लियऽ थोड़ेक अश्रु उपहार – मैथिली कविता

अश्रु उपहार
 
– गोपाल मोहन मिश्र
 
हमर अश्रुए
हमर संपत्ति थिक
लियs थोड़ेक
अश्रु उपहार ।
यैह एकटा संगी हमर
यैह समझनिहार ।
लियs थोड़ेक
अश्रु उपहार ।
 
सुख में औ’ दुखदायी
घड़ी में, संग रहल,
आ समझौलक
ई दुनियाँ में वैह देत धोखा
विश्वास करब अहाँ जेकरा,
केओ केकरो मोल बुझय नहि
अहाँ जपै छी केकरा ?
सभ दिन अहिना चलैत रहल अछि,
ई मतलबी संसार ।
लियs थोड़ेक
अश्रु उपहार ।
 
स्वार्थ आधारित समाज में अहाँ,
नीक बात केकरो
नहि कहियौ,
परमारथ के रोग लागल अछि तs
विषदंश निशदिन अहाँ सहियौ,
एतय लम्पट के सम्मान भेटय
सज्जन के दुत्कार ।
लियs थोड़ेक
अश्रु उपहार ।
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