अपार बहुमत सँ एनडीए केर जीतः नरेन्द्र मोदीक विनम्रता संग जनादेश प्रति आभार व्यक्त

२४ मई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!!

कुल ५४२ संसदीय क्षेत्र लेल संपन्न चुनाव मे भाजपा नीत एनडीए केँ ३४८ सीट पर विजयी हासिल भेल अछि। काल्हि अबेर साँझ धरि रुझान केर हिसाब मात्र देल गेल छल। रुझान मे स्पष्ट भऽ गेलैक जे भारत मे नव सरकार एक बेर फेर मोदी सरकार केर बनत। विश्व भरिक लगभग प्रत्येक देशक प्रमुख नेता लोकनि द्वारा नरेन्द्र मोदी केँ एहि जीत लेल बधाई ज्ञापन करबाक सिलसिला काल्हिये सँ चलि रहल अछि। अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, जर्मनी सँ लैत पड़ोसी नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भुटान, श्रीलंका, बांग्लादेश – सब देशक प्रधानमंत्री वा राष्ट्रपति द्वारा भारतक ९० करोड़ मतदाता आ लगभग डेढ मासक ७ चरण मे सम्पन्न दुनियाक सर्वथा विशाल चुनाव सँ जीत हासिल करयवला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन आ विशेष रूप सँ भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केँ बधाई देल गेल अछि। एम्हर भारत मे विपक्षी दल सहित सहयोगी दल आ नेता द्वारा सेहो नरेन्द्र मोदी केँ एहि भारी जीत लेल बधाई देल गेलनि अछि। विजयी दल, गठबन्धन आ नेता-कार्यकर्ता सब कियो जीतक उत्साह मे जश्न मनबैत देखल गेला। देश भरि मे एतेक पैघ जनादेश सँ उत्साहक माहौल त अछिये, विदेशहु मे भारतीय चुनाव पर नजरि रखनिहार मे जोश-जश्न केर कमी नहि। अमेरिका मे त चुनावी परिणाम सिनेमा हौल केर पर्दा पर लोक सब देखलनि।

एहि सब बीच विजेता दल भारतीय जनता पार्टीक मुख्यालय दिल्ली मे जे जीतक जश्न मनेबाक लेल हजारों कार्यकर्ता जुटल ओतय पहिने पार्टीक राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आ धीरे-धीरे सब प्रमुख राजनेता यथा राजनाथ सिंह व अन्य वरिष्ठजन सब पहुँचलथि। बाद मे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सेहो पहुँचिकय एहि जीतक जश्न मे कार्यकर्ता सब केँ बधाई ज्ञापन कयलनि। लेकिन स्वयं अपना लेल जिम्मेदारी बढि जेबाक बात कहैत जानि-बुझिकय बदलाक भावना सँ – बद-इरादा व बद-नीयत सँ कोनो कार्य नहि करबाक वचनबद्धता प्रकट करैत अपन शरीरक कण-कण आ समयक पल-पल देश लेल समर्पित कय देबाक वचनबद्धता प्रकट कयलनि। जाहि बात लेल नरेन्द्र मोदी जानल जाइत छथि, तेहने विनम्रता आ गम्भीरता सँ देशक जनता आ पार्टीक नेता-कार्यकर्ता केँ संबोधित कयलनि। हुनकर एहि संबोधन मे गहींर भाव आ अर्थ छुपल अछि ओ स्वयं बजैत अछि जे नरेन्द्र मोदी कोन उच्चस्तरक नेता छथि जे आबयवला कतेको दशक धरि अकाट्य आ अविजीत नेताक रूप मे स्थापित रहता। जहिया सँ गुजरातक मुख्यमंत्री बनलाह, ओ हारि कहियो नहि देखलनि अछि। मुख्यमंत्रीक रूप मे अविजीत, आब प्रधानमंत्रीक रूप मे अविजीत सिद्ध भेलाह अछि। एहि सँ पहिने जवाहरलाल नेहरू एहि तरहक करिश्माई कारनामा कएने छलाह, संगहि इन्दिरा गांधी सेहो लगातार दोसर बेर एहि तरहक बहुमत प्राप्त कय भारत केर नेतृत्व कएने छलीह।

नरेन्द्र मोदीक संबोधन एतय हु-बहु राखि रहल छी पाठक लेलः साभार बीबीसी हिन्दी सँ लेल गेल टेक्स्ट

  • देशवासियों 2014 में आप मुझे ज़्यादा जानते नहीं थे. लेकिन मुझे जानने के बाद आपके समर्थन में और ताक़त आई है. मैं इसके पीछे की भावना को भली-भांति समझता हूं. जैसे अमित भाई कह रहे थे कि बहुत वर्षों बाद एक चुनी हुई सरकार दूसरी बार पूर्ण बहुमत और पहले से अधिक ताक़त से जीतकर आए- इसका मतलब देश की जनता का बड़ा भरोसा है. भरोसा जैसे बढ़ता है, ज़िम्मेदारी ज़्यादा बढ़ती है.
  • देशवासियों ने मुझे जो दायित्व दिया है, इसे मेरा वादा, संकल्प या प्रतिबद्धता मानिए, आपने फिर से मुझे जो काम दिया है, आने वाले दिनों में भी मैं बदइरादे से या बदनीयत से कोई काम नहीं करूंगा. काम करते-करते ग़लती हो सकती है लेकिन बद-इरादे या बद-नीयत से कोई काम नहीं करूंगा.आपने मुझे इतना बड़ा भरोसा दिया है कि मैं मेरे लिए कुछ नहीं करूंगा.
  • मेरे समय का पल-पल, मेरे शरीर का कण-कण सिर्फ़ और सिर्फ़ देशवासियों के लिए है. मेरे देशवासी जब भी मेरा मूल्यांकन करें, इन तीन तराजू पर मुझे कसते रहना. कोई कमी रह जाए तो मुझे कोसते रहना. मैं सार्वजनिक तौर पर जो बातें कहता हूं, उसे जीने के लिए पूरे प्रयास करूंगा.
  • 2019 से 2024 का कालखंड देश की आज़ादी के सिपाहियों का स्मरण करने का है. हम 130 करोड़ लोग संकल्प करें कि देश को सभी मुसीबतों से मुक्त करके समृद्ध राष्ट्र बनाना है और ग़रीब से ग़रीब की सामान्य आवश्यकताओं को पूरा करना है तो 2024 से पहले देश को हम नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं.और इसलिए इस चुनाव को हमें नम्रता से स्वीकारना है. सरकार तो बहुमत से बनती है, जनता ने बना भी दी. लेकिन लोकतंत्र का संस्कार और उसका स्पिरिट हमें ज़िम्मेदारी देता है कि सरकार भले ही बहुमत से बनती हो लेकिन देश सर्वमत से बनता है.
  • मैं सार्वजनिक रूप से कहता हूं. चुनाव में कौन क्या बोला, मेरे लिए वो बात बीत चुकी है. हमें आगे देखना है. सबको साथ लेकर चलना है. हमारे घोर विरोधियों को भी साथ लेकर चलना है. प्रचंड बहुमत के बाद भी पूरी नम्रता के साथ, लोकतंत्र की मर्यादाओं के बीच चलना है. संविधान हमारा सुप्रीम है, उसी की छाया में हमें चलना है.
  • भारत की जनता ने एक नया नैरेटिव सामने रख दिया है. सारे समाजशास्त्रियों को पुरानी सोच पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है. वो नैरेटिव ये है कि देश में अब सिर्फ़ दो जाति बचेंगी. ये जाति के नाम पर खेल खेलने वाले लोगों को बहुत बड़ा प्रहार हुआ है. ये दो जातियां हैं- ग़रीब और दूसरी जाति है- देश को ग़रीबी से मुक्त करने के लिए अपना योगदान देने वालों की. एक वो हैं जो ग़रीबी से बाहर आना चाहते हैं, दूसरे वे हैं जो देश को ग़रीबी से मुक्त कराना चाहते हैं.
  • तीस साल से देश में, विशेष रूप से, वैसे ये ड्रामेबाज़ी तो लंबे समय से चल रही है- एक टैग था, जिसका नाम था सेक्युलरिज्म. जिसका चोला ओढ़ते ही सारे पाप दूर हो जाते थे. नारे लगते थे कि सारे सेक्युलर एक हो जाओ. आपने देखा होगा कि 2014 से 2019 आते आते उस पूरी जमात ने बोलना ही बंद कर दिया. इस चुनाव में एक भी राजनीतिक दल सेक्युलरिज़्म का नकाब पहनकर देश को गुमराह करने की हिम्मत नहीं कर पाया.
  • वो बेघर जो आज पक्के घर में रहने गए हैं, यह उनकी विजय है और जिनकी 2022 तक घर बनना तय है, उनकी विजय है. यह मध्यवर्ग के उन परिवारों की विजय है जो नियम कानूनों का पालन करते हुए टैक्स देता रहा. पांच साल में उसने अनुभव किया कि उसका टैक्स सही काम आ रहा है. उस मध्यवर्ग के मन का संतोष इस चुनाव में नज़र आ रहा है.

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