लघुकथाः कठोर मित्र मोहन

लघुकथा

कठोर मित्र मोहन

फाइनल परीक्षा समाप्त भेलाक तुरन्त बाद ऐगला कक्षाक छात्र सँ पोथी लय मोहन अपन समय उपयोग करैत आगू बढि गेल। जखन कि ओकर संगी सोहन अपन रिजल्ट केर प्रतीक्षा करय लागल। दुनू मित्र मे यैह अन्तर छलैक जे एकटा अपन माय द्वारा दोसरक घर मे सेविकाक काज करबाक पीड़ा बुझय आ दोसर अपन माय-बापक पास रहल अफरात सम्पत्तिक कारण गरीबी आ अभाव सँ पूर्ण अपरिचित छल। मित्रता धरि दुनू मे बहुत छलैक। मोहन अपन गरीब होयबाक कोनो भान कहियो विद्यालयक कोनो छात्र केँ नहि होबय दैक, सोहन मे अमीरी छोड़ि गरीबी सेहो किछु होएत छैक से समझ विकसिते नहि भेल रहैक। ई मित्रता तहिया धरि चललैक जहिया सोहन केँ ई पता लागि गेलैक जे ओकर मम्मी केँ जाँतनिहाइर दोसर कियो नहि बल्कि मोहनक माय थिकैक आर ओ ई बात स्कूल मे अन्य छात्र सभक सोझाँ मोहन केँ पुछैत ओकरा मोन केँ दुःख पहुँचेलकैक। मोहन ताहि दिनक बाद सोहन या अन्य सँ अपन गरीबी नुकेबाक बदला अपन माय केर परिश्रम आ त्याग सँ ओकरा पढेबाक काज केँ आरो सम्मान बढेबाक लेल अपन पढाई मे मेहनति दोब्बर कय लेलक। आब ओकरा सोहन अथवा कोनो मित्र सँ मित्रता मे सेहो समय देबाक जरूरी नहि बुझाइक, ओहो समय ओ अपन पढाई मे खर्च केलक आ समय एला पर मोहन इनकम टैक्स कमिश्नर बनि एक दिन अपन पोस्टिंग वला शहर मे जाहि घर मे छापा मारि कालाधन रखनिहार केँ गिरफ्तार कयलक, दुर्भाग्य सँ ओ सोहन रहैक जे ओकर स्कूल केर वैह बालसखा छलैक। मोहन केँ एहि बातक कनिकबो अफसोस नहि भेलैक जे ओ अपन बालसखा केँ गिरफ्तार कय जेल चलान कयलक, कारण आब ओकरा एतेक ज्ञान भऽ गेल छलैक जे कालाधन रखनिहार कोनो हाल मे दयाक पात्र नहि भऽ सकैत अछि आर ताहि पर सँ एहेन मित्र जे मित्रताक महत्व कम आ मित्रक माय केर गरीबीक मजाक बचपन सँ उड़ेलक, ओकरा पर दयाक कोनो जगहे नहि छलैक।

हरिः हरः!!

पूर्वक लेख
बादक लेख

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