तनुजा दत्त लिखित नव मैथिली कथा – परिश्रम क फल

परिश्रम क फल 

– तनुजा दत्त

घर क आगु सँ निकलति जीप में बैसलि महिला के देख क बड्ड अचंभित भेलौं , लागल जेना हिनका कतहु देखने छियैन । ….रीना हमरा अचंभित देख क बुझि गेलखिन्ह ” भाभी नय चिन्हलियैन्ह हुनका , पलाश के कनिया छथीन , नीना ” ।….” ई बी .पी .एस .सी के परीक्षा देने छलखिन्ह , पास भ क बिडीयो छथीन । ….” और पलाश की करय छथीन , जिज्ञासावश पुछलियन्हि ” । भाभी ओ त कोनो छोट मोट नौकरी क रहल छथि , आ घर में बच्चा खेलबै छथि ।

एकाएक पिछला बात सब याद आब लागल । पलाश हमरे सासुर के छलैथ । पढ़य में बहुत होशियार । स्कूल सँ बी .ए. तक पढ़ाई में सब दिन अव्वल रहलाह । ईहै कारण छल जे अति महत्वाकांक्षी रहैथ । महत्वाकांक्षी रहबाक चाही लेकिन अति कोनो चीज के नीक नय होयत अछि । जखन समय भेटतन्हि त हमरा सँ भेंट कर जरूर अबय छलाह । ” पलाश आय काल्हि की करय छी बौआ ” । ” भाभी , आई .ए .एस. के तैयारी क रहल छी ” ।

” अच्छा , तैयारी करू आ साथे साथे बैंक , रेलवे सब के परीक्षा सब सेहो दैत रहियो ” । ” हा हा हा , भाभी ई क्लर्के बनय के रहितै त कखने हम पास भ गेल रहितौं ” ।.. “कियै , नौकरी कोनो खराब नय होय छय , इ त अपन हाथ क बात छी , आई .ए .एस बनि जायब त ई नौकरी छोड़ि देबै ” । ऐना करैत करैत पलाश सब नौकरी के छोड़थि गेलखिन्ह ।… हमर बात पलाश के अरूचिकर लगलैन । तैं हमरो सँ भेंट करनाई छोड़ि देलैथ ।

समय कखन पाँखि लगा क उड़ि गेल बुझेबो नय कैल । गाम सँ पता लागल जे पलाश के विवाह हुनकर बाबु जी बढ़िया लड़की देख क’ कय देलखिन्ह । नीना , कनिया के नाम छलैन्हि । शिक्षक पिता के पुत्री भेला सँ हुनको शिक्षा के खुब ज्ञान रहैन्ह ।….. एक दिन संयोगवश नीना हमरा बाजार में भेटा गेली । चुँकि पूजा साथे छलैथ तैं चिन्हा परिचय करा देलैथ । ” अहाँ की करय छी नीना , ” ” दीदी हम अँग्रेजी सँ द्वितीय वर्ष में छी , गामे सँ जाय छी कालेज । बियाह के बाद कनी दिक्कत त भ गेल लेकिन हम पढ़ाई नय छोड़लौं , हमरा आगुओ पढ़य के अछि ” । … ” बढ़िया अछि । …” दीदी लेकिन घर क लोग नय चाहैत छैथ , सब कहय छथीन , जे की कहतै लोग सब , कनिया असगरे रिक्शा पर बैसि क कालेज ओते दूर जाय छय । “…रूढ़िवादी परिवार में बियाह भेला सँ नीना के पढ़ाई के परिवार में कोनो महत्व नय रहैन्ह । तहियो नीना , जबर्दस्ती भोरे घर क काज खत्म क क कालेज चलि जाय छलैथ । नीना के पढ़ाई ल क धीरे धीरे घर में उठापटक भेनाइ शुरू भ गेलैन । सास , ससुर के कहनाई रहैन्ह जे गामक लोग हमरा मुड़ि नय उठब दैया । …फलां बाबु के पुतोहू बहुत जिद्दी छैन्ह , से असगरे कनिया गाम सँ रिक्शा पकड़ि क कालेज ओतेक दूर चलि जाय छथीन । तहियो नीना पढ़ाई नय छोड़लथि ।

एक दिन नीना अस्पताल में भेटेलैथ । सुखि क’ काँट सन देह भ गेल रहैन्ह । ” नीना , कोनो खुशखबरी अछि ” , “हँ दीदी , ” देह त पूरा गलि गेल ,” दीदी , ई पढ़ाई हमरा काल भ गेल , रोज घर में कलह होय अछि , कहियो काल क त पलाश तामस में हाथ सेहो उठा दय छथि , लेकिन हम पढ़ाई नय छोड़ब । ” कखनो क होइया , जे बाबुजी लँग चलि जाऊ ” । ” नय नीना , ई अहाँ के अपन लड़ाई छी , अहीं के लड़ि क रस्ता बनब’ पड़त । माँ बाबुजी के बीच में नय अनियौन । ” फेर नीना सँ कहियो भेंट नय भेल ।

अहिना एक दिन नीना के ध्यान आबि गेल । “गाम पर फोन लगबय छी कनी बातो भ जैत और नीना के समाचारो बुझि लेबैन ” । पता लागल जे नीना के बेटा भेलैन । घर क लोग बहुत खुश छथीन । लेकिन समस्या सेहो बढ़ि गेलैन । कम्नाहैर रहितो घर क काज बच्चा सब के करैत , नीना युनिवर्सिटी जाय छथि। आब पढ़ाई और कठिन रहैन्ह । …आब त गाम , दर दियाद , सब के मुँह खुलि गेलैन । खुब ताना सुनय के पड़ैन । ” घोघ तानि क असगरे रिक्शा पर बैसि क निकलि जाय छथीन कनिया , एहन ढीठ लोग नय देखलियै ” जते मुँह ओते बात । तहियो नीना के अनवरत पढ़ाई चलैत रहलैन्ह ।

आई सच में हुनका अहि पद पर देख क हृदय सँ खुशी भेल । अहि पद लय ऊ बहुत संघर्ष केने छलैथ । परिश्रम के फल भेट गेलैन । नतमस्तक छी एहन महिला के देखि क ।🙏🙏🙏🙏

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