राजनीतिक व्यंग्य – कबाउछ आ नोचनी

कबाउछ आ नोचनी
 
(राजनीतिक व्यंग्य)
 
बच्चा रही त एक गोट विशेष बात सदिखन नोट करी। जेकर घर मे कियो कांग्रेसी नेता वा नेताक चमचा रहैत छल, ओकर साहेबी चलल करय। ओ खूब बढियां कुर्ता-धोती-बंडी-गाँधी टोपी आदि पहिरल करय। चौक-चौराहा पर जा कय खूब बड़का-बड़का गप (राजनीतिक बात-विचार) छाँटय। अपना केँ सुपर आ बाकी केँ कोनो जोगरक नहि बुझय। ओकर ई देखेबाक प्रवृत्ति धीरे-धीरे ओकर बच्चा आ परिजन (बेटा-भातिज, स्त्रीगण सदस्य, आदि) सब पर सेहो पड़ि जाय।
 
जखन ओ अपने कतहु प्रखंड आ कि चौक-चौराहा दिश नेतागिरी करय चलि जाय त एम्हर ओकर बच्चा, पुतोहु, कनियाँ, भातिज, नाति, पोता… ईहो सब अपना-अपना तरहें अपन-अपन संगी-साथी सभक संग वैह नेताजी जेकाँ कांग्रेस हेन्ना – कांग्रेस होन्ना… खूब छाँटय।
 
दोसर दिश कहियो-कहियो समाजवादी सिद्धान्त पर चलयवला विपक्षी पार्टीक जनता पार्टी आ कि लोकदल आ कि जनसंघी ई सब पड़ि जाय त ओकरा सभक दलक ओतेक सामर्थ्य नहि होइत छलैक, नहिये चकाचक कुर्ता-धोती कि कोनो कपड़ा ओकरा सभक देह पर होइक… त ई कांग्रेसी सब ओकरा सब केँ खूब निम्न वर्गक बुझि अवहेलना वला नजरि सँ देखिकय बूड़ि बना दैत छलैक।
 
चुनाव आबय तखन ई कांग्रेसी नेता-चमचा सभक दरबज्जा पर बड़का-बड़का जीप सब आबय, लाउडस्पीकर लागल… बड़का-बड़का पोस्टर जाहि पर इन्दिरा गांधी, नेहरू जी आ कि-कहाँदैन फोटो सब होइत छलैक। काटल हाथ बीच मे या साइड मे प्रिन्ट रहैत छलैक, जेकर निचाँ ‘चुनाव चिन्ह’ लिखल रहैत छलैक।
 
एकदम मोटरगाड़ीक धरधरी सँ गाम-घर मे थरथरी पैसल रहैत छलैक। हड़बड़ी मे सदिखन देखाइत छलय ई कांग्रेसी नेताजी आ ओकर धियापुता-परिजनक त मानू जेना चांदी कटैत रहैत छलैक। कखनहुँ धांइ सऽ चौक दिश दौड़य, कखनहुँ जनसभा दिश, दरबज्जा पर चाह आ पान त कतेक-कतेक। …
 
धीरे-धीरे स्थिति बदैल गेलैक। पहिने वीपी सिंह बोफोर्स केर गोला दागिकय राजीव जी केँ उघार कयलनि। तखन लोकक भ्रम टूटल। ई कांग्रेसी नेता सभक सींग मे जे तेलक धार छल से कनी कम भेल….! आ फेर सब केँ पते अछि जे केना-केना जंगलराज आबि गेल।
 
एम्हर अटल जीक जादू जखन चलय लागल तखन त फेर ‘जय श्री राम’ होबय लागल। मुदा ई की? शाइनिंग इंडिया आ फील गूड फैक्टर मे फेर सँ ई कांग्रेस अपन पाकल केस केँ रांगिकय सत्ता हथिया लेलक। लोक सब केँ भाजपाक बारे भ्रम केर स्थिति बनाकय जाति, धर्म, वर्ग सब नाम पर तोड़य मे सफल भ’ गेल २००४ मे।
 
तखन २००९ मे स्थिति फेर करवट लेत से सोचिकय सेकुलरवादी आडवाणी जी केर नेतृत्व मे चुनाव लड़ल गेल, लेकिन ई राम-खोदैया के चक्कर मे सरकार बदलत कि कपार… उल्टा फेर सँ कांग्रेस आ युपीए २ बनि गेलाक बाद त स्कैम केर बुझू जे बाढि आबि गेल।
 
तखन आब कि कयल जायत? आनल गेल मोदी जी केँ सोझाँ… आर फेर तेकर बाद त… नमो-नमो भ’ गेल। आब ई कांग्रेस आ कि चट्टा-बट्टा सब केँ देखिते हेबैक केना कुठाम मे कबाउछ लागल छैक। एखन नोचैत रहत ई सब।
 
आइ यैह नोचनी सँ अहाँ स्वतः चिन्हि सकैत छी जे कांग्रेसी के सब रहल मिथिला मे। बहुत दूर धरिक बात त नहि दावी कय सकब, मुदा देखल बातक आधार पर ई जरूर कहि सकैत छी जे मिथिलाक कांग्रेसी परिवार मे आइयो वैह कस्सबल देखि सकैत छी। जहिना नोचनी रोग कतहु लोक केँ नोचनी करय लेल बाध्य कय दैछ, तहिना ई लोकनि अपन बाप-दादा द्वारा कांग्रेसक हुकुमत चलेबाक कला सँ परिचित एखनहुँ मोदी जी केर प्रखर विरोध आ फेकू-सेकू कि चौकीदार चोर है कहैत नजरि पड़ि जेता। हमर गामक एकटा बच्चा ठीके कहने रहैक, चौकीदार चोर नहीं है, चौकीदार चौकन्ना है। चौकीदार चोरों को चोरी नहीं करने देता है तही कारण ई नोचनी वला सब खौंझाकय कहैत य जे चौकीदार चोर है। हँसी रुकि नहि रहल य, ई नोचनीक इलाज बी-टेक्स सँ या बेसी हुअय तऽ दादुरीन सँ भऽ सकैत य। शुभकामना!!
 
हरिः हरः!!
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