अर्थ उपार्जन लेल स्वरोजगार केर अवसर – बेरोजगारी आ बेकारी सँ मिथिला एना निकैल सकैछ

अर्थ विचार

– राजन झा, गुआहाटी (मूलः सहरसा)

बेरोजगारी हमर नीति निर्माता लेल हमेशा सँ एकटा पैघ चुनौती रहल. हालहि में अजीम प्रेमजी युनिवर्सिटी केर सेंटर फॉर सशटेनेबल इम्पलायमेंट विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट में भारतीय जाँब मार्केट केर डरावना पक्ष के उद्धृत कयल गेल अछि. रिपोर्टक अनुसार, हालाँकि देशक जीडीपी ग्रोथ रेट बढि रहल अछि मुदा ओहि अनुपात में रोजगारक संभावना पैदा नहि भ पाबि रहल छै. आर समय केर साथ ई अनुपात कमजोर भेल अछि.

1970- 80 केर दशक में जखन जी. डी. पी ग्रोथ रेट 3-4% रहय, तखन रोजगारक सृजनक दर 2% रहय ओतहि 2000 में जखन जी. डी. पी केर ग्रोथ रेट 7% रहय तखन रोजगारक सृजनात्मक रेट 2% रहय. रिपोर्ट में इहो कहल गेल अछि जे 82% पुरुष आ 92% महिला वर्कफोर्स दस हजार महीना सँ कम कमाबैत अछि जे सातवीं केंद्रीय न्यूनतम वेतनमान 18000 सँ भी कम अछि. एकर मतलब ई भेल जे बहुत रास लोक बहुत कम पाय पर काम करैत अछि या दोसर शब्दमे कहु त जीवनक निर्वाह लेल मात्र पाय कमाबैत अछि.

बात मैथिल वर्कफोर्स लेल करु त मैथिल ई रिपोर्ट सँ बाहर नहि अछि अर्थात अधिकांश मैथिल भी अपन राज्य सँ दोसर जगह जा कऽ भी मात्र जीवन निर्वाह क रहल छथि. जिनका सम्मानजनक पाय आ बेहतर अवसर भेटल अछि हुनका लेल त प्रवास ठीक छै मुदा मात्र जीवन निर्वाह लेल पाय कमेनिहार लोक सभ लेल प्रवास दुखदायी आ तकलीफदेह अछि. अहि तरहक लोक कए प्रवासक बदला अपन घर पर रोजगारक साधन खोजबाक चाही.

हमर सबहक मानसिकता अछि जे गाम में रईसी झारब आ प्रवास में कुनो काज चलतैक. मतलब हम सब स्वरोजगारक सँ बेसी नौकरी में रुचि रखैत छी. जखन कि स्वरोजगार में युवा सभ लेल बेसी अवसर उपलब्ध अछि. मैथिल संस्कृति के एखनहुं तक आर्थिक रूप सँ एक्सप्लोर नहि कयल गेल अछि. मैथिल संस्कृति सँ जुड़ल माछक बात करी त अहि में बहुत रास संभावना छैक. आय माछक बाजार मिथिला क्षेत्र में आंध्राक माछ सँ पाटल अछि हमर सभक हीनताक कारणेँ. आब किछ युवा सभ मत्स्य पालन के क्षेत्र में प्रोफेसनल तरीका सँ एला अछि जे माछक बजार में अपन दखल बढा रहल अछि.

सुपौल जिला केर कर्णपुर गाम केर विवेकानंद नाम्ना युवा दिल्ली युनिवर्सिटी सँ पढाई केर बाद फिसरीज में ट्रेनिंग ल क गाम आबि अहि क्षेत्र में हाथ अजमेलथि आ आय सफल भेलथि आ लाखो रुपया हुनकर मासिक आय छनि. हुनकर अखबार में छपल एकटा पंक्ति क एतय हम उद्धृत करय चाहब जे पाय पेड़ पर नहि उगय छै, पाय माछक रुप में पानि में रहैत छैक.

माछक बाद मखान केर बात करी त एक सुपर फूड हेबाक कारणें मखान में देशक संग संग विदेश में एकटा बहुत पैघ बजार छै आ एकर उत्पादन आ बहुत रास प्रोडक्ट सँ युवा सब सम्मान जनक जीविका कमा सकैत छैक. मखानक जतबा उत्पादनक संभावना मैथिल क्षेत्र में अछि ओहि अनुरूप उत्पादन नहि भ रहल छै पूर्णिया आ कटिहार छोड़ि दी त. कटिहार क्षेत्र या समुचे मिथिला में पानि बेसी रहबाक कारणे जुट केर उत्पादन अधिक होयत अछि आ प्लास्टिक हेजर्ड के वर्तमान युग में जुट पर्यावरण संरक्षण केर संग संग आय केर वढिया साधन भ सकैत अछि.

हमरा ओतय समाज में आर्टिशन वर्ग अछि जे लकड़ी, मिट्टी, बाँस आ लोहाक बहुत रास कलाकृति बनाबैत छथि ओकरा सब के अगर बाजारीकरण क के बाजार उपलब्ध कराउल जाय त बहुत रास लोक लाभान्वित हेताह जे निरक्षरता आ सामंतवादी सोचक कारणेँ एखन धरि संभव नहि भ सकल अछि.

सिक्की आर्ट द्वारा निर्मित चीज सब प्लास्टिक के बढिया बिकल्प भ सकैत अछि आ जँ एकर बढिया सँ मार्केटिंग कयल जाय त देशक संगहि बिदेशक एकटा पैघ बजार उपलब्ध होयत आ लोक खास कऽ महिला बर्गक आय के साधन बढ़ैत. एकर संगहि मिथिलाक पेंटिंग, अदौरी, चिरौरी आदि अनेक फुड प्रोडक्ट के बजार उपलब्ध अछि जाहि सँ लोक कए सम्मान जनक रोजगार भेट सकैत अछि.

अंत में बात करब नाँलेज बेस्ड इकोनिमी जे मिथिला पहिनहुँ रहय ताहि क्षेत्र में बहुत रास संभावना छैक आ युवा सब आगु आबि कए रोजगार क सकैत अछि आ पाँच गोटे कए रोजगार उपलब्ध करा सकैत अछि. टेक्नोलॉजी के प्रयोग सँ एकरा आर्थिक हब बनाओल जा सकैत अछि. डॉक्टर, इंजीनियरिंग, वकील, टीचर आ लेखक आदि विभिन्न तरहक सेवा क्षेत्र में बहुत रास संभावना छैक आ मैथिल युवा सभ लेल अवसर केर निर्माण कयल जा सकैत अछि. मैथिली गीत संगीत, फिल्म आ भाषा केर उन्नयन सँ बहुत रास परोक्ष आ अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होयत. ताहि लेल सब गोटे के मिल कऽ एक दोसर केँ सहयोग करैत नव उन्नत एवं समृद्ध मिथिला केर निर्माण भ सकैत अछि.

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