क्रान्ति केर सूत्रपात कयनिहार नागार्जुन – मैथिलीक यात्रीक स्मृति केँ संरक्षण लेल क्रान्तिक आवश्यकता

हिन्दीक नागार्जुन – मैथिलीक यात्री केर डीह सेहो अछि उदास

मैथिली भाषा लेल एक गोट अमर-स्तम्भ छथि बैद्यनाथ मिश्र ‘यात्री’। आधुनिक मैथिली साहित्य केँ अपन कइएक अमर रचना सँ मजबूती प्रदान कयनिहार आ हिन्दी मे सेहो एक सँ बढिकय एक क्रान्तिकारी रचना सँ पूरे देश मे नागार्जुन नाम सँ प्रसिद्धि पेनिहार महान व्यक्तित्वक डीह – मिथिलाक प्रसिद्ध गाम तरौनी मे आइ उदासीक माहौल मे अछि। बाबाक खपड़ैल घररूपी निशानी केँ नागार्जुन आश्रमक रूप मे संरक्षित रखबाक योजना बनैत आबि रहल अछि। सरकारक ध्यान एहि दिशा मे उचित रूप सँ नहि जेबाक कारण उदासी बढल बुझाइत अछि। पारिवारिक एवं ग्रामीण स्रोत सँ कय गोट योजना धरि समय-समय पर अपना तरहें स्मृतिशेष प्रतीक सभक रक्षा करैत आबि रहल य।

नागार्जुन आश्रमक लेल थोड़-बहुत प्रयास केँ सदिखन निरन्तरता दयवला एक संस्थाक नाम थिक ‘शान्ति फाउन्डेशन’। हालहि एक ‘जत्था नौजवानों का’ यात्रा बाबा नागार्जुनक गृह प्रखंड बेनीपुर पहुँचल, हुनक गाम तरौनी मे हुनकहि मूल आवास पर कार्यक्रमक आयोजन कयल गेल। फाउन्डेशन संचालक संतोष मिश्र मैथिली जिन्दाबाद संग चर्चा मे कहैत छथि, ‘बाबा नागार्जुनक मूल खपड़ा वला मकान टूटि रहल अछि, ओकरा संरक्षित करबाक अछि। हुनकहि नाम पर शुरू कयल गेल पुस्तकालय सेहो बन्द अछि, ओकरो चालू करबाक अछि।” राज्य केर उदासीनता एतेक पैघ राष्ट्र स्तर पर चर्चित कवि केर स्मृति स्थल प्रति कोना, एहि सवालक जबाब मे श्री मिश्र कहैत छथि जे राज्यक उदासीनता पराकाष्ठा पर अछि। नागार्जुनक नाम पर २००४ मे बिहार सरकार प्रखण्ड बनेबाक निर्णय लेलक सेहो नहि बनेलक। हमरा लोकनि आन्दोलन कएने रही। २०१४ मे आन्दोलन कएने रही। मोदीजी सँ पहिने गाम मे झाड़ू मारने छी। एक तरहें बुझू जे ईहो आइडिया ‘स्वच्छ भारत मिशन’ मे मोदी टीम केँ हमरा सभ सँ भेटल कहल जा सकैत अछि, कारण हम गुजरात केर कच्छ मे हिन्द मजदूर संघ सँ जुड़ल एक कार्यकर्ता मोदी टीम सँ नजदीकी रखैत एहि तरहक आन्दोलनक मादे ओतय चर्चा कएने रही आर एकर सराहना सेहो भेल छल। ताहि समयक किछु तस्वीर साझा कय रहल छी। धरि राज्य सरकार एखन तक कोनो पहल ओहि दिशा मे नहि कय सकल अछि। बिहार सरकार केर ज्ञापांक ३५९४ दिसम्बर २० तारीख २००४ ई. मे दरभंगा जिला मे नागार्जुन ग्राम केर नाम सँ तरौनी मे प्रखण्ड स्थापनाक घोषणा कएने छल। तहिना पुस्तकालय सेहो संचालन मे अनलाक बाद सरकारी उपेक्षाक कारण एखन बन्द अछि, कइएक बेर संज्ञान मे देलाक बादो कोनो सुनबाई नहि होइत अछि। नागार्जुन ग्राम तरौनी सेवा समिति आ यात्री विचार मंच आपसी सहमति सँ पर्यन्त एहि दिशा मे पहल केलाक परिणाम उपलब्धिमूलक नहि भऽ सकल अछि। ११ गोट पंचायत केँ मिलाकय तरौनी मे प्रखण्ड कार्यालय स्थापना करबाक घोषणा कयल गेल छल जाहि लेल कतेको बेर धरना, अनशन, जुलूस, प्रदर्शन केलाक बादो परिणाम ढाक के तीन पात वाली कहाबत जेकाँ सिद्ध भेल अछि।

मैथिली-मिथिलाक विकासक सूत्र निज कर्म-बल पर पिछला २०१७ सँ ग्रामीण लोकनि मिलिकय तरौनी महोत्सव केर आयोजन कयल जा रहल अछि। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालयक चर्चित विद्वान प्राचार्य डा. शशिनाथ झा द्वारा एहि गामक विद्वत् परम्परा पर महत्वपूर्ण कार्यपत्र प्रस्तुत कयल गेल आर विभिन्न स्रोत सँ संकलित पान्डुलिपि, हस्तलेख व विभिन्न साहित्यिक सामग्री आदि सँ एखन धरि कुल ३६८ गोट विद्वानक सूची संकलित कयल जा चुकल अछि। लेकिन मिथिलाक एतेक गहींर इतिहासक सम्पन्न गाम केँ राज्य द्वारा कोनो तरहें विकास आ संरक्षणक प्रयास नहि करब सच मे मिथिलाक गौरवपूर्ण इतिहास केँ जैड़े सँ समूल नष्ट करबाक आशंका बढा देबाक बात कहैत छथि श्री मिश्र। मिथिला तत्त्वविमर्शक सर्जक महामहोपाध्याय परमेश्वर झा सँ लैत वैय्याकरण तान्त्रिक राघव झा, चिरंजीव मिश्र, यदुपति मिश्र, राधाकृष्ण झा, रघुवर गोसाईं आदि सैकड़ों विद्वानक एहि विलक्षण धरतीक एहि तरहक उपेक्षा कतहु सँ वर्दाश्त योग्य नहि अछि। हिन्दुस्तान कि पूरे विश्व मे एहि तरहक विद्वानक भूमि केँ राज्य कतेक जोर-शोर सँ विकसित बनेबाक संग-संग पर्यटन केन्द्र केर रूप मे संवर्धित-प्रवर्धित करैत अछि तेकर हजारों उदाहरण देखल जा सकैत अछि, लेकिन तरौनी मिथिला उच्च जातिक विद्वानक भूमि रहबाक कारण वर्तमान संकीर्ण जातिवादी राजनीति केर भुमड़ी मे फँसि जेबाक कारण एखन धरि अविकसित आ गुमनाम रूप सँ जानि-बुझिकय उपेक्षाक शिकार बनाओल गेल अछि। नहि त कोनो स्थानीय राजनेता एहि लेल समुचित आवाज सदन मे उठा पबैत छथि, नहिये राज्यक मुख्यमंत्रीक ध्यान एहि दिशा मे आगू गति पकड़ैत अछि, एतेक रास आन्दोलन सेहो निरर्थक सिद्ध भेल अछि एतय। अन्त मे गुजरात मे संचालित एक सामाजिक संस्था बी. वी. शान्ति फाउन्डेशन संग सहकार्य करैत एहि ठाम स्वयंसेवा आ स्वसंरक्षणक सिद्धान्त पर कार्य केँ गतिशीलता प्रदान करबाक कार्य आरम्भ कयल गेल अछि। सरकार द्वारा संग्रहित पान्डुलिपि आ हस्तलेख आदि वापस मांगल जेबाक कार्य सेहो कयल जेबाक जनतब देलनि श्री मिश्र। अपन धर्मपत्नी वन्दना मिश्र जे शान्ति फाउन्डेशन केर संचालिका सेहो थिकीह, कहलनि जे मैथिली-मिथिलाक एहि उपेक्षा सँ देशव्यापी संघर्षक आवश्यकता अछि आर एहि दिशा मे जल्दिये एकटा वृहत् विमर्शक कार्यक्रम करबाक निर्णय कयलहुँ अछि। विश्व समुदाय केँ एहि लज्जास्पद स्थिति सँ आ विद्वत परम्परा केँ धराशायी बनेबाक कुत्सित मानसिकता सँ परिचित करबैत मैथिल जनमानसक आत्मबल सँ सब तरहक निर्माणकार्य स्वयं करबाक सामर्थ्य विकास करब।

चेतना समिति, पटना, अखिल भारतीय मिथिला संघ, दिल्ली, विद्यापति सेवा संस्थान, दरभंगा सहित भारत आ नेपाल मे कार्यरत विभिन्न संघ-संस्थाक प्रमुख केर सहभागिता आ आम जनसहभागिता मे एकटा महापंचायत राखि नागार्जुन आश्रम निर्माणक संग-संग राज्यक उपेक्षाक विरुद्ध संघर्ष केँ आगू बढेबाक दिशा मे आगामी मई महीना मे कार्यक्रम आयोजन कयल जेबाक जनतब दैत श्री मिश्र आम मैथिलजन केँ आगाह करैत कहलनि अछि जे अपन परम्परा, मूल्य आ मान्यता केँ कोनो हाल मे नुकसान नहि पहुँचय ताहि लेल सब कियो एकजूट बनिकय अपन निजत्व स्थापित करय लेल तत्पर बनू।

हरिः हरः!!

पूर्वक लेख
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