ओर्कुट-फेसबुक सँ जानकीभाव प्राप्ति तक

जानकीभाव – Janaki-Consciousness
 
हमर फेसबुक केर यात्रा आ जानकीभावक अनुभूति
– प्रवीण नारायण चौधरी, विराटनगर
 
फेसबुक पर लेखन सँ हमरा लाखों पाठक भेटल, ई हमर असल आमदनी थिक। आइ करीब ९ वर्षक कालक्रम मे फेसबुक एतेक रास उपलब्धि देलक जेकरा लेल हम कृतज्ञता ज्ञापन करैत छी। एहि सँ पहिने ‘ओर्कुट’ पर सक्रिय रही। हमरा समान लम्बा-लम्बा लेख-विचार आदि लिखनिहार लेल ओर्कुट बड पैघ उपयोगी छल। ‘धर्म-मार्ग’ केर स्थापना २००७ ई. मे कएने रही आर आध्यात्मिक विमर्श हमर मुख्य रुचिक विषय छल। गीता, रामायण, महाभारत, श्रीमद्भागवतकथा, स्कन्दपुराण, नारदपुराण, कुरान, बाइबल, वेदान्त आदि अनेकों विषय पर बहुत योग्य विचारक, भक्त, दार्शनिक, विद्वान् आदिक पोस्ट सब पढबाक लेल त भेटिते छल; अपनो जे किछु स्वाध्याय करी से लिखल करी। ताहि दिन अपना बुझाइत छल जे कम्युनिकेशन केर एक्के टा मान्य भाषा छैक ‘अंग्रेजी’। बातो सही छैक। अंग्रेजी मे लिखबाक कारण विश्व भरिक लेखक-विचारक सभ संग एकटा सुन्दर मित्रता विकसित भेल छल। ‘टेस्टीमोनियल्स’ सेहो विश्व केर विभिन्न कोण मे रहनिहार लोक सभ सँ भेटब हमरा लेल बड पैघ उपलब्धि छल। अफसोस जे आब ओ ओर्कुट केर बैक-अप सेहो नहि शेष अछि, सिर्फ शेष अछि स्मृति।
 
२००९ केर अन्त या २०१० केर आरम्भ सँ बेस झुकाव फेसबुक दिश भेल। लेकिन काज आयल सबटा ‘ओर्कुट’ केर सोशल मीडिया मैनेजमेन्ट क्वालिटी। गज्जब तखन लागल जखन अपन मिथिलाक लोकक संख्या फेसबुक पर बेसी देखलहुँ आर अंग्रेजी सँ सीधे मैथिली लेखन लेल अवसर जुड़य लागल। दुनिया भरिक ३०० महत्वपूर्ण संगतिया सँ आब मिथिलाक ३ करोड़ लोक हमरा बेसी महत्वपूर्ण लागल लगलाह। २०१० आ २०११ केर विराटनगर मे ‘विद्यापति स्मृति पर्व समारोह’ केर आयोजन मानू मैथिलीक दिवाना बना देलक। ई अनुभूति दय देलक जे हमर जन्म अपन माता-पिता-परिजन जेकाँ मिथिला लेल पहिने भेल अछि। संसार मे सेहो दूर धरि जायब, लेकिन विपन्न मिथिला रहैत संसारक दूरी नापब सिर्फ मृगमरीचिका जेकाँ प्यास मिझेबाक प्रयास टा होयत। आर, तेकर बाद आरम्भ होइत अछि ‘जानकीतत्त्व’ केर आत्मसात करब – यानि ‘जानकीभाव’ केँ प्राप्त करब। जहिना धर्म-मार्ग पर व्याख्यान पढैत काल ‘राधाभाव’ पर पढने रही ठीक तहिना आब हमरा जानकीभाव केर अनुभव व्यवहारिक तौर पर होयब शुरू भऽ गेल। Janaki-Consciousness!! 🙂 जानकीभाव!! आर ई सच्चाई छैक जे एहि भाव केँ प्राप्त कयला उत्तर जीवन केँ एक नव मार्ग भेटल। करीब ८ वर्ष मे मैथिली-मिथिला लेल समय, साधन, समर्थन, समर्पण, संकल्प सब किछु समर्पित कयलहुँ। अपना केँ बड़भागी मानैत छी। मिथिला मे जन्म भेटब यैह टा सार्थक बुझैत छी।
 
२०१८ ई. केर अन्त मे सहरसा जिलाक आयोजन ‘मिथिला कला साहित्य आ फिल्म महोत्सव’ मे सहभागिता उपरान्त १ दिन बड़ा उपयोगी भेल। भोरे सहरसा सँ ‘विद्यापतिधाम’ लेल निकललहुँ। ओतय जेठ भ्राता रमेश रंजन झा एवं डा. आभास लाभ संग रहथि, संग रहथि मैथिलीक एक वरिष्ठ सर्जक कोलकाता सँ विनय भूषण ठाकुर। सब गोटे विद्यापतिधाम पहुँचि महाकविक संग मिथिलाक अनेकों लोकपुरूष सभक दर्शन कयल, पराम्बा जानकीक ओ धनुर्धारी विशालकाय मूर्ति केर दर्शन कयल, फोटो खींचायल आर जमीनदाता दानी देवनाथ यादवजीक आग्रह पर चुरा-दही-चीनी, चुरा-दूध-चीनी केर सुन्दर-पवित्र जलखय ग्रहण कयल। ता धरि एहि महान् कीर्तिक कीर्तिपुरूष श्री भोगेन्द्र शर्मा निर्मल सेहो आबि गेल छलाह। सब कियो हुनका सँ गला मिलैत हृदय सँ संत केँ अपन जीवन तथा समस्त मिथिला लेल आरो महान-महान कीर्ति करबाक शुभकामना देल। पुनः ओतय सँ विदाह होइत एकदम गमकैत गहुँमक खेतक हरियरी सब देखैत, मिथिलाक पोखरि-झाँखरि, कलम-गाछी सभक आनन्द लैत बिहरा बाजार पहुँचि ओतहि विनय बाबू केँ हुनक गाम जेबाक वास्ते ड्रौप कय पुनः अपन फेवरेट तीर्थस्थल ‘देवना बाणेश्वर महादेव’ केर दर्शन लेल बनगाँव दिश घुरलहुँ। ओतय सुमन समाज भाइजी केर संयोजन-सहयोग मे भव्य स्वागत आ सत्कार त भेटबे कयल, सोमवारीक विशेष अर्पित बाबाक प्रसाद अर्थात् भांग (विजया) दुइ गिलास चढाओल। झमैककय कीर्तन सेहो पहिनहि कय लेने रही। आब विदाह होयबाक लेल बढले रही कि मुखियाजी अपनहि सँ आबि ‘बाणेश्वरबाबाक अतिथि’ कहि एतय सँ बिना किछु ग्रहण कएने कोना जाय देब कहैत बगलहि केर दोकान मे मुरही आ कचरी एक नम्बर करुआ तेल, गामक मेरचाय, मुरइ आदिक संग धनियां पत्ता आदि मिलाकय भुज्जा बनाकय खुऔलनि। आर तेकर चाह, फेर ओ देशी पत्ता मिथिला पान….! ४७ वर्षक अवस्था मे पहिल बेर ३१ दिसम्बर एतेक भव्यताक संग मना रहल छलहुँ…. कइएक बेर विदाह होइ आ फेर कोना-न-कोना रुकि जाय! 😉 एक गोटा कहबो केलाह जे ‘श्रीमान्! अपने करीब २ घंटा सँ जेबाक लेल चाहि रहल छी मुदा गेल पार नहि लागल अछि। यैह बाबा बाणेश्वर केर महिमा छन्हि। एतय लोक एक बेर आबि जाइत अछि तऽ फेर बाबा जखन आदेश देथिन तखनहि टा जा सकैत अछि। अहाँ केँ एखन धरि आदेश नहि देलनि अछि।’ जबरदस्त ठहक्का लागल। खुलिकय हँसनाय स्वास्थ्यक लेल बड दीव होइत छैक। से भेल। मोन दुरुस्त भऽ गेल।
 
लोभी मोन आध्यात्मिक प्रसाद ग्रहण करय लेल रमेश रंजन भाइजीक इच्छा केँ पूरा करय लेल फेर उग्रतारा जेबाक लेल उद्यत भेल। सुमन समाज भाइजी जेहेन प्रेमी भैयारी, मुंह सँ पूरा निकलल नहि ताहि सँ पहिने तैयार। बाबाक पूजा-पाठ हम त जाइत देरी कय लेने रही, मुदा सुमन समाज भाइजी स्वागत-सत्कार मे तेना लागि गेल छलाह जे ओ एखन धरि पूजा-पाठ तक नहि कएने रहथि आ ताहू अवस्था मे जीप मे बैसि फेर उग्रतारा स्थान महिषी जाय, ओतय दर्शन केलाक बाद डा. तारानन्द वियोगी सर केर घर पर पहुँचि सौंझका चाह पियल, खूब गप-सरक्का चलल ओतहु। कुन्दन भाइ सेहो आबि गेल छलाह। पुनः ओतय सँ वापसी मे बाबाजीक कुटी पर आबि लक्ष्मीनाथ गोसाईं बाबाजी केर दर्शन आ चरणामृत ग्रहण कयलहुँ। ओतुका कलाकन्द केर त मिठास २ दिन पहिनहुँ कारू खिरहर सँ लौटैत समय लेने रही, से पुनरावृत्ति कयलहुँ। आ तेकर बाद बीच बनगाँव मे दुर्गा माताक सुन्दर प्रतिमाक दर्शन करैत बाहर ग्रामीण लोकनि संग किछु क्षण व्यतीत कय पुनः देवना महादेव मन्दिर केर नजदीक सुमन भाइ केँ ड्रौप करैत सीधा विराटनगर लेल निकैल गेलहुँ।
 
एहि एक-दिना भ्रमण मे जाहि तरहें अपन मिथिला समाजक बच्चा सँ बुढ धरिक अपन लोक स्नेह आ आशीर्वाद देलनि ई सिद्ध केलक जे ‘जानकीभाव’ केर प्राप्ति सँ इहलोक-परलोक सब आनन्दे-आनन्द रहत। मिथिला प्रति सेवाभाव केँ ग्रहण करनाय हमरा लेल कतेक पैघ वरदायक भेल अछि जेकरा शब्द मे ठीक सँ रखबाक सामर्थ्य अपना मे नहि देखैत छी। तखन तऽ अपन मोनक भाव अपनहि लिखय पड़त, एहि पर त कोनो साहित्यकार केर कलम चलत नहि… आर लिखि अहु लेल रहल छी जे हमरा अपनहि समान लाखों पाठक बुझाइत छथि। ओहो लोकनि ई ‘जानकीभाव’ केँ ग्रहण करथि। मिथिला केँ संविधान मे सम्मानित करथि। संविधान मे एखन धरि मैथिली टा पहुँचि सकल अछि। सेहो कतेक संघर्ष केलाक बाद… से सब बुझथि। मिथिला केँ संविधान मे सम्मानित ढंग सँ स्थापित करबाक खगता अछि। विशेष फेर बाद मे।
 
हरिः हरः!!
पूर्वक लेख
बादक लेख

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