मैथिलीक बहुप्रतिभावान विभूति ‘श्यामसुन्दर शशि’ केर जन्मदिन पर प्रवीण शुभकामना

बहुप्रतिभासंपन्न श्याम शशि भाइक जन्मदिन पर प्रवीण शुभकामना

२६ जनवरी २०१९ । विराटनगर । मैथिली जिन्दाबाद!!

 
विदिते अछि जे विद्याधन सँ हम समस्त मिथिलावासी अपन सबलता स्थापित करैत छी, पुनः अपनहि बौद्धिक आ सामाजिक योगदान सँ अपन परिवारक संग-संग राज्य-राष्ट्र-मानवता लेल अपन मानव जीवन केँ साकार आ सिद्ध करैत छी – बिल्कुल तहिना जनकक मिथिलाक एक गोट महत्वपूर्ण सर्जक छथि आदरणीय जेठ भाइजी ‘श्री श्यामसुन्दर शशि’।
 
फेसबुक सँ मित्रता आरम्भ होइत अछि, मैथिली प्रेम सँ आ मिथिलाक पहिचान केँ सबलता देबाक सोशल मीडिया अभियान सँ पहिने एक-दोसर संग जुड़ैत छी। आर फेर ई जुड़ाव यथार्थ धरातल पर उतरैत अछि। जनकपुर मे आयोजित तीन-दिवसीय जनकपुर साहित्य-कला उत्सव २०७३ मे सहभागी बनैत छी, एहि ऐतिहासिक उत्सव मे पहुँचि आयोजकक भूमिका मे श्यामसुन्दर भाइजी, जीवनाथ भाइजी, अशोक दत्त भाइजी, डा. आभास लाभ भाइजी, अनिल कर्ण भाइजी सहित पूर्व-परिचित रमेश रंजन भाइजी, धीरेन्द्र प्रेमर्षि भाइजी आ सुनील मल्लिक भाइजी, प्रेम विदेह ललन भाइ, मनोज मुक्ति भाइ, काशीनाथ झाजी, दिगम्बर झा दिनमणिजी आदि दर्जनों नामी-गिरामी स्रष्टा सभक संग भारत दिश सँ सहभागी एक सँ एक मैथिलीक महापुरूष लोकनि संग भेंटघांट होइत अछि।
 
पटना मे सम्पन्न मैथिली लिटरेचर फेस्टीवल एहि वर्ष शुरुहे मे देखने रही, तदोपरान्त नेपालक मिथिला संसारक केन्द्रविन्दु जनकपुर मे साहित्य आ कलाक ई महान विकसित स्वरूप देखबाक आनन्द अलगे उत्साह दय रहल छल। आर एकर एक मुख्य – महत्वपूर्ण इंजीनियर छलाह ‘श्री श्यामसुन्दर शशि’। हिनकर प्रतिभा एक-आध रहय तऽ लिखलो जा सकैत छल, अनेकों प्रतिभा सँ भरल-पुरल व्यक्तित्व आदरणीय शशि भाइजी नेपाल राष्ट्रक बहुचर्चित आ लोकप्रिय दैनिक समाचारपत्र कान्तिपुर राष्ट्रीय दैनिक मे संचारकर्मीक रूप मे अपन योगदान दैत छथि, राजविराज कैम्पस मे मैथिली विषय केर प्राध्यापक सेहो छथि, मैथिली विकास कोष जनकपुर केर संस्थापक सदस्य एवं कार्यकारिणी पदाधिकारीक रूप मे भाषा-संस्कृति अभियानी सेहो छथि, संगहि भाषा-साहित्यक अतिरिक्त कला, रंगकर्म, संचारकर्म, शिक्षा, समाज आ समग्र मानवताक विकास कोना होयत ताहि दिशा मे एक सँ बढिकय एक अभियानक परिकल्पक, संयोजक, व्यवस्थापक, आयोजक, हरेक भूमिका मे अपन जीवन केँ समर्पित कय केँ लगौने छथि।
 
हिनकर एकटा स्वरूप हमरा दृष्टिपटल पर बेर-बेर नाचि उठैत अछि – जनकपुर साहित्य-कला उत्सव २०७३ केर आयोजन मे सत्र पर सत्र आ बाहर गत्र-गत्र मे गूँथल कला प्रदर्शनी आदिक प्रस्तुति, अतिथि लोकनिक व्यवस्थापन सँ लैत भोजन-जलपान-चाह-पान सभक इन्तजाम मे हिनकर सहभागिता – बाप रे बाप! छट्-छट् करैत सबटा काज केँ निबटाबैत देखि हम त बिसैर गेल रही जे एहिना हमरो कय गोट आयोजन मे अपना आप केँ झोंकय पड़ैत छल… ताहू सँ बेसी भाइजी एकदम पानिक रेत जेकाँ लहलहाइत सब काज केँ, कखनहुँ उपरका सभागार, कखनहुँ नीचाँ भऽ रहल अन्य सत्र, कखनहुँ कला-प्रदर्शनी, पुस्तक प्रदर्शनी त कखनहुँ भोजन-भात त कखनहुँ अतिथि सब केँ ठहराओल गेस्ट हाउस, त कखनहुँ कोर कमिटीक कोर मीटिंग ‘होटल सीता पैलेस’ – ओहोहो! गज्जब ऊर्जा भाइजी! आर ताहू मे सब सँ बेसी महत्वपूर्ण ‘उद्घोषण-संचालन’! उद्घाटन सत्र हो आ कि सत्र परिवर्तन उपरान्त समन्वयक भूमिकाक प्रथम उद्घोषण – हर रूप मे एकटा सक्षम, सुनियंत्रित आ संतुलित संयोजक केर भूमिका देखि मंत्रमुग्ध भेल रही।
 
ठीक तहिना एहि वर्ष २०१८ केर ‘अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन’ जे जनकपुर मे भेल ताहि केर संचालन मे अहाँक प्रस्तुति आ सब कार्यक्रम पर नजरि सँ लैत उपलब्धिमूलक कार्ययोजना – सब किछु प्रभावित करयवला भेल। बहुतो आयोजक लेल ई सीख भेटयवला उदाहरण जेकाँ छल जे सिर्फ भावुकता मे भरिकय भावे बहैक जायब आ मुंह सँ गाज-पोटा निकालैत ई देखायब जे हमरा सँ नम्हर दोसर कियो मैथिली चिन्तक अछिये नहि… ताहि एटीट्युड केँ एकदम दरकिनार करैत सटीक आ सोटल काज करबाक गज्जब नमूना प्रस्तुत कयलहुँ जनकपुर केर एहि आयोजन मे, आलोचना कयनिहार किछु कहथि, लेकिन उपलब्धि हम एकरहि कहब। पैछला वर्ष राजविराज मे सेहो अहाँक सक्रिय सहभागिता मे जाहि तरहें घोषणापत्र मे १३ गोट महत्वपूर्ण बुँदा सहितक मांगपत्र सरकार आ मीडिया मे राखल जा सकल, ई सब यथार्थतः मैथिली लेल उपलब्धिमूलक काज भेल, भऽ रहल यऽ। बाकी त वैह जे आउ, गीत गाउ, गला मिलू, फेर टाडा-बाय-बाय कय चलि जाउ। एहि वर्ष मैथिलीविरोधी सब केँ सन्देश जेबाक हिसाबे आ मैथिलीक सामर्थ्यक प्रदर्शन करबाक हिसाबे पुनः घोषणापत्र आ मांगपत्र देल गेल। जेकर प्रशंसा आ सराहना प्रदेश २ प्रमुख महामहिम रत्नेश्वर लाल कायस्थ सेहो कएने छलाह। ई सब अहाँक प्रखर संचालन आ कुशल नियंत्रण सँ भेल। मैथिली लेल ई सब ऐतिहासिक योगदान थिक, जेकरा आबयवला पीढी जरूर याद करत।
 
अहाँक रग-रग मे क्रान्ति अछि। ओ बात नहि बिसरल जा सकैत अछि जे संचार युग मे अहाँ अपन चतुर अभिव्यक्ति मार्फत देलहुँ, बाजि रहल छलहुँ मैथिली आ प्रश्नकर्त्ता संचारकर्मी मित्र केँ टेलिविजन कार्यक्रम (अन्तर्वार्ता) मे हुनकहि बात केँ उल्टाबैत कहने रहियनि… ओ यौ… ओ जे पूछने छलाह जे फल्लाँ-फल्लाँ त अपन भाषा मैथिलीक बदला मगही कहि रहल अछि… ताहि पर जे अहाँ कहने रहियैक जे ‘हम अहाँ केँ जतेक बात कहलहुँ से अंग्रेजी मे कहलहुँ’, ताहि पर जे संचारकर्मी कहलनि जे ‘एह, अपने त सब बात मैथिली मे कहि रहल छी’, तखन अपने कहलियनि जे ‘यैन न बुझयवला बात छैक। हम जे कहलहुँ से मैथिली रहैक, लेकिन आब हम ई कहि दी जे हम अंग्रेजी मे बजलहुँ, अहाँ मानि जाउ, त अहाँ मानि लेब कि?’ एना फरिच्छ करैत सहकर्मी केँ बुझेबाक अन्दाज देश-विदेश सब तैर चर्चा मे अछि। मलंगिया महोत्सव मे अहाँक ई कथन एकटा सन्दर्भ केर रूप मे कियो वक्ता रखने छलाह।
 
हँ, किछु बात एहनो छैक। अहाँ एकटा प्रतिभावान आ ओजस्वी व्यक्ति रहितो कतहु-कतहु ‘जातीय पहिचान’ केर कारण संघर्ष केलहुँ… ई अनुभव सुनि हमरा लागल जे ई संसार एखनहुँ कतहु-न-कतहु पक्षपात आ जातिवाद केर पोषक अछि। हालांकि अहींक उदाहरण सँ हम ईहो कहय चाहब जे अहाँक प्रतिभा केँ ओहि बड़का जातिक टैग सँ कियो हरा नहि सकल, परेशान भले केलक। कहय नहि छैक, सत्य परेशान हो सकता है मुदा हारता कहियो नञ है… त सय्हवला बात। ई रूढिवादिता केँ हमरा लोकनि तोड़बाक क्रम मे छी। कतहु-कतहु ई रूढिवादिता जरूर हेतैक, छैक। मुदा ताहि लेल हतोत्साहित होइत रण छोड़ि डरपोक कुकूर जेकाँ कैँ-कैँ कय भूकैत रण छोड़ि देनाय हमरा सब लेल कथमपि उचित नहि होयत। अधिकार लेल अपन खुट्टा गाड़हे टा पड़त।
 
विशेष, एहि वर्ष जे आगामी योजना सब अछि तेकर सफलता लेल एहि शुभकामना सन्देश संग शुभेच्छा प्रकट करैत छी। अपने जाहि मे हाथ देबैक, जानकी जी केर कृपा जरूर बरसत। शेष विराटनगर मे सब शुभ अछि, टंगघिच्चीक कारण मैथिली कनेक शिथिल जेकाँ अछि, लेकिन ताहि सब सँ चिन्ताक कोनो बात नहि। सृजनकर्मक धारा अविरल बहि रहल अछि भाइजी! प्रणाम!
 

हरिः हरः!!

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