काशीकान्त मिश्र ‘मधुप’ जी केर पुण्यतिथि पर डा. रमण संस्मरण

पटना, २० दिसम्बर २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!!

मोन पड़ै छथि कविचूडामणि मधुप (०२.१०.१९०६ – २०.१२.१९८९)

“पुष्पित पुञ्जक पुञ्ज कुसुम सँ,
मण्डित निभृत निकुञ्जक माझ,
गुञ्जित-मधुकर-निकर बनौने-
छल जै ठाँ दिन रहितहुँ साँझ।
नयनक आधाहुक आधासँ
राधा! बाधा देखह आबि,
तै निकेत सँ वंशीसँ
संकेत करथि मोहन खन गाबि।

– राधाविरह

‘राधाविरह’ महाकाव्य पर साहित्य अकादेमीक पुरस्कारक घोषणा (दिसम्बर, १९७० ई.)क पूर्वहि ‘राधाविरह मे सौन्दर्य चेतना’ विषयक हमर एक लेख मिथिला-मिहिर मे प्रकाशित भेल छल। ओही सन्दर्भमे मधुप जीक ई पत्र अछि।

पुण्य-तिथिक अवसरपर अश्रुपूरित श्रद्धांजलि!

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One Response to काशीकान्त मिश्र ‘मधुप’ जी केर पुण्यतिथि पर डा. रमण संस्मरण

  1. #मधुप__पुण्यतिथि

    हे कविचूड़ामणि !
    हे मैथिलीक मादक ‘मधुप’ !
    कोल्हिसद्दू कलमी कृष्णभोग
    करचिक कमचीसँ कतरि-कतरि
    कलमक मचानपर कोनो कावेरी
    कतहु कहाँ देखा रहल छथि,
    कलमक मचान सेहो निपत्ता अछि।
    कलबलकें भोरे-भोर कोनो कोमलांगी
    ने औंघाइत छथि ने
    ‘चौंकि चुप्पे’ रहैत छथि।
    ‘अपूर्व रसगुल्ला’ हल्दीरामक
    डिब्बामे रहैत अछि,
    बिदेसर-कुसेसरक ‘टटका जिलेबी’
    मिलावटी तेल-मेदा सँ बोरल अछि।
    ‘शतदल’क ‘झांकार’
    आब डीजेक कर्णकुहुर कलहाक्रांत
    ध्वनिक तsर मे विलीन अछि।
    ‘त्रिवेणी’मे सेहो सत्ताक ‘ताण्डव’ व्याप्त अछि।
    ‘राधा विरह’क अग्निकुण्ड मे निरंतर
    रहबा लेल बाध्य छथि।
    ‘द्वादशी’ ओ ‘विदागीत’ आउटडेटेड भए गेल अछि।
    ‘मुक्त मधुप’ आब उन्मुक्त मनुक्खेमे समाएल अछि।
    हे ‘प्रेरणा पुञ्ज’ !
    हे विप्रलंभ श्रृंगारक अभिनव भवभूति !
    हे अर्थगौरवक भारवि !
    हे अलंकार संघटनक गोविन्ददास !
    हे छंद वैविध्यताक जनक !
    हे भावप्रवणता आ पांडित्यक प्रतिमूर्ति !
    हे अलौकिक वर्णन चमत्कारक चित्रकार !
    म्रियमाण मैथिलीक श्रद्धांजलि हो स्वीकार !

    ईशनाथ झा
    20-12-18

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