बेटीक सुख लेल दुर्जन आ लोभी परिवार सँ सावधानी आवश्यक: सत्यकथाक समीपक नैतिक कथा

सरकारी नौकरी वला दूल्हा संग बेटीक विवाह
 
(मैथिली कथा)
 
(लेखकक नोट: बड अफसोसक संग लिखि रहल छी। फेर नाम लय सँ बचब – मुदा ई आखिर बेर थिक। एकर बाद नामो लेब आ परिवारक सारा खिस्सा आ पृष्ठभूमि अहाँ सब धरि आनब। कारण एकटा बेटी त शूली पर चढिये गेल अछि, आरो केकरो बेटी फेर ओहेन शूली पर नहि चढय ताहि लेल किछु बात कथाक रूप मे कहि रहल छी। एहि कथाक सब पात्र काल्पनिक अछि, आ जँ किनको सँ मिलितो अछि त बस संयोग टा बुझब।)
 
एक मध्यमवर्गीय परिवार अपन खूब नीक पढल-लिखल बेटी केर सुखक वास्ते ‘सरकारी नौकरी वला दूल्हा’ करबाक नियार बनौने रहथि। ई लोकनि भारतक एक समृद्ध राज्य मे रोजी-रोटी कमाइथ, गाम आयब-जायब त होइत छल परञ्च गामक लोक सभ संग बहुत बेसी सम्पर्क मे नहि रहि पबैत छलाह। अपन कुटुम्ब मार्फत एक-दोसरा केँ कहैत – सुनैत – भजियबैत आखिर एक गोट सरकारी नौकरी वला दूल्हा केर परिचय भेटि गेलनि। विवाहक बात शुरू भेल। मांग सब सेहो सुनाओल गेलनि। मध्यस्थकर्ता संयोग सँ दुनू परिवारक संयुक्त कुटुम्बजन छलखिन। जल्दिये मामिला पटि गेल।
 
दान-दहेज लय जखन लड़कीक पिता लड़काक घर पर पहुँचलाह आ ताहि मे किछु सोना सेहो देलखिन्ह, कि लड़काक जेठ भाइ ओ सोना लय तुरन्त सोनार ओतय जेबाक इच्छा जतौलनि। ओ कहलखिन जे आइ-काल्हि जे व्यवहार करी से ठोकले-बजेले करी। कि गारन्टी, अहाँ लोकनि केँ जे ई देने हेताह ओ कतेक असली लोक हेताह…! एतेक कहैत ओ सोना लय सीधे अपन विश्वासपात्र सोनार ओतय गेलाह आ ओकरा सँ कहलखिन जे एकरा ढंग सँ चेक करे। सोनारो पूरा गला-तला आ ठोकि-बजा हिनका जखन आश्वस्त केलकनि तेकर बाद ओ घर पर आबिकय कुटुम्बक देलहा चीज केँ स्वीकार कयलनि आर फेर भेल छल आगाँक रस्म-रेबाज। सुनबा मे अबैत अछि जे ता धरि कुटुम्ब सब केँ कोनो खास स्वागतो-सत्कार तक नहि कयल गेल छलन्हि।
 
कथारूप मे कहि रहल छी, ताहि सँ नैरेटिव कनेक मसालेदार होयब स्वाभाविक अछि। 🙂
 
खैर, आब दहेजक मांगवला आना-पाइ चुकेलाक बाद एकटा अधेड़ उमेर केर वर सँ एक बहुत कम उमेर केर कन्याक विवाह सरकारी नौकरी वला दूल्हाक लालच मे, एना कहू न ‘लड़कीक माय’ केर जिद्द मे लड़कीक पिता ताकिकय अनने छलाह, तिनका संग विवाह तय भेल। विवाह भऽ गेल। दहेज मे देल गेलनि नगद पाय, गहना आ एकटा चारि-चक्का गाड़ी। मुदा विवाहक किछुए दिनक बाद ओ दूल्हा अपन भाउज संग आपत्तिजनक स्थिति मे देखा गेलखिन ओहि नवकन्या केँ। ओ नवकन्या केँ ई बात बड बेजा लगलैक। ओ तुरन्त एहि लेल अपन पति सँ कहलकनि जे हमरा मे कि कमी अछि जे अहाँ अपन भाउज संग एना… एहि स्थिति मे….? ओकर बात कटैत सरकारी नौकरी वला दूल्हा बजलाह, “चुप रहू! अहाँ केँ बाजैत कनिको लाज नहि होइत अछि? ओ हमर माय जेकाँ छथि। ओ भाउज कम माय बेसी छथि, हुनका लग हम बच्चा सँ अहिना रहल छी।”
 
बस, ई बात ओत्तहि खत्म भऽ गेलैक। मुदा बिगड़ल आदति कहुँ सुधरय छैक लोकक…? ई प्रकरण फेरो दोहरेलैक आ फेरो दुनू गोटा मे एहि विषय पर विवाद। फेर वैह जबाब। आर एहि तरहें पति-पत्नीक संबंध मे पड़ि गेल दरार। एकर नहि भऽ सकल सम्हार। पति करय लगलखिन मारिपीट, गारि-फझेत। कहियो नैहर पठबथिन, कहियो गाम धऽ अबथिन। कहियो आरे किछु बहन्ना… सब दिन शंका-उपशंका मे दुनू गोटाक जीवन भऽ गेल घोर विवादित। एहि मे बीच-बचाउ लेल जे उतरलाह ओहो सब दु पक्ष, कियो कन्याक पक्ष, कियो वरक पक्ष, द्वंद्व बढिते चलि गेल। नवकी कनियाँ ओहि सरकारी नौकरी वला दूल्हाक एक बेटी केँ सेहो जन्म देलखिन आ तेकर बाद सऽ त ओ आरो हुनकर नजरि सँ गिर गेलीह। नैहरा सऽ बिदागरियो तक कराबय लेल नहि जाइथ। ओम्हर सऽ कनियाँ फोन करथिन जे अहाँ हमरा लय लेल कियैक नहि अबैत छी… त बस कोनो न कोनो बहन्ने टाल-मटोल। होइत-होइत ओ कनियाँ कहलखिन जे टिकटे पठा दिअ, हम अपने चलि आयब। टिकट पठेलखिन, ओ एली आ फेर लत्तम-जुत्तम शुरू। कहियो एहि लेल त कहियो ओहि लेल….! आब कनियाँ सेहो पाकि गेल छलीह, ईहो अपन ओहि सरकारी नौकरी वला दूल्हा केँ गत्र-गत्र केँ अपन नहक अस्त्र सँ नरसिंहदेव जेकाँ फाड़य-चीड़य लगलीह।
 
दूल्हा पड़ि गेलाह कमजोर। तखन ओ अपन आन-आन दाँव-पेंच सब भाँजिकय ओहि कनियाँ सँ निजात कोना भेटत तेकर वियौंत मे लागि गेलाह। बेटी ता धरि साल टपि गेलनि। सरकारी नौकरी सँ कमायल पाय सँ अपन आफिस केर चमचा-बेलचा आ थाना-पुलिस, कोर्ट-सोर्ट सबटा मैनेज करैत ओ अफसियाँत छथि जे कोहुना एहि कनियाँ सँ निजात भेटि जाय। कय गो केस कनियाँ द्वारा वर आ हुनक परिवार पर आ वर द्वारा कनियाँ व हुनक परिवार पर…. ताहि बीच मे सेहो कियो पड़ल त ओहो लपेटा मे अबैत गेल, क्रमश: केस-केस केर खेल मे दुनू गोटे आ परिवार लपटाइत चलि गेल। समाजक लोक केँ कोनो मैनता नहि। कन्यापक्ष जँ समाजक लोक संग ओहि वरपक्षक सोझाँ जेबो करैत छथि तऽ हुनका दस हजार बात-कथा कहिकय अन्त मे परतारिकय कहल जाइत छन्हि जे किछु समय लेल बेटी केँ अपना संग लय जाउ, बाद मे जँ सही भऽ जेती त आनि लेबनि।
 
कन्यापक्षक लोक एहि लेल राजी नहि होइत छथि। आ ढुइसबाजी चरम पर पहुँचल रहैत अछि। बात दिन-ब-दिन घिनाइत रहैत अछि। ओ कनियाँ केँ जब्बर सिद्ध करय मे लागल रहैत छथि, कनियाँ हुनका पर प्रताड़णाक आरोप लगबैत रहैत छथिन। हाल एतेक तक चलि गेल जे आब वर आ कनियाँ गोटेक छह मास सँ आपस सामंजस्य तक बिगाड़ि लेलनि। वर एतेक मारि मारलखिन जे कनियाँ केँ मजबूरिये थाना-पुलिस करय पड़लनि। वर केँ पकड़िकय एक दिन रखबो केलकनि हाजत मे। फेर कोना न कोना ओ अपन कैदमुक्त भऽ तहिआ सँ घर मे नहि अबैत छथि। अपन पोसल चमचा-बेलचाक संग राति बितबैत छथि, दिन मे सरकारी नौकरी वला ड्युटी करैत छथि। कनियाँ जाइत छथिन मनाबय लेल तऽ ड्युटी वला जगह मे सेहो ओकरा बात-कथा कहिकय भगा दैत छथिन। लोक सब बीच मे किछु बजैत अछि त ओकरो पर केस करबाक धमकी दैत छथिन। दुनूक जीवन एहि मझधार मे चलि रहल अछि। बीच-बीच मे कोनो न कोनो नोंकझोंक होइते रहैत छन्हि। थाना-पुलिस एतेक भेल जे आब पुलिस सेहो आजिज भऽ गेल अछि। समाजक लोक केर त कोनो मैनते नहि छैक, ताहि मे वरपक्ष साफ दोषी देखल जाइत छथि। ओ बैसहो तक लेल तैयार नहि छथिन। तखन के सुलझेतनि ई ‘सैँ-बौह केर झगड़ा’! कहबी छैक न, “सैँ-बौह केर झगड़ा, पंच भेल लबड़ा!”
 
फेमिली कोर्ट मे केस चलि रहलैक अछि। ईश्वर दुनू केँ मति-गति देतनि तखनहि सुलह भऽ सकैत अछि, ई निर्णय करय लेल बाध्य भेल छी। सरकारी नौकरी वला दूल्हा सँ नीक जे बेटीक ब्याह कोनो गरीब परिवार मे करू, मुदा सज्जन संग करू! जे अहाँक देल सोन – निर्जीव केँ सोनार सँ जँचेलाक बाद अहाँ पर विश्वास केलक, ओ परिवार आखिर अहाँक बेटी पर कोना विश्वास करत… ई सोचय योग्य विषय छैक। लेकिन अहाँ लेल त आब ई सब समय बीति गेल। ई आर बेटीवला लेल कहल। अहाँ लेल एतेक कहल जे कनेक सब्र राखि ईश्वर पर किछु समय आरो छोड़ि एहि दुर्जन परिवार केँ अपन हाल पर छोड़ि बच्चा आ माय केँ सुरक्षित कतहु राखू आ ओकरा स्वाबलम्बी बनाउ। कनेक समय वेट एण्ड वाच केर स्थिति मे रहू! बस! एखन हम कथाक अन्त नहि इन्टरवल चाहि रहल छी। फेर अबैत छी।
 
क्रमश:…..
 
हरि: हर:!!
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