युवा सर्जक-संपादक ऋतेश पाठक संग अन्तर्वार्ता – प्रकाशन विभाग आ अभामिसं प्रति कृतज्ञताक भाव

अन्तर्वार्ता – युवा सर्जक-संपादक ऋतेश पाठक संग

मैथिलीभाषी समाज आजुक प्रवासक युग मे एहि तरहें दहोंदिश छितैर गेल छथि जे आब मूल्यवान् व्यक्तित्वरूपी मोती-विभूति सब केँ समेटिकय हुनका सभक व्यक्तित्व-कृतित्व केँ प्रकाशित करब बड पैघ चुनौती बनि गेल अछि। तथापि, सोशल मीडिया केर सहयोग सँ हिनका सब केँ जतेक ताकि पबैत छी, अपने सब धरि मैथिली जिन्दाबाद आ फेसबुक-व्हाट्सअप-ट्विटर मार्फत प्रकाशित करैत रहैत छी। हाल किछु समय सँ मैथिली भाषा-साहित्य आ मिथिला संस्कृति-सभ्यता लेल बहुत सारगर्भित आ मूल्यवान् योगदान देनिहार एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व केर रूप मे परिचित भेलहुँ ऋतेश पाठक संग, तीरभूक्ति मासिक पत्रिकाक संपादक, मैथिली शोध संचय केर संपादन मे विनीत उत्पल संग सहकार्य करैत अखिल भारतीय मिथिला संघ (दिल्ली) केर अधिनस्थ प्रकाशनसम्बन्धी विभिन्न काज करैत आबि रहला अछि। हमर ई कर्तव्य बनैत अछि जे हिनका द्वारा कयल गेल महत्वपूर्ण कार्य सँ अपन समस्त पाठक आ मैथिली जिन्दाबाद मार्फत आरो बेसी लोक धरि पहुँचाबी। ताहि लेल एकटा अन्तर्वार्ता प्रकाशित करय चाहब। आउ, पढैत छी ऋतेश पाठक जी संग लेल गेल ई अन्तर्वार्ताक सम्पादित अंश।
 
हमः ऋतेश जी! अहाँ संग पहिल भेंट मोन पड़ैत अछि १३ सितम्बर २०१४ केँ – साईंधाम, राजेन्द्र मेट्रो स्टेशन, नई दिल्लीक ओहि ऐतिहासिक कार्यक्रम “मैथिली महायात्रा” शुभारंभोत्सव मे। मैथिली लोक रंग केर संस्थापक प्रकाश झा केर संयोजन मे दिल्लीक कतेको रास महत्वपूर्ण व्यक्तित्व लोकनि केँ एकत्रित कय ओ एहेन परिकल्पना पर चलब आरम्भ करबाक दिन छल जेकरा मुताबिक मिथिलाक प्रत्येक छुपल-छूटल महान सपूत जे अपन महत्वपूर्ण योगदान सँ राष्ट्र, राज्य, समाज, लोक आदिक हितकार्य करैत अछि तिनकर परिचय समेटि विश्वक एक प्राचीनतम सभ्यता, संस्कृति, भाषा, साहित्य जेकरा अपने सब समग्र मे ‘मिथिला-मैथिली’ कहैत छी ताहि संग फेर सँ जोड़ल जाय। आर, आइ एहि बातक लगभग साढे चारि वर्ष बीत गेल। ओहि महान अवसर पर मंचासीन युवा विभूतिक रूप मे ऋतेश पाठक केर परिचय कतेक महत्वपूर्ण रहय से बात अहाँ सच मे सिद्ध केलहुँ अपन एक सँ बढि एक योगदान दय केँ। हम किछु बात मोन पाड़ैत छी – सब सँ पहिने त अहाँ अपन योग्यता आ दक्षता सँ भारतक एक चर्चित पत्रिका ‘योजना’ मे संपादन कार्य करैत रही, तदोपरान्त अपन पहुँच आ लगन सँ मातृभाषा मैथिली मे कय गोट महत्वपूर्ण अनुवाद केर रचना सँ लैत प्रकाशन मे दर्जनों साहित्यकार-स्रष्टा लोकनि केँ आगू बढेलहुँ, राष्ट्रीय स्तरक अनेकों कार्य मे अपन मातृभाषाक प्रतिनिधित्व हो ताहि शुभेच्छा सँ कतेको तरहक आन्तरिक संयोजन कयलहुँ, मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल (दिल्ली) मे अन्तिम समय केर निर्णय रहितो बहुत कम समय मे बहुत बेहतर व्यवस्थापन-संयोजन संग मैथिली मे कयल गेल अनुवादक कार्य लेल सहभागिता सुनिश्चित कयलहुँ, तीरभुक्ति समान महत्वपूर्ण शोध आलेख सँ भरल मैथिली मासिक पत्रिकाक संपादन-प्रकाशन कय रहल छी, अखिल भारतीय मिथिला संघ केर प्रबुद्ध प्रकोष्ठ मे अहाँ समान ओजस्वी व्यक्तित्व छथि आर एतेक सुन्दर स्मारिका ‘समय संकेत’ जाहि मे विभूति खंड, साक्षात्कार, विमर्श, विकास खण्ड, साहित्य खण्ड, कविता, साहित्य विमर्श, बिहनि कथा, संस्कृति खण्ड सहित अन्य आलेख-रचना आ रचनाकार केँ समेटबाक अद्भुत कार्य कयलहुँ अछि। ई सब त हम सब देखि सकलहुँ अछि, लेकिन अहाँ आरो कय गोट कार्य कय अपन मातृभाषा आ मातृभूमि केँ विश्वपटल पर आगू बढेबाक कार्य कयलहुँ, कय रहल छी, एहि सब सम्बन्ध मे जानकारी लेल आ संगहि अहाँ समान ऊर्जावान सपूत सँ मिथिलाक जन-जन केँ परिचित करेबाक लेल अपने सँ किछु आर जानय लेल उत्सुक भेल छी। सबसँ पहिने त अपन परिचय, शिक्षा-दीक्षा, माता-पिता ओ परिजन संग गाम आ गामक वातावरण पर किछु कहू।
 
ऋतेशः राजेन्द्र नगर कार्यक्रम सँ पहिने हम सभ भेटल छलहुँ मिथिला चौक, क्नॉट प्लेस पर। अकस्मात आयल छलहुँ ओतहि।
 
अपन परिचिति मे हम कहय चाहब जे हमर जन्म समस्तीपुर जिला केर खानपुर गाम मे बेहद साधारण परिवार मे भेल अछि। पितामह स्व. विश्वेश्वर पाठक अपन सूझ-बूझ आ प्रभावकारी व्यक्तित्वक कारणे पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर समेत एहि क्षेत्रक अनेक राजनेताक बीच सम्मानित सलाहकारी व्यक्तित्वक रूपे प्रतिष्ठित छलाह। यैह हमरा सबहक एकमात्र अनुवांशिक पूंजी कहल जा सकैछ।
 
आर्थिक-समृद्धिक रूप मे कोनो खास विरासत नहि रहल। पिताजी श्री मिथिलेश पाठक सरकारी राशन विक्रेताक रूप मे जीविका चला हम ५ बहिन आ २ भाय केर पालन-पोषण शिक्षा-दीक्षा केर दायित्व निभेलनि। एहि यात्रा मे मां श्रीमती इन्द्राणी देवी केर मजबूत सम्बल अतुलनीय अछि। हमर गाम खानपुर बारहो वर्णक ठेकान अछि जाहि मे ओबीसी समुदायक बाहुल्य अछि। समृद्धिक वितरण सेहो सामुदायिक वितरण केर आनुपातिक अछि। ओबीसी समुदायक लोक सब अपेक्षाकृत बेसी समृद्ध छथि। एहि केर बादे आन जाति-समुदायक लग धन संपदा अछि। एहन विविधता आ विपरीत समीकरणक बीच बाबा देश मे पंचायती व्यवस्था लागू हेबाक बाद अपन गामक प्रथम मुखिया निर्वाचित भेल छलाह। प्रत्यक्षदर्शी लोकनिक मोताबिक हुनक कार्यशैली अद्भुत छल।
 
गाम मे पिछला किछु समय मे बिजली वा सड़क जेहन सुविधा सभ मे बहुत प्रगति भेल अछि मुदा शिक्षा आ स्वास्थ्य सम्बन्धी स्तरीय अवसंरचना एखनो दूर अछि। किछु साल पहिने धरि सरकारी स्कूल धरि सहारा छल। पिछला लगभग एक दशक मे किछु निजी विद्यालय खुजल मुदा स्तरीय शिक्षा व्यवस्थाक एखनो कमी अछि। एहि सब कारणे प्राथमिक शिक्षाक लेल हमरा नानीगाम रोसड़ा पहुँचाओल गेल। ओतहि छठम कक्षा धरि संत कबीर चिल्ड्रेन्स एकेडमी मे आ तदुपरांत मैट्रिक धरि सुंदरी देवी सरस्वती विद्या मंदिर मे अध्ययन भेल। इंटरमीडिएट समस्तीपुर स्थित आरएनएआर महाविद्यालय सं विज्ञान (गणित) संकाय सं उत्तीर्ण क दिल्ली प्रस्थान केलहुँ।
 
हमः उच्च शिक्षा आ पेशा मे प्रवेश केर कि सब कथा मोन पाड़ि सकैत छी।
 
ऋतेशः जेना आम तौर पर मिथिला मे होइत छैक, २००४ ई. मे इंटरमीडिएट परीक्षा भेलाक बाद परिवेश सिविल सेवाक तैयारी दिश प्रवृत्त करय लागल। इंटर मे आएल बेहद कम प्राप्तांक हमर डेग पाछु घिचैत छल मुदा तखनहि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय केर बी.ए. सोशल साइंस केर प्रवेश परीक्षा मे भेटल अखिल भारतीय तेरहम रैंक बलजोरी इमहरे झिकैत छल। एहि ऊहापोहक बीच एकटा आर प्रश्न गंहीर छल। ओ छल अध्ययन वास्ते धन प्रबंधन। घरक स्थिति देख ई पहिने सं विचारल छल जे उच्च शिक्षाक आर्थिक दबाव पिताजी पर नहि छोड़ल जाए वा अतिशीघ्र कम कएल जाए। एहि सब उधेड़बुन बीच एन.डी.ए. केर प्रवेश परीक्षा लेल दिल्ली पहुँचलहुँ त लगभग दू मास धरि ओतहि रहलहुँ। ताहि बीच दिल्ली विश्वविद्यालय केर ग्रेजुएट कोर्स सबहक नामांकन अधिसूचना आएल। एहि अधिसूचना मे बी.ए. ऑनर्स पत्रकारिता विषय पर नजर जेबाक साथ उधेड़बुन खत्म भ गेल। किंचित उठापटक केर बीच बी.एच.यू. आ सिविल सेवा केर मोह त्यागि पढ़ाई संग कमाई केर लक्ष्य सं हिंदी पत्रकारितामे नामांकन करेलहुँ।
 
नामांकन बाद बुझना गेल जे कोनो मार्ग मे जिंदगी शॉर्टकट कें अनुमति नहि दैत छैक। खैर, दिल्ली मे पहिल ६ मास ट्यूशन कोचिंग सं काटि नवम्बर-दिसम्बर धरि मीडिया क्षेत्र मे पदार्पण सेहो क देलहुँ। स्नातक तीन साल धरि मे ३-४ विधानसभा चुनावक जनमत सर्वेक्षण, दू गोट साप्ताहिक आ ३-४ मासिक संग काज करैत २००७ मे स्नातक परीक्षाक बाद हिंदुस्तान समाचार संवाद समिति संग काज शुरू केलहुँ मुदा ३-४ मास बाद सीएमएस मीडिया लैब संग मीडिया शोध केर काज मे जुटि गेलहुँ। एहिक समानांतर आकाशवाणी, पीआईबी, इंडिया न्यूज आदि संस्थान संग अंशकालिक रूप सं काज करैत रहलहुँ। अप्रील २००९ मे संवाद समिति यूनीवार्ता पहुँचलहुँ त लगभग पौने चारि साल एतहि टिक क काज केलहुँ। फ्रीलांसिंग केर दायरा बढ़ैत गेल।
 
एहि बीच संघ लोक सेवा आयोग सं भारतीय सूचना सेवा मे नियुक्ति केर विज्ञापन आएल। दिसम्बर २०१२ मे एहि सेवा मे पदार्पण भेल।
 
हमः मातृभाषा-मातृभूमि दिश झुकाव कहिया आ कोना-कोना भेल।
 
ऋतेशः मातृभूमि त सदिखन मन मे छल। ई कहि जे मातृभूमि लेल जे स्वप्न पहिने ओ आब पेट-भात केर चक्कर मे हू-ब-हू पूरेनाय कठिन। तखनहु सदिखन मातृभूमि कें किछु ने किछु अर्पण करबाक प्रयास रहैत अछि।
 
मातृभाषाक प्रति रचनात्मक झुकाव एकटा रोचक प्रसंग अछि। उच्च शिक्षा प्राप्त कएला केर बादो हम मैथिलीक विशाल वाङ्गमय सं बुझू जे अपरिचिते छलहुँ। जखन कोनो पैघ काजक खबरि अखबार मे आबय त पढ़ि-सुनि गर्व होय मुदा अगिला दिन फेर अज्ञानक अन्हार। विद्यापति, यात्री आ हरिमोहन झा सदृश किछेक साहित्यकार मात्र केर विषय मे जानकारी छल।
 
वर्ष २०१२ मे अखिल भारतीय मिथिला संघक मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह मे कवरेज लेल मित्र रौशन झा आमंत्रित कयलन्हि। तखन ओ समारोह मोटा-मोटी राजनीतिक आयोजन सदृश बुझायल मुदा मिथिला मैथिलीक लेल काज केनिहार लोकनिक सम्मान हमरा लेल एहि कार्यक्रमक मुख्य आकर्षण छल। एकरा बाद अगिला ४ साल धरि छोट-छीन कार्यकर्ता रूपें एहि आयोजन मे अबैत रहलहुँ आ पत्रकार मित्र लोकनि कें मिथिला-मैथिली सं जुटल गतिविधि सबहक प्रचार लेल प्रेरित करैत रहलहुँ।
 
साल २०१६ केर समापन मैथिली मे हमर उपस्थितिक एकटा माइलस्टोन अछि। तखन हमर नियुक्ति प्रकाशन विभाग मे छल आ ओतय ‘एक भारत – श्रेष्ठ भारत’ परियोजनाक अधीन विभागक किछु पोथी सभ अनेक भारतीय भाषा मे अनुवाद करबाक काज शुरू भेल मुदा जल्दिए मैथिली आ संस्कृत अनुवादक नहि भेटबाक कारण बता एहि परियोजना से बाहर हेबाक स्थिति भ गेल छल। संयोगवश दुनु भाषा अपन हिय सं जुटल अछि, दुनुक प्राथमिक ज्ञान अछि आ दुनु मे काज केनिहार लोकनि सं परिचय अछि। तेँ हम अपना दिश सं प्रस्ताव क अपन रूटीन काजक अतिरिक्त ई दुनु भाषाक जिम्मेदारी माँगलहुँ जे स्वीकृत भ गेल।
 
सबसे पहिल फोन डॉ. प्रकाश झा (मैलोरंग) कें केने छलहुँ। हुनक अतिव्यस्तता केर बादो एकटा पोथीक अनुवाद हुनकर योगदान सं भेल। बाद मे रौशन झा, स्वाती ठाकुर, ऋषि मलंगिया, हितेंद्र गुप्ता सदृश लोकनिक मदति सं परियोजना आगु बढ़ल।
 
साल २०१७ मे अ.भा.मि.सं. केर स्वर्ण जयंती समारोह बुझु जे हमर मैथिली जीवनक टर्निंग पॉइंट भ गेल। एहि आयोजनक स्मारिका केर सम्पादन केर दायित्व हमरा देल गेल। संस्थाक पदाधिकारी लोकनिक हमरा ऊपर भरोसा बढ़ल त लागले हम नियमित तौर पर एकटा शोध पत्रिका छापबाक प्रस्ताव राखि देलहुँ। धन्यवादक पात्र छथि अ.भा.मि.सं. केर अध्यक्ष श्री विजयचन्द्र झा आ हुनक समस्त सहयोगीगण जे एक त एहि काजक महत्व बुझिलनि आ दोसर हमर क्षमता पर भरोसा कयलनि। एहि क्रम मे हमर पुरान परिचित श्री विनीत उत्पल सं अकस्मात भेट मे हुनक नव रूप सं परिचय भेल। लगभग दशक भरिक परिचय मे हुनका सं कहियो मिथिला वा मैथिली साहित्य पर एको शब्द गप नहि छल। स्वर्ण जयंती समारोहक प्रकाशन परियोजना मे ओ दिलो जान सं संग भेलाह आ एकटा नव यात्रा आरम्भ भ गेल।
 
एहि कालखण्ड मे समय केर गति बहुत तेज छल। स्वर्ण जयंती समारोह मे प्रबंधनक दृष्टि सं सेहो बहुत भार आएल कन्हा पर। भगवतीक कृपा सं सबटा भार बोझय मे कन्हा सफल रहल, आ आय मातृभाषा-मातृभूमिक लेल चिंतन दिनचार्यक अंग भ गेल अछि।
 
हमः अहाँ द्वारा कयल गेल, कयल जा रहल आ भविष्य मे सोचल काज पर प्रकाश देल जाउ।
 
ऋतेशः एखन धरि मुख्य रूप सं चाकरीगत काज टा दृष्टिगत अछि। मातृभाषाक प्रति झुकाव पिछला २ साल मे किछ नव काज करबाक अवसर देलक। एहि सं पूर्व मुख्यत: हिंदी मीडिया मे लेखन, सम्पादन आ शोध केर क्षेत्र मे आज करबाक अनुभव छल। एखन धरि चारि गोट भाषा हिंदी, अंग्रेजी, मैथिली आ संस्कृत मे आधिकारिक रूप सं काज क चुकल छी। राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय महत्वक अनेक अवसर पर उपस्थित भ रिपोर्ट करबाक अवसर भेटल अछि। सम्प्रति ई यात्रा आकाशवाणी केर सेवाक माध्यम सं आगु बढ़ि रहल अछि।
 
भविष्य मे अपन समस्त अनुभव मातृभाषा मैथिलीक चरण मे अर्पित क सकी, से इच्छा अछि। एहन मजगूत प्रकल्पक स्वप्न अछि जे मातृभाषा केर आत्मनिर्भर इकोसिस्टम बना सकय आ एहन इको सिस्टम मातृभूमि मे बंधु बांधव लोकनि केर समावेश क सकय। मातृभाषाक माध्यम सं प्राथमिक सं माध्यमिक धरि शिक्षाक दिशा मे किछु ठोस योगदान क सकी। एतबहि।
 
हमः राष्ट्रीय राजधानी सँ एकाएक सुदूर उत्तर-पूर्व सीमा पर पोस्टिंग – एतय अपन रुचि आ सृजनकर्म केँ सेहो निरन्तरता दय रहलहुँ अछि। एहि पर सेहो कनेक प्रकाश देल जाउ पाठक लेल।
 
ऋतेशः ट्रांसफर-पोस्टिंग त सरकारी नौकरीक अभिन्न हिस्सा अछि। तेँ स्थानक विशेष महत्व नहि। ओना सम्पूर्ण देश मे पसरल सेवा सबमे सब अधिकारी सब कें सुदूर क्षेत्र मे कम स कम एक बेर पोस्टिंग होइते छैक। एहि बेर हमर क्रम आएल। एहि अवसर केर खूब आनंद ल रहल छी। देशक भूगोल संग बहुत रास तथ्य सब सं परिचित भ रहल छी जे राज-समाज केर परिचय बेशी नीक रूप सं द रहल अछि।
 
सृजन त जीवन भ गेल अछि। चाकरीक आपाधापी आ गृहस्थीक धप्पा धप्पी केर बीच जखन सांस लेबाक अवसर भेटैत अछि, किछु रचनात्मक करबाक प्रयास रहैत अछि। स्वाती शाकम्भरी एहन सृजनशील जीवनसंगिनि केर साथ भेटला सं ई काज कनि आसान अछि। दुनु प्राणी सृजनधर्मक पालन करबाक पूरा प्रयास करैत छी। बाकी नियति पर निर्भर अछि।
 
हमः मैथिली जिन्दाबाद केर तरफ सँ अहु लेल बधाई जे जीवनसंगिनीक रूप मे मैथिलीक बहुचर्चित कवियित्री स्वाति शाकम्भरी संग जीवनक नव पारी आरम्भ कयल अछि। दुनू गोटाक जीवन सदैव सुखी आ सम्पन्न रहय। आब ई गठजोड़ मैथिली भाषा-साहित्य लेल कि सब देत कारण हमरा लोकनि त दुइ महत्वपूर्ण ऊर्जा केँ एक संग देखि तरंगित छी।
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