राजू सिंह नहि रहलाह – अपन पाछाँ असहाय परिवार केँ बिलखैत आरो कय टा सवाल छोड़ि गेलाह

समसामयिक प्रसंग – एक्के संग – कइएक प्रश्न

दरभंगाक एक चर्चित सामाजिक-राजनीतिक व्यक्तित्व राजू सिंह केर मृत्यु

किछुए दिन पहिने सोशल मीडिया पर एकटा समाचार बड़ा तेजी सँ पसरैत देखायल – राजू सिंह नहि रहला। भव्य आकर्षक व्यक्तित्व केर धनी राजू सिंह केर मृत्युक समाचार सँ नहि केवल दरभंगा कंपायमान बुझायल, बल्कि फेसबुक केर धरातल सँ लैत यथार्थक धरातल पर रहल कइएक चिर-परिचित चेहरा केँ हिनकर मृत्युक समाचार सँ भाव-विह्वल आ शोकमग्न देखलहुँ।
 
काल्हि मृतक राजू सिंह केर स्मृति मे लहेरियासराय टावर पर एकटा शोक सभाक आयोजन कयल गेल छल। मिथिला राज्य निर्माण सेनाक अध्यक्ष रंगनाथ ठाकुर भाइजी केँ एहि सभाक किछु फोटोग्राफ्स संग हुनकर विशिष्ट शैली मे आक्रोश प्रकट करबाक बात देखल। राजू सिंह केर मृत्युक किछु समय बादहि सँ ओ निरन्तर किछु मौन सवाल उठा रहला अछि। नेता-कार्यकर्ता बीचक किछु सम्बन्ध मे नेता द्वारा कार्यकर्ताक उपेक्षा सँ एहेन दुर्घटना घटबाक संकेत स्पष्ट अछि हुनकर लेखनी द्वारा प्रकट आक्रोश मे।
 
मैथिलीक संचारकर्म भले कमजोर रहय, लेकिन ई मुद्दा मैथिली संचारकर्म मे सेहो उठेबाक आवश्यकता बुझायल हमरा। ओना त मैथिली भाषाभाषी समाजक अपन ‘निजत्व-स्वत्व’ भाषाक बलहि सँ उखैड़ गेल अछि, एहि ठामक लोक अक्सर हिन्दी मे सारा हिन्दुस्तान केँ बुझेबाक लेल बेस बेहाल देखाइत अछि, ताहि सँ ऊपर जे आइ-काल्हि नव पीढी अछि ओ ओहू सँ बढिकय अपन बात सारा विश्व केँ बुझाबय लेल अंग्रेजिये मे बेसीकाल लिखैत-बजैत देखाइत अछि; लेकिन ‘तत्त्वगत सत्य’ यैह छैक जे जा धरि कोनो बातक चर्चा अहाँ अपन मातृभाषा मे नहि करब, जन-गण-मन अहाँक बात केँ एक कान सँ सुनत आ दोसर कान सँ उड़ा देत। यानी कि ओ मुद्दा चिरकाल धरि नहि उठत आ आक्रोशक प्रखरता समय बीतैत मद्धिम सँ शिथिल भऽ जायत।
 

के छलाह राजू सिंह?

आइ करीब १० दिन सँ एक व्यक्तिक असामयिक मृत्यु सँ सारा सामाजजिक संजाल (सोशल मीडिया) हिलैत देखि हमर अन्ठेबाक प्रवृत्ति जबाब दय देलक। हम जिज्ञासा करैत पूछल, “कतेको दिवस सँ देखि रहलहुँ अछि जे दरभंगा मे एक सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताक मृत्यु पर काफी रास लोक शोकमग्न अछि। आर, किछु बात एना राखल जा रहल अछि जेना एहि मृत्युक पाछाँ कोनो रहस्य छुपल अछि…! एहि सब पर खुलिकय बाजय मे आ बहस करय मे हर्ज की?”
 
अपेक्षानुकूल एहि जिज्ञासाक जबाब मे डा. रंगनाथ ठाकुर कहैत छथि, “ई सर्वप्रिय सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताक रूप मे अग्रजक अनुज आ अनुजक भाव संग सब कार्यकर्ताक संग पारिवारिक दायित्व मे सेहो सहयोगी छलाह । विगत दुइ मास सँ किडनीक इन्फेक्शन सँ पीड़ित छलाह । पी जी आई लखनऊ मे इलाज चलैत छलैन । सुधार होइत छलैन । लखनऊ सँ रिलीज़ भऽ दरिभंगा एलाह । कार्यकर्ता भाव सँ लोकतंत्र केर महापर्व मे सेहो दुइ दिन देखल गेलाह । तत्पश्चात् पुनः हिनक स्वास्थ्य बिगड़य लागल । फेर लखनऊ गेलाह । लखनऊ मे वरिष्ठ जन अग्रज सर्वशक्तिमान (सत्ता संचालक) छथि जिनका बिहार आ दरिभंगा के सर्वशक्तिमान अग्रज (नेतृत्व) वर्ग के उ०प्र० के सत्ताधीश अग्रज सँ नीक संबंध रहला उपरांतो ओ २४घंटा तक कराहैत रहला । संगहि फोन से सबके गोहरबैत रहलाह । केउ नै सुनलकैन । बाद मे भर्ती भेलाह । हालत बिगड़ैत गेलैन । बाद मे ओ अइ दुनियां सँ चलि बसलाह । हुनका एकटा पुत्र सात वर्षक आ एकटा पुत्री तीन वर्षक छन्हि । आर पिता ८०वर्षक छथिन । माँ नै छथिन । अपने ३९ वर्षक आ पत्नीक आयु ३०-३२ वर्ष छन्हि। सब भावविह्वल छथि ।”
 

मानवीय संवेदनाक परीक्षा

बस एकटा छोट पैराग्राफ मे राजू सिंह केर जीवन आ संघर्षक कथाक संग हुनक पारिवारिक स्थिति पर प्रकाश भेटलाक बाद कोनो मानवक संवेदनशीलता जाग्रत भऽ जायत। स्पष्ट अछि जे राजू सिंह एक सत्तासीन राजनीतिक दल लेल कार्यकर्ताक भूमिका मे रहलथि। इलाज वास्ते पीजीआई लखनऊ गेलाह, मुदा ससमय भर्ती नहि भऽ पेबाक कारण आखिर ओ एहि संसार सँ असमय विदाह होयबाक लेल बाध्य भऽ गेलाह। अपन पाछाँ बिलखैत दुइ गोट अबोध बेटा-बेटी आ पत्नी केँ ८० वर्षक वृद्ध पिता संग छोड़ि राजू चलि बसलाह।
 
सवाल उठैत छैक जे एहि तरहक घटनाक प्रभाव आम कार्यकर्ता पर केहेन पड़ल? आक्रोशित होयब स्वाभाविक छैक। आक्रोश केकरा ऊपर? राजू जाहि दल केर नेताक वास्ते दरभंगा कार्यक्षेत्र मे अपन समय, सोच, सामर्थ्य, साधन आ समर्पण देखेलनि ताहि दल पर सवाल या तेकर नेता पर सवाल? कियो केकरो नाम नहि लय रहल अछि। कइएक दिनक आक्रोशक प्रतिक्रिया सभक अध्ययन सँ स्पष्ट होइत अछि जे ओ दरभंगा सँ विधायक ओ सांसद उम्मीदवार सहित अन्य कतेको नेतागण नजदीकी छलाह, परञ्च चुनावी प्रचार मे मशगूल ई नेता लोकनि अपन कार्यकर्ताक मदति समय सँ नहि कय सकलाह। एतेक तक कि राजूक मृत शरीर केँ पंचकठिया तक चढाबय लेल ओ लोकनि समय नहि निकालि सकलाह, नहि देलाह।
 

एहि सन्दर्भ पर के कि-कि बाजि रहल छथि

 
रंगनाथ ठाकुर – मैं वहाँ कराहता रहा जहाँ वह सर्वशक्तिमान था, लेकिन वह सुनता रहा, परंतु उसके कानों में जूँ तक नहीं रेंगी। मेरी आँखें चिता भूमि में भी निहारती रही कि वह यहाँ मिलेगा, लेकिन वह न आया, चूंकि मैं तो कार्यकर्ता हूँ, मेरी औकात ही क्या थी। हे भाई कार्यकर्ता, मैं तो अब नहीं हूँ लेकिन मेरी बात मानना, बड़े लोगों के पीछे कभी न जाना, अपने संग अपने पारिवारिक स्वास्थ्य का रक्षा करना। यह निवेदन है तुम्हारे स्वर्गीय भाई का, मेरा निवेदन स्वीकार करो भाई, तुम मेरे भाई हो मैं श्रद्धांजलि तो स्वीकार करूंगा हीं । भाई राजू अमर रहे।
 
रंगनाथ ठाकुर – मैं कराहता रहा २४ घंटे तक मेरे मोबाइल की घंटी तेरे कानों मे गूंजी और तू सुनते रहे! मेरा शरीर भी आया, तू नहीं आये अब मातम पुर्सी मे आना नाम होगा रे!
 
आदर्श ठाकुर – बाल्यावस्था से संघ के स्वयंसेवक रहे एवं विद्यार्थी परिषद् से जुझारू कार्यकर्ता, व भाजपा के वरिष्ठ नेता #भैया_राजू_सिंह के श्रद्धांजलि सभा लहेरियासराय टावर पर की गई। 😢 #राजू भैया अमर रहे 🙏
 
रोशन मिश्र – (रंगनाठ ठाकुर सँ) भाई जी सबसे पहले चरण स्पर्श🙏🙏
भाईजी यहाँ तो कीमत वोटों की होती है और कुछ भी नहीं। कौन कार्यकर्ता कब खो जाए? इनको इस सब से क्या फर्क पड़ता है… सहानुभूति दिखा कर वोट और भी बढ़ा लेंगे। जब तक हम सबमें गुस्सा है तो तो हल्ला मचा रहे हैं कुछ दिन में सब भूल जाएंगे की किस का घर उजड़ा और कौन मरा… मैं भी मौन हो जाऊंगा और सारे लोग भी कुछ ऐसे ही हो जाएंगे, फिर चुनाव भी आएगा हम सब फिर बंट भी जाएंगे कि फलाने पार्टी मेरी और चिलाने पार्टी आपका… और अंत में हम सभी लग जाएंगे। फलाने भैया जिंदाबाद। 😢😢😢😢
 
राजीव कुमार –
 
जो रे नेतबा अकनमा
तोहरो नय भेटतो ठेकनमा रे
जाहि विधि गेल राजु भाई
विधना तोरो नय हे तो रे बलचनमा
मत कर तु अभिमान रे अकनमा
राजु भाई अमर रहे 🙏🙏🌺
 
आलोक रंजन – अफसोस, दुखद, तनिक भी लज्जा नहीं होती है उन लोगों को जिनके लिए बीमार रहने के बावजूद कार्यकर्ता प्रचार-प्रसार करते हैं , अस्पताल से डॉक्टरों के लाख मना करने के बावजूद वोट गिराने के लिए आते हैं, लेकिन जैसे ही वही कार्यकर्ता अकाल मृत्यु के आगोश में चले जाते हैं मानो उनकी सारी महत्ता उसी समय खत्म हो गई | आखिर क्यों कोई कार्यकर्ता दिल से, भूखे पेट, बीमार में घर परिवार को छोड़कर किसी विशेष दल के लिए कार्य करें! कहाँ चले गए ए दोस्त – कहाँ चले गए ए भाई ?
 
एहि तरहें दरभंगा क्षेत्रक सैकड़ों भाजपाई कार्यकर्ता आ एबीवीपी (छात्र संगठन) सदस्य लोकनिक कतेको रास आक्रोशित श्रद्धाञ्जलि शब्द एखन फेसबुक पर पिछला कइएक दिन सँ पाटल देखाइत अछि।

एक प्रसंग – कइएक सवाल

 
अन्तिम सवाल उठैत अछि जे ई राष्ट्रीय राजनीतिक दल केर संगठन सिर्फ चाटुकारिता आ मिथिलाक मतदाता केँ बरगलेबाक लेल काज करैत अछि? कि ई सब सिर्फ सरकारी कोष सँ आबि रहल विभिन्न विकासक योजना मे अपन-अपन हिस्सेदारी आ बन्दरबाँट लेल कार्यरत अछि? कि जाहि दल भाजपा मे नैतिकता आ एकजूटताक एहेन उच्च आदर्श स्थापित छैक तेकर दरभंगा युनिट एतेक दयनीयता मे अपन निजत्व केँ लीलाम कराकय सिर्फ सौदाबाजी आ दलाली मे लागि मिथिलाक अस्मिता केँ बेचबाक लेल काज करैत अछि? आब ओहि महत्वपूर्ण कार्यकर्ताक असहाय पत्नी, बेटा-बेटी आ वृद्ध पिताक देखभाल लेल ई सब क्षतिपूर्ति केना देत? ओकरा सभक घाव पर मरहम लगेबाक संग-संग आक्रोशित कार्यकर्ता आ अनैतिक अवस्थाक समाधान कोना निकालत?
 
एहि पर मैथिली जिन्दाबाद शीघ्र आरो रिपोर्ट संग आगू आओत!
 
हरिः हरः!!
पूर्वक लेख
बादक लेख

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