (भाजपा’ज एक्टिविस्ट्स) फेस गेव मी वेरी बैड फिलींग। वि शुड नट बी डेस्परेट। हरि: एव हर:!!
  • Deepak Jha Mr kejrewal look on this ,
    It’s real pic of delhi,
  • Sagar Mishra नाव आई एम गोइंग टु राहुल गाँधी रेसिडेँस टु प्रोटेट्स विथ युवा मोर्चा टीम वोन क्रप्सन चार्जेज अगेन्सट महाराष्ट्र सि. म. एन्ड हिमाचल सी.म….सी यु लेटर ..बाई बाई..हरि: हर: !
  • Pravin Narayan Choudhary ओके तखन, आब सी यू फेर छ-सात महीनाक बाद कतहु कोनो मोड पर…. आब आइ एम प्लानिंग टू डिवलप एगो मैथिलीक नवका भाषिका – मैथिंगलीश – सो दैट आवर चमचिक्कू युवा कैटेगरी कैन मेक ए कमबैक टू अपन भाषा मैथिली। जय मिथिला सागरजी! हरि: हर:!!
  • Sagar Mishra यु अलवैज ट्राय टु डु इन्टेस्टिंग एन्ड निव थिंग फोर मैथिली..बेस्ट आँफ लक फ्राम माह साइड फाँर दिस निउ प्रोजेक्ट..जय मिथिला !

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    ‘कर या मर – Do or Die’ नामक अभियानसँ अनुरोध: समीक्षा करू करनिहार वर्ग, साल २०१३ मे कि सब केलहुँ। २०१४ लेल शुभकामना!! 

    आइ २०१३ ई. केर आखिर दिन छी, यानि ३१ दिसंबर!

    जाइत-जाइत ई हमरा बड दु:खी कय देलक, लेकिन उत्साह नहि घटेलक – नेपालक संविधानसभामे जाहि तरहें समानुपातिक सभासद चुनल गेल अछि से देखा देलक जे “फेर नौटंकीपूर्ण तरीकासँ नेपाली निरीह जनताक मतकेर दुरुपयोग टा होयत”। जखन सभासद चुनबाक लेल एतेक बनियौटी आ बिना कोनो पुख्ता सिद्धान्तक काज हेतैक तऽ ओहेन मानसिकतासँ संविधान कोना बनि सकतैक। तखन विश्वासे पर दुनिया कायम छैक, हम हाइर केँ अही लेल अंगीकार करैत छी जे हमर हाइरसँ राष्ट्रकेर जीत होइक। ई सूत्र बड काजक रहैत अछि। अपन योगदान ताँइ कतहु कम नहि करब।

    आजुक महत्त्वपूर्ण दिवसमे एक बेर ताइक देखब पाछू – कि-कि सब कैल गेल आ गलती-सही सबहक समीक्षा करैत नव आत्मविश्वास वृद्धि लेल “नया वर्ष २०१४” केर स्वागत करब। इन्तजार करू! बस कनिकबा काल मे भैर सालक समीक्षा!! 

    हरि: हर:!!

    **

    ३१ दिसम्बर अमर नाथ झा एक अपडेट देने रहथिन से कतेक प्रासंगिक अछि, आर अनुशासनक आह्वान करयवला व्यक्ति अन्ततोगत्वा एहि अभियान ‘मिथिला राज्य निर्माण सेना’ लेल केहेन भूमिका निर्वाह कय पेला तेकर बड पैघ व्याख्या भेटैत अछिः कथनी आ करनी मे एकता राखब हर हाल मे हर व्यक्ति लेल जरूरी छैक, विशेष रूप सँ नेतृत्व वर्ग मे रहनिहार केँ त ई परमावश्यक छहिये।

    “Mithila Rajya Nirman sena (mrns) ke ek ta neek aa sakaratmak pahloo aab ubhari k’ saamne aaib rahal aichh aa o ee je…ee sena aab atyant anusashit aa samayochit deg uthabait..aa nirantarta s’ aagoo bairh rahal aichh…aab ee nai rookat aa nai paachhoo ghuim k’ dekhi sakait aichh…kshetriya star par darbhanga me seho neek team appan kaarya me talleen aichh…ettay dilli me kendriya star par nirantar kichhu ne kichhu ‘activities’ chailite rahait aichh…neek lok sabh juir rahal chhaith…kahnai atishayokti nai hait je aab andolan apan sarthak gati pakair rahal aichh aa appan uddeshya ke prapti me pratidin kichhu deg lakshya ke aaro lagchiyene ja rahal aichh…ai anusashan aa nirantarta ke bana k’ rakhnai param aavashyak aichh aa hum pratyek ‘senani’ s’ aagrah aa nivedan karab je kono nakaratmak sochh ke apna par nai haavee huay dee aa ahina ‘anusashit joshak’ sang andolan ke nav aayaam pradaan karait aaga barhait rahi….kono lakshya pahunch s’ baahar nai rahat…jai ma jaanki. ..jai mithila..”

    **

    ३० दिसम्बर २०१३

    देखू! जवानी सब दिन एकहि रंग नहि रहि जाइत छैक।
    कतबू लिपिस्टीक आ पाउडर छीटू,
    मुदा ओ सुनरताय फेर सऽ नहि घूरि जाइत छैक।
    बरु मनकेँ राखू जवान आ सिंगारू वाणी ओ विचारकेँ,
    बहाउ प्रेमक वैह धार जे रहल बाल्यावस्थाक समयमे,
    छोडू ई कनखी आ मटकी गोरी!
    सच कहू सचे सुनू, ओहि मे भगवानो भेटि जाइत छैक!

    (उम्रक सीमा बुझू मितनी!)

    हरि: हर:!!

    **

    जीवनमे जे किछु भेल हो, घटना घटल तँ ओकरा भगवानक प्रसाद मानि लेल जाउ, ओहि घटनाक पाछाँ कुनु न कुनु लाभ जरुर छैक!! शुभ संध्या!!

    बहिन निर्मला चौधरी द्वारा कैल गेल निम्न पोस्टकेर अनुरूप आ “प्रवीणक फेसबुकिया मैथिली कोचिंग सेन्टर” केर अनुरोध पर मैथिली क्रान्ति लेल प्रस्तुत अछि। मैथिल अपन भाषा मे जँ अपडेट करबामे लजाइत छथि तँ हुनका अपन भाषा प्रयोग करबाक आत्मगौरवसँ जोडबाक लेल कम सऽ कम ५ मित्रक वालपर जरुर मैथिलीमे अनुवादित पोस्ट पठबैत अभियानकेँ आगू बढाउ। जँ मैथिली लिखबामे, बजबामे वा कोनो तरहक समस्या अछि तँ जुडू एहि पेजसँ:

    https://www.facebook.com/PravinakFacebukiyaMaithiliCoachingCenter

    हरि: हर:!!

    जीवन मेँ जो भी हो घटना घटी उसे भगवान का प्रसाद मान लीजिये ,
    उस घटना के पीछे कोई न कोई लाभ अवश्य है !!शुभ संध्या !

    **

    मिथिला राज्य किऐक?

    * संवैधानिक अधिकार सम्पन्नता लेल
    * संस्कृति आ सभ्यताक संरक्षण लेल
    * विशिष्ट पहिचान ‘मैथिल’ केर संरक्षण लेल
    * पलायन आ प्रवासक खतरा सँ मिथिलाक रक्षा लेल
    * आर्थिक पिछडापण आ उपेक्षा विरुद्ध स्वराज्यसम्पन्न विकास लेल
    * स्वरोजगार संयंत्र – उन्नत कृषि – औद्योगिक विकास लेल

    * बाढिक स्थायी निदान लेल
    * शिक्षाक खसैत स्तर में सुधार लेल
    * मुफ्त शिक्षा आ शत-प्रतिशत साक्षरताक लेल
    * गरीबी उन्मुलन – हर व्यक्ति लेल रोजी, रोटी आ कपडा लेल
    * जातिवादिताक आइग सँ जरि रहल समाजमें सौहार्द्रता लेल
    * ऐतिहासिक संपन्नताकेर द्योतक धरोहरकेर संरक्षण लेल

    * पर्यटन केन्द्रकेर स्थापना, विकास व संरक्षण लेल
    * यात्रा संचार के लचरल पूर्वाधारमें ललित विकास लेल
    * जल-स्रोत केर समुचित दोहन लेल
    * मिथिला विशेष कृषि उत्पाद केर व्यवसायीकरण लेल
    * जल-विद्युत परियोजना – जल संचार परियोजना लेल
    * मिथिला विशेष शिक्षा पद्धति (तंत्र ओ कर्मकाण्ड सहित अन्य विधाक) अध्ययन केन्द्र लेल

    * पौराणिक मिथिलादेश समान आर्थिक संपन्नता लेल
    * पौराणिक न्याय प्रणाली समान उन्नत सामाजिक न्याय व्यवस्था लेल
    * जन-प्रतिनिधि द्वारा वचन आ कर्म में ऐक्यता लेल
    * भ्रष्ट आ सुस्त-निकम्मा प्रशासन तथा जनविरोधी शोषणके दमन लेल
    * लचरल स्वास्थ्य रक्षा पूर्वाधार में नितान्त सुधार लेल
    * मुफ्त बिजली, पेयजल, शौच, गंदगी बहाव व्यवस्थापन लेल

    स्वराज्य सदैव आमजन हितकारी होइछ। मिथिलाक गरिमा अपन स्वतंत्र अस्तित्व १४म शताब्दीक पूर्वार्द्ध धरि कायम रखलक। बादमें विदेशी शासककेर चंगूलमें फँसैत अपन गरिमासँ क्रमश: दूर भेल। एकर समुचित प्रतिकार लेल भारतीय गणतंत्रक विशालकाय शरीरमें आबो यदि राज्यरूपमें संवैधानिक मान्यता नहि पायत तऽ मिथिलाक सांस्कृतिक मृत्यु ओहिना तय अछि जेना एकर अपन लिपि, भाषा ओ समृद्ध लोक-परंपरा-संस्कृति आदि लोपान्मुख बनि गेल। बिना राजनीतिक संरक्षण आ समुचित प्रतिनिधित्वक प्रत्यक्ष प्रमाण ६५ वर्षक घोर उपेक्षा सोझाँमें अछि। अत: राष्ट्रीयता आ राष्ट्रवादिताक सशक्तीकरण संग-संग क्षेत्रीय संपन्नता आ सभ्यताक संरक्षण लेल मिथिला राज्य बनेनाय परमावश्यक अछि।
    ———————-

    मिथिला राज्य सँ जुडल आरो बहुत रास बात लेल:

    http://www.networkedblogs.com/blog/apan_gaam_apan_bat

    हरि: हर:!!

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    रामविलासजीकेँ बेर-बेर धन्यवाद करू, अपन टेटर देखू जे आइ धरि एहेन माहौल नहि बनेने रही…. आब मिरानिसे जखन माहौल बना रहल अछि तऽ सब कियो एहिमे सहभागी बनि रहल छथि। जय मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समिति – १९ अगस्त मिथिलाक इतिहासमे दरभंगाक धरतीपर सबकेँ जोडि लेलक आ सर्वदलीय बैठकसँ पारित कय लेलक। प्रयास करनिहारकेँ धन्यवाद करू। एक-एक शहर आ नगरमे विद्यापति समारोह सँ मैथिल मे आत्मगौरवक बोध करेनिहार आयोजक केर धन्यवाद करू। कलाकार-ब्यापारी-रोजगारी सबहक धन्यवाद करू जे हर परिस्थितिमे लडल आ मिथिलाकेँ जोगेलक। मात्र दोसरपर छींटाकशी नहि, करनिहारकेँ प्रणाम करू। उगैत सूरजकेँ सब प्रणाम करैत छैक। राम विलास जी केर सहयोग पूर्वोमे मैथिलीकेँ संविधानमे स्थान दियाबयमे भेल छल। जुनि बिसरू!

    दाकियानूस-झाडफानूस एहि मर्मकेँ कहियो नहि बुझि सकैत अछि तैँ करनिहार वा गछनिहारपर टिप्पा मारयसँ नहि बचैत अछि। अपन कर्तब्य पर गौर करियौक। बस!

    हरि: हर:!!

    **

    हमर प्रिय मैथिलीसेवी फेसबुकिया मित्र!

    आउ फेसबुकसँ एक क्रान्ति करी। देखल गेलैक अछि जे ९५% मैथिलकेँ अपन फेसबुक अपडेट मैथिलीमे करयसँ लाज लगैत छन्हि। हुनका सबकेँ बुझाइत छन्हि जे मैथिलीमे लिखब तऽ लोक कहीं दूइस नहि दियय….। ई हुनकर सोचकेँ हम सब परिवर्तन कय सकैत छी। यथा – हुनकरे वालपर हुनकहि बातकेँ मैथिलीमे अनुवाद बना दी। नित्य ५ एहेन मित्रकेर बात जे मैथिलीमे नहि लिखने होइथ तेकरा हम सब अनुवाद करैत हुनकर नामकेँ अपनो वालपर प्रकाशित करी आ एक प्रेरणाक संचरण करी जे मैथिल (मिथिलावासी) द्वारा मैथिली लिखबाक मात्रा बढत।

    हरि: हर:!!

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    मैथिलीमे,

    १. भगवतीक गीत, भगवानक गीत, …..

    २. मुडन यानि पुत्रक प्रथम संस्कारपर – गोसाउनि नोतक गीत, पितर नोतक गीत, मुडन कालक गीत, …..

    ३. द्विजक दोसर संस्कार यानि उपनयन गीत – गोसाउनिक गीत, उद्योग दिनक गीत, बाँसकट्टीक गीत, …….

    ४. बियाहक गीत – आम-महु बियाहक गीत, परिछनक गीत, कुमारिक गीत, देहरि छेकबा कालक गीत, नाक पकडबा कालक गीत, …….

    ५. मधुश्रावणीक गीत – गौरी-पूजाक गीत, विषहराक गीत, आँखि मुनबाक गीत, टेमी देबा कालक गीत।

    ६. द्विरागमनक गीत – कनियाकेँ माफासँ उतारय कालक गीत, …..

    ७. विभिन्न अवसरक गीत – पराती, सोहर, खेलौना, तुसारी, बट-सावित्री विषहरीक गीत, कोजागरा गीत, सामाक गीत, उचिती, विनती, लगनी, तिरहुत, बटगवनी, डहकन, वसंत, फगुआ, जोगीरा, चैतावर, चौमासा, छौमासा, बारहमासा, छठिक गीत, उदासी, समदाउन, साँझ, आरती।

    जीवनकेर हरेक पहलू केँ गीतक बोलसँ व्यवहारक ज्ञान मात्र आ मात्र मिथिलाक संस्कृतिमे भेटैछ, यैह थीक एहि ठामक गजब मिठास!

    पूर्ण विस्तारसँ एहि लिंकपर पढू:
    https://www.facebook.com/PravinakFacebukiyaMaithiliCoachingCenter

    हमर गारंटी अछि जे एहि लिंकसँ जुडलापर मात्र ७ दिनमे मैथिली सिखि सकब, बाजबाक हिम्मत आबि जायत आ मैथिल होयबा पर गर्व सेहो करब। अपन संस्कृतिसँ भागनिहार – यानि धोबियाक कुत्ताक हाल! सावधान!! ताहि लेल अपनो जुडू आ समस्त मैथिल केँ जरुर जोडू! जय मिथिला!! 

    हरि: हर:!!

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    मिरानिसे अभियानी अनुप चौधरी द्वारा राम विलास पासवान केर मैथिली-मिथिला सहयोगक विषय मे देल गेल पोस्ट पर हमर प्रतिक्रिया छल –

    मरैत दमतक सहयोग करब, कारण जन्म ब्यर्थ जा रहल अछि। माँ मैथिलीक संविधानमे एलाक बाद हमरा सबहक संवैधानिक पहिचान बिहारी सँ मैथिल होयब जरुरी अछि। नहि तऽ कालान्तरमे बड गरियायत बच्चा सब। जेना एखन ब्रजस्थ मैथिल अपन निजी पहिचान लेल लालायित छथि… ताहि दिन मे अकबरी अकबाल देखायल छलन्हि हुनका लोकनिकेँ… हम मिथिलावासीक भविष्य ओहेन नहि हो। अहाँ जहिया सभा करी ओतहि हम सब कियो जरुर आयब। जय मैथिली! जय मिथिला!! हरि: हर:!!

    जी, लोकक भ्रम एहिसँ दूर कय दियौन जे आखिर स्वशासन हमरा सबहक उपेक्षाक विरुद्ध आ असल संस्कृति आ पहिचानक विशिष्टताक रक्षा लेल अछि…. नहि कि ई कोनो एक जातिक कल्याण वा अन्टू-शन्टू मसलासँ जुडल कोनो बात थीक। राज्यमे जे जे बासिन्दा हेता तिनकर फायदा लेल ई माँग अछि। जय भाजयुमो! हरि: हर:!!

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    मिथिलावाद पर राजनीति केर सम्बन्ध मे ३० दिसम्बर २०१३ केर ई पोस्ट

    मिथिला लेल राजनीतिक युद्ध शुरु नहि भेल अछि। ई जहिया सऽ शुरु होयत तहिया सऽ प्रक्रिया सफलता दिशि नव डेग बढाबय लागत। एखन धरि जे कियो मुद्दा उठा रहल छथि से सांस्कृतिक आ समाजिक बेसी, एक राजनीतिक दल अ.भा.मि.पा. आ कनी-मनी भाजपा, आब धीरे-धीरे All Parties सेहो जखन अहाँ जाइत छी आ पूछैत छियैन तखन “किऐक नहि” कहैत समर्थनभाव देखबैत छथि। घोषणा करैथ तऽ काल्हिये सऽ तहलका मचय लागत। लेकिन किछु बात एखनहु भितरिया छैक – राजनीति करनिहार तक मिरानिसे जेना पहुँचि रहल अछि, तहिना एकमुष्ट समस्त मिथिलावादी पहुँचबैक तखनहि किछु सार्थक हेबाक संभावना हम देखैत छी। ओना एखन वा तेखन आ कौखन, अपनाकेँ दिलाशा देबामे कोनो हर्ज थोडे न छैक। बिना एकता किछु नहि होयत, एकता अनुशासन बिना नहि होयत, अनुशासन नीति, स्पष्ट उद्देश्य आ लक्ष्य बिना निर्धारित केने नहि होयत। समस्या यैह सब गूढ अछि ताहि लेल स्वयं सेहो आत्मनिरीक्षण करैत आपसी चैत-चैत आ बाँस-बाँससँ नितान्त दूर सर्वपक्षीय सहमति कायम करैत प्रयास तेज करियौक। सब जिल्लामे काज शुरु करियौक। मजबूत कार्यसंयोजन समितिक निर्माण करियौक। कियो एहेन नहि छथि जिनकर मज्जाल होयत जे मिथिलाक नामपर नहि कहि देता। लेकिन एकरा राजनीति करनिहार तक पहुँचेबाक लेल मिरानिसे जेकाँ प्रतिबद्ध प्रयासक जरुरत अछि। हरि: हर:!!

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    मिथिला राज्य निर्माण सेनाक प्रतिनिधिमंडलके समक्ष रामविलाश पासवान जि मिथिला राज्य आन्दोलन के समर्थन केला !!! — with Pravin Narayan Choudharyसंजीव सिन्हाArvind Kumar Yadav and 13 others.

    Comments
    • Pravin Narayan Choudhary Sab kiyo samarthan karataa – kaaran aab bahut deree bha gelaik, sabahak najair khuli rahal achhi je Janataa Janaardan asaliyat bujhi gel achhi. Aab aaro yadi appan pair par apane kurhair maarab ta bhavishyak peedhi bad gaair padhat. Harih Harah!!
    • Prakash Kumar Sab vote bank banabe ma lagal chaith..
    • Pravin Narayan Choudhary @Prakash Netajee! Mithila Rajya ker muddaa jau vote-bank sa juri gel ta bujhu neek din aabi gel. Harih Harah!!
    • Pravin Narayan Choudhary Oyse, apne aar kab se kaam karam e ke laagi? BJYM? Harih Harah!!
    • Prakash Kumar Aab ta pura tarah se mithila rajya ka mudda vote bank sa jural pratit hoi ya…@shri Pravin Choudhary
    • Pravin Narayan Choudhary Tab ta ahu aar ke party oysne hisaab-kitaab banaayat aa ki kuchh aar netajee? Harih Harah!!
    • Prakash Kumar Haa ta sansad mahodaya ta samarthan da rahal chaithe..
    • Pravin Narayan Choudhary Sansad Mahoday, Rashtriya Adhyaksh Mahoday, Buddhijeevi Prakoshth, RSS, Congress, CPI (M), sab koi samarthan de rahal hai. Harih Harah!!
    • Prakash Kumar Takhan virodh kata bha rahal aai..JDU ka taraf sa..
    • मिथिलावादी विद्या भूषणJDU……….ke……..virodh……chhori…..dosar….kono….upay…..nai
    • Pravin Narayan Choudhary Na, otahu sa nahi. Sabta clear achhi. Aha sab kaaj shuru karu, otahi dikkat achhi. Ahi aar me light ke kami hai. Harih Harah!!
    • Pravin Narayan Choudhary Je Mithila me hai se sab Mithila Rajya ke samarthan karabe ta karat. Je nay bujhay hai u sab virodh karay hai. Harih Harah!!
    • Pravin Narayan Choudhary Jaativaaditaa ke aar me aa Mithila ke maang babhan aar ke maang kah ke hamraa aar ke bargalaabe wala netabaa sab aisan galat kaam karay hai. Ukra rajya ki hai seho na pata…. oysan log se sawdhaani jaruri hai netajee. Harih Harah!!
    • Pravin Narayan Choudhary Ab ahi aar batao je uhe muddaa par aarkashna, uhe par fut-futauwail samaj, lekin tabhiyo bhukhmari aa peechhraapan oysan ke oysane hai…. ki pragati holay…. kuchho kahu dekhay hai? 😮 Harih Harah!!
    • Prakash Kumar Ham sab hardam tatpar chi shriman…aur kiyo neta ji agar mithila rajya ka jatiwad aa brahaman wad ka naam da rahal chaith,ta o samane aaibath ya virodh karaith…
    • Reetendra Chaurasia he him self a big corrupt politician, do not relay them (all corrupt political class). They are opportunist. Now need to focus on “AAP Mithilanchal”
    • Pravin Narayan Choudhary Karbe na kelak yau…. ohi din MRNS ek sanskritik sansthaa je jan-jaagran kay rahal achhi tekar kaaryakartaa sab gelaa ta kursee sa pitbelak…. aa aha sab chup chhi…. saar ke putalaa fuki ditiyaik aa khabardaar rally nikailtahu… takhan na bujhait o chuppet chutiya je jaativaadi baat kahait mithila ke nakaarait achhi aa mithila lel netagiri ke hawa-hawai kahait achhi….. 😮 Harih Harah!!
    • Pravin Narayan Choudhary Reetendra Chaurasia Jee – neek baat, aha ek AAP alliance develop karu. Ham sab ta sabahak swaagat kara lel taiyaar chhi. Mithila ke appan vidhan sabha ho, vidhaayak ho. Jay Mithila!! Harih Harah!!
    • Prakash Kumar Aha kaih rahal chi je JDU ki tataf sa clear aai..waih ta ham soich rahal chalo…clear cha takhan ohi din aae tarah ka aamanaywiya ghatna kiya ka ghatit bhel
    • Pravin Narayan Choudhary Jatek kaaj AAP Delhi me kelak, tekar 10% Mithila me karu aha sab. Nissandeh sabtaa neeke hetaik. Harih Harah!!
    • Pravin Narayan Choudhary Aa jadi Delhi ke hawa sa Mithila banait dekhi rahal chhi ta ham aha sa sahamat nahi bha sakab, kaaran pahine neek taiyaaree jaruri achhi. Harih Harah!!
    • Reetendra Chaurasia Pravin Narayan Choudhary Jee ekdam nik baat kahaliye !!
    • Pravin Narayan Choudhary JDU sab sa pahil party achhi je chhot raajya ker samarthan ghoshna kene achhi…. lekin grihdrohee chamchikan kumar neta Mithile ke rahait Maithil Abhiyaani par prahaar appan vote-bank politics karait kelain. Harih Harah!!
    • Prakash Kumar Mithila rajya ka gathan ke lel aab telangana wala tarika aapnaba parat…hinsatamak virodh. .
    • Ganesh Maithil Ramvilas ji ke swagat..ehi ber mithila me chunav mithila rajya ke mudda par hobak chahi..
    • Anand Jha Maithil Ekta Jindawaad…!!!
    • Pravin Narayan Choudhary Bauddhik virodh kahay chhay je shuruwe nahi kelahu achhi aa hinsak virodh kona karbaik? Ehi lel Mithila kshetrak sarvadaleey baisaar bajao aa pahile appan aatmasammaan lel sab kiyo ektham hebaik takhan aa ki nautankee karait bam-baarud aa ullu-fullu karait ehi muddaa ke sada-sada ke lel sutaa debaik? Hinsak aandolan bordering state lel jaayaj nahi hoit chhaik. International border chhaik etay. Hinsak aandolan sa pahine bauddhik aandolan me aagu abiyauk netajee. Harih Harah!!
    • Prakash Kumar Jarur aagu aaib..jakhan apne aadesh diye..
    • Pravin Narayan Choudhary मिथिला लेल राजनीतिक युद्ध शुरु नहि भेल अछि। ई जहिया सऽ शुरु होयत तहिया सऽ प्रक्रिया सफलता दिशि नव डेग बढाबय लागत। एखन धरि जे कियो मुद्दा उठा रहल छथि से सांस्कृतिक आ समाजिक बेसी, एक राजनीतिक दल अ.भा.मि.पा. आ कनी-मनी भाजपा, आब धीरे-धीरे सेहो जखन अहाँ जाइत छी आ पूछैत छियैन तखन “किऐक नहि” कहैत समर्थनभाव देखबैत छथि। घोषणा करैथ तऽ काल्हिये सऽ तहलका मचय लागत। लेकिन किछु बात एखनहु भितरिया छैक – राजनीति करनिहार तक मिरानिसे जेना पहुँचि रहल अछि, तहिना एकमुष्ट समस्त मिथिलावादी पहुँचबैक तखनहि किछु सार्थक हेबाक संभावना हम देखैत छी। ओना एखन वा तेखन आ कौखन, अपनाकेँ दिलाशा देबामे कोनो हर्ज थोडे न छैक। बिना एकता किछु नहि होयत, एकता अनुशासन बिना नहि होयत, अनुशासन नीति, स्पष्ट उद्देश्य आ लक्ष्य बिना निर्धारित केने नहि होयत। समस्या यैह सब गूढ अछि ताहि लेल स्वयं सेहो आत्मनिरीक्षण करैत आपसी चैत-चैत आ बाँस-बाँससँ नितान्त दूर सर्वपक्षीय सहमति कायम करैत प्रयास तेज करियौक। सब जिल्लामे काज शुरु करियौक। मजबूत कार्यसंयोजन समितिक निर्माण करियौक। कियो एहेन नहि छथि जिनकर मज्जाल होयत जे मिथिलाक नामपर नहि कहि देता। लेकिन एकरा राजनीति करनिहार तक पहुँचेबाक लेल मिरानिसे जेकाँ प्रतिबद्ध प्रयासक जरुरत अछि। हरि: हर:!!
    • Pravin Narayan Choudhary भाजयुमो दरभंगाकेँ एहि लेल तैयार करू – कारण अहाँक जुडाव जाहि दलसँ अछि तेकरा एहि लेल तैयार करैत भाजपा केन्द्रकेँ चिट्ठी लिखू, घोषणापत्रमे अनबाउ। यदि आरो जिला युनिट सबसंग सहकार्य कय सकैत छी तऽ ओतहु सँ लिखबाउ। एक अधिवेशन – औपचारिक रूपमे करैत एहि पर विचार करियौक आ तेकर बाद घोषणापत्र केन्द्रकेँ पठबियौक। तहिना हर दल केर लोक करैथ। तखन न राजनीतिक काज शुरु हेतैक। हरि: हर:!!
    • Prakash Kumar Ham apne ka bat sa purn tarahe sahmat chiPravin Choudharyji…hamar jurav dosre jila ka BJYM team sa aai…
    • Pravin Narayan Choudhary जी, लोकक भ्रम एहिसँ दूर कय दियौन जे आखिर स्वशासन हमरा सबहक उपेक्षाक विरुद्ध आ असल संस्कृति आ पहिचानक विशिष्टताक रक्षा लेल अछि…. नहि कि ई कोनो एक जातिक कल्याण वा अन्टू-शन्टू मसलासँ जुडल कोनो बात थीक। राज्यमे जे जे बासिन्दा हेता तिनकर फायदा लेल ई माँग अछि। जय भाजयुमो! हरि: हर:!!
    • Pravin Narayan Choudhary हम सब कलेजिया विद्यार्थी बीच जखन गोष्ठी रखैत छी तऽ ऐतिहासिक समृद्धि आ वर्तमान विपन्नतापर पाठ करैत छी, बच्चा सब मुँह बौने रहि जाइत अछि। आ खून खौलय लगैत छैक। ताहि हेतु असलियत लोककेँ बताबय पडत। बहुत भेल फालतूक राजनीति आ लूट-खसोट, आबो काज हो, नहि तऽ आप आबि जायत। 😉 हरि: हर:!!
    • Prakash Kumar Akhan sa ham tayari ma laig jai chi…aa aha sab ka aashirwad aa sahyog rahte ta jarur nik result aatai…jai BJYM..
    • Pravin Narayan Choudhary मरैत दमतक सहयोग करब, कारण जन्म ब्यर्थ जा रहल अछि। माँ मैथिलीक संविधानमे एलाक बाद हमरा सबहक संवैधानिक पहिचान बिहारी सँ मैथिल होयब जरुरी अछि। नहि तऽ कालान्तरमे बड गरियायत बच्चा सब। जेना एखन ब्रजस्थ मैथिल अपन निजी पहिचान लेल लालायित छथि… ताहि दिन मे अकबरी अकबाल देखायल छलन्हि हुनका लोकनिकेँ… हम मिथिलावासीक भविष्य ओहेन नहि हो। अहाँ जहिया सभा करी ओतहि हम सब कियो जरुर आयब। जय मैथिली! जय मिथिला!! हरि: हर:!!
    • Prakash Kumar Jay mithila..jay maithili..jay maa janki..jaldi shubh suchna deb..
    • Pravin Narayan Choudhary जय माँ! हरि: हर:!!
    • Rakesh Jha रामबिलास पासवान जी अवसर वादी राजनिज्ञ छैत ।
    • Jitendra Kumar मिथिला राज्यक मांग ओ मांग के कमजोर क रहल अच्छी जे मिथिला देश के मांग क रहल छथि
    • Pravin Narayan Choudhary रामविलासजीकेँ बेर-बेर धन्यवाद करू, अपन टेटर देखू जे आइ धरि एहेन माहौल नहि बनेने रही…. आब मिरानिसे जखन माहौल बना रहल अछि तऽ सब कियो एहिमे सहभागी बनि रहल छथि। जय मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समिति – १९ अगस्त मिथिलाक इतिहासमे दरभंगाक धरतीपर सबकेँ जोडि लेलक आ सर्वदलीय बैठकसँ पारित कय लेलक। प्रयास करनिहारकेँ धन्यवाद करू। एक-एक शहर आ नगरमे विद्यापति समारोह सँ मैथिल मे आत्मगौरवक बोध करेनिहार आयोजक केर धन्यवाद करू। कलाकार-ब्यापारी-रोजगारी सबहक धन्यवाद करू जे हर परिस्थितिमे लडल आ मिथिलाकेँ जोगेलक। मात्र दोसरपर छींटाकशी नहि, करनिहारकेँ प्रणाम करू। उगैत सूरजकेँ सब प्रणाम करैत छैक। राम विलास जी केर सहयोग पूर्वोमे मैथिलीकेँ संविधानमे स्थान दियाबयमे भेल छल। जुनि बिसरू!

      दाकियानूस-झाडफानूस एहि मर्मकेँ कहियो नहि बुझि सकैत अछि तैँ करनिहार वा गछनिहारपर टिप्पा मारयसँ नहि बचैत अछि। अपन कर्तब्य पर गौर करियौक। बस!

      हरि: हर:!!

    • Rahul Mishra मिथिला में रामविलाश के लेल कोनो जगह नै छई
    • Jitendra Kumar मांगे करै के अछि त देश के मांग करू जाहि स दुनु देश में रहनिआहर मैथिल लोकनि के कल्याण भ सकै आ रामविलास सनक नेता कहिया केकर समर्थन करत आ कहिया केकर विरोध करत इ बात ओ खुद नहीं जानति अछि . तैं अहि पर बहस बेकार अछि
    • Pravin Narayan Choudhary आब मिथिलामे रहो है आम जनता – तोरा आर के तऽ कबे भगाय न देलकउ… वोटो देले रहली कभी… फेन मिथिलामे औतो राजा सलहेश… बनेतौ मिथिला राज। हरि: हर:!!
    • Jitendra Kumar रोशन कुमार मैथिल ji whos this?
    • Sonuprakash Sp Bdhai jai miranise
      kaj krnihar k nam aaich miranise
    • Rabindra Jha Swagat achhi Paswan ji..!! JAI MITHILA JAI MAITHIL..!!!
    • Amarnath Jha Bakshi He and Laloo should openly declarre their support and make it part of manifesto. If it is not part of menifesto, then it is just a lip service. Why he is not supporting openly?
    • Hemant Mishra JAY MITHILA.
    • Rupak Kumar 900 chhuher khakar billi…
    • Pankaj Jha He wants mithila seats(helpless maithil)
    • दीपक कुमार मैथिल खाली कहने से थोरे होगा आनंद जी चचूनाव घोसना पत्र मे लिखगे….. राजनिती मे सब जायज है और कोनो गलत माँग थोरे ने कर रहै हम सब. सब के न बूझल है कि जबरदस्ती तकैक दिन मैथिल के दबा के रखेगे. और जिस पार्टी के पैर के निचे से जमिन खिसक चूकी है उन लोगो को लिए एक>>
    • दीपक कुमार मैथिल सुनहरा मौका है , फिर से वापसी का. रामविलास जी सरल व्यक्तीत्व और कुशल नेत्तुत्व बाले ईनसान है॥ nda सरकार मे जिस मन्त्रालय मे रहे उसे चमका दिये. हमरे घर का ब्सिक फोन ईनहि का देन है….. वासत्व मे अगर ये मैदान मे आ जाये तो मिथिला राज्य आनदोलन मे कांर्र्ती
    • दीपक कुमार मैथिल @anand jee नहि aasis jee
    • Moda Bahadur Ram aaj sunli ki e apna baat ke shubhkamna kahlan, samarthan na hai… ki baat hai?
    • Anup Kumar Chaudhary पटना चलु
    • Mritynjoy Chhandogy रामविलास जी मिथिला के सहारे झोपड़ी में चिराग जलाना चाहते हैं.
    • Sagar Jha कहियौन जे खुलि के स्वीकार करैथ आ प्रेस विग्यप्ती जारी करैथ ।
    • Niraj Mishra Munnu Seho hetai, e ta suruati safalta ai6
    • Sagar Jha भाई , पासवान जी बड़ पैघ घाग नेता अछि
    • Niraj Mishra Munnu kno baat nai, Acchi salai me aagi barat ki bina ragdne, paayab nij adhikar katohu ki bina jagagdne
    • Moda Bahadur Ram जब संविधान हमरा आर मैथिलीभाषी के लागी भी ३५०ए से अधिकार देने है जे अपने भाषा आ बोली मे हमे आर के धिया-पुता सब प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करे, तब फिर ऐसन कौन बात है जे बिहार मे मैथिली मे पठन-पाठन सरकार ना करा सके है। ई अधिकार के हनन काहे लागी?

      तब मिथिला राज्य निर्माण सेना के अनशन १४-२३ फरबरी मे पटना जाना जरुरी है – गाम-गाम के लोग के बताना जरुरी है – पेपर मे आना जरुरी है – पत्रकार सब खाली भात खाइ है, बुद्धि कहाँ हेरा गेल है से के कह सके है तब?

      मैथिली मे पढना पिछडा आ दलितके बच्चाके लागि वरदान साबित होत, साक्षरता बढत – सब के पढे लागि हिम्मत होत।

    • Mritynjoy Chhandogy ओ जनता के काज सेहो इमानदारी स कैरेट छैथ, रेलमंत्री और तेल्कोम मंत्री के समय हम आज्मेने छी.
    • Dilip Kumar Jha If the political party’s are supporting for making Mithila state then they should have included it in there manifesto.
    • Pravin Narayan Choudhary @Dilip Jee – they are well in favor of it, but we truly fail to compel them declare this in their manifesto. We escape from making proper presence in public and even we truly don’t become able to keep up with the political forces up to that moment when they write the manifesto and declare it. Harih Harah!!
    • Abhas Jha sagarjjii ke ham samarthan karai chi jai mithla……….
    • Anup Kumar Chaudhary jahiya maithil ek bh jeta kah nay parat kinko samarthan lel sab khud aib k karta
    • Monaj Jha E bariya bat je except kelaith
    • Rakesh Singh Aa tv pr maithili me apn press confrens kryth tkhne bujhb
    • Narayan Kumar maniy Ramvilas paswan ji ke mithila maithil ke taraf s bahut-bahut dhanyabad
    • Saroj Das Humhu sang sang xi aaha k paswan g…..
    • Suman Thakur Bihari नेता के समर्थन किछु नहीं होयत जबतक जनता के समर्थन नहीं
    • पप्पू जी जा धरि देह मे प्राण रहत हम लड़बे टा करबैं ! हमर अधिकार छी मिथिला राज्य, हम लैये के रहबै !! आलोक रंजन ‘पप्पू
    • Ratneshwar Jha bhariyafiri humra sabhak swabhaw me achhi, bhariyagiri me laagal chhi, kahuna sattak najdik pahuchi oker paat chati e mithila aandolanik swabhaw achhi, apwadd chhalah maatra laxman jha
    • जीवकान्त मिश्र Ashwashanak sukhal ghas san kichhu nahi, agni pariksha chahee……. vishwas diyabay partani, vyaktitwa chhanhi ahi netaji men muda chhathi tan neta…… jakara upar vishwas karav seho ashwashan par…… asmbhav….. jay mithila. modijik ashwashan azadjik vishwash lok dekhlak…. harih ohm
    • Sanjeev Shekhar अनूपजी ,नेता सव के धरना में बैसाउ तखने पता चलत जे के समर्थन में अछि या नै
    • Subhash Roy BAHUT NIK BAAT…………
    • Sanjeev Shekhar रत्नेस्वरजी ,लागि रहल अछि जे माँ मैथिल के एक मात्र अंहि टा संतान छिः
    • Sandeep Kumar Jha Jai mithlanchal

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      MRSSS wa kiyo hamra sa jhooth bajataa se sambhav nahi achhi. @ Sanjay Jee – Hamra lag pukhtaa report achhi, baakydaa VIP Pass sa entry lel gel, swayam Mukhyamantree ehi lel Prof. Uday Shankar Mishra sang baato kelaa – aa memorandum del gel achhi. Hamra sangathan sa bahut besee muddaa par kaaj chaahi. Branding me ham vishwash nahi rakhait chhi. Aa nahiye hamra vidwataa baghaaray lel e muddaa kahiyo neek laagal. Committed people and committed works, they must have to maintain the words. Harih Harah!!

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      हमर प्रिय मैथिलीसेवी फेसबुकिया मित्र!

      आउ फेसबुकसँ एक क्रान्ति करी। देखल गेलैक अछि जे ९५% मैथिलकेँ अपन फेसबुक अपडेट मैथिलीमे करयसँ लाज लगैत छन्हि। हुनका सबकेँ बुझाइत छन्हि जे मैथिलीमे लिखब तऽ लोक कहीं दूइस नहि दियय….। ई हुनकर सोचकेँ हम सब परिवर्तन कय सकैत छी। यथा – हुनकरे वालपर हुनकहि बातकेँ मैथिलीमे अनुवाद बना दी। नित्य ५ एहेन मित्रकेर बात जे मैथिलीमे नहि लिखने होइथ तेकरा हम सब अनुवाद करैत हुनकर नामकेँ अपनो वालपर प्रकाशित करी आ एक प्रेरणाक संचरण करी जे मैथिल (मिथिलावासी) द्वारा मैथिली लिखबाक मात्रा बढत।

      हरि: हर:!!

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      मिथिलाक सेवके द्वारा मिथिला-सेनाक अपमान?

      (समीक्षा)

      काल्हि मुबईमे मैथिली द्विमासिक पत्रिका “मिथिला दर्पण” केर बैनर अन्तर्गत सम्पन्न विद्यापति स्मृति पर्व समारोहमे दू बात अशोभनीय भेल जेना भान भऽ रहल अछि। हलाँकि ई दुनू बात किछु अटपटा-गजपटा मुदा समयक कमी आ भूलवश भेल जेना सेहो बुझा रहल अछि।

      विद्यापति समान विद्यावान् समाजसेवा आ लोकहित लेल रचना रचब आ गाबि कय भक्तिपूर्ण वातावरण बनबैत अपने मे सबकेँ लीन कऽ लेब – अनेको तरहें कवि-कोकिलक चर्चा होइत अछि। उपस्थित जनमानसकेँ हुनक एक-एक स्वरूपसँ परिचित करेबाक लेल आ अपन जीवनमे ओहने सदाचरण अनुकरण करबाक लेल प्रेरणा बाँटल जाइछ समारोह द्वारा, जाहिसँ सांस्कृतिक सौहार्द्रता आ जनहित लेल आपसी एकजुटता सेहो बनैत अछि। भले पेटक कारणे मिथिलावासी आइ भारत-नेपाल सहित विश्वक विभिन्न कोणमे पहुँचि गेल छथि, लेकिन विद्यापति समान विभूतिक नामपर अपन संस्कृति संग लोकजुडाव बनेबामे एहेन समारोहक बड पैघ भूमिका भऽ रहल अछि। मिथिलाक लोकमे कुशाग्रताक एक नमूना जे विद्याधनम् सर्वधनम् प्रधानम् केर अधिपति विद्यापतिक स्मृति समारोहरूपमे दुनियाक सोझाँ रखैत आबि रहल छथि। धन्य ई समारोह जे मिथिला संस्कृतिकेँ कोहुना जीबित रखने अछि, आत्माकेँ सहलाबैत यथार्थ पहिचानकेँ बेर-बेर जियाबैत अछि, हम मिथिलावासी मैथिल छी, बाकी हमरा ऊपर थोपल पहिचान थीक जे गुलामीक द्योतक अछि, निजात चाही, स्वतंत्रता चाही, उपनिवेशी शासकसँ छुटकारा चाही। यैह कारण छैक जे युवामे जोश अबैत छैक आ ओ सब चिकरय लगैत अछि – भीख नहि अधिकार चाही – हमरा मिथिला राज चाही। कोना नहि चिकरत, कियो लेथ मशीनपर अपन जीवनक संघर्ष कय रहल अछि, कियो हीरा कटिंग-घसिंगमे आँखि आ दिमाग दुनू खिया रहल अछि आ कियो साहुक कोठीमे साया-बेलाउज साफ कय रहल अछि वा चुल्हा-चेकीक महाराजी कय रहल अछि। सबकेँ अपन सुन्दर मिथिलासँ दूर दासताक पीडा आ कूथ आब होहल्ला करबाक लेल खौंझा रहल छैक।

      आइ कतेको वर्षसँ मैथिली भाषाक सेवा करैत आबि रहल मिथिला दर्पण सचमे एतेक महत्त्वपूर्ण आयोजन रखलैन, हजारों मैथिल एकठाम अयलाह। संपूर्ण खर्चबर्च असगरे वहन कयलैन, समस्त कार्यक्रमकेर भार सम्हारला। एहि लेल बहुत पैघ धन्यवादक पात्र छथि। कार्यक्रम संयोजन, अतिथि आमंत्रण, मंच व्यवस्थापन, कलाकार संभारण – एतेक रास जिम्मेवारी वहन करनिहार कियो मिथिलेक सपुत होइत अछि आ से छलाह श्री संजय झा, प्रखर प्रतिभावान आ मैथिली-मिथिलाप्रेमी। लेकिन दू भूल जेकर चर्चा ऊपर केने छी – १. विद्यापति स्मृतिमे कवि-कोकिलक जीवनी वा महान-चरित्रक कोनो उल्लेखणीय चर्चा वा प्रस्तुति नहि, २. मिथिला युवा अभियानी आ समूचा भारतमे लोकप्रियता हासिल कय रहल “मिथिला राज्य निर्माण सेना”क अनुरोध जे प्रसिद्ध कलाकार ज्ञानेश्वर दुबेजी केर मिथिला राज्य देखबाक सपनाक जिक्र केलापर सम्मान करब तेकरा आयोजक पक्ष मंच प्रदान नहि केलैन। युवाजन मे एहि बातक आक्रोश अछि जे समाजक सरोकारसँ जुडल बात आ एक प्रसिद्ध कलाकारक सुन्दर वाणी लेल हुनका सम्मान लेल मंच भेटय, मुदा ताहिसँ संजयजी रोकि देलाह। संजयजी सँ एहि बात लेल सम्पर्क नहि भऽ सकल अछि, लेकिन आरो-आरो दर्शक आ समाजसेवासँ जुडल व्यक्तित्वक मिश्रित राय भेटल। किनको कहब छन्हि जे आयोजक केर अधिकारक्षेत्रमे पूर्वहि सँ बहुत रास बात समेटल रहैत छैक आ अचानक नव बात भेलासँ आयोजनमे गडबडीक गुंजाइश रहैत छैक। एक गोटा दर्शक आ अभियानी कहलैन जे पहिले सँ बैनर लगेबाक नियार छल जे मिथिला राज्य निर्माण सेना उपलब्ध नहि करा सकल छल, परिणामस्वरूप आयोजकवर्ग युवाक आवाजकेँ नहि चिन्हि सकलाह। किनको कहब छन्हि जे अपन स्वार्थ लेल कार्यक्रम आयोजित छल आ समाजिक सरोकार – युवाक आवाजकेँ सम्मान नहि देल गेल। मिरानिसे मुंबईकेर वरिष्ठ अभियानी तथा दहेज मुक्त मिथिलाक राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज झा लेकिन ज्ञानेश्वर दुबे केँ मंचसँ उतरबा काल माला पहिराय सम्मानित कयलैन आ आभार जतौलनि जे हुनका सन मिथिला विभूति एहि माँगकेँ समर्थन दैत अपन लाखों दर्शक-श्रोताकेँ ठाम-ठाम अपन स्वाभिमान पेबाक लेल मिथिला राज्यक सपना पूरा हो कहैत आयल छथि।

      निष्कर्षमे, सरोकारक विषय आयोजककेँ पहिलेसँ अनुरोध करब हमरा लोकनिक कर्तब्य होइछ। लेकिन परिस्थिति जँ एहेन बनय कि तत्क्षण कोनो सान्दर्भिक प्रस्तुतिकेँ समेटल जाय, ताहिमे कोनो दुविधा वा परेशानी नहि एबाक चाही। आखिर युवाक आवाजकेँ पोषण नहि देबैक तँ हम प्रेरणा बाँटि अपने सँ फेर मिथ्याचारिताक उद्धरण प्रस्तुत करबाक पाप करब, ई आत्मसात हमरा लोकनि करी। समारोहक विस्तृत स्वरूपमे ओहेन मुद्दा जरुर समेटी जे आत्मगौरवकेर वृद्धि करैत अछि।

      आयोजनमे संजय निरुपम सेहो आयल छलाह, विशाल भीड जुटल छल। मुंबईवासी मिथिला संस्कृतिक सुन्दर प्रस्तुतिक भरपूर आनन्द उठेलनि। दहेज मुक्त मिथिला व एकर माँगकेँ सेहो भव्य स्थान भेटल छल। मिथिला-मैथिलीसँ जुडल लगभग सब सरोकारकेँ समेटल गेल छल। समर्पित मैथिली प्रेमी आयोजककेँ हार्दिक बधाई आ आक्रोशित युवाजनमे आगू नीक होयबाक वादा करैत छी, कारण लेखनीसँ जगत् सुदृढ होइत छैक, एक वैह आयोजक टा नहि, समस्त विश्वकेर आयोजक एहि आखर-शक्तिसँ प्रेरणा पबैत छथि। विद्यापति लेखनी कयलन्हि, ताँइ आइयो सुमिरल जाइत छथि। अपने लोकनि जतेक लिखब, बात ततेक दूर तक जेतैक आ दस्तावेज सेहो बनतैक।

      शुभम् अस्तु!

      हरि: हर:!!

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      २९ दिसम्बर २०१३

      चैटिंग के लिये बेहाल मेरे प्यारे दोस्तों!

      आज सोशियल मिडिया ने अपनी जीत कुछ युँ हासिल की है और जो सही में बेहतरीन शासन देना चाहते हैं वो अपनी बातोंको जनताके सामने कोरप्ट मिडियाके बदले सोशियल मिडिया से बेहतर दे सकते हैं। यार! मेरा तो टीवी देखना आज ७ साल से छूट गया है, पर ऐसा कुछ भी नहीं कि इन्टरनेटके जरिये अपडेट न मिल रहा हो। रुचि होनी चाहिये। अब मेरे कितने मित्र बस इसलिये चैटिंग बक्समें आ जाते हैं कि “हेल्लो! कि हालचाल? अपने कतय स? अपने काज कि करैत छियैक? अपने कतेक फूट लंबा, कतेक चौडा, कतेक सीना, कतेक कमर…” माथा खराब…. भाई! मैं भी अपना विचार तो सरेआम आपलोगोंके लिये फेसबुकके विभिन्न पन्नोंसे रखते ही हैं, फिर आप कुछ ऐसा क्यों नहीं करते कि सोशियल मिडियाका सदुपयोग को समझें और उसी अनुरूप अपना योगदान दें।

      हरि: हर:!!

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      नरेन्द्र मोदीक अभियानक पोस्ट पर एक कमेन्ट देने रही –

      And, I have every possible hope to have the similar spirit support for demand of almost same number of years for Mithila. May BJP, Congress, CPI, RJD, JDU and all responsible parties to hear the voice of Mithila. Though it is understandable that people of Mithila cannot struggle as the people of Jharkhand, Uttarakhand, Chhatteesgadh and Telangana did; but every well-wisher must know the poverty Mithila has been suffering from, the losses of a great civilization which gifted India a large number of scholar contribution in ancient times to modern times and the end of such a complete folk-culture of Mithila – all these things are well understood by the visions which run the nation. Formation of states and the constitutional processes must give a keen look at this oldest demand and fulfill it together with formation of any new state in India. Please save Mithila!!

      Harih Harah!!

      नरेन्द्र मोदीक पोस्ट रहनिः

      A big thank you to the people of Jharkhand for the warm welcome and the strong support during Vijay Sankalp Rally. At Vijay Sankalp Rally, remembered the great Birsa Munda, the proud son of India whose bravery continues to inspire us. For 50 long years Congress ignored the voice of Jharkhand’s people. It was Atal ji who heard the people’s voice & created a separate state.

      Urged people to give all 14 seats of Jharkhand to BJP so that Jharkhand’s development does not lag behind http://nm4.in/1cyVNu8

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      मित्र-बंधु!

      काल्हि इतिहासक एक अत्यन्त कारी अध्यायमे गानल जायत। दरभंगाक भूमि पर राखल गेल बिहार मुख्यमंत्रीक संकल्प यात्रामे बर्बरतापूर्ण तरीकासँ मिथिलावादी अभियानीक आवाज दबेबाक फासीवादी सोचक प्रदर्शन कैल गेल।

      मिथिला क्षेत्रक अति-पिछडापण होयबाक मुख्य आधारहि पर विगत कतेको महीना सँ बिहारकेँ ‘विशेष राज्य’केर दर्जा लेल मुख्यमंत्री व हुनक दल द्वारा विभिन्न तरहक कार्यक्रम कैल जा रहल अछि। लेकिन वैह मिथिला संग शौतेला व्यवहार – मैथिली भाषापर कुठाराघात – बंद चीनी व पेपर मिलकेँ खोलेबाक माँग सहित विभिन्न अन्य माँगक संग ज्ञापन देबय लेल आतुर “मिथिला राज्य निर्माण सेना”क अभियानी कार्यकर्तापर कोनो बडका नेताक इशारा पाबि कुर्सी फेकबाबैत हमला केनाय एक वीभत्स अपराध भेल जेकर जतेक भर्त्सना हो से कम हेतैक।

      मिथिला राज्य यानि मिथिलावासीक अपन राज्य – अपन हित आ सरोकारक चिन्ता मिथिलावासी अपनहि करता आ मेटाइत संस्कृतिक रक्षा संग पलायन करैत मैथिलकेँ अपन घरहिमे स्वरोजगारक नीक इन्तजाम लेल माँग थीक। लेकिन स्वराज्यसँ वंचित रखबाक लेल दुष्प्रचार आ जाति-पातिमे तोडनिहार पटनिया शासक मानसिकताक खेला-बेलासँ हमरा सबकेँ आपसमे लडेनिहार काज केनाय आब मिथिलावासी वर्दाश्त नहि करता। गाम-गाम दलालीक पैसा छीटि हमरा सबहक आपसी सौहार्द्र व एकताकेँ आब आरो नहि तोडल जा सकैत अछि। हम एहि लेल हार्दिक अपील करैत छी जे एहेन गंदा राजनीतिक मानसिकताक विरुद्ध हम सब एकजुट होइत ‘पोल-खोल यात्रा’ करी आ अपन लोककेँ चेतावनी जारी करैत स्पष्ट करी जे ई यात्रा सबहक एकमात्र उद्देश्य छैक फूइसक ललीपप बाँटि हमरहि सबहक नामपर केन्द्रसँ राहत लैत आपसी लूटपाट आ मिथिलावासीकेँ तोडि-मरोडि उपेक्षित टा रखबा केँ। खबरदार करी जे एहेन शासन सँ निजात पबैत अपन राज्य अपनहि संचालित करी, मिथिला राज्यक उपेक्षाक चरम एतबी सँ बुझल जा सकैत छैक जे ७ दशक बीतल जा रहल अछि, लेकिन बाढिक निदान नहि भेल अछि। जेहो धियापुतामे शिक्षा प्रति ललक उत्पन्न भेल छल तेकरा सबकेँ फोकटिया शिक्षामित्र आ मिडडे मिलरूपी खिचडीक फाँसमे फँसाकय भविष्य बर्बाद कय देल वर्तमान बिहारी शासन। आइ लूटखसोट आ भभाराबाजीक शासनमे हमरे सबहक बीच संगठनकेँ पल्लवित-पुष्पित करैत फेर सँ हमरा सबहक घरहिमे तोड-फोड कैल जा रहल अछि, तेकरे खुलेआम प्रदर्शन थीक काल्हिक कुर्सीसँ माँगकर्ता ऊपर हमला। ई घोर अपमानक पाछू के थीक षड्यन्त्रकारी? किऐक नहि एकर निष्पक्ष जाँच हो? दोषी ऊपर कार्रबाई किऐक नहि कैल जाय? मुख्यमंत्री एहि संगीन मसलापर चुप किऐक छथि? एहि समस्त बातपर समीक्षा का जनमानसकेँ जानकारी भेनाय आवश्यक अछि।

      मिथिलावासी एक हो! एक हो! एक हो!!

      हरि: हर:!!

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      हे मैथिल,

      एक-एक बातकेँ मनन करू आ आपसमे एहेन गठजोड बनाउ जे दलाल आ भरुआ चोर सबहक माध्यमे हमरा सबपर केकरो राज लादल नहि जाय, वरन् अपन राज्य अपनहि संचालन करबाक जिम्मेवारी ग्रहण करू। बहुत भेल अत्याचार, आरो जुनि बनू लचार।

      जागू मैथिल, नहि तऽ पहिचान मेटि जायत।

      १९ जनवरी, २०१४ – दिल्ली चलू!!

      हरि: हर:!!

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      मिथिलाक गाम-गाममे अनेको धरोहर: दृष्टान्त

      (धरोहर आर संरक्षण: दहेज मुक्त मिथिला)

      हम सब गर्व करी जे मिथिला समान समृद्ध संस्कृतिक पवित्र धरासँ ईश्वर एहि मर्त्यभुवनमे जन्म देलनि अछि। गर्व कथमपि सुदृढ धर्म यानि जीवनचर्या आ सदाचरण बिना कहियो नहि भऽ सकैत अछि। गर करैत कहियो प्रेमसँ अनुभूति करू:

      चारूकात हरियर-हरियर गाछ-वृक्ष,
      ताहि बीच सुन्दर सरोवर हरियरे पाइनसँ लवालव,
      महार धऽ के अबैत – जाइत पगडंडी आ मोसाफिर,
      केकरो कान्हपर कोदाइर तऽ कियो हर-बरद संगे,
      खेती आ अन्न केर जोगारमे रत मानव समाज,
      खेतमे कमठौनी, घसवाइह आ जोत-कोर करैत,
      तन-बदन उघार डाँर्ह-माथ धरि बान्हल छेकल,
      गजब जनक संग भेंटघाँट, या फेर गोनुए गोनु,
      मिथिलाक अनुपम गाम आ गाममे एक धरोहर,
      या हो मन्दिर या हो चौपाल, सबहक भेट लेल वैह,
      काजक बाद ताशक चौपारि, पान ओ मुस्की,
      गपक तीर सँ देवो थरथर, हरि ओ हरकेँ उठापटक,
      कारण बेटी सिया आ गौरी, ताहि बहन्ने पाहुन अलेल,
      गजब ई मिथिला अलौकिक प्रदेश! ई कहाइछ मिथिलादेश।

      कल्पनासँ बाहर आउ। आब विपन्न छी, धरि धरोहर तँ कायम अछि। एकरा संरक्षण लेल स्वयंसेवा एकमात्र उपाय देखाइछ। गाम-गाम एक न एक धरोहर अछि, एकरा अहीं टा बचा सकैत छी। दहेज मुक्त मिथिला एहि लेल अनुरोध करैत अछि।

      फोटोमे हमर गामक किछु धरोहर सब। गर्व अछि हमरा जे एहि गाममे सब कमौआ पुत एहि लेल जान-प्राण एक केने रहैत अछि। कम्पीटीशन चलैत रहैत छैक। तोँ एतेक तऽ हम एतेक!! 

      हरि: हर:!!

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      मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समितिक कार्यकारी अध्यक्ष राम नारायण झा जदयू पार्टीक प्रमुख हस्ती आ मुख्यमंत्री नितीश कुमार केर दायाँ हाथ – पूर्व विधान पार्षद संजय झा सँ माँग कयलैन अछि जे मिथिला राज्य कार्यकर्ता पर कुर्सी आ लाठी सँ कैल गेल हमलाक जाँच करबैत दोषीकेँ दण्डित करैथ। प्रजातंत्रमे अपन बात राखबाक सबकेँ अधिकार प्राप्त छैक – लेकिन मिथिला राज्यक माँग संग ज्ञापन पत्र देबय जा रहल मिथिला राज्य निर्माण सेनाक कार्यकर्तासब पर एहेन हमला नितीशजीक फासीवादी विचारधाराकेँ स्पष्ट करैत अछि। मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा एहि मादे एक विज्ञप्ति जारी करबाक बात सेहो कैल गेल अछि।

      हरि: हर:!!

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      मचीया उतरि बाबा मन्डप चढ़ी बैसल आब जल्दी करू कन्यादान यौ
      सुस्की-सुसकी रोवे माता सुनैना आब धीया होयति वीरान यौ
      जुनी कानू जुनी खिजू माता सुनैना आब धीया जयति सासुर यौ
      किये जानी अम्मा गोद में राखल, किये जानी केलौ प्रतिपाल यौ
      बेटा जानी आगे बेटी गोद में राखल, मुंह देखि केलौ दुलार यौ
      नाम लेल आगे बेटी पोखरी खोनाउल,धर्म लेल करइ छी कन्यादान यौ

      रचनाकार: अज्ञात

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      आत्मगौरवसँ अनभिज्ञ आ मायाजनित भाषाक भूखक चलते लोक भटैक गेल छथि। मिथिला राज्यविहीन अवस्थामे आब लगभग ७०० वर्ष भऽ गेल अछि, ताहि हेतु एहेन विपन्नता आ भटकाव मैथिलीभाषीमे देखा रहल अछि। मिथिला राज्य बनिते मैथिली भाषाक सेवामे लागल लोककेँ पोषणतत्त्व देबाक परंपरा शुरु होयत आ सब किछु सही भऽ जायत। एकमात्र लक्ष्य – मिथिला राज्यकेर स्थापना! हरि: हर:!!

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      २८ दिसम्बर २०१३

      मिथिलाक गाम-गाममे अनेको धरोहर: दृष्टान्त

      (धरोहर आर संरक्षण: दहेज मुक्त मिथिला)

      हम सब गर्व करी जे मिथिला समान समृद्ध संस्कृतिक पवित्र धरासँ ईश्वर एहि मर्त्यभुवनमे जन्म देलनि अछि। गर्व कथमपि सुदृढ धर्म यानि जीवनचर्या आ सदाचरण बिना कहियो नहि भऽ सकैत अछि। गर करैत कहियो प्रेमसँ अनुभूति करू:

      चारूकात हरियर-हरियर गाछ-वृक्ष,
      ताहि बीच सुन्दर सरोवर हरियरे पाइनसँ लवालव,
      महार धऽ के अबैत – जाइत पगडंडी आ मोसाफिर,
      केकरो कान्हपर कोदाइर तऽ कियो हर-बरद संगे,
      खेती आ अन्न केर जोगारमे रत मानव समाज,
      खेतमे कमठौनी, घसवाइह आ जोत-कोर करैत,
      तन-बदन उघार डाँर्ह-माथ धरि बान्हल छेकल,
      गजब जनक संग भेंटघाँट, या फेर गोनुए गोनु,
      मिथिलाक अनुपम गाम आ गाममे एक धरोहर,
      या हो मन्दिर या हो चौपाल, सबहक भेट लेल वैह,
      काजक बाद ताशक चौपारि, पान ओ मुस्की,
      गपक तीर सँ देवो थरथर, हरि ओ हरकेँ उठापटक,
      कारण बेटी सिया आ गौरी, ताहि बहन्ने पाहुन अलेल,
      गजब ई मिथिला अलौकिक प्रदेश! ई कहाइछ मिथिलादेश।

      कल्पनासँ बाहर आउ। आब विपन्न छी, धरि धरोहर तँ कायम अछि। एकरा संरक्षण लेल स्वयंसेवा एकमात्र उपाय देखाइछ। गाम-गाम एक न एक धरोहर अछि, एकरा अहीं टा बचा सकैत छी। दहेज मुक्त मिथिला एहि लेल अनुरोध करैत अछि।

      फोटोमे हमर गामक किछु धरोहर सब। गर्व अछि हमरा जे एहि गाममे सब कमौआ पुत एहि लेल जान-प्राण एक केने रहैत अछि। कम्पीटीशन चलैत रहैत छैक। तोँ एतेक तऽ हम एतेक!! 

      हरि: हर:!!

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      आत्मगौरवसँ अनभिज्ञ आ मायाजनित भाषाक भूखक चलते लोक भटैक गेल छथि। मिथिला राज्यविहीन अवस्थामे आब लगभग ७०० वर्ष भऽ गेल अछि, ताहि हेतु एहेन विपन्नता आ भटकाव मैथिलीभाषीमे देखा रहल अछि। मिथिला राज्य बनिते मैथिली भाषाक सेवामे लागल लोककेँ पोषणतत्त्व देबाक परंपरा शुरु होयत आ सब किछु सही भऽ जायत। एकमात्र लक्ष्य – मिथिला राज्यकेर स्थापना! हरि: हर:!!

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      कुमार विकास, शायद अहाँ फेर अनभिज्ञ बनि रहल छी जे महत्त्वपूर्ण कार्यक कमी नहि छैक। रूममे बैसि किबोर्डसँ खेल करबाक हो तँ सार्थक अध्ययन लेल करू। पोलिटिकल मूव पर ध्यान अछि तऽ पहिले एतबी बता देल जाउ हमरा जे आइ धरि कोन पार्टी मिथिला राज्य लेल कि सब बाजल अछि? आ कि अहुँ कोनो पार्टीक अधिकृतसँ भेटय गेलहुँ, कहियो समय निकालि केकरो ज्ञापन देलियैक, ओकर जबाब लेलियैक, आमजनक सरोकार, राज्यक सार्थकता आ बहुत रास विन्दुपर धरातलपर कार्य केलहुँ…. यदि ई सब कैल गेल हो तँ अहाँ एहि तरहक अभियानमे अपन समय खर्च करू। हम स्वागत करब, धरि हमरा बखैश देल करू! प्लीज! हरि: हर:!!

      जे जानकारी जरुरी छैक कम सऽ कम ओतेक राखू, तेकर बाद विश्लेषक आ टिप्पणीकार बनबाक हिम्मत शोभा देत। नहि तऽ काज नहि, परम अकाज होयत। अफसोस जे कोनो व्यक्ति विशेष टा आइ धरि आन्दोलन सँ जुडल छैक, अहाँ तेकरे इज्जत पर हमला करबैक आ खण्डी-खण्डी खेल खेलायब तऽ कहू जे समय केर कोना नीक उपयोगिता होयत? हरि: हर:!!

      एखन एकटा आरो पोस्ट अहींक देखलहुँ, कीर्तिजीकेँ अप्रवासी, पडोसी… आ कि-कहाँदैन कहैत हुनकर सरोकारवाला क्षेत्रवासीक दिमाग खोलबाक लेल देल गेल एतेक यत्नपूर्वक विज्ञापन आ मुख्यमंत्रीकेँ नैतिकता एवं रीतिपूर्वक घेराव करबाक मुद्दाकेँ अहाँ संसारक महान छीटखोपडी आ बतहा पत्रकार आशीषजे अपन घरवाली कुमुदक नामसँ सेहो आइडी अपरेट करैत अछि तेकर विचारकेँ अपन विचार बनेलहुँ। अहाँ शायद आइ चिन्हने हेबैक, हम फेड अप भऽ गेल छी एहेन महान छीट सबसँ। पहिले प्रशंसक रही कुमुद सिंह केर जे एक मैथिलानी आ संघर्षपूर्ण पत्रकारिता सँ ईसमाद चलबैत अछि। लेकिन एकर पित्त उझलैत आ नितीशक अंध-समर्थनमे तिरहुत राजकेँ मिथिला माननिहार-माननिहाइर रूप देखला बाद बुझा गेल छल। आब अहाँ ओहेन चोपाहगिरी कार्यमे दिमाग लगायब तऽ कहू कि फाइदा? व्यक्तिविशेष जे करनिहार हो तेकरे बाँसक फट्ठासँ गाँइर सेदबैक? हरि: हर:!!

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      Dhiya-Gaan:

      Folksong of Mithila – while daughter is matured and a father has to apart by marrying her into a new family – a new village and a complete new existence. It is truly a wonderful tradition of Mithila – you can say it to be of India even, every daughter has to settle in her in-laws place. Sita, the Princess of Mithila, daughter of King Janaka was also sent very far from Mithila to Avadh and people including father king himself wept while aparting from daughter. Although, after Sita, the people of Mithila stopped marrying daughter to farther culture and even the western-southern sides were not taken as sign of luck because of Sita’s whole life suffering with Prince of Avadh – Son of Dasratha – Ram; yet the system still prevails and the presented song from heart of a father, the author wishes to convey the guidelines to daughter getting ready to marry and so to live in a new family of her husband. Quite an impressive scene and so do the contents.

      Jay Maithili! Jay Mithila!!

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      २७ दिसम्बर २०१३

      मुख्यमंत्रीकेँ देल जायत ज्ञापनपत्र: मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समिति

      दरभंगा

      मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा पठाओल गेल जानकारी अनुसार काल्हि दरभंगामे नितिश कुमार – बिहार मुख्यमंत्रीक अबाइ छन्हि। पहिले सेवा यात्रा, फेर अधिकार यात्रा आ आब संकल्प यात्रा – एहि समस्त यात्रा द्वारा सत्ताक सुरक्षा प्रति साकांछ नितीश एक बेर फेर जगह-जगह अपन नव घोषणा आ अपनहिसँ अपन पीठ ठोकबाक कार्यक्रम करैत वर्तमान यात्रापर काल्हि दरभंगा औता। एक तरफ जदयू सत्ताधारी दलकेर गाम-गाम बनल संगठन, अपन विभिन्न स्तरसंग सहकार्य करैत वर्तमान दौरक रैला-महारैलाक नव संस्कृतिकेँ सफल बनेबा लेल भाडाक भीड जुटौता आ अपन-अपन जोगार नीक बनेबा लेल शक्ति-प्रदर्शन करता ततहि दोसर दिशि नितीशक विरोधी राजनीतिक दल सब हुनकर घोषणाबाजी मात्र करबाक बातपर विभिन्न ठाम विरोध सभा सेहो करता।

      विगत किछु समयसँ तीव्र मिथिला राज्यक माँग कएनिहार विभिन्न समूह द्वारा नितीश कुमारकेर घेराव कार्यक्रम सब घोषणा कैल गेल अछि। ओतहि दरभंगाक एक प्राचिन अर्थहीन गरीब-अनाथ ओ दृष्टिहीन छात्र-छात्राक पठन-पाठन लेल खुलल संस्था “प्रिया पुअर होम” केर नव व्यवस्थापन समिति द्वारा पूर्वमे कैल गेल लगभग १००० करोड रुपैयाक घोटालापर मुख्यमंत्रीसँ भेंटघाँट करैत छानबीन करेबाक लेल आ दोषी ऊपर कार्रबाई लेल अनुरोधपत्र सौंपता। नव समितिक सदस्य प्रो. उदय शंकर मिश्र एहि बातक जानकारी दैत कहलैन जे भेंटघाँट कार्यक्रमक आधिकारिक पुष्टि भऽ गेल अछि। ज्ञात हो जे महाराजा कामेश्वर सिंह अपन प्रियतमा अर्धांगिनी कामेश्वरी प्रियाकेर स्मृतिमे अनाथक सेवा लेल ई संस्थाक स्थापना १९४० ई. मे केने छलाह। लगभग ५ बिघामे एहि संस्थाक लेल विभिन्न तरहक निर्माण कार्य १९४० सँ १९४२ ई. धरि कैल गेल। १९४९ ई. मे जखन अनाथक संख्या बढय लागल तँ १६ बिघा आ १४ कट्ठा जमीन एवं ८० दोकान ‘हराही टेरेस’केर नाम सँ दान देलैन। ताहि संग डेढ लाखमे ‘डेनमी ब्लाक’केर स्थापना भेल। २२ अक्टुबर केँ मानवाधिकार आयोग, पटनाक फैसला वर्तमान व्यवस्थापन समितिक पक्षमे आबि चुकल अछि। एहि सन्दर्भ एकटा मोकदमा सीजेएम कोर्ट, दरभंगामे पुरान व्यवस्थापन समिति पर सेहो कैल गेल अछि। जाहि उद्देश्य लेल जे दान देल गेल अछि तेकर सही उपयोग कायम करायब वर्तमान व्यवस्थापन समितिक दायित्व अछि।”

      स्वयं प्रो. मिश्र मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समितिक संयोजक सेहो रहबाक कारणे पूछला पर कहलैन जे बिहार राज्य शासन पद्धतिसँ मिथिलाक कैल जा रहल उपेक्षापर सेहो मुख्यमंत्रीजी केर ध्यानाकर्षण कराओल जायत। राज्यक माँग जाबत संबोधन होयत ताबत धरि मिथिला विकास परिषद् केर गठन करैत विकास हेतु वर्तमान राज्य ध्यान दियय सेहो अनुरोध कैल जायत। बिहार जाहि नाम पर विशेष राज्यक माँग करैत केन्द्र सरकारसँ विशेष आर्थिक पैकेज प्राप्त केलक अछि ताहिकेर अधिकांश उपयोग मिथिला क्षेत्रक पिछडापण दूर करबा लेल कैल जाय, एहि लेल मुख्यमंत्री संग माँग कैल जायत। मिथिला लेल विकास परिषद् गठन हो आ मिथिलाक विशिष्ट संस्कृतिक संरक्षण लेल विशेष ग्रामीण समितिक चुनाव तक केर माँग सेहो उठायल जायत।

      हालहि संपन्न १०म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन द्वारा उठल माँग जे झारखंडमे मैथिलीकेँ दोसर राजभाषारूपमे मान्यता देल जाय आ संगहि झारखंड लोक सेवा आयोगकेर परीक्षामे सेहो मैथिलीकेँ मान्यता देल जाय, एहि माँग लेल मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा राँचीमे शीष्टमंडल भिन्न राजनीतिक दल व नेतृत्वकर्ता संग अनौपचारिक भेंटघांट कार्यक्रम मे व्यस्त रहबाक कारणे अध्यक्ष डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजु केर अनुपस्थितिमे कार्यकारी अध्यक्ष राम नारायण झा के अध्यक्षतामे ई ज्ञापन मुख्यमंत्रीकेँ सौंपल जायत।

      हरि: हर:!!

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      ई सही अपील कैल गेल अछि। आ मैथिलसँ अंग्रेजीमे कहबैन तखन बेसी नीक सँ सुनता, कारण हुनका अपन मैथिली प्रयोग करबामे बड लाज होइत छन्हि। दिमाग सहीमे उच्च कोटिक प्रयोग कैल गेल अछि। खास कयकेँ जखन ई कहल जा रहल हो:

      हे समस्त मुंबईमे बसनिहार मैथिल लोकमानस!

      २९.१२.२०१३ केँ समय ५ बजे संध्यासँ ठाकुर काम्प्लेक्स, कान्दीवली (पूर्वी), मुंबईमे आयोजित “विद्यापति उत्सव”मे बिना औपचारिक आमन्त्रणाकेँ सेहो अधिक सऽ अधिक संख्यामे सहभागी बनू आ मिथिला वास्ते अपन एकजुटता बनाउ।

      कखनहु नहि विचार करू:

      के आयोजक छथि?
      ओ सब किनका चुनावमे समर्थन देथिन?
      कि ओ सब भाजपा सँ छथि वा काँग्रेस सँ?

      अपना सबमे सँ किछु लोक उपरोक्त दुइ दलमे सँ केकरो समर्थक भऽ सकैत छी। या, इहो संभव जे एनसीपी/शिवसेना/समाजवादी पार्टी वा एतय तक कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना तक केर समर्थक भऽ सकैत छी। लेकिन हमरा सबहक चाहत मात्र एकजुटता बनेनाय हेबाक चाही आ सेहो मिथिला राज्यरूपी अन्तिम लक्ष्य लेल। एहि आन्दोलनकेर आवश्यकता छैक जे बेसी सँ बेसी मुंबई मैथिल तक जागृति पसारी।

      जय मिथिला! जय मैथिली! जय मैथिल!

      – अनुप सत्यनारायण झा

      बहुत सुन्दर आह्वान लागल हमरा। मुँबईवासीसँ हमरो अपील जे उपरोक्त सब बातकेँ आत्मसात करैत आगू दिनमे अपन मजबूत एकतासँ मिथिला निर्माण जरुर करैथ। जातिवादमे फँसल मिथिला बिहारक उपनिवेशी बनि आइ अपन मजबूत ओ समृद्ध संस्कृतिकेँ अपने लोकनिक घरसँ पलायन करैक मजबूरीक चलते नाश भऽ रहल छैक। घर-अंगना सून्न मसान बनि गेल अछि। कतेको मजदूरवर्गक हालत एहेन छैक जे ६ महीना बाहर आ ६ महीना गाम – बाल-बच्चा सब इलैट-बिलैट रहल छैक। कारखानामे कतेको तरहक प्रदूषित हवा-पाइनसँ संघर्ष करैत, कतेक मुश्किलसँ झुग्गी-झुपडीमे एक लोकपर दोसर लोक – लोक पर लोक आ अति कठिन जीवनचर्याक संग बसैतो अपन बाल-बच्चा, परिवार आ माता-पिता-परिजन लेल रोटीक जोगार कय रहल छी। वर्गीय विभेद पहिलेसँ बेसी बदतर भऽ रहल छैक। समस्या दिन ब दिन बढिते जेतैक। आ तय पर स्थानीय लोकक बोली आ गोली…..

      सियाराम सरसकेर किछु पाँति मोन पडि रहल अछि:

      बाबा गेलय मोरंग बाबु गेलय कलकतिया
      हम एलियै बम्बइ धेलकय कोन दुरमतिया

      बोली गोली मारय पेट लात – ओ नगरी मे आइग लगलय…

      कैसे जितय छोट छोट मछडी कि पोखरी मे आइग लगलय!!

      बौअन काका हौ डोमन बाबा हौ…. रोहन भैया हौ सोहन साथी हौ…. कैसे जितय…? मिथिला नामक पोखरीमे आइग लागल नहि छैक, बल्कि लगा देल गेल छैक। एकरा लेल फाँर्ह बान्हि लडबाक आवश्यकता छैक। राजनीति करनिहार लग समाधान नहि छैक। एहि लेल अहाँकेँ अपने पुरनका स्टाइलमे काज करय पडत। बस जुडू आ कोष – सबहक दस पैसहिया सँ खडा रुपैया बनबैत संघर्षमे झोंकू। मिथिला निर्माण लेल मिथिला राज्य एकमात्र समाधान छैक।

      जय मैथिली! जय मिथिला!!

      हरि: हर:!!

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      Dhiya-Gaan:

      Folksong of Mithila – while daughter is matured and a father has to apart by marrying her into a new family – a new village and a complete new existence. It is truly a wonderful tradition of Mithila – you can say it to be of India even, every daughter has to settle in her in-laws place. Sita, the Princess of Mithila, daughter of King Janaka was also sent very far from Mithila to Avadh and people including father king himself wept while aparting from daughter. Although, after Sita, the people of Mithila stopped marrying daughter to farther culture and even the western-southern sides were not taken as sign of luck because of Sita’s whole life suffering with Prince of Avadh – Son of Dasratha – Ram; yet the system still prevails and the presented song from heart of a father, the author wishes to convey the guidelines to daughter getting ready to marry and so to live in a new family of her husband. Quite an impressive scene and so do the contents.

      Jay Maithili! Jay Mithila!!

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      धियाक गान (तर्ज: चैतावर)

      सुनु सुकुमारि धिया, सुनु-सुनु बेटी-सिया
      सासूर बसब नीति ध्यान हे!
      रीति-विधि मिथिला मान बढायब
      मैथिली केर शान हे!!
      सुनु सुकुमारि धिया…..

      जहिना जनमि लेल पललहुँ अंगना
      बुझब पति-परिवार हे!
      सासु-ससूरमे माय-बाप दर्शन
      राखब नैहराके मान हे!!
      सुनु सुकुमारि धिया…..

      रहल नजरि सत लाजक पर्दा
      डेग उठल गुण-बुद्धि हे!
      पढि-लिखि हाकिम-हुकुम बनब धिया
      राखब विकसित प्राण हे!!
      सुनु सुकुमारि धिया…..

      लायब धरती लव-कुश-भारती
      लायब अहिल्याकेर नाम हे!
      पुरखासँ पायल ज्ञान सिखायब
      मर्यादाकेर ध्यान हे!!
      सुनु सकुमारि धिया….

      बेटीसँ बसय छय गामसे जानब
      बेटा बनू निज देश हे!
      बापक नाक कखनहु न कटायब
      मायकेर प्यारी चान हे!!
      सुनु सुकुमारि धिया…..

      हरि: हर:!!

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      कीर्ति आजाद कोनो लोभमे मिथिला राज्यक माँग नहि कय रहल छथि। – समीक्षा

      दीपकजी, बहुत सही समीकरण आ राज्यक वर्तमान वोटिंग-फैक्टर्सपर सटीक चित्रण अछि। मिथिला राज्यक माँग वा मैथिली भाषाक सम्मान एहि सबसँ बहुत ऊपर छैक। एकरा लौकिक भाषामे आइक दिन बुझनाय ९०% लोकसँ संभव नहि छैक। सर्वेक्षण जँ करब तँ इहो पता चलत जे राज्य कि होइत छैक, सरकार कि होइत छैक, वोट किऐक देल जाइत छैक, जनप्रतिनिधि किऐक चुनाइत छैक, देशमे संविधानक शासन कोना चलैत छैक, एहिमे जनताक अधिकार कि सब छैक…. ई साधारण बात सब सेहो बुझनिहार सैकडामे १० गो बा-मोसकिल भेटत। कवि हल्ला करैत छथि बेसी, हिनकहि सँ पूछियौन जे ई राज्य कि होइत छैक तऽ पूरा बात अध्ययन नहि केने छथि आ एक निश्चित मानसिकतासँ ई राज्यक माँगकेँ कहियो समर्थन तँ कहियो विरोध करैत छथि। हम विद्वता या अहंकेर प्रदर्शन लेल ई बात नहि कहि रहल छी…. हम जे किनको पर जाइन-बुझि कडा प्रहार करैत छी तेकर पाछू मात्र एकटा मुख्य कारण रहैत अछि जे बिना मुद्दाक सार्थकता बुझनहिये यदि हो-होबाजी-हल्ला-हुच्चर टा करबैक तऽ अहिना वोट फैक्टर्स आ एलीमेन्ट्समे एहि मुद्दाकेँ फँसा देबैक। ई मसला राजनीतिक एखन धरि नहि बनलैक अछि। क्षूद्र विश्लेषक लोकनि एकरा राजनेताक समर्थन वा वोटबैंक पोलिटिक्ससँ जोडैत छथिन…. ई से मुद्दा नहि थिकैक। ई विशुद्ध सुसंस्कृत विद्वान् मत थिकैक आ देशक आधार जे भारतीय गणराज्यक परिकल्पना संग संविधान द्वारा ठाड्ह कैल गेल छैक से मुद्दा थिकैक।

      शेष – निम्न लिंक पर जाउ, एहि पेजसँ जुडू, ६ महीनामे व्यवस्थापन व नेतृत्वकारी गुणसँ परिपूर्ण होयबाक गारंटर शोधपूर्ण संग्रह ओ रचनाक अम्बार! बस एक प्रयास छैक। “मिथिला ११म शदीमे देशकेँ चण्डेश्वर रचित “राजनीति रत्नाकर” देने छलैक, जेकर कालान्तरमे राजनीतिक पद्धति निर्माणपर बहुत पैघ असर देखल गेल छैक।” – रामवृक्ष बेनीपुरी

      https://www.facebook.com/pages/%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%B0-Kar-ya-Mar/508759059209481

      हरि: हर:!!

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      1. Why Bihar has ignored Mithila and its rich heritage to be included in recent Bihar Geet officially declared by Government of Bihar – especially during the leadership of Nitish Jee? Is it repeat of Ajaatshatru’s attack on Mithila? Is it biases against making Mithila deprived of any identity in coming future?

      2. Maithili is well recognized language and 26th in the list of world languages by number of speaking this language. Why then end the era of education in primary schools for Maithili?

      3. Even the Supreme Court of India rejected the appeal of Government of Bihar against verdict of Patna High Court that in favor of Maithili – then why no right to education in Maithili medium and why such contempt of the Supreme Court and High Courts of Justices? What does this attitude prove of Bihar for Maithili and Mithila?

      4. It may be true that people demanding a separate state of Mithila have been following the decency and seeking resolution through peaceful demonstration at Delhi and otherwise but not so much in Mithila – however, the adamant attitude being shown by responsible governments of state and center for not declaring special development packages of Mithila region; does it indicate the provocation by states for inviting a blasting approach from Maithils which may also contain several types of damaging and blood shedding protests, movements, blockades, etc.?

      5. Mithila since time eternal is known as hub of education – why it is thrown to be such poor that Maithil teachers are migrating to other parts of nation and world? Why can’t government think of renewing that culture within Mithila alone? Can the Videha – the Yajnavalkya – the Gaargi – the Maittreyi – the Mandan – the Ayachi – the Bharati – the Vidyapati – the all famous entities who not only contributed for Mithila but for entire world not be accommodated in model universities of Mithila alone?? The one Lalit Narayan Mithila University got olden and there are no additional world class standards added here – no international faculties – the baccalaureate – or even the Tantra Vidya, Jyotish Vidya, Arthashastra, Raajneetishastra, Nyayshastra and several higher scriptural based fundamentals could establish in Mithila’s institutions to attract the world communities to come here and learn those things?? Why no care on these values really?? Why such dishonesty?? Why not serious feasibility studies that would promote more people of Mithila to know the value of their ancient highest culture and traditions rather than wasting brains in putting odd labors in garments and factories of NCR?

      6. There are talks and gossips going for fisheries and Makhana farming will be industrialized… what is the progress?

      7. In recent times, honorable CM – Bihar visited core district of Mithila – Madhubani and declared several projects – quite worthy and precious projects – indeed a welcome step from Government of Bihar is done… why not the same processes continue for all the districts in Mithila region having miraculous and glorious potentials to flourish?

      I believe, I have put up these questions both for introspection of the government of Bihar and the entrepreneurs of Mithila region. I have serious complains and dissatisfaction with self-developing attitude of Maithils who corner themselves from participating in above process and feel happy with little they earn from the breads of others by exchanging such a precious intellectuality and the worthy inner capabilities elsewhere. They must also realize their duties and rights for Mithila. I believe, Mithila still lives just because a very few people in Mithila still think in similar direction and they do too. Let people not reach to the conclusion – Love Mithila or Leave Mithila type slogans and action. Let tolerance still remain within limits. Once these tolerances are crossed the borders, I believe, there will be a very serious demand of what Dr. Laxman Jha raised ever. Let things get controlled in time. Let it not be so late – please.

      The above questions were asked to Nitish Jee on February 22, 2012 – questions cum memorandum presented to him through the president of Vishwa Maithil Sangh, Burari, Delhi during CM’s visit on 18th March, 2012 Bihar Diwas celebration. These are not answered even in part.

      Further to above, we have more questions –

      1. Why IIIT earlier planned to install at Darbhanga were shifted to Nalanda or otherwise to Bihta finally, whatever… but why not Darbhanga?

      2. Why drought hit betel agri-doers are not given the relief packages so far?

      3. The fisheries in Northern Bihar (Mithila region) were the primary sources of incomes, what has government brought as development to nourish that sector? Despite an STF sent under the able leadership of Dr. Satish C. Jha and necessary recommendations were made, what have been the real progresses launched in developing the potential agricultures in that region?

      4. Why CM has been just announcing the development programs severally, but none of the vital achievements could be made to let people feel, some progresses are taking place?

      5. We are happy, one Baluwaha Bridge is again built to make Darbhanga and Saharsa nearer, that is again a very vital achievement of Nitish Government of course that connects two sided Mithila from one more place after Kursela and Bhaptiyahi. But why Nitish called that the same bridge would bring two cultures – Koshi and Mithila together? Why such divide and rule being imposed on Mithila? What is that Koshi culture all about? Which history did he refer to say so?

      6. Whenever government of Bihar sponsors some cultural events at Saharsa or Madhepura, they keep blurting through sponsored scholars that the region belong to Kaushik Culture and that was also vitally protested once and again… yet again the government of Bihar is adamant to call it that. What it suggests?

      7. What have been done so far to bring any sentiments among the migrating people of this region that it would lessen and people would have a hope to see industries, agricultures, irrigations, education, cultural centers, etc. taking shape to let Mithila get a survival further?

      There are large number of questions, hope this much will be sufficient for now.

      बीते 100 सालोँ मे मिथिला के प्रति बिहार का रवैया :
      1. बिहार मेँ दो एयरपोर्ट गया और पटना मेँ, पूर्णियामे नाम मात्र का एयरपोर्ट। जब बिहार मे किसी जगह एयरपोर्ट नहीँ था उस समय दरभंगा मे थापर आज ? पटना एयरपोर्ट पर उतरने वाले अधिकतर यात्री उत्तरी मिथिला केँ होते हैँ पर उत्तरी मिथिला मे एक भी एयरपोर्ट नही जहां से लोग यात्रा कर सकेँ, क्योँ ?
      2. बिहार के राज्य गीत और राज्य प्रार्थना मेँ मिथिला को कोइ जगह नहीँक्या मिथिला,बिहार मेँ नहीँ है ?
      3. बिहार के गया और मोतिहारी मेँ नये केद्रीय विश्वविद्यालय बनेँगेँ, क्यापूर्णिया/ मुजफ्फरपुर इस लायक नहीँ हैँ ?
      4. बिहार सरकार ने आजतक भारत सरकार से मिथिला मे बाढ़ की समस्या को नेपाल के समक्ष उठाने को नही कहा है, क्योँ ? उत्तरी मिथिला मेँ बाढ़ का निदान नहीँ हो सका है, क्योँ ?
      5. आजतक कोशी पर डैम नहीँ बन सका है अगर ये डैम बन जाता तो मिथिला बिहार को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराता! क्या ये नहीँ बनना चाहिये ?
      6. बिहार के पटना,गया और हाजीपुर मेँ लो फ्लोर बसेँ चलेँगी क्या दरभंगा/ भागलपुर/कटिहार इस लायक नहीँ हैँ ?
      7. मैथिली बिहार की प्रमुख भाषा है, मैथिली बिहार की एकमात्र क्षेत्रीय भाषा है जो भारतीय संविधान की अष्टम अनुसूचीमे शामिल है तो फिर आज तक इसे बिहार की दूसरी राजभाषा का दर्जा क्योँ नहीँ ? यहां ये बताना जरुरी है की मैथिली नेपाल की द्वितीय राष्ट्रभाषा है!
      8. बिहार सरकार भोजपुरी फिल्मोँ को करमेँ छूट देती हैँ पर मैथिली फिल्मोँको नहीँ, क्योँ ?
      9. मिथिला मेँ आजतक प्रारंभिक शिक्षा मैथिली मेँ देनी नहीँ शुरु की गयी,क्योँ ?
      10. बिहार सरकार उर्दू, बांग्ला के शिक्षकोँ की नियुक्ति कर रहीँ पर मैथिली के शिक्षकोँ की नहीँ, क्योँ ?
      11. जो IIIT दरभंगा के लिए था उसे नीतीश कुमार छीन कर बिहटा स्थानांतरित कराये, क्योँ ?
      12. 2008 के कोसी पीड़ितोँ को आजतक न्याय नहीँ मिल सका है, क्योँ ?
      13. मिथिला क्षेत्र मे नये उद्योग धंधे लगाने की बात तो छोड़िये जितने भीपुराने जूट मिल, पेपर मिल, चीनी मिल आदि थे वे सारे क्योँ बंद हो गये ?
      14. नीतीश कुमार मिथिला क्षेत्र मेँ होने वाले हर इक सभा मेँ ये कहते हैँ की मिथिला के विकास के बिना बिहार का विकास नहीँ हो सकता तो फिर उन्होँने मिथिला के विकास के लिए अब तक क्या किया ?
      15. अयोध्या नगरी अर्थात राम नगरी आज पर्यटन के लिए विख्यात है लेकिन मिथिला नगरी अर्थात सीता नगरी को भारतऔर विश्व के पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए आज तक बिहार सरकार ने क्या किया ?
      कितने कारण गिनाऊ, बिहार के मिथिला के प्रति उदासीन के ? अब तो बिहार पर विश्वास ही नहीँ है, बीते 100 सालोँ मे धोखा, धोखा और सिर्फ धोखा!
      अब आप बताइये बिहारी मित्रोँ क्योँ न करु पृथक मिथिला राज्य की मांग ?

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      २६ दिसम्बर २०१३
      वाह, हम सब सदिखन प्रयासरत रहैत छी जे वर्तमान मिथिलाक्षेत्रक विद्यालय सब ओहेन गान व नृत्य जरुर अपन सांस्कृतिक कार्यक्रममे शामिल करैथ जाहिसँ बच्चा सभमे अपन संस्कृतिक गरिमा पता रहत। जेना झिझिया, जट-जटिन, कमला-स्नान, पमरिया नाच आदि यदि प्राचिन व्यवहारसँ भेटि रहल अछि ततहि आब धानरोपनी, नव-घर – पुरान-घर, भगवती वन्दना, जितिया सामूहिक नृत्यगान, आ विभिन्न मैथिल व्यवहारक नृत्य-थीम पर काज करैत विलक्षण प्रस्तुति सब बनायल जा रहल अछि। आइ राजेश झाजी द्वारा पलवल (हरियाणा)केर विद्यालयमे सीतापर बनायल गेल नृत्य सेहो एकटा नव आइडिया देलक, किछु कालमे एकर विडियो भेटत आ आशा करैत छी जे आगामी किछुए दिनमे – जेना २४ जनवरी, २०१४ केर विराटनगरक “मैथिली सांस्कृतिक संध्या – २०७०” मे एकरा समेटल जा सकत। मिथिलाकेँ अपन राज्य नहि छैक, लेकिन सब राजा बेटा जँ शपथ खाइत एक‍-एकटा काज कराबय लागत तँ हमर संस्कृति ओहिना जिन्दावाद रहत जेना आइ कतेको युगसँ रहल अछि। केकर मज्जाल छैक जे हमरा सब केँ अपन समृद्धिसँ दूर कय देत! हरि: हर:!!

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      There is a fundamental difference between truth and falsehood. Truth holds together. Falsehood is full of contradictions. It falls apart. This is exactly what has happened to a conspiracy of falsehood hatched by Narendra Modi’s opponents in relation to the 2002 Gujarat riots.

      The Gujarat riots of 2002 are a painful chapter in recent Indian history. The burning of the Sabarmati Express and the subsequent riots have cost us many valuable lives, injured many and led to a large scale loss of property.
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      In absolute agreement with you Sir, the same has been our observation since a very long time and we have been expressing through social media the same. Happy to read the alikeness. Harih Harah!!

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      औझका टास्क: मैथिलीमे अनुवाद करू

      निम्नलिखित न्युजलेटरकेर जतेक संभव हो ततेक सुन्दर मैथिलीमे अनुवाद करू – याद राखू, अनुवाद करऽ समयमे:

      *गलती होयबाक संभवना सँ डर नहि मानब।
      *एकरा जरुरी काज बुझि कम सऽ कम समयमे पूरा करब।
      *जाहि शब्दक मैथिली अर्थ नहि बुझैत होइ ओकरा जहिनाक तहिना राखि दियौक, यथा अंग्रेजी वा हिन्दी वा बंगाली वा उडिया…. जाहिमे सुटेबल बुझाय से लिखिकय निचाँ एगो नोट लगा देबैक।

      आब निम्नलिखीत वाक्यपर ध्यान दियौक, चिह्नविचार सब राखब नहि बिसरब। नहि तऽ मार्क्स कटि जायत। 

      हरि: हर:!!

      Swamiji has prohibited praising one’s own doctrines (philosophies, views, opinions etc) and criticizing other’s doctrines, philosophies etc (Sadhan, Sudha, Sindhu pg. 727 – 729).

      According to Gita, is “praising our doctrines (views, opinions, philosophies) and criticizing other’s doctrines” a good deed, or bad deed?

      Please explain in easy to understand words. Humbly, Sadhak

      स्वामीजीने अपने मतका मण्डन करनेका और दूसरेके मतका खण्डन करनेका निषेध किया है [साधन-सुधा-सिंधु पृष्ठ 727 से 729].
      ”अपने मतका तो आदर करना और दूसरेके मतका अनादर करना”,
      गीताके अनुसार सुमत (good deed) है या कुमत (bad deed) है?
      कृपया सरल (easy to understand) शब्दोंमें समझायें।
      सविनय,
      साधक

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      आउ मैथिल, आइ एक महत्त्वपूर्ण पाठ सिखू राजनीतिकेर:

      १. मिथिला चूँकि प्राचिन न्याय केर उद्भेदक स्थल थिकैक, एतहि भेल छलाह गौतम ऋषि जिनक आश्रम रहल छल दरभंगाक अहिल्या स्थान समीप कतहु… वा अहिल्ये स्थान…. कारण अहिल्या हुनक पत्नीकेँ हुनकहि श्रापक कारण पाथरक मूर्ति बनि कतेको बरख धरि रहल पडल छलन्हि आ जखन रामक चरणधूलि पडलैन तखन ओ ओहि शापसँ मुक्त भेल छलीह…. वैह गौतम कहाइत छथि एहि न्याय दर्शनक उद्भेदन करनिहार। आब राजनीतिमे एकर बड पैघ उपयोगिता छैक – सोझ मनसँ आइ काल्हि न्याय करब तँ बेवकूफ आ चौपटनाथ गपट गिरधारी कहायब। ओना राम एहि न्याय परंपराकेँ शापित करैत नाश कय देलखिन कहाँ दैन – ई प्रकरण संछिप्त मे सुना दैत छी – दशरथ द्वारा वनवास मे पठेलाक बाद हुनक मृत्यु भेल छलन्हि से तऽ बुझले अछि, पुत्रशोकसँ ओ मरि गेलाह ई मानल जाइत छैक, से बात गौतम राम लेल न्याय करैत कहलखिन जे अहाँक चलते पिताक मृत्यु भेल, अहाँ दोखी छी। राम संग जिरह होवय लगलैन। राम कहथिन जे भाइ हम तऽ पिताक आज्ञापालन केलहुँ, हम कथीक दोखी…. ओ कहलखिन जे पिताक आज्ञा ई थोडे न छल जे ओतेक दूर कोनो जंगल मे जाउ, अहाँ नजदीक कोनो कलम-गाछी-बगीचामे रहिकय सेहो हुनका भरोस दऽ सकैत छलियैन आ रहि सकैत छलहुँ, हुनका अहींमे प्राण छलन्हि… अहाँ तऽ जिद्द आ सनकसँ राज्यक बाहर कतयसँ कतय विचरण करय लगलहुँ…. आदि तर्क सब दैत रामोकेँ हिला देलखिन आ साबित कऽ देलखिन जे सही मे अहींक चलते पिता… कहबाक माने आब राम सेहो तमशा गेलाह आ कहि देलखिन जे प्राचिन न्याय नष्टो भव: ….. हँसू नहि, एहने-एहने तर्कलाल सबसँ मिथिला भरल पडल अछि, आब राज्य चाही तँ पहिने तैयार भऽ जाउ जे एहेन तर्कलाल कलियुगी गौतम ऋषि सबसँ पार पाबि सकब। एतय चूक यानि पहिल हाइर। राज्यसँ वंचित रहबाक एक मूल कारण इहो छैक।

      औझका पाठ सँ कि बुझलहुँ, आब कमेन्ट करैत लिखब। याद रहय, एहि पेज द्वारा ६ महीना मे पकिया नेता बना देबाक गारंटी देल गेल छैक। जँ कियो आसपास नेता बनबाक लेल इच्छूक होइथ तँ जरुर कहि देबैन एहि पेजसँ जुडल रहैथ।

      विशेष शुभ!

      हरि: हर:!!

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      This is really a very dreadful situation, how a party with crown of governance go for misuse of authority simply to contest a strong PM candidate of the opposition party. This must be challenged – I am in absolute agreement with what you have expressed Sir. This trend will set a very bad example. The people of India is aware about these doings of present Congress led government in centre. Be that the case of Anna’s team or Baba Ramdev’s enterprises and ally compelled to face legal suits after protesting or demonstrating with certain issues in favor of the country; and now Narendra Modi on target. This is how the dirty ideology discouraged a fair democracy in India. Supreme Court must intervene for this kind of cheaper politics and abuse of constitutional rights. Harih Harah!!

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      दहेज मुक्त मिथिला केर सोशियल पेज साइटपर विज्ञापन देनिहारसँ अपील:

      https://www.facebook.com/groups/dahejmuktmithila/

      विज्ञापन देबासँ पूर्व अनुमति अनुबंध लेब जरुरी अछि, कृपया विज्ञापन वगैर संस्थाक उद्देश्यपोषण करबाक प्रतिबद्धता प्रकट केने नहि करी। यदि नियमकेर पालन नहि होयत तँ ओहेन विज्ञापन डेलिट कय देल जायत आ सदस्यकेँ प्रतिबंधित सेहो कय देल जायत।

      विज्ञापन लेल सम्पर्क करू: 
      १. मदन ठाकुर, नोएडा – ९३१२४६०१५०
      २. संतोष चौधरी, दिल्ली – ९९१०६०७७२०

      एडमिन – दहेज मुक्त मिथिला

      हरि: हर:!!

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      शुभ समाचार

      ई अछि जे आगामी २४ जनवरी, २०१३ महेन्द्र मोरंग आदर्श बहुमुखी केन्द्रिय कैम्पसमे विशाल “मैथिली सांस्कृतिक संध्या – २०७०” केर आयोजन मधेशी विद्यार्थी फोरम नेपाल (लोकतांत्रिक), म. मो. ई. समिति द्वारा आयोजित होयत। एहिमे भारतक सुप्रसिद्ध हास्य अभिनेता व मिथिलावादी महान व्यक्तित्व “अद्भुदानन्द” आबि रहल छथि, अपन नव रूपमे आ नव प्रस्तुतिक संग। तहिना युवाक धडकन मानल गेनिहार संजय यादव – स्नेहा झा – विरेन्द्र झा – प्रबलदीप विश्वास आ कतेको रास गायक-गायिकाक संग विभिन्न स्रष्टा सबहक प्रस्तुति, समय ३ बजेसँ ८ बजे धरि, खुल्ला मैदानक मंचपर भव्य आयोजन होयबाक आ युवा विद्यार्थी समूह द्वारा एहेन आयोजन पहिले बेर होमय जा रहल अछि। मैथिलीक नीक दिन आबि रहल अछि। चारूकात लोककेर जागृतिसँ मिथिला संस्कृतिक संरक्षण हेतैक से पूर्ण विश्वास अछि।

      हरि: हर:!!

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      बाढे पूत पिताके धर्मे: कीर्ति आजाद आ मिथिलाक सपना

      मिथिला केर प्राणरक्षा हेतु जाहि तरहें कीर्ति आजाद गांडीव उठेलनि आ निरंतरतामे सांसदमे मिथिला डेस्क सहित विभिन्न आयामी परिवर्तन लेल डेग उठेबाक सतत-प्रयासमे अपन बौद्धिक-नैतिक बल लगौलनि ताहिसँ मिथिलावासी आ अखण्ड इतिहास आभार सहित कृतज्ञ बनि गेल अछि। मिथिला राज्य लेल प्राइवेट मेम्बर बिल पर चर्चाक विवरण मिथिला लेल कमजोर मिडिया वा स्व-सशक्तिक कमीक कारणे एखन धरि प्रतिक्षित अछि, मुदा ई एक ऐतिहासिक डेग तऽ भेल अछि जे एतेक वर्षक बाद सही फोरमपर सही माँगकेँ राखल गेल। बाहरमे कतेको तरहक अभियान निरंतर संचालनमे रहितो समुचित मंचपर उठेबाक महत्त्व होइत छैक।

      दरभंगा संसदीय क्षेत्रसँ दोसर बेर सांसद बनि अपन संसदीय भूमिकाकेँ बखूबी निर्वाह करैत रहल छथि। संगहि समग्र मिथिला संस्कृतिक ऐतिहासिकता आ आर्थिक पिछडापण पर गहिंर शोध करैत सांसद आजाद पृथक मिथिलाराज्यक माँगकेँ समर्थन करैत आबि रहल छथि। मिथिलाक पिछडापण केर मूल कारक बिहार राज्य प्रशासनक उदासीनताकेँ मानैत उपेक्षाक समाधान मात्र अलग राज्य आ स्वशासन टा भऽ सकैत छैक, मानैत छथि कीर्तिजी। हिनक दल स्वयं राजग शासनमे साझीदार रहैत ई उपेक्षाक समाधान लेल भरल सभामे विरोध करबा लेल जानल जाइत रहल छथि, अपनो गलती-कमजोरीकेँ आत्मसात करबाक बादे जीत हेतैक, ओहि खेल-भावनासँ ओत-प्रोत कीर्तिजी अपन पुरान उत्कृष्ट क्रिकेट खेलाडी होयबाक परिचय दैत रहल छथि। पैछला वर्ष मुख्यमंत्रीक सेवा यात्रा दौरान दरभंगाक एक बैठकमे कीर्तिजी सरेआम उपेक्षाक एक-एक उदाहरण गनाबय लागल छलाह जाहिमे हिनका स्वयं मुख्यमंत्री नितीशजी रोकने छलाह – जे विवाद सार्वजनिक पत्र-पत्रिकामे सेहो खूब प्रकाशित भेल छल।

      मिथिलामे एक कहबी छैक – बाढे पूत पिताके धर्मे – तेकर जीवन्त उदाहरण कीर्तिजीसँ मिथिलावासी मे बड पैघ अपेक्षा जागल छैक। मात्र २० वर्षक अवस्थामे हिनक पिता भागवत झा आजाद ‘भारत छोडो’ आन्दोलनमे कूदल छलाह आ अंग्रेजक गोली सेहो खेने छलाह। शायद वैह गोलीक घाव देश सेवामे जेबाक लेल चीरकालीन राह बनौलकनि आ कूशाग्र बुद्धि व विवेकसँ भागलपुर क्षेत्रक संसद ५-५ बेर चुनल गेलाह। भारत सरकारमे राज्य मंत्री बनि कृषि, शिक्षा, श्रम तथा रोजगार, आपुर्ति तथा पुनर्स्थापना, नागरिक उड्डयन एवं खाद्य तथा नागरिक आपुर्ति विभागमे लगभग १६ वर्ष धरि देशकेँ सेवा कयलन्हि। बादमे बिहार राज्यक १९८८ सँ १९८९ धरि मुख्यमंत्री बनि करीब १ साल महत्त्वपूर्ण कार्य सब कयलन्हि। २०११ ई. मे हिनक स्वर्गारोहण भेल, लेकिन अपन पाछू सक्षम पुत्र सबकेँ राष्ट्रकेर सेवामे छोडि गेल छथि – ताहिसँ आइ हुनक पुण्यात्मा चीर शान्तिमे जरुर होयत।

      कीर्तिजी द्वारा ताउम्र मिथिला निर्माण लेल कार्य करबाक प्रतिबद्धतासँ युवाजन बहुत प्रेरित अछि आ सदैव हिनका संग दैत अपन स्वाभिमानक लडाई यानि मिथिला राज्य निर्माण लेल उत्साहपूर्वक आगू बढि रहल अछि। आगामी १९ जनवरीकेँ मिथिला राज्य निर्माण सेना द्वारा राखल गेल संगोष्ठी कार्यक्रममे समस्त भारत व अन्तर्राष्ट्रीय जगतसँ मैथिल विद्वान, समाजसेवी व नेतृत्वकर्ता लोकनिक विशाल कुंभकेर आयोजन होमय जा रहल अछि। एक स्थापित आ बहुआयामी व्यक्तित्वक संङ्गोरसँ क्रान्तिक नवधारा कोना बहैत छैक – तेकर परिचायक रहल छल पैछला जन्तर-मन्तर पर राखल गेल धरना; किछु ताहू सँ बेसी महत्त्वपूर्ण आगामी सभासँ होयबाक गुंजाइश सदिखन बाँचल रहैत अछि।

      हरि: हर:!!

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      २५ दिसम्बर २०१३

      बिहार सरकार द्वारा घोषित राज्य गीतमें मिथिला और इसकी समृद्ध धरोहरोंका बिहार गीतमें अवहेलना क्यों – खासकर मिथिला वगैर बिहारका विकास संभव नहीं कहनेवाले नितीशजी जब मुख्यमंत्री हैं? कहीं ये अजातशत्रुका मिथिलापर आक्रमण जैसा पुनरावृत्ति तो नहीं? कहीं ये मिथिलाकी पहचान-प्रतीकसे विहीन करनेका कोई पूर्वाग्रह तो नहीं?

      मैथिली संविधानकी अनुसूचीसे स्वीकृत और विश्वकी २६वीं सबसे ज्यादा बोली जानेवाली भाषा है। फिर प्राथमिक विद्यालयोंमें मैथिली माध्यमसे शिक्षा-प्रबंधन नहीं करना कहीं मैथिलीकी अस्तित्व समाप्त करनेके लिये तो नहीं?

      डा. जयकान्त मिश्र के द्वारा दायर याचिका पर उच्चतम न्यायालयने उत्तरी बिहार में मैथिली मातृभाषावालोंके लिये शिक्षा मैथिलीके माध्यमसे करनेके लिये भारतीय संविधानके प्रावधान अनुरूप आदेश दिया है, फिर भी बिहार सरकार इस तरफ अभी तक किसी प्रकारका कदम नहीं उठाकर मैथिली भाषाको समाप्त करना चाह रही है, ऐसा क्यों?

      मिथिला राज्यके लिये किये जा रहे शान्तिपूर्ण माँगोंको संबोधित करनेके लिये न्युनतम तरीका कि समुचित विकास के लिये विशेष आर्थिक पैकेजका घोषणा तक नहीं करना, कहीं ये मिथिलावासियोंको उकसानेके लिये तो नहीं? कहीं उग्र हिंसक आन्दोलन या क्रान्तिके लिये मजबूर करने के लिये तो नहीं?

      आदिकाल से जो मिथिला शिक्षाका प्रमुख केन्द्र रहा है, आज वहींके छात्रोंके लिये समुचित शिक्षा पानेका व्यवस्था अपने क्षेत्रोंमें नहीं है और लोग मजबूर हैं अपने बच्चोंको बाहर भेजकर पढायें जिससे पूँजी पलायन हो रहा है और आर्थिक रूपसे पिछडा इस क्षेत्रका और ज्यादा आर्थिक शोषण हो रहा है, ऐसा क्यों?

      शिक्षाके पुराने विधाओंपर आधुनिक युगोंमें निरन्तर रखनेके लिये किसी प्रकारका संयंत्र विकास न करना – मिथिलाकी धरतीसे फिर विद्यापति, मैत्रेयी, गार्गी, मंडन, अयाची आदि वेत्ता पैदा कैसे होंगे इन विन्दुओंपर राजनैतिक इच्छाशक्तिका न होना – ये सब क्या संकेत कर रहा है?

      लोगोंको अपनी जीविका के लिये समुचित साधन नहीं जूट पाना, कृषिपर निर्भर लोगोंमें आत्मनिर्भरताकी कमी और उद्योगविहीनतासे बेरोजगारी – बेकारी – परिणामस्वरूप लोगोंका यहाँ से पलायन होना और लोक-संस्कृति मिट जानेका गंभीर खतरा उत्पन्न होना – सरकार इन सभी हालातोंपर चुप है, क्या ये मिथिला संस्कृतिको सदा-सदाके लिये समाप्त करनेका षड्यन्त्र तो नहीं?

      वर्षोंसे सिर्फ घोषणा भर करना कि मिथिलाकी पारंपरिक कृषि मछली, मखाना और पानकी खेतीका वैज्ञानिकीकरण किया जायेगा – पर ये सारे अभीतक घोषणा ही बनकर रह गये हैं। ऐसा क्यों?

      विगतके समयमें मुख्यमंत्री द्वारा सेवा यात्रा, अधिकार यात्रा आदि विभिन्न यात्राओंके दौरान क्षेत्रोंके पीछे होनेकी बातको स्वीकार करना, फिर विभिन्न तरहकी विकासके लिये घोषणा भी करना, केन्द्रिय सरकारसे विशेष राज्यका दर्जा माँगना और आंशिक पैकेज भी उठाना – परन्तु मिथिला क्षेत्रके लिये किसी बडे योजनाओंका घोषणा या क्रियान्वयन तक नहीं करना किस मानसिकता का प्रदर्शन कर रहा है?

      जलस्रोत व्यवस्थापन के लिये वही पराने हलचलीमे लादा गया बाँध परियोजना, नहर, पनबिजली, जलभंडारण, आदिकी किसी भी तरहका नया व्यवस्था न हो पाना…. एक कटैया बिजली प्लान्ट छोड दूसरा किसी तरहका पनबिजली योजना नहीं, नहरोंका जाल समुचित नहीं, कोसी पश्चिमी नहरका हालत वर्षोंसे जर्जर उसपर किसी तरहका काम नहीं, पूर्वी नहरका भी हाल खस्ता और कटैया प्लान्ट भी सालमे अक्सर खराब ही रहना… जहाँ एक ओर इसकी क्षमता वृद्धिके लिये सोचा जाना चाहिये था वहाँ रहा-सहा भी गोलमटोल अवस्थामे रहना घोर उपेक्षा नहीं तो और क्या है?

      पर्यटन विकासके लिये हरेक जिलेमें कुछ न कुछ संभावना जीबित है, विद्यमान है। परन्तु बिहार सरकार द्वारा विकास तो दूर विद्यमान वेबसाइटमें ‘मिथिला’ जैसी पौराणिक आकर्षणविन्दुका जिक्र तक नहीं कर पाना, विभिन्न तरहकी आडंबरी योजनाओंका घोषणा तो करना पर उसे आजतक पूरा न कर पाना कहीं इस बात का सूचक तो नहीं कि बिहारमें मिथिलाका समावेश संभव ही नहीं है, अलग राज्य एकमात्र समाधानका उपाय? जानकी पर्यटन सर्किट काफी दिनोंसे लंबित है, इसका क्या प्रगति है?

      केवल मतदाताओंको लुभानेवाली भाषणोंमें ही मिथिलाका विकास, कहीं मिथिलाको आपसमें जोड-तोडकर बताना जैसे कोसी-मिथिला दो संस्कृति आदि, आज भी वोटबैंक के लिये मिथिला जैसी पूर्ण सौहार्द्र की संस्कृतिमें जाति और धर्मके नामपर जोड-तोड करना – ये किस प्रकारका भविष्य निर्माण हो रहा है?

      ऐतिहासिक और पौराणिक महत्त्वोंका विभिन्न स्थान जैसे अहिल्या स्थान, उग्रतारा स्थान, कपिलेश्वर, सौराठ सभागाछी स्थित माधवेश्वर, राजनगरकी पुरानी किला, बलिराजगढ, पुनौराधाम, गिरिजास्थान, गरीबस्थान, सिमरिया, विद्यापति नगर, बिस्फी, देकुलीधाम लगायत सैकडों धार्मिक पर्यटनके विन्दुओंपर सरकारी संरक्षण के लिये किसी तरहका सोचका विकास नहीं, ऐसा क्यों?

      क्रमश:…..

      हरि: हर:!

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      Hello David ZhangSovazky LeeLi BorgesPatrick Nath, John Troy, Chris Almond, Peter FennerRosy Basnet, And all my dear Christian Friends from India and abroad!!

      It is really a great day – I, as a staunch Hindu and with a very strong belief that all religions belong to one and same of Supreme Lord, and wish you a very happy merry Christmas! And, also a very happy new year.

      Today is also an auspicious day in India, the most popular PM ever and that my most favorite leader – the cordial ideal – Atal Bihari Vajpayee‘s Birthday today. Today only a great educationist and one of the high idea Madan Mohan Malveeya was also born in India. And moreover, today only we keep celebrating with our youths to take oath to be as greater and ideal as both these leaders and of course as great sacrificial as Jesus Christ and love the entire being with great amount of compassion. Sorry, I got late in all these things.

      Yes, these days, in our subcontinent, a many people simply wish to one another “Merry Christmas” too – I collectively wish for them here and tag their names with our idol of Radhe Krishna shown in form of great Santacruz.

      All the best and have nice life ahead. Harih Harah!!

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      आइ अटलजीकेँ अपन ओहि पुरान रचना सँ अपने सबहक समक्ष फेर नमन करय चाहैत छी जे मिथिलाकेँ बचेबाक लेल दू काज गंभीर कय देलैन, तेसर बाकिये रहि गेल, ओहो जँ पूरा भऽ जायत तहिया मिथिला ओहिना हँगकँग आ सिंगापुर बनि जायत। कोसी द्वारा विभक्त १९३४ ई सँ मिथिलाक दू भागकेँ भपटियाहीक रेल (पूल तैयार, संचार एखनहु बन्द किछु उपद्रवी राजनीतिज्ञकेर चलते) तथा सडक पूल द्वारा जोडनाय, आ दोसर मैथिलीकेँ संविधानक आठम अनुसूचीमे स्थान देनाय – तेसर जे सपना एखन धरि पूरा होयबा लेल बाकी अछि यानि नदी जोडनाय परियोजना जाहिसँ अमेरिका, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया आ महासागरीय रास्तासँ कलकत्ता बन्दरगाह मार्फत कोसी व गंगा सहि अन्य नदी तक जहाजी मार्गक निर्माण आ जल-परिवहनसँ सेहो मिथिला क्षेत्रक समृद्धि तय होयत।

      अटलजीक दोसराइत मोदी जी सँ आ इलाकाक बेटा कीर्तिजी सहित विभिन्न दलक प्रतिनिधि सबसँ आशा जे एहि महत्त्वपूर्ण बहुआयामी विकासी परियोजना लेल प्रयास जरुर तीव्र करैत सपना पूरा करता।

      हरि: हर:!!

      अटल अहाँके अटलता सऽ बनल भारत के नव ओ रूप,
      काश! एक बेर फेर बनितौं एहि पैघ प्रजातंत्रके अहीं भूप!

      पहिले बेर जखन १३ दिनक राज आयल छल अपनेक हाथ,
      मुश्किल में राखल गेल घेर अपनेकेँ नहि भेटल सभके साथ!

      लेकिन ओहि अपमान के स्मृतिमें रखलक देशक जनता,
      बहुमत सँ अपनेकँ जिता के देलक प्रधानमंत्रीके मान्यता!

      अबिते देरी जखन पोखरण परीक्षण कयलहुँ अपने शानसँ,
      विस्मित फाटल अचरज सँ तकलक सभ बड़का ध्यानसँ!

      रुकलहुँ कहाँ अपने, राखि समेट सभकेँ चलेलहुँ नीक राज,
      घरके हो वा बाहर के हो देलहुँ नव गठबन्धन के नीक राह!

      आइयो राष्ट्र चलि रहल अछि अहींक पथ-प्रदर्शन पर श्रीमान्‌,
      सदिखन सुन्दर बनल रहय आ दहिन रहैथ ओ ईश महान्‌!

      लगले रहल एक शख हमर जे देखितहुँ अपनेकेँ हिया-जी भैर,
      जानि कतय छी अपने कि अछि हाल इ जाने तरसी बेर-बेर!

      बस एक बेर – बस एक बेर, दर्शन दियऽ यौ नेता महान्‌,
      बुझब जे दर्शन भेट गेल – श्री कृष्ण आ श्री राम भगवान्‌!

      अपनेक स्नेही आ प्रशंसक – प्रवीण चौधरी ‘किशोर’

      परमादरणीय अटल बिहारी वाजपेयी जी प्रति समर्पित!

      हरिः हरः!
      Like · · Share · Stop Notifications · December 25, 2011 at 3:16pm

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      किछु प्रवीणक विचार, मिथिला राज्यक माँगक मादे: मोन हो तँ ग्रहण करब, नहि तँ चलैत बनब, लाइक हिट करी तैयो, नहि करी तैयो, हमर जे लेखनी-धारा अछि ओ बहबे करत।

      विचार:

      *मिथिला एक अकाट्य संस्कृति थिकैक – पूर्ण सभ्यता थिकैक। वैश्विक मानव समाजकेँ ठाड्ह करऽमे एक महत्त्वपूर्ण भूमिका सनातनकाल सँ आइ धरि निर्वाह कय रहल छैक। मैथिल कतहु छथि तँ अपना बौद्धिकता आ सहिष्णुताँ सबहक दिल जीतने छथि। विदेही गुणसँ हुनका मान-अपमान बेसी समानेरूपमे बुझाइत छन्हि। जखन सहनशक्ति जबाब देबय लगैत छन्हि तैयो पति वा पिता वा मालिककेँ मान रखैत अपन त्याग स्थापित करैत सीताजेकाँ मायकेर कोरामे सिमैट जाइत छथि, लेकिन फालतूक उग्रता आ नटनी-नाच न अपने नचैत छथि आ ने केकरो नचाबय लेल आतूर होइत छथि। अपवाद सब किछु मे होइत छैक, जेना ‘नटिन खेल’ द्वारा मिथिलाक लोक-परंपरामे एक नटपंथीकेँ देखाओल जाइत छैक, तिनको सबहक अस्तित्व धरि जरुर रहैत छन्हि, लेकिन हुनक उपस्थिति अपवादहि समान।

      *आइ राज्यविहीन मिथिला अपन आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, भौतिक संरचनात्मक वा विभिन्न विकासक पहलूमे परतंत्रताक शिकार छैक। ताहि लेल मिथिला राज्य चाही। मानैत छी।

      *लोक पहिले कोनो माँगकेँ समुचित स्थानतक पहुँचाबय लेल शान्तिपूर्वक काज करैत छैक, जन-जनसँ भेट करैत छैक, लोककेँ बुझाबैत छैक जे हमरा सबकेँ स्वराज्य किऐक चाही। माँगक मजबूती करैत एम्हर बौद्धिक स्तरसँ सेहो विधायकमंडल – विधानमंडल – विधानरक्षक सबसँ सेहो निरन्तर भेटघाँट करैत अपन माँगक औचित्यपर कायम रहैत कहियो असहयोग आन्दोलन, कहियो पदयात्रा, कहियो सत्याग्रह, कहियो सडक जाम… इत्यादिसँ जनभावनाकेँ सबहक सहयोग सँ सरेआम राखल जाइत छैक।

      *अहिंसा सँ हिंसा दिशि जेबाक बाध्यता तखनहि बनैत छैक जखन दमन चरमसीमासँ ऊपर जाइत छैक। वर्तमान दमन प्रत्यक्ष नहि, अप्रत्यक्ष आ तरघूस्कीपूर्ण षड्यन्त्रमूलक छैक। अहाँक अधिकार नहि देब, अहाँक हक छीन लेब, अहाँकेँ बाजहो तक नहि देब, घरसँ निकलय नहि देब…. ई सब भेलैक प्रत्यक्ष दमन जे मिथिलापर केकरो मजाल नहि भेलैक जे लादि देतैक। एतयतँ आपसेमे अहाँकेँ जातिक नामपर, बुद्धिक विभेदपर आ कतेको तरहक सांगठनिक एकताकेँ ध्वस्त करैत बिहारी शासक मिथिलाकेँ बढय-बनयसँ रोकने अछि। तखन कार्यक्रम तऽ ओहेन कैल जाय जे अहिंसक हो, आ जनसरोकारवाला हो। जेना – एक-एक ब्लक (प्रखंड) द्वारा देल जा रहल सरकारी सुविधाक वितरण प्रणाली बेईमानीपूर्ण आ दलाली-प्रथासँ ग्रस्त हेबाक बात सरेआम सबकेँ बुझल अछि, जहिया ओहि बात लेल गामक-गाम लोक उलैट जेबैक तहिया देख लियौक जे लोक स्वराजक असल अर्थ केना बुझय लगैत छैक आ तखन अहाँक रोड जाम कि, पटना जामतक मिथिला सेना चढाइ करैत कब्जा नहि कय लौक तऽ जे कहू!

      *हिंसाक शख केकरा भऽ सकैत अछि? समय कम लगेबैक – फसाद बेसी देखेबैक…! एहि प्रकृतिक नेताजी लोकनि सब दिन सर्टकट तकैत छथिन। नारदगिरी केलासँ – फोटो न्युजपेपर मे छपेलासँ भित्री तंत्र उपनिवेशी शासककेँ अहाँ नहि जीति सकब। जन-सरोकारक विषयमे जखनहि सवाल ठाड्ह करबैक तखनहि दलाल, कमीशनखोर विधायक, भ्रष्ट प्रशासक आ सब चूहा-छुछुन्दर सबहक नजैर खुलत आ मिथिला राज्य केर स्थापना होयत। तहिना भविष्यक शासनक विषयमे जनतामे एक विश्वास उत्पन्न होयत। आ फफरदलालीसँ एगो बस यदि जरैये देबैक तऽ १०० कित्ता मुकदमा लडैत ओहिना हारब जेना पूर्व मे उपनिवेशी शासक अहाँक घरे-घरे मुकदमाबाजीमे फँसबैत पूँजी लूइट अहाँकेँ दरिद्र बना देलक। याद करू अपन पूर्वक समृद्धि आ दरिद्री तक केर सफर।

      हरि: हर:!!

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      भतीजा, नींद भेलौक बढियाँ सऽ? केजरीवालजीकेँ तँ नींद होइतनि, लेकिन कोनो बिन्नी नामक पार्टी मेम्बर शायद कतहु बिका गेल… ओ विद्रोह कय रहल अछि…. आ एहेन-एहेन कतेको रास शिगूफा एहि भारतमे पैछला ६६ वर्षमे खूब देखल लेल भेटल छैक। पढे न!! वेन डायाग्राम द्वारा अपन गोल देखबैत बाकीकेँ गोलसँ बाहर विरोधी पक्षमे देखेबाक बात वर्चुअली सही छैक, लेकिन सैद्धान्तिक तौरपर समर्थककेँ दायित्व बनैत छैक जे ओ अपन समर्थन लेल नैतिकताक कसौटीपर कसैत छैक समर्थन लेनिहारकेँ…. ई सब धियापुताक बुद्धि बिन पढनहियो बुझैत छैक। केजडीवालजी जतेक लोककेँ बेवकूफ बुझैत छथिन, लोक ततेक नहि छैक जे हुनकर गणितसँ बात बुझि जेतैन। भाजपाकेँ जे सबसँ बेसी वोट भेटल छैक, लेकिन बहुमतीय आँकडासँ दूर छैक, पहिले अल्पमतकेर सरकार बनेबाक ओकरे अधिकार छलैक जेकरा ओ सीधा नकाइर देलकैक, कारण गणित ओकरा पक्षमे नहि छैक। अटलजीक १३ दिनका सरकार – नितीशक पहिल बिहारमे सरकार आ कतेको एहेन उदाहरण इतिहास सोझाँमे देखा रहल छैक जे केजडीवालजीक मास्टरीसँ बहुत ऊपर छैक। एखन सीखे बच्चा! हरि: हर:!!

      (हमर एक ‘आप’ समर्थक भतीजाकेँ संबोधित, काल्हिक आपकेर विडियो जाहिमे माइनारिटी सरकारक नव व्याख्या जनताकेँ धूर बनेबाक लेल प्रकाशित कैल गेल अछि…. ताहिपर आधारित।)

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      नेता फूलबा – पार्ट २

      फूलबाक अतिसोची बनबाक कतेको टिप्पणी भेटैत रहलाक बाद ओ विचारलक जे किछु कार्य धरातलपर करहे टा पडत। घोषणा अगवे करैत रहब आ कार्य सँ बचैत रहब वा बहन्ना बनाय हँटैत रहब आब हमर छविकेँ कतहु न कतहु खराब करय लागल अछि। एनामे जँ चुनावपूर्व अपन इमेज सही नहि बना लेब तँ शायद सोचल सपना सोचले रहि जायत। तऽ कि कैल जाय? फूलबा खने आंगूरसँ अगुलका केशमे दुनु दिशिसँ हाथ घुसबैत माथ धरय तँ खने अपन ठुड्ढीकेँ सपरतीबे छूबैत आइडिया निकालय लागल। आँखि मिरय पडि जायतँ नहि चुकैत छल फूलबा कारण मुंगेरीलाल जेकाँ सपनाक सिलसिला ओकर तीव्र सोचन शक्तिमे ततेक जल्दी प्रवेश करय जे बिना आँखि मिरने छूटबे नहि करैक। कतेको बेर गर्दैन झटकय, मुँह मटकाबय आ विभिन्न भाव-भंगिमासँ उकस-पाकस करैत अचानक हँसय लागल। आब योजना दृढतासँ स्थापित भऽ गेल छलैक। ओ तडाक मोबाइल उठौलक आ फोन डिगडिगबय लागल। एक काल, दूइ काल, तीन काल…. करैत-करैत डायरीमे ५० गो मित्रक नाम चढि गेलैक। सबकेँ ढेरिया लेलक। एहि बेर ओ सबकेँ एक्के बात कहैक। “देखू! आब हम मात्र बाजब नहि। हम किछु करबो करब। पहिले जे नहि भेल से आब होयत। फल्लाँ-फल्लाँ जे केलाह ताहिसँ मुद्दा जैड नहि पकडलक। लेकिन आब हम अपन खास डिजाइन्ड ब्लेन्डसँ किछु काज करय लेल जा रहल छी। बस अहाँ सबहक आशीर्वाद आ सिनेह भेटैत रहल तऽ जल्दिये सफलता भेटत।”

      उपरोक्त ५० मित्रक सूचीमेसँ ओ एक खास तरहक लाइकमाइन्डेड (बदमस्ती आ होशियारीक ब्लेन्डपति) मात्र ५ मित्रकेँ मसोमात डीहपर अन्हरझौल शुरु भेला समयमे बजौलक। पाँचो मित्रक बैकग्राउन्ड ओकरा नीकसँ बुझल छलैक। ओ सब पहिले सेहो कोनो न कोनो तरहें कतेको तरहक अभियानमे सक्रिय भूमिका निर्वाह केने छल आ खास ब्लेन्डपति होयबाक चलतबे कतहु पटरी नहि बैसलाक कारणे यैह ताकमे छल जे एक नव गठबंधन निर्माण कैल जाय आ तखन पहाड ढाहबाक एजेन्डा सँ नेतागिरी शुरू कैल जायत। आब नेता फूलबाकेँ अपन टीम निर्माण होइत बुझेलैक। बैसारमे सब अपन-अपन विचार आ दृष्टिकोणसँ एक-दोसरकेँ मस्का मारैत निर्णय कय लेलक जे चिक्का कोना फँगबाक छैक।

      किछु दिनक बाद प्रसिद्ध अण्डीक मंडीसँ निकलल नेता बिन्देसर – अखिल भारतीय मण्डी पार्टीक एकछत्र नेता केर बजरंगी मैदानमे एक जनसभाक आयोजन राखल गेल छलैक। बहुत दिनसँ नेता बिन्देसर सेहो नवयुवक टोलीकेँ समेटैत अपन दलकेँ मजबूती देबाक उपक्रम कय रहल छल। एहि बीच नेता फूलबाकेँ ओ लोकप्रिय मास्टरसाहेब संग भेटघाँट होयबा क्रममे नेता बिन्देसरक पता लागि गेल छलैक। ई तय भऽ गेल छलैक जे फूलबा सेहो अपन ५ गो हसेरी सहित पार्टीमे ज्वाइन करत। फूलबा एकरा लेल पूर्ण तैयारी कय चुकल छल आ बडी धूमधामसँ ओहि जनसभामे ओ सब पार्टी ज्वाइन कय लेलक। चारूकात एकदम ढोल-पिपही सब बाजय लागल। आब हेन्ना मारेंगे – होन्ना मारेंगे…. मंडी राज नहीं मिथिला राज बनायेंगे। आब पहिले सँ बेसी फूँकबाजी चलय लागल। चारूकात एफएम आ सामुदायिक रेडियो पर अखिल भारतीय मंडी पार्टीक नारा गुँजय लागल छल। नेता फूलबाकेँ जल्दिये पार्टी राष्ट्रीय फूँकबाज केर पद समर्पित कय देलकैक। नेता बिन्देसर द्वारा ई पद देशक राजधानीमे बाकायदा सभा करैत फूलबाकेँ फूल-माला-दास्ताना-टोपी सब पहिराबैत ‘राष्ट्रीय फूँकबाज’ नामक पद देलकैक। पदक लोभ केहेन जे फूलबा ई बिसैर गेल ई पूछय लेल जे आखिर ई पदक गरिमा वा संवैधानिक मर्यादा कि छैक। बस ओ एतबी बुझलकैक जे फूँकबाजक काज छैक जे पुरान सब पद्धतिकेँ नकारू आ नव-नव नित्य फूँकैत रहू। वैह डिजाइन पर राज्य भेटत। आब फूलबा नित्य फूँकय लेल नव-नव योजना बनाबय आ अपन खास पाँच मित्रकेँ पहिले सूचित करैत फूँकबाजी शुरु करय।

      नेता बिन्देसर सेहो प्रसन्न भेलाह। आब ओ पुरान तमाम पार्टीक नेता सभकेँ बात-कथासँ तर करैत अपन फूँकबाज फूलबाक बले शीघ्रहि चुनावमे उतरबाक घोषणा कयलन्हि। लेकिन कहबी कोनो बेजाय नहि छैक, चाइल, प्रकृति आ बेमाय ई तिनू संगहि जाय। आखिर काजे छल जे अगबे फूँकू… आ ताहिमे महारत हासिल केने फूलबाक फूँक… सारा संसारमे फूँकघोषक गुंज सुनाइ लागल छल। विरोधी दल सब सेहो नेता बिन्देसरकेँ अफर पर अफर फेकय लागल छल। हमरा संगे गठबन्धन करू तऽ हमरा संगे करू…. लेकिन जे पहिले सऽ परिचित छल ओ निरन्तर प्रहार करय लागल जे एहि फूकास्टर सबसँ किछु नहि होयत। एकता करू, संघमे शक्ति होइत छैक। पुरान-नव सब एक बनू। लेकिन फूकास्टर सब ओहि तरहक आह्वानकेँ कतेको रास फूँकबाजीक झोंकमे उडबैत रहल। दोसरकेँ सिखबयवाला फूकास्टर मुदा बेसी दिन एहि प्रवृत्तिकेँ निर्वाह नहि कय सकल आ शीघ्रहि कतेको फूँकल बात पूरा नहि भेलापर लोकक आलोचनाकेँ वर्दाश्त नहि कय सकबाक कारणे आपसी विवादमे फँसि गेल अखिल भारतीय मंडी पार्टी! नेता बिन्देसर अपन सूझबूझसँ फूलबाकेँ किनार तऽ लगेलक, धरि फूलबा आब नव दलक घोषणाक तैयारीमे लागि गेल अछि। ब्लेन्डपतिक गठबंधनसँ नव दलक तैयारी पूर्ण अछि, लेकिन जेना टमटमकेर घोडाक आँखिपर पट्टा लागल रहबाक कारणे ओ चारूकात नहि देखि बस बाटपर चलबाक लेल बाध्य रहैत अछि, तहिना फूँकबाजी लेल प्रतिबद्ध नव योजनामे नेता फूलचन्द्र शर्मा श्रोत्रिय धरि किछु संरचनात्मक दृष्टिकोण जोडि नया पैंतराबाजीसँ मिथिलाक एक सऽ एक हस्ती सबहक समक्ष अपन नीति आ नियमकेर मार्केटिंग करैत आगामी किछुए दिनमे नव क्रान्तिक आवाज लगाबय लागल अछि।

      क्रमश:……

      ऐगला चुनाव नजदीक अबैत-अबैत फूलबाक गतिविधि सब बढतैक। एहिसँ आर किछु सकारात्मक परिवर्तन होइ नहि होइ, लेकिन आजुक कलियुगी माहौलमे फूँकबाजीक सार्थकता बढतैक आ मुद्दाक पोषण लेल सेहो जरुरी छैक। नेता फूलबाक नव योजना लेल पाठक सहित लेखककेर तरफसँ शुभकामना।

      हरि: हर:!!

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      अपन निम्नलिखित लेख विश्वकेर महान अभिनेता सह भारतीय पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी केँ चरणमे समर्पित:

      आइ देखलहु नयन भरि यौ नेता
      एहि जन्मके बनलहुँ अभिनेता!!

      बेर-बेर नमन – वृद्धापनमे देखि कनेक आँखि भैर गेल मुदा – ईश्वर सकुशल राखैथ आ अपने खूब दीर्घायू बनी!

      हरि: हर:!!

      समर्पित लेख:

      मैथिलीक सम्मान संविधानमे स्थापित: योगदान

      भारत भरिक समस्त साहित्यसेवी ओ संस्कृति-संरक्षण लेल कार्यरत संस्था द्वारा कैल गेल भारत सरकारसँ बेर-बेर अनुरोध जे मैथिली एक पूर्ण भाषा थीक आ एकरा भारतीय संविधानक आठम अनुसूचीमे स्थान देल जाय – यैह प्रथम योगदानस्वरूप मानल जाइछ।

      एहेन माँग कोनो हालहि उठायल यानि कोनो २००० ई. या आसपास नहि वरन् बहुत पहिनहि सँ कैल जेबाक व्योरा मैथिली भाषाक पत्र-पत्रिकाकेर शुरुआत यानि लगभग १९०५ ई. सँ जानकारी मे अबैत रहल अछि। कतेको रास विद्वतापूर्ण आ वांछित कार्य अंग्रेज विद्वान् सहित अनेको मैथिल महामहोपाध्याय विद्वत् विभूति जे १९म शदीमे छलाह तिनकर सबहक विलक्षण सहकार्य सँ भेल अछि। ब्रिटिश प्रशासक व शोधकर्ता बीच समन्वयसँ मैथिली साहित्यपर कतेको तरहक शोधपूर्ण कार्य करैत शोधपत्र आदि सेहो तैयार करैत एकरा स्थापित भाषा मानल गेल अछि।

      १८८१ ई. केर जनगणनासँ मैथिली भाषीक जनसंख्या प्रकाशित करैत अन्तमे १८९१, १९०१ केर जनसंख्याक आधारहिपर १९०३ केर भारतीय भाषिक सर्वेक्षणमे जार्ज ए ग्रियर्सन द्वारा मैथिली भाषाभाषी क्षेत्रक रूपमे पूर्ण समीक्षात्मक प्रतिवेदन प्रकाशित कैल गेल दस्तावेज भेटैत अछि। १९०५ ई. जयपुरसँ मैथिलीमे पत्र-पत्रिका प्रकाशन आ ताहि माध्यमे मैथिलीकेँ स्थापित करबाक माँगकेँ कथमपि नकारल नहि जा सकैत छैक। अनेको भारतीय काँग्रेस अधिवेशनमे भाषाक आधारपर प्रान्त गठन करबाक बहस १९२० ई. सँ आ ताहि सन्दर्भ सेहो मैथिलीक चर्चा आ अधिवेशन प्रतिनिधि अनेको मैथिल विद्वान् जाहिमे एक प्रमुख डा. अमरनाथ झा – हिनका सबहक मत संग्रह, बेर-बेर मैथिलीपर हिन्दीक उपभाषा हेबाक कुटिल राजनीतिक षड्यन्त्र, तेकर निदान करैत १९४० ई. मे उठि गेल मिथिला राज्यक माँग, फेर १९४७ ई. सँ १९५६ धरि संसदकेर विभिन्न निकायमे मैथिली आ मिथिला सेहो एक विषय मुख्य रहबाक इतिहास भेटैत छैक।

      अखिल भारतीय मैथिल महासभा, चेतना समिति, विभिन्न विश्वविद्यालयस्तरीय कतेको भाषासँ जुडल निकाय आदि द्वारा हरेक स्तरसँ मैथिली सहित मिथिलाकेँ संविधानमे स्थापित करबाक माँग शुरु भऽ चुकल छल। एक सँ बढिकय एक नेतृत्वकर्ता – डा. लक्ष्मण झा, डा. काञ्चीनाथ झा किरण, बाबु जानकीनन्दन सिंह आ कतेको रास छूपल नाम जिनका उल्लेख करबाक लेल हमर अध्ययन कमजोर पडि रहल अछि, हिनका सबकेँ नहि बिसरल जा सकैत अछि। इतिहास लिखैत समस्त मिथिलावासीकेँ एहि सबपर जानकारी देबाक काज एखनहु बाकिये बुझैत अछि। एहि समस्त प्रयास – मैथिलीक पढाइ करौनिहार-करनिहार आ कतेको साहित्यसेवी-मैथिलीसेवी व्यक्ति व संस्था सबहक निरंतर संघर्षसँ पहिले साहित्य अकादमी द्वारा १९६५ ई. मे मैथिलीकेँ मान्यता आ फेर बिहारमे मैथिली अकादमीक स्थापना आ अन्तमे यानि २००३ ई. मे फेरो किछु रास कुटिल लोकक कुचाइल रहितो लगभग दुइ-तिहाइ बहुमतोसँ ऊपरक प्रतिनिधि सभा द्वारा स्वीकृति भेटबाक प्रमाण उपलब्ध अछि।

      १९९० ई. बाद दिल्लीमे कार्यरत कतेको कर्मठ व्यक्ति जिनक नेतृत्वमे रहल कतेको रास संस्था तिनका लोकनिक निरंतर अभियान संचालनसँ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधनक सरकार बनलापर अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्रीत्वकालमे पुरान सब बातकेँ समेटैत एक ज्ञापन बैद्यनाथ चौधरी बैजुकेर नेतृत्वमे देल जेबाक प्रकरण अबैछ। तहिना डा. सी. पी. ठाकुर, रामचन्द्र पासवान, राज नारायण झा सहित दर्जनो अभियानी द्वारा निरंतर धरना-धावा-अनुपालन-अनुशरणक विशाल इतिहास एहि लेल नकारल नहि जा सकैत अछि। डा. भुवनेश्वर गुरमैता जे पंजाब विश्वविद्यालमे कुलपति छलाह, हिन्दी साहित्यक प्रकाण्ड हस्ताक्षर रहैत अपन नजदीकी स्रोत के. सी. सुदर्शन केर सहायता सेहो एहि सपनाकेँ साकार करबामे लेने छलाह। काँग्रेस पार्टीक प्रतिपक्षक नेता सहित कम्युनिस्ट पार्टी व अन्य समस्त राजनैतिक इच्छाशक्तिकेँ झकझकेनिहार भारतीय संसदमे मिथिलाक हिरोपुत्र भोगेन्द्र झा केर योगदान कथमपि नहि बिसरल जा सकैत अछि।

      डा. जयकान्त मिश्र केँ आधुनिक मिथिला-मैथिली आन्दोलनक प्रणेता मानल जाइछ। अपन बौद्धिक योगदान सँ भारतीय संविधानमे मिथिलाकेँ स्थापित करबा लेल १९८० मे कार्य शुरु केने छलाह। विभिन्न विश्वविद्यालयसँ जुडल आ एक खानदानी विद्वान् परिवारक पुत्र एहि महत्त्वपूर्ण जिम्मेवारीक निर्वहन बहुत गंभीरतापूर्ण ढंग सँ कयलन्हि। पौराणिक, ऐतिहासिक आधार सबहक संग्रह आ मुद्दा स्थापित करबाक लेल न्यायाधिकरणक सदुपयोग – हरेक बाटसँ अपन प्रतिबद्ध सेवा करैत मैथिली सहित मिथिलाकेँ स्थापित कयलन्हि। समस्त महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षरक देनसँ १९९२ ई. मे शुरु कैल गेल छल अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद् जे तात्कालीन २० महत्त्वपूर्ण संस्थाक एकमुष्ट नेतृत्वकारी संघरूपमे मिथिला-मैथिली लेल स्थापित भेल छल। एकर नेतृत्व डा. धनाकर ठाकुर, डा. कमल कान्त झा, डा. सत्यनारायण महतो सहित अनेको स्रष्टा करैत आबि रहल छथि।

      बाहरसँ बौद्धिक योगदान आ दिल्लीक धरातलपर प्रत्यक्ष अभियानीक योगदानक निरंतरता रखैत बहुत युक्तिपूर्वक मैथिलीकेँ संविधानक आठम अनुसूचीमे स्थान दियाओल गेल अछि। आइयो, चलैत-फिरैत कतेको मैथिली अभियानी भेटैत छथि जे अपन योगदान देबाक – अपन प्रयाससँ मैथिलीकेँ स्थान दियेबाक बात करैत छथि। लेकिन जुनि बिसरू, मैथिली एहि स्थान योग्य छल, एकर गहिंर साहित्यिक सागर छैक, हजार वर्षसँ ऊपरक कतेको पाण्डुलिपि, शिलालेख, ताम्रपत्र, लिपि, व्याकरण, शब्दकोष आ विशाल भाषिक तकनीक – संसारक एक समृद्ध भाषारूपमे एकरा स्थापित केने छैक। ताहि दमखमपर ई अपन जगह बनौलक। तहिना मिथिलामे सेहो दम-खम छैक आ जरुर ई आइ-न-काल्हि भारतीय संविधानमे फूलित-फलित हेब्बे टा करत। जनसंघर्ष होइ नहि होइ, लेकिन मिथिलाकेँ सम्मानपर कियो अंकुश नहि लगा सकैत छैक।

      हरि: हर:!!

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      मैथिलीक सम्मान संविधानमे स्थापित: योगदान     भारत भरिक समस्त साहित्यसेवी ओ संस्कृति-संरक्षण लेल कार्यरत संस्था द्वारा कैल गेल भारत सरकारसँ बेर-बेर अनुरोध जे मैथिली एक पूर्ण भाषा थीक आ एकरा भारतीय संविधानक आठम अनुसूचीमे स्थान देल जाय – यैह प्रथम योगदानस्वरूप मानल जाइछ।      एहेन माँग कोनो हालहि उठायल यानि कोनो २००० ई. या आसपास नहि वरन् बहुत पहिनहि …

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      २४ दिसम्बर २०१३

      ई भजन स्मृतिमे लाउ, बाबा क्षमा करैथ:

      रूसल भंगिया हमार – मनाय दऽ गौरी शिव जोगिया केँ!
      शिव जोगियाकेँ हो – शिव भंगियाकेँ!!
      रुसल भंगिया हमरा – मनाय दऽ गौरी शिव जोगिया केँ!!

      खोआ मलीदा शिवकेँ मनहुँ न भावैन, 
      भाँग-धतूरा देखि मन ललचावैन,
      हो….
      खोआ…
      भाँग….

      भाँग-धतूरा कहाँ पायब…. होऽऽऽ
      भाँग-धतूरा कहाँ पायब!!
      मनाय दऽ गौरी शिव-जोगियाकेँ!
      रुसल…..

      कोठा ओ सोफा शिवकेँ मनहुँ न भावैन
      जंगल पहाड बीच मन तरसाबैन!
      कोठा….
      जंगल…

      जंगल-पहाड कहाँ पायब…. होऽऽऽऽ
      जंगल-पहाड कहाँ पायब!!
      मनाय दऽ गौरी शिव-जोगियाकेँ!!
      रुसल….

      शाला-दोशाला शिवकेँ मनहुँ न भावैन
      बाघ केर छाला देखि मन ललचाबैन!
      शाला…
      बाघ…

      बाघक छाला कहाँ पायब…. होऽऽऽऽ
      बाघक छाला कहाँ पायब!!
      मनाय दऽ गौरी शिव-जोगियाकेँ!!
      रुसल….

      हरि: हर:!!

      **

      मजा ले लो भैया – भारतमे अब क्रिकेट मैच फिक्सिंग से क्रिकेटका क्रेज थोडा कम हो गया था, अब पोलिटिक्समे भी मैच फिक्सिंगसे नया इतिहास बनने जा रहा है। ‘माइनारिटी गवर्नमेन्ट’ – आउटसाइड सपोर्टर – जिसपर लाठी भाँजेंगे और फिर भी सरकार चलायेंगे – क्योंकि वो लाठी खाते हुए भी हमको परमाधिपति न्यायकर्ता मानकर अपनी खलनायकीके बदले मार खाते रहेंगे, शो चलता रहेगा…. यदि किसी सुरतमे ये नया माइनारिटी गवर्नमेन्ट बनानेकी शो बन्द करनेकी किसी ने जुर्रत की तो फिर आम आदमी तो उनको सजा देंगे ही। अब चिन्ता किस बातकी है। अब तो देशमें भी इसी सूत्रपर आइपीएल टुर्नामेन्ट सुप्रसिद्ध ललित मोदीको किनारे लगाकर बहुत सारे लोग कमिश्नर बनकर खेल दिखायेंगे। नया ट्रेन्ड जो बन रहा है। हम आम आदमीको तो बस मजा ही मजा लेना है – आखिर हमारे लिये आम आदमी पार्टी जो है – आप!!  सीखो! भाजपावालों! बडी बतिया रहे थे – जिम्मेवारीसे भाग रहा है… और अब बना रहा है तो काँग्रेसकी बी टीम कहकर मैच फिक्सींग का मजा आम आदमीमें किरकिरा कर रहे थे… आम आदमी तुमलोगोंको वोट नहीं किया है…. जरुर तुमलोगोंने कोरपोरेट हाउसेज के कर्मचारियों और खरीदे हुए वोटरोंसे वोट लेकर दिल्ली प्रदेशमें नंबर १ पार्टी बन गये। बेवकूफों! ऐसा चाल-चलन और गोटी फिटर बनो कि ‘माइनारिटी सरकार’ बनाकर सारे दलोंको विपक्षमें बैठाना और ‘आप’की तरह भ्रष्टाचारियोंपर डंडा चलाना।

      एक तूँ ही धनवान है गोरी…. बाकी सब कंगाल!!

      मान गये सचमें केजरीवालजीने विलक्षण बुद्धिसे भारतमें राजनीतिका एक नया रोचक खेल प्रारंभ करके दिग्गजोंको धत्ता बताया है। ग्रेट! काश! आपकी इनिंग लंबा चले। वैसे फूकनेसे बला नहीं टला करता, बुजुर्गोंसे सुनते आये हैं, लेकिन आप रातको आरामसे सो सको, मैं ईश्वरसे यही प्रार्थना करूँगा। 

      मेरा भतीजा भी आप के ही तरह लोगोंसे विडियो दिखा रहा है, आज ये भी आराम से सोयेगा। क्योंकि आपने ये विडियो रिलीज करके इसको वीजेपीवालोंके दंशसे दूर जो किया है। नमन है! भारतमें आप ही के तरह से बुद्धिमान राजनेताओंसे अब कुछ होगा।

      हरि: हर:!!

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      हमरा हिसाबे ‘प्राकृतिक न्याय’ जेकरा अंग्रेजीमे नेचुरल जस्टिस कहल जाइत छैक आ भाग्यसँ एहि न्याय दर्शनक उद्भेदन मिथिलाक महान ऋषि गौतम द्वारा भेल छैक – तेकर अनुकरण मिथिलाक रग-रगमे आइयो छैक। गडबड होइत छैक जखन आधा पुरान, आधा नव…. यू नो…. मनमानी व्याख्या आ बेईमानीपूर्ण अनुसरण…. ई कोनो भी देशक गरिमाकेँ हरण करैत छैक। भारतीय संविधानमे एहेन कतेको रास अनुसूची ओ अधिनियम छैक जेकर प्रासंगिकता नहियो रहैत अनेरे भरियेने छैक। लेकिन व्यवहारिक जीवनमे ओकरा विवाद तय करबाक लेल अन्तिम मानल जाइत छैक। आइयो जँ कोनो बेटी ई चाहय जे हम पैतृक संपत्तिमे हिस्सा लेब तऽ ओ पितासँ माँग कय सकैत अछि आ माता-पिता-भाइ सब कियो ओकरा अधिकार प्रदान कय सकैत छैक। ई तऽ परिवारक अपन नैतिकतापर छैक। हरि: हर:!!

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      २३ दिसम्बर २०१३

      1. Why Bihar has ignored Mithila and its rich heritage to be included in recent Bihar Geet officially declared by Government of Bihar – especially during the leadership of Nitish Jee? Is it repeat of Ajaatshatru’s attack on Mithila? Is it biases against making Mithila deprived of any identity in coming future?

      2. Maithili is well recognized language and 26th in the list of world languages by number of speaking this language. Why then end the era of education in primary schools for Maithili?

      3. Even the Supreme Court of India rejected the appeal of Government of Bihar against verdict of Patna High Court that in favor of Maithili – then why no right to education in Maithili medium and why such contempt of the Supreme Court and High Courts of Justices? What does this attitude prove of Bihar for Maithili and Mithila?

      4. It may be true that people demanding a separate state of Mithila have been following the decency and seeking resolution through peaceful demonstration at Delhi and otherwise but not so much in Mithila – however, the adamant attitude being shown by responsible governments of state and center for not declaring special development packages of Mithila region; does it indicate the provocation by states for inviting a blasting approach from Maithils which may also contain several types of damaging and blood shedding protests, movements, blockades, etc.?

      5. Mithila since time eternal is known as hub of education – why it is thrown to be such poor that Maithil teachers are migrating to other parts of nation and world? Why can’t government think of renewing that culture within Mithila alone? Can the Videha – the Yajnavalkya – the Gaargi – the Maittreyi – the Mandan – the Ayachi – the Bharati – the Vidyapati – the all famous entities who not only contributed for Mithila but for entire world not be accommodated in model universities of Mithila alone?? The one Lalit Narayan Mithila University got olden and there are no additional world class standards added here – no international faculties – the baccalaureate – or even the Tantra Vidya, Jyotish Vidya, Arthashastra, Raajneetishastra, Nyayshastra and several higher scriptural based fundamentals could establish in Mithila’s institutions to attract the world communities to come here and learn those things?? Why no care on these values really?? Why such dishonesty?? Why not serious feasibility studies that would promote more people of Mithila to know the value of their ancient highest culture and traditions rather than wasting brains in putting odd labors in garments and factories of NCR?

      6. There are talks and gossips going for fisheries and Makhana farming will be industrialized… what is the progress?

      7. In recent times, honorable CM – Bihar visited core district of Mithila – Madhubani and declared several projects – quite worthy and precious projects – indeed a welcome step from Government of Bihar is done… why not the same processes continue for all the districts in Mithila region having miraculous and glorious potentials to flourish?

      I believe, I have put up these questions both for introspection of the government of Bihar and the entrepreneurs of Mithila region. I have serious complains and dissatisfaction with self-developing attitude of Maithils who corner themselves from participating in above process and feel happy with little they earn from the breads of others by exchanging such a precious intellectuality and the worthy inner capabilities elsewhere. They must also realize their duties and rights for Mithila. I believe, Mithila still lives just because a very few people in Mithila still think in similar direction and they do too. Let people not reach to the conclusion – Love Mithila or Leave Mithila type slogans and action. Let tolerance still remain within limits. Once these tolerances are crossed the borders, I believe, there will be a very serious demand of what Dr. Laxman Jha raised ever. Let things get controlled in time. Let it not be so late – please. Thanks.

      Harih Harah!

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      हमरा हिसाबे एक महत्त्वपूर्ण जानकारी खासरूपसँ अहाँकेँ देबाक इच्छा ई होइत अछि जे प्रशासकीय कामकाज, न्याय सम्बन्धी कामकाज आ विधान सम्बन्धी कामकाज – एहि सबहक एक दायरा छैक। व्यवहारिकता सेहो बड पैघ विषय होइत छैक। अहाँ समान प्रशासकीय सेवामे अपन कैरियर निर्माण करयवाला प्रतियोगी लेल ई बेसी महत्त्वपूर्ण होइत छैक जे झर-झंझैटकेँ कम करैत जीवनकेँ सुगम बनेबाक काज करय पडत… ताहि हिसाबे ई कतेक समुचित हेतैक जे अहाँक बहिन अपन सासूर सँ खेती करय लेल अहाँक गाम औती, आ अहाँ खेती करय लेल कनियाक भागक सम्पत्तिपर सासूर जेबैक? एहिपर व्यवस्थापन खर्चाक भार कतेक पार लागय योग्य हेतैक? या, जँ अहाँ अपन सासूरक हिस्सा यानि पत्नीक भागक सम्पत्ति बेचबैक तऽ ओकर मूल्य देनिहार परिवारक लोक जँ नहि भेटत तँ केकरा हाथे बेचबैक आ ताहिसँ जे खेतक आइर जे पहिलेसँ छोट-छोट बनि गेल छैक से आरो टुकडी-टुकडीमे बँटतैक आ उत्पादकता मारल जेतैक तेकरा क्षतिपूर्ति केना कैल जेतैक? आ कि फेर बिनोबा भावे औता आ भूदान आन्दोलन चलौता? कि कहैत छी अहाँ? मस्तीमे अपन बटोरल अनुभवक आधारपर कहू। आ दोसर, जे वाद ओ विवाद तय छैक जे हेबे करतैक… तेकरा सेहो केनाक सम्हारबैक? हरि: हर:!!

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      केकरो खट्टा – केकरो मीठ
      लागैत रहतय बैसल ढीठ!काज करनिहार करबे करतय
      चोपहा विरोधी दुसबे करतयछोडह भैया – देखहक काज
      तही सऽ बचतय मिथिला राज
      तही सऽ रहतय अपनो लाज!!
      हरि: हर:!!
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      कोनो भी समाजक अपन एक व्यवहार होइत छैक – देखाउ जे कतबू घटलमे किऐक नहि केकरो बेटी बियाहल गेल हो, लेकिन ओ अपन माता-पिताक संपत्तिसँ एक छोटो अंश नहि छूबैत छैक। दोखतरीक संपत्तिकेँ अशुद्ध मानल गेलैक अछि। तेकर कारण छैक – केकरो अर्जल संपत्तिमे ओकर कर्ता यानि उत्तराधिकारी जेकरा लग क्रिया-कर्म करबाक कर्मकाण्डी अधिकार रहैत छैक ओकरे वैदिक रूपमे सही मानल गेलैक अछि। जाहि माता-पिताक बेटी वाहेक आन कोनो संतान नहि, निस्सन्देह हुनक संपत्तिकेँ बेटी सबहक अधिकार प्राप्त होइत छैक आ बेटी सब फेर क्रियापुत्र यानि कर्ता जे भातीज वा दियादमे सँ कियो बनतैक तिनका एक अंश सेहो दैत छथिन, जँ ओ स्वीकार करता तँ। तहिना हमरा लोकनि कोनो उदाहरण मे नहि देखलहुँ जे कानून अनुसार कियो बेटी माँगय लेल अयली, वा पुतोहुक केसमे खुद माँगयलेल पुतोहुकेँ पठेलहुँ। हरि: हर:!!

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      उमाजी, जितेशजी अपन विचार राखि रहल छथि…. हमहुँ – अहाँ सयह कय रहल छी। नियम सरकार बनेलकैक आ एकरा व्यवहारिकतामे प्रवेश दियेबामे जे झमेला आ दुष्प्रभाव छैक – ओ भाइ-बहिनमे कहियो सौहार्द्रता शायदे आबय देतैक। आ जतय इच्छा देबाक छैक ओतय तऽ देले जाइत छैक। भाइ-भाइकेर पुरखौली संपत्तिक झगडासँ कतेको कित्ता केस न्यायालयमे लम्बित छैक, आब जँ बेटी-जमाय (बहिन-बहिनोइ) आ नहि बिसरू तही मात्रामे अपन पत्नीक हक-अधिकार लेबा लेल कतेक परिवार विवादमे पडतैक कनी सोचियौक। लेकिन कानून बनल छैक, ताहि लेल कियो केकरो नहि रोकि सकैत छैक। हरि: हर:!!

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      ओ चाहे ‘आप’केर बडबोलापन हो या शोधपूर्ण तथ्यगत आधारपर राखल बात – वादा तो वादा होता है, वादा किया है तो निभाना ही पडेगा, वरना जनमानसमें बनी-बनायी छवि बिगडनेका और जैसा कि पहले से होता आया है, एक का विकल्प दूसरा न होना, दूसरा विकल्प बननेके बाद तीसरा बनानेकी जुगतमें वर्षों लग रहे हैं पर सफलता हाथ लगनेके बजाय क्षेत्रीय दलोंका भरमार और लगभग १९९० के बादसे बहुमतकी सरकार न बनकर अल्पमतवाली दलोंसे गठबंधनकी जुगार करके काम चलानेवाली बात…. राष्ट्रक भलाई तऽ येन-केन-प्रकारेण भइये रहल छैक, लेकिन दुष्परिणाम जे ‘स्वराज’क जगह ‘खिचडीराज’ चलि रहल छैक।

      वर्तमान समीक्षा – बिबिसीपर बहुत उमदा लागल। हमर भाजपाई मित्र – किछु खास नजदीकी मैथिल विद्वान् सबकेँ एहि दिशामे ध्यानाकर्षण करय चाहब जे कम सऽ कम अहाँ सबकेँ छद्म-क्षूद्र बात नव समीकरणपर बाजब शोभा नहि दैत अछि। अहाँ जँ कऽ सकैत छी तऽ समीक्षा करू जे आखिर ‘आप आ काँग्रेस’ बीच घोषणापत्रक वादा अनुरूप कतेक दिन दियादी चलत। एहि गठबंधनसँ कय गो वादा पूरा होयत। पैछला सरकारक कार्यशैलीपर कतेक निष्पक्ष जाँच बैसत। अनेको फैसला जे पूर्वमे लेल गेल अछि आ ‘आप’ द्वारा वादा कैल गेल अछि दिल्लीवासीकेँ ताहिमे बिजली, पाइन, शिक्षा, जनता-फ्लैट (झूग्गीसँ बाहर निकालि नव बसोबास), गैरकानूनी कालोनीकेँ नियमित करबाक आ विभिन्न अन्य कार्य कोन अलादीनक जादूइ छडीक संग कैल जायत। एखन फिल्ममे सस्पेन्स कायम छैक, थ्रील बाकी छैक। एखन हिरो पर्दापर उतरबे केलैक अछि, २-४ रील घूमतैक, देशकेँ पता चलतैक, अहुँ सबकेँ हिरोपनीक झमक-छमकसँ खूब अनुभव भेटत… मानैत छी जे करोडोंक लगानी कने दिन लेल हवामे लटैक गेल अछि…. लेकिन जनता लेल एक नव आशा जागल छैक। ताहि घडी इन्टरवल तक फिल्म धैर्यपूर्वक देखू।

      हरि: हर:!!

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      गारंटी इस सेन्स मे प्यारे मैथिल भाईयों-बहनों कि तुम्हें बीते कुछ दशकोंमें तुम्हारे आत्मगौरवकी गाथाओंसे बिल्कुल दूर रखा गया है उन सबोंका वापसी हम करा सकेंगे ऐसा मेरा आत्मविश्वास कह रहा है।

      एक छोटा सा उदाहरण देना चाहूँगा – तुम्हारे यहाँ राजनेताओंका काम क्या है? बस तुम्हें बाँटना – ये कहकर कि वो ऊँचा तुम नीचे जात का…. वो सामंती तुम दास…. वो शोषण करनेवाला तुम शासित….. अब तुम अपने पैरोंपर खडे हो जाओ, हम तुम्हारे जातिकी तरह पिछडे वर्गोंसे ही आते हैं, तुम हमें चूनो और जीतनेके बाद सदनमें तुम्हारे लिये आवाज उठायेंगे…. कोई ऊँची जातवाले बोल नहीं सकते क्योंकि शासन-प्रशासन सारे अपनी मुट्ठीमें होगा। थानाका दरोगा हो या प्रखंडका अधिकारी या जिलाका कलक्टर हो या एसपी, सारे लोगोंपर अपना ही हुकुमत चलेगा। तुमलोग खूलकर जी पाओगे। तुम्हें कोई आँख तक नहीं दिखा सकते। ….

      इतना ही तो बोलना है आज के नेताओंका – हाँ काम की बातें भी कुछ करते हैं…. तुम्हारे टोलेपर चापाकल गडबा देंगे, बोरिंग भी सरकारी योजना से दिलवा देंगे, सस्ता खाद-बीज, किरासन तेल, चीनी, गेँहुँ, चावल और जीनेका हर सामान तुम्हारे लिये सस्ते दरोंका कोटापर भिजबा देंगे। और हाँ, सरकारी सुविधायें मिले न मिले…. हमारा दरबाजा तो तुम्हारे लिये सदा-सदाके लिये खुला मिलेगा। गरीबोंकी बेटीका शादी हो तो, किसी तरहका विपत्तिमें हम तुम्हारे साथ रहेंगे। बस भूलकर भी इन ऊँचे जातियोंके लोगोंपर भरोसा न करना और कभी उनको अपना जन-प्रतिनिधि मत चुनना। मुस्लिम हो, तुम अल्पसंख्यक हो, तुम्हारी नजदीकी हम छोटे जातियोंके लोगोंके साथ ज्यादा है। वे ऊँचे हवेलीवाले तुम्हारे दादा-परदादाओंपर जुल्मसे हुकुमत चलाये। अब तो मौका तुम्हारे हाथोंमें है, वो पूजीपतिवाले हैं, हम पिछडे तबके के लोग हैं। …..

      फिर अन्तिममे कौमकी ताकत भी समझाते हैं – वो बुद्धिमान जातिके हैं, तुमलोगोंमें वैसा मजबूत बौद्धिकता नहीं है… इसीलिये लाठी ही सबकुछ है, इसका पूजा करो… एकको थोडासा खरोंच भी लगे तो सारे एकसाथ टूट पडो। मारकाट – खून-खच्चर सब कर दो। पीछेसे हमारे लोगोंका साथ तुम्हें मिलेगा ही, थाना, जिला सब अपना होगा। बेफिक्र होकर राज करो। किसी भी तरह से दिक्कत हो तो मेरे लोगोंसे सम्पर्कमें बने रहना।

      और अन्तमें – ठीक है, हम तुम्हारी ओरसे आश्वस्त हैं। वो तुम्हें खरीदने आ सकते हैं, पर बिकना मत। मेरे लोगोंने भी पूरा तैयारी कर रखा है – बम, बारुद, गोली, लाठी, भाला, गडाँस, फरसा….. महाभारत हो तो जमकर होना है। बदलना नहीं, वरना खुदके लोगोंमें भी दो-चार कटे तो राजनीति और मुहब्बतमें सब कुछ जायज होनेकी बातें तो तुम जानते ही हो। फल्लम्माका बेटा पिछले बार पाला बदल लिया था, उसकी बोटी नोचबाकर कुत्तोंको खिला डाला हमने। हम नहीं चाहते कि ऐसा वार हमें तुमलोगोंपर करना पडे। ध्यान रखना, हम भी ध्यान रखेंगे। (अपने लोगोंसे….) रे बुधिया! ऊ पन्नीवाला १० गो बोरा इन लोगोंके लिये गिरा दो। और चुडा २-४ क्विन्टल दे देना घरवालोंके लिये। कोटापर डीलरसे कह देना मेरे नाम से २-२ किलो चीनी और ५-५ लीटर किरासन तेल सारे परिवारोंको दे-दे। और मैनजनजी…. आप इधर आइये। (चलते-चलते बगलमें बुलाते हैं, कानमें कुछ समझाते हैं….) समझ गये न? ध्यान रखना है। जीतनेके बाद पटना आइयेगा। सब हो जायेगा। अच्छा भाईयों-बहनों! अल्लाह हाफिज! ध्यान रखना!

      फिर ५ मिनट रुकते हुए…. कुछ बच्चोंको प्यार करते हुए…. अरे इरफान! इन बच्चोंको थोडा दूर गाडीमे घूमा लाओ!

      और नेताजी चल देते हैं दूसरे गाँवोंकी ओर…. लोग भौंचक्क बस उनकी कार्यशैली देख मंत्रमुग्ध, कुछ डरा-सहमा भी, आपसमे सारे लोग चर्चा करने लगते हैं और मन ही मन निर्णय ले लेते हैं कि वोट तो नेताजीको ही देना होगा।

      आज देश स्वतंत्र हुए ६ दशक से ऊपर हो गया…. नेताजी चुनाते रहे… बडे हुए या छोटे…. सबोंने अपने तरीके से समाजको बाँटा। मौलिक विकाससे नितान्त दूर, बस कन्हा कुकूर को माँड पिलाकर खुश करना ही उनके फितरतमे रहा। भारतकी राजनीति लोटिया डूबा दी। वो तो प्रशासिकाको भी अपने तरीकेसे भ्रष्ट बनाकर देशकी खजानाके साथ खिलवाड किए। बाकी क्या?

      तो दोस्तों! आओ, हमने व्यवस्था किया है कि आपको नेता बनायें। आप अपनी यथार्थ विकासके साथ अपना स्वराज्य स्थापित करो, हम यही चाहते हैं। राष्ट्रकी प्रगति हर व्यक्तिकी विकासके ईंटपर निर्भर करता है, लेकिन सामुदायिक हित, लोक-संस्कृति, रोजगारसम्पन्नता और क्षेत्रका विकास समग्र रूपसे सोचनेपर ही असल काम बनता है।

      हरि: हर:!!

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      हँसी है होठोंपर दिल तो जल रहा है
      बधैया गा रहा हूँ मन तो गल रहा है

      देखते चलो, क्या होता है इस जहाँ मे! लेकिन केजरीवालको जिम्मेदारियाँ संभालना जरुरी है। मानता हूँ कि भाजपा नंबर एक है, पर बहुमत से दूर है। बहुमतके लिये तोड-जोड किया जा सकता था, पर जनभावना और परिस्थिति दोनों भाजपाके लिये बेहतरीन संकेत दे रही है कि ‘आप’ को दिल्ली प्रदेशमे किये गये सारे वादे पूरे करनेका पूरा मौका दे। और यह तो तय है कि भाजपा सशक्त विरोधीके रूपमे और अपनी अनुभव से केजरीवालजीको सिखाते हुए शासन चलवाएगी। तो अब बातें ये करो कि वादे क्या थे, व्यवहारिकता और शासन प्रणाली क्या है और कौन सा क्रान्ति करके देशमें एक नया कीर्तिमान बनाने जा रहे हैं केजरीवाल व उनकी पार्टी। काँग्रेसने बिल्कुल सही किया कि अनकंडिशनल सपोर्ट करके दिल्ली प्रदेशकी जनता और देशकी राजनीतिक अवस्थाओंको स्थिरता प्रदान किया।

      बाकी, संजीवजी द्वारा उठाये गये इस मुद्देसे केजरीवाल और सारे नेताओंको बडबोलापंथी न करने से एक सीख लेने के लिये इस पोस्टका बहुत बडा भूमिका समझें…. इससे भाजपाकी नियत खिसियानी बिल्ली जैसा मुझे नहीं लगता, क्योंकि भाजपाके बडे-बडे सुरमाओं और विचारकोंने यह बहुत पहले ही कह दिया था। स्वयं हर्षवर्धनजी ने भी कहा था। तो करनेवालों का मन को समझो, मात्र गप्प मारनेवालोंमें शामिल होओगे तो मिथिलावासी – गृहेशूरा रणेभीडा कुलाभिमानी परस्परविरोधिनम् जैसा हाल होएगा और अपनी पहचान तो तेल पीता मिलेगा, बिहारी बनकर अपमान ही झेलोगे।

      हरि: हर:!!

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      मिथिला न्याय-व्यवस्थाक जैड थिकैक। समस्त संसारमे लोक कहैत छैक – जँ वेद विलुप्तो भऽ जायत तँ मिथिलाक लौकिक व्यवहार टा देख लेला सऽ वेदप्रमाण भेटि जायत। अहाँक तर्क अपन जगह सही अछि, लेकिन लौकिक व्यवहार मिथिलामे भारतीय कानून केँ नकारैत नहि छैक, बेटीक अधिकार पैतृक संपत्तिमे छैक। लेकिन एना जे बेटीकेँ अहाँ दियौक, पुतोहुमे अहाँ लियौक…. आ झगडा-झंझैटमे फँसू ताहिसँ नीक जे कर्ता उत्तराधिकारी छथि वैह सम्पत्तिमे अधिकार पेता आ जँ स्वयं माता-पिताक विल (दस्तावेज) बेटीकेँ सेहो देबाक बात कहि रहल हो तऽ ओहो होयत। दोख्तरीमे लोककेँ सम्पत्ति भेटबाक प्रथा रहबे कैल छैक। आ संगहि ई कहबी जे नानी के धन पानी मे! हरि: हर:!!

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      बधाई व अपील

      मिथिलावासीकेँ हार्दिक बधाई – दिन ब दिन बढैत समस्यासँ निजात पबैक निमित्ते एकजुटता बढा रहल छथि। एक तरफ जेना दिल्लीक हर कोणमे महाकवि विद्यापतिजीकेर स्मृति संग-संग मिथिलाक एक पर एक विभूति – दीना-भद्री, राजा सलहेश, लोरिक समान लोकदेवता सहितकेँ स्मृतिमे अनैत फेरसँ सुदृढ मिथिला निर्माण लेल संकल्प लऽ रहल छथि, तहिना दोसर दिशि राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक लडाई लेल सेहो विभिन्न समूह अपन-अपन काज करबा दिशि ध्यान देबय लागल छथि।

      यैह क्रममे दहेज मुक्त मिथिला अभियानक प्रसार सेहो मिथिला, दिल्ली, महाराष्ट्रसँ आब हैदराबाद (आँध्र प्रदेश) तक पसैर गेल। हालहि संपन्न विद्यापति समारोहक सुअवसरपर हैदराबाद प्रभारी श्री संतोष मिश्रा एहि अभियानक बैनर टाँगि आ एकर उद्देश्यसँ जनमानसकेँ परिचित करौलनि। तहिना मुंबईक नालसोपारामे आयोजित काल्हिक बैठकसँ एहि पवित्र मुहिमकेर प्रशंसा युग निर्माण योजना, मथुरा (गायत्री परिवार) द्वारा करैत समस्त देशमे जतय-जतय ई अभियान संचालित भऽ रहल अछि ताहि सब ठाम ओ सब एकरा पूर्ण सहयोग देता से वचन देलैन। जनजागरण लेल दुनू संस्था आपसी सहयोग करत ताहि लेल प्रतिबद्धता प्रकट केलैन। आब ई दायित्व हमरे लोकनिक बनैत अछि जे जतय कतहु मैथिल कनेकबो सक्रिय छी से भारग्रहण करैत एहि अभियानकेँ अपन शहर वा गाम वा जगहपर प्रसार करैत युग निर्माण योजना समान देशक प्रतिष्ठित अभियानसंग सेहो जुडी। एहि लेल इच्छूक सदस्य संपर्क करी: १. श्री मदन ठाकुर – ९३१२४६०१५०, २. श्री राम नरेश शर्मा – ९२२१०७४१४१, ३. संतोष चौधरी – ९९१०६०७७२० वा दहेज मुक्त मिथिला सँ जुडल कोनो अभियानी सँ। दहेज मुक्त मिथिलाक हरेक शाखा पूर्ण स्वायत्तता संग कार्य कय सकैत अछि। पूर्ण आर्थिक स्वतंत्रता सेहो हासिल कय सकैत अछि, सिवाये आवश्यक सदस्यता कोरम संस्थाक विधान अनुरूप पूरा करबाक काज छोडि केन्द्रीय समिति संग कोनो तरहक घीचातीरी नहि रहबाक स्वच्छ परंपराक पालन हम सब करैत छी। शाखा लेल अधिकार वा अन्य कोनो भी विन्दुपर अपन जिज्ञासा जँ हो तँ इमेल पठा सकैत छी: pravin112@hotmail.com पर। कतहु सामूहिक विवाह, दहेज मुक्त विवाह लेल परिचय सभा, दहेज कूप्रथा विरुद्ध जागरण कार्यक्रम, गरीब वा मजदूर वर्ग बेटी सब लेल पूर्ण मुफ्त शिक्षाक व्यवस्थापन – एहि सबहक संग मिथिलाक हर तरहक धरोहरक संरक्षण लेल ई संस्था अपने लोकनि संग हर स्तरपर सहयोग करबाक लेल तत्पर रहत।

      हरि: हर:!!

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      प्र. दहेज प्रथाक उन्मूलन लेल भारतीय संविधान अनुरूप बेटीकेँ सेहो पैतृक संपत्तिमे अधिकार किऐक नहि देल जाइछ? कि पैतृक संपत्तिमे अधिकारसँ वंचित राखब कहीं दहेज कूप्रथाक एक महत्त्वपूर्ण कारक नहि?

      उ. भारतक कानून अनुरूप पिता द्वारा अर्जल सम्पत्तिमे सब संतानक बराबर अधिकार होइत छैक। बेटीक विवाहमे दहेज देबाक प्रक्रियाकेँ एहि सम्पत्तिपर बेटीक अधिकार सँ कोनो लेना-देना नहि छैक। कोनो तरहें ई तर्क देनाय जे समाजमे दहेज प्रथाक अन्त करबाक लेल पैतृक सम्पत्तिमे बेटीक अधिकार नहि देबाक कारण सँ छैक – ई कहब युक्तिसंगत नहि छैक। हरेक बेटीकेँ ई अधिकार जखन संविधान (कानून)सँ भेटल छैक तखन ओकरा समाजिक पंचायती वा निराकरण वा न्याय आदि सँ नहि रोकल जा सकैत छैक। तखन मिथिलाक्षेत्रमे ई देखल जाइत छैक जे बेटीक अधिकार विवाह भेलाक बाद नगण्य भऽ जाइत छैक, जँ मात्र बेटिये टा संतान छैक तऽ स्वत: ओकरे अधिकार पिताक सम्पत्तिपर बनैत छैक। व्यवहारिक तौरपर पिता-माताक वृद्धापनक सहारा पुत्र होइत छैक, पुत्रवधु सेहो होइत छैक जे निस्सन्देह कोनो पिताक बेटिये थिकैक – मुदा अपन बेटी पति व ससूर संग सासूरक लेल पूर्ण समर्पित बनि गेलाक चलते माता-पिताक वृद्धापनक सहारा वा उत्तराधिकारी नहि बनि अपन पुत्रवधु धर्मसँ सासूरहि केर सेवामे रहैत छैक। एहि व्यवहारमे सहजता छैक – न बेटीमे कोनो तरहक पैतृक सम्पत्ति देबाक प्रथा नहिये पुतोहुमे लेबाक प्रथा एतय देखल जाइत छैक। दहेजक माँग एहि सबसँ नितान्त दूर शख-मौज आ देखाबाक कारणे पुतोहु अनबा समय पुतोहु लेल गर-गहना, बर-बरियातीक सम्मान, विवाह रातिक खर्च, विदाई पर भरपूर साँठक समान, सर-सम्बनधी आ कर-कुटुम्बकेर विदाई आ विभिन्न आडम्बरक संग आइ-काल्हि एक्के रंगक बोलेरो आ स्कोरपियोपर बरियाती लऽ गेनाइ, शहरी बैण्डबाजा, लाइट-डेकोरेशन, टेन्टक शान… आ कतेको तरहक गैर-जरुरी व्यवहारिकताक नाम पर बेटीवालाकेँ रक्त चूइस लेनाय – ताहि ऊपरसँ बेटाकेँ पढेबामे भेल खर्चा, हाकिम-हुकुम बनि गेल तेकर मूल्यांकन आ सीधा भाषामे देखल जाय तँ आन घरक बेटीकेँ अपना घर आनब तऽ बिना दहेजक प्रवेश शुभ नहि मानब दहेज प्रथाक परिचायक थिकैक। आब बुद्धिजीवी आ समाजसेवी सबहक दृष्टिकोणसँ सेहो ई पैतृक सम्पत्तिमे बेटीक अधिकार – यानि बेटीमे दियौक आ पुतोहुमे लियौक – ई बड पैघ उलझन उत्पन्न करयवाला छैक। कहनिहार गलत नहि कहैत छथि जे एक दहेजक अशुद्धतासँ तऽ एतेक बेटीक जन्मसँ पहिले माइर देल जाइत छैक, कतेकोकेँ विवाहोपरान्त आ महिला हिन्सा आइयो ओतबी चरमपर छैक… काल्हि जाय यदि पैतृक संपत्तिक हिस्सा-बखरामे वाद-विवाद बनय लगतैक तखन केहेन दुष्परिणाम निकलतैक से सोचिये कय देह काँपय लगैत छैक।

      हर तरहें, कानूनो तही लेल, पिता-माताक विल आ विश यानि इच्छा-स्वेच्छासँ हर कार्य करबाक जोगारकेँ ‘प्राकृतिक न्याय’ मानैत छैक। ताहि अनुसार ‘माँगरूप दहेज”केर प्रतिकार करबा लेल हम सब खास कयकेँ युवा तुरियामे जागरुकता अनबाक प्रयास करी।

      हरि: हर:!!

      https://www.facebook.com/groups/dahejmuktmithila/doc/498898763454193/

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      प्रिय द.मु.मि.के आगन्तुक!   हम सभ अनुभव कयलहुँ अछि जे दहेज मुक्त मिथिला अपन स्थापना मार्च ३, २०११ सँ एखन धरिक अत्यन्त कम अवधिमें एक अन्तर्राष्ट्रीय समूह बनि गेल अछि; शनैः शनैः समयक माँग अनुरूप बहुत रास सुधार सेहो लाओल गेल अछि जाहिसँ सहभागीजनकेँ सुविधा हो। पहिले ई पूर्णतः मैथिल हेतु मात्र समर्पित छल, कालान्तरमें एतय अन्यके सहभागिता देखैत हम सभ हिन…

      प्र. दहेज प्रथाक उन्मूलन लेल भारतीय संविधान अनुरूप बेटीकेँ सेहो पैतृक संपत्तिमे अधिकार किऐक नहि देल जाइछ? कि पैतृक संपत्तिमे अधिकारसँ वंचित राखब कहीं दहेज कूप्रथाक एक महत्त्वपूर्ण कारक नहि?

      उ. भारतक कानून अनुरूप पिता द्वारा अर्जल सम्पत्तिमे सब संतानक बराबर अधिकार होइत छैक। बेटीक विवाहमे दहेज देबाक प्रक्रियाकेँ एहि सम्पत्तिपर बेटीक अधिकार सँ कोनो लेना-देना नहि छैक। कोनो तरहें ई तर्क देनाय जे समाजमे दहेज प्रथाक अन्त करबाक लेल पैतृक सम्पत्तिमे बेटीक अधिकार नहि देबाक कारण सँ छैक – ई कहब युक्तिसंगत नहि छैक। हरेक बेटीकेँ ई अधिकार जखन संविधान (कानून)सँ भेटल छैक तखन ओकरा समाजिक पंचायती वा निराकरण वा न्याय आदि सँ नहि रोकल जा सकैत छैक। तखन मिथिलाक्षेत्रमे ई देखल जाइत छैक जे बेटीक अधिकार विवाह भेलाक बाद नगण्य भऽ जाइत छैक, जँ मात्र बेटिये टा संतान छैक तऽ स्वत: ओकरे अधिकार पिताक सम्पत्तिपर बनैत छैक। व्यवहारिक तौरपर पिता-माताक वृद्धापनक सहारा पुत्र होइत छैक, पुत्रवधु सेहो होइत छैक जे निस्सन्देह कोनो पिताक बेटिये थिकैक – मुदा अपन बेटी पति व ससूर संग सासूरक लेल पूर्ण समर्पित बनि गेलाक चलते माता-पिताक वृद्धापनक सहारा वा उत्तराधिकारी नहि बनि अपन पुत्रवधु धर्मसँ सासूरहि केर सेवामे रहैत छैक। एहि व्यवहारमे सहजता छैक – न बेटीमे कोनो तरहक पैतृक सम्पत्ति देबाक प्रथा नहिये पुतोहुमे लेबाक प्रथा एतय देखल जाइत छैक। दहेजक माँग एहि सबसँ नितान्त दूर शख-मौज आ देखाबाक कारणे पुतोहु अनबा समय पुतोहु लेल गर-गहना, बर-बरियातीक सम्मान, विवाह रातिक खर्च, विदाई पर भरपूर साँठक समान, सर-सम्बनधी आ कर-कुटुम्बकेर विदाई आ विभिन्न आडम्बरक संग आइ-काल्हि एक्के रंगक बोलेरो आ स्कोरपियोपर बरियाती लऽ गेनाइ, शहरी बैण्डबाजा, लाइट-डेकोरेशन, टेन्टक शान… आ कतेको तरहक गैर-जरुरी व्यवहारिकताक नाम पर बेटीवालाकेँ रक्त चूइस लेनाय – ताहि ऊपरसँ बेटाकेँ पढेबामे भेल खर्चा, हाकिम-हुकुम बनि गेल तेकर मूल्यांकन आ सीधा भाषामे देखल जाय तँ आन घरक बेटीकेँ अपना घर आनब तऽ बिना दहेजक प्रवेश शुभ नहि मानब दहेज प्रथाक परिचायक थिकैक। आब बुद्धिजीवी आ समाजसेवी सबहक दृष्टिकोणसँ सेहो ई पैतृक सम्पत्तिमे बेटीक अधिकार – यानि बेटीमे दियौक आ पुतोहुमे लियौक – ई बड पैघ उलझन उत्पन्न करयवाला छैक। कहनिहार गलत नहि कहैत छथि जे एक दहेजक अशुद्धतासँ तऽ एतेक बेटीक जन्मसँ पहिले माइर देल जाइत छैक, कतेकोकेँ विवाहोपरान्त आ महिला हिन्सा आइयो ओतबी चरमपर छैक… काल्हि जाय यदि पैतृक संपत्तिक हिस्सा-बखरामे वाद-विवाद बनय लगतैक तखन केहेन दुष्परिणाम निकलतैक से सोचिये कय देह काँपय लगैत छैक।

      हर तरहें, कानूनो तही लेल, पिता-माताक विल आ विश यानि इच्छा-स्वेच्छासँ हर कार्य करबाक जोगारकेँ ‘प्राकृतिक न्याय’ मानैत छैक। ताहि अनुसार ‘माँगरूप दहेज”केर प्रतिकार करबा लेल हम सब खास कयकेँ युवा तुरियामे जागरुकता अनबाक प्रयास करी।

      हरि: हर:!!
      https://www.facebook.com/groups/dahejmuktmithila/doc/498898763454193/

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      मिथिला किसान लेल मिरानिसे भेटत कृषि मंत्रीसँ

      सूचना भेटल अछि जे मिथिला राज्य निर्माण सेना कृषि राज्य मंत्री तारीक अनवर सँ औपचारिक भेंटघाँट करत आ मिथिलाक किसानक अधिकार लेल लिखल गेल पत्र सहित विभिन्न मुद्दापर मंत्री महोदयकेर ध्यानाकर्षण सेहो करत। हलाँकि भेंटघाँटक अन्तिम तारीख २६ दिसम्बर निर्णय कैल जायत, मंत्रीजीक निजी सचिव मिरानिसे अध्यक्षीय पीठ सदस्य राजेश झा संग कहलैन। “बेसी उम्मीद जे २९ दिसम्बर मंत्रीजी भेंट दैथ, लेकिन मंत्रालयकेर सचिव श्री आशीष बहुगुणा व मुख्य सल्लाहकार श्रीमती एस भवानी केँ इमेल द्वारा मंत्रीजी केर ध्यानाकर्षण मिथिलाक गूढ व प्रसिद्ध कृषि उत्पाद – माछ, मखान ओ पान केर कृषि हितकेँ संबोधन करय लेल माँग कैल गेल अछि। माछ आ मखान मिथिलाक डेग-डेगपर रहल पोखरि, खत्ता, डोबरा आ ताहिसँ सम्बन्धित पिछडा वर्गक मैथिल मल्लाह (हिन्दू एवं मुसलमान दुनू समुदायसँ) जेकर जनसंख्या लगभग एक करोड जरुर हेबाक चाही ओकर हितरक्षाक मुद्दा उठायल गेल अछि। संगहि पैछला ३ सालसँ सूखाक भयानक चपेटमे पडि गेल मिथिलाक पान-खेतिहर मैथिल बरइ केर हितरक्षा लेल आ ओकरा सबहक नोकसानीक भरपाई लेल अनुरोध कैल गेल अछि।” जानकारी देलैन राजेश झा।

      मिरानिसे केर योजना सबपर प्रकाश दैत आगू जानकारी देलैन जे “बहुत बात उल्लेख करबासँ नीक रहत जे उपरोक्त पत्रकेँ जहिनाक तहिना राखल जाय। एहि मुद्दापर मिथिला राज्य निर्माण सेनाक संघर्षमे सांसद सबहक सहयोग सेहो लेल जायत, दरभंगाक सांसद सेहो संग देताह ताहि लेल वचनबद्ध रहबाक बात कहलैन अछि। आगामी २८ तारीख मुख्यमंत्री नितीश कुमार केर सेहो घेराव होयत आ मिथिला संग भऽ रहल उपेक्षा आ आपसी खंडनसँ विवाद उत्पन्न करयवाला कोसी – मिथिलाकेँ दू अलग भूभाग मनबाक सेहो घोर निन्दा करैत ज्ञापन देल जयबाक नियार अछि। यदि सरकार शीघ्र एहि माँगकेँ पूरा करबाक वचन नहि दैत अछि तऽ सडकपर सेहो आन्दोलन कैल जायत आ दरभंगामे किसान सबहक विशाल प्रदर्शनी करैत आगामी ९ जनवरीक खोपा चौकक सडक जाम केँ आरो विस्तार करबाक संभावना अछि।”

      सच देखल जाय तऽ मिथिला बहुजातीय, बहुधार्मिक, बहुवर्गीय समाज व समुदायक मिश्रण रहैत पौराणिक कालसँ पूर्ण संस्कृति रहल अछि। यैह कारण छैक जे कोनो देवकर्म वा पितरकर्म – सबमें सबहक आपसी योगदान तय कैल गेल छैक। डोमक चंगेरा-कोनिया आ पूजा घरक फूलडालीसँ लैत कुम्हारक अहिबात-पुरहर, दहीक कस्तारा-कोहा, गोपवंशीक गोदूग्ध-गोघृत, माली, सोनार, नौआ, चमार, सबहक विशिष्ट भूमिका हरेक यज्ञमे देखल जाइछ मिथिलामे। वर्तमान हेराइत लोकसंस्कृतिक दौरमे मिथिला राज्य निर्माण सेनाक ई डेग निवर्तमान संसद व विधायक सबहक आँखि खोलय लेल काफी अछि जे जनप्रतिनिधि रहैत अपन लोक वा संस्कृति लेल – भाषा व साहित्य लेल – समाज व समुदायक विकास लेल कहियो आवाज नहि उठबैत छथि। चौतरफा एहि बातक प्रशंसा हेबाक चाही जे युवाक समूह अपन संस्कृति आ पहिचानक रक्षार्थ एतेक महत्त्वपूर्ण डेग सब उठा रहल छथि आ निस्सन्देह प्रशंसा कीर्ति झा आजादकेर सेहो हेबाक चाही जे मिथिला लेल पूर्ण समर्पण रहबाक अपन प्रतिबद्धतासँ युवा सभकेँ प्रोत्साहन प्रदान कय रहल छथि। देखा चाही जे कृषि मंत्री व हुनक मंत्रालय कतेक जल्दी एहि समस्यापर अपन नजैर दैत छथि। हर हाल मे मिथिलाक लेल कल्याण दृष्टिगोचर कय रहल छथि बुद्धिजीवी व आम मैथिलजन।

      पठायल गेल पत्रक उतार:

      Date: December 23, 2013.

      To:
      The Minister of Agriculture
      Government of India,
      Krishi Bhawan, New Delhi,
      India.

      Through: Shri Ashish Bahuguna, Secretary & Smt. S. Bhavani, Principal Adviser

      Honorable Minister Sir,

      We, at Mithila Rajya Nirman Sena, would like to submit this representation on behalf of the farmers from Mithila, comprising 24 districts from Bihar and 6 districts from Jharkhand recognized as Maithili spoken region in India called Mithila as per British Researcher and the British India Government Collector Mr. George A. Grierson duly published with a map through Linguistic Survey of India. You are also aware that Mithila is well known of its complete civilization having its own script, language, literature, lifestyles, social and community structures, history, geography as Mithiladesh and it has also been demanded as a separate Mithila Rajya ever since the process of organizing states started by Indian National Congress and that after India was independent and formed constituent assembly to discuss the governance by making center and states rules in the republican India.

      Coming to the point of concerns, we wish to draw your special attention to nourish the specialty in field of agriculture of Mithila region. You must be aware that Mithila is welly known for its three agri products called Maachh, Makhaan and Paan. Being a mystic land, Mithila, there are many rivers originating from Himalayas flow through it and traditionally the seers and sages who established this sacred land coded that human lives can settle either on banks of rivers or at least there should be a pond or even a well to settle the life. Water being available in abundance, rivers do remain fully watered throughout the year and it has a very fertile land masses for agriculture of all types of crops, be that cereals, fruits, fish, cattle and all. Although the embankment, canal, hydel projects introduced here for flood controlling and water resources managements need more attentions and serious reviews because the earlier ones could not give betterment rather that proves to be curses and killer of Mithila’s true treasures. Still we demand from the ministry to consider upon the possibilities to revive the valuable agriculture of this region. The outputs will have a broader commercial values of course and entire nation and cross border as well as international markets will produce better revenues too.

      All three items that we put to your special attention here relate with the scheduled castes people – Maithil Mallaah (fishermen caste both among Hindus and Muslims) whose population is nearly 10 million fully depend on fishing occupations and growing water agri products like Makhaana (Fox Nut), Singhaara (Water Chestnut), etc.; similarly the Maithil Barai who grow the crop of betel in dry plane areas with a very unique taste and demands throughout the region and other nearby markets with special name Mithila Paan – their population is although smaller and not welly represented by the peoples’ representatives so far. Needless to say as reports must be there in your ministry too, the recent agricultural positions are so poor that these people have started migrating abandoning their trans generation family occupation. This is a very serious threat to protect the originality of our culture in Mithila if these people are not provided necessary supports and alms to address their damages due to drought hitting to their livelihoods. In Paan Kheti, there is requirement of heavier capitals, not less than Rs.10 Thousand per Katthaa; but recent 3 years drought-hitting badly damaged to these special agri-doers. No government has given any compensation, nothing in relation to the agri insurance could benefit these farmers and may this representation draw your kind attention to depute a special team to investigate their poor situation and address to the concerns in hard needs. This will certainly help to stop the migration of these farmers and also will bring back the prosperity to the locality.

      We are not aware if the ministry or its subordinate functionaries have taken steps before, we have no ideas whether the state government could ever announce any scheme for them; thus we make a sincere demand to verify the exact positions and reply to us within a shortest possible time so that we would educate the concerning people to attain those benefits. Kindly seek a report from concerning offices regarding the beneficiaries and real changes on the ground, if virtually any scheme was earlier introduced. We shall remain grateful for your kind favors in above regards.

      Thanking you,

      Yours truly,
      For MITHILA RAJYA NIRMAN SENA,

      Rajesh Jha
      Member, Presidential Bench.
      Phone: 8607817171.

      हरि: हर:!!

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      विद्यापति राष्ट्र विभूति घोषित होइथ!

      दरभंगासँ वर्तमान सांसद श्री कीर्ति झा आजाद केर आत्मीय विचार आ मिथिला राज्य निर्माण सेना द्वारा पूर्णसमर्थित माँग जे भारतक राष्ट्रीय विभूति रूपमे विद्यापतिकेँ पहिचान करैत भारतीय सांसदमे तैल्य-चित्र लगाओल जाय, ताहिकेँ पूर्ण समर्थन दैत किछु रास पुरान महत्त्वपूर्ण स्मृतिकेँ समेटि रहल छी।

      विद्यापतिक विषयमे जतेक लिखब ओतेक कमे बुझाइत रहैत अछि। विद्यापतिपर आइ धरि सैकडों विद्वान् अपना-अपना शोध व खोज अनुरूपे लिखने छथि। हुनके सबहक आलेख सब पढैत हमहुँ नवतुरिया लेखनीमे रुचि रखनिहार किछु-किछु लिखैत वर्तमान पीढीकेँ एहि बातकेँ सोचय लेल बाध्य करैत छी जे आखिर किछु तऽ तथ्य रहलैन महाकविकेँ जे आइ जनगणमनपर राज करैत छथि।

      एहि सन्दर्भ संस्कृतक एक नीति याद अबैत अछि:

      स्वगृहे पूज्यते मूर्खः स्वग्रामे पूज्यते प्रभुः।
      स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते॥

      मूर्खक पूजा घरहि टा मे, प्रभु यानि मानुषिक मालिक (देवतासँ इतर) केर पूजा गामहि धरि; राजाक पूजा देशेटा मे, मुदा विद्वानक पूजा सभठाम होइछ।

      विद्याधनम् सर्वधनम् प्रधानम् – एहि उक्तिकेँ चरितार्थ करैत जे व्यक्ति जनहित लेल अपन विचार प्रकट करैत छथि, अपन समस्त कर्ममे मात्र आ मात्र जनकल्याणक भावना रखैत छथि, जनप्रिय वाणी बजैत छथि, परमसत्ताधारी परमेश्वरक गान करैत छथि, सर्वगुणसम्पन्न रहैत सदैव समर्पित शरणागतिसँ दिनचर्या रखैत छथि – वैह विद्यापति कहबैत छथि। विद्यापति आइ कण-कणमे विद्यमान् छथि, ओ मात्र ऐतिहासिक पुरष टा नहि, ओ साक्षात् अवताररूपमे ईशत्व सेहो प्राप्त केने छथि। ताहिसँ मिथिलाक अहोभाग्य जे एहेन पुत्रकेर जन्म दऽ आत्मगौरव प्राप्त केलक, समग्र भारत आ नेपाल दुनू देशक संग विश्व सेहो गर्वान्वित होइत अछि जँ हिनका एक बेर मात्र अपन दृष्टिमे, मनसामे, वाचामे, कर्ममे आ धर्ममे अनैत छथि। यदि भारतीय संसदमे हिनक तैल्यचित्र लगैत अछि तँ ई पक्का मानि सकैत छी जे भ्रष्टाचारक पहाड जे समूचा भारतकेँ वैश्विक पटलपर बदनाम कय रहल अछि ताहिसँ निजात भेटत आ राजनेताकेँ जरुर हिनक चित्र देखिते समस्त आदर्शकेँ पालन करबाक कर्तब्यबोध सेहो हेतैन।

      समस्त शुभकामनाक संग – मिथिलावासी अपने लोकनिक एहि महान कार्यकेँ नमन करैत छथि आ आत्मगौरवकेर वापसी कराबयमे अपनेक हरेक संघर्षमे सदिखन संग छथि।

      हरि: हर:!!

      Let us talk of Vidyapati – a great poet devotee who changed the tradition of writing glories of Lord and superiors for better world from the then prevailing language of Pandit to common people – Avahatta, a mix of Sanskrit with Maithili born naturally out of Sanskrit alone, same as many other natural languages as Hindi, Bengali, Asamese, Nepali, Oriya, Tamil, Kannada, etc.

      Vidyapti became popular for this reason only, his every writing expressed the pain of common people, happiness of common people, celebration of common people… devotion of common people… What other than Janmaanas can make one Janapriya? Janata Janardan – the Common People – is representative of God alone. He sang of God through them.

      Later, many generous poets followed the same style. Be he Ravindranath Tagore or Mahakavi Tulsidasa or several others, who depicted the feelings of common people spiritually followed Vidyapati alone.

      I would narrate one the most loving scene of Vidyapati’s life – how he wept after losing his favorite God in form of his servant. Many others take as Mahadeva was in disguise served Vidyapati as Ugna; I take it differently and I understand it with my own heart and mind – if I love someone, certainly I would see all in him and so my God. Ugna was though Vidyapati’s servant but an enormous bonds of love could give him the vision of Mahadeva in first.

      That is the power of love and devotion. When we are youths, we see our lovers in all. When we are in age of entertainment and see a movie, we see the hero/heroin in us. The heroics we do are never inferior. That is every time the love alone.

      Life has sense, know it and always talk of superiors to learn from their good. Never criticize people in frowning way, it is truly very bad. I have presented this story of Vidyapati for my dear friends to realize the power of love. I love you and I love you.

      Harih Harah!

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      मुंबई मैथिलकेर दहेज विरुद्ध एकजुटता

      दहेज मुक्त मिथिला – महाराष्ट्रा द्वारा काल्हि मुंबई केर नालसोपाडामे एक महत्त्वपूर्ण बैसार राखल गेल छल। एहि संस्था द्वारा लैंगिक विभेद अन्त करबाक लेल, बेटीक शिक्षा अनिवार्यरूपे करबैत आत्मनिर्भर बनेबाक लेल आ माँगरूपी दहेज नहि लेबाक-देबाक लेल जोर-शोरसँ प्रचार-प्रसार कैल जाइत अछि। संगहि मिथिलाक विभिन्न धरोहर सबहक संरक्षण लेल वर्तमान सरकारी उदासीनता आ राजनैतिक उपेक्षाक चलतबे स्वस्फूर्त स्वयंसेवासँ लोकमानस द्वारा अपनहि कैल जायत तखनहि मिथिला फेर अपन समृद्धि ओ उत्कर्ष प्राप्त करत – एहेन कठोर प्रतिबद्धताक संग ठाम-ठाम जागृतिमूलक कार्यक्रम ओ समारोह द्वारा अलख जगेबाक काज करैत आबि रहल ई संस्था हालहि महाराष्ट्रमे गठित राज्य समितिक सक्रियतासँ मुँबईवासी मैथिल बीच अभियान तीव्र गतिसँ स्थान पाबि रहल अछि। लोक एहि अभियानकेँ हृदयसँ लगबैत आत्मगौरवक बोध करैत अपन वृत्ति स्वच्छ रखबाक संकल्प लऽ रहल छथि आ एहि संस्थाक अभियान संग अपनाकेँ जोडि रहल छथि।

      “मात्र ४ महीनाक छोट अन्तरालमे २ महत्त्वपूर्ण शाखा खोलि चुकल दहेज मुक्त मिथिला अपन लक्ष्य हर बेटी लेल शिक्षा आ दहेज प्रथाक अन्त लेल विभिन्न योजना बनबैत आगू बढि रहल अछि।” कहैत छथि संस्थाक महाराष्ट्र अध्यक्ष संजय मिश्रा। ज्ञातब्य हो जे २८-०७-२०१३ केर पहिल बैसारसँ ई संस्थाक महाराष्ट्र ईकाइ गठन भेल छल। एहिमे फेसबुकसँ जुडल बहुते रास मिथिला-मैथिली चिन्तक अपन सुन्दर सूझ-बूझसँ धरातलपर अभियान संचालन करबाक संकल्प लेने छलाह। “मिथिलाक हेराइत गौरवकेँ फेर वापसी करबायब, एहि लेल दृढ संकल्पित छी। समाजक हरेक वर्गमे समानता, मैथिली भाषाक मधुर-मिठाससँ परिचय आ मिथिलाक विकास लेल मिथिला राज्य प्रति सदैव समर्पित रहब।” ई विचार रखैत छथि दहेज मुक्त मिथिला प्रवक्ता राम नरेश शर्मा जे अनेको मैथिली-मिथिला अभियानकेर संचालक-सहयोगी सेहो छथि। संस्था लेल समर्पित दीपक खाँ, लालबाबु शर्मा, रंजित झा, करुणेश निशेष, वी. एन. झा आ नमो नारायण मिश्र सहित सैकडों अभियानी हाल धरि जुडिकय अभियानकेँ व्यापकता प्रदान कय रहल छथि। “एहि अभियानक पवित्रता देखि – नारी प्रति समुचित सम्मानक बात सुनि समाजक हर वर्ग चाहे मैथिल वा मराठी, सब कियो हृदयसँ स्वागत कय रहल छथि। हम धर्म-कर्मसँ जुडल रहैत मानव समाज लेल एहि पवित्र उद्देश्य लेल निरन्तर काज करब आ निश्चितरूपेण मिथिलाक गौरव दहेज मुक्त समाज बनेलासँ हेतैक।” अपन विचार रखैत छथि संस्थाक संरक्षक पंडित धर्मानन्द गुरुजी।

      दहेज मुक्त मिथिला जेकर स्थापना ३ मार्च, २०११ ई. मे फेसबुक पर उपस्थित मैथिल युवासमूह द्वारा कैल गेल छल – संस्थापक सदस्य व राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज झा स्वयं मुंबईमे रहैत छथि आ मिथिला लेल हर अभियानमे अपन तन, मन आ धन सँ योगदान देबाक हिनक विशिष्ट प्रतिभासँ मिथिला समाज, मराठी समाज सब आह्लादित अछि। “समूचा भारतमे ई अभियान पसरय ताहि लेल आह्वान करैत छी। हमर मिथिलाक पौराणिक कालसँ वर्तमान काल धरि एक अलग पूर्ण संस्कृति-सभ्यताक रूपमे रहल अछि। संसारमे के नहि जनैत अछि जे सीता मिथिलाक बेटीरूपमे पृथ्वीपर अवतार लेने छलीह। जनक समान विदेह कहौनिहार हमरा लोकनिक राजा होइत रहलाह अछि। मूर्त-अमूर्त आइयो हमरा सबहक राजा जनकहि छथि। भारतक संविधानसँ मैथिली एतेक देरी सँ मान्यता पौलक, नहि जानि राज्यरूपमे स्वशासन करबाक अधिकार संविधानसँ कहिया भेटत। लेकिन स्वयंसेवासँ विकास करबाक लेल हम सब सक्षम छी आ से करैत रहब।” उद्गार प्रकट करैत राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज समस्त भारतक मैथिलसँ एहेन प्रतिबद्धता निर्माण लेल आह्वान करैत छथि।

      काल्हि मैथिली अधिकार दिवसपर आयोजित नालसोपाराक बैसारमे ओहि ठामक नगर सेवक श्री भरत मकवाना केर प्रमुख आतिथ्य रहल छल। तहिना गायत्री परिवार केर अधिकारी सेहो अपन उपस्थिति रखलैन। हिनका लोकनि द्वारा हर तरहें संस्थाकेँ सहयोग करैत समाजसँ गन्दगी सफाई अभियान लेल निरंतर सहयोग देबाक घोषणा कैल गेल। तहिना मैथिल समाजक अनुपम उपस्थिति जाहिमे अनुप सत्यनारायण झा, धर्मेन्द्र झा, कृष्णकान्त झा अन्वेषक, इन्दिरा देवी, पुनीता शर्मा सहित दर्जनों लोककेर उपस्थिति रहल छल।

      हरि: हर:!!

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      दहेज मुक्त मिथिला – मिथिलाके कर्मठ सेवक जे किछु करय लेल प्रतिबद्ध छथि – हिनका लोकनिक एक एहेन पहल थीक जाहिमें अपने लोकनि सदस्यता लैत एहि मूहिम के आगू बढबैत मिथिलाके हरेक गाम सऽ लऽ के संपूर्ण विश्व भरि मैथिल के प्रत्येक वासस्थल तक एकर प्रभाव पहुँचैक आ मिथिला दहेज मुक्त बनैक – से एकजूट प्रयास करी।

      दहेज के स्वच्छ स्वरूप जे स्वेच्छा सँ बेटीके माय-बाप-अभिभावक बेटीके विवाहके अवसर पर अपन बेटी-जमाय-सासूरके परिवार लेल दैत छैक – मुदा आजुक एहि युगमें दहेज माँगरूपी दानव बनल अछि आ समग्र मिथिलाके विकासके प्रमुख अवरोधक बनल अछि… एकरा सऽ मुक्ति पबैक लेल स्वस्फूर्त जागृतिके आवश्यकताके सभ गोटे बूझी।

      दहेज मुक्त मिथिला नहि सिर्फ फेशबुक के पेज पर बल्कि यथार्थमें कार्यरत एक एहेन सामूहिक मूहिम थीक जाहिमें अपनेक व्यक्तिगत सहयोग के परम आवश्यकता छैक। इ संस्था मुख्यतः सदस्य द्वारा आपसमें जमा कैल कोष सँ केवल कार्यक्रमके आयोजन करैत अछि, आ एहि संस्थाके कोनो एहेन इच्छा नहि छैक जे चन्दाके धन्धा करय वा किनको ऊपर जबरदस्ती कोनो अपन विचार के थोपय। स्वेच्छा सँ जुड़निहार प्रति इ संस्था आभारी रहत।

      एहि संस्थाके प्रथम स्लोगन निम्न प्रकार अछि:

      यौ मैथिल बंधुगण! आउ सभ मिलि एहि मंच पर चर्चा करी जे इ महाजाल सँ मिथिला कोना मुक्त होयत! जागु मैथिल जागु..!!

      अपन विचार – विमर्श एहि जालवृत पर प्रकट करू! संगे हम सभ मैथिल नवयुवक आ नवयुवती सँ अनुरोध करब, जे अहीं सबहक प्रयास एहि आन्दोलन के सफलता प्रदान करत! ताही लेल अपने सभ सबसँ आगा आओ आ अपन – अपन विचार – विमर्श एहि जालवृत पर राखू….

      एक बेर एहि जालवृत पर जरुर पधारी…

      दहेज़ मुक्त मिथिला…
      Website: http://dahejmuktmithila.blogspot.com/
      www.dahejmuktmithila.org

      जय मैथिली, जय मिथिला!!

      नव सदस्य जे एहिठाम जुड़य लेल इच्छूक होइ – अपन पूरा पता, फोन नंबर आ दहेज मुक्त मिथिलामें जुड़य लेल उद्देश्य एहि तिनू बात के जानकारी कराबी ! इ-मेल dmmmumbai@gmail.com

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      २२ दिसम्बर २०१३

      मैथिली अधिकार दिवस

      अधिकार यानि अपन हक आ अपन दाबी कहि सकैत छी मैथिलीमे! औझके दिन भारतीय संविधानक आठम अनुसूचीमे मैथिलीकेँ सम्मानसहित भारतीय भाषाक रूपमे स्थान देल गेल छल। १८ अगस्त, २००३ ई. तात्कालीन उप-प्रधानमंत्री श्री लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा प्रस्तुत भारतीय संविधानक ९२म संशोधन प्रस्ताव द्वारा राखल गेल छल। एहि प्रस्ताव अन्तर्गत बोडो, डोगरी, संथाली सहित मैथिलीकेँ संविधानक आठम अनुसूचीमे स्थान देबाक प्रस्तावना कैल गेल छल। आठम अनुसूचीमे सबसँ पहिने मात्र १४ टा भाषा यथा http://164.100.47.134/intranet/CAI/E.pdf एहि आलेखसँ स्पष्ट आ तेकर उपरान्त २१म संशोधन, १९६७ ई. मे सिंधी, फेर कोंकणी, नेपाली व मणिपुरी ७१म संशोधन द्वारा १९९१ ई. द्वारा कुल १८ भाषा आ तेकर बाद फेर ९२मी संशोधन द्वारा २००३ ई. मे उपरोक्त संशोधन द्वारा मैथिली भाषाकेँ मान्यता देल गेल छल।

      ज्ञातब्य हो जे भाषाकेँ संविधानक आठम अनुसूचीमे स्थान बहुत रास आधार जेना व्याकरण, साहित्य, लोक-स्वीकृति सबपर निर्णय करैत राखल जेबाक परंपरा रहल अछि। मैथिली हर तरहें अपनाकेँ स्थापित कय सकल एहि मे प्राचिनकालक योगदानसँ व्याकरण आदिक विकास मुख्य भूमिका निर्वाह केने अछि। जखन कि यैह मैथिलीकेँ स्थापित भाषाक रूपमे मान्यता हासिल करबा लेल बहुतो तरहक संघर्ष व आन्दोलनक आवश्यकता भेल, लेकिन ऐतिहासिक लिखित दस्तावेज एकमात्र आधार बनैत मैथिलीकेँ वर्तमान भारतीय भाषाक मान्य सूचीमे स्थान दियैबाक स्थापित इतिहास विद्यमान् अछि। यैह दिवस यानि २२ दिसम्बरकेँ मिथिलावासी मैथिली अधिकार दिवस केर रूपमे मनाबैत आबि रहल छथि।

      हरि: हर:!!

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      प्रिय मित हमर! हे प्रीत हमर!!

      नव वर्षक नव दिन आयल!!
      प्रीतक संग खुशी छायल!!
      ई मिथिला अनुपम चित्रकला!!
      ऋद्धि-सिद्धि-सिया-गौरी धिया!!
      हर क्षण ओ पल प्रेमहिसँ पूर!!
      ईशक आशीष भेटय जरुर!!
      ई खास ग्रिटींग सीनासँ लगा!!
      मैथिली मीठ भरपूर मिथिला!!
      गाबू गीत जय-जय मिथिला!!
      नहि देखब आरो ई शिथिला!!
      जय मिथिला! जय जय मिथिला!!

      बस अहाँ लेल ई खास ग्रिटींग कार्ड जाहिमे मिथिलाक सुप्रसिद्ध अनमोल आध्यात्म – प्राकृतिक प्रेम – पर्यावरणीय भाइचारा आ सामुदायिक सौहार्द्र भरल अछि ताहि संग “नव वर्ष २०१४” केर मंगलमय शुभकामना प्रेषित कय रहल छी।

      प्रवीण नारायण व वंदना चौधरी
      अम्बिका, भावना, देवाङ्शी, प्रियशील
      व समस्त चौधरी परिवार,
      विराटनगर (मिथिला), नेपाल।

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      अनुपजी, अहीं समान पुत्र वास्तवमे मिथिला राज्यक आन्दोलनक सूत्रधार अछि। कोनो एकटा राजनीतिक दलकेर समर्थनसँ मिथिला बनत ई अवस्था नहि तऽ आइ अछि आ नहिये आबयवाला किछु सौ-सैकडा वर्षमे होयत। तेकर माने अधिकारकर्मी व अभियानी अपन काज छोडि देत आ सबहक ध्यानाकर्षण करबैत मिथिला निर्माण लेल नहि सोचत सेहो संभव नहि। अहाँक प्रवेश मिथिला राज्य निर्माण आन्दोलनमे उत्साहवर्धक अछि। निरपेक्ष भावसंग कार्य शुरु कैल जाय। १९ जनवरी, २०१४ मिथिला राज्य निर्माण सेनाक अधिवेशनमे अपने जरुर सहभागी बनी। हमहुँ सब आबि रहल छी। आपसमे बैसि भविष्य लेल योजना बनेबाक ई अधिवेशन बहुत महत्त्वपूर्ण होयत। हरि: हर:!!

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      आउ, भेट करी एक समर्पित मिथिला विभुतिसँ!

      आइ मैथिली अधिकार दिवस थीक। औझके दिन भारतीय संविधानक आठम अनुसूचीमे मैथिलीकेँ स्थापित करैत युगपुरुष अटल बिहारी वाजपेयी स्वर्णाक्षरमे अपन नाम मिथिला सहित भारतक इतिहासमे दर्ज करौलनि। आइ हमरा लोकनि लेल एक सुवर्ण अवसर अछि जे अपन मातृभाषाक सम्मान पयबाक शुभ दिन उपस्थित भेल अछि। आइ राँचीमे ‘१०म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन’ केर भव्य आयोजन चलि रहल अछि, समूचा राँचीमे सैकडों अधिकारकर्मी व मैथिल अपन पारंपरिक परिधानमे उपस्थिति जनबैत विशाल रैली निकाललनि आ आब चिन्तन गोष्ठी, बहुभाषिक कविगोष्ठी सब निरंतरतामे अछि।

      हमरा लोकनि गर्व करैत छी जे समय-समय पर असगरो बेटा बहुते रास भार उठा लैत छथि आ मिथिलाक सनातन संस्कृतिकेँ जियेबाक लेल अपन कलासँ बहुत रास महत्त्वपूर्ण कार्य करय लगैत छथि…. हमर ओकाति एतेक तऽ जरुर अछि जे समय‍-समयपर हिनकर योगदानसँ भेटि रहल महत्त्वपूर्ण योगदानकेँ अपना सँ जुडल फेसबुक मित्र व जनमानस संग-संग विभिन्न समारोह आ सभा आदि सँ जगजियार करी। आउ भेटैत छी एक एहने युवा शख्सियत श्री ललित नारायण झा सँ।

      विभिन्न मिडियासँ जुडल पत्रकारिता करनिहार श्री ललित सदिखन अपन चिन्तन मूल विषय ‘मानवता लेल पत्रकारिता’ पर ध्यानकेन्द्रित रखैत छथि। बहुत दिनसँ मिथिलाक कतेको रास अभियान सबहक गंभीर अध्ययन उपरान्त ई निर्णय करैत छथि जे “एहिमे हमर भूमिका कि भऽ सकैत अछि – एहि आत्मजिज्ञासासँ अपनहि विधामे मिथिला लेल एतेक रास अभियान चलितो विभिन्न स्थापित मिथिला लेल समर्पित न्युजलिंक व सोर्सेजकेर कमी-कमजोरीसँ रिक्त स्थानकेँ पूरा करबा लेल निर्णय लेलौं। एहि क्रममे मिथिला मिरर नामक एक वेबसाइट निर्माण करैत काज शुरु कय देलहुँ। पहिले किछु दिनमे एतेक सार्थक संख्यामे पाठकक उपस्थिति व प्रतिक्रिया सब भेटल लागल ताहिसँ आरो उत्साहित छी।”

      राष्ट्रीय स्तरपर समाचार लेखन व संप्रेषणसँ खूब परिचित – सदिखन स्तरीय समाचार संकलन हिनकर खासियत छन्हि। मिथिला लेल हिनक समर्पणसँ सहीमे एक बड पैघ आवश्यकताक पूर्ति भेल। कतेको लोक भले आह्वान अनेक केने हो, लेकिन चुपचाप काज करनिहार हिनकर शख्सियतकेँ हम प्रणाम करैत छी। आइ मिथिला राज्य व मैथिली भाषाक संग मिथिलावासीक आत्मगौरवकेँ फेरसँ आत्मसात करेबाक हिनक संकल्प दृढ अछि आ सबहक सहयोग लेल ई आह्वान करैत छथि। हमरा लोकनि हिनका संग अपने तक पहुँचि पाबि रहल छी, अपने सेहो हिनका तक जरुर पहुँची यैह शुभकामना। मिथिलाक हरेक आन्दोलनक असल अनुभवी मुखपत्रक कमीकेँ पूरा करनिहार ललितसँ अभियानी लोकनिमे सेहो ललितशक्तिक जागरण देखय लागल छी।

      हरि: हर:!!

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      धन्यवाद शकील अख्तर साहेब! आपका रिपोर्टिंग सचमुच दिलको छू दिया। हमने संगीताका पक्ष शुरु दिन से ही रखा है। अमरीकाकी अकड और मामलेमें जो भी हो, लेकिन मानवाधिकारके मामलेमें और भारतीय लिच्चरपंथीके विरुद्ध कम से कम इस मामले में मुझे एकमात्र ‘ईसाइ मिशनरियोंके साथ कुछ ज्यादा ही नजदीकी और इसको और ज्यादा बढावा भारत जैसे देशोंमें देनेकी अमरीकी मन्शा’ छोडकर बाकी सारा कुछ जायज लग रहा है। देवयानीजीको इज्जतके साथ इस केसको फेस करना चाहिये और जरुर विएना समझौतेके तहत जो भी इम्म्युनिटिज बनते हैं वो सारा एन्ज्वाइ करते हुए भी अपने किये के लिये भुगतना चाहिये। नौकरानीपर अत्याचारके पुराने मामले, भारतका राजनयिकके नामपर बचाना लेकिन गरीब-गुरबोंको माटीका ढेप समझकर पोखरेकी तलहटीमें फेकना…. आपने सचमुच दिलको छू देनेवाली रिपोर्ट लिखकर हमें तो बहुत प्रसन्नता दिये। न्याय कायम हो। मिथिला जिसने संसारको न्यायकी नींव दिया वो भी पीडित है और विधायिका चुप है। सोचिये कि हम कहाँ जा रहे हैं! 

      हरि: हर:!!

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      फेसबुकिया कोचिंग सेन्टरकेर अपार सफलताक बाद

      आब – प्रवीणक नेता प्रशिक्षण फेसबुकिया महाविद्यालय केर उद्घाटन शीघ्र होमय जा रहल अछि।

      ई सब पूर्णरूपेण अपन लगानीसँ बनि रहल अछि ताहि हेतु नाम अपन लिखैत छी, अहाँकेँ तामश नहि चढबाक चाही काका। दिलमोहनाकेँ सेहो अही कालेजसँ प्रशिक्षित करैत गारंटी ३ महीनामे नेता नहि बना देलहुँ तऽ जे कहू! 

      नेता माने राजनीति टा करनिहार नहि, ओ कोनो मैनेजमेन्ट फिल्डमे सेहो कमाल कय सकत, तेकरो गारंटी। अग्रिम बुकिंग लेल एहि पेजसँ जुडि सकैत छी। मैथिलीक प्रचार बिहार सरकार तँ नहिये टा करत, अहीं सब सँ निवेदन जे कनेक शेयर करैत सबकेँ खबैड दऽ दियौन। कालेजक उद्घाटन १९ जनवरी दिल्लीमे मिथिला राज्य निर्माण सेना केर कार्यक्रममे ओतुक्के नेताजी सबसँ करबायब। ॐ तत्सत्!!

      हरि: हर:!!

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      आनन्द आबि गेल!!

      मोन तऽ सदिखन पडिते अछि
      आरो कइएक टा चीज मोन पडैत अछि
      दीदी संगे बथुआ साग तोडनाइ – खेते-खेते
      बाबी संगे मकर केर मेला – रैबे-रैबे
      चरवाहाक संगे महिस लऽ कऽ – बाँसे-बाँसे

      मोन पडैत अछि पोखरिक जाइठ
      अय पार सऽ ओय पारके बाजी लगेनाय
      स्विमिंग पूलमे ओ आनन्द कहाँ

      मोन तऽ सदिखन पडिते अछि
      माथपर पथियामे माइट उघि अननाय
      छिट्टा भैर कय चिक्कैन माइट,
      सत्यनारायण पूजामे घडीघंटा बजेबाक लूझालूझी
      कनसुप्तीवला हुक्का-लोली
      प्रतिदिन साँझ-भोर मित्रक टोली
      धानक बोझ बैलगाडी पर
      आ ओइपर ऊपरमे अपने बैसल
      एखन एक्स.यु.वी. ५०० ओहेन आनन्द नहि दैत अछि
      बाबा द्वारा एकटा निक्कर आ बुस्सर्ट
      सालमे एक्के बेर दुर्गा पूजामे
      जे सौकत-हैदर दर्जी सी कऽ दैत छल बेलनोती दिन
      जोडियैक केर सर्ट आ ब्लैकबेरी पैन्टमे ओ मजा कहाँ?
      पाइनमे राखल बसिया भात
      भोरे-भोरे ओकरा छानैत माँ के हाथ

      मोन तऽ बड्ड पडैत अछि
      एखनहु गाम जाइत छी
      तऽ एबाक मोन नहि होइत रहैत अछि।
      कोहुना एक दिन आर… एक दिन आर
      रहबाक प्रयासमे मोन के मनबैत रहैत छी
      सन्दर्भ सऽ इतर बात भऽ सकैत अछि
      मुदा मोन पैड गेल बड्ड किछु!

      – अमर नाथ झा – ठाढी (मधुबनी), मिथिला!

      हरि: हर:!!

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      पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह आइयो देशक एक धरोहर छथि, राजतंत्र पुरनके रूपमे कथमपि कियो नहि मानत, लेकिन शक्तिक एक केन्द्ररूपमे हुनका सम्मानसहित स्थापित करब देशक हित मे होयत। हरि: हर:!!

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      अभ्याससँ विद्या, त्यागसँ कीर्ति – ब्रह्मचारी बाबा सरकार केर क्षेत्र भ्रमण आ लोक सबकेँ बुझेनाय – आध्यात्मक महत्ता आ जीवनमे निरपेक्ष भावसँ कर्म केनाय – सचमे लगमा विद्यालयसँ पढि आइ छात्र समूचा देशमे योगदान दऽ रहल अछि…. लेकिन ओही विद्यालयकेर हालत पैछला किछु वर्षमे निम्न स्तर तक खसल जा रहल अछि ताहि लेल कियो सशक्त संरक्षक नहि, चुस्त-चालाक अभिभावक नहि…. सरकारक कमी एकदम बुझा रहल अछि… किछु ताहू दिशामे श्रद्धालू शिष्यक योगदान लेल अनुरोध करैत छी। हरि: हर:!!

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      २१ दिसम्बर २०१३

      राजनीतिक बात सेहो विस्तारमे भेल, सुमन भाइजीक एक पेन्टिंग जे नेता सबहक मूरी पेटमे घुमैडकय घूसि गेल छल आ अग्रगामी निकासक बदला पेटगामी योजना टा देखाबयवला द्योतक बुझायल छल….

      ओना एहि बेर जे दलकेँ जनादेश देल गेलैन अछि, ओ दुनू दल मिथिलाकेँ मान्यता देने छथि अपन घोषणापत्रमे। एमाले स्पष्ट लिखने अछि। काँग्रेस सेहो मिश्रित संस्कृतिक उल्लेख करितो नेपालक प्रजातांत्रिक मूल्यकेर रक्षा करबाक प्रतिबद्धता जतौने अछि, ई दलक बौद्धिकता सेहो मिथिला लेल सार्थक देखाइत अछि। एहि मे सन्देह कहाँ छैक जे संघीयताक स्थापना लेल सब तरहें ‘मिथिला’ मात्र न्यु लेबाक पहिल ईंटा बनतैक। नेपालक सबसँ बेसी पुरान सभ्यता-संस्कृति भाषा-लिपि-साहित्यसागर आ लोक-जीवन-परंपरा सबकिछु सँ सुसज्जित मिथिला नेपालक संघीयतामे प्रवेश नहि भेलासँ संघीयताक महत्त्व बिना पेंदीक लोटा समान होयत।

      हरि: हर:!!

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      रमपम हेल्लो मिथिला पर आजुक पाहुन आ मिथिला चित्रकलाक प्रसिद्ध हस्ताक्षर एस सी सुमन सहित धीरेन्द्र प्रेमर्षि भाइजी आ रूपा भाभीजीकेँ प्रणाम। एखन एक बड गंभीर सन्दर्भक चर्चा अपने लोकनि कय रहल छलहुँ, एहिपर शोधक एक विचार राखबाक लेल ई पोस्ट कय रहल छी। मिथिला संस्कृति बिना राजनैतिक संरक्षण अपन आत्मगौरव केँ रक्षा लेल स्वयं मिथिलावासी मैथिलमे प्रतिबद्धताक क्षमता नहि विकास करय दऽ रहल छन्हि – जँ राज्य एहि दिशामे कोनो तरहक प्रोत्साहन योजना धरि घोषणा कय दौक, तऽ स्वाभाविके रूपे मैथिलमे अपन लिपि, भाषा, संस्कृति प्रति पूर्ण रुचि जाग्रत हेतैन। एखन तऽ स्वस्फूर्त आ दूरदर्शी विचारक, भविष्यक संरक्षण लेल चिन्तन करनिहार अभियानी, कलाप्रेमी, व्यवसायी, चित्रकलासँ कैरियर निर्माण करनिहार जन-जनमे एहि दिशामे गंभीरतापूर्ण रुचि देखल जाइछ। मिथिलाकेँ वैश्विक परिप्रेक्ष्यमे जनाबय लेल मिथिला पेन्टिंग सर्वोपरि अछि। हरि: हर:!!

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      आदरणीय शेखर बाबु Shekhar Mishra) केर ध्यानाकर्षण निमित्त पुनरावृत्ति पोस्ट/अपडेट:

      जनवरी ८, २०१२ केर ई मिटींग, मिटींगमे पास भेल एजेन्डा, अपन संकल्प, सौराठ सभागाछी स्थित माधवेश्वरनाथ मन्दिर जीर्णोद्धार लेल संयोजन समिति गठन करबाक माँग, कोष ठाड्ह करबाक अपन निजी योगदान सँ श्रमदान दैत समूचा मिथिलासँ एहि लेल भीख तक माँगबाक प्रतिबद्धता, पंडित ताराकान्त झा द्वारा बिहार सरकारसँ स्वीकृति दियौनाय…. फेर सौराठ सभाकालमे एहि विन्दुपर समीक्षा… आ कतेको बात… आब दोसर साल बीतय लेल जा रहल अछि लेकिन प्रगति ठामक ठामहि छूटल अछि। घोषणा – प्रतिघोषणा आदि कतेको बात बेर-बेर पढैत छी…. कतेक लोक एहि लेल हमरे पर आरोप तक लगा देलाह जे महादेवकेँ गैछ कय पाइ नहि देलखिन…. आदि…. सौराठ सभा लेल समर्पित आदरणीय शेखर बाबु द्वारा प्रयास निरन्तरतामे आइयो होयबाक आत्मविश्वास आ यदि हम सब स्वयं कार्य करय लेल आइयो फाँर्ह बान्हि लेब तँ मात्र एक वर्षक अन्दर कार्य पूरा करबाक वचनबद्धतासँ अपनाकेँ बान्हल देखबाक प्रतिबद्धता कायम अछि। बिहार सरकार केर भरोसे शायदे किछु होयत। ओना एखन कनेकाल पहिने शेखर बाबुक एक अपडेट जे संजयजी संग किछु वार्ता भेलनि अछि…. लेकिन एहि मन्दिरक जीर्णोद्धारपर हुनक अपडेट चुप छन्हि।

      जय मैथिली! जय मिथिला!!

      मिटींगमे भेल विभिन्न रास बात जेकर विडियो सेहो अछि, माइन्युटिंग फरमेटमे राखि रहल छी। कृपया लिंक खोली।

      हरि: हर:!!

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      आइ सँ २ वर्ष पूर्व हमर मस्तिष्कमे मिथिला राज्य लेल एतेक रास प्रश्न आयल छल, जबाब तकलहुँ आ निर्णय लेलहुँ जे वगैर अलग राज्य बनने मिथिलाक कल्याण नहि छैक। हरि: हर:!!

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      क्या कभी सोचे कि
      तुमने वादे किये लंबे-चौड़े
      लिंगभेद खतम कर
      कुप्रथा से हमने हैं लड़े।

      स्वेच्छाचार का कर विचार
      अत्याचार पर कर प्रहार
      बनें खुद होशियार
      औरों को भी करें खबरदार।

      कब तक सहोगे घोर पाप
      कन्या भ्रूण-हत्याका ताप
      बेटेमें धनी बेटीमें लाचार
      कर्जोंमें डूबा मजबूर बाप।

      क्यों दिखावे का समर्थन
      कैसा यह आदर्श है
      समाज को कहीं तोड़ तो नहीं रहा
      क्यों नहीं कोई तंत्र है।

      बन्द करो ढकोसला
      शादी-ब्याह एक पुण्य है
      धन बहाने का नहीं
      सिद्धान्त कोई गुण्य है।

      हरिः हरः!

      (मित्रोंके अनुरोध पर एक रचना हिन्दीमें – बस एक प्रयास है।)

      हरिः हरः!

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      २१ दिसम्बर २०१३

      नरेन्द्र मोदी लग रहा है इतना लोकप्रिय बन गये हैं जितना इससे पहले शायद कोई भारतीय प्रधानमंत्री भी न रहा हो…. बीबीसी जैसी निष्पक्ष न्युज एजेन्सीपर भी जिस स्पीडसे इन पर समीक्षा लिखा जाता है और बार-बार मुसलमानोंके नजरिये से इनको सामने रखा जाता है इससे भारत गणराज्य धर्म निरपेक्ष तो इनके नजर में कहीं से है ही नहीं, बल्कि हिन्दू और मुसलमानके दो चक्कीके बीचकी पिसती पाटन है। अफसोस! समीक्षा के लिये और भी बहुत पक्ष हैं, कल भी मोदी ने अपनी एक विकासकी क्रान्तिकारी दृष्टिकोण हमारे समक्ष रखा है। क्यों न निरपेक्ष भावसे किसी नेताको ब्रान्डिंग किया जाता है? क्या है ये? कैसी धर्म निरपेक्षताकी ढोल हम पीटते हैं फिर? हरि: हर:!!

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      Well determined mindsets never fall from their solid decisions – they commit, they keep their words by living that through actions.

      Youths in Mithila have taken on the mission of making Mithila, however, the tendency of falling from commitments and changing the stands with times and again without fulfilling even a single promise is condemnable. Instead of proving their calibers they simply keep moving hither and thither.

      The shared link can show us what we thought then and what we are thinking now. It is nine months passed full of actions for those who are working with set mind.

      Harih Harah!!

      https://www.facebook.com/photo.php?fbid=520458834663940&set=a.189490751094085.39929.100000994846556&type=1&theater

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      Babu Janaki Nandan Singh 1953 – Rajya Punargathan Samiti, Bharat Sarakaar ke aagu gyaapan debaak lel shishtmandal la ke Kolkata jait samay Asansol me giraftaari delani, lagbhag 15 gote ke shishtmandal chhal. Kolkata me aaro lok intejaar me rahal je hinka loknik sang rahait Dr. Lakshman Jha ke nettritwa me bhet karabaak yojana rahaik.

      1947 AD me Janaki Nandan Singh ke sang Dr. Kanchi Nath Jha Kiran – Akhil Bharatiya Maithili Sahitya Parishad (Sariso), ke Darbhanga adhiveshan me Mithila Rajya ke maang ke ghoshna kail gel chhalaik.

      Dr. Laxman Jha aajeevan ehi lel prayaasrat rahala je vagair alag Mithila Rajya ham sabh nahiye vikash kay sakait chhi, na bhasha wa sanskruti ke asmita joga sakait chhi.

      Dr. Amar Nath Jha seho 1955 me khuli dosar adhiveshan me bajalaah je Mithila Rajya ke sthaapna jaruri.

      Mithila Rajya ke maang la ke Babu Janaki Nandan Singh Darbhanga Maharaj ke chunaw seho harene chhalaa – 1952 ke pahil chunaw me.

      Dr. Kanchinath Jha Kiran, Mahakavi Baidyanath Mishra Yatri, Babusaheb Choudhary (Dularpur/Kolkata), Harishchandra Mishra Mithilendu (Navada/Kolkata) je pahil ber 1932 me Vidyapati Parva Samaroh ke aadhunik adhishthaataa seho chhathi, Chandrakant Mishra (Aashi/Kolkata), Mahendra Narayan Jha (Belouja/Kolkata), Bindeshwar Mandal (Madhubani/Kolkata), Prof. Pramod Narayan Singh (Mithila Darshan patrika – Mithila Rajyak Mukhpatra likhait prakaashi ke sansthaapak sampaadak) (shuruwaati daur me ek bhasha ek desh ke samarthak lekin baad me Dr. L. Jha aa Kiran Jee lokni sa avagat bhela ke baad core Mithila Rajya samarthak), Dr. Jaykant Mishra (1965 onward), sanjukt socialist party aa praja socialist party jakhan sanjukt kewal Socialist Party of India rahaik taahi samayak nettrutwa Sooraj Babu, Dhaniklal Mandal, Karpuri Babu, etc. oho sabh alag Mithila Rajyak samarthan me baad me utarlaa, Bhogendra Jha (Ex-MP), Hukumdev Narayan Yadav (MP, Madhubani) lagaayat aneko lok Mithila ke alag rajya ker samarthan me rahala, chhathi aa rahabo karataa.

      E sabh ta bhel first line, aa second line me ek par ek saahityakaar, Mithila sa jural hare pramukh vyaktitwa aa buddhijeevi sadaib Mithila alag rajya ke roop me sthaapit ho taahi lel swayam ke defense line aa supporting line me tatpar rakhalaa. Ehi paati me Dr. Brajkishore Verma Manipadma (Bahera) agrani rahala. Dr. R. K. Raman (Rampatti), Satyanarayan Lal, Siyaram Saras, Ramlochan Thakur, Peetambar Pathak, Gajendra Narayan Choudhary, Vasukinath Jha, Daman Kant Jha, Mrityunjay Narayan Mishra (younger of LN Mishra, Bhaluwa Bazar – going against the other senior family members ke viruddho), Prof. Mayanand Mishra, Dinesh Chandra Yadav (Saharsa), lagaayat kateko samarpit rahalaa aa Mithila Rajya lel laralaah.

      Kichhu mahattvapoorn lok ke baad me realize bhelani aa lagabhag chauthapan me Mithila Rajya ke samarthan Maithili ke apan maatribhasha mani kelani – jena: Dr. Ramdhari Singh Dinkar, Fanishwar Nath Renu, Aarasi Prasad Singh, Markandeya Pravaasi, Bhuvaneshwar Gurmaita, etc.

      Baidyanath Choudhary Baiju dwara Mithila Rajya ke maang Dr. Dhanakar Thakur sa bahut baad me bhel achhi. Atah kono bhraamak samvaad dwara nav peedhi ke Mithila Rajya aandolan ke galat picture prastut karab ke ham naitik roop sa virodh karait e khulasha kay rahal chhi.

      Jaankaari ke srot: Uparokt aneko vyaktitwa aaiyo jeebite chhathi aa yadi Mahadhiveshan call kail jaay ta ohi me khuli ke charcha karaayal ja sakait chhaik.

      Harih Harah!!

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      श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, ज्ञान हमरो दऽ दियऽ!
      दऽ दियऽ वरदान हमरोऽ, ज्ञान हमरो दऽ दियऽ!

      नीक घर-वर ओ कहियो भऽ सकैत अछि गौरवजी जे अहाँक बहिन-बेटीक विवाह लेल मुँह खोलि पाइ वा गहना वा आधुनिकता झाडयवाला विभिन्न तरहक माँग राखैत अछि…. ई एकदम नहि देखैत अछि जे अहाँक बहिन कतेक पढली-लिखली, हुनकर भविष्य ओहि परिवारमे कोन तरहें सजतैन-बढतैन…. कोन तरहक संतानक उत्पत्तिसँ नीक कुल-मूलकेर सुरक्षा होयत आ मानव समाजकेर हित होयत…. ओकरा मात्र विवाहक सुअवसरपर फूटानी अहाँक पाइपर मलफाइ उडाबय टा पर आ अहाँक सम्पत्तिपर कूदृष्टि रहैत छैक…. ई नहि बुझैत अछि जे अहाँक परिवारक बेटी-बहिन ओकर परिवारक लक्ष्मी बनि पति, परिवार, समाज व राष्ट्रकेर हित करत… बल्कि ओकरा तऽ मात्र एहि पर ध्यान रहैत छैक जे कतेक भौतिकवाद बरसात होयत… एहेन कूकर्मी-पापाचारीकेँ नीक बुझैत अहाँ दहेज गाइन अपन बेटी-बहिनकेँ ‘नीक परिवार’ बुझैत जँ पठबैत छी, ताहिसँ बहुत नीक जे भ्रुणहत्या करैत बेटीकेँ एहि पृथ्वीपर आबयसँ पहिने सेटिंग कय दैत छियैक।

      दहेज यानि कोनो पक्षक इच्छाविरुद्ध माँगरूपी शर्त थोपि अनावश्यक दु:खक कारण बनब कूप्रथा थिकैक…. जँ दहेजक शुद्ध स्वरूप जे स्वेच्छासँ अहाँ अपन बहिन-बेटी लेल खर्च करैत दान देबाक लेल स्वयं तैयार छी आ ताहिसँ ओकर एक नीक भविष्य बनेबाक कार्ययोजना वरक परिवारकेँ दैत छियैक, वा वरक परिवारक मनोदशाकेँ बुझैतो यदि ताहि तरहक विशुद्ध मिलनसारिता संग नकद, गाडी, घोडा, हाथी, पोखैर, चौरी, चर, पहाड, जंगल जे किछु दान देबैक ओ सबटा शुद्ध आ मान्य छैक। ओ पापाचार कथमपि नहि। ओहने विवाह सँ जे पुत्र-पुत्री एहि पृथ्वी पर औतैक ओ शुद्ध सुसंस्कृत, नहि तँ ‘तेरे-को – मेरे-को’ जन्मैत रहत आ मिथिलाक विध्वंस करैत रहत।

      दहेज मुक्त मिथिला ताहि लेल एहेन अभियान थिकैक जे मात्र लोककेँ सोचैत मानसिक परिवर्तन लेल प्रेरित करैत छैक, नहि कि केकरो ठोंठ धरैत कहैत छैक जे सरबे ओ जे पाइ लेलहक से घुमा दहक… बुस्चो…. कियो अपन इच्छा सऽ किछु करय, संस्थाक पंचायती ओहि लेल नहि, समाजमे सिद्धान्त आ परिवर्तन लेल लोक सोचय ताहि तरहक आयोजन करबाक मात्र छैक।

      हरि: हर:!!

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      Alas! As a young and learned guy, you fail to understand the meaning of republic and state. Demand of state in a republican country is not break it, rather make it stronger by installing better governance and think for developing the people together with conserving some specific and dignified civilization. For example, which I know, you are no way aware, as you are never taught anywhere in your courses of studies, Mithila has gifted the nation with important philosophic ordinances – Nyay, Sankhya, Vaisheshik, Mimansa – 4 significant gifts which make India the spiritual educator of this world. Indeed, that is Mithila. What has it given in last 100 years of being under the colonialism of an imposed identity of Bihar and Bihari? Have you ever pondered? Why your or other brains are simply taught to come, live and die? How, on such scale of foolish mentality, do we/you think ever the betterment of our nation? I want you to reply me point to point and share your wisdom rather than blaming somebody demanding a separate state – the divider of the nation. Please mind your blurting publicly such a cheap word, please. Harih Harah!!

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      जिम्मेवारी बहुत बडी चीज होती है भाई! आपको दिये शब्द अनुरूप काम शुरु है। बहुत कुछ सीखनेको मिल रहा है और संयोगवश आपके इस महान कीर्तिसे हमारे मित्रोंको भी कुछ पढने-समझनेका अवसर फेसबुक पर मिल रहा है। आपके पुस्तकके लिये लिखा भूमिका से एक पाराग्राफ हिन्दीमें इस प्रकार है।

      अब से ढाई हजार वर्ष पहले गौतम बुद्ध ने उत्तरकालीन वैदिक कर्मकाण्ड और पशु बलि का विरोध किया था। वे जाति प्रथा के भी विरोधी थे। किन्तु बौद्धधर्म के सम्बन्ध में एक आश्चर्य जनक तथ्य यह है कि आज जिन मान्य ग्रन्थों का पठन-पाठन बौद्ध धर्मानुयायी करते हैं उनके अधिकतर रचयिता ब्राह्मण थे और उन्होंने ये ग्रन्थ संस्कृत भाषा में लिखे। इसी प्रकार जैन मत के अनेक ग्रन्थों के रचयिता ब्राह्मण थे। मुस्लिम शासन काल में भी ब्राह्मणों ने अपनी विद्वता तथा सदाचरण के कारण सम्मान पाया। आईने अकबरी में अकबर के दरवार के जिन विद्वानों की सूची दी गई हैं, उसमें बडी संख्या में ब्राह्मण विद्वानों के नाम दिए गये हैं, वे विद्वान् बंगाल, बिहार, मालवा, गुजरात आदि दूरवर्ती स्थानों से बुलाये गये थे। उनको सम्मानपूर्वक वृत्तियाँ और उपाधियाँ प्रदान की जाती थी। मुगल दरवारों में परम्परागत रूप से हिन्दी के अनेक कवि रहते थे जिनमें ब्राह्मण कवियों की विशाल संख्या थी। अत: आजकल ब्राह्मणों का विरोध करने के लिये जो आक्षेप लगाए जा रहे हैं उनका कोई दृढ या वैज्ञानिक आधार नहीं हैं। वे केवल राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिये लगाए जा रहे हैं।

      इस इतिहास ग्रन्थ से ब्राह्मण समाज की युग-युग की साधना का परिचय मिलेगा और अनेक भ्रांतियाँ दूर होंगी। इसके लेखक श्रीयुत डोरी लाल शर्मा ‘श्रोत्रिय’ ने ब्राह्मण समाज के लिये एक महान कार्य किया है। इसके लिये उन्हें जितना भी साधुवाद दिया जाए वह थोडा ही होगा। यह ग्रन्थ आने वाली पीढियों के लिये एक प्रकाश स्तम्भ का कार्य करेगा ऐसा हमारा विश्वास है। हमारी शुभकामना है कि श्री श्रोत्रिय जी इसी प्रकार समाज के हितार्थ कार्य करते रहें और सबके लिये एक आदर्श प्रस्तुत करें।

      हरि: हर:!!

      Rajesh JhaRajesh RaiRajesh ThakurRajesh ChoudharyRajesh AhirajRajesh Kumar DasRajesh YadavRajesh JhaRajesh ThakurRajesh SinghRajesh Kumar YadavRajesh KumarRajesh JhaRajesh Choudhary Rajesh Yadav Rajesh TiwariRajesh PathakRajesh KumarRajesh JhaRajesh MishraRajeshkumar Jha Rajesh Chaudhary Rajesh Singh RathoreRajesh JhaRajesh PaudelRajesh RanaRajesh RanjanRajesh ThakurRajesh KumarRajesh ChaudharyBarange RajeshRajesh Kumar Jha

      Amar Nath JhaAmar Kant JhaAmar Kant JhaAmar ChoudharyRajendra BimalBimal KumarBimal JhaBimal Chandra JhaSushil BimalKamal Nath ThakurKamal RimalKamal Kishor Mishra BittooKameshwar Jha KamaljiAmresh Narayan JhaMadan Kumar Thakur

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      मेरे प्यारे शिष्यों,

      मातृभाषासे विद्रोह नहीं, द्रोह लेकिन वो करते हैं!
      ‘शर्म’ से ‘आत्मविश्वास’ खो वे दूसरोंकी बोलते हैं!!

      तुमलोगों ने बहुत बार पूछा है कि आखिर लोग अपनी ही भाषा बोलनेसे क्यों कतराते हैं, ये कहीं विद्रोह तो नहीं…. मेरा मानना है कि यह विद्रोह नहीं बल्कि मजबूरीवश एक द्रोह तो जरुर है। इसे भ्रमकी स्थितिमें – नासमझी के कारण अपनी भाषाका प्रयोग करनेमें शर्म करने जैसी परिस्थितिका निर्माण होनेसे लोग ये सोच बैठते हैं कि यदि औरोंकी भाषाका प्रयोग हम करेंगे तो लोग मुझे जानकार और समझदार समझेंगे।

      शर्म जब वो खुद हैं करते, बोलो क्या करे उनके बच्चे
      उन्हें कहाँ यह ज्ञान मिलता – ब्रह्म आखर माँसे सच्चे!!

      दूसरी बात कि तुमलोग देखते होंगे लोग अपने बच्चोंको भी अपनी ही मातृभाषासे दुर जानेको उकसा रहे होते हैं, खासकर जब औरोंको देखेंगे तो कुछ अधिक ही आधुनिकता झाडनेके लिये अन्जानेमें ही अपनी अज्ञानतासे वो ‘ब्रह्म-अक्षर’ जो माँके दूध पीते असल प्यार पाते प्राकृतिक तरीके से ही बच्चे सीखते हैं और उसी भाषासे उनका समझ मजबूत भी बनना तय है…. लेकिन आधुनिकताकी फैशनमे सराबोर आजके माता-पिता खुद तो भटकते आत्मा जैसा वर्ताव करते ही हैं, बच्चोंमें भी शुरुसे ही प्रेतात्माका वास दे देते हैं।

      प्रण करो कि मातृभाषा से द्रोह नहीं करेंगे,
      पहले अपनी माँ को प्यार देंगे,
      फिर जितनी मौसियाँ मिलेंगी, स्वागत सभीका करेंगे!
      माँ से ही मौसियाँ हैं, इसे बखूबी समझेंगे!

      हरि: एव हर:!!

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      १०म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन

      स्वतंत्रता पूर्वहिसँ कठोर संघर्ष करैत जाहि मैथिलीकेँ अन्ततोगत्वा आइ सँ करीब दस वर्ष पहिने २००२-०३ ई. मे भारतीय संविधानक आठम अनुसूचीमे भारतीय संसद द्वारा संशोधन प्रस्तावक मार्फत ससम्मान स्थान देल गेल ताहि सुअवसर यानि २२ दिसम्बरकेँ मिथिलामे ‘अधिकार दिवस’केर रूपमे मनाओल जाइत अछि। अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समितिक आह्वान पर एहि दिवसकेँ “अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन” मनेबाक परंपरा निरंतरतामे चलि आबि रहल अछि। एहि बेरुक दसम् अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन पटेल मैदान, हर्मु (राँची) मे २२ आ २३ दिसम्बरकेँ मनाओल जयबाक सूचना भेटल अछि।

      समस्त विश्वमे प्रवास करनिहार मैथिलकेँ एकठाम अनैत मिथिलाक सर्वांङ्गीण विकास लेल एकजुट होयबाक पवित्र उद्देश्यसँ कैल जा रहल ई सम्मेलन विगतमे दुइ बेर भारतक राजधानी दिल्ली, भारतहिकेर महानगरीय क्षेत्र यथा कलकत्ता, मुंबई आ चेन्नई मे एक‍-एक बेर, लक्ष्मीपति विष्णुकेर प्रसिद्ध नगर बालाजी तिरुपतिमे एक बेर, कामाख्या माइक नगरी गुवाहाटीमे एक बेर, बाबा पशुपतिनाथक क्षेत्र ओ नेपालक राजधानी काठमान्डुमे एक बेर आ माताक हृदयस्थली पर विराजित कामना लिंङ्ग रावणेश्वर महादेव यानि बाबा बैद्यनाथकेर नगरी देवघरमे एक बेर लगायत कुल ९ बेर ई आयोजित भेल अछि। तहिना एहि बेर झारिखण्डक राजधानी ओ विरसा मुण्डाक नगरी राँचीमे ई दसम आयोजन होमय जा रहल अछि।

      आयोजक पक्षक संयोजक श्री मणिकान्त झा कार्यक्रमकेर व्योरा दैत कहैत छथि “अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन प्रत्येक वर्ष ‘मैथिली अधिकार दिवस’केर रूपमे २२-२३ दिसम्बर मनेबाक परंपरा रहलैक अछि। भारतीय संविधानसम्मत कुल २४ भाषाक विद्वान् लोकनिकेँ ताइक-ताइक ‘मिथिला रत्न’सँ सम्मानित कैल जाइत छैक। तहिना मैथिली भाषा एवम् मिथिलामे खेल गतिविधि, पत्रकारिता, समाजसेवा आदि विभिन्न क्षेत्रमे विशिष्ट योगदान देनिहार व्यक्तित्व सबकेँ सेहो ‘मिथिला रत्न’सँ सम्मानित कैल जाइत छैक। मैथिल अपन पहिचानक विशिष्टताकेँ प्रदर्शन करबाक लेल मिथिलाक परिधान धोती-कुर्ता-पाग-दोपटाक संग शोभा यात्रा निकालैत छथि। ई शोभा-यात्रा पटेल चौकसँ कुन्ड्रू मोड जतय विद्यापति चौक छैक ताहि ठाम तक जायत। कार्यक्रममे सेमिनार “भ्रष्टाचार प्रति बढैत जनाक्रोश आ मिथिला” विषयपर राखल गेल छैक। अयाचीक मिथिलामे एहि रोगसँ लोक कोना दूर रहल अछि तेहेन संदेश देश भरिमे प्रसारित करैत समसामयिक समस्याक निवारण तकबाक एक प्रयास हेतैक ई सेमिनार। सर्वभाषा कवि सम्मेलन सेहो राखल गेल छैक। तहिना मिथिलाक हरेक समारोहमे सांस्कृतिक कार्यक्रमकेर अपन गरिमा रहबाक कारणे सैकडों कलाकारलोकनि द्वारा अनेको प्रस्तुति सहित ई सम्मेलन कैल जायत।”

      सम्मेलनमे भारत, नेपाल तथा विभिन्न अन्य देशक मैथिलकेर सहभागिता सुनिश्चित कैल गेल छैक। सदेह उपस्थिति जतेक संभव छैक से आ यदि कियो अयबासँ असमर्थ छथि तँ हुनकर विचार वा संबोधन सेहो समारोहमे आधुनिक संचार माध्यमसँ करेबाक नियार छैक। डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजु सहित अेनको गणमान्य नेतृत्वकर्ता आ मिथिलाक ध्वजावाहक कतेको अभियानीक उपस्थितिसँ ऐगला किछु दिन धरि झारखंड राजधानी मिथिलामय रहबाक बात तय छैक।

      हरि: हर:!!

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      नेपालक संविधानमे मिथिला राज्यक अवधारणा

      राजविराज, मिथिला (नेपाल)

      नेपालमे हालहि संपन्न दोसर बेरुक संविधान सभा चुनाव बाद एक तरफ राजनैतिक माहौल गरम अछि, विभिन्न जीतल-हारल दल सब आपसी समीक्षा करयमे जुटल अछि, समानुपातिक प्रणालीसँ विभिन्न दलकेँ भेटल सीटपर केकरा निर्णीतरूपमे सभासद बनाओल जाय ताहि बातक घमर्थन सहित नव सरकार गठन करबाक लेल केहेन जोड-तोड होयत एहि समस्त बातक आकलन कैल जा रहल अछि। ततहि दोसर दिशि नव संविधान सभा द्वारा नेपालमे गणतंत्र स्थापित करबाक लेल विभिन्न सामाजिक व सरोकारवाला संस्था सब सेहो विचार-विमर्शमे लागि गेल छथि जे आगामी समयमे कि कैल जाय आ कोना जनताकेँ अधिकारसंपन्न बनबैत राष्ट्रकेँ आगू बढाओल जाय। एहि क्रममे काल्हि ‘मिथिलाक अनुपम डेग’ नामक संस्था द्वारा राजविराजक केशो अनिरुद्ध विद्यालयमे “आबयवाला संविधानमे मिथिला राज्यक अवधारणा” विषयपर विचारगोष्ठीक आयोजन कैल गेल अछि।

      “एहि विचारगोष्ठीमे मिथिलाक ‘जिन्दा-शहीद’ उपनामसँ प्रसिद्ध मिथिला राज्य संघर्ष समितिक संयोजक परमेश्वर कापडिजीकेर प्रमुख आतिथ्य रहत, संगहि भारतमे मिथिला राज्य लेल संघर्षरत युवाविशेष संस्था ‘मिथिला राज्य निर्माण सेना’क राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम सुन्दर झा, सप्तरी क्षेत्र नं. २ सँ निर्वाचित सभासद माननीय अशोक कुमार मंडल विशिष्ट अतिथिक रूपमे काल्हि अपन सारगर्भित विचार प्रकट करता। मिथिलाक युवाजनमे मिथिला राज्य लेल जेहेन जोश आ अपेक्षा जाइग रहल अछि तेकरा आरो उत्साहित आ आशान्वित करबाक लेल विशिष्ट वक्ता सब सेहो भाग लेताह, जाहिमे भारतसँ मिथिलाक युवा नेता अनुप कुमार मैथिल व संजय कुमार झा, राजविराजसँ डा. सुनील झा, मैथिल जागरण मंच अध्यक्ष ओसीन मियाँ, अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद् केर नेपाल अध्यक्षा करुणा झा, मैथिली साहित्य परिषद् सँ देवेन्द्र मिश्र, मैथिल महासभाक संयोजक विष्णु मंडल, विवेकानन्द मिश्र, प्रा. अमरकान्त झा
      सहित आन-आन वक्ता लोकनि अपन विचार रखता। कार्यक्रमकेर अन्तमे एक घोषणापत्र जारी कैल जायत जे सभासद महोदयकेर मार्फत नेपालक संविधान सभातक पहुँचेबाक योजना अछि।” आयोजक समितिक संयोजक व मिथिलाक अनुपम डेग केर सचिव निराजन झा सूचना देलैन।

      हरि: हर:!!

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      २० दिसम्बर २०१३

      बुधियार छौंडा आ राजनीति

      फूलचन्द्र शर्मा ‘श्रोत्रिय’ – प्रेमसँ पुकारल जाइत रहल फूलबा! खचरक आइड जे धियापुताक नंगटइक कारण विशेषण भेटैत छैक ताहिसँ विभूषित। विद्यालयमे पहिल घंटीसँ अन्तिम घंटीतक खुरापाती दिमागसँ किछु टेनामनी करिते टा छल। कखनहु कियो तऽ कखनहु कियो ओकर शिकायत मास्टरसाहेबकेँ कहैत छलन्हि आ २ छडी मारैत ओकरा दोबारा फेर ओ गलती करबाक लेल नहि कहि कक्षामे पठा देल जाइत छलैक। लेकिन ओ छौंडा चोटभुस्सूक बनि गेल छल, तैयो दिमाग ओकरा बुझबैत रहैक जे वैह गलती नहि लेकिन दोसर तँ कैले जा सकैत छैक… कि हेतैक, २ छडी आरो सही, लेकिन गलती पर गलती करैत रहि गेल फूलबा। एवम् क्रमसँ ओ जखन मैट्रीकमे गेल तऽ एक दिन ओकरा विद्यालयकेर सबसँ बेसी लोकप्रिय मास्टरसाहेब बजाकय कहलखिन जे देख फूलबा, भले बदमस्तीमे मुदा तोहर दिमाग कम नहि छौक। तोँ जँ चाहमे तऽ ओतबा बुधियार बनि सकैत छेँ! ई बात ओकरा बुझबामे सेट कऽ गेलैक। ओ तहिये हँसैत मास्टरसाहेबकेँ देखैत रहल चुप्पे मुदा मोने-मन धरि शप्पथ खा लेलक जे आब बुधियार बनबाक नवका प्रयोग जरुर करत। देखा चाही जे बुधियार बनि कय कि होइत छैक! 

      हौ बाबु! ओ तऽ सही मे तेना बुधियार बनि गेल जे आब ओकरा बिना कक्षा सून्न लागय लगैक। सब मास्टरसाहेब भालचन्द्र बाबु (लोकप्रिय मास्टरसाहेब)केँ बेर-बेर धन्यवाद देथिन जे अपने जहियासऽ ओकरा गुरुमंत्र देलियैक तहिया सऽ तऽ फूलबा मानू जे एकदम आदर्श विद्यार्थी बनि गेल अछि। कतेक बेर फूलबाक सोझाँमे सेहो प्रशंसा करबासँ लोक नहि चूकैत छल। चारूकात तूती बाजय लागल – बुधियार फूलबा, बुधियार फूलबा….. एम्हर फूलबा धरि मोने-मोन बदमाशे छल आ सोचैत छल जे देखियौ, मात्र नाटक पर तऽ लोकक ई हाल छैक जे बुधियार-बुधियार के रट्टा मारैत रहैत अछि। कनेक आरो प्रयोग बढा दैत छी। देखा चाही जे बुधियारक सीमा कि होइत छैक। ओ आब मोनिटर बनिकय कक्षाक सब विद्यार्थी सबहक नेता बनि गेल। एक-एक विद्यार्थीकेर समस्याकेँ अपन जिज्ञासा सँ बुझैत ओकर समाधान निकालबाक भरपूर चेष्टा करय लागल। केकरो लाइब्रेरीसँ किताब दियाबैक, तँ केकरो पुअर ब्वाइज फंडसँ परीक्षा फीस दियाबैक…. होइत-होइत फूलबा आब भैर विद्यालय केर एकछत्र नेता बनि गेल छल। हलाँकि विद्यालयमे ओकर ई रुतबा कनिये दिन रहलैक ताबत ओ टेस्ट परीक्षा पास करैत फाइनलकेर तैयारी लेल बहरा चुकल छल…. लेकिन ओकर बुधियारी आ राजनीति दुनू ताबे तक खूब प्रसिद्धि पाबि गेल छलैक। लोक प्रशंसा करैक, लेकिन फूलबा मोने-मोन हँसैत रहैत छल। ओकरा तऽ एखनहु बदमाशिये बुझाइत छलैक, कारण ओ बुधियार तऽ बस देखबय लेल बनि गेल छल, भीतर तऽ ओ खचरइ ओहिना छलैक, बरु ओकरा एना लगैक जे आब ओकर ओ खच्चरपन जुआन भऽ गेल छलैक। ओकरामे बहुत रास नव प्रयोगक यानि बुधियार बनबाक देखाबटीक चलते आरो परिपक्वता बढि गेल छलैक।

      आब ओ कालेजमे पहुँचि गेल आ शहरक कालेज जतय अलग-अलग गामसँ छात्र-छात्रा सब आयल छलैक ततय ओकरा एना लगलैक जे कियो चिन्हि नहि रहल अछि…. से फेर शुरु तँ बदमाशिये सँ करय पडत। कारण एतय के-कतेक बुधियार अछि तेकर पहिचान होयबामे कनेक समय लागि जायत। लेकिन बदमस्ती करैत शुरु करब तऽ बड जल्दी पोपुलर भऽ जायब। ओ सोचैत-सोचैत निर्णय केलक जे आब ओ धियापुतावला बदमस्ती करब से नहि शोभा देत… तऽ आब जे फर्स्ट ईयरवला बदमस्ती होइत छैक…. यानि फिल्म फूल आ काँटा मे जेना अजय देवगन करैत छैक तेना करब आ कलेजिया छात्रा सबसंग हिरोपनी देखबैत शुरु करब। खूब स्टाइलमे कपडा पहिरब। बापक देलहा पाइसँ पहिने एगो हिरो रेन्जर साइकिल कीनब। बूटवाला जुत्ता आ जीन्स पहिरब। कहियो-कहियो मंगलहबो मोटरसाइकिल लेकिन वैह चढि कलेज जायब…. आदि। सहीमे फूलबा कनिये दिनमे कालेजमे सेहो प्रसिद्ध लफुआ बनि गेल। लफुवइ मे लेकिन ओकरा राजनीतिक जीवन खतरामे बुझेलैक…. तखन ओ तुरन्त दोसर रूप यानि विद्यालयकेर अनुभवसँ क्लासमे अपन लफुवे मित-मितनी सबहक झमेलाकेँ संबोधन करैत प्रोफेसर साहेब सब पर इम्प्रेशन आ क्रमश: अपन प्रभावशाली कुशाग्रतासँ जल्दिये ओ कालेजमे सेहो नेता बनि गेल। विद्यार्थीवाला कोनो संगठनमे ज्वाइन केलक आ फेर सीढी-दर-सीढी चढैत ओकर राजनीति चमैक गेलैक। मुदा ओ मोने-मोन आइयो बदमस्तीमे रमल छल।

      फूलबा ग्रेजुएशनकेर डिग्री लेलक आ ओकरा युवा नेता मानि एगो पार्टी (नवका) ओकरा चुनाव लडय लेल गछलकैक। फूलबा आब मुंगेरीलालवाला सपनामे अपन आँखि मिचमिचबैत बुझू जे कनाह बनि गेल छल। धरि ओ आब अपना केँ विधायक बनेबाक लेल पूर्णरूपेण तैयारीमे बदमाशी-बुधियारीक ब्लेन्ड जे ओ स्कूल-कालेजमे अपनौने छल से प्रयोग करबाक प्लान बनेलक। ओकरा लेकिन आब किछु बेसी मेहनत करय पडि रहल छलैक, कारण आब ओ सिविक-सोसाइटीकेँ फेस करय जा रहल छल आ ओकर इमैच्योरिटी ओकरा कतहु-कतहु गडबडा दैत छलैक। बा-मोस्किल ओ अपन युनिक ब्लेन्डकेर प्रयोग करय लेल आतूर बनि गेल। ओ ताइक-ताइक कय पुरनका स्थापित नेता सबहक डाटा सब डिकोड करय लागल। खने ओ विकासक डाटा तँ खने ओ निर्वाचनक डाटा सब पर काज करय आ दिन-राइत बदमस्ती-बुधियारीक ब्लेन्डसँ अपन खुरापात-होशियारी देखबय लागल। सिविक सोसाइटीमे सेहो ओकर विभिन्न घोषणाक असैर पडय लगलैक। आमसभाक चुनावमे ओ अपन भाग्य अजमेलक। ओहि ठाम लेकिन ओ पहिल बेर पास नहि भेल धरि तेसर स्थानमे रहल। लेकिन ओकर हिम्मत बनल रहलैक। बाबु, भैया सब ओकरा बोल-भरोस दैत रहल आ बेर-बेर प्रयाससँ एक दिन ओ नेता बनत से कहि ओकरा धैर्य रखबाक लेल कहल जाइत रहलैक। लेकिन फूलबाक मोने-मन हँसी लगैत रहलैक आ ओ अपन भितरिया बदमस्ती मुदा देखौटी होशियारी सँ क्षेत्रक सेवा रोजगार उपलब्ध करेबा आ सूचना केन्द्र खोलि सार्वजनिक हितक कार्य करैत रहबाक प्रण लेलक। फूलबाक भविष्य पर ध्यान छैक, ओ ऐगला चुनाव मे नहि प्रथम तँ दोसर जरुर आयत आ ताहि सँ ऐगला बेर ओ प्रथम पक्का बनत। तेकर बाद ओ अपन बदमस्ती-बुधियारीक ब्लेन्ड आधारित नव राज्य गठन करबा धरि अपन जीवनक लक्ष्य मानैत अछि। लेकिन ओ ततेक सोचैत अछि जे अपनो सोचलहबा कहियो कार्यरूपमे नहि अबैत छैक आ बेर भेलापर ओ बेसीकाल असफल बनैत अछि। धरि फूलबा हिम्मत नहि हारल अछि।

      क्रमश:……

      फूलबा सेहो ऐगला चुनावक इन्तजार कय रहल अछि आ हमर पाठक सेहो ताबत इन्तजार करता। लेकिन अपन प्रतिक्रिया धरि जरुर लिखता से अनुरोध अछि। हाँ, संयोगसँ फूलबा मिथिला राज्यक आन्दोलनमे सेहो जुडबाक योजना बना रहल अछि, ई बात लेखककेँ कानमे कहलकैन अछि। 

      हरि: हर:!!

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      मात्र नाच-गान? यौ, कम सऽ कोनो कार्यक्रमकेर भूमिका तँ पता लगायल करू…. पत्रकार बनि गेलहुँ आ पत्रकारिताकेर एको गुण-धर्म नहि….??? अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन विगत कइएको वर्ष सँ होइत अछि, एहिमे चिन्तन शिविर, घोषणापत्र, भारतीय संविधानक आठम अनुसूचीमे सूचीकृत सब भाषाकेर विद्वान् केँ उत्कृष्ट सेवा लेल सम्मान, मिथिला राज्य लेल आगांक निर्णय, विगतमे कैल गेल कार्यक समीक्षा आ सबसँ बेसी जे यत्र-तत्र छितरायल प्रवासी मैथिलमे अपन मातृभूमि प्रति जोडि रखबाक महत्त्वपूर्ण कार्य सब होइछ। निस्सन्देह मिथिलावासी छी आ जन्मसँ मरणतक गान करबाक आदी छी तँ मैथिली गीतक सुमधुरतासँ परिपूर्ण रहबाक आनन्द सेहो भेटि जाय तँ सोनपर सोहागवाली बात होयत। एक सऽ बढि कय एक विद्वान् आ नेतृत्वकर्तासंग नजदीक सँ भेट-दर्शन करबाक मौका भेटत। आरो बहुत तरहक लाभ एक अभियानीक रूपमे भेटत। नाचक कि जोगार होयत से नहि कहि! लेकिन सब तरहें हमरा सभ वास्ते एहेन कार्यक्रमकेर बड पैघ महत्त्व बनत। हरि: हर:!!

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      १९ दिसम्बर २०१३

      आइ सहीमे कोनो फन्नी डे बुझा रहल अछि…. भिनसर सँ जतेक समाचार आबि रहल अछि ओ सबटा तेहने-तेहने……

      आब १० लाख फेसबुक लाइक दौक तखन ओ अपन बेटीक विवाह लेल राजी होयत। दहेजकेर नव रूप आ सेहो बेटीक विवाह करबा लेल….. 

      ओना ई बात सही छैक जे मिथिलामे सेहो घटक औनाय बन्द कय देने छैक आ बेटीक विवाह लेल पहिले जेकाँ अनेरौ माय-बाप चिन्तित नहि अछि, बेटीकेँ पढा-लिखा कय आत्मनिर्भर बनेनाय मात्र माता-पिता अपन कर्तव्य मानैत छथि। विवाह लेल आब बेटावला बेसी सम्पर्क बनबैत छथिन आ दुनू पक्ष मिलि-जुलि कय विवाह-खर्च करैत विवाह करबालेल तय करैत छथि।

      जय दहेज मुक्त मिथिला!! 

      हरि: हर:!!

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      हाहाहा!! मजा आबि गेल। अही सबपर कहल गेल छैक, जखन गीदरकेर मृत्यु अबैत छैक तखन ओ शहर दिशि दौडैत अछि। आ मैथिलीमे कहबी छैक जे जखन बानर बड होशियार बनि जाइत अछि तखन बाँसमे फाँगय लेल जाइत अछि आ अंडकोष चेपा जाइत छैक…. बेचाराक प्राण परित्याग करय पडैत छैक। आप जाहि तरहें दिल्लीमे विधानसभाक चुनामे प्रदर्शन केलक तेकर जगह बनैत छलैक, दिल्लीक हवामे काँग्रेससँ छुटकारा पौनिहार आप दिशि मुडल। लेकिन भाजपा प्रथम दल यानि सबसँ बेसी मत पाबि अपन दावेदारी कतहु सँ कमजोर नहि पौलक। निस्सन्देह बहुमतकेर गणितमे भाजपा पछैड गेल…. तेकर माने आब एहेन शख्सियतकेँ चुनौती ठोकब जे देशक प्रधानमंत्रीक तौरपर पहिल बेर राष्ट्रमे पहिने सँ प्रस्तुत छथि – एतेक पैघ महात्त्वाकांक्षा हमरा सचमुच नैतिक शिक्षामे रदरफोर्ड आ राबर्ट्सनकेर कथा स्मृतिमे आनि देलक। भारतीय राजनीति नीक दशासँ गुजैर रहल अछि। क्रिकेट मैच आ भारतीय चुनाव – दुनू ओतबी रुचिगर। सरबे, जनता जाउथ तेल लेबय लेल!! 

      हरि: हर:!!

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      ई तय बात छैक जे कोनो गंभीर विषय रखलो पर ५-१० मैथिल आपसेमे भिडन्त खोजय लगैत छथि….. दुखद!

      विषय देने छी, ताहि पर अपन पूर्ण विचार राखू। आ चैत-चैत खेलेबाक हो तँ संध्याकालक सेशनमे जरुर खेलाउ, कारण ओहि समय हमहुँ भाँग-ताँग देने रहैत छियैक, टाइट दिमाग सँ बाँस-बाँस, चैत-चैत…. कब्बड्डी, उठा-पटक, गुदुरगाँइ, जे खेलाउ। हिहिहि!

      भिनसरकाल कनेक स्वाध्यायकेर समय रहैत अछि। एहि समय जतेक बात लिखैत छी आ कहैत छी तेकरा पर ढंग सँ मनन कैल करू। क्षमता हो तखनहि किछु लिखबाक हिम्मत करब सेहो पता अछि। ओना अहाँ लेल कतेको रास छीट-मनसापति यानि छीटखोपडी बौआइत भेटत फेसबुक केर फँसनी-फैशन मैदानमे!

      बम शंकर कैलाशपति!!

      हरि: हर:!!

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      प्रतिपक्षको दमन करनेवाली नीतिसे भारत कमजोर हुआ!

      भाजपा और मोदीके नामसे हौक्स फैलानेवालोंने देशकी स्वतंत्रताके बादसे ही धर्म निरपेक्षता और आपसी सौहार्द्रताको अपने तरीके से परिभाषित करके लोगोंको गुमराह किया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन से लेकर ऐसे हिन्दूवादी संगठनोंको ब्लैक-ब्रान्डिंग किया जिससे भारतमें कहीं भूल से प्रतिपक्ष मजबूत न हो जाये। कमजोर प्रतिपक्षके कारण ही भ्रष्टाचारिता और मनमानी राज्य-प्रणालीसे देशको जितना आगे जाना चाहिये था उतना आगे नहीं जाने देनेका दोषी है देशकी एकमात्र मजबूत राष्ट्रीय राजनीतिक दल जिसपर आत्मनिरीक्षण करे और राष्ट्रको अग्रगामी निकास देने के लिये अपनी मजबूत प्रतिबद्धताके साथ रहे। वास्तवमें जिस मोदी ने अपने प्रखर प्रशासन और शासनसे गुजरातकी जनताका भलाई किया है और विश्वमें भारतकी छविको मजबूतीसे रखा है उसका प्रशंसा ना करके फिर से लोगोंमें धर्मके नामपर मोदीको खतरनाक हिटलर जैसा प्रस्तुत करके और विभिन्न तरीकेसे आम नागरिकों खासकर जिसे काँग्रेस अपने पाकेटका माल समझकर वोटबैंक जैसा इस्तेमाल किया है उन्हें ध्रुवीकरणकी राजनीतिमें बदलाव के विरुद्ध खडा रखनेके लिये सारी शिगुफायें छोड रही है। भारतमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधनकी सरकार मजबूत शासन व्यवस्था और जनप्रिय सरकार देकर साबित कर दिया था कि काँग्रेस अकेला समाधान नहीं है। यदि ईन्डिया साइनिंग और फील गुड जैसे नारा चले थे तो अटल बिहारी वाजपेयी और उनका सफल नेतृत्वका तूती बोल रहा था इसीलिये…. लेकिन भारत मिश्रित धर्म-संस्कृतिका देश होते हुए अभी भी पूर्ण साक्षरतासे काफी दूर और गरीबी से पूर्ण छूटकारा नहीं पाया है। दोष शासन चलानेवालोंपर जाता है। सिद्धान्तोंपर जाता है। आखिर जो मिलना चाहिये वो तो मिल नहीं रहा, परन्तु कूराजनीतिके बोली और दंभ चलते-फिरते मिल रहा है। भारतको अपनी पौराणिक दर्शनसे राज्य शासन चाहिये।

      हरि: हर:!!

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      Come and ponder!

      See here, the official website of Bihar State Tourism Development Corporation. The page which link is being shared here would speak itself. The key word ‘Mithila’ is not mentioned anywhere. Sita is said to be the daughter of King Janaka of Janakpur, not Mithila.  And, go on viewing the rest of pages, please show me anywhere Mithila depicted with a little of its great significance. You will find none. What this shows? Can Bihar digest Mithila??

      Harih Harah!!

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      अफसरशाही – लालफीताशाही लेल आफन्न किऐक?

      विश्वकेर सबसँ पैघ लोकतंत्रमे भले कानूनी उपचार, शिक्षा-दीक्षा, रहन-सहन, समाजिक व्यवहार आ लगभग हरेक पहलूमे मात्र आ मात्र आर्थिक अवस्थाक सुदृढतासँ न्याय भेटैत छैक तँ अमेरिका लगायत किछु पश्चिमी मुलुकमे ‘मानव अधिकार’ सर्वोपरि छैक। एखन धरिक जे नैयायिक अध्ययन भारतीय दुतावास अधिकारी ‘देवयानी खोबरागडे’ केर पढलहुँ-गुनलहुँ ताहि अनुरूपे ‘संगीता’ नाम्ना नौकरानीक संग कैल गेल खराब वर्ताव आ राजनयिक होयबाक धौंस, संगीताक पासपोर्ट खारिज करेबाक एक्शन, गरीबक शोषण आ हर तरहें देवयानीजी सजा पाबय योग्य कार्य कैल देखा रहल छथि। जरुर भारत अमेरिकाक कैल गेल किछु अमानवीय व्यवहार (जे हर आम कैदीक संग अमेरिकामे कैल जाइत छैक) तेकर विरोध एक राजनयिक संग करबा लेल प्रकट केने हो…. लेकिन एक आम भारतीयकेँ मात्र एक पक्षक बात सुनि-देखि नहि चिन्ता करबाक चाही, दोसर पक्ष यानि संगीता – जे सेहो भारतीय छैक तेकरा संग भेल दुर्व्यवहार ऊपर चिन्तन करैत देवयानीकेँ उचित न्यायिक प्रक्रियासँ सामना करेबाक चाही। आखिर नौकर राखब अमेरिकामे आ वेतन भुगतान करबैक भारतीय मानदंडसँ नीचाँ…. ई अफसरशाही – लाल फीताशाही देखेबाक विरोध सेहो किऐक नहि हो? समुचित छानबीन करैत एहि मामलामे न्याय हो, हम तँ यैह चाहब।

      हरि: हर:!!

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      १८ दिसम्बर २०१३

      I truly fear to see a few guys entering into a very serious party like BJP, well known for a tagline “Party With A Difference” going public on social media and making useless announces even in personal capacity and that against the ideology of party – especially in terms of attacking a newly emerging party like AAP in Delhi. This is not at all in good health of the party and the top leaders must be careful with these cheap leaders, either they are righteous or whatever but their public opinion may make differences on party’s face. Harih Harah!!

      To the kind attention of:

      Narendra Modi Rajnath Singh Arun Jaitley

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      प्रिय मैथिल (मिथिलावासी),

      बढैत संसारक संग बढि रहल छी हमरा लोकनि, आउ भेटी २२.१२.२०१३ रवि दिन अपराह्न २ बजे ‘नालासोपारा (पूर्व), मुंबई केर दहेज मुक्त मिथिला – बैसार मे! औता प्रमुख अतिथि नगरसेवक श्री भरत मकवाना। संग देता गायत्री परिवार ट्रस्ट जे एहि बैसारक अपूर्व सफलतासँ प्रभावित हेता तँ भारतक हरेक कोणमे ‘दहेज मुक्त मिथिला’क अभियानकेँ अपन अभियान यानि गायत्री देवीक साधना व गायत्री मंत्र शक्ति आराधना संग जोडि लेता एहि पवित्र अभियानकेँ। सहभागी बनबा लेल सम्पर्क करू: रामनरेश – ९२२१०७४१४१ व मिथिलेश – ९९२०९५८६८८. शुभकामना!

      ‘आब पति राखू या डूबाउ, मुरारी हम अहींक शरण!’

      घर-घर पसरय एकहि बात, बिना दहेजक जोडी साथ!!

      बेटा बेटी एक समान – दुनूक होइ एक्कहि सम्मान!!

      – दहेज मुक्त मिथिला (समस्त भारतमे कार्यरत दहेज प्रतिकार लेल समर्पित)।

      हरि: हर:!!

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      भतीजा,

      कोनो संस्कृतिक संरक्षण दू जानल-बुझल तरीका सँ होयबाक परंपरा रहलैक अछि। एक आ सबसऽ बेसी जरुरी – राजकीय संरक्षण; दोसर आ विकसित समाजक प्रथम आवश्यकता – स्वस्फूर्तवान स्वयंसेवासँ संरक्षण।

      जेना हम सब हर गामक व्यवस्थापन देखी, अर्थ-व्यवस्थापन, अन्न-भंडारण, बिक्री-वितरण, धरोहर निर्माण व संरक्षण तथा सामुदायिक हित लेल समाजिक अग्रसरता सबटा पर गौर करैत देखी तँ बुझेतौक जे मिथिला कोना ‘सनातनी सूर्य’ केर द्योतक रहल अछि आ केना ई आइयो युग-युगान्तर सँ बरकरार अछि।

      हमरा लोकनि एखुनका पीढी सबसँ बेसी संघर्षपूर्ण अवस्थामे अपनाकेँ देखि रहल छी। ऐगला पीढीक लेल हमरा लोकनि कर्तव्यविमूढ नहि, कर्मनिष्ठ बनि अपन आत्मसम्मानकेर रक्षा करी।

      जय मिथिला! जय जय मिथिला!!

      हरि: हर:!!

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      १७ दिसम्बर २०१३

      एक खुशखबडी मुदा दोसर…..

      एहि बेर मैथिली सेवा समितिक विशाल आयोजन एखन धरि अधर मे अछि…..

      लेकिन माघ प्रथम सप्ताह मैथिल युवा द्वारा विशाल ‘मिथिला सांस्कृतिक सांझ २०७०’ केर आयोजन लेल रूपरेखा तैयार भऽ गेल आ एक भव्य इतिहास रचबाक लेल आब एक महीना नित्य काज करबाक अछि।

      विशेष खबडि संयोजन समिति बनि गेलाक बाद फेर देब।

      जय मैथिली! जय मिथिला!!

      हरि: हर:!!

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      २०१३ ई. केर शुरुआतहि मे एक लेख लिखा गेल छल २७ जनवरी केँ…. नेपालमे संविधान सभा चुनाव – संभावना आ आशंका….. कहब गलती नहि हेतैक जे निष्पक्षता संग राखल आकलन नीक भविष्यवाणी प्रमाणित होइत छैक। हालहि नवंबर १९, २०१३ समाप्त भेल संविधान सभाक चुनाव आ तेकर परिणाम देशमे एक बेर फेर सँ वैह पुरनके तथाकथित यथास्थितिवादी दल यानि काँग्रेस आ एमालेकेँ जनादेश देलक, लेकिन केकरो लग स्पष्ट बहुमत नहि रहबाक कारणे आ फेर सँ वैह ढाक केर तीन पात प्रमाणित नहि हो ताहि आशंका सँ जीतल दल सेहो बेर-बेर विवादमे फँसि रहल अछि। राष्ट्रीय सहमति शायद नेपालक भविष्यमे लिखले नहि छैक….. ओना देखू जे आबयवला २ सप्ताहमे सब किछु स्पष्ट होइत छैक वा नहि।

      हरि: हर:!!

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      मैथिलानीमे स्वस्फुरित जागरणक एक अद्भुत गवाह – विद्यापति स्मृति पर्व समारोह, विराटनगर। ओना तँ थोड-बहुत जागरण एतय शुरुवेसँ देखल गेल अछि, लेकिन मात्र सांस्कृतिक कार्यक्रम टा मे आगां मैथिलानी रहलीह पहिले जे आब बदलल अछि। चाहे अपन संस्कृतिक प्रदर्शनी हो, झाँकी-जुलूस हो, मंच प्रस्तुति हो, व्यवस्थापन हो या समारोह आयोजन हो…. हर मामलामे ओ सब आगू आबि रहल छथि। सुधारक एखनहु बहुत गुंजाइश छैक।

      हरि: हर:!!

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      निश्चित तौरपे ‘आप’ने राजनीतिक माहौलको बदल दिया है और देशकी जनता जहाँ हार मानकर किस्मतपर रोना मात्र विकल्प समझ रही थी ‘आप’ने यह स्थापित किया है कि अभी भी जनताको विकल्प मिले तो ‘आप’को चुनेगी – लेकिन ‘आप’ इतना गैर-जिम्मेवाराना तरीकेसे पलायन करे तो फिर जनताको अपने किएपर रोने के अलावे और कुछ भी नहीं बच जाता।

      काँग्रेसने बिल्कुल सही दाँव मारा है और भाजपाने सही रणनीति अपनायी है कि दिल्लीकी जनताको त्रिशंकु विधानसभामे ‘आप’को ही सत्ता संभालकर जनताको किए वायदे निभानेका भरपूर अवसर दे। भाजपा आखिर सशक्त और अनुभवी विरोधी दलके रूपमे भी वो सब कुछ कर सकती है जो सत्तारूढ कोई भी दल करे।

      हरि: हर:!!

      Narendra ModiRajnath SinghArun JaitleySh M.S BittaSantosh Mishra Samaj SeviRaman Malik BjpVinod Narayan Jha, Cheif Spokesperson BJP, Bihar State Bjp Barabanki Bharat Kalyan Manch Ram Narayan Jha Madhav Jha

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      Congratulations Maithils!!

      DMM – Dahej Mukta Mithila is successful this way. The movement has brought transformations in many youths, they are insisting on their parents that they have taken oath through the forum of DMM. How can there be a demand of dowry if we bring equally educated brides in our homes? Yes, here is Jha Dhirendra, the one who did not only promise us to marry dowry free but also relied on us to look for suitable bride for him. Unfortunately and also necessarily we do not engage in matrimonial matching dear people, but we certainly announce in public suitably to get opportunity to match the mates and get ahead with marriages, without dowry indeed. This is just an example I am compelled to talk about, but there have been a lot more changes due to regular propagation of DMM theory. May Mithila be soon dowry free. Just come ahead and take an oath dear young men and young women. Harih Harah!!

      Come and join us in this pious campaigning at: https://www.facebook.com/groups/dahejmuktmithila/

      Also, visit us at:
      www.dahejmuktmithila.org

      And do not forget, this is a movement to run through chain of able youths to see changes with pureness of what exactly we were, we were Videhas, the corruption caused pollution in our society that we die for dowry type greeds. But, no more! Guys and gals of Mithila are equally shaping up new Mithila. We are proud of our clans where Sita Herself incarnated to give us immortality. We are truly the immortals called Maithil. Let’s not corrupt more.

      Harih Harah!!

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      जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी!!

      आइ पडल निस्तेज धरापर, मिथिला माईक अछि जे प्राण!!
      जागू जागू यौ मैथिल जागू, मिथिला तनमे फूकू प्राण!!

      समस्त भारत व विश्वक विभिन्न कोणसँ मिथिलावासी युवाकेँ मिथिला राज्य निर्माण सेनाक राष्ट्रीय अधिवेशनरूपी संगोष्ठी – “मिथिला राज्य निर्माण आन्दोलन: दशा आ दिशा” मे सहभागिता लेल अपन टिकट बूक कय लेबाक चाही। सहभागिता सुनैत छी सीमित अछि। प्रतिनिधि सदस्यता अग्रिमे प्राप्त करू।

      हरि: हर:!!

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      धन्यवाद अप्पन मिथिला मासिक पत्रिका (जे काठमान्डुसँ प्रकाशित होइत अछि) – एक महत्त्वपूर्ण विश्लेषण “भारतमे मिथिला राज्यक आन्दोलन तेज”केँ कात्तिक २०७० केर अंकमे प्रकाशित कयलहुँ। आशा करैत छी जे एहि पत्रिकाक पाठक तक मिथिला राज्य आन्दोलन सही स्वरूपमे पहुँचि सकल, भारतमे राज्य निर्माणक परिकल्पनापर राजनीतिक दल व संवैधानिक निकायकेर विभिन्न आयाम द्वारा राज्य निर्माण नीति सहितकेँ समेटैत मिथिला राज्यक अवस्थापर एक संछिप्त विश्लेषण छल ई लेख। फेसबुक पर पढबाक लेल:

      https://www.facebook.com/notes/pravin-narayan-choudhary/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95-%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A5%A8%E0%A5%A6%E0%A5%A7%E0%A5%A9-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A4/725167600830487

      हरि: हर:!!

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      Anna brought the movement in widespread public in August 2011. And AAP is an output of it. A proper management with better vision can click has been proved by Delhi Assembly Election 2014. Ponder and see why we fail again and again despite having strived for just an identity of Maithil in Mithila ever since 1940 AD!

      19th January, 2014 is the day our youngsters will give us a forum to address on the subject:

      Mithila Movement: Present and Future!!

      Harih Harah!!

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      दहेज मुक्त मिथिला केर पदेन सदस्य एवं शुभेच्छुक भाइ-बहिन, मित्र-बंधु!

      सूचित करैत अपार हर्ष भऽ रहल अछि जे संस्था पंजीकृत होइत अपन बहुत रास महत्त्वपूर्ण लक्ष्य प्राप्ति लेल ऐगला डेग उठाबय लेल जा रहल अछि।

      एहिमे दिल्ली वा अन्य-अन्य शहरमे प्रवासी मैथिल जे सस्ता मजदूरी करैत अपन गृहस्थी कोहुना-कोहुना चला रहल अछि तिनकर बाल-बच्चाकेँ पढाइ करेबामे बहुत कठिनाईक सामना करय पडैत छन्हि। किऐक न दहेज मुक्त मिथिला एहेन किछु छात्र-छात्राकेँ विभिन्न सम्भ्रान्त व सक्षम सदस्य द्वारा गोद लियबैत पढाईक बन्दोवस्त करौक? ई एक महान सेवा हेतैक आ खास कय केँ बेटीक शत-प्रतिशत साक्षरता लेल एक विशेष प्रयास सेहो हेतैक।

      एहि पर अपन विचार देल जाउ आ एहेन तरहक कतेक बच्चाकेँ हम सब गोद लऽ सकब ताहि लेल स्वयं अपने वा केओ परिचित गोद लेनिहार जँ ताकि सकी तऽ संस्था बड पैघ आभारी होयत।

      हरि: हर:!!

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      जागरण तेज छैक, वातावरणमे सुधार होइते ओ सब आबय लगती। पुरुष स्वयं कन्फ्युज छथि एखन कतेको मामिला सँ ओ एहि आन्दोलनमे अपन योगदान तय करबा लेल सन्देहसँ घिरल छथि। कतेको रास प्रश्न हुनका सेहो घेरने छन्हि। एखन जे सोझाँ छथि ओ पूर्ण समर्पित छथि। यदि हुनकर स्त्रियो समर्पित भऽ जेथिन तखन नट-बखोवला जीवन जिबय लेल बाध्य भऽ जेतैक बच्चा व अन्य पारिवारिक जिम्मेवारी जे हमरा लोकनि वगैर व्यवस्थित केने कहियो तेहेन जीवनशैली नहि अपना सकैत छी। ताहि हेतु जेना एखन धरि मात्र ३-४ गो मिथिलानी आगू आयल छथि, जखन कि एक मिथिलानी आरती मैडम आगुओ मे ओतय तक आबि स्वयं सेनानी बनि अपन योगदान सरहन्ना पर देबय लगलीह अछि ई सब असाधारण अछि। साक्षात् भगवती ओ शक्ति जगा रहल छथिन जाहिसँ मिथिलाक अनुपम संस्कृतिक रक्षा होयत। जुनि बिसरू – मिथिलेक बेटी गौरी जखन अभिमानकेँ शिवसँ पार जाइत देखलखिन तखन अपन कोपरूप महाकाली बनि रक्तबीज तककेँ संहार केलखीन। बस जाग्रतावस्था लेल हम सब नित्य-निरंतर अपन ईमान आ धर्मसँ माटि आ मातृभूमिक रक्षार्थ ठाड्ह रही। जय माँ! मिरानिसे मे रंजूजीकेँ स्वागत सेनानी सब दिल्लीमे केने छल, हमहुँ सब खूब प्रसन्न भेल रही। तहिना सुधाजीक सेहो स्वागत कैल गेल छल। तहिना पैछला कतेको आन्दोलनमे मिथिलानी सब द्वारा प्रदर्शनक सेहो इतिहास बनल। हरि: हर:!!

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      स्वप्न-दर्शन वृत्तान्त:

      एखन कनीकालसँ नींद गायब अछि – कारण बनि गेल अछि एक स्वप्न!

      मिथिलाक पावन धरतीपर कण-कणमे हो ‘नाम-यज्ञ’ आ सीता सहित राम होइथ प्रतिष्ठित!

      हरेक मन्दिर – हरेक मठ – हर तीर्थमे एक संग शुरु होइ ‘नाम-यज्ञ’ केर पावन मास!

      शंकराचार्य चारू पीठक आबैथ मिथिला!

      ऋषि-मुनि समाज सहित आबैथ मिथिला!

      दक्षिण, पूरब, पश्चिम व उत्तर सब दिशासँ सन्त-समाज आबैथ मिथिला!

      आमजन सेहो एहि अवसरपर मिथिलामे मास भरि लेल जरुर भ्रमण करैथ, यज्ञक आनन्द लैथ आ भौतिकतावाद संसारमे पूर्णरूपेण डूबि चुकल समाज एहि यज्ञमे सहभागी बनि लैथ पूर्ण परमानन्दक सुख आ खास कयकेँ मानसिक रूपसँ अस्वस्थ चलि रहल, डिप्रेशनक शिकार वा कोनो न कोनो तरहें अशान्तिमे जीवनकेँ पौनिहार जरुर एहि पवित्र अवसरपर आबैथ मिथिलाधाम आ पूर्णरूपेण स्वस्थ काया कंचनक संग पुन: वापसी करैथ अपन स्वदेश।

      मिथिलाक पग-पगपर विराजित अछि तंत्र ओ मंत्र शक्ति, लेकिन नहि जाइन किऐक ई धरा आइ सुसुप्तावस्थामे अछि। एकरा फेरसँ पूर्ण जागृति लेल एहेन महायज्ञक आवश्यकता बुझा रहल अछि। शायद ई स्वप्न किछु ताहि तरहक संकेत कय रहल अछि। एहिपर शीघ्र विशेषज्ञ गुरुसमाजसँ सल्लाह करैत विशेष जानकारी देब। लेकिन बडीकालसँ नींद टूइट गेलाक कारणे ई पोस्ट एतय करैत हम अपन जिम्मेवारीमे समस्त जिम्मेवार मैथिल समाज सहित अपन परिचित मित्र-बंधुकेँ जोडि रहल छी। विशेष अपने लोकनि सेहो एहि विन्दुपर सोची आ समुचित सुझाव दी।

      परमेश्वरक पूर्ण स्वरूप सीता सहित रामकेँ बेर-बेर प्रणाम! ताहि अवसर गौरी सहित शंकरकेँ हम कोना बिसैर सकैत छी, हुनकहु प्रणाम! ॐकारेश्वर प्रभुकेँ सदिखन समर्पित!

      हरि: एव हर:!!

      **

      १६ दिसम्बर २०१३

      सुनि ले भैया कान खोलि कय….. मिथिला राज्य निर्माण सेना द्वारा एखन १९ जनवरी, २०१४ जतय राष्ट्रीय अधिवेशन होयतौक ततहि मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा दरभंगामे जनवरी २०१४क अन्तिम सप्ताह मे महासम्मेलन होयतौक…. आ करनिहार करिते चलि जेतौक, लूझनिहार फेसबुक पर गुटरूगू करैत परवा सब समान खन एहि डार्हि आ खन ओहि दोग-सान्हिमे पराइत रहतौक…. ई नहि जे ओहो मिलिकय अपन योगदान कोनो न कोनो रूपे निर्धारित करैत उद्देश्य लेल एकता बनेतौक… वरन् ओकरा तऽ अपन सींग जे एखन धरि उगलैक नहि से फूसिये कय माथा पर टेटर छुआबैत लोककेँ ई देखेतौक जे देखू-देखू हमरा सींग उगि गेल…. ई सब फोकटिया लन-लहसून आब नहि चलयवाला छौक। पाइ दिहीन आ कार्यक्रम सफल करा। पार लगैत छौक तऽ सहयोग आ नहि तऽ कृपया अपन हम्मा गीत अपनहि गली मे गबे। प्लीज! हरि: हर:!!

      **

      नेना छोटकैन,

      खूब आशीर्वाद। एतय सब ठीक छौक। माय बेर-बेर दिल्ली जयबा लेल परेशान केने रहैत छौक, मुदा हमहीं आइ-काल्हिक उमेरवाली पुतोहु संग पुरनका विचारवाली सासुकेँ पटरी नहि बैसत आ दिल्ली सँ दौडि चलि आयब से संभव नहि रहबाक कारणे नहि पठा रहल छियौक। बडका सेहो गाममे धनखेती सम्हारि कनियैनकेँ गामहि छोडि जे भदोही ईटा पाथय लेल गेल से एखन धरि गाम नहि घूरल अछि।

      धनकटनी लगभग अन्त भऽ गेलौक। थ्रेसरपर माल तैयार होयबामे लाइन लागल छैक। कोठी-बखारी सब सेहो तैयार करबा देलियैक अछि। थोडे रास खेतमे मकइ आ दलहन के खेती लहलहा रहल छौक। आलू-सरिसव-तोरी आ कोबी, धनियां, टमाटर, मुरइ… ई सब किछु हरियरी धऽ लेलकौक। गहुँमक खेती तैयार होयबामे समय लगतौक। बिहैन आ खादक संग पटौनी लेल धरि तूँ जल्दी सँ ढौआ पठाबे। पैछला मनिआर्डर धनखेतीसँ पहिले आयल रहौक, से बौआ कोहुना-कोहुना असूली हेतौक कारण एहि बेर रौदी बड करगर, पछता पाइन सऽ कनि-मनि होश धरि बाँचल छौक।

      गहुँमक खेतीमे बुझिते छिहीन जे पाइये बले सबटा होइत छैक। से देरी नञि करे। कनियाँ सऽ नुकैये कय किछु पठबिहें।

      तोहर बाबु,

      बौआजान

      हरि: हर:!!

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      भारतीय राजनीतिमे ई समस्या शायद सब ठाम अछि। लेकिन ‘आप’ पार्टी दिल्ली जेहेन समझदार जनताक संगसँ ई साबित कय देलक जे कतबो पैसावला किऐक नहि होइ, केहनो बडका बापक बेटा किऐक नहि होइ आ तथाकथित राष्ट्रीय दलरूपमे कतबो पैघ दलसँ किऐक नहि होइ – जनता समझदार अछि तँ ई फालतू भार लदबाक आ प्रजातंत्रमे राजतंत्र जेकाँ भाइ-भतीजावाद चलबैत असल समाजसेवी वा नेतृत्वकर्ताकेँ बढय नहि देब से असंभव होयत। आब तँ कहीं ‘आप’केर हवा पूरा देशमे सेहो नहि चलौक। मिथिलामे तऽ नहिये टा चलतैक, कारण एतय लोक आब पढल-लिखल जेकाँ व्यवहार सेहो कय रहल अछि आ स्वराज्य लेल सेहो चिन्तित अछि। तखन तऽ चुनावक परिणाम देखायत।

      हरि: हर:!!

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      कोसीक पेटमे रहनिहार लेल ई पुल भला कोन समाधान अनतैक, सिवाये क्षेत्रीय समृद्धता जे आवागमन बनला सँ बनैत छैक तेकर! वैभेल परियोजनाकेँ प्रतिस्थापित करयवाला कोसी परियोजनामे जाहि तरहें बाँध बनेबाक आ नहर व पनबिजली लेल कोनो ठोस योजना नहि देबाक, कोसीक चपेटमे आयल लोककेँ पुनर्स्थापित करबाक सेहो कोनो ठोस पहल नहि रहबाक, कोसीक धारसँ बेर-बेर भूगोलमे परिवर्तन औनाय, खेत व खेतिहरक भाग्य कहियो ऊपर तँ कहियो नीचाँ गेनाय…. एहेन बहुत तरहक बात छैक जेकरा पर दीर्घकालीन सोचसँ समाधान निकालबाक दरकार छैक। एहि पर बिहार सरकार वा केन्द्र सरकारक जल प्रबंधन वा बाढ नियंत्रण – जल संसाधन मंत्रालय संग बस जे आधा-अधूरा छैक तेकरे रखरखाव व निरंतरतामे राखय लेल राष्ट्रक खजाना खाली करैत अपन-अपन खजाना निर्माण करब रहि गेल छैक। डगमारा परियोजना आइ कतेक वर्षसँ अधरमे छैक। रेल पुल सेहो अधर मे छैक। कृषि व विज्ञान परियोजनाक कोनो ठोस कारोबार एहिठाम एकदम नहि छैक। कोसीक बेसिनकेँ गंगाक बेसिन समान उपजाउ आ बसोबास लेल नागरीय स्वरूप प्रदान करब शायद मिथिला राज्यक सपना पूरा भेलाक बादे संभव हेतैक जेना बुझा रहल अछि।

      लेकिन लोकमानसमे जे कटाव उत्पन्न भऽ गेल छलैक, संस्कृति बीच जे दूरी बनि गेल छलैक आ कतेको लोक लंग एहि तरहक कूराजनीति करबाक अवसर जेना ऊपरसँ टपैक कय भेटल हो जे कोसी आ मिथिला दू थिकैक तेकरा फेर एक बेर आपसी जुडाव सँ ई मानय पडतैक जे दू सहोदरकेँ बहुत काल धरि दूर नहि राखल जा सकैत छैक।

      हरि: हर:!!

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      १४ दिसम्बर २०१३

      भेटतइ जे मुँह तोड जबाब जे बाँटय मिथिलाकोसी
      धन्य जे सिया औती धरती नित धोयब चुल्हा-चेकी!

      के कहतय बाबा सिंहेश्वर रहता मिथि छोडि मिथसँ
      के थोपतय विदेशज कतहु कि मैथिली भाखा मिठसन!

      रसियारी महिसी या बनगाम कुटुम्ब मिलैथ हे फेरसँ
      खन सलहेश आ खन ओ लोरिक नित औता दहोंदिशिसँ!

      दरभंगी खान ओ गढ बनैली दोस्ती करता दिलसँ
      किशनगंजके नबाब साहेब लिलपुर इदगह मिलतन!

      आब कि दूरी जनकपुर भारतक मिथिलासँ कथमपि
      मंडन अपनहि सुमो चैडकय मिलता अयाची यद्यपि!

      मधुकर मधुप ओ जनक कि किसलय साहित्यक गंगामे
      कि ओ पीढी कि ई पीढी मिटतय विस्मृति संगामे!

      पहिले भपटियाही फेरो बलुआही कुरसेलाक बल बचलासँ
      साक्षात् गंगा ओ हिमालय मिथिलाक उत्तर-दक्खिनसँ!

      कोसी बनथि पनबिजली खेती पोर्ट फिसेरीज अड्डा
      हवा यात्रा सीतामहीसँ दक्खिन तक जहाजी फंडा!

      बधैया आशीष भाइ पत्रकारिता मिथिलाक टप रिपोर्टर
      लिखथीन चौतरफा ओ कौलम पर्यटन केर एस्टार्टर!

      एक जनसभा घाट सिमरिया दूसर कौशिकी धारा
      डेग‍-डेगपर मिथिला-ढाबा छप्पन भोग जे सारा!

      बनतय मिथिला राज हो भैया लौतय शत-शत शिक्षा
      नहि जेतय कतहु ट्युशन लऽ घरे सबहक दीक्षा!

      माटि-पानिकेर आउटो सोर्सिंग अपनहि मैनेज सिस्टम
      कालसेन्टर आ हाइटेक मिथिला कलशासँ कस्टम!

      संस्कृत, पाण्डित्य, फकीरा, तंत्र, मंत्र शत साधन
      सब विधा सब नित्य परस्पर न्यायिक अनुशासन!

      नहि कहबह बेसी आब एतय चारूकात नजराबय
      मिलबय सब कोइ गरम धरम दिल चारुकात सोहराबय!

      हरि: हर:!!

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      अज्ञान सही पर ध्यान खींचायल
      अगबे गिनतीक मान हेरायल!

      ज्ञानीजन जागू आबहु करू काज
      तखनहि भेटतइ मिथिला राज!

      नहि मानब फूइस बघार-वाणी
      भावना में प्रेम व्यवहार जानी!

      लिखि लोढहा पढि पाथर अजगर
      जन-जन जागय कर्म गहबर!

      खबरदार जुनि दूसू युवागणकेँ
      लाउ संग जगाबय जन-मनकेँ!

      हरि: हर:!

      (जनवरी २०१३ केर ई पोस्ट स्मृतिमे आनय चाहब, कारण युवा एकान्त लेल जखन सब गूटकेँ एक करबाक कैम्पेनिंग चलि रहल छल तँ कियो किछु आ कियो किछु कहि कटय लागल छलाह…. ई होइते छैक, समर्पित लोक संग रहिते छैक आ छक्कल‍-बक्कल पचकल धान उसनयवला भोमा मुँह बेनिहार सौंसे कारी अलमुनियमक बर्तन समान होइत छैक।)

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      मिथिलाक असल विभुति आ कर्मठ साहित्यकार योद्धा – आदरणीय डा. राजेन्द्र विमल संग वार्ता भेल आ हुनक किछु विचार एतय सार्वजनिक मंच पर राखय लेल विवश छी।

      “आब विराटनगरमे हमहुँ छी आ अहाँक तन्मयतासँ कय रहल विभिन्न गतिविधि मैथिलीक उत्थान करत से आशीर्वाद दैत छी। हृदयसँ प्रसन्नता भेटैत अछि जखन नव पीढी एहि लेल अपन योगदान दैत देखाइत छथि। हम जीवनक वानप्रस्थ आश्रममे प्रवेश पाबि चुकल छी आ मिथिलाक ऐतिहासिकताक असीम योगदान देखि ओकरा भविष्यक पीढी लेल डक्युमेन्टाइज करबा लेल प्रेरित भेल छी। पुस्तककेर नाम होयत: द एनसियेन्ट सिविलाइजेशन अफ मिथिला। एहि लेल किछु आधारभूत व शोधमूलक आलेख, पोथी आदि उपलब्ध करैत कार्य सिद्धि लेल अहाँक संग लेब। तत्काल जँ दिल्ली वा अन्यत्रसँ उपलब्ध करा सकी तँ ई सब ताकि के आनू:

      ऐतिहासिक शिलापत्र-ताम्रपत्रपर आदि ऊपर शोधपत्र, पं. डोरीलाल रचित मिथिलाक पाण्डित्य परंपरा, मिथिलाक विभुतिक जीवन-परिचय, भारती-मंडनकेर शास्त्रार्थ वर्णन, थाइलैन्डक वर्तमान राजा जनक वंशक छथि – थाइलैन्डक राजवंशक वृक्षावली, व अन्त सान्दर्भिक ग्रंथ सब।

      पदार्थ आ चेतनाक पहिल चर्चा मिथिलामे भेल अछि, एहेन-एहेन कतेको बात अन्वेषण योग्य अछि आ ताहि समस्तकेँ समेटब जरुरी अछि।”

      – डा. राजेन्द्र विमल

      हम बेर-बेर प्रणाम करैत छी आ गछैत छी जे जीवनक हर क्षण – हर प्रयास अपने सबहक चरणमे समर्पित कय देब।

      जय मैथिली! जय मिथिला!!

      हरि: हर:!!

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      भाइ यौ!!

      कतहु-कतहु लाठी भाँजय सनक बोली बाजब सेहो काजक सिद्धि होइत छैक। ओना नहियो बुझाइत छैक जे हमरो किछु दायित्व बनैत अछि मातृभूमि लेल, लेकिन ओल सन-सन कवकव बोल सुनलापर भीतर तक रसचुभान होइत छैक आ लाजो, जे, किछु तँ हमरो करबाक अछि।

      तेकर माने दिल्लीक धरनापर अहाँ ड्युटी छोडि कय आउ से हम नहि कहब…. लेकिन जखन-जतेक समय भेटैत अछित तखन तहिना किछु तऽ करहे पडत। आब अहाँ कहब जे ई गोनु झा वला ‘किछु’ तऽ नहि.... हिहिहि…. तेकरा वास्ते हम स्पष्ट कय दी जे अहाँ कि सब ‘किछु’ अन्तर्गत कय सकैत छी:

      *जतय कतहु रही, लेकिन मैथिलकेर समूह निर्माण करू आ समूहमे प्रवास करबाक आदति अनिवार्यरूपसँ राखू। समूहक माने बुझैत छियैक कि ने? पढितौं-लिखितौं नीकसँ तैयो आ मिथिला विकसित रहितय तैयो… एना बौआय नहि पडितय… तहन समूहमे रहब आइ बहुत कारणे जरुरी अछि। एक रती कतहु लोक दुर्व्यवहार करय तँ तुरन्त अपन सामूहिक प्रतिकार करबा लेल तैयार बनि जाउ। आब आरो नहि नऽ फरिछाबय पडत?

      *आपसी मेलमिलाप जेना-जे बढाउ, लेकिन सहकारी समितिक तर्जपर महिनवारी १०० टाका वा २०० वा ५०० टाका जमा करैत सामूहिक कोष धरि जरुर राखय जाउ। कारण जे बेर-बखत एक दोसरकेँ काज देबा लेल पूँजी चाही, अगबे कुँजीक झाबासँ बालो नहि होयत। ध्यान राखू। आ साफ नियतसँ आपसी प्रेमकेँ बरकरार राखब सिखू। जँ से नहि करब तँ उनटा बान्ह बान्हिकय मेहमे महि देबाक परंपराकेँ कथमपि नहि छोडू। बदमस्तीक एकहि गो उपाय छैक, ढंग सऽ ट्रीटमेन्ट।

      *पूरे समूहक सदस्यकेर परिवार मे कोनो तरहक कलह-कमजोरीपर सबहक ध्यान राखब जरुरी अछि। केकरो समस्याकेँ अपन समस्या जेकाँ बुझियौक। आ दिल्ली मेट्रोक भगैत भीड जेकाँ एहि सबसँ भगियौक नहि, पुछाइर सबकेँ करब जरुरी छैक। परंपरा रहल छैक न यौ…. फल्लाँ काका आब नहि छथि तऽ हुनकर जिम्मेवारी फल्लाँ भाइये द्वारा निमहतैक। कि नहि?

      *यदि किछु रास बुद्धिजीवी उपलब्ध छथि तँ हुनका सँ हरेक छुट्टी दिन किछु नीक सुनबाक लेल दलान पर जरुर बैसय जाउ। अपन इतिहास, वर्तमान विपन्नताक कारण, समस्या, समाधान, कतहु सामूहिक योगदान देबाक विन्दु आदि कतेको रास सार्वजनिक हित व सुन्दर भविष्य लेल बात सब छैक, ताहि लेल जरुर हरेक सप्ताहमे कोनो निर्धारित समयपर बैसय जाउ।

      *घर-घरमे रामचरितमानस जरुर राखू – सीता आ राम केर चारूकात हरेक कैरेक्टर द्वारा किछु न किछु सार्थक संदेश आ डेग-डेगपर अनुपम ज्ञानक बात भेटत। ओकरा बुझू, गुनू आ ताहि तरहें जँ किछु लिख सकी तऽ सोन पर सोहागवाली हिन्दी कहावत पूरा होयत।

      आब कहब जे किछु केँ नमरा रहल छी…. चलू…. एतबी करू। गप नहि, अगबे फूइस‍-फटकमे नहि, लूच्चा-लबराइसऽ दिन अदीन होयत। एना जँ ‘किछुओ’ करब शुरु करबैक तखन केकरो जन्तर-मन्तरपर बजाबय नहि पडत, अपने आप बुझय लगबैक जे कि करबाक अछि, कतय जेबाक अछि आ सब किछु। 

      एक बेर प्रेम सऽ कहियौक – बाबा बैद्यनाथ की जय!!

      हरि: हर:!

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      १३ दिसम्बर २०१३

      भाषा सिखब वा सिखायब एक कला होइत छैक, भले माहिर नहि, लेकिन प्रयास करबामे कोनो हर्जा नहि छैक। बाजब तखनहि संभव जखन धूरझाड बाजय शुरु करब, बिना ई सोचने जे अशुद्धि भऽ रहल अछि वा सोझाँ मे ठाड्ह लोक हमरासँ बड बेसी नीक बजैत छथि…. अहाँ अपन चिन्ता करू आ बिना रोकटोककेँ बाजू।

      जएह बजैत छी, सएह मैथिली!

      हरि: हर:!!

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      भोर उठू तौँ अछि मिथिला
      राइत सुतू तैयो मिथिला
      बोली बाजू तौँ अछि मिथिला
      मित्र मिलन करू तैयो मिथिला!

      समारोह हो तौँ अछि मिथिला!
      लोक सब बैसल तैयो मिथिला!
      अंगनामे सेहो मैथिली मिथिला!
      भरल दरबज्जा पुरुषक मिथिला!!

      गाम-घर हो तैयो मिथिला!
      दिल्ली शहर हो तैयो मिथिला!
      अमेरिका बेलायत तैयो मिथिला!
      हवाईजहाज मे सेहो मिथिला!

      जेम्हर देखू ओम्हर मिथिला!
      कण-कण देखू सुन्नर मिथिला!
      सीताराम छथि तैयो मिथिला!
      गौरीशंकर सहजहि मिथिला!

      हरि: हर:!!

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      १२ दिसम्बर २०१३

      १९ जनवरी, २०१४: मिरानिसे राष्ट्रीय अधिवेशन प्रथम

      कन्स्टीच्युशन क्लब, नयी दिल्ली।

      सबसँ पहिने मिथिला राज्य निर्माण सेना द्वारा आयोजित एहि पुनीत कार्यक्रमकेर अपार सफलता लेल शुभकामना दैत छी। एहि कार्यक्रमकेर एक अवधारणा पत्र राखि पूर्ण जानकारी रखबा लेल सेहो निवेदन करैत छी।

      कोनो बौद्धिक कार्यक्रम लेल ‘अवधारणा’क महत्त्वकेँ आत्मसात करब जरुरी छैक आ ताहि अनुरूपे कार्यक्रमकेर प्रारूप विकास कैल जाइत छैक। अत: मिरानिसे मे वर्तमान नेतृत्व धारा एहि लेल प्रबुद्धजनकेर समूहकेँ कार्य बंटवारा जरुर केने हेताह से आशा करैत अवधारणा अनुरूप जनसहभागिताक गुंजाइश, संभावना आ सार्थक परिणामक आशा कैल जा सकैत छैक।

      मिथिला लेल कैल जा रहल हरेक प्रयास सारगर्वित एवं संदेशमूलक भऽ रहल अछि। २०१३ ई. एहि दशकोंसँ चलि रहल आन्दोलनकेँ एक नया आयाम सेहो देलक अछि, लेकिन काज एखनहु बहुत करब बाकी अछि आ हो-हो’बाजीसँ बचबाक आवश्यकता सेहो ओतबी अछि। जखन कि मिरानिसे एक नीति-नियमसँ बान्हल युवा-विशेष संस्थारूपमे जन्म लेलक आ जनमिते एक सऽ एक सान्दर्भिक – प्रासंगिक कारय करल लागल; किछुए दिनमे अपार लोकप्रियता सेहो हासिल केलक; मुदा गूढ आवश्यक मूल कार्य – बुनियादी जरुरत शायद आइ धरि ओहिना रिक्त अछि। न कोनो कार्यालय, न स्थायी सचिव, न संदेश प्रवाह लेल स्थायी उपाय…. एक एसोसियेट अफ पर्सन रूपमे सेहो ई बहुत पिछडल अछि आइ धरि।

      अत: वर्तमान नेतृत्वसँ आशा जे मात्र नाम लेल कन्वेन्शनकेर खानापुर्ति नहि कय ओकरा उचित संदेशमूलक आ सार्थक बनेबा लेल नीक गृहकार्य करैत आगू बढैथ।

      हरि: हर:!!

      **

      ‘पगला बाबा’

      (संस्मरणपर आधारित सत्यकथा)

      ५ दिसम्बर केर धरनामे सहभागिता सहित आरो विभिन्न तरहक मुहिम लेल दिल्ली प्रवासपर प्रिय अमरनाथ जी (ठाढी, मधुबनी) भोजनपर आमन्त्रिय कयलन्हि आ काल्हि हमरा लोकनि संगहि दुपहरियाक भोजनपर संगे करीब तीन-साढेतीन घंटा रहलहुँ आ एहि दरम्यान कतेको तरहक व्यक्तिगत, संस्थागत आ समष्टिगत वार्ता सेहो चलैत रहल। किछु आपसी वार्ताक संछिप्त चर्चाजे आमजनक जानकारी लेल हितकारी होयत सेहो करब आ फेर आबि जायब ऊपर देल शीर्षकपर, यानि कथापर।

      अमरनाथजी संग भेटमे अपन ओ विद्यार्थी जीवन, विद्यालयमे शिक्षक बनि जीवनक कैरियर शुरु करबाक दिनसँ वर्तमानक यात्रा धरिक ओ सब बात पुनर्स्मृतिमे आयल आ नव पीढीक निर्बल ओ असहाय छात्रकेँ मनोबल उच्च रखबाक लेल हाइर नहि माइन बस ‘सुन्दर निश्चितता आ सामर्थ्य अनुरूप स्वकार्य’मे व्यस्तताक प्रशिक्षणसँ नहि भगबाक बात प्रमाणित भेल। मिथिलाक माइट-पाइनमे एहि बातक खास महत्त्व अछि जे अमरनाथजी सहित हम समस्त मैथिलकेँ केहनो कठिन परिस्थितिसँ लडैतो विकासशील धरि बनबैत अछि। आइ कतबो पलायनक समस्यासँ हम सब घायल भऽ गेल होइ, लेकिन दिल्ली या न्युयोर्क या लंदन या काठमांडु या बिजींग – कतहु अपन ठौर अपनहि बौद्धिकतासँ निर्माण करबाक कला-कौशल हमरा लोकनिमे जरुर विकसित अछि। बात चलय लागल गामक माटि-पाइन के – महान् विद्वान् वाचस्पति, कविश्रेष्ठ चन्दा झा व ठाढी गामक अन्य देन संग-संग हल्का मधुमान अवस्थामे आबि गेला एक “पगला बाबा”।

      (नोट: एहि कथामे किछु बातकेँ परिवर्तन करबाक संभावना बाकी अछि, कारण जतेक बात हम लिखि रहल छी ई मात्र दू गोटाक आपसी वार्ताक आधारपर अछि। मूल पोस्ट केलापर राजेशजीक किछु टिप्पणी आबि रहल अछि जे ओ एक महामहोपाध्याय आ शाक्त दर्शनपर काशीक विद्वत् सभामे सेहो प्रखर विचार रखने छलाह…., ओ अपन अन्तकालमे किछु अव्यवस्थित भऽ गेल छलाह नहि कि कथमपि पागल वा किछु ताहि तरहक, हुनक अकबाल छल आ सरस्वतीक कृपासँ ज्ञानपर नीक दखल छलन्हि, आदि… एहि तरहक यदि आरो किछु तथ्य सोझाँ अबैत अछि तँ सुधार कैल जायत। कृपया एकरा पढि मोन विचलित नहि करब, हम मात्र कथारूपमे मौलिकताकेँ पकडबाक दृष्टिकोणसँ लिखने छी।)

      “पगला बाबा”

      नामहिसँ बहुत बात स्पष्ट भऽ जाइत छैक, दिलमोहन, दिलखुश, रसगुल्ला, लालमोहन, रसमलाई, खाजा, मुंगबा…. एक सऽ एक मिठाईक परिकार जेना नामहिसँ अर्थे टा नहि वरन् बिन खेनहि स्वाद सेहो चखा दैत छैक ठीक तहिना “पगला बाबा”क नामहि एक बेर जोरसँ हँसा देलक। आगू बढू! पगला बाबाकेँ हरीमे बान्हि राखल जेबाक बाध्यता छलैक घरबैयाक – जखन कि ओहो कोनो साधारण विद्वान्, ज्योतिष, नैयायिक, दार्शनिक, विचारक वा कोनो विधामे कमजोर नहि कहल जा सकैत छलाह….! लेकिन ई बात सेहो मिथिलाक माटिक संस्कृति छैक जे बेसी बुधियार भेलापर पगलासँ जानल जायब, आ ताहू सँ बेसी बुधियार बनि यदि नव-नव प्रयोग करबैक तँ समाज महापागल सेहो कहि देत आ खूटेश सेहो देत। पगला बाबाक बुधियारी बड बेसी बढि गेल छलन्हि – हुनका समयमे एगो सलाइ किनलापर ३-४ गो काठी किछु रास मिस्री वा कथु आर ‘लावा-दुआ’ कहि मंगनीमे देबाक चलन छलैक। पगला बाबा जाहि दोकानमे किनलैन तही दोकानक झोपडीमे ओ मंगनीमे भेटलहबा काठी केँ खरैर आइग लगा देलखिन आ मिस्री वा सुपारीक आनन्द लैत नाचैत बाजय लगलाह: मूर मेरा ठामहि है – फाउ तमाशा करता है। लोक सब मार-मार छूटलोपर सलाइ देखबैत कहलखिन जे मूर हमर ठामहि अछि, ओ तऽ मंगनीमे जे देलक से हम लऽ के कि करितहुँ तेकरे जराकय फेक देलियैक। ई तेकरे तमाशा थिकैक। लोक फेर हरीमे बान्हि देलकैन।

      एक बेर नेपाल दिशका कोनो राजा एहेन कोनो प्रश्न पूछने रहैक जेकर जबाब केओ नहि देलाक बाद पगला बाबा कहलखिन जे हम कहि देबैक। लोक सब पहिले तऽ मजाक मे बुझलकैन लेकिन बादमे ओ बड जिद्द केलखिन तऽ कडा निगरानीमे हुनका लऽ जायल गेल ओतय आ सही मे ओ तेना जबाब देलखिन जे राजा प्रसन्न भऽ गेलाह। हुनका एगो सोनाक गाय दान देलखिन। लेकिन पगला बाबा ओ लेबय सँ मना कय देलाह आ हँसय लगलाह। “हौ पगला बाबा! ई कि हौ? किऐक नहि लेबऽ?” मंत्री विस्मित होइत ओहि दानकेँ ठुकरेबापर पगला बाबासँ पूछलखिन। पगला बाबा कहलखिन, “तोंही सब बात बुइझ जेबऽ? आइ ई लऽ लेब आ बादमे कोनो पीढी एकरा खंडित करैत बेचत…. तऽ गोहत्याक पाप हमरहि लागत। तैँ हम ई नहि लेब।” बादमे राजा सेहो हस्तक्षेप केलखिन – “आन के देत एतेक पैघ दान? ई लऽ लेल जाउ।” ओ राजाकेँ तपाकसँ जबाब देलखिन – “देनहार तऽ कतेको भेटत महाराज! ठुकरेनिहार अहाँकेँ कतहु नहि भेटत।” राजा चुप्पे भऽ गेलाह आ कतेक मनेलापर एक सोनाक चादरि धरि दानमे दैत पगला बाबाकेँ विदाह केलाह।

      दोसर बेर, मिथिलादेशक कोनो एक राजाक हाथी निछछ बताह भऽ गेल छलन्हि तेकरा पगला बाबा जिद्द करैत ओतय जाय हाथीक कानमे किछु कहि ठीक कय देलाह। राजा साहेब पूछलखिन जे कोना ई चमत्कार केलियैक तऽ पगला बाबा कहलखिन जे “हाथीकेँ कहलियैक जे तोहों पागल आ हमहुँ पागल, हमर बात माइन जो, से माइन लेलक।” राजा सहित सब कियो हँसय लगलाह आ पगला बाबाकेँ ससम्मान गाम धरि पालकीमे विदाई करैत बहुते रास जमीन आदि दानमे प्रदान कयलाह। पगला बाबा सँ जुडल एहेन कतेको रास किंवदन्ति आइयो ओहि पूरे क्षेत्रमे खूब चलैत छैक। मिथिलाक माइट-पाइनिक यैह महत्त्व छैक जे पागलो एतेक होशियार आ होशियारो बड पागल। प्रकृतिक किछु खास बात तऽ रहलैक एतय जे एहि तरहक वातावरण-आवोहवा छैक।

      हरि: हर:!!

      **

      कविजी जे ४ दिनक लेल अनशन मिथिला राज्यक माँग लेल कयलन्हि ओ अपन गाममे कोनो सार्वजनिक कार्यक्रममे मिथिला लेल समर्पित एक सऽ एक लोकक समक्ष घोषणा कयलन्हि जे एखन मिथिला राज्यक माँग लेल संघर्ष करबाक सही समय नहि अछि…. ओ संस्कृति आ भाषा संग तकनीकी शिक्षा लेल काज करताह। किछु करैथ, मिथिला लेल ओ वरदायक हेतैक। लेकिन एना छद्म निश्चितता संग स्वयं भ्रममे रहैत कीर्तिजीक रिपोर्ट कार्ड आ जनमानसक उपस्थितिपर विश्लेषण करैत भ्रम प्रचार करैत ओ कोन काज कय रहल छथि ई हमरा समझमे नहि आबि सकल। हरि: हर:!!

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      एखन हम कतय रही, एखन हम कतय एलहुँ,
      आकाश सऽ सीधा धरती, धरती सऽ पुनः पाताल,
      इ मन हमर कत चञ्चल अछि, जानि कतेक भागय ई,
      मातृभूमिक सेवा – संस्कृति लेल कर्म – धरोहर के संरक्षण,
      क्षण में बदलि गेल सभ विचार, देखि एक नग्न तस्वीर,
      कि हम एतेक धृष्ट छी? कि हम एतेक भ्रष्ट छी?
      जीवन के किछु होइछ अर्थ बुझू, मिथ्याचारके बंद करू।

      हरिः हरः!

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      क्षमा-प्रार्थनाक संग निम्न ९ विन्दु जे देल गेल अछि रजनीक वालपर (सौजन्य: अमरेन्द्र मिश्र), ई हम एखनहि देखलहुँ आ बिना कोनो बहसक विन्दु पढने मात्र रजनीक निष्कर्सात्मक जबाब धरि पढैत किछु नहियो लिखबाक इच्छा रखैत नवो टा विन्दु जे हृदयकेँ छूबि देलक, आ जेना “दहेज मुक्त मिथिला” अभियानक शोधशालामे ३ वर्षक कार्यक अनुभव अछि…. तखन किछु लिखबा सऽ स्वयंकेँ रोकि नहि पेलहुँ। सब मैथिलकेँ नीक समझ बनय ताहि लेल निम्न पोस्टक हम मैथिली भावानुवाद सेहो करय लेल जा रहल छी। जरुर पढू आ मनन करू। विश्लेषणक संग ई प्रस्तुत करय चाहब।

      सबसँ पहिले ओ पोस्ट – जहिना के तहिना:

      9 points all Maithil should practice (courtesy Amarendra Mishra )

      1. No dowry

      2. Higher Education for all Maithil girls before marriage

      3. Speak Maithili at home

      4. Accept girl’s family as your own even though the surname is changed

      5. Promote Maithil culture and arts

      6. Be humble and learn from other communities if they are doing somethings better than us

      7. Be proud and appreciate achievements of others in the community and imitate their work ethic

      8. Help others in need and not criticize. You may need help someday

      9. Treat boys and girls the same. Both are equally important. Sometimes particularly in the Mithila villages, the girl child’s needs take a back seat to boy’s needs. Any favoritism based on sex will delay progress in our society.

      भावानुवाद:

      समस्त मैथिल द्वारा ९ बात व्यवहार हेबाक चाही।

      (सौजन्य: अमरेन्द्र मिश्र, रजनी पल्लवी – सुप्रसिद्ध गायिका द्वारा फेसबुकपर प्रसारित)

      १. दहेज नहि लेब-देब।

      २. बेटीक विवाह सँ पहिले उच्च शिक्षा दियायब।

      ३. घरपर मैथिलीमे बाजब।

      ४. कनियाँ (दूलहिन) केर परिवारकेँ सेहो अपन परिवार जेकाँ मानब, भले उपनाम (सरनेम) अपना सँ अलग हो।

      ५. मैथिल संस्कृतिकेँ प्रवर्धन-प्रचार-व्यवहार करब।

      ६. नम्र बनब आ दोसर समुदाय जे हमरा सबसँ नीक कय रहल अछि तिनका सबहक कार्यसँ पाठ लेब, अनुकरण करब।

      ७. स्वाभिमानी बनब आ दोसरक उपलब्धिकेर सराहना करैत ओकर कार्यशैलीकेर देक्सी करब।

      ८. आवश्यकतामे रहल दोसरकेँ मदद करब, नहि कि उलहन देब। हमरो कहियो केकरो आवश्यकता पडि सकैत अछि।

      ९. बेटा आ बेटीकेँ समान रूपे पोसब। दुनू ओतबी महत्त्वपूर्ण अछि। यदाकदा आ खास कऽ के मिथिलाक गामसबमे, बेटीक जरुरतकेँ बेटाक जरुरतकेर प्राथमिकता उपरान्त मानल जाइछ। लैंगिक आधारपर विभेद समाजिक विकासकेर बाधक होइत छैक।

      विश्लेषण:

      दहेजक असल स्वरूप जे स्वेच्छासँ बेटीक परिवार अपन बेटी-जमाय वा नवघर (सासूर) लेल सामान्य व्यवहार पूरा करबाक लेल अपन औकात (आर्थिक क्षमता) अनुकूल जे दैछ ओकरा मानल जाइछ, लेकिन आइ ई विकृतरूपमे ‘माँगरूपी दानवी दहेज’ बनि गेल छैक आ बेटीक विवाह प्रस्ताव लऽ के आयल कुटुम्ब पक्षकेँ पहिले बहुत पैघ मुँह बाबि – लंबा सूची थम्हा देल जाइत छैक। एतेक सोना, एतेक कपडा, एतेक बरियाती, एतेक नकद, एतेक गाडी, एतेक भार, एना खान-पान, एना सम्मान…. आदि। एहि तरहें बेटीवालाकेँ मानू तऽ शोषण कैल जाइछ आ एकर प्रभाव आमजनमानस पर बेटी प्रति बोझिल स्वभाव प्राप्ति, बेटी विरुद्ध विभेद, बेटीक जन्म पर रोक (लिंग-परीक्षण उपरान्त गर्भपतन), बेटीक शिक्षापर साधारण खर्च वा साफे नहि केनाय आ कतेको तरहक मजबूर डेग उठबय के जेना मान्यता बनि गेल छैक। फेर वैह बेटी अपन सासूर जेतैक आ ओतय ओकर बौद्धिक आ नैहरमे पाओल संस्कारकेँ पुनरावृत्तिसँ पीढी दर पीढी कुंठित मनशामे घेराइत चलि जेबाक खतरा जे समाजिक विकास तऽ दूर, विभिन्न तरहक बिपरीत परिणाम प्रदायक बनि जाइत छैक।

      आइ गामसँ दूर कतेको लोक मिथिला समाजमे लौटबा सँ सेहो कतियाइत छैक, मजबूरी कहू वा फैशन… लेकिन व्यवहारिक आडंबरसँ भय सबकेँ होइत छैक। सब कियो राजा जनककेर उदाहरण दैत रंक – फकीर बेटीक बापोकेँ राजा सँ कम बनबाक प्रेरणा नहि दैत छैक। त्याग आ बलिदान तऽ दूर एक रत्ती कोनो बात नहि होइत छैक तऽ समैध रुसि रहैत छथिन, दूलहा रुसि रहैत छथिन, समधिनकेँ नाकहिसँ आवाज निकलय लगैत छन्हि। चारूकात तेहेन माहौल ठाड्ह होइत छैक जे नव दूलहा आ दूलहिन बीच आध्यात्मिक आत्मीय मिलन तऽ दूर बस सेक्स आ हनीमून रिलेशन विकास करय लगैत छैक। ताहिसँ जे बच्चा उत्पन्न होइत छैक, ओ सबटा प्रोसेस्ड बेबीज वर्ग मे अबैत छैक। जन्मैते मोम-डैड करैत मिथिलाक संस्कृतिक खात्मा करनिहार वर्णसंकर समान घटोत्कची शक्ति लागय लगैत छैक।

      एकमात्र दहेजी दानवक कतेको तरहक दुष्प्रभाव समाजमे प्रत्यक्ष देखाइत छैक। विवाहक सामान्य उम्रमे विवाह नहि भऽ रहल छैक, बेटीक विवाहक न्युनतम उम्र आब लगभग ३० वर्ष आ बेटा तऽ ३५, ४०, ४५ तक भऽ गेल छैक तैयो घटक के कतहु अते-पता नहि छैक। चारूकात अफरातफरी! कियो खेत दिशि भागल, कियो गाछी दिशि! ईशारा सब कियो बुझैत छियैक। एनामे यदि अन्तर्जातीय विवाह भेल, कियो केकरो संग उरहैर गेल… तऽ एहि मे केकरो कुल-खानदान केर कि दोख? समस्या एहनो छैक जे बेसी पढल-लिखल बेटीक विवाह करबामे सेहो परेशानी छैक। दूलहा २० चाही। ई मानसिकता हावी छैक। गरीबक बेटीक विवाह गरीबहि वर्गमे होयब तय छैक। अमीरक बेटीक विवाह आरो डबल अमीरक बेटा संग हेबाक चाही। बेटीवाला सेहो खूब दोषी छैक, ओकरो दूलहा सदिखन बीसे नंबर के चाही। बेटी उनैस छैक, दूलहा यदि अठारह तकतैक से मानसिकताक कमी छैक। बड विचित्र अवस्था छैक। सरकारी तंत्र सेहो फेल भऽ गेल बडका-बडका एक्ट आ रूल बना कय, मुदा दहेज प्रथा नित्य अपन दानवी मुँह बढौने जा रहल छैक आ समाजमे कतेको तरहक अपराध सेहो तहिना बढल जा रहल छैक। एनामे यदि उपरोक्त कोड अफ एथीक्सकेँ अनुसरण कैल जाय तऽ परिणाम नीक हेतैक से विश्वास कैल जा सकैत छैक।

      हरि: हर:!!

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      माननीय सांसद श्री कीर्ति झा आजाद महोदय,

      मिथिला मिरर तक पहुँचि गेल ई समाचार जे लोक कीर्तिजी द्वारा मिथिला राज्य केर माँग उठेबापर आशंकाक दृष्टिसँ देखि रहल छथि, हुनका लोकनिकेँ ई बुझा रहल छन्हि जे कीर्तिजी शायद चुनावी माहौल देखि एहि मुद्दाकेँ समर्थन देलाह अछि। ओना तऽ आलोचककेँ कथमपि दूत्कारबाक नहि अछि मिथिलावादीकेँ, लेकिन सच तऽ यैह छैक जे फेसबुक वा मिडिया द्वारा नीक सँ परिचित नहि रहल लोक अपनेक देन व मिथिला प्रति समर्पणकेँ नव गीतक धून बुझबाक दुस्साहस कय रहल छथि। यदि सच देखल जाय तँ अपने आइ सऽ नहि बल्कि कतेको वर्ष सँ मिथिला राज्य लेल चलायल जा रहल आन्दोलनक संग छी। चाहे अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समितिक आन्दोलन हो वा मिथिलाक धरतीपर कतहु कैल जा रहल माँग, अपने निरन्तरतामे एहि लेल अपन समर्थन दैत आबि रहल छी आ तही धुनकीमे भारतीय संसदकेर ओ पुरान चर्चा जे १९४७ ई. सँ १९५६ ई. धरि कैल गेल तेकरा फेरसँ जीबित कयलहुँ अछि – एहि लेल कठोर परिश्रम व शोध संग ११२० पृष्ठक “बिहार झारखंड पुनर्गठन बिल २०१३” एक प्राइवेट मेम्बर बिल रूपमे संसदक पटलपर अनलहुँ अछि। ई ऐतिहासिक कार्य कैल गेल अछि मिथिलाक लेल। बुझनिहार एहि मर्मकेँ बुझि सकैत छथि, ओ कि जे स्वयं अपनहिसँ अपन मातृभाषाकेँ रक्त चूइस हिन्दी वा उर्दू लेल राजनीति करता, ओ कि जे गोटेक बात मिथिलाक पढता वा जानता आ बजता काज करनिहारक विरुद्ध।

      महोदय, ई मिथिला क्षेत्रक पूर्व संस्कारमे रहल छैक जे खण्डी बुद्धि सँ सब दिन काजक लोककेँ हतोत्साहित करैत जेहो कार्य आगू बढत तेकरा ठमकाबी। लेकिन सच तऽ यैह छैक जे करोडों जनमानसमे महामहोपाध्याय तँ किछुए गणमान्य बनि सकलाह जिनका संग सरस्वतीक धार सब दिन विराजमान रहलन्हि। ताहि लेल, अपने समान “मिथिलाक जनक” कोनो विदुषककेर छद्म आलोचना वा उलाहनामे नहि फँसैत माँ मैथिलीक स्मृतिमे रखैत ओहि कार्यक दिशामे अग्रसर रही जाहि लेल अपने मरैत दमतक कार्य करबाक दृढ संकल्प लेने छी। आब ओ समय नहि रहि गेलैक अछि जे मुँह चमकेनिहार आ अगबे निन्दा करनिहारक बात मिथिला सुनतैक…. बहुत अपमान पैछला १०० वर्षमे बिहारक उपनिवेश बनि देख लेलकैक मिथिला। आब जातिवादी वा सामंती तीरसँ मिथिलाकेँ बेधबाक सपना ब्यर्थ जेतैक। स्वयं सीता पाहुन राम सहित मिथिलाक युवाक हाथमे ओ तीर-कमान धरा देलैन अछि जे गाम-गाम जागृति प्रसार करैत अपन स्वराज्य लेल अहाँक संग देत। साक्षात् बैद्यनाथ जे मिथिलाक भंडारकोणसँ कामनाक पूर्ति करैत रहल छथि ओ सहाय छथि। मिथिला राज्यक माँग पूरा हेबे करतैक आ उपेक्षाक विरुद्ध मैथिल संघर्ष करबे करतैक।

      हरि: हर:!!

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      मिथिला चित्रकलाक प्रसिद्ध नाम – एस सी सुमन भाइ केर चित्रकला प्रदर्शनी शुरु भेल काठमाण्डुमे। सफलता संग संपन्न होयबाक शुभकामना अछि।

      एहि प्रदर्शनीमे पर्यावरण आ मैथिल जनजीवनकेँ कैनवासपर उतारि, पुरान ओ नव दुनू शैलीमे चित्रकारिताक अद्भुद नमूना सब प्रस्तुत कैल गेल अछि। देश-विदेशसँ आबि रहल चित्रकला प्रेमी व दर्शक सब मिथिलाक लोक-संस्कृति आ कलाक अनुपम स्तरसँ परिचित होयबाक नीक अवसर पौता से आशा कैल जा सकैत अछि। श्री एस सी सुमन भाइ संग बात कयलापर कहलनि जे लक्ष्य एकमात्र यैह अछि जे अपन कला-कौशलसँ मिथिलाक नाम सगर संसारमे प्रसार करैत रही, जतय एक तरफ मिथिलाक राजनैतिक पहिचान – भूगोल संविधानमे स्थापित करबाक लेल कतेको अभियानी लागल छथि ततहि हम चित्रकलाक मार्फत सेहो अपन पहिचानकेँ विश्वस्तरपर स्थापित करबाक चेष्टा करैत ओहि अभियानमे अपन सहभागिता देखैत छी। निकट भविष्यमे एक प्रदर्शनी दिल्लीमे लगेबाक विचार अछि।

      हरि: हर:!!

      Attn: Lalit N. Jha Kripa Nand Jha Amar Nath Jha Rajesh Jha Pankaj Jha Pankaj Prasoon Hemant Jha Vijay JhaS.c. Suman Dhirendra PremarshiNav Mithilanchal Vikash Samiti Parmeshwar Kapari Sanjay Jha Sanjay Kumar व समस्त मिथिला-मैथिलीप्रति सिनेह रखनिहार!

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      ११ दिसम्बर २०१३

      If we truly want to establish the values of Mithila, we cannot deny the people in delhi with lots of visions and guts to do something for their motherland. Assume you want a national convention, whom you would call to make it a success – I would say they are delhites for sure. It is now up to you to look for them and then go for the event for first time. Jay Mithila! Jay Jay Mithila!! Harih Harah!!

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      मिथिलामे राजनीति: द्वितीय राजभाषामे सूचना उपलब्ध हो

      वर्तमान बिहार राज्यकक अपन महत्त्वपूर्ण भाग मिथिला, ताहि ठामक विकसित भाषा मैथिलीकेँ मारि उर्दूकेँ राजभाषा बनेनिहार खुद मिथिलाक आ सेहो समाजक अगुआ मैथिल ब्राह्मण जातिक मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा; आ निम्न समाचारमे राजद नेता अनिल मिश्रा द्वारा उर्दू मे सूचना देबाक लेल चरणबद्ध आन्दोलनक घोषणा करैत ज्ञापन देलाह अछि।

      यैह परिदृश्य बनैत छैक गुंहखिचरी राजनीति केर – बिहार जाहि बुनियादपर मिश्रित संस्कृति आ एकजुटताक प्रतीकरूपमे स्थापित कैल गेलैक तहिया बनेनिहार किछु आरे सपना देखलकैक; आ से एहेन‍-एहेन तुष्टिकरण राजनीतिक मनोदशासँ स्पष्ट भऽ जाइत छैक। उर्दु भाषा नहि हो से कहब गलत हेतैक, लेकिन भाषा वैज्ञानिक एम जे वारसी शोध द्वारा राखि चुकल छथि जे मिथिला – उर्दू (मैथिलीक एक डायलेक्ट – अर्थात् भाषिका या बोली) चलैत अछि आ लिपि उर्दू हो या देवनागरी या मिथिलाक्षर, सबहक बोलीक सम्मान करैत मातृभाषा स्वरूपमे मानि शिक्षाक अधिकारसँ सूचनाक अधिकार धरिक परिपुर्ति हेबाक चाही। लेकिन ई छुटपुटिया नेता आ जातिवादी राजनीति करनिहार बिहारी राजनीतिक दल सब दिन एहने-एहने मुद्दा लऽ के राजनीति केलक अछि आ फेर ओकरे निरन्तरता देबय लेल आतुर अछि। मिथिलाक पिछडल आम मुसलमान हो या पिछडा वर्ग हिन्दू, जाति व अन्य छद्म मुद्दापर अपन वोट एहने-एहने राजनीति करनिहारकेँ बुझू तऽ बेचि दैत अछि…. लेकिन जरुरत तऽ एहि बातक छैक जे ओहि वर्गकेँ बुझायल जाय जे आखिर आइ ६६ वर्ष धरिक स्वतंत्र भारतमे प्राप्ति कि भेलैक आ अवस्थामे सुधार किऐक नहि। भाषा संग राजनीतिमे मैथिलीकेँ पछुवेबाक भले कियो कतबू बेईमानी करय, लेकिन एकर सनातन शक्तिकेँ अपनेबाक प्रयास करैत मिथिला-उर्दू सहित अन्य बोलीकेँ साहित्यिक पोषण लेल कतहु कोनो सोच नहि विकास कय रहल अछि।

      हरि: हर:!!

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      ११ दिसम्बर २०१३

      ई समाचारसँ हमरा समस्त मिथिलावासीकेँ बहुत प्रसन्नता भेटल। अंग्रेजक समयतक दुनू कातक मिथिला नीक सँ जोडल छल – भारत सरकार द्वारा भपटियाही पुलक निर्माण, रेल पुलक स्वीकृति आ सकरी-फारबिसगंज बडी रेल-लाइन सँ दू कातक मिथिला एक भेल तहिना बिहार सरकार द्वारा बनाओल गेल ई पुल आब फेर एक नव क्रान्ति आनत से विश्वास अछि।

      निम्न समाचारमे मुदा एक बात बहुत हास्यास्पद लागल – कोसी आ मिथिलाके जोडयवाला पुल….. पता नहि आइ-काल्हिक पत्रकारमे कोन इतिहासक ज्ञान छैक जेकर चलते गूढ मिथिला (मंडन मिश्र, उग्रतारा, सिंहेश्वर बाबा सहित सैकडों चिह्नित ऐतिहासिक मिथिलातत्त्व) केँ कोसी कहि संबोधन करैत बिहारी बौद्धिकतासँ मिथिलाक अंग-भंग करबाक योजनाकेँ पोषण दैत छथि।

      तहिना मिथिला लेल लडनिहार एक महान् अभियानी सेहो अपन उम्र बढि गेलापर भसियाइत आइ-काल्हि कतहु-कतहु बयान देबय लगलाह अछि जे दरभंगिया सब हुनका तंग कय देलकैन से आब ओ कोसी राज्य बनौता… अपना-आपकेँ कौशिकीक सन्तान मानैत छथि…. ओना मिथिलाक लोकमे पूर्वहिसँ बुद्धि बेसी बढि गेलापर कतहु पंजाबी तँ कतहु राजस्थानी तँ कतहु मथुरावासी (ब्रजस्थ) बनि अपन नव पहचानसँ स्वार्थ सिद्ध करबाक कतेको उदाहरण सोझाँ अबैत रहल अछि। कतेको वाद-विवादसँ मिथिलाक दशा-दिशा निर्धारित होइत रहल अछि। लेकिन शपथ जानकी ओ जनक केर – मिथिला आब एहेन बूरित्व सबसँ शिथिला नहि हेतीह। सियारी खेल आ स्याह मनक रावणी ढोल द्वारा फेर छलल नहि जा सकती। बस युवा सब जागि गेल अछि आ कतहु क्लास लगा सकैत अछि। ओहो सब आब सब किछु पढि रहल छैक। विकिपेडिया आ इन्टरनेटक कमाल आब खाली चिकन-चूपड ब्राह्मण-वर्ग धरि नहि, ई खूलल छैक, आ सब कियो अपन मूल इतिहास बुझय लागल छैक।

      हरि: हर:!!

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      एक तरफ हम सब स्वाभिमान लेल संघर्ष कय रहल छी, दोसर तरफ एक दक्षिण मिथिला आ झारखंडमे कटि चुकल गोड्डावासी मैथिल आ ताहुमे एक अति सम्माननीय कलाकार जे सच पूछू तऽ मिथिलाकेँ आइयो अपन सुमधुर आवाजसँ जियाबैत छथि…. तिनका संग भेल घोर अपमानजनक व्यवहार लेल हम सब तुरन्त न्याय दियाबी। एहि लेल जँ जनताक अदालत लगाबय पडय तँ पाछू नहि हँटबाक चाही। एहेन दुर्व्यवहार सँ आखिर कोना कियो मिथिला वा मैथिली लेल अपनाकेँ समर्पित कय सकत, ई अत्यन्त सोचनीय विषय बुझा रहल अछि। एहि मामिलामे संस्था कोनो दलालक मार्फत कलाकारकेँ मुंबईसँ आमन्त्रित करैत छथि आ ओ दलाल एहेन सम्माननीय कलाकारकेँ दिल्लीसँ वापसी यात्रा खर्च तक जोगार नहि करैत छथि… जखन कि ओ संस्थासँ पूरापूरी पैसा लैत छथि…. एहेन दोखी दलालकेँ कथमपि अहिना नहि छोडबाक चाही। एहि लेल काल्हिसँ एखन धरि लगभग सब मुख्य मिथिला-मैथिलीक सिपाही ओ अभिभावक सबहक ध्यानाकर्षण कय रहल छी…. आ एक बेर फेर एहि पोस्टक माध्यमसँ अपने लोकनिक (जिनकर नाम टैग कय रहल छी) ध्यान एहि मुद्दाकेँ न्यायपूर्ण अवस्थामे पहुँचाबैत मैथिली ओ मिथिलाक सम्मान बचेबाक अनुरोध करैत छी।

      हरि: हर:!!

      Hemant Jha Rajesh Jha Rajesh Rai Sunil Kumar PawanSanjay Jha Sanjay Mishra Sanjay Kumar Sanjay MishraShishir Kumar Jha Neeraj Pathak Bhavesh NandanAbhishek Pandey Kamlesh Kishor Jha Kamleshkumar Jha Anil Mishra Shubh Narayan Jha Kislay Krishna Anil Jha Hriday Mishra Shyam Jha Amrendrkumar JhaLalbabu Sharma Ram Naresh Sharma Vijay Jha Anil Jha Bijendra Mohan Mishra Dipu Kripa Nand Jha Prakash Kamti Madan Kumar Thakur बंशिधर मिश्रा Bansi Banshi Dhar Choudhary Murli Dhar Deepak Kumar Kha Maithil Pankaj Jha Pankaj Prasoon Ram Narayan Jha Anup Satyanarayan Jha wa samast Mithila lel prayaas karanihaar bandhugan.

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      शिव हो! उतरब पार कओन विधि!

      लोढब कुसुम तोडब बेलपात!
      पूजब सदाशिव गौरिक साथ!!

      बसहा चढल शिव फिरए मसान!
      भंगिया जरठ वेदन नहि जान!!

      जप तप नहि, नहि कएलहुँ दान!
      बिति गेल तिनपन करइत आन!!

      भनहि विद्यापति सुनहु महेस!
      निरधन जानि मोर हरहु कलेस!!

      हरि: हर:!!

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      १० दिसम्बर २०१३

      मिथिला-मैथिली आन्दोलनका सच्चा प्रभाव: दृष्टिकोण

      नित्य समाचार मिलने लगा है कि मिथिला-मैथिलीसे जुडे भिन्न-भिन्न क्षेत्रोंके लोगों द्वारा कुछ न कुछ महत्त्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। सहरसामें हालही बनी मिथिला फिल्म सोसाइटी और अगले अप्रील महीने में प्रस्तावित फिल्म महोत्सव, मिथिला व मैथिलीके लिये एक ऐसा ही वरदान साबित होने जा रहा है। यही जागृति हमारे स्वस्फूर्त जागृतिका गवाही भी देता है।

      जब आप एक तरफ भारत सरकारसे अपनी स्वराज्य स्थापना के लिये गुहार लगा रहे होते हैं तो दूसरे तरफ आपके समाज और संस्कृतिसे जुडे विभिन्न पेशामें लगे लोगोंके द्वारा भी अपनी-अपनी तरहसे अपने क्षेत्रमें भी प्रगतिशीलता लानेके लिये प्रयास निरन्तरता प्राप्त करता है। हम इसे आन्दोलनकी सफलता भी मानते हैं और सच्चे मायनेमें हमारा विकास भी सदा ऐसे ही होते आया है। जहाँ भी मिथिलावाले पहुँचे हैं वो केवल अपने कर-बलोंसे और बौद्धिक प्रयासोंसे ही जीत हासिल किये हैं। आप पिछले १०० वर्षोंमें कोई एक उदाहरण दिखा दें कि भारत व बिहारमें मिथिलाको संरक्षित रखनेके लिये कोई खास प्रयास तक किया गया हो। विद्वान् दार्शनिकोंने कहा है कि राज्यविहीन संस्कृति लंबा समय तक जिन्दा नहीं रह सकता…. लेकिन ऐसे-ऐसे प्रयासोंसे भरा हुआ है मिथिला और इसे ही स्वस्फूर्त जागृति हम कहते हैं।

      कहना उचित होगा कि अब लगभग ८०० वर्ष पूरा होनेको जा रहा है मिथिलाको राज्यविहीन अवस्था प्राप्त करते हुए…. और इतने वर्षोंमें मिथिलाने जो भी किया है वो अपनी उर्वरा मिट्टी-पानी-हवासे जने संतानोंकी प्रखरता से ही सब कुछ संभव हो पाया है। भले ही हमारे अधिकांश संतानोंमे अब एक अजीब बिमारी प्रवेश करने लगा है कि वे अपनी सुख-सुविधा, मौज-मस्ती और व्यक्तिगत विकासके अतिरिक्त बाकी बातोंको बस मजाक जैसा समझते हैं। लेकिन इसका दुखद भाग यही है कि ऐसे सन्तानोंका जीवन दुर्दशापूर्ण अन्तको प्राप्त करता है। मिथिलाकी वो परंपरा जिसमें खुदके घरकी गोसाउनि और गुरुजनों गोसाईं से दूर होना ऐसे अधोगति प्राप्त करनेका मूल कारक है। परन्तु हमारे गोड्डाके ज्ञानेश्वर दुबे से लेकर सहरसा के मनोज श्रीपति तक, जर्रे-जर्रेपर अभी भी ऐसे सन्तान मौजूद हैं जो अपने तरीके से मिथिलाकी दीपकको अखण्ड ज्योतिके साथ जलाने में सहायक बने हुए हैं।

      राजनैतिक जनचेतना जगानेके लिये जहाँ एक ओर युवाका समूह पिछले एक वर्षोंमें बडे-बडे सुरमाओंको धत्ता बता दिया, वहीं मंचके कलाकारोंसे लेकर खेतोंमें काम कर रहे मजदूरोंमें भी अपने लिये स्वराज्य और संवैधानिक अधिकार के लिये जागृति उत्पन्न कर पाना मिथिला संस्कृतिका पुरातनकाल से आधुनिककाल तक जीबित रहनेके पीछेका अमरतत्त्वसे दर्शन कराने जैसा है।

      हरि: हर:!!

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      मिथिला राज्यपर राखल गेल ‘प्राइवेट मेम्बर बिल’ पर काल्हि हंगामा बीच बहस संभव नहि भऽ सकल, आब शुक्र दिनक सूचीमे राखल गेल अछि। बिलक समर्थनमे ओहो दिन प्रदर्शन होयबाक सूचना भेटि रहल अछि। जेना कि सांसद एहि बिलपर बहस होयबाक लेल धरनामे सहभागी मैथिलकेँ पास दियबैत बहस देखबाक लेल पुष्टि केने छलाह – ताहि लेल आशा कैल जा सकैत छैक जे विभिन्न संगठन सांसदसँ एहि बात लेल सम्पर्कमे हेता। हम समस्त मिथिलावासी एहि शुभ समाचारक इन्तजारमे छी जे आखिर एतेक वर्षक बाद भारतीय संसदसँ एहि विषयपर केहेन रुइख स्पष्ट होइत अछि। सरोकारवाला सबसँ निवेदन जे एहि विन्दु दिशि ध्यान जरुर राखैथ।

      हरि: हर:!!

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      There is no history that the revolution could born ever without complete knowledge on the subject. It is also true that hardly 2-3% of the people guiding any campaigning involve honestly to study things and then put up the gist for all to ponder and accordingly work ahead. This article would enable you to understand the whole ideology of Mithila Rajya. Although it has touched the subject in context of independent India and formation of states there, you can at least get an overall idea to further initiate and study more on the subject. We have information that at least Mithila has been the subject to research by thousands of scholars from all parts of world so far and fortunately whoever touched this subject could win the grace to earn a popularity and remain unforgettable in the history. So, there you are, check your destiny with Mithila and start the journey now.

      Harih Harah!!

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      दिल्लीमे बेदिली: आत्ममंथन

      सुखद समाचार ई अछि जे क्रमश: दिल्ली प्रदेशमे प्रवासी मैथिल धीरे-धीरे अपन मताधिकार आ राजनैतिक अधिकारसँ जन-प्रतिनिधि चुनबाक सामर्थ्य बढौने जा रहल छथि। पहिले जँ एक गोटे मैथिलीमे शपथ आ मिथिला परिधानमे सदनमे उपस्थिति जनौने छलाह तँ एहि बेर दू गोटा आ एक मिथिलानी सेहो अपन सम्भ्रान्त-सुन्दर सीतामयी उपस्थिति सदनमे देखेती। एक संदेश तँ समाजमे आम भऽ गेल जे लागि जायब तँ पूरा कइये कय छोडब।

      मिथिला राज्य केर माँग पर राखल एहि बेरुक धरनामे एतेक सुन्दर युवा व्यवस्थापन आ समर्पण छल जाहि लेल शब्द कम पडि जायत। आयोजन पक्षक व्यवस्था ओहि जोशक आगू फीका कहल जा सकैत छैक। ओतहि गौतम ऋषिक शापक असैर सेहो छल तेकरो लेल शब्दमे व्याख्या करब वा मुँहें सऽ बाजब भैर मुँह फोका निकालयवला होयत। कहि नहि सकैत छी गौतम ऋषिकेँ कोना मनाओल जाय आ कोना ‘रणेभीरा-गृहेसूरा-परस्परविरोधिनम्’ केर शापसँ मुक्ति भेटत! 

      बहुत किछु विचारल छल….. लेकिन सारा मूड आ कम्बिनेशन चौपट भऽ गेल। विरोध उत्पन्न करनिहारकेँ भले कनेकाल लेल प्रसन्नता भेटैत हो, लेकिन मिथिलाक आन्दोलन वा संघर्षमे एहेन स्थितिसँ मजबूती कम आ रिक्तता-तिक्तता बढैत छैक। एकता तँ दूर – आपसी सहयोग सेहो ओहने नकारनिहारक बहन्नाकेँ बल पहुँचाबैत छैक जे योगदान तऽ १ पाइ केर कि देत, कूचेष्टा धरि खूब करत।  कहबी सुनैत रही विद्वान् अजित आजादक मुँह सँ – युधिष्ठीरसँ कियो परिचय पूछैन तँ जबाब होइन जे अपने तँ ओना पाँच पाण्डव छी, लेकिन अपन समग्रताक बचेबाक लेल एक सौ भैयारी कौरव सहित कुल एक सौ पाँच भाइ छी।

      दिल्लीमे तँ समग्रताक बात लेल संघर्ष छैक। तखन एना बेदिली किऐक? काफी रास साक्ष्य आ परिस्थितिक अध्ययन उपरान्त ई स्पष्ट होइत अछि जे दिल्लीमे सेहो बहुत रास छूपल एजेन्डाक संग हमरा लोकनि मिथिला वा मैथिली लेल संघर्ष करैत छी। ईमानदारीसँ समर्पणक बहुत पैघ कमी देखाइत अछि। मिथिला राज्यक स्थापना जहिया होइ, वर्तमानमे लालबत्ती आ अंगरक्षकसँ सुसज्जित नेता ओ अफसर धरि सँ परिचय बढय आ ओही आरिमे अपना मोनक किछु निजी सपना साकार हो – सब मिला-जुलाकय अपन गोटी टा सुतारबाक ई एक अखाडा बुझाइत आशंका भेल। एहिमे धरने टा नहि, कहाँ दैन समारोह आदिक सेहो यैह लक्ष्य रहैत छैक जे पहुँच गहिराइ आ फेर गोटी सुतराइ। यैह सब कारणसँ यदि कियो निरपेक्षभावेन अपन समर्पण रखैत निर्माण चाहैत अछि तऽ ओ एक सऽ दू बेरक बाद नानी न मरिहें जे फेर समर्पित भाव ओहेन पूर्वाग्रही आन्दोलनी संग रखिहें…. उल्टा ओहि मुद्दासँ सेहो दूर होयबाक संभावना बढि जाइत छैक।

      आत्ममंथनसँ अमृत निकलैत छैक आ वैह पान कयलासँ अमरता भेटैत छैक। कलियुग हो वा सत्ययुग, परमात्मा तँ सदिखन समस्त बातक साक्षी स्वयंकेर आत्मा मार्फतो रहिते छथिन। शुभकामना यैह जे शुभ हो!

      हरि: हर:!!

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      ९ दिसम्बर २०१३

      ‘AAP’ सँ किछु सिखू मिथिलावादी!!

      मात्र लेखनीसँ शुरु कैल यात्राकेँ कतहुसँ ई कहि मजाक वा हास्यास्पद नहि बना देल जाय जे बस लिखिते टा छथि…. फेसबुकिया नेतागिरीसँ किछु नहि होयत…. आन्दोलन मात्र किछु गप मारनिहार मठाधीशक हाथमे लीलाम अछि…. आदि…. ताहि लेल हमहीं टा नहि, हमरा समान कतेको युवा मित्र सब अपन तन, मन ओ धन तिनूसँ मिथिलाक मातृसेवामे समर्पित बनि गेल…. ऐगला पीढीकेँ जोडबाक लेल कतेको तरहें योजना बनाओल गेल…. योजनामे कमी-कमजोरी रहितो एक काजसँ चारूकात हरबिर्रो मचेबाक प्रवृत्ति सेहो प्रवेश कयलक…. बस एक्केटा काज नहि कैल जा सकल जे ‘अरविन्द केजरीवाल’ समान कियो एक समर्पित कमाण्डर आ तहिना ‘आप मैनेजमेन्ट टीम’ समान एक समर्पित कोर कमिटी कतहु मिथिला लेल सेहो बनि जाइत आ जेना एक-एकटा काज करैत आइ आप देशक दू प्रसिद्ध आ स्थापित राजनीतिक दल सहित केहेन-केहेन पैघ राजनीतिक विश्लेषण करनिहारकेँ हैरानीमे छोडैत दिल्लीक दिलवाली भूमिपर पहिले इनिंगमे किल्ला धसा देलक। समीक्षा अपन कमजोरीक हेबाक चाही…. तूँ एना केलहीन ताइं ओना नहि भेलौक आ ओ तेना केलकैक जे ई एना नहि भऽ सकलैक कहि गुँह गिजयवला प्रवृत्ति जखन आजुक युवा मैथिलमे विद्यमान अछिये तऽ कोना भेटत स्वराज्य? भने तऽ उपनिवेशक गुलाम बनल छी… भने तऽ परदेशमे चाकरी आ नौकरी करितो कोहुना इज्जत जोगेनहिये छी…. भाँड मे जाउ मिथिला, एहि ठामक संस्कृति, एहि ठाम रहि रहल असहाय-निरीह जनता…. अहाँ बस फोटो खिचाउ आ कन्हा कुकूर जेकाँ माँरे पिबैत प्रसन्न रहू।

      समस्या यथावत् अछि। एक-दोसरकेँ उठा-पटक केनाय नहि छूटत। हमरा तऽ घोर आश्चर्य एहि बातक भेल जे दाकियानूस-झाडफानूस जे आइ धरि ठीक सऽ एक छोटो टा’क काज नहि केलक वैह माइक पकडिकय हमरा लोकनिक उत्साहकेँ आपसेमे बाँटि तोडयवला भाषा बाजैत समूचा उत्साहसँ पूर्ण भऽ रहल ऐतिहासिक यज्ञकेँ बर्बादी तरफ धकेलि देलक। वेल! एकटा जे केलक से केलक, कहू जे हमर अपन छोट जेकरा आंगुर पकडि-पकडिकय अपन खून-पानीसँ सिंचैत निर्माण केने छी ओहो ‘राह बताबे तो आगे चल’वला हमर बपहियाक कहबी पूरा करय लागल। बपजेठ बनिकय प्रखर धारासँ चलि रहल मिथिला निर्माणकेँ ध्वस्त करैत अछि कतेको जुल्मी भेंडक खाल पहिरने भेंडिया!! एकता माने यैह होइत छैक जे आपसी गारा-गारी करी हमरा लोकनि आ लोककेँ ठकी? नहि!! हमर बाजब-भूकब भले अहाँकेँ बेजाय लागत, लेकिन चुनौती भरल भाषामे कहि सकैत छी जे आइ धरि जतेक बात कहने छी ताहिमे हार नहि मानने छी। लेकिन आब…. हे भगवान्…. एकदम खिन्नता देखैत आ सकारात्मक उर्जा द्वारा नकारात्मक भाषाक उपयोग देखैत मोन डेरा तऽ गेल… लेकिन अमर नाथ जी, मनोज रुप नारायण जी, पंकज भाइ, राजेश जी, हेमन्त भाइ, विजय भाइ, प्रवीण मिश्रजी, गणेश मैथिलजी आ कतेको रास जेनरेशन २ यूथ्सपर भरोसा कायम अछि। जेनरेशन ३ संग सहकार्यमे हम अपनाकेँ सक्षम लेकिन नहि मानैत छी कारण हमर अपनहि किछु आदति बड खराब अछि। ओ खराब आदति हमरा सँ नहि छूटत। मैरियो जायब तैयो फालतू बात आ झूठ-फरेबसँ अपन कौलर चमकेबाक आ मुद्दाकेँ पाछू छोडि अपन नाम चमकेबाक जरुरत हमरा कहियो नहि बुझायल अछि। पता अछि, ईमानदारी आ सत्यताकेँ कियो नहि माइर सकैत छैक।

      हरि: हर:!!

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      एहि बेरुक (५ दिसम्बर, २०१३) धरनापर हमरा कि सब प्राप्त भेल:

      १. इजरायल दुनियाक नक्शासँ गायब रहलैक, मुदा संसारक एक कुशाग्र बुद्धिक संग एकजुटता लेल प्रसिद्ध-धनी इजरायली सब निर्णय केने छल – जखन एक-दोसरकेँ भेटैत छल तँ कहैत रहैक जे “एक दिन हमरा सबहक देस बनत।” आ यैह सकारात्मक आस्था व विश्वास ओकरा सबहक देशकेँ दुनियाक नक्शापर फेरसँ स्थापित कय देलकैक। (विद्वान् प्रो. शिवाकर ठाकुरकेर संबोधनसँ)

      (आब पाठकसहित हम स्वयं एहि विन्दुपर आरो वेक्षाबय लेल स्वतंत्र छी…. बहुत रास बात स्वत: स्पष्ट होयत जे आखिर कोन तरहें इजरायल अपना आपकेँ फेर सँ स्थापित केलक। एक आन्दोलनीक निष्ठावान जीवनमे आदर्श यैह सिखबैत छैक जे एहि तरहक प्रेरक उदाहरणकेँ गहन अध्ययन जरुर करय।)

      २. मिथिला राज्य आन्दोलनकेँ सरकार बड हल्लूकमे लऽ रहल अछि से सरकारक भूल थिकैक। जाबत ई आन्दोलन शान्तिपूर्ण तरीकासँ कैल जा रहल छैक ताबतमे समाधान निकालब उचित रहतैक। कहीं एतुका जनमानस भडैक जेतैक तऽ कहबा मे अतिश्योक्ति नहि जे राज्यसँ देशक माँग नहि उठय लागय। (दिल्ली प्रदेशमे कार्यरत एक सक्रिय कार्यकर्ताक संबोधनसँ)

      ३. मिथिलाराज्यक आन्दोलनक महत्त्व देश लेल कतेक छैक तेकर अनुभूति मात्र पाँच गो विन्दुपर आन्दोलनक प्रभावसँ स्पष्ट भऽ सकैत छैक। चाहे ओ गंगाक राजेन्द्र पुल या भागलपुर-नौगछियाक बीचक पुल वा कोसीक भपटियाही या कुरसेलाक पुल हो, एनएच ३१ हो या एनएच ५७ हो, बरौनी-कटिहार रेल लाइन हो या मुजफ्फरपुर-दरभंगासँ लिंक-विन्दु – मात्र पाँच ठाम यदि लोक आमरण अनशनपर बैसि जायत तँ सरकारकेँ घुटना टेकि हमर माँग पूरा करय पडत। (दिल्ली प्रदेशसँ भाषा आन्दोलनक एक सक्रिय अभियानीक संबोधनसँ)

      ४. राजनीतिक दल भले जेना एहि मुद्दाकेँ समर्थन प्रदान करय, लेकिन एक‍-एक मिथिलावासी मैथिल लेल ई आत्मसम्मान व स्वाभिमानक रक्षाक विषय थीक जे आखिर भारतक सबसँ पुरान संस्कृतिकेँ एना बिहारक उपनिवेशी भूगोलमे किऐक परिवर्तन कैल गेल अछि। (सांसद कीर्ति झा आजादक संबोधनसँ)

      आरो बहुत रास बात तँ होइते आबि रहल अछि, मिथिलाक चर्चा हर रूपमे केनाय, आपसी गंथन-मंथन…. सरकारक सोझाँ मिथिलाक आर्थिक उपेक्षा, संपन्न इतिहास रहैत वर्तमान विपन्नताक अनेको चर्चा आ स्वराज्यसँ समाधान सहित भारतीय गणतंत्रकेँ मजबूती प्रदान करबाक बात….. मुदा उपरोक्त बात सब हमरा लेल सीखय योग्य भेटल।

      जय मिथिला! जय जय मिथिला!!

      हरि: हर:!!

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      ९ दिसम्बर २०१३

      नेता सब, कार्यकर्ता कतहु नहि। पूर भीड लागल अछि। सम्मेलन शुरु भेल। लेकिन कनिकबा कालमे ओतय शुरु भेल भाषण जाहिमे मुद्दासं हंटल सब कियो आपसे मे भीड गेल। तुं एतेक, ओ फेसबुकिय, ओ बडका, तूं छोटका…… कतेको तरहक झमेला – मुद्दा बिसरा गेल। चारुकात लोक हंसय लागल। प्रश्न उठल जे बेटा सब युद्ध लेल तैयार त’ भेल……… लेकिन पोता एहेन बेटा सबस’ नहि जन्मत। तखन लागल रहू आ जय-जय कहैत रहियौक। काका कर्पुरी सेहो कहलखिन जे बस जय-जय करैत रहय जाउ। एक दिन जय हेतैक। इजरायल दुनियाक नक्शा पर एक दिन औतैक यैह गप त’ सब इजरायली एक दोसरके कहैत रहैक, एक दिन इजरायल बनि गेलैक। तखन त’ किछु सिखबाक जरुरत छैक, जहिये सीखब, अहुं जीतब। हरिः हरः!!

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      ८ दिसम्बर २०१३

      पंडित डोरीलाल शर्मा ‘श्रोत्रिय’, लेखक – ब्राह्मण वंशोंका इतिहास अन्तर्गत ‘मिथिलाकी पाण्डित्य परम्परा’पर पूर्ण विवरण प्रस्तुत केने छथि। श्री श्रोत्रियजी वर्तमान ८३ वर्षक अवस्थामे अलीगढमे रहि रहल छथि, जखन कि हिनकर जन्म २३ अगस्त, १९३० ई. मे धराई (अलीगढ)मे भेल अछि। विशेष वर्णन बादमे देब। हरि: हर:!!

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      Mithila ker ek-ek beta-bahu ehen ho jinkar vichaar Shri Kalika Nand Jha aa Smt. Ranjita Jha samaan ho. Mithila ke kateko vibhuti Delhi me chhapit chhathi… Nahi jaani etek raas Vidyapati ke aab sansaar me kona taakal jaay. Harih Harah!!

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      खण्डी मैथिल: ऐतिहासिक दृष्टान्त

      प्रश्न छैक जे मिथिलामे एक-दोसरक मतकेँ खूब खण्डन-मण्डन करैत खोंइचा छूटैत रहल अछि। प्रो. उदय शंकर मिश्र कहैत छथि जे ई बात मिथिलाक इतिहासमे बहुत पुरान अछि। उदाहरण दैत आगू कहैत छथि “ऋषि याज्ञवल्क्य जे बाइसम जनक शिरध्वज केर गुरु छलाह, जोग आ भोग दुनूपर आत्मनियंत्रण प्राप्त आ सिद्ध पुरुष छलाह, जिनकर पत्नी मैत्रेयी आ गार्गी समान महान विदुषी रहलीह; से याज्ञवल्क्य प्रारंभिक अध्ययनक क्रममे अपन गुरु ऋषि वैसम्पायनकेर आज्ञा बिपरीत गुरुआश्रममे शरणागत कोनो राजाकेँ आशीर्वाद देबासँ मना कयलन्हि आ गुरुकेर बुझेलाक बादो वाद-प्रतिवादमें फँसैत गुरु द्वारा शापित भऽ हुनक देल शिक्षाकेँ वमन कय देलाह, जेकरा अन्य शिष्य लोकनि तितिर बनि चाटि गेलाक कारणे तैतरीय संहिताक निर्माण भेल…. आर याज्ञवल्क्य पुन: सूर्य साधनासँ विद्या प्राप्त करैत याज्ञवल्क्य संहिताक निर्माणक बनलाह। एक बात गौर करय योग्य छैक जे भले गुरुद्रोह भेल, तदनुरूप पश्चाताप सेहो भेल, परञ्च महान ऋषि अपन साधनासँ फेरो दोसर महान कीर्ति करबा लेल पाछां नहि पडलाह।”

      एक दोसर उदाहरण दैत कहैत छथि, “महर्षि गौतम प्राचिन न्यायकेर प्रवर्तक छलाह। भगवान् रामकेँ १४ वर्षक वनवास क्रममे पंचवटीमे महर्षि संग भेट करैत समय वनवास लेल पिताक आज्ञाक दृष्टान्त रखैत छथि, ताहिपर गौतम ऋषि रामकेँ अपन पिताक मृत्युक कारण बनबाक न्याय दैत छथि आ दुनू गोटामे एहि न्यायपर बहस होमय लगैत अछि। अन्ततोगत्वा राम एहि न्यायकेँ प्रतिकार करैत शापित करैत छथि जे प्राचिन न्याय नष्ट भऽ जाय।”

      तेसर उदाहरण: एक बेर मिथिलामे भयानक अकाल पडि गेल, लेकिन गौतम ऋषि अपन सिद्धिसँ कामधेनुक बेटी नन्दिनी गायकेँ आवाहन कय सबहक भरण-पोषण करय लगलाह। गौतम ऋषि बदलामे समस्त प्रजासँ भगवद्भजन लेल निवेदन कयलाह। ओहि निवेदनकेँ समग्रमे आत्मसात करबाक ठामपर उलटे ओहि परपोषित प्रजामे सँ किछु कुटिल आ खण्डी बुद्धिक लोक दयालू ऋषिक विरुद्ध प्रपंच करय लगलाह। ओहने प्रपंची कियो एक दिन मायारूपी गाय ऋषि गौतम दिशि हुलका देलनि, ऋषिक ओहि गायकेर आक्रामकता रोकबाक लेल ‘धा’ कहि रोकबाक चेष्टा कयलेपर ओ गायकेर मृत्यु भऽ जाइत छैक। तहीपर हुनक आश्रममे मौजूद समस्त विप्र ओ तपस्वी आदि हुनका गो-हत्यारा कहि आश्रम छोडि चलि दैत अछि। बादमे ऋषि द्वारा ध्यानस्थ भेलापर समस्त बात बुझैत ओ शाप दैत कहलखिन: गृहेसुरा रणेभीडा च परस्परविरोधिन:…. अर्थात् घरेमे वीर बननाय लेकिन रणभूमिसँ पीठ देखाय भगनिहार आ सोझाँमे प्रशंसा मुदा परोक्षमे निन्दा करैत रहबाक चरित्र मिथिलावासीक होयत….।”

      क्रमश:….

      हरि: हर:!!

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      मंथन विचार: मैथिलमे राजनैतिक जनचेतनाक घोर कमी

      मिथिला आवाजक सम्मुख पृष्ठपर मिथिलाक एकहु खबड नहि रहबाक कारण कि भऽ सकैत अछि? मंथन योग्य विषय बुझा रहल अछि। कि मिथिला लेल प्रकाशित होमयवला समाचारपत्रमे बिहारहि केर समाचार आ सेहो जे लोक हिन्दी-अंग्रेजीमे पढबाक आदी बनि गेल अछि तेकरे अनुवादरूपमे भेटत तँ मैथिलीक मौलिकता हम पाठकवर्गमे कोना प्रवेश पाओत….? एक दिशि मिथिला राज्य बनेबाक माँग तेजी पकडैत बुझा रहल अछि, दोसर दिशि एहेन समाचार संप्रेषणसँ अधिकार लेल संघर्ष आदि बेकार काज थीक सेहो भान होमय लगैत अछि। पता नहि, एतेक रास असंतुलित समाजक बीच भले आब मिथिलाक अस्मिता कोना पुनर्जीवन पाओत, ई एक गंभीर चुनौती बनि सोझाँ ठाड्ह अछि।

      जखन कि मिथिला आवाजक सम्पादक ओ सीएमजे विश्वविद्यालयकेर कुलपति डा. सी. एम. झा स्वयं सब दिन एहि आन्दोलनक प्रखर समर्थक रहि आयल छथि। हुनकर प्रगतिशीलतापूर्ण विचारसँ सब दिन मिथिलावासी आह्लादित होइत रहल छथि। विगत धरना दिन हुनकर घोषणा जे मिथिला आवाज आब दिल्ली आ एनसीआरमे सेहो उपलब्ध होयत, जल्दिये मैथिली चैनल सेहो शुरु कैल जायत…. तहिना दरभंगामे मिथिला आवाज द्वारा कइएको टा पहल जे आपसी एकजुटतासँ मिथिलाक विकस कैल जाय…. ई सब बात सँ समस्त मिथिलावासीमे एक आशा जागल अछि। डा. झा केर विभिन्न प्रयास आ मिथिलाक पौराणिक सत्य विद्यागाराक रूपमे पुन: एजुकेशनल हब बनेबाक प्रतिबद्धता, तकनीकी शिक्षा प्रति निष्ठा, पलायन प्रति दर्द, मिथिला राज्य लेल सपना…. एहि सबसँ डा. झा आधुनिक जनक केर रूपमे स्थापित होइत छथि।

      पिछला धरना पर अयबाक लेल किछु मैथिली फिल्मकर्मी लोकनिकेँ सेहो अनुरोध कैल गेल छल, किछु साहित्यकर्मीकेँ सेहो आ निस्सन्देह पेशाकर्मी सहित जतेक समाजिक संभाग छैक हुनका सबकेँ एकजुटता सँ अपन अधिकार लेल आवाज लगेबाक आह्वान कैल गेल छल। साधनक अभावमे ई समस्त आह्वान हमरे-अहाँ सब सन व्यक्ति द्वारा एस.एम.एस., फेसबुक पोस्ट, फोन आदि सँ कैल गेल। भले हमरा लोकनि एकीसम शदीमे कतेको मिलियनेयर आ बिलियनेयर सहित मिथिलाक वासी छी, लेकिन संवैधानिक अधिकार पयबाक टीस सबमे किऐक नहि?

      हरि: हर:!!

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      सम्मानित भेलथि डोरीलाल शर्मा ‘‘श्रोत्रिय जी‘‘ -(साभार-मिथिला मिरर इ-पेपर)
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      अलीगढ़,दिल्ली,मिथिला मिरर-प्रवीण नारायण चौधरीः पैछला मिथिला महोत्सवमें घोषित मिथिला सेवा सम्मान जे पंडित डोरीलाल शर्मा श्रोत्रिय (अलीगढ) केर शोधपूर्ण ग्रंथ “मिथिलाकी पांडित्य परंपरा” लेल देबाक घोषणा कैल गेल छल से सम्मान आइ एक संछिप्त समारोह द्वारा पंडितजीकेँ अलीगढ स्थित आवासपर सांझुक पहर मैथिली लोकसंस्कृति मंच – लहेरियासरायकेर सचिव उदय शंकर मिश्र द्वारा हस्तान्तरण कैल गेल। सचिव मिश्र सम्माननीय अध्यक्ष मैथिलीपुत्र प्रदीपकेर विशेष शुभकामना संदेश वाचन करैत उपरोक्त सम्मान श्री श्रोत्रियजीकेँ प्रदान केलनि। श्री श्रोत्रियजी द्वारा अनेको ग्रंथकेर रचना कैल गेल अछि जाहिमे प्रमुख “ब्राह्मण वंशोंका इतिहास – A History of Brahmin Clans”, “मिथिलाकी पांडित्य परंपरा” एवम् “ब्राह्मण परिचायिका”

      अछि आर ई सब ग्रंथ समस्त भारत संग विश्वकेर विभिन्न भागक विश्वविद्यालय व शोधकर्ता सबहक लेल रामवाण प्रमाणित भऽ रहल अछि। मिथिलाक प्रसिद्ध “भारतीय प्रशासनिक सेवा”सँ उत्तर-प्रदेश सहित भारतक केन्द्रमे मुख्य भूमिका निर्वाह करनिहार श्री सुबोध नाथ झा केर प्रेरणासँ लिखल उपरोक्त सम्मानित ग्रंथकेर एखन धरि एकमात्र संस्करण छापल गेल अछि आ बहुत जल्दी एकर ऐगला संस्करण सेहो छपायल जायत। मैथिली लोकसंस्कृतिक मंचसँ सम्मानित होयबापर श्री श्रोत्रिय जी कहलनि “सम्मान पाबि हम बहुत प्रसन्न भेलहुँ, ई हमरा लेल गौरवकेर बात भेल आ अलीगढकेर समस्त मैथिल समाज एहि लेल सम्मान करयवाला संस्थाकेँ आभार सहित धन्यवाद ज्ञापन करैत अछि।”

      एहि सम्मान हस्तान्तरणकेर अवसरपर उपस्थित मैथिल ब्राह्मण समाज, अलीगढ केर संस्थापक श्री राजकुमार मैथिल सम्मान प्रति समस्त मिथिलावासीकेँ धन्यवाद संग-संग आपसी जुडाव लेल आह्वान केलनि। बहुत पहिले प्रवासमे आयल मैथिल समाज आइ अपन भाषा ओ संस्कृतिसँ दूर मूल मिथिलासँ जे कटल अछि तेकर पीडा शब्दमे नहि राखल जा सकैत अछि, बस हम सब फेर कोना जुडि सकब ताहिलेल विद्वत् सामग्री सहित कला-संस्कृति आ सम्बन्धकेर आदान-प्रदान फेर सँ हो तेकर प्रयासलेल अनुरोध करैत छी। एहि अवसरपर मैथिली सेवा समिति, विराटनगरकेर महासचिव प्रवीण नारायण चौधरी तथा मैथिली फाउन्डेशनकेर संस्थापक कौशल कुमार सेहो उपस्थित छलाह। एहि अवसरपर श्री