गोपाल जी ठाकुर केर ओ अविस्मरणीय सहयोग – मैथिली मे प्राथमिक शिक्षा लेल ऐतिहासिक अनशन मे

मैथिली माध्यम सँ प्राथमिक शिक्षाक संघर्ष आ गोपाल जी ठाकुर
सर्वप्रथम चर्चा करब श्री गोपाल जी ठाकुर केर – वर्तमान भारतीय आम निर्वाचन मे दरभंगा संसदीय क्षेत्र सँ ओ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन केर उम्मीदवार छथि। पूर्व मे बेनीपुर विधानसभा सँ भाजपा नेता गोपाल जी विधानसभा मे निर्वाचित विधायक केर रूप मे पहुँचलाह, जतय अपन मिथिलाक परिधान – मौलिक पहिचान केर संग ‘सिम्पल लिविंग – हायर थिंकिंग’ केर सिद्धान्त एवं अपन माटि-पानि आ अपन लोक लेल जनप्रतिनिधि बनिकय अधिकार प्राप्ति लेल आयल छी ई कर्मठता सिद्ध कयलनि। दोसर बेरुक विधानसभा चुनाव मे ओ भले उप-विजेता रहलाह, परञ्च अपन कर्मठ प्रयास सँ सामाजिक-राजनीतिक अभियान मे सदिखन सक्रिय रहिकय एक समर्पित राजनीतिक चेहरा बनि लोकप्रिय नेताक रूप मे चर्चित सेहो रहलाह। सामाजिक-धार्मिक सौहार्द्र एवं आपसी सद्भावना लेल हिम्मती आ मेहनती जुझारू नेताक रूप मे हिनका युवावर्ग मे जानल आ मानल जाइत अछि। अपन भाषा, भेष, भूषण सब किछु केँ सदिखन सर्वोपरि मानिकय गोपाल जी ठाकुर जनक-जानकी आ मिथिला-मैथिलीक सम्मान केँ सदिखन आगू बढेबाक सोच, सिद्धान्त आ समर्पण देखबैत रहल छथि। हम मोन पाड़ि रहल छी २०१४ केर फरवरी महीना, पटना मे हिनक आवास पर रहनाय, हिनका संग काफी लम्बा चर्चा, मिथिला मैथिली प्रति हिनकर सोचब-बुझब आ संगहि ई चिन्ता करब जे ‘मिथिलावाद’ केर नाम पर खोखला वर्चस्व आ खर्खांही लूटबाक लेल बेहाल लोकक कारण स्थिति मे सुधार नहि भऽ रहल अछि। हम आइ हिनकर ओहि आरोप केँ अक्षरशः सही मानैत छी, कारण ऊपर सँ मिथिला-मैथिली आ अन्दर सँ सिर्फ अपन स्वार्थ पूरा करबाक मनसाय सँ आब हमहुँ अपरिचित नहि रहि गेल छी।
 
श्री गोपाल जी ठाकुर केर सहयोगक ओ स्मरणीय प्रकरण
 
पटनाक आरबी चौराहा पर १४ फरबरी २०१४ सँ मिथिला राज्य निर्माण सेनाक सेनानी अनुप चौधरीक अगुवाई ओ सेनाध्यक्ष श्री श्याम सुन्दर झा केर अभिभावकत्व मे ताहि समय बिहार विधानसभाक शीतकालीन सत्र केर अवधि यानि २३ फरवरी धरि लेल अनशन कार्यक्रम कयल गेल छल। एहि अनशनक अवधारणा छलैक जे मैथिलीभाषाभाषी आम जनसमुदाय केँ शिक्षा दियेबाक लेल माध्यम (instruction) मैथिलीक हो। एहि लेल मिथिलाक लब्धप्रतिष्ठित विद्वान् आ मैथिली भाषा लेल कतेको उच्च मूल्यक गोष्ठी, सेमिनार, शोध विमर्श, लेखन, प्रकाशन कयनिहार सम्माननीय डा. जयकान्त मिश्र प्रेरणा व्यक्ति छलाह। डा. मिश्र द्वारा बिहार सरकार केर निर्णय विरुद्ध कानूनी संघर्ष कयल गेल छल। ओ पहिने पटना हाई कोर्ट मे रिट देलनि। ओतय मैथिलीक पक्ष मे जीत भेटलनि। बाद मे बिहार सरकार ओहि निर्णय विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दायर केलक। ओतय सेहो डा. मिश्र निरन्तर मैथिलीक पक्षकार बनिकय उचित न्याय संघर्ष कयलनि। अन्ततोगत्वा सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिहार सरकारक याचिका केँ २०१० मे खारेज कयल गेलैक। सुप्रीम कोर्ट सँ सेहो मैथिलीक पक्ष मे जीत भेटल। तेकर बावजूद बिहार मे आइ धरि संविधानप्रदत्त ई मौलिक अधिकार ‘मातृभाषाक माध्यम सँ प्राथमिक शिक्षा’ मैथिलीभाषी लेल लागू नहि कयल जा सकल अछि। तेकरा विरुद्ध अनशन कार्यक्रम कयल गेल छल।
 
एहि अनशन कार्यक्रमक साहित्यिक अवधारणा पहिने लिखा गेल छल, परञ्च असली काज जे होइत छैक से थिक अवधारणा अनुरूप कार्यक्रमक क्रियान्वयन। एहि लेल धन्यवादक पात्र छलाह मिथिला राज्य निर्माण सेनाक अध्यक्ष श्री श्याम सुन्दर झा तथा हुनका संग देनिहार बिठौली ग्रामवासी श्री सुभाष राय। ताहि समय चेतना समिति सँ अपेक्षित सहयोग लगभग नहि भेटल कहि सकैत छी, असहयोग आ झूठक आलोचना धरि जरूर किछु गोटे केलनि। अवधारणाक पहिले सोच जखन फेल भऽ जाय तखन व्यवस्थापन आर चुनौतीपूर्ण बनि जाइत छैक। लेकिन श्याम भाइ आ सुभाष भाइ केर सही निर्णय सँ श्री गोपाल जी ठाकुर एवं श्री संजय सरावगी मानू राम-लक्ष्मण बनिकय मैथिली लेल एहि आन्दोलन केँ सहारा देलनि। सारा व्यवस्था जानकीक कृपा सँ रातो-रात भऽ गेल। १ दिनक देरी सरकारी प्रक्रिया पूरा करय मे लागि गेल। १५ फरवरी सँ अनशन पर बैसि जाय गेलाह। बिहार सरकार मे ताहि समय शिक्षा मंत्री रहथि पी के शाही। हुनका सँ वार्ता करेबा सँ लैत आन्दोलन स्थल पर अनशनकारी लोकनि केँ मनोबल बनौनिहार ई दुइ नेतागणक अलावे भारतीय कांग्रेस पार्टीक राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेमचन्द्र मिश्र सेहो ओतबे प्रयास कयलनि। किछु आरो महत्वपूर्ण नाम भऽ सकैत अछि जे हमरा स्मृति मे नहि आबि रहल अछि एखन। ई लोकनि शिक्षा मंत्री शाही जी सँ अनशनकारीक नेतृत्व मंडली केँ भेंट करौलनि तथा शिक्षा निदेशालय केँ ई निर्देश देल गेल जे अनशन समाप्त करबाक उचित व्यवस्था ओ लोकनि करथि।
 
शिक्षा मंत्री पी के शाही संग साक्षात्कार केर आडियो मिथिला मिरर संपादक ललित नारायण झा पठौने छलाह। शिक्षा मंत्री द्वारा मैथिली मे शिक्षाक पक्ष लेल गेल छल। ओ सकारात्मक रहथि। लेकिन संगहि ओ शिकायत सेहो कयलनि जे मैथिली मे शिक्षक केर नियुक्ति लेल मैथिली विषय सँ टीइटी परीक्षा पास कयल अभ्यर्थीक कमी अछि। मिथिला मिरर पर ओ लेख प्रकाशित भेल छल। शायद एखनहुँ उपलब्ध होयत। ओहि अनशन केँ खत्म करेबाक वास्ते गोपाल जी ठाकुर आ संजय सरावगीक भूमिका बहुत मोन पड़ैत अछि। संजय सरावगी ताहि समय बिहार विधानसभा मे प्रश्न सेहो पूछने छलाह। ताहि पर बाद मे हुनका जबाब देल गेलनि, ओहो समाचार प्रकाशित कयल गेल छल। बिहार सरकार एकतर्फी दोषी नहि अछि। मैथिली भाषा-भाषी मे शिक्षाक माध्यम भाषा मातृभाषा लेल जागरुकताक घोर कमी आ काफी रास सन्देह विद्यमान अछि। एखन एहने तरहक अराजक स्थिति नेपाल मे सेहो मैथिली भाषा मे शिक्षा व्यवस्था मे देखाइत अछि। जनता मे जा धरि कोनो जागरुकता अपना नहि होयत, ओतुका नेतृत्व मे नहि हेतैक, एकर लाभ आमजन केँ ता धरि कोना भेटतैक। लेख मे आगू विवरण देब जे मातृभाषा मे शिक्षाक अनिवार्यता कियैक होइत छैक। शिक्षा मंत्री पी के शाही केर निर्देशन प्राथमिक शिक्षा निदेशालय पटना मे अनशन पर ध्यान देबा लेल गेल छल। अनशनकारीक तरफ सँ वार्ता समिति मे हमहुँ रही। श्याम भाइ व हम काफी राउन्ड मीटिंग केलहुँ।
 
तदनुसार प्राथमिक शिक्षा निदेशालयक सह-निदेशक डा. ओंकार प्रसाद सिंह केर अगुवाई मे सब वार्ता भेल आर सहमति बनल जे शिक्षाक माध्यम मैथिली मे करबाक काज आवश्यक अछि, सरकार एहि पर पूर्वहु मे चर्चा करैत रहल अछि, लेकिन पाठ्यक्रम विकास केर प्रक्रिया एखन धरि पूरा नहि कयल जा सकल। से प्रक्रिया अनशनकारीक मांग पर आरम्भ कयल जायत तथा आगामी किछेक वर्ष मे पाठ्यक्रम विकास समितिक सहयोग लैत एहि मांग केँ पूरा करबाक स्थिति बनत। चर्चा मे ईहो बात आयल छल जे बिहारक बहुभाषिक शिक्षा नीति मे भाषाक विषय केर रूप मे मैथिली पहिनहि सँ ऐच्छिक विषयक रूप मे पढेबाक व्यवस्था कयल गेल अछि, संगहि शिक्षक लोकनि केँ उपलब्ध करायल गेल शिक्षा संदर्शिका मे ‘भाषा सेतु’ केर परिकल्पना पर मातृभाषा (स्थानीय भाषा) केर शब्द हिन्दी भाषाक शब्द केँ बेसी सँ बेसी प्रतिस्थापित करैत – एक शब्दकोश बना मातृभाषा मे शिक्षाक विज्ञ सुझाव केँ स्थापित कयल जाय। एतेक आश्वासन सेहो भेटल जे एहि सन्दर्भ मे एकटा अलग फाइल खोलल जायत आर आन्दोलनकारी चाहथि तऽ एहि पर प्रगतिक समीक्षा समय-समय पर कय सकैत छथि। डा. ओंकार प्रसाद सिंह अपन परिचय मुंगेर जिला सँ होयबाक आ एहि तरहक उच्च मूल्यक मांग सँ पटना मे अनशन करबाक बात केँ उच्च सम्मान दैत ई काज करबाक व्यक्तिगत वचनबद्धता सेहो विशेष रूप सँ प्रकट केलथि। अनशन एहि वार्ता आ आश्वासन उपरान्त हुनकहि हाथ सँ माननीय गोपाल जी ठाकुर, संजय सरावगी, प्रेमचन्द्र मिश्र, तथा हमरा लोकनिक समक्ष जूस पियाकय समाप्त कयल गेल २१ फरवरी केँ, अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर।
 
माननीय गोपाल जी ठाकुर केर ई सहयोग सदैव अविस्मरणीय रहत, हुनका आसन्न संसदीय चुनाव मे सफलता भेटनि तेकर शुभकामना दैत छी।
 
कियैक होइत अछि मातृभाषाक माध्यम सँ प्राथमिक शिक्षा?
 
विज्ञानक खोज आ व्यवहारिक सिद्धान्त सँ ई सिद्ध भऽ चुकल अछि जे शिक्षाक माध्यम ‘मातृभाषा’ भेला सँ शिक्षा ग्रहण करब सभक लेल सुलभ होइछ। भारत मे स्वतंत्रता प्राप्तिक बाद एहि लेल कइएक समिति तथा आयोग केर सिफारिश सेहो मातृभाषा मे शिक्षा उपलब्ध करेबाक अनुशंसा केलक। वैज्ञानिक तथ्य ईहो सिद्ध करैत छैक जे बच्चा गर्भहि सँ माता-पिता ओ परिजनक भाषा केँ सुनय-बुझय लगैत अछि। बच्चाक जन्म भेलाक बाद ओ जे कनैत अछि सेहो मातृभाषाक प्रथम उच्चारण होइत छैक। जर्मन तथा फ्रांसीसी बच्चा पर कयल गेल अध्ययन मे जर्मन शिशु जर्मन भाषा बजबाक अवरोही मेलोडी पेटर्न मे कनैत देखल गेल, ओत्तहि फ्रांसीसी शिशु अपन मातृभाषाक अनुरूप आरोही मेलोडी पेटर्न मे कनैत देखल गेल। स्पष्ट छैक जे बच्चा गर्भेवस्था मे मातृभाषाक ध्वनि विन्यास केँ बुझय लगैत अछि। परड्यू विश्वविद्यालय केर वैज्ञानिक लोकनि पता केने छथि जे मातृभाषा शिशुक मस्तिष्क विकास केँ प्रभावित करैत छैक। मस्तिष्क केर विकास व्यक्तिक अनुवंशिकी, खानपान, शिक्षण-प्रशिक्षण आदि पर निर्भर करैत छैक लेकिन मातृभाषा टा एहि सब मे बेसी महत्वपूर्ण भूमिका निभबैत य। भाषा विज्ञानी जैक्स गैंडर केर कहब छन्हि जे मस्तिष्काधार केर निर्माण मातृभाषाक ध्वनिक संगत मे होइत छैक। हुनका हिसाबे चीनी तथा हिन्दी भाषा एकदम अलग प्रकारक छैक, ताहि सँ चीनी आ हिंदुस्तानी केर मस्तिष्काधारक संरचना सेहो भिन्न होइत छैक।
 
भारतीय वैज्ञानिक सी. वी. श्रीनाथ शास्त्री अपन अध्ययन सँ सिद्ध कयलनि जे अंग्रेजी माध्यम सँ इंजिनियर बनल शहरी बच्चाक तुलना मे भारतीय भाषा केर माध्यम सँ शिक्षित भेल ग्रमीण परिवेशक बच्चा वैज्ञानिक अनुसंधान कार्य अधिक सहजता सँ कय पबैत अछि। एकर कारण यैह जे बुद्धि विकास केर संबंध मात्र किताबी ज्ञान सँ नहि भऽ संपूर्ण पर्यावरण सँ होइत छैक। हमहुँ सब अपन-अपन अवलोकन मे यैह देखि सकैत छी जे शुरुए सँ अंग्रेजी मे अध्ययन करयवला बच्चाक तुलना मे बाद मे अंग्रेजी सीखयवला बच्चा विज्ञान विषय सभ मे अधिक उपलब्धि देखबैत अछि। बच्चा मातृभाषाक माध्यम सँ मात्र अपन पर्यावरण सँ नीक सँ जुड़ि पबैत अछि। देशक जानल-मानल वैज्ञानिक ओ शिक्षाविद प्रोफेसर यशपाल मातृभाषा मे प्राथमिक शिक्षा देबाक बात पर जोर दैत छथि। भारतीय वैज्ञानिक जगदीषचंद्र बोस, होमी जंहागीर भाभा, सत्येन्द्रनाथ बोस, मेघनाथ साहा, रामानुजन, प्रफुल्लचंद्र राय आदि सभक प्रारम्भिक शिक्षा मातृभाषा टा मे भेल छलन्हि।
 
अनुसंधान ईहो सिद्ध करैत अछि जे मातृभाषा केर ठीक सँ ज्ञान भऽ गेलाक बाद कोनो आन भाषा, चाहे ओ विदेशी कियैक नहि हो, बड़ा सहजता सँ सीखल जा सकैछ। आधुनिक अनुसंधान बतबैत अछि जे बच्चाक मस्तिष्क एक नव कम्प्यूटर जेकाँ होइत छैक जाहि मे अपन हार्ड वेयर तऽ होइत छैक मुदा सोफ्ट वेयर नहि होइत छैक। मस्तिष्क केँ अपन सोफ्ट वेयर स्वयं विकसित करबाक होइत छैक। सोफ्ट वेयर विकास मे बच्चाक पर्यावरण महत्वपूर्ण भूमिका निभबैछ। भाषा ओकर पर्यावरण केर प्रमुख भाग होइत छैक। अतः प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा या राज्य भाषा मे देबाक बाद अंग्रेजी या अन्य कोनो भाषाक शिक्षण केनाय पूर्णतः विज्ञान सम्मत छैक। प्रत्येक बच्चा केँ अपन मातृभाषा मे शिक्षा प्राप्त करबाक अधिकार छैक, लेकिन खूब कमेबाक लालच मे अभिभावक अपना बच्चा केँ अंग्रेजी माध्यम सँ पढ़बाक लेल मजबूर करैत अछि। संयुक्त राष्ट्र संघ बाल अधिकार समझौता कहैछ जे बच्चा केर सम्बद्ध सब कार्यवाही मे चाहे ओ निजी वा सार्वजनिक, सामाजिक, कल्याण संस्था विधि सम्मत न्यायालय, प्रसासनिक अधिकारी या विधि संस्था द्वारा कयल जाय, बच्चाक सर्वाधिक हित केँ सर्वाधिक प्रामिकता देल जाय। एहि दृष्टि सँ देखब तऽ बच्चा केर प्राथमिक शिक्षाक माध्यम अनिवार्यतः मातृभाषा हेबाके टा चाही। बाल अधिकार बच्चा केँ अभिव्यक्ति, सांस्कृतिक व कला गतिविधि स्वतन्त्रता केर अधिकार दैत छैक। बच्चा एहि अधिकार केर समुचित उपयोग अपन मातृभाषाक माध्यम सँ मात्र कय सकैत अछि।
 
देशक नीति निर्धारक केँ चाही कि बच्चाक हित मे प्राथमिक शिक्षाक माध्यम अनिवार्यतः मातृभाषा करबाक प्रयास अविलम्ब प्रारम्भ करय। एना नहि कय केँ हमरा लोकनि बच्चा व देश दुनू केँ अहित कय रहल छी।
 
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एहि सन्दर्भ २२ फरवरी केँ देल गेल एक “मिथिला आन्दोलन अपडेट” पुनः राखि रहल छी। ई बहुत बात मोन पाड़य मे सक्षम अछि। आइ भले मिथिला आन्दोलन छहोंछित अवस्था मे पहुँचि गेल हो, लेकिन कार्यानुभव प्राप्त व्यक्तिक दृष्टि कहैत अछि जे ई भुमगोल एक न एक दिन जन-जन बुझि सकत आ फेर संघर्ष विस्फोटक रूप लेत।
 
On April 22, 2014 – Facebook Update –
 
‘मैथिलीभाषी लेल प्राथमिक भाषाक माध्यम मैथिली हो’
 
अनशनकारी ‘मिथिला राज्य निर्माण सेना’क सेनानीद्वय: श्री अनुप चौधरी आ श्री मनोज झा
 
अध्यक्षता: श्री श्याम सुन्दर झा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, मिथिला राज्य निर्माण सेना
 
सक्रिय सहयोग: श्री सुभाष चन्द्र राय, श्री सोनु मिश्रा, श्री बिट्टू मैथिल, श्री रत्नेश्वर झा (महासचिव, अखिल भारतीय मिथिला पार्टी) व समस्त मिथिला राज्य निर्माण सेना – दिल्ली, मुंबई, गुवाहाटी, मिथिला समूह।
 
निर्धारित समय: १४ फरबरी सँ २३ फरबरी, २०१४ – विधानसभाक शीतकालीन सत्रक अवधि भरि लेल। प्रशासनक आदेश अनुरूप १५ सँ शुरु आ मातृभाषा दिवस यानि २१ फरबरी बिहारक शिक्षा मंत्री श्री पी के शाही व तदनुसार शिक्षा निदेशालय द्वारा देल गेल आश्वासन अनुरूप अनशन समापन।
 
राजनैतिक सहयोग: भारतीय जनता पार्टी, भारतीय काँग्रेस, अखिल भारतीय मिथिला पार्टी व अन्य।
 
महत्त्वपूर्ण सहयोग: १. संजय सरावगी, भाजपा विधायक, दरभंगा सदर विधानसभा क्षेत्र २. गोपाल जी ठाकुर, भाजपा विधायक, बेनीपुर विधानसभा क्षेत्र ३. प्रेम चन्द्र मिश्र, राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय काँग्रेस।
 
नैतिक समर्थन: मिथिला क्षेत्र सहित विभिन्न अन्य सरकारी, गैर-सरकारी संस्था द्वारा देल गेल।
 
आर्थिक सहयोग: मिरानिसे अभियानी स्वयं द्वारा स्वैच्छिक निर्मित कोषसँ।
 
अपेक्षित परिणाम: प्रारंभिक शिक्षासँ मैथिलीक उपयोगिताक आत्मसात करैत वृहतत्तर साक्षरता – खास कय पिछडा व दलित वर्गक संग सामान्य वर्गक बाल-बालिकामे वैज्ञानिक शिक्षा प्रणाली द्वारा प्रमाणित ‘मातृभाषाक माध्यम’ बेहतरीन शिक्षासँ उत्कृष्ट शिक्षित समाजक निर्माण होयत। मैथिली पाठ्यक्रमकेर निर्माण होयत। विद्यालयमे मैथिली शिक्षक केर नया सिरासँ बहाली होयत। पठन-पाठन सहज व सुगम होयत। फेरसँ मैथिली शिक्षा प्रति लोकमे जागृति प्रसार होयत। विलोपान्मुख भाषासूचीसँ मैथिली पुन: जीवन प्राप्ति दिशामे अग्रसर होयत। हिन्दी, अंग्रेजी व अन्य भाषा-माध्यमसँ शिक्षामे रुचि रखनिहार लेल सेहो खूल्ला विकल्प राखल जायत। मैथिली साहित्यक ठमकला धारा पुन: स्वच्छजलसँ आच्छादित होयत। मैथिली पत्रकारिता, पठन-संस्कृति, चित्रकर्म (फिल्म), रंगकर्म (नाटक) आदिकेर संस्कृतिक पुनरुत्थान होयत। कतेको रास प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष लाभसँ मिथिलावासी लाभान्वित हेता। हलाँकि एहि प्रणालीकेँ अपनेबाक लेल वृहत स्तरपर जागरुकता अभियान संचालनक सेहो आवश्यकता होयत, लेकिन वर्तमान विद्यमान राज्य व राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान तथा प्रशिक्षण परिषद् द्वारा मैथिलीमे वर्षोंसँ रुकल कार्य फेर सँ गति पकडत आ जल्दिये संविधानक आठम अनुसूचीमे दर्ज एहि मीठ-भाषाक उत्कृष्टता देशक सोझाँ होयत। दक्ष-योग्य-विद्वान सबहक आपसी तालमेलसँ मैथिली नवप्राण पायत।
 
हरि: हर:!!
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