मैथिलीक असल शत्रु के?

विश्व पटल पर गैर मैथिलीभाषी मैथिलीक जतेक समर्थन करैत छथि तेकर दसांशो अपन धरती पर कियैक नहि? आउ ताकी एहि सवालक जबाब!! 
– प्रवीण नारायण चौधरी
अपने ई वेबसाइट देखी –
http://aboutworldlanguages.com/maithili – एतय विश्व भरि मे प्रचलित भाषाक सम्बन्ध मे जानकारी देल गेल अछि। आइरीन थोम्पसन द्वारा मैथिलीक स्टेटस, बाजल जायवला देश-स्थानक नाम, भाषा परिवारक विवरण, वर्ण, ध्वनि, व्याकरण अन्तर्गत शब्द विचारक विवरण संगहि शब्दकोश, लेखन, बुझय-सीखय मे कठिनाई आदिक बेहतरीन आलेख लिखल गेल अछि। तदोपरान्त एहि पेज पर विज्ञजन व अन्य जानकारक खुल्ला विचार सेहो लेखक द्वारा लेल गेल अछि आर तदनुसार समय-समय पर उचित सुधार आदि सेहो कयल गेल अछि। पहिल दुइ विचार मे एक गोटा मैथिलीभाषी राजकुमार झा विदेशी विद्वान लेखकक किछु त्रुटि दिश इशारा कयलनि जेकरा ओ विनम्रता सँ स्वीकार करैत सुधार सेहो कयलनि ई संकेत देने छथि, आभार प्रकट कएने छथि।
 
तहिना, दोसर एक गोटा बंगालीभाषी ‘सौमित्र घोष’ केर प्रतिक्रिया सेहो आयल अछि। हुनकर विचार मे मैथिली आ मिथिलाक्षर केँ सीधा प्राकृत सँ प्राप्त होयबाक कारण संस्कृत सँ सेहो प्राचीन कहल गेल अछि, तर्क देल गेल छैक जे संस्कृत प्राकृत केर संस्कार उपरान्त प्राप्त भाषा थिक। ओ स्पष्टतः स्वीकार कएने छथि जे बंगला मैथिल प्राकृत सँ निकलल अछि। आरो बहुत उच्च मूल्यांकन करैत मैथिली केँ बेसी प्राचीन आ समृद्ध भाषा मानैत अंग्रेजी मे सौमित्रजी जे लिखने छथि ताहि पर गौर करू –
 
“Bangla is a derived form of Maithili prakrit. the tirhuta script is slightly modified into Bangla script or Bangakshar. Elderly people of the Mithila region still use the Tirhuta script. Bengalees & Assamese can all read Tirhuta and Maithili. Maithili is a very rich and old language and maintains the old Maithili Prakrit [ the latter word means that it is found naturally – derived from Prakriti], it is therefore older than Sanskrit- because Sanskrit means that which has been reformed – Sanskar] Nagari script is now imposed on Maithili and the civil society of Mithila does not seem to be sensitive or reactive on that issue- this is sad. Efforts of reviving Maithili in Tirhuta script has still not acquired the critical mass to make a telling movement!”
 
लेकिन एतहि एकटा तेसर कमेन्ट देखय लेल भेटत जे कियो मधुबनीवासी थिकाह हुनकहि शब्द मे आर मैथिली केँ भाषा मानय तक सँ ओ छीह काटि रहल छथि, ओ हिन्दीक ओकालति करैत छथि कारण हिन्दी सँ ‘युनिटी’ होइत हुनका बुझाइत छन्हि, मैथिली सँ भारतीय जनमानस मे विभाजनक बौद्धिक तर्क ओ रखैत छथि। एवम् प्रकारेन हिनका नितीन चन्द्रा नामक व्यक्ति आँखि खोलैत सुन्दर जबाब दैत छथिनः
 
“This is a common misconception among Biharis and UP guys where they say and think that “hindi” will bring unity in country. These people fail to understand that unity comes from respecting each other’s diversity and having self respect for one’s own identity. Hindi is a common language but Tamil, Telugu, Kannada, Punjabi, Gujrati, Maithili, Bhojpuri, Bangla are mother tongues of millions in India. Imposing one language on all will not only kill the diversity but will also bring insurgency in India. Giving importance is subjective. Maithili needs importance among its own people but when a Maithil talks with a non maithil, the language can be either hindi or english. Language doesnt bring unity, but hearts of people do.”
 
आर ई क्रम चलैत रहैत छैक। मूल लेखक आइरीन थौम्पसन हिनका लोकनि संग सहकार्य करैत रहैत छथि। कतेको लोक चिन्ता करैत छथि जे मिथिलाक लोक अपनहि सँ अपन बच्चा केँ ई भाषा नहि सीखबैत अन्य भाषा सीखय लेल बाध्य करैत छथि। आदि।
 
हरिः हरः!!
पूर्वक लेख
बादक लेख

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

3 + 5 =