पशुपतिनाथ मन्दिर – किछु महत्वपूर्ण गाथा

धार्मिक पर्यटन स्थल

हिन्दू धर्मावलम्बीक एक अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थस्थल होयबाक संग-संग विश्व धरोहर सँ विभूषित नेपालक राजधानी काठमान्डू स्थित पशुपतिनाथ मन्दिर सँ जुड़ल किछु मूल्यवान जानकारी संकलन कय एतय प्रकाशित कय रहल छी।

साभारः https://travelmassif.com/pashupatinath-temple-nepal/

नेपालक पशुपतिनाथ मन्दिर आ ओहि ठामक तस्वीर

पशुपतिनाथ मन्दिर हिन्दू धर्मावलम्बीक मान्यता मे एक प्रमुख धार्मिक केन्द्र थिक जेकरा नेपालक राष्ट्रीय देवताक रूप मे सेहो मानल जाइछ, जे बागमती नदीक कंछैर मे नेपालक राजधानी काठमान्डू मे अवस्थित अछि। भगवान् बुद्ध केर जन्मस्थलक संग अनेकानेक हिन्दू देवी-देवता सँ जुड़ल विभिन्न ऐतिहासिक कथा-गाथा सँ भरल हिमालयक देश नेपाल केँ पवित्र देशक रूप मे विश्व भरि मे नाम विख्यात अछि। बुद्ध धर्म एवं हिन्दू धर्म सँ जुड़ल धार्मिक पर्यटकक संग अन्य पर्यटक लेल सेहो नेपाल एक स्वर्ग देश मानल जाइत अछि। अत्यन्त प्राचीन संरचनाक प्रमाण जे पुराण मे वर्णित अछि ओ सब एहि देश मे भेटला सँ एकर पवित्रता आरो लब्धप्रतिष्ठित मानल जाइत अछि। १९७९ ई. मे पशुपति मन्दिर ओ आसपास केर क्षेत्र केँ युनेस्को द्वारा विश्व धरोहरक रूप मे मान्यता देल गेल। एहि तरहें विश्व सम्पदा मे सूचीकृत स्थल पशुपतिनाथ महादेव केर मन्दिर विश्व प्रसिद्ध अछि।

पशुपतिनाथ मन्दिरक महत्व

पशुपतिनाथ मन्दिर निर्माणक कालखंडक निर्धारण मुताबिक एकर स्थापनाक सही समय एखन धरि ज्ञात नहि भऽ सकल अछि। तेँ एकरा काठमान्डू उपत्यकाक सब सँ बेसी प्राचीन आ अत्यन्त महत्वपूर्ण मन्दिर मानल जाइत अछि। नेपालहु केर सब सँ बेसी प्राचीन मन्दिर पशुपतिनाथ मन्दिर केँ मानल जाइत अछि। तखन एहि ठाम स्थापित विद्यमान महादेवक पंचमुखी लिंग केर स्थापना १५म शताब्दी मे पुरान लिंग माटि-दिवार खा गेलाक कारण लिच्छवी सम्राट सुपुष्प द्वारा कयल गेल अछि।

पशुपतिनाथ मन्दिरक संग-संग क्रमशः अनेकों देवी-देवताक मूर्त्ति एवं मन्दिरक स्थापना एहि क्षेत्र मे कयल जेबाक इतिहास भेटैत अछि। जेना वैष्णव राम मन्दिर केर स्थापना १४म शताब्दी मे तथा गुह्येश्वरी शक्तिपीठ केर स्थापना ११म शताब्दी मे कयल जेबाक शिलालेख सँ जनतब भेटैत अछि। हिन्दू एवं पुरातन धरोहर मे विश्वास रखनिहार लेल यैह कारण सँ ई क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण मानल जाइछ।

बागमती जे पशुपतिनाथ मन्दिरक बगल सँ बहि रहल छथि तिनका नेपाल केर विभिन्न मुख्य जलधारा (नदी) मे सँ एक प्रमुख आ पवित्र जलधारा मानल जाइछ। हजारों तीर्थयात्री देश-विदेश सँ एतय पशुपतिनाथ महादेव केर दर्शन एवं पूजा लेल सालों भरि अबैत रहैत छथि। कतेको श्रद्धालू एहि पवित्र नदी मे नित्य स्नान करैत छथि तथा वैदिक मंत्र केर उच्चारण करैत महादेवक पूजा अर्चना करैत छथि। मान्यता अछि जे एक बेर एहि मे स्नान कय लेला सँ भक्त-श्रद्धालू केर समस्त पाप कटि जाइत अछि। विगत किछु वर्ष सँ बढैत जनसंख्या ओ लोकक लापरवाहीक चलते ई पवित्र नदी अत्यन्त प्रदूषित भऽ गेल अछि।

पशुपतिनाथ मन्दिर केर शिव लिंग केर स्वरूप

लिंग: पशुपतिनाथ शिवलिंग केर एक अनुपम विशेषता ई अछि जे एहि मे ४ मुंह चारू दिशा लिंगहि मे विद्यमान अछि। पूर्व दिशा मे रहल मुख केँ तत्पुरुष, शीर्ष या अग्रभाग उत्तराभिमुख अछि जिनका वामदेव (उमा-महेश्वर) कहल जाइछ, पश्चिम दिशा मे रहल मुख केँ सद्योजिता (बरुण) तथा दक्षिण दिशाक मुख केँ अघोर कहल जाइछ। ऊपर दिशाक मुख केँ ईशान कहल जाइछ जे निराकार अछि। एहि तरहें पशुपतिनाथ महादेव केर लिंग केर पाँच मुख सँ प्रकृति केर पाँच प्रमुख अवयव जेकर व्याख्या हिन्दू धर्मग्रन्थ करैत अछि यानी क्षिति, जल, पावक, गगन ओ समीर केँ मानल जाइछ।

स्मरण रहय जे मन्दिर परिसर केर अन्दर कैमरा लय केँ गेनाइ मना हेबाक कारण ओहि ठामक चित्र लेनाय संभव नहि अछि, एतय देल गेल चित्र पशुपतिनाथ शिवलिंग केर संभाव्य समरूप प्रतीकचित्र मात्र थिक।

Mandasur Lingam of Pashupatinath
वास्तविक शिवलिंग केर फोटो लेनाय वर्जित अछि।

एहि मन्दिरक दोसर खास बात ई अछि जे एतय सिर्फ ४ गोट पूजारी केँ मूर्त्ति स्पर्श करबाक अधिकार देल जाइत छन्हि। सामान्य लोक द्वारा हिनका स्पर्श नहि कयल जा सकैत अछि। भट्ट ब्राह्मण (दक्षिण भारत सँ) टा केँ नित्य पूजा प्रक्रिया करबाक तथा सहयोग एवं सुरक्षा लेल भंडारी ब्राह्मण केँ एहि मन्दिर मे अधिकार देल गेल छन्हि। भंडारी केँ सेहो शिवलिंग केँ छूबाक अधिकार नहि छन्हि।

नोट: मन्दिरक मुख्य पूजारी सामान्यतः दक्षिण भारत सँ होइत छथि, कारण आदि शंकराचार्य द्वारा निर्धारित नियम अनुसार ८म शताब्दी सँ यैह व्यवस्था एहि ठाम लागू अछि। ई प्रक्रिया एक-दोसरा संग सांस्कृतिक आदान-प्रदान केँ बढावाद देबाक लेल कयल गेल छल। भट्ट लोकनि उच्च शिक्षित वैदिक विद्वान् परिवारक सदस्य होइत छथि। पशुपतिनाथ मे भट्ट बनबाक लेल प्रक्रिया सहज नहि अछि, हुनका लोकनि केँ एहि लेल उचित अनुभवक संग निर्धारित परीक्षा सेहो उत्तीर्ण करय पड़ैत छन्हि जाहि मे कतेको रास जाँच प्रक्रिया निहित रहैत छैक।

पशुपतिनाथ मन्दिर केर इतिहास/गाथा

एहि धराधाम (पृथ्वी) पर रहि रहल जीवनक अस्तित्वक रक्षा हेतु, कठिन एवं खतरनाक परिस्थिति सँ बचेबाक लेल अथवा दुर्जन-दुष्ट केर संहार करबाक निमित्त परमपिता परमेश्वर ओ सर्वसत्तावान भगवान् शिव केँ अलग-अलग रूप मे अवतार लेबाक मान्यता हिन्दू धर्म मे सुविख्यात अछि। पशुपतिनाथ सेहो भगवान् शिव केर अवतार छथि जाहि मे पशुपति शब्द संस्कृत सँ लेल गेल अछि जेकरा मे पशु केर अर्थ भेल जीव यानि जिबैत प्राणी तथा पति माने स्वामी (मालिक, रक्षक, बचौनिहार)। पहिले कहल जा चुकल अछि जे पशुपतिनाथ केर अवतरणक समय (स्थापना काल) अज्ञात छल, एखनहुँ ई बात केकरो ज्ञात नहि अछि। परन्तु विभिन्न पारंपरिक गाथा मे एहि मन्दिर ओ शिवलिंग केर चर्चा अबैत अछि से निम्न रूप सँ प्रस्तुत कय रहल छीः

१. सर्व मनोकामना पूरा करयवला कामधेनु गाय:

कैलाश पर्वत पर रहनिहार भगवान् शिव केँ एक बेर मोन कोनो तरहक औगताहट मे पड़ि गेलनि, ओ विचारलनि जे बिना केकरो किछु कहने किछ समय कतहु सँ घुमि अबैत छी। भगवती पार्वती, हुनक अर्धांगिनी, केँ एना शिव जी केर अचानक कतहु चलि गेलाक बाद  नहि घुरला सँ बहुत तनाव होबय लगलनि। अपन दिव्य-दृष्टि सँ भगवती पार्वती ई देखलीह जे स्वर्ण-रंगक एक हरिन अन्य हरिनक झुंड मे काठमांडूक जंगल मे घुमि रहल अछि। एहि क्षेत्र केँ आइ-काल्हि मृगस्थली केर नाम सँ जानल जाइछ।

भगवती पार्वती भगवान् शिव केँ चिन्ह गेलीह जे एक सौम्य आ सुन्दर हरिनक रूप मे छलाह। ओ तखन एकटा योजना नियारलीह आ अपनो मृगस्थली दिश स्वयं एक हरिन बनिकय हरिनक झुंड मे मिलि गेलीह। तदोपरान्त दुनू गोटे भगवान् शिव आ भगवती पार्वती काफी समय धरि संगहि ओहि स्थल मे खूब रमण-चमन केर जीवन हरिन सभक संग रमि गेलथि।

दुनू देव-देवी कैलाश सँ गायब छथि, शिव ओ पार्वतीक अनुपस्थितिक ई खबरि स्वर्गलोक मे बड़ा तेजी सँ पसैर गेल। परमाधिपति देवाधिदेवक अनुपस्थितिक समाचार दैत्य ओ राक्षस सभक लेल सुवर्ण अवसर जेकाँ बनि गेल, ओ सब अन्य देवी-देवता आ स्वर्गलोक पर आक्रमण करब शुरू कय देलक। दैत्य-दानव सँ परेशान देवी-देवता लोकनि सेहो भगवान् शिव आ भगवती पार्वती केँ अपन दिव्य दृष्टि सँ ताकब शुरू कयलनि आर पता लगेलनि जे मृगस्थलीक जंगल मे ओ लोकनि रमण कय रहला अछि। पशुपतिनाथ मन्दिरक सामनेवला हिस्सा मे जे जंगल अछि वैह मृगस्थली थिक।

भगवान् ब्रह्मा आ विष्णु एहि तरहें दुनू हरिन केँ पकड़बाक उद्देश्य सँ मृगस्थली जेबाक योजना बनौलनि। दुनू भगवान् द्वारा दुनू मृगरूपी शिव ओ मृगिनीरूपिणी पार्वती केँ पकड़बाक चेष्टा भेल। भगवान् ब्रह्मा कोहुना हरिनक एक गोट सींग केँ पकड़य मे सफल भेलाह। मुदा ओ सींग थोड़बे समय मे तीन टुकड़ा मे टूटि गेल। ओहि मे सँ एक टुकड़ा गोकर्ण मे खसि पड़ल, दोसर टुकड़ा स्लेषमान्तक नामक वन मे हेरा गेल आर तेसर मुख्य टुकड़ा वर्तमान आसीन पशुपतिनाथ शिवलिंग अवस्थित स्थान मे खसल आ बिला गेल छल।

बहुत वर्षक बाद, एक गोट गायक चरवाहा देखलक जे एकटा सुन्दर सन गायक थन हर समय खालिये भेटैत अछि। ओ चरवाहा बड़ा उत्सुक बनि गेल जे आखिर एहि गायक दूध जाइत कतय अछि। ओ कोनो साधारण गाय नहि छल, ओ कामधेनु गाय रहथि। ओहि गायक दूध गायब हेबाक पाछाँ कि रहस्य अछि से देखय लेल ओ चरवाहा नुकाकय गाय पर नजरि राखय लागल। ओ देखलक जे गाय चुपचाप एक विशेष स्थान पर जा कय सब दूध स्वतः थन सँ जमीन पर बहा दैत अछि।

बाद मे चरवाहा ओहि स्थान पर जमीन खुनय लागल जतय गाय द्वारा दूध चुआयल गेल रहय। ओहि ठाम ओकरा ४ मुंह वला सुन्दर सन शिवलिंग भेटलैक। बाद मे वैह स्थान पर सुन्दर सनक मन्दिर बनायल गेल आर समस्त लोक ओतय पूजा-अर्चना आरम्भ केलक। ई वैह स्थान छल जे आइ हमरा लोकनि पशुपतिनाथ शिवलिंग स्थापित रूप मे देखि रहल छी। मान्यता ईहो अछि जे ओ चरवाहा द्वारा जमीन खोदलाक बाद लिंग सँ निकलैत प्रखर तेज सँ भरल किरण सँ ओतहि भस्म मे परिणत भऽ गेल। कहल जाइछ जे पशुपतिनाथ महादेवक लिंग प्रकट होइत देरी प्रथम दर्शन पाबि ओ चरवाहा ओत्तहि शिवमय भऽ गेल।

२. महाभारत

कौरव संग कुरुक्षेत्र मे महाभारतक १८ दिनक युद्ध पूरा भेलाक बाद विजयी पाण्डव लोकनि अपन रक्त सम्बन्धी, अन्य विभिन्न लोक तथा ब्राह्मण आदि केँ युद्ध मे हत्या करबाक पाप सँ प्रायश्चित करबाक निर्णय कयलनि। ओ लोकनि राजपाट अपन उत्तराधिकारी (सन्तति) केँ सौंपि स्वयं भगवान् शिव सँ आशीर्वाद प्राप्ति हेतु काशी दिश प्रस्थान कय गेलाह। काशी भगवान् शिक केर सर्वप्रिय स्थानक रूप मे सुविख्यात छल। मुदा भगवान् शिव कुरुक्षेत्र केर युद्ध परिणाम सँ बहुत बेसी प्रसन्न नहि रहबाक कारण हुनका लोकनि सँ दूर रहबाक निर्णय लय लेलनि। ओ अपन रूप नन्दी (बरद) केर रूप मे परिणत कय हिमालय दिश प्रस्थान कय गेलाह।

किछु मासक बाद जखन पाण्डव लोकनि भगवान् शिव सँ नहि भेटि सकलाह तखन ओहो लोकनि हिमालय दिश प्रस्थान कयलनि। अन्ततः भीम केँ नन्दी सँ साक्षात्कार भेलनि आ ओ सब भाँपि गेलाह जे यैह भगवान् शिव थिकाह। ओ नन्दीक पुच्छड़ पकड़बाक प्रयास कयलनि, मुदा किछुए पल मे नन्दी ओतय सँ छु-मन्तर (गायब) भऽ गेलाह। पुनः भगवान् शिव नन्दीक अलग-अलग भाग केर रूप मे अलग-अलग स्थान पर प्रकट भेलाह। एहि तरहें पुच्छड़ केदारनाथ मे, नाभिक भाग मध्यमेश्वर मे, आदिक रूप मे अवस्थित भेलाह महादेव। हुनक सिर वला भाग केँ डोलेश्वर महादेव केर रूप मे भक्तपुर (नेपाल) मे होयबाक मान्यता अछि। एहि तरहें नन्दीरूपी महादेवक विभिन्न भाग केँ स्पर्श करैत पाण्डव लोकनि अपन संपूर्ण पाप सँ मुक्ति पेलनि।

चर्चाक क्रम मे ईहो कहल जाइत अछि जे पशुपतिनाथ ओहि नन्दीरूपी महादेव केर शीर्षभाग थिक, जखन कि किछु संत केर मतानुसार पशुपतिनाथ मे पाण्डव केँ शंकर सँ दर्शन प्राप्त भेलनि, ओतहि हुनका सब केँ शंकर सँ आशीर्वाद भेटलनि। कथा मे अबैत अछि जे जखन भीम नन्दीक पुच्छड़ पकड़लनि तऽ ओतहि पुच्छड़ टूटि गेल आर ओ स्थान केदारनाथ कहाइत अछि। पुनः भगवान् शिव ओहि नन्दीरूप मे पूब दिशा मे भागय लगलाह, पाण्डव लोकनि सेहो हुनका पाछाँ-पाछाँ भागल लगलाह। एहि क्रम मे नन्दीक शरीर सँ विभिन्न हिस्सा जतय-जतय टूटिकय खसैत गेल वैह स्पर्श करैत आ ओहि दिशा केँ अनुसरण करैत पाण्डव सेहो चलैत रहलाह। अन्त मे ओ लोकनि काठमान्डू उपत्यका धरि पहुँचि गेलाह आर ओतय भक्तपुर मे नन्दीक सिर खसल भेटलनि। आर, ताहि उपरान्त अन्त मे वर्तमान पशुपतिनाथक मन्दिर मे हुनका लोकनि केँ भगवान् शिव केर दर्शन भेटलनि। एहि तरहें पशुपतिनाथ मन्दिर केर माहात्म्य कहल-सुनल जाइछ।

भारतक १२ ज्योतिर्लिंग यथा केदारनाथ, सोमनाथ, श्रीशैल मल्लिकार्जुन, महाकाल, नागेश्वर, ओमकारेश्वर, भीमाशंकर, त्रयंबकेश्वर, बैद्यनाथ, घुमेश्वर, विश्वनाथ एवं रामेश्वरम केँ शंकर केर शरीरक विभिन्न भाग मानल जाइत अछि जखन कि पशुपतिनाथ केँ शीर्षभाग (सिरक भाग) मानल जाइत अछि।

३. देवालय केर गाथा

विभिन्न इतिहास केर दावीक मुताबिक एतय केवल एक लिंग रहबाक बात पता चलैत अछि, वैह पशुपतिनाथ होयबाक मान्यता सिद्ध अछि। क्रमानुसार बाद मे लोकक मांग ओ आवश्यकता अनुसार ५ तल्ला (पैगोडा शैली) मे सुपुष्पदेव द्वारा मन्दिरक निर्माण करायल गेल। यैह मन्दिर पशुपतिनाथ मन्दिर कहाइत अछि। बाद मे मध्याकालीन युग मे मल्ल राजा लोकनि द्वारा फेरो कतेको बेर एहि मन्दिर केँ नव-नव रूप मे परिणति देबाक कार्य कयल गेल अछि। अनन्त मल्ल केर नाम एहि मन्दिर केर छत निर्माण लेल जानल जाइत अछि।

४. लिच्छवी कथा

जयदेव द्वितीय लिच्छवी सम्राज्यक अन्तिम आ काफी प्रसिद्ध राजा भेलाह तथा हुनका द्वारा पशुपतिनाथ मन्दिर परिसर मे एक गोट स्तम्भ राखल गेल जाहि मे लिखल गेल विवरण सँ लिच्छवी शासनक इतिहास ज्ञात होइत अछि। शिलालेख मे वर्णित लेख केर अनुसार पशुपतिनाथ मन्दिरक निर्माण ३०० ई. मे लिच्छवी राजा सुपुष्प देव द्वारा कयल गेल। हिनकहि नाम काठमांडू उपत्यका मे एनिहार पहिल व्यक्तिक रूप मे मानल जाइत अछि।

नोटः एकर बादक लेख मूल स्वरूप अंग्रेजी मे मूल लेखकक भाषा मे जहिनाक तहिना राखि रहल छी, समय भेटला पर एकर अनुवाद सेहो करब। मूल लेखकक प्रति आभार लेल शब्द कम पड़ि रहल अछि जे हमरा समान जिज्ञासू लेल बहुत नीक लेख प्रस्तुत कएने छथि। कतहु-कतहु हम भावानुवाद सेहो कएने छी, किछु जनतब अपनो दिश सँ जोड़ने छी। अस्तु! शेष आलेख निम्न अछिः

The Architecture of Pashupatinath Temple

The temple has been designed in Nepali pagoda style. Simply many features of this highly ornamented temple are made up of beautifully carved wood, which gives a stunning outlook of ancient great architecture. The roof of this two-story sanctuary is dressed in gold-copper, its spire is made-up of gold and these golden pinnacle specifies the icon of religious thoughts. The four main gates (doors) are made up of Silver. Inside of Pashupatinath temple, we can see 6ft tall Shiva lingam with the same circumference, which is widely known as divinity stone (shiny hard black-stone). The statue of Nandi (Bull), just in front of the western gate of the main Pashupati shrine is concocted of Bronze.

Other Facts and attraction of Pashupatinath Temple area.

Entry or Darshan: Only the Hindus people, Nepali Buddhist, Sikh, and Jain group of Indian descent are allowed to enter within the main shrine of Pashupati. However, if you are of other religious conviction, you can move freely around its surroundings except for prime sanctuary. Furthermore, if you are of western origin who recently practicing Hinduism are also prohibited to enter into main temple complex.

Funeral Ceremony: Cremation Ghats lies at the southern side of the main sanctuary, just bank of the sacred river known as Bagmati. Many Hinduism followers wish to take their funeral to Arya Ghat after their death, the corpse covered by yellow colored cloth and laid down on the wooden pyre to burn it, to change into ashes. Simply, it is one of the famous places where the Hindus funeral ceremony is held. It is believed that those who will be cremated here, will take next rebirth in a human womb, not in an animal.

Cremation Nearby Bagmati River
Photo by: Jorge Láscar Premises of Pashupatinath and Funeral Ceremony.

Sages or Holy man and women: Sandus, Yogis, Saints or Sadhvi (holy female) are nirvana seekers commonly seen within this Pashupatinath temple premise. They are totally aloof from general luxuries and some are believed to be achieving or trying to achieve “moksha” by deeply engaging on praying lords and thru meditation. Consuming Cannabis is one of the well-known uniqueness of Sadhus and even law appears neutral to them because it is used as a devotional offering to worship Lord Siva and later pooled among prayers. Hashish items are widely consumed by other general people too, once in a year, especially on Mahasivaratri festival. Even though it is illegal for common people, but smuggling will create sever consequence to anybody by law.

Nanga Baba a Holy man
Nanga Baba.
Sage in Pashupati Area
Sadhu Baba at Pashupatinath
Kalki Murti Pashupatinath
Kalki Murti near by Pashupati Mandir

Kalki Murti: According to Hinduism, there are altogether 4 yugas (era) in 1 cycle and they are 1st Satya (golden age), 2nd Treta, 3rd Duwapar, and currently running 4th Kali Yuga, believed that 4th era was started after the end of Kurukshetra, Mahabharat war. Behind the main Temple of Pashupatinath, we can see an ancient idol of “Birupakchya” also known as Kalki statue. Lord Shankar is also acknowledged as Virupakchya Bhagawan (god). It is said that every year this half-body idol is gaining its height slowly when it would gain full-size, it is believed that the whole world will collapse. Means there would be the end of the Kali Yuga. Local People assumed that this statue will get buried in the ground at the end of the world and again gradually it reappears with the cycle of the time (era).

Festivals: Mainly Teej (women’s festival) and Mahashivaratri are the main events that bring the festive environment to Pashupatinath temple premise. Because thousands of devotee gather together and celebrate the event. While the shrine area gets covered by the female in the course of the Teej festival, several thousand ladies head over to the temple to soak in the sacred Bagmati River, worship lord and stay fasting whole day. Since this practice is supposed to make a blissful and lengthy relationship. Normally, on this occasion, many females dress red-colored saris, which are usually worn on wedding events traditionally and they try to enjoy singing and dancing.

Holy Puff by Sadhu
Sadhu baba Enjoying During Maha-Shivaratri (by: Abhishek Singh)
Teej Festival in Nepal
Women’s festival Teej (photo by: Ganesh Poudel)
Nanga Baba showing his Strength
Nanga baba During Shivaratri Festival (by : Xiquinho Silva)

Maha-Shivaratri is a festival practiced by every Hindus follower in both Nepal and India. On Maha Shivaratri, wedded women of all ages wish for the well-being of their spouses, single ladies pray for a hubby like Shiva, considered as the good life partner. During Shivaratri the Pashupatinath mandir remains open for the entire night, the shrine gets lighted with traditional lamps and modern lighting system. Whole night Devotee enjoys by singing holy songs and dancing on it.

The fame of Shree Pashupatinath temple & Mahashivaratri festival is rapidly spreading around the world because of the Nirvana seekers and their activities. Many travelers from different countries arrive here just to enjoy this festival. 100’s of sages from different parts of India and Nepal usually arrive here during Maha Shivaratri festive. You can encounter different sect of babas over here, among them Nangababas are quite extraordinary. Nanga sages are the main attraction of the crowd, they are few in number and normally moving around being fully naked during the event. Smoking cannabis is common and allowed for them, they lost in trance and do different activities. Often they cover their body with ash. On this festival, hashish is legal for one day and is implemented to other folks too. Many of them (saints) are friendly, but some may beg money to take a snap with them.

How to reach Pashupatinath Temple?

It is very easy to approach at the Pashupati temple premise, simply because it lies within the Kathmandu valley, the capital city of Nepal. It takes approx. 40min from the central area of the metropolitan city. You can grab a bus from any place of Kathamandu. You can catch direct micro-bus from any spot on the ring road to Pashupatinath. If you are in the center part of the cities like Thamel and so on, it will be better to catch the bus or tampoo from Jamal or Ratnapark to Gausala (Pashupati area). Or alternatively, you can hire a taxi and bike too. If you don’t prefer to ride any vehicle, just buy a city map and move according to the direction shown by it.

Best time and seasons to visit Pashupatinath Temple

In the terms of the season, you can visit at any seasonal period but if you have planning to do any other activities like trekking or hiking, just call the best time to visit Nepal. The temple or mandir remains to unlock every day from 4 am to 7 pm for general prayer. However, the innermost point (also known as Garbagriha) where the lingam is established remain open from 5 am to 12 pm by Mool (main) Bhatta for morning rite. It remains closed for daytime and again unlocked for 5 to 7 pm for evening rite. Thus, the perfect time to visit the shrine is morning hours or late in the evening time.

Important Information for Pashupati Mandir visitors

To get into the Pashupatinath temple premises, a foreign-born individual has to pay only one thousand Nepali Rs (USD $10) as entry charge. To get more detail information about it and for your easiness, you can hire a licensed local guide or if you don’t wanna get info regarding rituals and convection, just pay the entrance fee and move in your own style.

Attention: you must be careful while touring inside Pashupatinath Temple area. Because hundreds of monkeys are encountered in every step. We even can’t notice where what and which time they snatch our stuff. Better keep your important stuff inside your bag, don’t let them guess that you are carrying any foodstuff with you. Always avoid eyes contact with them.

Ancient Erotic Carving
Erotic Carving Nearby Temple Premise
Baby Monkey with Mother
Happy Family of Monkey

Tips and Tricks:
It is applied only for smokers: In the case, if you are surrounded by troops of aggressive monkeys, just try to smoke a cigarette they will be far from you.

Conclusion of Pashupatinath Temple (Mandir)

It is very important shrine regarding historic and religious factors. Because it is one of the oldest and living cultural heritage sites of the world listed by UNESCO. The importance of it is usually seen during the main festivals like Mahashivaratri, Teej, and etc. Each year thousands of internal and external pilgrim arrive here to worship lord Shiva. No matter which religion and race do you belongs to, you can step your foot around its external premises. However, excluding Buddhist, Sikh, and Hindus, it is not allowed to other religion people to enter inside the main temple complex.

Many organizations are involving to develop and protect it, by making different project and plans. For instance, the main objective of Pashupatinath temple area development trust is to develop and manage the whole system within the area. Some others are involving in cleaning and so on. The good news is that the present condition of Pashupatinath temple is perfect. Because the main mandir complex remained safe and sound during the massive earthquake, while it triggered incalculable damage in much old monumental attraction centers of Kathmandu and other parts of Nepal.

Want to know more about it? the Pashupatinath temple Nepal official website is https://pashupatinathtemple.org, If you have any question or suggestion related to this topics please comment below or contact us.

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