भव्यता आ सफलता सँ सम्पन्न भेल भामती वाचस्पति स्मृति समारोह ठाढी मे, राजकीय उत्सव छल

२० मार्च २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!!

भामती वाचस्पति मिश्र महोत्सव २०१९ केर आयोजन काल्हि मंगल दिन ठाढी गामक फूलदेवी कुशेश्वर झा महाविद्यालय प्रांगण मे विभिन्न विद्वत् विमर्श, कवि सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमक संग सम्पन्न भेल। विश्वप्रसिद्ध षट्दर्शन टीकाकार विद्यावारिधि सर्वतंत्र स्वतंत्र वाचस्पति मिश्र केर स्मृति मे एहि वर्ष बिहार सरकार द्वारा प्रायोजित रूप मे राजकीय महोत्सव केर आयोजन कयल गेल अछि। भामती-वाचस्पति स्मारक निर्माण समिति द्वारा २०१६ सँ लगातार आयोजित होइत आबि रहल ई महोत्सव एहि बेर वृहत् स्तर पर होयबाक जनतब समितिक अध्यक्ष रत्नेश्वर झा देलनि अछि।
 
कार्यक्रमक उद्घाटन मधुबनी जिलाक उप-विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह संग झंझारपुर अनुमंडलाधिकारी अंशुल अग्रवाल, जिला योजना पदाधिकारी रविशंकर, बीडीओ राजेश्वर राम एवं अंचलाधिकारी विष्णुदेव सिंह द्वारा संयुक्त रूप सँ वाचस्पति मिश्र केर प्रतिमा ऊपर माल्यार्पणक संग दीप प्रज्वलन करैत कयल गेल। उद्घाटन सत्र मे मैथिली भाषा-साहित्य एवं मिथिला संस्कृतिक अनेकों विज्ञ-ज्ञाता-विद्वान् लोकनिक उपस्थिति मे वाचस्पति-भामतीक आजीवन योगदान केँ विशेष रूप सँ स्मरण करैत कयल गेल छल। एहि सत्रक संचालन डा. अभिषेक कुमार कयलनि। आयोजन समितिक अध्यक्ष रत्नेश्वर झा द्वारा पूर्ववत् वाचस्पति-भामती पर आधारित आयोजनक उद्देश्य, इतिहास, भविष्यक कार्ययोजनाक संग वांछित विभिन्न विकासक योजना पर ओजपूर्ण विचार राखल गेल छल। एहि तरहें समस्त वक्ता आ विचारक लोकनि वाचस्पति-भामतीक जीवन सँ जुड़ल प्रेरणास्पद पक्ष केँ स्मरण करैत वर्तमान पीढी द्वारा एहि तरहक विद्वत परम्परा केँ निरन्तरता मे रखबाक कामना कयल गेल छल। 
 
विदित हो जे एहि बेर २ दिवसीय आयोजन मे पूर्व रक्षामन्त्री सह गोआ केर मुख्यमन्त्री मनोहर पर्रिकर केर स्वर्गवासी होयबाक कारण राष्ट्रीय शोक घोषित होयबाक चलते १८ मार्चक कार्यक्रम रद्द कयल गेल, मात्र काल्हि १९ मार्च मंगल दिन टा आयोजन कयल जा सकल। संगहि निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव आचार संहिता लागू कयल जेबाक कारण अन्य तैयारी सेहो प्रभावित भेला सँ पूर्व निर्धारित तिथि मे २ दिन देरी कयल जेबाक बात उप-विकास आयुक्त अपन संबोधन सँ जानकारी करौलनि। चुनावक तैयारी मे व्यस्त जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक जिनकर प्रतिबद्धता सँ ई आयोजन राजकीय स्वरूप मे परिणति पाबि सकल अछि, ओहो उपस्थित नहि भऽ सकलाह।
 
उप-विकास आयुक्त मिथिलाक विद्या-परम्परा एवं सांस्कृतिक विशिष्टताक संग एहि ठामक आर्थिक आत्मनिर्भरता लेल पान-मखान-माछ व अन्य पारम्परिक कृषि उपज बढेबाक दिशा मे कार्य करबाक आवश्यकता पर जोर देल गेल। ओ एहि सभक खस्ता हाल पर चिन्ता जतबैत कहलनि जे आइ मिथिलाक अपन मौलिक माछ गायब भऽ गेल अछि आर आंध्रप्रदेशक आंध्रा मूलक माछ मिथिलाक बाजार पर राज कय रहल अछि। एहि चिन्ता सँ सर्वथा मुक्तिक दिशा मे राज्य आ राज्यक जनता सब तरहें आगू बढय।
 
ठाढी गामहि सँ आँखि सँ दिव्यांग आशु कुमारी द्वारा भगवती वंदना ‘जय जय भैरवि असुर भयाउनि’ केर गायन सँ उपस्थित समस्त सभासद ओ अतिथि लोकनि भाव-विभोर भऽ गेलाह। तहिना स्वागत गान गाबिकय सभक स्वागत कयल गेल। सुजीत मिश्र द्वारा वाचस्पतिक महिमागान प्रस्तुत कयल गेल। समस्त अतिथि लोकनिक स्वागत मिथिलाक विशेष परम्परा पाग आ दोपटा भेंट करैत कयल गेल छल। आयोजक समितिक अध्यक्ष रत्नेश्वर झा संग अन्य पदाधिकारी काशीनाथ झा एवं आनंद नारायण झा द्वारा सभक स्वागत ओ सम्मान कयल गेल।
 
एहि समारोह केर ऐगला सत्र मे साहित्य अकादमीक मैथिली भाषा संयोजक प्रेममोहन मिश्र द्वारा सहित्य अकादमीक तरफ सँ एहि स्थल पर आगामी समय मे २-दिवसीय साहित्यिक संगोष्ठी आयोजित कयल जेबाक घोषणा कयल गेल छल। तहिना मिथिलाक आर्थिक विकास संदर्भित सत्र बहुत उत्कृष्ट रहल। एहि सत्रक अध्यक्षता कय रहला सर्जक विद्यानंद झा द्वारा मिथिलाक आर्थिक स्थिति मे कोना सुधार होयत तकर ब्लू प्रिंट राखल गेल छल। डी एल कर्ण द्वारा पावर पॉइंट प्रजेंटेशन देल गेल जाहि मे मिथिलाक दुनू पारक अलग अलग नक्शा देखाकय आर्थिक प्रगतिक रिपोर्ट देल गेल। ओ मिथिलाक नक्शा मे ६ कमिश्नरी आ २१ गोट ज़िला देखेलनि जाहि मे हाजीपुर-वैशाली नहि जोरल छल। तकर संशोधन तार्किक ढंग सँ अजित आज़ाद आ कमलेश झा द्वारा भेल।
 
हरेक वर्ष मातृभाषा मैथिली केँ प्राथमिकता मे रखैत आयोजित कयल जाइत रहल कवि सम्मेलन सेहो भव्य रूप मे आयोजित भेल। कवि गोष्ठी मे कुल १३ गोट कवि भाग लेलनि। अत्यंत झमटगर आयोजन ‘कवि सम्मेलन’ केर अध्यक्षता मैथिलीक वरिष्ठ कवि उदयचंद्र झा विनोद कयलनि, तहिना संचालन अजित आज़ाद केने छलाह। कविक रूप मे रामेश्वर निशान्त, प्रीतम निषाद, दिलीप कुमार झा, चन्द्रमणि, बंसीधर मिश्र, मनोज कामत, अंजलि कुमारी, प्रवीण कुमार झा, हरिदेव झा, राघव रमण, दीप नारायण विद्यार्थीक सहभागिता रहल। ई लोकनि अपन ओज सँ भरल काव्य प्रस्तुति सँ समारोहक गरिमा केँ बढौलनि।
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